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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /बच्चे अपने आसपास के माहौल से बहुत से कुछ सीखते हैं. कुछ बच्चे स्वभाव से बहुत सीधे और कुछ बहुत जिद्दी किस्म के बन जाते हैं. जिद्दी बच्चों से माता पिता काफी परेशान रहते हैं और बहुत बार उनकी बेतुकी जिद्द भी पूरी करनी पड़ती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे जिद्दी क्यों बन जाते हैं? कई बार हम अपनी अनजानी गलतियों के कारण उन्हें जिद्दी बना सकते हैं. बच्चों की यह आदत किसी भी माता-पिता के लिए चिंताजनक हो सकती है. माता-पिता की कुछ आदतों या गलतियों के कारण बच्चे जिद्दी हो जाते हैं. इन गलतियों को सुधारकर आप अपने बच्चे की सही दिशा में काम करने और आज्ञाकारी बना सकते हैं.
माता पिता की इन गलतियों की वजह से बच्चे जिद्दी बन जाते है |
1. संयम और सीमा न होना
बच्चे के लिए संयम और सीमा की बड़ी भूमिका होती है. बिना सीमाओं के बच्चे ज्यादातर अपनी इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करेंगे, जो जिद्दीपने को बढ़ा सकता है. इसलिए बच्चों को सीमा में रखने की कोशिश करें.
2. क्लियरिटी की कमी
अगर आप बच्चों से बात करते समय क्लियरिटी नहीं रखते हैं, तो बच्चे अपने फैसलों को लेकर असमंजस की स्थिति में पड़ सकते हैं, जो जिद्दीता का कारण बन सकता है.
3. प्रशंसा न करना
बच्चों को सही तरीके से प्रशंसा न मिलना उन्हें असहाय या नाकारात्मक महसूस करा सकता है, जिससे वे जिद्दी बन सकते हैं. बच्चों की सही समय पर प्रशंसा करना जरूरी है.
4. स्वतंत्रता का अभाव
अगर वे हमेशा आपके निर्देशों के अनुसार चलते हैं, तो वे अपनी स्वतंत्रता का अभाव महसूस कर सकते हैं जो जिद्दीपने का कारण बन सकता है.
5. खराब एनवायरमेंट
बच्चों का वातावरण उनको प्रभावित करने वाली बड़ी चीज है. अगर घर में या स्कूल में अप्रिय वातावरण है, तो बच्चे जिद्दी हो सकते हैं.
6. उनकी बातें न सुनना
बच्चों की बातें सुनना जरूरी होता है. अगर आप उन्हें ध्यान से नहीं सुनते, तो वे अनदेखे महसूस कर सकते हैं, जिससे उनमें जिद्दी भावना पैदा हो सकती है.
शौर्यपथ /अच्छी नींद का महत्व हर किसी को पता है और यह तब और बढ़ जाता है जब हम नींद लेने के समय को समझ जाते हैं. ये नींद के समय के महत्व को और भी बढ़ा देता है. अगर आप हर रात समय पर सोते हैं और सुबह समय पर उठते हैं, तो इससे आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर कई प्रभाव पड़ते हैं. अच्छी नींद और नियमित जागरूकता एक हेल्दी और पॉजिटिव लाइफ के लिए जरूरी हैं. आज के दौर में जब लोगों की जिंदगी तेजी से चल रही है, तो सोने और उठने का समय तय करना और उसे अपने रोजमर्रा का हिस्सा बनाना जरूरी है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जल्दी सोना और जल्दी उठना उनके लिए मुश्किल है, लेकिन यह आदत हासिल करना आपके लिए सफलता की कुंजी हो सकती है.
रोज एक ही समय पर सोने और जागने के फायदे |
1. स्वास्थ्य लाभ
नियमित एक समय पर सोने और जागने से इम्यून सिस्टम को बढ़ावा, हाई एनर्जी लेवल और ताजगी का अनुभव होता है. समय पर सोने से आपका शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है और रोगों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है.
2. दिनचर्या में सुधार
नियमित नींद से आपकी दिनचर्या में सुधार होता है, आपका कामकाज अच्छे से होता है और आपका उत्साह बढ़ता है. नियमित सोने से दिन के कार्यों में ज्यादा प्रोडक्टिविटि और स्टेबिलिटी आती है.
