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व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. वैशाख की पूर्णिमा तिथि भगवान बुद्ध की जन्मतिथि है. भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है इसलिए वैशाख पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. वैशाख पूर्णिमा को तुलसी माता को कुछ खास चीजें चढ़ाने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है और इससे घर में धन संपत्ति की कमी नहीं रहती है. आइए जानते हैं वैशाख पूर्णिमा पर तुलसी जी को क्या क्या चढ़ाना चाहिए.
वैशाख पूर्णिमा पर तुलसी पर चढ़ाएं ये चीजें
सुहाग की वस्तुएं - वैशाख पूर्णिमा को तुलसी जी को सुहाग की चीजें चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन लाल चुनरी, लाल चूड़ियां और बिंदी जैसी चीजें माता तुलसी को अर्पित करें. इससे जीवन में धन और वैभव की कमी नहीं रहती है.
पीला धागा - वैशाख पूर्णिमा को पीले रंग के धागे में 108 गांठ लगाकर तुलसी के गमले के चारों ओर लपेट दें. ऐसा करने के बाद माता तुलसी से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए प्रार्थना करें.
लाल कलावा - वैशाख पूर्णिमा को तुलसी माता को लाल कलावा जरूर चढ़ाना चाहिए. इससे माता तुलसी प्रसन्न होती हैं और जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
घी से जलाएं दीया - वैशाख पूर्णिमा को माता तुलसी की पूजा में कच्चा दूध अर्पित करें और घी से दीया जलाएं. माता से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें.
भगवानविष्णु की पूजा में तुलसी का महत्व
विष्णु भगवान की पूजा तुलसी के बगैर अधूरी मानी जाती है. मान्यता है तुलसी के पत्तों के बगैर भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं. इसलिए तुलसी की विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक रूप से भी तुलसी के पौधे का बहत महत्व होता है. जहां प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है वहां सुख और समृद्धि बनी रहती है. तुलसी के पौधे के कारण नकारात्मक ऊर्जा दूर भाग जाती हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में केले के पौधे को काफी शुभ और मंगलकारी माना गया है. केले के पत्ते को जहां पूजा-पाठ और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जाता है वहीं, केले के पौधे की भी पूजा की जाती है. मान्यता है कि केले के पत्ते में खुद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का निवास होता है और इसलिए हर शुभ कामकाज में केले के पौधे और पत्तों की पूजा होती आई है. कहा जाता है कि केले के पत्तों में ढेर सारी सकारात्मक ऊर्जा होती है और इनके उपयोग से घर में निगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है. इसके साथ-साथ शुभ कामकाज में पंगत को केले के पत्तों पर ही भोजन परोसा जाता है. इसके साथ-साथ कई देवी देवताओं को भी केले के पत्ते पर भोग लगाया जाता है. जानिए किन-किन देवताओं को भोग लगाने के लिए केले के पत्तों का इस्तेमाल होता है.
भगवान विष्णु को लगाया जाता है केले के पत्ते पर भोग
चूंकि केले के पत्ते में भगवान विष्णु का वास माना गया है इसलिए भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर ही भोग लगाया जाता है. अगर आप अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर भोग लगाएं तो इससे घर में सुख शांति बनी रहेगी और घर में समृद्धि का वास होगा. मान्यता है कि जिन घरों में विवाह योग्य लड़के-लड़कियों की शादी में बाधा आ रही है, वहां भगवान विष्णु को केले के पत्ते पर ही भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने पर घर में विवाह के योग बनने शुरू हो जाते हैं.
