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रायपुर / शौर्यपथ / आज लोकेश और राहुल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अनुकंपा नियुक्ति मिलने की खुशी के साथ घर की जिम्मेदारी निभाने में भी सक्षम हो गया है। घर-परिवार में त्यौहार जैसा माहौल लग रहा है। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाईयां दे रहे है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशीलता से आमजनों के हित में त्वरित कार्य करने के निर्देश जिले के सभी कलेक्टरों को दिया गया है। इसी कड़ी में लोकेश और राहुल को भी अनुकंपा नियुक्ति मिली है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलावा आया है। गरियाबंद जिले की श्री राहुल, श्री लोकश कुमार को अनुकम्पा नियुक्ति मिल गई है। गरियाबंद कलेक्टर श्री दीपक अग्रवाल के हाथों अनुकंपा नियुक्ति पत्र मिला है।
छत्तीसगढ़ शासन के प्रावधानों के तहत मुख्यमंत्री श्री साय अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के निर्देश दिये हैं। इसी के तहत अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के द्वारा अनुकंपा नियुक्ति मिलने से आज दोनों युवकों ने खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन का आभार जताया। श्री राहुल एवं श्री लोकेश कुमार को भृत्य पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। अनुकंपा नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने कहा कि राज्य शासन की नीति के तहत त्वरित पहल से नौकरी मिल गई है। जिससे आर्थिक समस्याओं को दूर करने एवं परिवार के पालन पोषण में सहायक होगी।
उल्लेखनीय है कि अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले गरियाबंद जिले देवभोग अंतर्गत ग्राम सुपेबेड़ा के निवासी श्री राहुल कुमार क्षेत्रपाल ने बताया कि उनके पिताजी स्वर्गीय श्री तुकाराम सहायक शिक्षक के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला ठिरर्लीगुड़ा में पदस्थ थे, निधन 06 अक्टूबर 2022 को हुआ। निधन के बाद उनके पुत्र श्री राहुल कुमार क्षेत्रपाल को भृत्य पद के रूप में शासकीय माध्यमिक शाला झाखरपारा में नियुक्ति मिली है। उन्होंने बताया कि अनुकंपा नियुक्ति मिलने से परिवार के पालन पोषण एवं देखरेख में सहायता मिलेगी। साथ ही भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसी प्रकार ग्राम दीवानमुड़ा के रहने वाले श्री लोकेश कुमार शांडिल्य के पिताजी स्वर्गीय श्री डोंगर सिंह शांडिल्य प्रधानपाठक के रूप में शासकीय माध्यमिक शाला दीवानमुड़ा में पदस्थ थे। निधन 30 जनवरी 2024 हो हुआ। निधन के पश्चात श्री लोकेश कुमार शांडिल्य को भृत्य के रूप में शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल झाखरपारा में अनुकंपा नियुक्ति मिली है। उन्होंने बताया कि पिता के जाने के बाद भविष्य चिंतित था। शासन की पहल से अनुकंपा नियुक्ति मिलने से परिवार के खुशहाली में मदद होगी।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 13 जुलाई को श्री रामलला का दर्शन करने अयोध्या धाम जाएंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 13 जुलाई शनिवार को प्रातः 9.30 बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से प्रस्थान कर पूर्वान्ह 11 बजे महर्षि वाल्मिकी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अयोध्या धाम पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री पूर्वान्ह 11.15 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम में श्री रामलला का दर्शन और मंदिर भ्रमण करेंगे। मुख्यमंत्री शाम 5.15 बजे अयोध्या धाम एयरपोर्ट से प्रस्थान कर संध्या 6.45 बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर लौट आएंगे।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की महिलाओं में महतारी वंदन योजना को लेकर अपार उत्साह देखा जा रहा है। खास कर गरीब, मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं को इस योजना से मिलने वाली राशि से काफी राहत मिली है। महिलाओं का कहना है कि इस योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ गया है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का ही प्रतिफल है कि उन्हें समय पर महतारी वंदन योजना की राशि माह दर माह मिल रही है। महतारी वंदन योजना में इस माह 5वीं किश्त के रूप में एक-एक हजार रूपए की राशि मिली है। राशि के उपयोग से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह राशि महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंच रही है। महिलाओं के खाते में राशि आने से परिवार में भी उनकी पूछ परख बढ़ गई है।
धमतरी के कलेक्टोरेट परिसर में कैंटिन का संचालन करने वाली सहेली संघ स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हेमा साहू ने बताया कि महतारी वंदन योजना से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा अब नियमित रूप से आर्थिक गतिविधियों के लिए अपना योगदान दे पा रही हैं।
श्रीमती हेमा ने यह भी कहा कि महतारी वंदन योजना से मिल रही राशि से महिलाएं अपने बच्चों के लिए आवश्यकतानुसार बेहतर प्रबंध कर पा रही हैं। महिलाएं निजी जरूरतों, घरेलू आवश्यकताओं व दैनिक उपयोग की चीजों की खरीदी एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम हुई है। साथ ही भविष्य के लिए बचत भी कर रही है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
