July 31, 2026
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    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. वैशाख की पूर्णिमा तिथि भगवान बुद्ध की जन्मतिथि है. भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है इसलिए वैशाख पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. वैशाख पूर्णिमा को तुलसी माता को कुछ खास चीजें चढ़ाने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है और इससे घर में धन संपत्ति की कमी नहीं रहती है. आइए जानते हैं वैशाख पूर्णिमा पर तुलसी जी को क्या क्या चढ़ाना चाहिए.
    वैशाख पूर्णिमा पर तुलसी पर चढ़ाएं ये चीजें
    सुहाग की वस्तुएं - वैशाख पूर्णिमा को तुलसी जी को सुहाग की चीजें चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन लाल चुनरी, लाल चूड़ियां और बिंदी जैसी चीजें माता तुलसी को अर्पित करें. इससे जीवन में धन और वैभव की कमी नहीं रहती है.
    पीला धागा - वैशाख पूर्णिमा को पीले रंग के धागे में 108 गांठ लगाकर तुलसी के गमले के चारों ओर लपेट दें. ऐसा करने के बाद माता तुलसी से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए प्रार्थना करें.
    लाल कलावा - वैशाख पूर्णिमा को तुलसी माता को लाल कलावा जरूर चढ़ाना चाहिए. इससे माता तुलसी प्रसन्न होती हैं और जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
    घी से जलाएं दीया - वैशाख पूर्णिमा को माता तुलसी की पूजा में कच्चा दूध अर्पित करें और घी से दीया जलाएं. माता से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें.
    भगवानविष्णु की पूजा में तुलसी का महत्व
    विष्णु भगवान की पूजा तुलसी के बगैर अधूरी मानी जाती है. मान्यता है तुलसी के पत्तों के बगैर भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं. इसलिए तुलसी की विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक रूप से भी तुलसी के पौधे का बहत महत्व होता है. जहां प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है वहां सुख और समृद्धि बनी रहती है. तुलसी के पौधे के कारण नकारात्मक ऊर्जा दूर भाग जाती हैं.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में केले के पौधे को काफी शुभ और मंगलकारी माना गया है. केले के पत्ते  को जहां पूजा-पाठ और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जाता है वहीं, केले के पौधे की भी पूजा की जाती है. मान्यता है कि केले के पत्ते में खुद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का निवास होता है और इसलिए हर शुभ कामकाज में केले के पौधे और पत्तों की पूजा होती आई है. कहा जाता है कि केले के पत्तों में ढेर सारी सकारात्मक ऊर्जा होती है और इनके उपयोग से घर में निगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है. इसके साथ-साथ शुभ कामकाज में पंगत को केले के पत्तों पर ही भोजन परोसा जाता है. इसके साथ-साथ कई देवी देवताओं को भी केले के पत्ते पर भोग  लगाया जाता है. जानिए किन-किन देवताओं को भोग लगाने के लिए केले के पत्तों का इस्तेमाल होता है.
    भगवान विष्णु को लगाया जाता है केले के पत्ते पर भोग
    चूंकि केले के पत्ते में भगवान विष्णु  का वास माना गया है इसलिए भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर ही भोग लगाया जाता है. अगर आप अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर भोग लगाएं तो इससे घर में सुख शांति बनी रहेगी और घर में समृद्धि का वास होगा. मान्यता है कि जिन घरों में विवाह योग्य लड़के-लड़कियों की शादी में बाधा आ रही है, वहां भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर ही भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने पर घर में विवाह के योग बनने शुरू हो जाते हैं.
    गणपति बप्पा को लगाया जाता है केले के पत्ते पर भोग
    भगवान विष्णु के साथ-साथ प्रथम पूज्य भगवान यानी भगवान गणपति को भी केले के पत्ते पर भोग लगाना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. कहा जाता है कि भगवान गणेश को केला काफी प्रिय है और इसलिए उन्हें केले के पत्ते पर भोग लगाना अच्छा माना जाता है. इससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
    मां लक्ष्मी को लगाएं केले के पत्ते पर भोग
    धन संपत्ति की देवी कही जाने वाली मां लक्ष्मी को भी केले के पत्ते पर भोग लगाना काफी शुभ माना जाता है. अगर आप ऐसा करते हैं तो घर में सुख-समृद्धि का हमेशा वास रहेगा और घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आयरन हमारे शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो हमारे ब्लड में ऑक्सीजन ले जाने वाला प्रोटीन है. आयरन शरीर में कई कार्यों को करने के लिए जिम्मेदार होता है. अक्सर यह माना जाता है कि पालक आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है, लेकिन कई अन्य फूड्स भी हैं जो पालक से ज्यादा आयरन प्रदान कर सकते हैं. यहां हम 5 ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं जिनमें आयरन की मात्रा में पालक के समान या उससे ज्यादा होती है.