गणपति बप्पा को लगाया जाता है केले के पत्ते पर भोग
भगवान विष्णु के साथ-साथ प्रथम पूज्य भगवान यानी भगवान गणपति को भी केले के पत्ते पर भोग लगाना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. कहा जाता है कि भगवान गणेश को केला काफी प्रिय है और इसलिए उन्हें केले के पत्ते पर भोग लगाना अच्छा माना जाता है. इससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
मां लक्ष्मी को लगाएं केले के पत्ते पर भोग
धन संपत्ति की देवी कही जाने वाली मां लक्ष्मी को भी केले के पत्ते पर भोग लगाना काफी शुभ माना जाता है. अगर आप ऐसा करते हैं तो घर में सुख-समृद्धि का हमेशा वास रहेगा और घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आयरन हमारे शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो हमारे ब्लड में ऑक्सीजन ले जाने वाला प्रोटीन है. आयरन शरीर में कई कार्यों को करने के लिए जिम्मेदार होता है. अक्सर यह माना जाता है कि पालक आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है, लेकिन कई अन्य फूड्स भी हैं जो पालक से ज्यादा आयरन प्रदान कर सकते हैं. यहां हम 5 ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं जिनमें आयरन की मात्रा में पालक के समान या उससे ज्यादा होती है.
पालक के अलावा आयरन के 5 जबरदस्त स्रोत |
1. कद्दू के बीज
कद्दू के बीज आयरन से भरपूर होते हैं और एक बेहतरीन स्नैक ऑप्शन हैं. माना जाता है कि इन बीजों में लगभग 9 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. आप इन्हें सलाद, योगर्ट या अपने स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं.
2. सोयाबीन
सोयाबीन आयरन का एक और बेहतरीन स्रोत है. माना जाता है कि इसमें लगभग 15.7 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. सोयाबीन को आप कई रूपों में जैसे टोफू, सोया मिल्क और सोया चंक्स के रूप में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
3. तिल के बीज
तिल के बीज जिन्हें अक्सर भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है, आयरन से भरपूर होते हैं. माना जाता है कि तिल के बीज में लगभग 14.6 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. इन्हें सलाद, ब्रेड और मिठाइयों में शामिल किया जा सकता है.
4. काजू
काजू एक पौष्टिक स्नैक है और आयरन का अच्छा स्रोत है. इसमें लगभग 6.7 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. काजू को आप सीधे खा सकते हैं या कई व्यंजनों में इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. चना (काबुली चना)
काबुली चना, जिसे अंग्रेजी में चीकपीज कहते हैं, आयरन से बेहतरीन स्रोत होता है. माना जाता है कि इसमें लगभग 6.2 मिलीग्राम आयरन प्रति 100 ग्राम होता है. इसे आप सलाद, करी या हमस के रूप में अपनी डाइट आहार में शामिल कर सकते हैं.
इन फूड्स को अपनी डेली डाइट में शामिल करके आप न केवल आयरन की पूर्ति कर सकते हैं बल्कि अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है, कुछ फूड्स हैं जिनसे भरपूर मात्रा में कैल्शियम प्राप्त किया जा सकता है. डेयरी प्रोडक्ट्स खासतौर से दूध का सेवन कैल्शियम से जुड़ा हुआ है, हालांकि, कई प्लांट बेस्ड स्रोत और ड्राई फ्रूट्स और बीज हैं जो कैल्शियम की मात्रा बढ़ा सकते हैं. अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर फलों और सब्जियों को शामिल करने से आपकी बोन हेल्थ और ऑलओवर हेल्थ को काफी फायदा हो सकता है. यहां हम उन फलों और सब्जियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं.
कैल्शियम से भरपूर फल और सब्जियां |
1. केल
केल में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो हड्डियों को हेल्दी रखने में मददगार है. कैल्शियम ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है. इसमें विटामिन के भी होता है, जो कैल्शियम अवशोषण में सहायता करता है और हड्डियों के मिनरालाइजेशन को बढ़ावा देता है. सलाद, स्मूदी या भुने हुए साग के रूप में केल का आनंद लें. केल को थोड़ा पकाने से इसे पचाने में आसानी हो सकती है.
2. संतरे
संतरा कैल्शियम और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है, जो कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है और इम्यून हेल्थ को सपोर्ट करता है. इनमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो सेलुलर डैमेज से बचाते हैं. नाश्ते के रूप में ताजे संतरे खाएं, सलाद में स्लाइस एड करें या ताजा निचोड़ा हुआ संतरे का रस पिएं. फाइबर सामग्री का लाभ उठाने के लिए साबुत फल चुनें.