राज्य में छात्र-छात्राओं को पहली बार हायर सेकेण्डरी के साथ आईटीआई ट्रेड का मिला प्रमाण पत्र
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर हायर सेकेण्डरी के साथ शुरू किया गया है आईटीआई
मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को हायर सेकेण्डरी सह आईटीआई ट्रेड प्रमाण पत्र किए वितरित
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षक भर्ती के व्याख्याताओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की तर्ज पर भारत सरकार 12वीं के साथ आईटीआई कराने पर विचार कर रही और हमने हायर सेकेण्डरी पास करने वाले छात्र-छात्राओं को आईटीआई प्रमाण पत्र भी वितरित कर दिए हैं। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक भर्ती - 2023 के अंतर्गत व्याख्याताओं को नियुक्ति पत्र एवं 292 छात्र-छात्राओं को हायर सेकेंडरी सह आई.टी.आई. ट्रेड प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए कही।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज रोजगार के क्षेत्र में आईटीआई पास युवाओं की बहुत आवश्यकता है। ऐसे विद्यार्थी जो आईटीआई करना चाहते थे उन्हें हायर सेकेंडरी पास करने के बाद एक साल आईटीआई की ट्रेनिंग करना पड़ता है, इससे समय बहुत लगता है लेकिन आज 12वीं पास करते ही छात्र-छात्राओं के पास एक सर्टिफिकेट होगा, जो आपको चयनित ट्रेड का एक्सपर्ट बना देगा। इस डिग्री से आप जॉब भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि सबके अपने सपने होते हैं, उन सपनों को साकार करने में माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान है, खुद की मेहनत उससे भी महत्वपूर्ण है, लेकिन थोड़ा सा सहयोग सरकार की ओर से भी है। आप अपने सपने साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सके इसलिए एक प्रयास छत्तीसगढ़ सरकार ने किया और आज उसे भारत सरकार भी अपनाने के लिए आतुर है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा 12वीं के साथ आईटीआई का प्रमाण पत्र मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने नियुक्त व्याख्याताओं और हायर सेकेंडरी के साथ-साथ आई.टी.आई. ट्रेड प्रमाण प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हम लगातार कार्य कर रहे हैं, हमारी सरकार ने लगभग 27 हजार शिक्षकों की भर्ती की है। नियुक्ति पत्र प्रदान करने की शुरुआत आज हुई है अब यह क्रम लगातार चलता रहेगा। जो कल तक बेरोजगार थे आज उन्हें रोजगार मिल गया है। उन्होंने नव नियुक्त व्याख्याताओं से कहा कि आज से आपका संकल्प होना चाहिए कि छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ऊंचाई में ले जाना है। जहां भी आपकी ड्यूटी लगे पूरे मनोयोग से बच्चों को पढ़ाएं, उन्हें योग्य बनाएं। गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का संकल्प हम आपके माध्यम से हम पूरा करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा सुलभ उपलब्ध हो सके इसलिए हमने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूलों की शुरुआत की है। आज हमारे प्रदेश में 727 स्वामी आत्मानंद स्कूलों में साढ़े चार लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। मुझे यह बताते हुए ख़ुशी होती है कि हमारी सबसे अच्छी योजनाओं में से एक योजना स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूल योजना है। इन स्कूलों से जब बच्चे पढ़कर निकलेंगे, तब हम सब गौरवान्वित महसूस करेंगे। इसी प्रकार से 10वीं और 12वीं में पढ़ रहे बच्चों के लिए हमने आईटीआई का कोर्स करना शुरू किया, इसका परिणाम है कि आज 12वीं पास होते ही उनके हाथ में दो सर्टिफिकेट है, एक 12वीं का और दूसरा आईटीआई का।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि मुझे खुशी है कि भारत सरकार जो अभी सोच रही है, उसे करने में हम 2 साल आगे हैं। आज आईटीआई पास बच्चे जितने खुश हैं, उतनी ही खुशी हमारे ट्रेनर के चेहरों में भी दिखाई पड़ रही है, ट्रेनर्स आज तक केवल आईटीआई पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाते थे, लेकिन आज वह नए तरीके से ट्रेनिंग दे रहे हैं। इस कोर्स को हमने 2 साल में बांटा है, पहला साल जिसमें अच्छी तरह थ्योरी की पढ़ाई हो सके, तो दूसरा साल प्रैक्टिकल। दोनों अलग-अलग काम है और जरुरी भी। स्कूल के विद्यार्थियों को हायर सेकेंडरी के साथ-साथ आई.टी.आई. ट्रेड कराने में एक बड़ी चुनौती है, जिन स्कूलों के पास आई.टी.आई. ट्रेड हैं वहां कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जिन स्कूलों से यह संस्थान दूर हैं उन्हें थोड़ी मुश्किल होगी।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि टेक्नोलॉजी भविष्य की जरुरत है, इसे देखते हुए हमने 36 आईटीआई के उन्नयन के लिए टाटा टेक्नोलॉजिस के साथ 1186 करोड़ रूपए का एमओयू किया है। जिसके माध्यम से बहुत सारे ट्रेड आएंगे, जो देश-दुनिया की आवश्यकता है। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। हमारा लगातार प्रयास है कि सभी को रोजगार मिले, हम बेरोजगारी भत्ता बांट रहे हैं, रोजगार मिल सके इसलिए युवाओं को विभिन्न ट्रेडो का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। बेरोजगारी भत्ता बांटने में इतनी खुशी नहीं होती जितनी खुशी युवाओं के पास नौकरी देखकर होती है। हमारे हुनरमंद युवाओं को रोजगार दिलाने के उद्देश्य से हमने ग्रामीण क्षेत्रों में 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की है, हम शहरों में हम अर्बन इंडस्ट्रियल पार्क बना रहे हैं ताकि युवाओं को अपने व्यापार, व्यवसाय के अवसल मिले।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री जी की पहल कि विद्यार्थियों को बारहवीं की शिक्षा के साथ ही साथ आई.टी.आई. की डिग्री भी मिल रही है। हमारी ये व्यवस्था आज केंद्र सरकार भी अडॉप्ट कर रही है, किसी भी पहल की सफलता यही है।