3. मानसिक स्वास्थ्य
अच्छी नींद आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी सुधारती है, आपका मूड बेहतर होता है और तनाव कम होता है. समय पर सोने से दिनभर की थकान कम होती है और मनोबल बढ़ता है.
4. खाने की निगरानी
समय पर सोने से आपके खाने का आइडियल टाइम फॉलो होगा, जिससे आपका वजन कंट्रोल रहता है और आप हेल्दी रहते हैं.
5. टाइम मैनेजमेंट
नियमित नींद से आपका टाइम मैनेजमेंट भी बेहतर होता है, आप अपने कार्यों को सही ढंग से ऑर्गेनाइज्ड कर पाते हैं और समय का उपयोग सबसे अच्छे तरीके से करते हैं.
10 बजे सोने और 5 बजे उठने की यह आदत आपके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है. इसे अपनाकर आप एक स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जी सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर राम नवमी मनाई जाती है. राम नवमी पर मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम की पूजा-आराधना की जाती है. माना जाता है कि इस दिन यदि भक्त पूरे मनोभाव से श्रीराम का पूजन करें तो घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन खुशहाल बना रहता है. इससे व्यक्ति की हर मनोकामना की पूर्ति भी हो जाती है. चैत्र नवरात्रि के पश्चात राम नवमी मनाई जाती है. मान्यतानुसार यह इस दिन श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. जानिए इस साल चैत्र माह में राम नवमी किस दिन है और किस तरह इस दिन श्रीराम की पूजा की जा सकती है.
राम नवमी की तारीख |
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की नवमी तिथि 16 अप्रैल दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 अप्रैल दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए राम नवमी 17 अप्रैल, बुधवार के दिन मनाई जाएगी. इस दिन भक्त अपने आराध्य श्रीराम की पूजा कर सकते हैं.
राम नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 17 अप्रैल, सुबह 11 बजकर 10 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक बताया जा रहा है.
राम नवमी पर अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा. इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक रहने वाला है. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर शुरू होकर शाम 7 बजकर 9 मिनट तक रहने वाला है. रवि योग राम नवमी के दिन पूरे दिन रहने वाला है.
राम नवमी पर बन रहा है शुभ योग
इस वर्ष राम नवमी के दिन बेहद ही शुभ योग बन रहा है. यह योग है रवि योग. रवि योग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस योग को बेहद शुभ भी कहा जाता है. इस योग में सूर्य का प्रभाव होता है इसीलिए इस योग में पूजा करने पर माना जाता है कि कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. रवि योग में धर्म-कर्म और पूजा-पाठ बेहद फलदायी माने जाते हैं.
राम नवमी की पूजा-विधि
राम नवमी का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन श्रीराम की पूजा करने के लिए सबसे पहले चौकी सजाई जाती है और उसमें श्रीराम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित की जाती है. जल अर्पित किया जाता है और फिर चंदन, रोली, अक्षत, फूल व फल आदि एक-एक करके अर्पित किए जाते हैं. भोग लगाया जाता है. राम रक्षा स्त्रोत, श्रीराम चालीसा और रामायण की चौपाइयों का पाठ करना इस दिन बेहद शुभ होता है.
आस्था /शौर्यपथ /तुलसी का पौधा सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है. यही कारण है कि घर-घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाया जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार भी कुछ खास पौधों को लगाने और उनसे जुड़े उपाय बताएं गए हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है तुलसी. यही नहीं तुलसी के साथ कुछ और पौधों को लगाने से भी शुभ परिणाम सामने आते हैं. इन पौधों का अपना महत्व है, लेकिन तुलसी के पास लगाने से इनसे मिलने वाले प्रभाव में और वृद्धि हो जाती है. आइए जानते हैं कौन से पौधे तुलसी के साथ लगाने से भाग्योदय होता है.
