July 31, 2026
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    ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /आजकल धूल मिट्टी की वजह से हमारी स्किन भी डल हो जाती है. चेहरे की नेचुरल चमक कहीं खो जाती है. इसी को वापस पाने और कुदरती चमक पाने के लिए लोग संघर्ष करते हैं. न जाने लोग ग्लोइंग स्किन के लिए कितने ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लगाते हैं, लेकिन रिजल्ट उतना नहीं मिल पाता है जैसे हमें चाहिए. हम सभी जानते हैं कि नेचुरल चीजें स्किन के लिए कितना कमाल कर सकती हैं. जब हम अपने सेल्फ केयर पर ध्यान देते हैं, तो न सिर्फ हमारी त्वचा पर इसका जबरदस्त असर देखने को मिलता है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ावा मिलता है. हमारे किचन में ही कुछ चीजें हैं जिन्हें आजमाकर आप नेचुरल ग्लो पा सकते हैं और अपनी त्वचा से डार्क सर्कल, दाग-धब्बों को दूर कर सकता है. साथ ही साथ झुर्रियों को कम करने में मदद भी मददगार हो सकता है.
    चेहरे को प्राकृतिक चमक देने के लिए लगाएं ये घरेलू चीजें |
    चेहरे की देखभाल में घरेलू नुस्खे हमेशा से ही जरूरी रहे हैं. जब त्वचा की प्राकृतिक चमक बढ़ाने की बात आती है, तो हमारे किचन में मौजूद कुछ साधारण चीजें बड़े काम आ सकती हैं. उनमें से एक है बेसन और दही का मास्क, जिसमें एक खास चीज की चुटकी मिलाने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है. आइए जानते हैं इस खास नुस्खे के बारे में.
    सामग्री:
        1. बेसन 2 बड़े चम्मच
        2. दही  2 बड़े चम्मच
        3. हल्दी एक चुटकी
    यंग दिखने के लिए लगाएं फेस पर ये चीजें:
    1. बेसन: बेसन त्वचा के लिए एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है. यह त्वचा से गंदगी और मृत कोशिकाओं को हटाकर उसे साफ और कोमल बनाता है.
    2. दही: दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे हाइड्रेटेड रखता है. यह त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है.
    3. हल्दी: हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और उसे हेल्दी बनाते हैं. हल्दी त्वचा की रंगत को भी निखारने में मदद करती है.
    नेचुरल फेस पैक बनाने का आसान तरीका:
    1. एक कटोरी में 2 बड़े चम्मच बेसन लें.
    2. इसमें 2 बड़े चम्मच दही मिलाएं.
    3. अब इसमें एक चुटकी हल्दी डालें और सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट बना लें.
    4. इस पेस्ट को अपने साफ चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं.
    5. इसे 15-20 मिनट तक सूखने दें.
    6. सूखने के बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें और साफ तौलिए से थपथपाकर सुखा लें.
    जानिए क्या लाभ मिलेगा:
        ताजगी और चमक: यह मास्क त्वचा को तुरंत ताजगी और चमक प्रदान करता है.
        मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाना: बेसन की मदद से मृत त्वचा कोशिकाएं हटती हैं, जिससे त्वचा साफ और नई दिखती है.
        स्किन इंफेक्शन से बचाव: हल्दी के एंटीसेप्टिक गुण स्किन को इंफेक्शन से बचाते हैं और उसे हेल्दी बनाते हैं.
        नमी और पोषण: दही त्वचा को नमी और पोषण प्रदान करता है, जिससे त्वचा मुलायम और कोमल बनी रहती है.