भू-जल संरक्षण संबंधी कार्यों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नरवा विकास में छत्तीसगढ़ को मिल चुका दो पुरस्कार
‘स्कॉच अवार्ड’ और ‘पृथ्वी अवॉर्ड्स-2023’ से नवाजा गया
वनांचल के लगभग 25 लाख हेक्टेयर भू-भाग का हो रहा उपचार
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नरवा विकास योजना’ के सफल क्रियान्वयन से वनांचल की तस्वीर ही बदल गई है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में नरवा विकास कार्यक्रम के तहत कैम्पा मद अंतर्गत वनांचल स्थित नालों में काफी तादाद मेें भू-जल संरक्षण संबंधी कार्याे का तेजी से क्रियान्वयन जारी है। इससे वन क्षेत्रों के भू-जल स्तर में काफी सुधार दिखाई देने लगा है और वनवासियों सहित क्षेत्रवासियों को पेयजल, सिंचाई तथा निस्तारी आदि सुविधाओं का भरपूर लाभ मिलने लगा है। साथ ही साथ इससे वन संरक्षण तथा संवर्धन के कार्यों को भी बढ़ावा मिला है।
राज्य में इसके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ’स्कॉच अवार्ड’ के पर्यावरण श्रेणी के लिए स्वर्ण पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा हाल ही में छत्तीसगढ़ में नरवा विकास कार्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली में 14 और 15 जुलाई को आयोजित ईएसजी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में पृथ्वी अवॉर्ड्स भी प्रदान किया गया है।
वनांचल में साढ़े चार वर्षों के दौरान 6755 नालों में 1 करोड़ 80 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण जारी
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की विशेष पहल और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य के वन क्षेत्रों में भू-जल संरक्षण तथा संवर्धन के लिए बड़े तालाब में जल स्त्रोतों, नदी-नालों और तालाबों को पुनर्जीवित करने का कार्य लिया गया है।
छत्तीसगढ़ में गत साढ़े चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी ‘नरवा विकास‘ योजना के तहत वनांचल स्थित 6 हजार 755 नालों के लगभग 25 लाख हेक्टेयर जल ग्रहण क्षेत्रों को उपचारित करते हुए विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत एक करोड़ 80 लाख से अधिक भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। इन संरचनाओं में ब्रश वुड चेक डैम, लूज बोल्डर चेक डैम, गेबियन संरचना, मिट्टी चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, वाटर अब्जॉर्प्शन ट्रेंच तथा स्टेगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण शामिल है। इसके अलावा गली प्लग, चेक डैम, स्टॉप डैम, परकोलेशन टैंक तथा तालाब, डबरी और वाटरहोल आदि भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
मुंगेली / शौर्यपथ / राज्य शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत अब जिले के स्कूल संवरने लगे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप स्कूलों का कायाकल्प होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर परिवेश मिल रहा है। कलेक्टर राहुल देव ने आज मुंगेली विकासखंड के ग्राम बामपारा में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत प्राथमिक शाला के जीर्णोधार कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल के जीर्णोधार के लिए स्वीकृत राशि, कार्य की लागत के संबंध में जानकारी ली।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ग्राम बामपारा का स्कूल काफी जर्जर हो गया था। जिसे मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना अंतर्गत जीर्णोधार किया गया है। इसमें छत, खिड़की, दरवाजा की मरम्मत, कक्षों में टाइल्स, पुट्टी आदि कार्य शामिल है। कलेक्टर ने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना अंतर्गत स्वीकृत अन्य शाला भवनों की भी मरम्मत, नवीनीकरण और जीर्णोद्धार कार्य के साथ अतिरिक्त कक्ष निर्माण शीघ्र कराने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने बच्चों से सुना पहाड़ा, टॉफी प्रदान कर किया उत्साहवर्धन
कलेक्टर ने प्राथमिक शाला बामपारा में कक्षा 05वीं के बच्चों से भी मुलाकात की और शिक्षा का स्तर एवं गुणवत्ता परखने उनसे 13 और 19 का पहाड़ा सुनाने कहा। कलेक्टर ने बच्चों द्वारा बेझिझक पहाड़ा सुनाने पर उनकी भूरी-भूरी सराहना की और टॉफी प्रदान कर उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षा के बिना एक आदमी नींव के बिना एक इमारत की तरह है। हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्व होता है। शिक्षा एक व्यक्ति की सोच का पोषण करती है और उन्हें जीवन में सोचने, कार्य करने और आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने बच्चों को खूब मन लगाकर पढ़ाई करने और आगे बढ़ने प्रेरित किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री विजेंद्र पाटले सहित संबंधित अधिकारी, शिक्षकगण और गणमान्य नागरिक श्री लोकराम साहू उपस्थित थे।