    पालक के अलावा आयरन के 5 जबरदस्त स्रोत |
    1. कद्दू के बीज
    कद्दू के बीज आयरन से भरपूर होते हैं और एक बेहतरीन स्नैक ऑप्शन हैं. माना जाता है कि इन बीजों में लगभग 9 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. आप इन्हें सलाद, योगर्ट या अपने स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं.
    2. सोयाबीन
    सोयाबीन आयरन का एक और बेहतरीन स्रोत है. माना जाता है कि इसमें लगभग 15.7 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. सोयाबीन को आप कई रूपों में जैसे टोफू, सोया मिल्क और सोया चंक्स के रूप में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
    3. तिल के बीज
    तिल के बीज जिन्हें अक्सर भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है, आयरन से भरपूर होते हैं. माना जाता है कि तिल के बीज में लगभग 14.6 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. इन्हें सलाद, ब्रेड और मिठाइयों में शामिल किया जा सकता है.
    4. काजू
    काजू एक पौष्टिक स्नैक है और आयरन का अच्छा स्रोत है. इसमें लगभग 6.7 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. काजू को आप सीधे खा सकते हैं या कई व्यंजनों में इस्तेमाल कर सकते हैं.
    5. चना (काबुली चना)
    काबुली चना, जिसे अंग्रेजी में चीकपीज कहते हैं, आयरन से बेहतरीन स्रोत होता है. माना जाता है कि इसमें लगभग 6.2 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. इसे आप सलाद, करी या हमस के रूप में अपनी डाइट आहार में शामिल कर सकते हैं.
    इन फूड्स को अपनी डेली डाइट में शामिल करके आप न केवल आयरन की पूर्ति कर सकते हैं बल्कि अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं.

     सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है, कुछ फूड्स हैं जिनसे भरपूर मात्रा में कैल्शियम प्राप्त किया जा सकता है. डेयरी प्रोडक्ट्स खासतौर से दूध का सेवन कैल्शियम से जुड़ा हुआ है, हालांकि, कई प्लांट बेस्ड स्रोत और ड्राई फ्रूट्स और बीज हैं जो कैल्शियम की मात्रा बढ़ा सकते हैं. अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर फलों और सब्जियों को शामिल करने से आपकी बोन हेल्थ और ऑलओवर हेल्थ को काफी फायदा हो सकता है. यहां हम उन फलों और सब्जियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं.
    कैल्शियम से भरपूर फल और सब्जियां |
    1. केल
    केल में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो हड्डियों को हेल्दी रखने में मददगार है. कैल्शियम ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है. इसमें विटामिन के भी होता है, जो कैल्शियम अवशोषण में सहायता करता है और हड्डियों के मिनरालाइजेशन को बढ़ावा देता है. सलाद, स्मूदी या भुने हुए साग के रूप में केल का आनंद लें. केल को थोड़ा पकाने से इसे पचाने में आसानी हो सकती है.
    2. संतरे
    संतरा कैल्शियम और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है, जो कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है और इम्यून हेल्थ को सपोर्ट करता है. इनमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो सेलुलर डैमेज से बचाते हैं. नाश्ते के रूप में ताजे संतरे खाएं, सलाद में स्लाइस एड करें  या ताजा निचोड़ा हुआ संतरे का रस पिएं. फाइबर सामग्री का लाभ उठाने के लिए साबुत फल चुनें.
    3. अंजीर
    अंजीर कैल्शियम, पोटेशियम और फाइबर प्रदान करता है और बोन हेल्थ, हार्ट हेल्थ और पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है. ताजे या सूखे अंजीर को स्नैक्स के रूप में खाएं, सीरीयल्स, सलाद में डालें या मिठाइयों में बेक करें. सूखे अंजीर में खासतौर से कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है.