    इस घरेलू नुस्खे को हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल करने से आप अपनी त्वचा की रंगत और बनावट में एक सकारात्मक बदलाव देख सकते हैं. ध्यान रहे कि किसी भी नई चीज का उपयोग करने से पहले अपनी त्वचा पर एक पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी भी प्रकार की एलर्जी से बचा जा सके.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार कहा जाता है. हिंदू पंचांग में साल की सभी 24 एकादशियां भगवान विष्णु को समर्पित हैं. वैशाख माह में आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस साल 20 मई, सोमवार को मोहिनी एकदाशी का व्रत और पूजा की जा रही है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार अपनाकर दानवों को मोहित कर लिया था और समुद्र मंथन से निकला अमृत उनसे लेकर देवताओं को दे दिया जिससे देवता अमर हो गए थे. कहा जाता है कि इसी दिन राहू और केतूका जन्म हुआ था. चलिए जानते हैं कि राहु केतु के जन्म का मोहिनी एकादशी से क्या संबंध है.
    राहु केतु की कथा
    ज्योतिषशास्त्र में राहु केतु को पापी छाया ग्रह कहा गया है. मान्यता है कि इनकी वजह से ही हर बार सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है. राहु और केतु पहले अलग-अलग ग्रह नहीं थे. ये दोनों एक ही शरीर से जन्में राक्षस ग्रह हैं. जब समुद्र मंथन हो रहा था तब देवता और दानव समुद्र मंथन से निकले अमृत को पाने के लिए लड़ रहे थे. ऐसे में बाहुबल की वजह से अमृत कलश दानवों के पास चला गया था. तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और दानवों को अपने रूप के मोह में बांध लिया. मोहिनी के मोह में दानव बेसुध हो गए और उन्होंने अमृत से भरा कलश भगवान विष्णु को दे दिया. भगवान विष्णु ने देवताओं को ये कलश दे दिया. देवता पंक्ति में बैठकर अमृत का पान कर रहे थे. ऐसे में एक राक्षस स्वरभानु भी भेष बदलकर इस पंक्ति में था और धोखा देकर उसने अमृत का पान कर लिया. लेकिन, उसी वक्त सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को उसकी सच्चाई बता दी. भगवान विष्णु ने क्रोध में आकर स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर डाला. चूंकि स्वरभानु अमृत का पान कर चुका था इसलिए उसका वध नहीं हो पाया और उसका शरीर दो राक्षसों में बंट गया. उसका सिर राहु कहलाया और धड़ केतु कहलाया.
    सूर्य और चंद्रमा से खास है दुश्मनी  
    चूंकि सूर्य और चंद्रमा ने ही स्वरभानु को देखकर उसकी सच्चाई भगवान विष्णु को बता दी थी, इसलिए राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से दुश्मनी रखते हैं. ये दोनों ग्रह समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण का कारण बन जाते हैं. सर्प की आकृति वाले राहु और केतु के चलते ही सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण लगता है. राहु और केतु अमृतपान के चलते मर नहीं सकते और ये हमेशा सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते रहेंगे. राहु और केतु भी जातकों पर ज्योतिषीय असर डालते हैं. कहा जाता है कि जिसकी कुंडली में राहु और केतु मजबूत स्थिति में होते हैं, उनकी जिंदगी में परेशानियां कम होती हैं. वहीं जिनकी कुंडली में राहु केतु नीच स्थिति में होते हैं, उनकी जिंदगी में काफी परेशानियां होती हैं. राहु और केतु का दोष लगने पर व्यक्ति तनाव और अनिद्रा का शिकार हो जाता है. वो गलत फैसले करता है और उनका खामियाजा भुगतता है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत हर माह में 2 बार आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में पड़ने वाली 24 एकादशियों को सभी तिथियों में महत्वपूर्ण कहा जाता है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु  के मोहिनी अवतार की पूजा की जाती है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है. कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन के समय अमृत कलश के लिए देवों और दानवों के बीच युद्ध चल रहा था तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर दानवों को मोहित कर लिया था और अमृत कलश उनसे लेकर देवताओं को दे दिया था. इसलिए मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की पूजा की जाती है.जानिए इस बार मोहिनी एकादशी किस दिन पड़ रही है और इस दिन व्रत के साथ-साथ पूजा की विधि क्या है.