अंजोरा में तैयार किया जा रहा प्लॉस्टिक जार एवं बेकरी उत्पाद
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम पंचायत अंजोरा(ख) में युवाओं को रोजगार के साथ नई पहचान मिल रही है। गौठान में स्थापित रीपा बनाने की परिकल्पना अब साकार हो रही है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना गौठान के अंतर्गत विकास के साथ रोजगार की दिशा में एक नया आयाम प्राप्त हो रहा है।
दुर्ग विकासखण्ड के अंजोरा (ख) में महिलाएं एवं युवा पहली बार प्लॉस्टिक जार एवं बेकरी उत्पाद बनाने का काम कर रही है। गांवों को उत्पाद का केन्द्र और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है यह योजना अब ग्रामीण परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव लाने लगी है। घरेलू कामों में व्यस्त रहने वाली महिलाएं एवं युवा सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं। 2 करोड़ रूपए की लागत से तैयार यह रीपा लोगों के रोजगार का जरिया बन रही है।
महिलाओं एवं युवाओं द्वारा अंजोरा में प्लास्टिक बाटल, प्लास्टिक जार एवं बेकरी बनाने का काम किया जा रहा है, जिसमें ब्रेड व पाव तैयार किया जा रहा है। ब्रेड बनाने एवं कटिंग के लिए शासन द्वारा मशीन प्रदान की गई है। भविष्य में आईसक्रीम कोन बनाने के लिए मशीन लगाई जाएगी। गत दिवस कलेक्टर श्री पुष्पेन्द्र कुमार मीणा द्वारा प्लास्टिक जार के वाहन को हरी झण्डी दिखाकर भिलाई के लिए रवाना किया गया था। इस उद्योग मेें प्रतिदिन 6 हजार प्लास्टिक जार तैयार किया जा रहा है, जिसे 17 रूपए प्रति नग के हिसाब से बाजार में बेचा जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर में ही गांव की महिलाओं एवं युवाओं के लिए रोजगार का एक अच्छा अवसर प्राप्त हुआ है। रीपा के संचालन से महिला समूह की सभी सदस्य बेहद ही खुश है एवं अतिरिक्त आय प्राप्त कर अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ साथ परिवार के आर्थिक गतिविधियों में भी अपना हाथ बंटा रही है। उन्हें काम की तलाश में अब बाहर जाने की जरूरत नही पड़ती। गौठान में स्थापित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) बनाने की परिकल्पना अब साकार हो रहा है।
इनके उत्पादन हेतु प्रशासन द्वारा आवश्यक मशीने रीपा स्थल पर उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही क्षेत्र की मांग के अनुरूप को निकट भविष्य में रीपा केंद्र में प्लास्टिक से बनने वाले नए उत्पादों को भी स्थान दिया जाएगा। इस यूनिट से आसपास के क्षेत्र के कुल 21 लोगों को रोज़गार का अवसर प्रदान किए गए हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / यहाँ बात विकास और उन्नति की नहीं परम्परा की है . सरकार कोई भी हो विकास की दिशा में कार्य करती ही है चाहे उनकी रफ़्तार तेज हो या धीमी क्योकि बिना विकास के सत्ता ज्यादा दिन नहीं टिक सकती . छत्तीसगढ़ को अस्तित्व में आये हुए आज 23 साल हो रहे है . इन 23 सालो में अगर भूपेश सरकार के लगभग 5 साल हटा दिए जाए तो 18 साल तक छत्तीसगढ़ में नेताओ को छत्तीसगढ़ी बोलने में हिचक होती थी यहाँ तक छत्तीसगढ़ के हित की बात करते हुए 15 साल तक रमन सरकार ने राज किया किन्तु छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहार को कोई महत्तव नहीं दिया . रमन सरकार के मंत्री मंडल में ताकतवर मंत्रियो की बड़ी संख्या ऐसी थी जो सालो से छत्तीसगढ़ में निवास कार रहे किन्तु अभि भी अपने मूल निवास के परिवेश को ही अपनाते हुए चल रहे है . अपने मूल अस्तित्व को नहीं भूलना चाहिए किन्तु साथ ही जिस जमीन ने जिस जगह ने पहचान और रूतबा दिया उसके सम्मान और पर्व को भी अपनाने में कही दिक्कत नहीं होनी चाहिए किन्तु छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य ही रहा कि 18 साल छत्तीसगढ़ अपनी मूल पहचान की तलाश में रहा .
2018 में भूपेश सरकार के आने के बाद छत्तीसगढ़ी भाखा , तीज त्यौहार , खान-पान , परम्परा , खुले मंच में छत्तीसगढ़ी बोली का उद्बोधन ये सब भूपेश सरकार के बाद ही हुआ . जिस तरह से छत्तीसगढ़ियो का तीज त्योहारों का चलन शुरू हुआ उसके बाद 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह सहित प्रदेश के अधिकतर नेता चाहे वो किसी भी राजनैतिक दल के हो छत्तीसगढ़ी बोली का उपयोग करने में हिचक महसूस नहीं कर रहे . एक बात जेहन में आयी जब छत्तीसगढ़ में रमन सिंह मुख्यमंत्री थे तब कभी भी छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्यौहार तीजा के बधाई सन्देश छत्तीसगढ़ी में नहीं दिए किन्तु सत्ता से हटने के बाद पहले ही तीजा में समाचार पत्रों में जो बधाई सन्देश दिए छत्तीसगढ़ की माताओ बहनों को वो विशुद्ध छत्तीसगढ़ी भाखा में दिए और आज जब रायपुर मे पीएम मोदी का सम्मलेन था तो उन्होंने भी छत्तीसगढ़ी शब्दों का प्रयोग किया . ये शुरुवात हुई अब छत्तीसगढ़ी बोली की उपेक्षा राजनेताओ की पहुँच से दूर हो गयी . मेरी नजर में सीएम बघेल ने जो शुभारम्भ किया खुले मंच में छत्तीसगढ़ी बोली का अब उसका अंत असंभव है .