तुलसी के पौधे के पास लगाएं ये दो खास पौधे
आक का पौधा
आक का पौधा घर को बुरे प्रभावों से बचाता है. आक के फूल भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं. इसके पत्तों में औषधीय गुण पाए जाते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार आक का पौधा लगाने से घर में शुभ फलों को प्राप्ति होती है. आक पौधे को घर के आंगन में तुलसी के पौधे के पास लगाना सबसे शुभ फल प्रदान करने वाला होता है. मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा के लिए शिवलिंग पर आक के पत्ते और फूल चढ़ाना शुभ होता है. आक का पौधा नकारात्मक ऊर्जा और ताकतों से बचाता है
धतुरा
भगवान शिव की पूजा में धतुरा का उपयोग किया जाता है. मान्यता है कि काले धतुरे में भगवान शिव वास करते हैं. घर में धतुरा का पौधा लगाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही धतुरे के पौधे को घर में लगाने से वैवाहिक संबंधों को मजबूती मिलती है. यह पौधा घर में सुख और समृद्धि को बढ़ाने वाला माना गया है. धतुरे के पौधे को आंगन में तुलसी के पौधे के आसपास लगाना चाहिए.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /गर्मियों आ गई हैं. ऐसे में सन बर्न, एक्ने और पिंपल से जुड़ी परेशानियां शुरू हो जाएंगी. इसके लिए आपको पहले से सावधानी बरतनी पड़ेगी, तभी स्किन चमकदार और बेदाग बनी रह सकती है. हम यहां आपको कुछ ऐसे फेस पैक के बारे में बताने वाले हैं, जो आपको गर्मियों में सप्ताह में एक बार जरूर अप्लाई करना चाहिए. इससे आपकी स्किन का ग्लो बना रहेगा.
गर्मियों के फेस पैक
चावल फेस पैक -
चावल के आटे को मिक्सी में अच्छे से पीस लीजिए. फिर इसमें टमाटर का जूसऔर जैतून का तेल मिक्स करके पैक तैयार कर लीजिए. अगर आपकी स्किन ड्राई है तभी तेल मिलाइए. फिर आप इसे 15 मिनट के लिए लगाकर रखिए. इससे चेहरा ग्लोइंग और टाइट होगा.
संतरा फेस पैक -
संतरे के छिलके में, दाल और हल्दी को पीस लीजिए डालकर. अब इसे मिक्सी से निकालकर एक चलनी से चाल लीजिए. फिर इसे एक बाउल में रख दीजिए. अब आप हर रोज नहाते समय लेप की तरह चेहरे पर लगा लीजिए और अच्छे से मसाज करके चेहरे को साफ कर लें. ऐसा करने से कुछ दिन में ही आपकी खोई सुंदरता वापस मिल जाएगी.
शहद फेस पैक -
आप आधा चम्मच शहद लीजिए और उसमें कॉफी पाउडर 1 बड़े चम्मच से मिक्स करिए अच्छे से. फिर चेहरे पर लगा लीजिए. आप चाहें तो इसमें नींबू रस भी मिला सकती हैं. यह ब्लीचिंग एजेंट का बेहतरीन काम करता है. इसके विटामिन सी त्वचा पर निखार लाने का काम करते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / सब्जियों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है ये तो हम सभी जनते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि कुछ सब्जियों के बीज भी सेहत के लिहाज से कम नहीं हैं. जी हां आपने सही सुना. आज हम एक ऐसी ही सब्जी के बीज के बारे में बात कर रहे हैं. कद्दू एक ऐसी सब्जी है जिससे कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं जैसे, कद्दू की सब्जी, कद्दू का हलवा, कद्दू की खीर आदि. कद्दू के बीज का सेवन कर शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. तो चलिए जानते हैं कद्दू के बीज खाने से होने वाले फायदे.
कद्दू के बीज के पोषक तत्व-
कद्दू के बीज कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, सोडियम व फोलेट आदि से भरपूर होते हैं. इसके अलावा कद्दू के बीजों में विटामिन-सी, विटामिन ई जैसे गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं.
कद्दू के बीज खाने फायदे-
1. पाचन-
कद्दू के बीजों में फाइबर के गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं.
2. हड्डियों-
हड्डियों के विकास, उनके निर्माण और देखभाल के लिए कैल्शियम सबसे जरूरी तत्व है. कैल्शियम की कमी ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा हो सकता है. कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए कद्दू के बीज का सेवन कर सकते हैं.