    कब है मोहिनी एकादशी
    हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यानी 2024 में एकादशी तिथि का आरंभ 18 मई को सुबह 11 बजकर 22 मिनट पर हो रहा है. एकादशी तिथि का समापन 19 मई की दोपहर एक बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के लिहाज से देखा जाए तो इस साल मोहिनी एकादशी का व्रत और पूजा 19 मई यानी रविवार के दिन की जाएगी. मोहिनी एकादशी की पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो 19 मई को सुबह 7 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक पूजा का शुभ समय है. व्रती और अन्य भक्त इस समय भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कर सकते हैं. मोहिनी एकादशी का पारण 20 मई सुबह 5 बजकर 28 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक किया जा सकता है.
    मोहिनी एकादशी की पूजा विधि
    मोहिनी एकादशी पर व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए. इसके पश्चात भगवान को स्नान करवाएं और उनको पीले वस्त्र पहनाएं. इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर उनके सामने धूप और दीप प्रज्वलित करें. एकादशी के व्रत का संकल्प करते हुए तुलसी दल, नारियल, फल और मिठाई अर्पित करें. पंचामृत चढ़ाएं और भगवान की आरती करें. इसके पश्चात ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें. इसके बाद आप गरीबों को दान करें और भोजन करवाएं. कहा जाता है कि मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा के साथ-साथ दान करने से जातक को समस्त सांसारिक पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन व्रत करने से एक हजार यज्ञों का फल मिलता है.

    कक्षा 10वीं की छात्रा कुमारी पाली ने 95.6 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया

        बालोद / शौर्यपथ / केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। जिसमें जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय दुधली का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा। प्राचार्य जवाहर नवोदय विद्यालय दुधली ने बताया कि सीबीएसई परीक्षा अंतर्गत कक्षा 10 वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। जिसमें कक्षा 10वीं की कुमारी पाली ने 95.6 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। इसी तरह कुमारी पूर्वी चंद्रकार 94.4 प्रतिशत अंक के साथ दूसरे स्थान पर एवं धीरज कुमार 94.2 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कक्षा 10वीं में 38 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए थे, जिसमें सभी 38 परीक्षार्थी उत्तीर्ण रहे। कक्षा 10वीं की परीक्षा परिणाम में 05 परीक्षार्थियों के 90 प्रतिशत से अधिक अंक तथा 22 परीक्षार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए है। कुमारी पाली विज्ञान में 100 अंक में से पूरे 100 अंक अर्जित किए है। इसी तरह कक्षा 12वीं में विज्ञान संकाय के कुल 37 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। जिसमें सभी 37 परीक्षार्थी उत्तीर्ण रहे। कक्षा 12वीं में कुमारी गरिमा सारवा ने 88.6 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रथम स्थान पर, कुमारी पुष्पांजली 83.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरें स्थान पर तथा कुमारी रेणुका 82 प्रतिशत अंक अर्जित कर तीसरे स्थान पर रहीं। कक्षा 12वीं में 17 परीक्षार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने में सफल हुए हैं।

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता  की जयंती मनाई जाती है. इसे सीता नवमी या जानकी नवमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन को माता सीता के धरती पर अवतरण की तिथि माना जाता है. इस वर्ष सीता नवमी या जानकी नवमी मई माह की 16 तारीख को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं सीता नवमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि.
    कब है सीता नवमी |
    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 मई, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 17 मई, शुक्रवार को 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, 16 मई को सीता नवमी या जानकी नवमी मनाई जाएगी. इस दिन भक्त व्रत रखकर माता सीता की विधि-विधान से पूजा करेंगे. सीता नवमी की पूजा के लिए 16 मई को सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. भक्त इस मुहूर्त में माता सीता की पूजा कर सकते हैं.