3. अंजीर
अंजीर कैल्शियम, पोटेशियम और फाइबर प्रदान करता है और बोन हेल्थ, हार्ट हेल्थ और पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है. ताजे या सूखे अंजीर को स्नैक्स के रूप में खाएं, सीरीयल्स, सलाद में डालें या मिठाइयों में बेक करें. सूखे अंजीर में खासतौर से कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है.
4. ब्रोकोली
ब्रोकोली कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन सी भी प्रदान करती है, जो कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को बढ़ाती है. इसमें फाइबर भी होता है, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है. ब्रोकली के पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने के लिए उसे भाप में पकाएं या भून लें. पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसे सलाद, सूप में शामिल करें.
5. कोलार्ड साग
कोलार्ड साग कैल्शियम और विटामिन के से भरपूर होता है, जो हड्डियों की मजबूती और ब्लड क्लॉटिंग के लिए जरूरी है. इनमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो सूजन को कम करते हैं. कोलार्ड साग को भाप में पकाकर, भूनकर या सूप में डालकर पकाएं. पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने के लिए इसे जैतून के तेल जैसे हेल्दी फैट के साथ मिलाएं.
6. पालक
पालक में हाई कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन में होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य, मसल्स फंक्शन्स और ब्लड में ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए जरूरी है. कैल्शियम के लिए स्मूदी, सलाद में ताजा पालक मिलाएं या हल्का पकाएं. आयरन के अवशोषण को बढ़ावा देने के लिए इसे विटामिन सी से भरपूर फूड्स के साथ मिलाएं.
7. कीवी
कीवी में कैल्शियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य, इम्यून फंक्शन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं. स्नैक्स के रूप में ताजी कीवी खाएं, फलों के सलाद, स्मूदी या दही में मिलाएं. छिलका खाने योग्य होता है और इसमें एक्स्ट्रा पोषक तत्व होते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / भगवान शिव को सोमवार का दिन बहुत प्रिय होता है. इस दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा अर्चना और उनका अभिषेक करना चाहिए. इसके अलावा भोलेनाथ को प्रदोष का व्रत भी समर्पित होता है, जो हर माह की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है और अगर प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो सोने पर सुहागा माना जाता है, क्योंकि इसे सोम प्रदोष कहते हैं. माना जाता है कि सोम प्रदोष के दिन व्रत करने के अलावा भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाए और उन्हें कुछ खास चीजें अर्पित की जाए तो साधकों के सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख शांति आती है.
कब रखा जाएगा सोम प्रदोष व्रत 2024
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी इस बार 20 मई, सोमवार को पड़ रही है. हालांकि त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 20 मई दोपहर 3:57 पर हो जाएगी और इसका समापन 21 मई को शाम 5:37 पर होगा. ऐसे में प्रदोष का व्रत इस बार 20 मई 2024 के दिन रखा जाएगा, इस दिन सोमवार है, इसलिए इसे सोम प्रदोष कहा जा रहा है. ये दिन भगवान शिव को समर्पित होता हैय ऐसे में सोमवार के दिन प्रदोष पड़ने पर इसका महत्व भी दुगुना हो जाता है.
सोम प्रदोष के दिन करें ये खास उपाय
सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करना बहुत फलदायी माना जाता है. कहते हैं कि इस दिन भगवान शिव को जल और दूध से स्नान कराने से और उन्हें पंचामृत अर्पित करने से सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं.
सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को सफेद रंग की मिठाई, बर्फी या दूध की बनी हुई चीजें अर्पित की जाए, तो इससे साधकों को सुख शांति और समृद्धि मिलती है. इसके अलावा भगवान शिव को मौसमी फल जैसे- आम, सेब और केला जरूर अर्पित करना चाहिए.