3. डायबिटीज-
कद्दू के बीज को फाइबर का अच्छा सोर्स माना गया है, जो टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
4. स्किन-
कद्दू के बीजों में विटामिन-सी और विटामिन ई की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो स्किन को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /देसी घी को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. घी में मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मददगार हैं. असल में घी में विटामिन ए, डी, के, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम जैसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देसी घी में बताशे खाने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. देसी घी में बताशे खाने से मोमोरी को तेज करने में मदद मिल सकती है. बताशे को आमतौर पर पूजा में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप अपने बच्चे का दिमाग स्ट्रांग करना चाहते हैं तो आप उसे देसी घी के साथ बताशे खिला सकते हैं.
क्या घी के साथ बताशे खाने से मेमोरी को बढ़ा सकते हैं-
देसी घी में मौजूद विटामिन ए, डी, के, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम और बताशे के पोषक तत्व जब एक साथ मिलते हैं तो ये दिमाग के लिए काफी अच्छा माना जाता है. देसी घी में बताशा मिलाकर खाने से मेमोरी को तेज करने में मदद मिल सकती है.
देसी घी के साथ बताशे खाने के अन्य फायदे-
1. पाचन-
जिन लोगों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त या पाचन संबंधी अन्य समस्या होती है उन्हें देशी घी के साथ बताशे खाने से पाचन को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है. घी और बताशे को पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है.
2. वजन बढ़ाने-
देसी घी और बताशे को एक साथ मिलाकर खाने से वजन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. क्योंकि इन दोनों ही चीजों में गुड फैट पाया जाता है, जो शरीर का वजन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
3. हड्डियों-
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आप घी में बताशे मिलाकर का सकते हैं. देसी घी में बताशा मिलाकर खाना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / सिर में खुजली, बालों का पतला होना और झड़ने की समस्या बहुत ज्यादा हो जाती है. कई बार यह समस्या हेयर थिनिंग का रूप ले लती है, जिसमें आपके स्कैल्प पर पैचेज होने लगते हैं. बालों के पतले होने के कुछ सामान्य कारणोंमें तनाव, पोषक तत्वों की कमी, रूसी, ऑयली स्कैल्प थायरॉयड या हार्मोनल असंतुलन शामिल है. इसके साथ ही केमिकल्स का प्रयोग और हीटिंग टूल्स के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से भी बाल झड़ सकते हैं. मेनोपॉज के दौरान भी बालों के पतले होने की समस्या होती है. बाल कमजोरऔर ब्रिटल हो सकते हैं. बालों को रबर बैंड से बांधना, ड्राईनेस, हेयर ड्रायर के अत्यधिक उपयोग आदि से भी ऐसा होता है. इस बारे में हमने बात की ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन से. तो आप भी जानिए शहनाज हुसैन के टॉप 4 घरेलू नुस्खों के बारे में.
एक हफ्ते में बालों का झड़ना रोक सकते हैं ये घरेलू नुस्खे
बालों को झड़ने से रोकने के लिए एप्पल साइडर विनेगर
यह डैमेज और बेजान बालों में जान डालने के लिए अच्छी सामग्री है. इसके लिए एक कटोरे में 2 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर और 1 बड़ा चम्मच नारियल का तेल डालकर मिला लें. इसे अपने सिर पर लगाकर अच्छी तरह से मसाज करें. शावर कैप पहनकर बालों को 40 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें. इस नुस्खे से कुछ ही दिनों में आपको अपने बालों में फर्क नजर आने लगेगा.
बालों को मजबूत और लंबा बनाने के लिए नारियल का दूध
नारियल के दूध में पाए जाने वाले फैटी एसिड्स भी बालों के लिए वरदान से कम नहीं है. यह बालों के झड़ने की समस्या को काफी कम करता है और बालों में चमक लाता है. इसके लिए 1 कप नारियल के दूध में 1/4 करी पत्ते का पाउडर डालकर मिला लें. इसे जड़ों से एंड्स तक लगाएं और 1 घंटे के लिए छोड़ दें. 1 घंटे बाद, बालों को हर्बल शैंपू से धो लें. करी पत्ता प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो बालों के रेशों को मजबूत करने, तेजी से बालों के विकास को प्रोत्साहित करने और बालों के झड़ने को रोकने में मदद करता है. करी पत्ते में मौजूद अमीनो एसिड बालों की मजबूती और चमक बनाए रखने में मदद करता है.