    सीता नवमी की पूजा विधि
    सीता नवमी को विधि-विधान से माता सीता की पूजा से भक्तों पर माता सीता की असीम कृपा होती है. सीता नवमी की पूजा के लिए व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर तन मन से पवित्र होकर व्रत का संकल्प करना चाहिए. पूजा की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर माता सीता का भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ चित्र स्थापित करें. राम दरबार के चित्र को गंगा जल से अभिषेक कराएं और कुमकुम रोली व अक्षत से तिलक करें. सभी देवी देवताओं को पीले फूलों की माला चढ़ाएं और देसी घी से दीये जलाएं. फल फूल, रोली अक्षत चढ़ाएं और मखाने की खीर से भोग लगाएं. सीता नवमी के दिन रामायण पाठ बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन भजन कीर्तन का आयोजन करें और राम मंदिर जाकर प्रभु श्रीराम और माता जानकी  के दर्शन करें.
    सीता नवमी को राम नवमी की तरह ही पवित्र और शुभ माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से प्रभु श्रीराम और माता सीता की पूजा करनी चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और महादान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / दुनियाभर में अधिकतर लोगों की सुबह की शुरुआत कॉफी के साथ होती है. सुबह की नींद भगाने से लेकर दिनभर की थकावट को दूर करने के लिए कॉफी पीने का चलन आम है. सेहत के प्रति अक्सर जागरूक लोग ब्लैक कॉफी  पीना पसंद करते हैं. इसमें दूध चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. वैज्ञानिकों ने भी रिसर्च में पाया है कि ब्लैक कॉफी पाए जाने वाला कैफीन शरीर में डोपामाइन, सेरोटोनिन और नोराड्रीनलीन की मात्रा को बढ़ाता है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ मैंग्नीज, क्लोरोजेनिक एसिड, पॉलीफेनॉल्स, कैल्शियम, पौटेशियम, मैग्नीशियम ,विटामिन बी2, बी3 और बी4 की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जोकि सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. जानिए ब्लैक कॉफी के फायदे  क्या-क्या हैं.
    ब्लैक कॉफी पीने के फायदे |
    कॉफी के बीज कॉफिया अरेबिका नाम के पेड़ में लगने वाले फल से मिलते हैं. इस फल से निकलने वाले बीजों को धूप में कुछ दिनों तक सुखाने के बाद भूना जाता है. इसके बाद इन बीजों को पीसकर कॉफी के पाउडर में तब्दील किया जाता है. कुछ लोग इसका सेवन सिर्फ गर्म पानी से ही करते हैं, जबकि इसमें लोग दूध और चीनी मिलाकर भी पीना पसंद करते हैं.
    तनाव को करे दूर - तनाव आजकल लोगों में आम समस्या बन गई है. ऐसे में ब्लैक कॉफी का सेवन करने से तनाव  कम होता है. दरअसल, कॉफी में प्रचुर मात्रा में कैफीन की मात्रा पाई जाती है, जिससे शरीर में खुशी के हार्मोन प्रोड्यूस होते हैं. इसके साथ ही थकान, तनाव और सुस्ती दूर होती है.
    दिल को रखे स्वस्थ - रोजाना एक या दो कप कॉफी पीने से हार्ट को फायदा मिलता है. इसके सेवन से स्ट्रोक के साथ-साथ दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा टलता है.
    वजन कम करने में मददगार - कॉफी में कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है जिससे तेजी से फैट कम होता है. कसरत करने से पहले इसका सेवन जरूर करें. इससे ऊर्जा मिलती है और आप ज्यादा देर तक कसरत कर पाते हैं.
    लिवर को मिलेगा फायदा - कॉफी फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करती है. ब्लैक कॉफी का रोजाना सेवन करने से इसमें पाए जाने वाले तत्व हानिकारक लीवर एंजाइम के लेवल को कम करते हैं.
    डायबिटीज से मिलेगी राहत - ब्लैक कॉफी का सेवन करने से डायबिटीज की समस्या दूर हो सकती है. कॉफी पीने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा में इजाफा होता है, जिससे डायबिटीज  की समस्या को कम किया जा सकता है.