प्रदोष के दिन शिवलिंग की पूजा करते समय आपको बेलपत्र जरूर चढ़ाना चाहिए. यह बेलपत्र शुद्ध होना चाहिए और आप तीन या पांच बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं. इसके अलावा माता पार्वती को सफेद मदार की माला पहननी चाहिए, इससे भी घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
प्रदोष के दिन अगर आप कुछ विशेष रंग के वस्त्र पहनकर भगवान की पूजा करें तो इसे भी शुभ माना जाता है. कहते हैं कि शिवजी की पूजा करते समय सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. वहीं, माता पार्वती को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए, इससे वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / भारतीय किचन में मौजूद लौंग का इस्तेमाल खाने के स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए किया जाता है. लौंग को मसाले के अलावा पूजा पाठ के काम में भी इस्तेमाल किया जाता है. लौंग दिखने में भले ही छोटी सी है लेकिन इसके फायदे बड़े-बड़े हैं. लौंग को कई अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय मसाले से लेकर आयुर्वेदिक औषधी तक लौंग का इस्तेमाल खूब किया जाता है. लौंग को गले में होने वाले दर्द और मुंह की बदबू, सूजन से भी छुटकारा दिलाने में मददगार माना जाता है. लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिडस, विटामिन ए और सी, मैग्नीज और फाइबर जैसे गुण पाए जाते हैं. जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लौंग में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-वायरल गुण भी पाए जाते हैं. तो चलिए जानते हैं लौंग खाने के फायदे.
लौंग खाने के फायदे-
1. फैटी लीवर-
लौंग में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है. इस वजह से लौंग शरीर के अंगों खासतौर से लीवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है.
2. खांसी-
गले की खराश की समस्या को दूर करने लिए भी लोग को कच्चा चबा सकते है. अगर सूखी खांसी हो तो लौंग सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है.
3. मुंह की बदबू-
सांसों की दुर्गंध को दूर करने के लिए आप लौंग को चबाकर खा सकते हैं. इससे मुंह की बदबू को दूर करने में मदद मिल सकती है.
4. इम्यूनिटी-
लौंग के साथ दूध का सेवन करने से इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. मजबूत इम्यूनिटी शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार है.
शौर्यपथ / विज्ञान की नजर से देखें तो सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में इसका काफी महत्व माना गया है. 2024 की बात करें तो बीती 8 अप्रैल को पहला सूर्य ग्रहण लग चुका और अब जल्द ही दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. ज्योतिष विज्ञान के नजरिए से बात करें तो सूर्य ग्रहण का हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है. चलिए जानते हैं कि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है और इसका सूतक काल कितने समय का रहेगा.
कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
इस साल का यानी 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर माह में लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण आश्विन माह में आने वाली सर्व पितृ अमावस्या पर लगेगा. पंचांग के अनुसार, अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण रात नौ बजकर 13 मिनट पर लगना शुरू होगा और आधी रात को 3 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगा. सूर्य ग्रहण की कुल अवधि कुल छह घंटे चार मिनट की रहेगी. चूंकि सूर्य ग्रहण रात्रि के समय लग रहा है और इसलिए यह भारत देश में नहीं दिखाई देगा. चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा.
आपको बता दें कि दूसरा सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी रिंग ऑफ फायर कहलाएगा. इस स्थिति में जब चंद्रमा सीधे धरती और सूर्य के बीच से गुजरता है तो वो सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता. हालांकि चंद्रमा सूर्य के अधिकांश भाग को ढक लेता है और ऐसे चंद्रमा के बाहरी किनारे सूर्य की रोशनी से एक चमकदार गोल रिंग दिखने लगती है और इसे ही रिंग ऑफ फायर कहा जाता है.