लेख - शरद पंसारी
संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार
नगर पालिकाओं में भी हुआ मितान की सेवा का विस्तार
रायपुर / शौर्यपथ /मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मितान योजना के शुभारंभ के तत्काल बाद 30 मिनट के भीतर, हितग्राही बालोद निवासी गौरव पटेल और श्रीमती डिंपल पटेल के घर तक पहुंचा उनका “विवाह प्रमाण पत्र” बालोद नगर पालिका में “मुख्यमंत्री मितान योजना” के तहत स्वयं विधायक संजारी बालोद श्रीमती संगीता सिन्हा, नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा और कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने मितान की भूमिका निभाई। ज्ञात हो कि प्रदेश के नगर निगमों में यह सुविधा उपलब्ध थी। इसका विस्तार अब नगर पालिका स्तर पर किया गया है। इससे आम नागरिकों को विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र आसानी से सुलभ हो सकेंगे।
मितान योजना में श्रमिक कार्ड सहित 25 सेवाओं की घर बैठे डिलीवरी
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में अर्बन इंडस्ट्रियल पार्क ( UIPA) का किया शुभारंभ
शहरी क्षेत्रों में भी स्टार्टअप उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों को रोजगार के बेहतर अवसर होंगे उपलब्ध
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि अपनी सुंदर संस्कृति और कृषि आधारित मजबूत अर्थव्यवस्था के कारण हमारा छत्तीसगढ़ पूरे देश में विख्यात है। पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान हमारी कोशिश रही है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राज्य की शहरी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जाए। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए हमने शहरी अधोसंरचना के विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने और ऐसी योजनाएं संचालित कीं, जिनसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा सके।
सीएम बघेल ने कहा कि सभी आय वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना प्रारंभ की गई। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान संचालित करते हुए सभी के लिए अच्छा पोषण सुनिश्चित किया गया। इस अभियान से बच्चों को कुपोषण से और महिलाओं को एनीमिया से मुक्ति मिल रही है . सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हाफ बिजली बिल योजना प्रारंभ की गई। मोर बिजली एप के माध्यम से विद्युत-सेवाओं को आसान और सर्वसुलभ बनाया गया।
युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने के साथ-साथ हमने उनके कौशल विकास की भी व्यवस्था की। शिक्षित-बेरोजगारों के लिए बेरोजगारी भत्ता योजना संचालित की जा रही है, इसके तहत हर महीने शिक्षित-बेरोजगार युवाओं को 2500 रुपए की सहायता दी जा रही है। केवल तीन महीने में 80 करोड़ 64 लाख रुपए का भत्ता वितरित किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देने के लिए हमने मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना और श्री धन्वंतरी जैनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना प्रारंभ की। हर घर तक साफ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पाइप लाइनों का विस्तार किया गया है। स्वच्छता के मामले में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट कार्यों के लिए लगातार तीन वर्षों तक केंद्र सरकार ने पुरस्कृत किया है। राज्य सरकार द्वारा प्रति इण्डस्ट्रीयल पार्क 02 करोड़ रुपए की राशि संबंधित निकायों को प्रदान की जा रही है। अब शहरी क्षेत्रों में स्टार्टअप उद्यमियों तथा स्व-सहायता समूहों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की तर्ज पर अर्बन इंडस्ट्रियल पार्क की शुरुआत हम करने जा रहे हैं। इसका वर्चुअल शिलान्यास आज किया गया है। सर्विस डिलेवरी को मजबूत करने, नागरिकों को घर बैठे प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री मितान योजना की शुरूआत की गई। छत्तीसगढ़ के नगर निगम क्षेत्रों में नागरिकों को घर बैठे विभिन्न शासकीय दस्तावेज मितान के माध्यम से उपलब्ध हो रहे हैं। मुझे आशा है कि इस अभिनव प्रयास से हमारे शहरों में रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, साथ ही शहरी अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
छत्तीसगढ़ के नगर निगम क्षेत्रों में नागरिकों को घर बैठे विभिन्न शासकीय दस्तावेज मितान के माध्यम से उपलब्ध हो रहे हैं। आज से मुख्यमंत्री मितान योजना अंतर्गत श्रमिक कार्ड सेवाओं सहित कुल 25 सेवाओं की घर बैठे डिलिवरी का विस्तार करते हुए मितान के माध्यम से प्रदेश के समस्त नगर पालिका परिषदों में उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री मितान योजना के तहत आज 01 लाखवें हितग्राही को यहां प्रमाण पत्र दिया गया है। थोड़े समय में ही इस योजना से लाभान्वित नागरिकों की संख्या काफी उत्साहजनक है। नवगठित जिलों के साथ-साथ विभिन्न जिलों के जनप्रतिनिधियों द्वारा मोबाईल मेडिकल यूनिट की मांग की जा रही थी। इन मांगों को देखते हुए आज मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तृतीय चरण में शामिल 30 एमएमयू का प्रतीकात्मक शुभारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अब तक 51 लाख हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। ये आंकड़े अपने आप में इस योजना की सफलता की कहानी कह रहे हैं।
raipur / shouryapath / बेरोजगारी भत्ता छत्तीसगढ़ शासन द्वारा माह अप्रैल से दिया जा रहा है . अब तक 80 करोड़ से ज्यादा का बेरोजगारी भत्ता डिया जा चुका है साथ ही 4 हजार बेरोजगारों को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार भी प्राप्त हो चुका है . बेरोजगारी भत्ता मिलने से युवाओं के जीवन में क्या परिवर्तन हुए है इस बात का अनुभव बेरोजगारी भत्ता पाने वाले हितग्राहियों ने सीएम बघेल से रूबरू होकर अपने अनुभव साझा किये .