     सेहत टिप्स /शौर्यपथ / मां के लिए बच्चे का स्वास्थ्य सर्वोपरि प्राथमिकता होती है. बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए वह हर संभव प्रयास करती हैं. वे अपने बच्चों के लिए बेहद सावधानी बरतती हैं और उन्हें सभी पोषक तत्वों से भरपूर डाइट प्रदान करती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी चीज भी है जो एक मां अपने बच्चे को दिन में एक बार खिलाती है, तो उसका बच्चा हमेशा हेल्दी रहता है और उसका दिमाग भी तेज होता है? आज हम इस मदर्स डे पर आपको ऐसी एक चीज के बारे में बता रहे हैं जिसे हर मां अपने बच्चे को खिलाकर हेल्दी, तंदरुस्त और तेज बना सकती है.
    मां को अपने बच्चे को क्या खिलाना चाहिए?
     वह है खजूर. खजूर कई पोषक तत्वों और एनर्जी का अच्छा स्त्रोत है जो बच्चों के लिए बहुत लाभकारी होता है. यह उन्हें जरूरी पोषण प्रदान करता है जो उनकी ग्रोथ और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. खजूर में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाये जाते हैं, जो बच्चों की मजबूती और स्वस्थता को बनाए रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा खजूर में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स बच्चों के मस्तिष्क को तेज करते हैं और उनकी सोचने की क्षमता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं. इसलिए एक मां के लिए खजूर एक अच्छा विकल्प है जिसे वह अपने बच्चे को रोज दे सकती है, ताकि उनका बच्चा हमेशा स्वस्थ रहे.
    दूध में मखाना भिगोकर खाना:
    मखाना और दूध का संयोजन एक अच्छा कॉम्बो माना जाता है. ये बच्चों के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने में मदद कर सकता है. मखाना एक पोषक फल है जो कि प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है. दूध भी हाई प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी का स्त्रोत होता है. इन दोनों का संयोजन बच्चों के अच्छा पोषण मिलता है. मखाना में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ताकतवर एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो बच्चों को मजबूत बनाते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. दूध में मौजूद कैल्शियम और मखाने की प्रोटीन बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक होते हैं, जैसे कि हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए.

        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /गंगा नदी को पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है. मान्यता है कि गंगा स्नान से व्यक्ति के जीवनभर के पाप धुल जाते हैं. हर वर्ष वैशाख के माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. इस वर्ष  वैशाख के माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 14 मई को है और इस दिन गंगा सप्तमी का त्योहार मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने गंगा नदी के प्रवाह के वेग को कम करने के लिए उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया था. गंगा सप्तमी के दिन लोग गंगा में स्नान कर पूजा व दान करते हैं. आइए जानते हैं गंगा सप्तमी से जुड़ी कथाएं.
    गंगा सप्तमी की कथा
    पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर ने युद्ध में मारे गए अपने पुत्रों को मोक्ष के लिए कठोर तपस्या कर गंगा को धरती पर अवतरित करवाया था. गंगा नदी का वेग इतना ज्यादा था कि उससे पूरी पृथ्वी का संतुलन बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया था. ऐसे में भगवान शिव ने गंगा नदी का अपने जटाओं में धारण कर लिया और नियंत्रित रूप से धरती पर अवतरित होने दिया. भगवान शिव ने गंगा नदी को वर्ष वैशाख के माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि अपनी जटाओं में धारण किया था. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस दिन गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थीं.