कहांकहां दिखेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन यह दुनिया के कई देशों में देखा जा सकेगा. दूसरे सूर्य ग्रहण को दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों में देखा जा सकेगा. इस ग्रहण आर्कटिक, अर्जेंटीना, ब्राजील, पेरू, फिजी, चिली, पेरू, होनोलूलू, ब्यूनो आयर्स, अंटार्कटिका जैसे इलाकों में देखा जा सकेगा. इसके साथ-साथ दक्षिण अमेरिका और प्रशांत महासागर के भी कुछ इलाकों से इसे देखा जा सकेगा.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / मुहांसे, दाग-धब्बे और झुर्रियां हमारे चेहरे की खूबसूरती को कम करने का काम करते हैं. अक्सर धूल-मिट्टी और प्रदूषण के चलते स्किन में ये समस्याएं देखी जाती हैं. असल में चेहरे में मुंहासे और दाग-धब्बे होने के और भी कई अन्य कारण हो सकते हैं. कई बार पेट साफ न होने चलते भी चेहरे पर दाने निकलने लगते हैं. इतना ही नहीं कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी स्किन को ऐसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है. हममें से ज्यादातर लोग मुहांसे, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने के लिए मार्केट से महंगे-महंगे प्रोडक्ट खरीद कर लाते हैं. लेकिन बार-बार ये चीजें लाना हमारे बजट के बाहर भी हो सकता है. आप बिना किसी महंगे प्रोडक्ट के इस्तेमाल के अपने चेहरे को चमकदार बनाना चाहते हैं तो आप घरेलू उपाय को अपना सकते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं एलोवेरा की. एलोवेरा को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. तो चलिए जानते हैं स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल.
एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे आसानी से घर पर लगाया जा सकता है. एलोवेरा जेल के इस्तेमाल से स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है. आपको बता दें कि एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो मुहांसों, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल-
स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए आप एलोवेरा में गुलाब जल मिलाकर लगा सकते हैं. आपको बता दें कि गुलाब जल को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. सबसे पहले एक छोटे बाउल में 1 चम्मच एलोवेरा जेल और एक चम्मच गुलाब जल लें. इन दोनों को अच्छी तरह मिक्स कर लें. फिर चेहरे को साफ कर लें पानी सूखा लें. और इस पेस्ट को अच्छे से लगा कर मसाज करें. कुछ देर चेहरे पर लगा रहने दें. फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. ऐसा करने से स्किन को ग्लोइंग बनाया जा सकता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस साल 23 मई को बैशाख पूर्णिमा है. इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु को नौवां अवतार माना गया है. बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी से जुड़ी गलतियां धन की देवी लक्ष्मी को नाराज कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में.
तुलसी का स्पर्श
बुद्ध पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी की पूजा के दौरान पौधे को स्पर्श करने से बचना चाहिए. इस समय तुलसी के पौधे को स्पर्श करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय रहता है.
खुले बाल न रहें
मान्यता है कि माता तुलसी की पूजा के दौरान महिलाओं को अपने बाल हमेशा बांध कर रखने चाहिए. पूजा के दौरान बाल खुले रहने से देवी लक्ष्मी के नाराज होने का डर रहता है.
पत्तियां तोड़ने में सावधानी
बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी की पत्तियों को सावधानी से तोड़ना चाहिए. बेहतर होगा कि एक दिन पहले ही पत्तियां तोड़ कर रख लें. अगर पत्तियां तोड़नी जरूरी हो तो नाखून का उपयोग कर पत्तियां तोड़ने से बचें.
तुलसी की परिक्रमा
तुलसी की पूजा और जल देने के बाद पौधे की परिक्रमा जरूर करें. तुलसी में जल देने के बाद तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए. परिक्रमा नहीं करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय होता है.
साफ सफाई
तुलसी के पौधे के आसपास हमेशा साफ सफाई रखें. पौधे के पास गंदगी से धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं. बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर में सात्विक भोजन बनाएं और मांस मदिरा से दूर रहें.
भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाएं
बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं. इसके साथ ही हाथ में तुलसी की माला लेकर मां लक्ष्मी के मंत्र – ऊं श्रीं ह्नीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: का पाठ करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के मौसम में हर कोई डाइट में दही को शामिल करने की सलाह देते हैं. दही की तासीर ठंडी होती है जो गर्मी से बचाने में मददगार है. दही पाचन, इम्यूनिटी, गट हेल्थ और कई फायदों के लिए जाना जाता है, लेकिन अधिक सेवन आपके लिए उतनी ही मुशीबत खड़ी कर सकते हैं. अगर आप इस हेल्दी डेयरी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो कुछ दही के दुष्प्रभाव के बारे में जान लें. गर्मियों के मौसम में दही का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जरूरत से ज्यादा दही का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. तो चलिए जानते हैं दही खाने के नुकसान.