    4. ब्रोकोली
    ब्रोकोली कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन सी भी प्रदान करती है, जो कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को बढ़ाती है. इसमें फाइबर भी होता है, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है. ब्रोकली के पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने के लिए उसे भाप में पकाएं या भून लें. पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसे सलाद, सूप में शामिल करें.
    5. कोलार्ड साग
    कोलार्ड साग कैल्शियम और विटामिन के से भरपूर होता है, जो हड्डियों की मजबूती और ब्लड क्लॉटिंग के लिए जरूरी है. इनमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो सूजन को कम करते हैं. कोलार्ड साग को भाप में पकाकर, भूनकर या सूप में डालकर पकाएं. पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने के लिए इसे जैतून के तेल जैसे हेल्दी फैट के साथ मिलाएं.
    6. पालक
    पालक में हाई कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन में होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य, मसल्स फंक्शन्स और ब्लड में ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए जरूरी है. कैल्शियम के लिए स्मूदी, सलाद में ताजा पालक मिलाएं या हल्का पकाएं. आयरन के अवशोषण को बढ़ावा देने के लिए इसे विटामिन सी से भरपूर फूड्स के साथ मिलाएं.
    7. कीवी
    कीवी में कैल्शियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य, इम्यून फंक्शन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं. स्नैक्स के रूप में ताजी कीवी खाएं, फलों के सलाद, स्मूदी या दही में मिलाएं. छिलका खाने योग्य होता है और इसमें एक्स्ट्रा पोषक तत्व होते हैं.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / भगवान शिव को सोमवार का दिन बहुत प्रिय होता है. इस दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा अर्चना और उनका अभिषेक करना चाहिए. इसके अलावा भोलेनाथ को प्रदोष का व्रत भी समर्पित होता है, जो हर माह की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है और अगर प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो सोने पर सुहागा माना जाता है, क्योंकि इसे सोम प्रदोष कहते हैं. माना जाता है कि सोम प्रदोष के दिन व्रत करने के अलावा भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाए और उन्हें कुछ खास चीजें अर्पित की जाए तो साधकों के सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख शांति आती है.
    कब रखा जाएगा सोम प्रदोष व्रत 2024
    वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी इस बार 20 मई, सोमवार को पड़ रही है. हालांकि त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 20 मई दोपहर 3:57 पर हो जाएगी और इसका समापन 21 मई को शाम 5:37 पर होगा. ऐसे में प्रदोष का व्रत इस बार 20 मई 2024 के दिन रखा जाएगा, इस दिन सोमवार है, इसलिए इसे सोम प्रदोष कहा जा रहा है. ये दिन भगवान शिव को समर्पित होता हैय ऐसे में सोमवार के दिन प्रदोष पड़ने पर इसका महत्व भी दुगुना हो जाता है.
    सोम प्रदोष के दिन करें ये खास उपाय
        सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करना बहुत फलदायी माना जाता है. कहते हैं कि इस दिन भगवान शिव को जल और दूध से स्नान कराने से और उन्हें पंचामृत अर्पित करने से सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं.
        सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को सफेद रंग की मिठाई, बर्फी या दूध की बनी हुई चीजें अर्पित की जाए, तो इससे साधकों को सुख शांति और समृद्धि मिलती है. इसके अलावा भगवान शिव को मौसमी फल जैसे- आम, सेब और केला जरूर अर्पित करना चाहिए.
        प्रदोष के दिन शिवलिंग की पूजा करते समय आपको बेलपत्र जरूर चढ़ाना चाहिए. यह बेलपत्र शुद्ध होना चाहिए और आप तीन या पांच बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं. इसके अलावा माता पार्वती को सफेद मदार की माला पहननी चाहिए, इससे भी घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
        प्रदोष के दिन अगर आप कुछ विशेष रंग के वस्त्र पहनकर भगवान की पूजा करें तो इसे भी शुभ माना जाता है. कहते हैं कि शिवजी की पूजा करते समय सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. वहीं, माता पार्वती को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए, इससे वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / भारतीय किचन में मौजूद लौंग का इस्तेमाल खाने के स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए किया जाता है. लौंग को मसाले के अलावा पूजा पाठ के काम में भी इस्तेमाल किया जाता है. लौंग दिखने में भले ही छोटी सी है लेकिन इसके फायदे बड़े-बड़े हैं. लौंग को कई अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय मसाले से लेकर आयुर्वेदिक औषधी तक लौंग का इस्तेमाल खूब किया जाता है. लौंग को गले में होने वाले दर्द और मुंह की बदबू, सूजन से भी छुटकारा दिलाने में मददगार माना जाता है. लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिडस, विटामिन ए और सी, मैग्नीज और फाइबर जैसे गुण पाए जाते हैं. जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लौंग में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-वायरल गुण भी पाए जाते हैं. तो चलिए जानते हैं लौंग खाने के फायदे.