बालों को तेजी से लंबा करने में मदद करेगा तिल का तेल
सफेद, रूखे, डैंड्रफ, झड़ते और पतले बालों के लिए तिल के तेल बहुत अच्छा है. तिल का तेल आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होता है, जो बालों के झड़ने की समस्या को कम करने और आपके बालों हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है. यह आपके स्कैल्प को स्वस्थ और तेजी से बालों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है. 2 बड़े चम्मच तिल के तेल को गुनगुना गर्म कर लें. इसके बाद कॉटन की मदद से इसे अपनी जड़ों में और एंड्स पर लगाएं. 10 मिनट अच्छी तरह मसाज करें और फिर 30 मिनट के बाद बालों को हर्बल शैंपू की मदद से धो लें.
बालों का झड़ना रोक नए बाल उगाने के लिए क्या करें
सर्दियों में स्कैल्प के रूखेपन और फ्लैकी होने के कारण डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. डैंड्रफ बालों के झड़ने का कारण बन सकता है. डैंड्रफ और दोमुंहे बालों के लिए हॉट ऑयल थेरेपी एक अच्छा ऑप्शन है. हफ्ते में एक या दो बार शुद्ध नारियल तेल को गर्म करके बालों और स्कैल्प पर लगाएं. सिरों पर भी लगाएं. एक तौलिये को गर्म पानी में डुबोएं और फिर निचोड़ कर पानी निकाल दें. गर्म तौलिये को सिर पर पगड़ी की तरह लपेट लें. इसे पांच मिनट तक लगा रहने दें. ऐसा करीब 3-4 बार करें. आप तेल रात भर लगाकर भी छोड़ सकते हैं और फिर दूसरे दिन बालों को धो लें.
तेज से गिर रहे हैं बाल, तो किन बातों का रखें ख्याल
अगर आपके बाल झड़ रहे हैं तो डाइट पर ध्यान दें. रोजाना एक छोटी कटोरी स्प्राउट्स खाएं. स्प्राउट्स में अमीनो एसिड होता है जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
अपने डेली मील में ताजे फल, कच्चा सलाद, पत्तेदार हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दही शामिल करें.
डैंड्रफ है तो खूब पानी पिएं. एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाएं और सुबह सबसे पहले इसका सेवन करें.
तनाव कम करने का प्रयास करें. योग सीखें और रोजाना इसका अभ्यास करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /खानपान की ऐसी अनेक चीजें हैं जो वजन घटाने में मददगार होती हैं. इन्हीं में से एक है मेथी. पीले मेथी के दानों का सही तरह से सेवन किया जाए तो शरीर का वजन कम होने लगता है और बाहर निकलता पेट अंदर जाना शुरू हो जाता है. मेथी के दाने सोल्यूबल फाइबर से भरपूर होते हैं जिस चलते इनके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती है. इन दानों में कॉपर, रिबोफ्लेविन, विटामिन ए, बी6, सी, के, कैल्शियम, आयरन और फॉलिक एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है. यहां जानिए किन-किन तरीकों से मेथी के दानों का सेवन किया जाए जिससे वजन घटने में असर दिखने लगे.
वजन घटाने के लिए मेथी के दाने |
मेथी दाने का पानी
रात के समय एक गिलास में 2 चम्मच मेथी के दाने डालें और रातभर भीगने के लिए रख दें. इन भीगे दानों वाले पानी को अगली सुबह हल्का गर्म करें और छानकर पी लें. आप चाहे तो मेथी के भीगे दाने भी खा सकते हैं या फिर इन दानों से फेस पैक या हेयर मास्क बनाकर लगा सकते हैं. मेथी के दानों का पानी पीने पर मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होता है और शरीर का एक्सेस फैट बर्न होने लगता है.