दही खाने के नुकसान-
1. मोटापा-
दही में कैलोरी और फैट होता है जो वजन को बढ़ाने का काम कर सकते हैं. अगर आप वजन को घटाने के लिए डाइट पर हैं तो लो फैट दही का सेवन करें.
2. लैक्टोज इंटोलरेंस-
दही में लैक्टोज होता है, जो लैक्टोज इंटोलरेंस लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए आप दही का सेवन करने से बचें.
3. किडनी-
दही में मौजूद कैल्शियम का हाई लेवल किडनी की समस्या को बढ़ा सकता है. इसलिए अगर आपको किडनी से जुड़ी समस्या है तो आप भूलकर भी दही का सेवन न करें.
4. मेमोरी-
दही का जरूरत से ज्यादा सेवन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है.
5. सर्दी-जुकाम-
दही की तासीर ठंडी होती है, जो अस्थमा रोगियों के लिए सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी की वजह बन सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / कई डिटॉक्स ड्रिंक्स और जूस में, ऐश गार्ड जिसे पेठे के नाम से भी जाना जाता है इसका जूस सेहत के लिए फायदेमंद होता है. ऐश गार्ड पौधा कुकुर्बिटेसी परिवार से संबंधित है. ऐश गार्ड में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फ्लेवोनोइड्स, कैरोटीन, वाष्पशील तेल जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं. ऐश गार्ड की खासियत है कि इसमें 96% पानी पाया जाता है, जो इसे गर्मियों के लिए एक बेहतरीन फूड आइटम बनाता है. ऐश गार्ड जूस का सेवन करने से अनगिनत स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
ऐश गार्ड जूस के स्वास्थ्य लाभ
डायबिटीज कंट्रोल
ऐश गार्ड जूस में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और फैट की मात्रा बहुत कम होती है, जो इसे डायबिटीज में सेवन करने के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन बनाता है. ऐश गार्ड जूस पीने से टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है.
वजन कम करने में
फैट और कैलोरी में कम होने के वजह से ऐश गार्ड जूस का सेवन वजन को कम करने में मदद करता है. ऐश गार्ड में डाइटरी फाइबर और फैट कम करने वाले गुण वजन को कम करने में मदद करते हैं. यह सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने और शरीर की चर्बी घटाने में मदद कर सकता है.
स्किन
कई लाभों के बीच, ऐश गार्ड जूस का सेवन स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. ऐश गार्ड का फल कई ब्यूटी क्रीमों में इस्तेमाल किया जाता है ताकि स्किन बेहतरीन हो सके. ऐश गार्ड जूस की अधिकतम पानी की मात्रा और कूलिंग गुण स्किन पर सूजन और लालिमा को कम करने में मदद करते हैं.
हाइड्रेशन
लगभग 96% पानी की मात्रा के साथ, ऐश गार्ड जूस शरीर को हाइड्रेशन और पोषक तत्वों के लाभ प्रदान करता है. हर दिन ऐश गार्ड जूस पीना शरीर में तरलता स्तर को बनाए रखने और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकता है.
डिटॉक्सिफिकेशन
ऐश गार्ड जूस का सेवन शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है. ऐश गार्ड जूस प्राकृतिक मूत्रन के रूप में काम करता है और मूत्र के माध्यम से शरीर से बैक्टीरिया को निकालने को बढ़ावा देने में मदद करता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आपने अंजीर का पानी, जीरे का पानी, अजवाइन का पानी पीने के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने किशमिश का पानी पीने के बारे में सुना है? किशमिश को रात भर पानी में भिगोकर और अगली सुबह उस पानी को छानकर अलग करना ही किशमिश का पानी कहलाता है, जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. ये लाभ मुख्य रूप से किशमिश में मौजूद पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से होते हैं, जो पानी में मिक्स हो जाते हैं. यहां हम किशमिश के पानी के सेवन के कुछ फायदों के बारे में बता रहे हैं.