मेरे परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी, बेरोजगारी भत्ता मिलने से मुझे सहारा मिला, हमने कभी सोचा नहीं था कि हमें ढ़ाई हजार रूपए बेरोजगारी भत्ता मिलेगा, इससे हमारे माता-पिता का आर्थिक बोझ कुछ कम हुआ। अब मैं अपनी पढ़ाई कर सकूंगा। ये उद्गार बेरोजगारी भत्ता प्राप्त कर रहे युवाओं के हैं। युवाओं को बेरोजगारी भत्ते के साथ-साथ विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का उद्यम प्रारंभ करने के अलावा नौकरी भी कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपने निवास कार्यालय में बेरोजगारी भत्ता योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में इन दोनों योजनाओं के हितग्राहियों से रू-ब-रू हुए। इस कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न जिलों के जनप्रतिनिधि और हितग्राही ऑनलाईन जुड़े थे।
तोकापाल के तुलसी को मिली सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी
वर्चुअली जुड़े बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम करंजी के तुलसी राम कश्यप ने अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें लाइवलीहुड कॉलेज में सिक्युरिटी गार्ड की ट्रेनिंग मिली है और रोजगार मेले में उन्हें नौकरी भी मिल गई है। उन्होंने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। सरगुजा के निखिल सिंह ने कहा कि बेरोजगारी भत्ता योजना से उन्हें और उनकी बहन को आर्थिक सहयोग मिलने से उनकी परेशानियां कम हुई हैं। उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन करने बाद वे घर बैठे थे। अंबिकापुर के लाइवलीहुड कॉलेज में उन्हें असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, अब उन्हें 11 हजार रूपए की नौकरी का ऑफर लेटर मिल गया है।
गणेशी केंवट बनवा रही पक्का मकान
सूरजपुर जिले की प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की हितग्राही गणेशी केंवट ने बताया कि इस योजना में उन्हें 01 लाख 20 हजार रूपए स्वीकृत हुए हैं, पहली किश्त में 25 हजार रूपए की राशि मिली थी, जिससे डीपीसी तक का काम कराया है। कच्चे मकान में परेशानी होती थी, अब पक्का मकान मिल रहा है। गणेशी केंवट ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। नारायणपुर जिले के ग्राम करलखा के श्री भागवत प्रसाद यदु ने बताया कि उन्हें 01 लाख 30 हजार रूपए स्वीकृत हुए हैं, पहली किश्त 45 हजार रूपए मिल गई है। उन्होंने योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
मिलाप पटेल बने कस्टमर रिलेशनशिप एक्जीक्यूटिव
रायगढ़ जिले के बेरोजगारी भत्ता के हितग्राही श्री मिलाप पटेल ने बताया कि उन्हें बेरोजगारी भत्ता की किश्त तीन माह से लगातार मिल रही है। अब उन्हें चैतन्य ग्रुप में कस्टमर रिलेशनशिप एक्जीक्यूटिव की नौकरी मिल गई है।
कार्यक्रम में बेरोजगारी भत्ता पाने वाले युवाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के तहत मिल रही आर्थिक मदद से वे अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पा रहे हैं। उन्हें अब कौशल विकास की भी ट्रेनिंग मिल रही है। बेरोजगारी भत्ता के हितग्राही जिन्हें मुख्यमंत्री ने अपने निवास कार्यालय में ऑफर लेटर प्रदान किया है, उनमें से मुंगेली जिले के श्री लक्ष्मण कुमार ने बताया कि उन्हें बेरोजगारी भत्ता मिल रहा है, अब सुख किसान बॉयो प्लांटेक में फील्ड ऑफिसर की नौकरी मिल गई है। नीता साहू ने बेरोजगारी भत्ता योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। रायपुर के एक हितग्राही ने बताया कि बेरोजगारी भत्ता से उनके दैनिक गुजारा आसानी से हो रहा है। उन्होंने सीपेट से ट्रेनिंग की है, अब उन्हें नौकरी मिल गई है। लोरमी के रूप कुमार अनंत ने बेरोजगारी भत्ता योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि वे व्यापम की तैयारी कर रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार 30 जून को बेरोजगारी भत्ते की तीसरी किश्त का अंतरण युवाओं के खाते में करेंगे। 1 लाख 16 हजार 737 युवाओं को 31 करोड़ 69 लाख 60 हजार रुपए की राशि की तीसरी किश्त वितरित की जाएगी। पिछले महीने 1 लाख 5 हजार 586 हितग्राहियों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया था। इस तरह इस महीने हितग्राहियों की संख्या में 11 हजार 151 की वृद्धि हुई है। बेरोजगारी भत्ता अप्रैल और मई महीने में दिया जा चुका है। शुक्रवार को अंतरित की जाने वाली तीसरी किश्त को शामिल करें तो युवाओं के खाते में तीन महीनों में शासन द्वारा किया गया व्यय 80 करोड़ 64 लाख 25 हजार रुपए होगा। शासन द्वारा बेरोजगारी भत्ते के हितग्राहियों को कौशल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विभिन्न संस्थाओं में बेरोजगारी भत्ता प्राप्त कर रहे 3318 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा 2916 युवाओं का प्रशिक्षण शीघ्र ही आरंभ होगा।
नरवा योजना से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, भूमिगत जल के संवर्धन व मृदा संरक्षण में मिली मदद
जल संरक्षण के क्षेत्र में नरवा योजना एक राष्ट्रीय मॉडल