मेथी दाने की चाय
जिस तरह मेथी के दानों का पानी बनाया जाता है कुछ-कुछ उसी तरह मेथी के दानों की चाय तैयार होती है. फर्क बस तापमान का होता है. मेथी के दाने बर्तन में डालें और पानी के साथ अच्छी तरह उबाल लें. जब पानी एकदम उबल जाए तो कप में छानकर निकालें. इस चाय को पीने पर क्रेंविग्स कंट्रोल होती है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा नहीं होती. सुबह या शाम के समय मेथी के दानों की यह चाय पी जा सकती है.
मेथी दानों का सलाद
जिस तरह मूंग की दाल या चने का अंकूरण किया जाता है बिल्कुल उसी तरह मेथी के दानों का अंकूरण किया जा सकता है. स्प्राउट्स किए गए मेथी दानों की चाय बनाकर खा सकते हैं. इन दानों में सब्जियां काटकर डालें और नींबू भी निचोड़ें. इससे स्वाद तो अच्छा आएगा ही साथ ही वजन कम होगा सो अलग.
खाना खजाना /शौर्यपथ / कढ़ी का नाम सुनते ही बच्चों के ही नहीं बड़ों के मुंह में भी पानी आ जाता है. यह बहुत ही स्वादिष्ट होती है. बता दें कि , कढ़ी एक भारतीय डिश है जिसमें बेसन की गाढ़ी ग्रेवी बनाई जाती है और उसमें बेसन के ही पकोडे तलकर डाले जाते है. कढ़ी को हल्का और खट्टा बनाया जाता है, जिसके लिए उसमें दही मिलाई जाती है. दरअसल, उत्तरी भारत में कढ़ी बड़े शौक से खाई जाती है और इसके साथ लोग चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं. वहीं पूरे भारत में अलग अलग जगहों पर कढ़ी बनाने का तरीका भी अलग है और काफी जगह पर तो इसे हरी सब्जियां डालकर भी बनाया जाता है. मगर एक अच्छी कढ़ी वह है जिसे अच्छी तरह से उबाला जाता है और धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकाने से उसमें खुशबू आती है, स्वाद आता है और यह गाढ़ी होती है. वैसे तो कढ़ी से कभी दिल नहीं भरता, मगर कई बार कढ़ी खाते खाते बोरियत होने लगती है. जी हां, आज हम आपके लिए कढ़ी की नई रेसिपी (Recipe) लेकर आए हैं, जिसे बिना पकोड़े के बनाया जाता है.
ऐसे में अगर आप कुछ डिफरेंट ट्राई करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है.
आलू की बाटी बनाने के लिए आप एक बाउल में बेसन डालें और इसमें उबले आलू और सभी मसाले, पानी आदि डालकर एक घोल तैयार कर लें.
कड़ाही में आलू की बाटी डालें और इसे अच्छी तरह से पका लें. अब एक प्लेटमें इसे निकाल लें और साइड में रख दें बस हो गया तैयार आधा काम. आप चाहें तो आलू को बिना उबला बेसन में भरकर भी आलू की बाटी को बना सकते हैं.
1.कढ़ी बनाने के लिए अब आप दही में थोड़ा बेसन लें और अच्छी तरह से घोल लें और अलग रख दें.
2.दही अगर खट्टा होगा, तो कढ़ी का स्वाद ज्यादा अच्छा लगेगा.
3.इसलिए हो सके तो दही को एक रात पहले फ्रिज से बाहर निकाल कर रख लें.
4.कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें राई दाना और मेथी दाना डालें.
5.आप प्याज और लहसुन को अच्छी तरह से भून लें.
6.अगर घोल गाढ़ा हो रहा है, तो आपको उसमें छाछ या फिर हल्का-सा पानी डाल कर उसके गाढ़ेपन को दूर कर दें.
7.जब कढ़ी अच्छी तरह से पाक जाए तो उसमें बेसन की बाटी को डाल दें और अब कुछ देर कढ़ी को उबलने दें.
8.ध्यान रखें, कढ़ी जितनी अच्छी तरह से उबलेगी यह उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। आखिर में कढ़ी में एक तड़का लगाना है.