किशमिश का पानी पीने के गजब फायदे |
1. पाचन में सुधार
किशमिश डाइटरी फाइबर से भरपूर होती है, जो नियमित मल त्याग को बढ़ावा देकर और कब्ज को रोककर पाचन प्रक्रिया में सहायता करती है. पानी फाइबर को नरम करने में मदद करता है, जिससे शरीर के लिए इसे पचाना और अवशोषित करना आसान हो जाता है. किशमिश के पानी के नियमित सेवन से पाचन तंत्र हेल्दी रहता है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर का खतरा कम हो जाता है.
2. डिटॉक्सिफिकेशन
किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक यौगिक हानिकारक टॉक्सिन्स को हटाकर लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं. पानी से हाइड्रेशन किडनी फंक्शन में भी सहायता करता है. इस डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस से एनर्जी लेवल में सुधार हो सकता है.
3. इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देना
किशमिश में जरूरी विटामिन जैसे विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन के साथ-साथ फेनोलिक यौगिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं. बढ़ी हुई इम्यूनिटी शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.
4. बेहतर हार्ट हेल्थ
किशमिश में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो सोडियम लेवल को संतुलित करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है. इनमें डाइटरी फाइबर और पॉलीफेनोल्स भी होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. नियमित सेवन से हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक सहित हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है.
5. आयरन लेवल बढ़ना
किशमिश आयरन का अच्छा स्रोत है, जो रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन के लिए जरूरी है. पानी इस आयरन के बेहतर एब्जॉर्प्शन में मदद करता है. इससे एनीमिया को रोकने और एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
6. बोन हेल्थ
किशमिश में कैल्शियम और बोरोन होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और मजबूती के लिए जरूरी है. किशमिश को पानी में भिगोने पर ये मिनरल बेहतर अवशोषित होते हैं. रेगुलर सेवन से हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद मिल सकती है.
7. स्किन हेल्थ
किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. इनमें विटामिन ए और ई भी होते हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. इसकी वजह से स्किन ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकती है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /किडनी की पथरी जिसे किडनी स्टोन भी कहा जाता है, एक सामान्य मेडिकल कंडिशन है जो बहुत तकलीफदेह हो सकती है. कभी-कभी इसका पता बहुत देर से चलता है, जब स्टोन बड़ा हो चुका होता है. ऐसे में किडनी की पथरी का असहनीय दर्द पूरी दिनचर्या को खराब कर सकता है. किडनी की पथरी तब बनती है जब यूरिन में मिनरल और अन्य पदार्थ मिलकर क्रिस्टल के रूप में जम जाते हैं. यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. कई बार किडनी की पथरी का ऑपरेशन करवाना पड़ जाता है, तो कुछ मामलों में इसे दवा खाकर भी ठीक किया जा सकता है. ये तो हो गया किडनी की पथरी का इलाज, लेकिन क्या आप किडनी की पथरी का कारण जानते हैं, कि आखिर ये समस्या किस वजह से होती है? यहां हम किडनी की पथरी होने के कुछ कारणों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आप बचाव कर सकते हैं या सुधार कर सकते हैं.
किडनी में पथरी बनने का कारण |
1. पानी की कमी
पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से किडनी में मिनरल और सॉल्ट की डेंसिटी बढ़ जाती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है. दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए.
2. खानपान
डाइट में ज्यादा मात्रा में कैल्शियम, ऑक्सालेट का सेवन भी पथरी का कारण बन सकता है. जैसे कि पालक, चुकंदर, आलू, चाय, चॉकलेट और नट्स का ज्यादा मात्रा में सेवन.
3. वंशानुगत कारण
अगर आपके परिवार में किसी को किडनी की पथरी हो चुकी है, तो आपको भी इसके होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है. यह वंशानुगत हो सकता है.