दुर्ग । शौर्यपथ । कल तक जो किसान वर्षा ऋतु के इंतजार में सिर्फ एक फसल ले पाते थे, ऐसे सभी किसानों के लिए नरवा योजना वरदान साबित हो रही है। नरवा के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। साथ ही वे सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। नरवा स्ट्रक्चर ब्रशवुड, बिना लागत भूमिगत जल के रिचार्ज करने का एक बेहतरीन उदाहरण है। राज्य में स्थित वन क्षेत्रों में नालों में संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। जिससे क्षेत्रों में उपस्थित जीवों को अपना चारा-पानी खोजने के लिए रहवासी क्षेत्रों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ग्रामीण तथा कृषकों को प्रशासन द्वारा पेयजल तथा सिंचाई के साधन विकसित कराए जा रहे हैं। जिससे जल की उपलब्धता सुनिश्चित होने से किसानों को खेती-बाड़ी करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जल, जंगल व प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य छत्तीसगढ़ जहां धान, विभिन्न फसले, फल, साग-सब्जी का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाता है। कृषि क्षेत्र में उत्पादन को बढ़ाने के साथ ही कृषि विकास एवं कृषक कल्याण दोनों एक दूसरे के दो पहलू हैं, और प्रदेश सरकार को सुराजी गांव योजना इन सभी विकास के पहलुओं को निखार रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजनांतर्गत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देते हुए लोगों को गांव में ही पूर्ण रोजगार देने व गांव के विकास के लिए नरवा, गरवा, घुरवा एवं बाड़ी को विकसित करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिससे अब गांवों की तस्वीर बदल रही है। भूगर्भीय जल स्रोतों के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में नरवा कार्यक्रम के माध्यम से ठोस प्रयास किए जा रहे हैं ताकि कृषि एवं कृषि संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। वर्षा के जल पर निर्भर किसानों के लिए यह योजना काफी फायदेमंद साबित हो रही है। दुर्ग जिले में नदी-नालों के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर से विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप ग्रामीणों को खेती किसानी और पशुपालन जैसी गतिविधियों के लिए बड़ी सुविधा मिल रही है।
छत्तीसगढ़ में नालों को नरवा कहा जाता है। इस योजना के तहत राज्य के नालों पर चेकडेम बना कर पानी रोकना तथा उस पानी को खेतों की सिंचाई के लिये उपलब्ध कराना है। इसके अलावा नालों के जरिए बारिश का जो पानी बह जाता है, उसे रोक कर भूगर्भीय जल को रिचार्ज करना है। नरवा योजना मुख्यतः इस वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है कि पानी का वेग कम होने से धरती का रिचार्ज तेजी से होता है। क्योंकि धरती को जल सोखने के लिए अधिक समय मिलता है। अक्सर बरसाती नालों में जितने तेजी से पानी चढ़ता है उतने ही तेजी से उतर भी जाता है। अब किसानों को खरीफ के साथ ही रबी फसलों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा है, आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर भी बढ़ रहा है। साथ ही मनरेगा के तहत नरवा विकास कार्यों में शामिल होकर ग्रामीणों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।
दुर्ग जिले में नरवा अंतर्गत एरिया ट्रीटमेंट और ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट के कार्यों को नया आकार दिया गया है। एरिया ट्रीटमेंट के लिए कच्ची नाली, निजी डबरी, नया तालाब, वृक्षारोपण, वाटर अब्सोरप्शन ट्रेंच, भूमि सुधार, रिचार्ज पिट एवं कुओं का निर्माण किया गया है। ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट के लिए नाला पुनरोद्धार एवं गहरीकरण, अन्य नवीन नरवा जीर्णाेद्वार, चेक डेम, चेक डेम जीर्णाेद्वार, ब्रशवूड चेक डेम, रिचार्ज पिट इत्यादि का निर्माण किया गया है। नरवा अंतर्गत स्वीकृत कार्य के आंकड़े प्रशंसनीय हैं। डीपीआर में कुल 6207 कार्य लिए गए जिनमें से 6164 कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। 5890 कार्य पूरे हो चुके हैं । 304 ग्राम पंचायतों में कुल 196 नरवा बनाये गए हैं एवं नरवा का उपचार किया गया है। 89 डाईक के साथ कुल 167660.81 हे. का जल संग्रहण क्षेत्र बनाया गया है ।
मिट्टी में नमी की मात्रा में वृद्धि का आंकलन क्षेत्र में वनस्पति अच्छादन व कृषि की उत्पादकता की स्थिति के आधार पर किया जाता है। नमी के चलते ही पौधों की जड़े फैलती है और पौधे नमी के साथ हो मिट्टी से अपना भोजन लेते हैं। ज्यादा पानी की वजह से फसल में आद्र गलन व जड़ गलन इस तरह के फफूंदजनित रोग की समस्या आती है। भूमिगत जल सतह की स्थिति का आंकलन वर्ष में दो बार किया जाता है। प्री-मॉनसून मार्च से मई तक और पोस्ट-मॉनसून अक्टूबर से दिसंबर तक होता है।
नरवा में प्रवाह का आंकलन रू लिटर प्रति सेकेंड के हिसाब से नरवा में पानी के प्रवाह का आंकलन किया जाता है। जब नरवा में पानी की मात्रा अच्छी होती है तो किसान को खेती में सुविधा मिलती है। इस सूचक के प्रभाव का आकलन रबी और खरीफ फसल के सिंचित रकबे में परिवर्तन के आधार पर किया जाता है। किसानों द्वारा नाले के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ी है।