    लौंग खाने के फायदे-
    1. फैटी लीवर-
    लौंग में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है. इस वजह से लौंग शरीर के अंगों खासतौर से लीवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है.
    2. खांसी-
    गले की खराश की समस्या को दूर करने लिए भी लोग को कच्चा चबा सकते है. अगर सूखी खांसी हो तो लौंग सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है.
    3. मुंह की बदबू-
    सांसों की दुर्गंध को दूर करने के लिए आप लौंग को चबाकर खा सकते हैं. इससे मुंह की बदबू को दूर करने में मदद मिल सकती है.
    4. इम्यूनिटी-
    लौंग के साथ दूध का सेवन करने से इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. मजबूत इम्यूनिटी शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार है.

    शौर्यपथ / विज्ञान की नजर से देखें तो सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में इसका काफी महत्व माना गया है. 2024 की बात करें तो बीती 8 अप्रैल को पहला सूर्य ग्रहण लग चुका और अब जल्द ही दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. ज्योतिष विज्ञान के नजरिए से बात करें तो सूर्य ग्रहण का हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है. चलिए जानते हैं कि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है और इसका सूतक काल कितने समय का रहेगा.
    कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
    इस साल का यानी 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर माह में लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण आश्विन माह में आने वाली सर्व पितृ अमावस्या पर लगेगा. पंचांग के अनुसार, अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण रात नौ बजकर 13 मिनट पर लगना शुरू होगा और आधी रात को 3  बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगा. सूर्य ग्रहण की कुल अवधि कुल छह घंटे चार मिनट की रहेगी. चूंकि सूर्य ग्रहण रात्रि के समय लग रहा है और इसलिए यह भारत देश में नहीं दिखाई देगा. चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा.
    आपको बता दें कि दूसरा सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी रिंग ऑफ फायर  कहलाएगा. इस स्थिति में जब चंद्रमा सीधे धरती और सूर्य के बीच से गुजरता है तो वो सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता. हालांकि चंद्रमा सूर्य के अधिकांश भाग को ढक लेता है और ऐसे चंद्रमा के बाहरी किनारे सूर्य की रोशनी से एक चमकदार गोल रिंग दिखने लगती है और इसे ही रिंग ऑफ फायर कहा जाता है.
    कहांकहां दिखेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
    दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन यह दुनिया के कई देशों में देखा जा सकेगा. दूसरे सूर्य ग्रहण को दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों में देखा जा सकेगा. इस ग्रहण आर्कटिक, अर्जेंटीना, ब्राजील, पेरू, फिजी, चिली, पेरू, होनोलूलू, ब्यूनो आयर्स, अंटार्कटिका जैसे इलाकों में देखा जा सकेगा. इसके साथ-साथ दक्षिण अमेरिका और प्रशांत महासागर के भी कुछ इलाकों से इसे देखा जा सकेगा.

     ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / मुहांसे, दाग-धब्बे और झुर्रियां हमारे चेहरे की खूबसूरती को कम करने का काम करते हैं. अक्सर धूल-मिट्टी और प्रदूषण के चलते स्किन में ये समस्याएं देखी जाती हैं. असल में चेहरे में मुंहासे और दाग-धब्बे होने के और भी कई अन्य कारण हो सकते हैं. कई बार पेट साफ न होने चलते भी चेहरे पर दाने निकलने लगते हैं. इतना ही नहीं कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी स्किन को ऐसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है. हममें से ज्यादातर लोग मुहांसे, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने के लिए मार्केट से महंगे-महंगे प्रोडक्ट खरीद कर लाते हैं. लेकिन बार-बार ये चीजें लाना हमारे बजट के बाहर भी हो सकता है. आप बिना किसी महंगे प्रोडक्ट के इस्तेमाल के अपने चेहरे को चमकदार बनाना चाहते हैं तो आप घरेलू उपाय को अपना सकते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं एलोवेरा की. एलोवेरा को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. तो चलिए जानते हैं स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल.
    एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे आसानी से घर पर लगाया जा सकता है. एलोवेरा जेल के इस्तेमाल से स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है. आपको बता दें कि एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो मुहांसों, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
    कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल-
    स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए आप एलोवेरा में गुलाब जल मिलाकर लगा सकते हैं. आपको बता दें कि गुलाब जल को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. सबसे पहले एक छोटे बाउल में 1 चम्मच एलोवेरा जेल और एक चम्मच गुलाब जल लें. इन दोनों को अच्छी तरह मिक्स कर लें. फिर चेहरे को साफ कर लें पानी सूखा लें. और इस पेस्ट को अच्छे से लगा कर मसाज करें. कुछ देर चेहरे पर लगा रहने दें. फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. ऐसा करने से स्किन को ग्लोइंग बनाया जा सकता है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस साल 23 मई को बैशाख पूर्णिमा है. इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु को नौवां अवतार माना गया है. बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु  की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी  से जुड़ी गलतियां धन की देवी लक्ष्मी को नाराज कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में.
    तुलसी का स्पर्श
    बुद्ध पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी की पूजा के दौरान पौधे को स्पर्श करने से बचना चाहिए. इस समय तुलसी के पौधे को स्पर्श करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय रहता है.
    खुले बाल न रहें
    मान्यता है कि माता तुलसी की पूजा के दौरान महिलाओं को अपने बाल हमेशा बांध कर रखने चाहिए. पूजा के दौरान बाल खुले रहने से देवी लक्ष्मी के नाराज होने का डर रहता है.
    पत्तियां तोड़ने में सावधानी
    बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी की पत्तियों को सावधानी से तोड़ना चाहिए. बेहतर होगा कि एक दिन पहले ही पत्तियां तोड़ कर रख लें. अगर पत्तियां तोड़नी जरूरी हो तो नाखून का उपयोग कर पत्तियां तोड़ने से बचें.
    तुलसी की परिक्रमा
    तुलसी की पूजा और जल देने के बाद पौधे की परिक्रमा जरूर करें. तुलसी में जल देने के बाद तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए. परिक्रमा नहीं करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय होता है.
    साफ सफाई
    तुलसी के पौधे के आसपास हमेशा साफ सफाई रखें. पौधे के पास गंदगी से धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं. बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर में सात्विक भोजन बनाएं और मांस मदिरा से दूर रहें.
    भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाएं
    बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं. इसके साथ ही हाथ में तुलसी की माला लेकर मां लक्ष्मी के मंत्र – ऊं श्रीं ह्नीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: का पाठ करें.

      सेहत टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के मौसम में हर कोई डाइट में दही को शामिल करने की सलाह देते हैं. दही की तासीर ठंडी होती है जो गर्मी से बचाने में मददगार है. दही पाचन, इम्यूनिटी, गट हेल्थ और कई फायदों के लिए जाना जाता है, लेकिन अधिक सेवन आपके लिए उतनी ही मुशीबत खड़ी कर सकते हैं. अगर आप इस हेल्दी डेयरी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो कुछ दही के दुष्प्रभाव के बारे में जान लें. गर्मियों के मौसम में दही का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जरूरत से ज्यादा दही का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. तो चलिए जानते हैं दही खाने के नुकसान.
    दही खाने के नुकसान-
    1. मोटापा-
    दही में कैलोरी और फैट होता है जो वजन को बढ़ाने का काम कर सकते हैं. अगर आप वजन को घटाने के लिए डाइट पर हैं तो लो फैट दही का सेवन करें.
    2. लैक्टोज इंटोलरेंस-
    दही में लैक्टोज होता है, जो लैक्टोज इंटोलरेंस लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए आप दही का सेवन करने से बचें.
    3. किडनी-
    दही में मौजूद कैल्शियम का हाई लेवल किडनी की समस्या को बढ़ा सकता है. इसलिए अगर आपको किडनी से जुड़ी समस्या है तो आप भूलकर भी दही का सेवन न करें.
    4. मेमोरी-
    दही का जरूरत से ज्यादा सेवन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है.
    5. सर्दी-जुकाम-
    दही की तासीर ठंडी होती है, जो अस्थमा रोगियों के लिए सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी की वजह बन सकती है.

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