4. मोटापा
मोटापा और ज्यादा वजन होने से किडनी की पथरी बनने का जोखिम बढ़ जाता है. शरीर में चर्बी बढ़ने से यूरिन में पथरी बनाने वाले तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है.
5. शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना
फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी किडनी की पथरी के निर्माण में योगदान कर सकती है. नियमित व्यायाम से शरीर में मिनरल्स और लवणों का संतुलन बना रहता है.
6. अन्य बीमारियां
कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे हाइपरपैराथायरॉइडिज्म, किडनी की बीमारियां और गैस्ट्रोइंटेस्टिनल बीमारियां भी पथरी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.
7. कुछ दवाओं का सेवन
कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन करने से भी पथरी की समस्या हो सकती है. जैसे कि ड्यूरेटिक्स, कैल्शियम सप्लीमेंट्स और एंटी-एसिड दवाइयां.
8. पेशाब रोककर रखना
माना जाता है कि पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखने से भी पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि इससे यूरिन में खनिज और लवण का स्तर बढ़ जाता है.
9. शारीरिक और मानसिक तनाव
लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक तनाव में रहने से भी शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है.
10. विटामिन डी की अधिकता
विटामिन डी की ज्यादा मात्रा शरीर में कैल्शियम लेवल को बढ़ा सकती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / नींबू पानी सदियों से अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है. यह ताजगी देने वाला पेय आपके शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत है, लेकिन अगर आप इसमें कुछ एक्स्ट्रा सामग्री मिलाएं, तो यह आपके वजन घटाने की प्रक्रिया में और भी ज्यादा मदद कर सकता है. आज हम बात करेंगे एक ऐसी चीज की, जिसे अगर आप नींबू पानी में मिलाकर रोजाना पिएं, तो यह आपकी पेट की चर्बी और पूरे शरीर की चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है. बढ़ती चर्बी और वजन आजकल एक आम समस्या बन गई है. लोग अपने पेट के मोटापे और बॉडी फैट को घटाने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. अगर आप भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो नींबू पानी में एक खास चीज मिलाकर पीने से आपको बहुत फायदा हो सकता है. चलो जानते हैं, वह चीज क्या है और कैसे इसे नींबू पानी में मिलाकर पीने से आपकी चर्बी घट सकती है.
नींबू पानी में क्या मिलाकर पीना फायदेमंद है? |
नींबू - 1
गुनगुना पानी - 1 गिलास
शहद - 1 चम्मच
बनाने का तरीका:
सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी लें.
इसमें एक नींबू का रस निचोड़ लें.
अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं.
इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और सुबह खाली पेट पिएं.
शहद और नींबू पानी के फायदे |
वजन घटाने में सहायक: शहद और नींबू पानी का सेवन वजन घटाने में बहुत प्रभावी माना जाता है. यह मिश्रण शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को घटाने में मदद कर सकता है.
पाचन तंत्र को सुधारता है: यह पेय आपके पाचन तंत्र को सुधार सकता है और भोजन के पाचन को तेज कर सकता है.
डिटॉक्सिफिकेशन: नींबू पानी और शहद शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है.
मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा: यह पेय आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा दे सकता है, जिससे आपकी कैलोरी बर्न करने की क्षमता बढ़ती है.
इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है: नींबू में विटामिन सी होता है, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा दे सकता है.
सावधानियां:
शहद का उपयोग सीमित मात्रा में करें क्योंकि ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है. अगर आपको किसी भी प्रकार की एलर्जी है या किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, तो इस पेय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें.
इस बात रखें ध्यान:
नींबू पानी में शहद मिलाकर पीने से आपके पेट की चर्बी और शरीर की चर्बी घटाने में मदद मिल सकती है. यह मिश्रण न केवल वजन घटाने में मददगार है, बल्कि आपकी सेहत को भी कई अन्य फायदे पहुंचाता है. इसलिए इसे अपने रूटीन में शामिल करें. साथ ही आपको इसके साथ एक हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट रूटीन भी फॉलो करना पड़ेगा. हेल्दी चीजें खाएं और रोजाना एक्सरसाइज करें.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