गजरा नाला वॉटर शेड में अल्प वर्षा से जलभराव होने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी की सुविधा मिल रही है। जिससे फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। आस-पास के लिए हैंड पंप और बोर में भू-जल स्तर बढ़ रहा है। ग्राम पंचायत अकतई, औरी, पौहा और रानीतराई में नाले में बोरी बंधान से अल्पवर्षा का जल संग्रहित हुआ है। इस जलभराव से किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी की व्यवस्था हुई है। समृद्ध फसलों के लिए यह मददगार साबित हो रहा है। पंद्रह कि.मी. के लुमती नाले में ट्रीटमेंट होने पर डेढ़ हजार किसानों कर रहे रबी फसल का उत्पादन 745 हेक्टेयर में बोर के माध्यम से 1610 किसान कर रहे हैं। जिससे भूमिगत जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई हैं।
नाले के दोनों किनारों में 500 मीटर तक किसान पहले बोर चलाते थे, अब नाले से पानी ले रहे हैं। कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुमार मीणा धमधा में विकास कार्यों का निरंतर निरीक्षण करते हैं। मानसून की अमृत बूंदों के स्वागत के लिए तैयार नरवा स्ट्रक्चर के माध्यम से जलस्तर पांच इंच तक बढ़ने की उम्मीद है। नरवा के दो चरणों के काम सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं, 586 इंच जलस्तर बढ़ गया है जिससे पंद्रह हजार श्रमिकों की मेहनत रंग लाई है। इस योजना के माध्यम से न सिर्फ भूजल स्तर के गिरावट में कमी आ रही है बल्कि नरवा की साफ-सफाई और भूमि सुधारकर नालों के क्षेत्रफल को भी बढ़ाया जा रहा है। इस योजना का लक्ष्य यह भी है कि गर्मियों के मौसम में कुआं, हैंडपंप और बोरवेल आदि में भी पानी के स्तर में कमी ना आए और राज्य के किसान आसानी से खेती-बाड़ी कर सकें। साल भर जल की उपलब्धता बनी रहे और किसान आत्मनिर्भर व सशक्त रहे। जल संरक्षण में नरवा एक राष्ट्रीय मॉडल की भांति उभर रहा है।
गौठान में स्थापित रीपा बनाने की परिकल्पना अब हो रही साकार
अकेले ग्राम गुडेलिया में नारी शक्ति ग्राम समूह को 2 लाख वर्गफीट पेवर ब्लॉक का मिला एडवांस ऑर्डर
रायपुर/ शौर्यपथ / घरेलू कामों में व्यस्त रहने वाली कई महिलाएं सफलता की नई इबारतें लिख रहीं है। इनमें बलौदाबाजार भाटापारा जिले के विकासखण्ड भाटापारा के ग्राम गुडेलिया एवं विकासखंड पलारी के ग्राम गिर्रा की महिलाएं भी शामिल हैं। जो पेवर ब्लॉक बनाकर अपनी राह मजबूत बना रही है। जिलें में इस तरह पहली बार महिलाएं पेवर ब्लॉक बनाने का काम रही है। इसकी मांग इतनी है की पूर्ति करना मुश्किल हो जा रही हैं। आदर्श ग्राम गुड़ेलिया में नारी शक्ति ग्राम संगठन की महिलाओं द्वारा पेवर ब्लॉक बनाने का कार्य किया जा रहा है।
ग्राम संगठन समूह की सदस्य संतोषी ध्रुव ने बताया कि लगभग 1 माह पूर्व प्रारंभ हुआ उक्त यूनिट से अभी तक कुल 22 ट्रॉली 16500 वर्ग फीट पेवर ब्लॉक का निर्माण एवं सप्लाई हो चुका है। पेवर ब्लॉक की मांग अधिकतर आसपास के ग्राम पंचायतों द्वारा की जा रही है। जिसमें ग्राम धनेली, खपराडीह, लेवई, कडार एवं भरतपुर शामिल है। इसके साथ ही निजी व्यक्तियों द्वारा भी पेवर ब्लॉक की मांग की जा रही है। अभी तक हमारे संगठन को 2 लाख वर्ग फिट का एडवांस ऑर्डर मिल चुका है। जिसकी विक्रय दर 52 लाख रुपये है। जिससे लगभग 12 लाख रुपये का शुद्ध लाभांश नारी शक्ति ग्राम संगठन के सदस्यों को प्राप्त होगा। उन्होंने आगे बताया कि एक वर्गफीट का 26 रुपये दर निर्धारित की गयी है। जिसमे लगभग 20 रुपये खर्च होता है एवं 6 रुपये की बचत होती है। हमारे यहां 2 प्रकार की पेवर ब्लॉक बनाएं जा रहे है। जिसमें कॉस्मिक एवं जिगजैग प्रकार का शामिल है। कॉस्मिक में 1000 नग में 555 फिट एवं जिगजैग 1000 नग में 357 फिट का पेवर ब्लॉक बन जाता है।

सीमा ध्रुव कहती है की यूनिट के प्रारंभ होने से स्थानीय स्तर में ही हम को रोजगार एवं पर्याप्त मजदूरी साथ ही लाभांश राशि पर्याप्त मिल जा रही है। इसी तरह समूह की अन्य सदस्य मंजू ध्रुव कहती है की रीपा के संचालन से महिला समूह की सभी सदस्य बेहद ही खुश है एवं अतिरिक्त आय प्राप्त कर अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार के आर्थिक गतिविधियों में भी अपना हाथ बंटा रही हैं। उन्हें काम की तलाश में अब बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
इसी तरह ग्राम गिर्रा की जय चंडी माँ महिला स्व सहायता समूह के द्वारा पेवर ब्लॉक बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया है। उक्त यूनिट में 25 हजार नग पेवर ब्लॉक तैयार कर ली गयी है गौरतलब है कि राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवा, गरूवा, घुरूवा एवं बाड़ी योजना के अंतर्गत गांव में निर्मित की गई गौठान के माध्यम से अब गांव एवं महिलाओं को एक नयी पहचान मिल रही है। गौठान में स्थापित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) बनाने की परिकल्पना अब साकार हो रही है ।

Feb 09, 2021 Rate: 4.00