सेहत टिप्स/शौर्यपथ/ कैलोरी में कम और पानी की मात्रा अधिक होने के कारण, खीरा वजन घटाने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन में बहुत प्रभावी है. इन्हें कच्चे सलाद के रूप में डेली डाइट में लिया जा सकता है. इसके अलावा, नाश्ते के दौरान खीरे का जूस पीने से यूरिनरी इंफेक्शन से बचाव हो सकता है. खीरे का गूदा या उसका रस त्वचा पर लगाने से सनबर्न के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है, मुंहासों से बचाव होता है और आंखों के आसपास काले घेरे और सूजन भी कम होती है. ऐसा खीरे के कैसेले गुण के कारण होता है. लेकिन ये सारे फायदे आपको तभी मिलेंगे जब इसको सही समय पर खाएंगे, इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में बताएंगे.
खीरा खाने का सही समय क्या
- आपको बता दें कि खीरे को दिन में ही खाना चाहिए. इससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है. इससे आप ओवरीटिंग से बच जाते हैं. इसमें 95 प्रतिशत पानी होता है, जिससे डिहाइड्रेशन की परेशानी नहीं होती है. यह इम्यूनिटी और हड्डियों को मजबूत करता है.
- रात में आप खीरा खाते हैं तो पेट भारी हो सकता है. इसे पचाना मुश्किल हो सकता है. यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है. जिनका पाचन कमजोर है उन्हें रात में खाने से बचना चाहिए.
- आप सुबह के समय खीरा खाते हैं, तो आपके हेल्थ के लिए अच्छा होगा. यह आपके वजन को भी कंट्रोल करता है. खाने से आधे घंटे पहले आपको खीरा खाना चाहिए. क्योंकि खीरा पचने में समय लगता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / बेल पत्र कैल्शियम और फाइबर के साथ-साथ विटामिन ए, सी, बी1 और बी6 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है. बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि ये पत्तियां कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद होती हैं और यही कारण है कि आपको रोजाना इसको खाना चाहिए. जब आप रोजाना सेवन करते हैं, तो यह पेट से संबंधित समस्याओं में राहत देने, हृदय स्वास्थ्य और लीवर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट भी इस पत्ती को डेली रूटीन में शामिल करने की बात कहते हैं.
वैसे तो इस पत्ते का सेवन दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन एक्सपर्ट का सुझाव है कि जब आप इसे खाली पेट खाते हैं यानि सुबह तो अनगिनत फायदे पहुंचाता है. क्योंकि बासी मुंह शरीर पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित कर लेता है.
बेलपत्र खाने के फायदे
- बेल पत्र पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या है तो रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं
- रोजाना सुबह बेल पत्र का सेवन करने से गैस, एसिडिटी और अपच से छुटकारा मिल सकता है.
- वहीं, जिन लोगों को बवासीर की समस्या है उनके लिए खाली पेट बेल पत्र खाना फायदेमंद हो सकता है.
दिल के लिए हेल्दी
- अगर आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो दिल को बीमारियों से बचाते हैं.
- साथ ही हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी कम हो जाता है.
शरीर रखे ठंडा
- दरअसल, बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में अगर आप बेल पत्र का सेवन करते हैं तो आपका शरीर पूरे दिन ठंडा रहेगा.
- खासतौर पर गर्मियों में बेल पत्र का सेवन अधिक फायदेमंद होता है. इससे आपको ठंडक मिलेगी.
छाले करे ठीक
- मुंह में छाले होने पर भी रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन फायदेमंद होता है. इसके लिए आप बेल पत्र को चबाकर खा सकते हैं.
डायबिटीज में मिले राहत
- अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं.
- बेल पत्र में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक हैं.
- खाली पेट बेल पत्र खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
आस्था /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में कई ऐसे पेड़ या पौधे बताये गए हैं जिनके पास दीया जलाना शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इन पेड़ या पौधों के पास दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. हालांकि हर पेड़ या पौधे के पास दीया जलाने से अलग-अलग लाभ मिलते हैं.दरअसल, हिंदू कहानियों में भगवान शिव बहुत महत्वपूर्ण हैं और लोग सोचते हैं कि वे बहुत खास हैं और वे अलग-अलग तरीकों से उनकी पूजा करते हैं और उनसे मदद मांगने के लिए विशेष कार्य करते हैं. एक काम जो वे करते हैं वह है एक विशेष पेड़ के नीचे दीपक जलाना जिसे बेलपत्र का पेड़ कहा जाता है. यह लेख बताता है कि लोग ऐसा क्यों करते हैं, किसे करना चाहिए और भगवान शिव के लिए बेलपत्र का पेड़ क्यों महत्वपूर्ण है.