    जाह्नवी पड़ा नाम
    एक अन्य कथा के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी का पुनर्जन्म हुआ था. महर्षि जह्नु तपस्या कर रहे थे लेकिन गंगा नदी के बहने की कल कल ध्वनि से उनका ध्यान भटक रहा था. इससे क्रोधित हो महर्षि जह्नु ने पूरी गंगा नदी को पी गए. बाद में देवी देवताओं की प्रार्थना करने पर गंगा नदी को अपने दाएं कान से बाहर कर दिया इसलिए गंगा नदी को जाह्नवी नाम मिला.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / आजकल कई कारणों से कब्ज की समस्या होने लगी है. आपको तनाव और बढ़ती गर्मी के कारण अपच या कब्ज की समस्या होती है, तो कब्ज से छुटकारा पाने के लिए कुछ जरूरी उपाय भी करने चाहिए. कब्ज पाचन की गड़बड़ी के कारण होती है. अगर आपका पाचन खराब है और पेट साफ करने में परेशानी आ रही है, तो सब्जा के बीज आपके लिए कमाल कर सकते हैं. कुछ लोग पेट की गंदगी साफ करने के लिए दवा लेते हैं, लेकिन आप नेचुरल तरीके से कब्ज का इलाज कर कर सकते हैं. सब्जा बीज, जिसे तुलसी बीज या बेसिल सीड्स भी कहा जाता है, कई गुणों से भरपूर होते हैं और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है. इनमें से एक है कब्ज का इलाज करना. यहां जानिए कैसे सब्जा के बीज कब्ज से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकते हैं.
    कब्ज से राहत पाने के लिए सब्जा के बीज |
    सब्जा बीज में हाई फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, विटामिन के और विटामिन सी होता है. ये तत्व आपकी पाचन प्रक्रिया को सुधारते हैं और आपको कब्ज से राहत दिलाते हैं. कब्ज के इलाज के लिए रात में सब्जा बीज का सेवन करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. सब्जा बीज को पानी में भिगोकर रखें, जिससे ये फूल जाएं. अगर आप चाहें, तो इसे दूध के साथ भी ले सकते हैं. आप इसे रात को भिगोकर खा सकते हैं, जिससे सुबह पेट साफ होने में मदद मिलेगी. चाहे तो आप इसे सुबह खाली पेट भी ले सकते हैं.
    सब्जा बीज में मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और अपच को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा ये बारीक रूप से पीसे हुए होते हैं, इसलिए आपके आंतों को सुखद अनुभव मिलता है और आपकी पाचन प्रक्रिया को सुधारता है.
    अगर आपको किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है या अगर आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / सनातन धर्म में हर एक तिथि का विशेष महत्व बताया गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार स्कंद षष्ठी व्रत के दिन भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान कार्तिकेय का नाम स्कंद है. जो व्यक्ति इस दिन व्रत करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है. इसके अलावा उन्हें संतान प्राप्त होती है. स्कंद षष्ठी व्रत मुख्यतः दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक माना गया है. इस बार स्कंद षष्ठी 13 मई, 2024 को पड़ रही है. आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त और इसके महत्व के बारे में.
    स्कंद षष्ठी व्रत 2024 |
    स्कंद षष्ठी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है जिसकी शुरुआत 13 मई, 2024 को सुबह 2:03 बजे से हो रही है. इसका समापन अगले दिन यानी 14 मई, 2024 को सुबह 2:50 बजे पर होगा.
    स्कंद षष्ठी का महत्व
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय को समर्पित की गई है. मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय ने संसार में बढ़ रहे कुकर्म को समाप्त करने के लिए जन्म लिया था. भगवान कार्तिकेय दक्षिण भारत में मुरूगन, कुमार, सुब्रमण्यम  जैसे नामों से प्रसिद्ध हैं. प्रचलित मान्यता के अनुसार च्यवन ऋषि ने स्कंद षष्ठी को उपासना की थी, जिसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई थी.
    स्कंद षष्ठी के दिन क्या करें और क्या ना करें
    स्कंद षष्ठी के दिन भगवान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कार्तिकेय के निमित्त व्रत रखकर उनकी विधि-विधान से पूजा करने से हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है, संतान की प्राप्ति होती है और धन वैभव बढ़ता है. इस दिन दान करना भी बेहद पुण्यकर माना जाता है. स्कंद षष्ठी के दिन स्कंद देव की स्थापना करने से और उनके समक्ष अखंड दीपक जलाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.

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