बेलपत्र का पौधा भगवान शिव को अति प्रिय माना जाता है. साथ ही,कुछ शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है. की माता पार्वती के पसीने से बेलपत्र पेड़ की उत्पति हुई हैं. इसलिए बेलपत्र का पेड़ भगवान शिव को अतिप्रिय हैं. इसी प्रकार बेलपत्र पेड़ में माता पार्वती का वास होता है.
1.बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से मां लक्ष्मी का घर में वास होता है और धन अलाभ के योग बनते हैं. घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगती है और तंगी, कर्ज, अधिक खर्च आदि समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.
2. बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और उनकी कृपा से जीवन के दुःख दूर हो जाते हैं. जीवन में खुशहाली का आगमन होता है और हर एक काम में सफलता मिलने लग जाती है.
3. बेलपत्र का पौधा अगर घर में है तो रोजाना शाम के समय बेलपत्र के पौधे के पास सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है और घर में शांति का वास स्थापित होने लग जाता है.
4. बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से घर में पसरा हुआ पारिवारिक क्लेश दूर होता है. इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि बलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से ग्रह दोष एवं वास्तु दोष भी खत्म हो दाता है.
दुर्ग / शौर्यपथ / विगत 26 मार्च 2024 को छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई एवं आईआईटी मंडी हिमाचल प्रदेश के बीच एमओयू किया गया। इस एमओयू को विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. एम. के. वर्मा एवं आईआईटी मंडी के निदेशक डॉक्टर लक्ष्मीधर बेहरा द्वारा सम्पदित किया गया जिसके तहत अनुसंधान एवं अकादमिक गतिविधियों के विकास पर दोनों संस्थाओं द्वारा संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इस एम ओ यू के तहत फैकल्टी एवं स्टाफ, दोनों संस्थानों में आवागमन कर शैक्षणिक एवं कंसल्टेंसी कार्यों का क्रियान्वयन कर सकेंगे। इसके तहत संयुक्त रूप से संस्थान के नियम अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट, पी. एच.डी. के छात्रों का सुपरविजन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग के बी. टेक. ऑनर्स के छात्र अपनी 6 माह की इंटर्नशिप स्टाइपेंड के साथ आईआईटी मण्डी में विषय विशेषज्ञों के मार्ग दर्शन में वहीं रहकर पूर्ण कर सकेंगे।संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट सेमिनार वर्कशॉप कॉन्फ्रेंस आदि आयोजित किया जा सकेंगे। इस प्रकार से विश्वविद्यालय के छात्रों को विश्व स्तर के प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक सुविधा मिल पाएगी साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधनों की उपयोगिता के अवसर मिलेगा। उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण एवं उन्नयन की सुविधा भी छात्रों को प्राप्त होगी जिसे आधुनिक जगत की आवश्यकता अनुसार इंडस्ट्री रेडी मानव संसाधन तैयार हो सके। विदित हो कि आई आई टी मंडी में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन और निर्माण केंद्र (C4DFED Lab) इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन और निर्माण पर बहु-विषयक अनुसंधान के लिए एक अद्वितीय विश्व स्तरीय सुविधा है। इस लैब में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस फेब्रिकेशन, एडवांस्ड लिथोग्राफी एंड मैटेरियल्स फॉर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्रीज , फोटोनिक एंड फोटोवोल्टिक डिवाइस , टेस्टिंग एंड पैकेजिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस , इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स ( MEMS, NEMS, BIO-MEMS, SENSORS), इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस डिज़ाइन एंड सिमुलेशन स्थापित है । इस केंद्र में class 100, class 1000 और class 10000 स्तर की फेब्रिकेशन प्रयोगशालाएँ हैं जहाँ उच्च-स्तरीय परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण डिज़ाइन, निर्माण और लक्षण वर्णन उपकरण स्थापित हैं। यह एमओयू 5 वर्षों के लिये होगा ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
