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April 05, 2026
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खाना खजाना / शौर्यपथ / आप कितने ही चाइनीज फूड्स खा लें लेकिन जो बात देसी स्नैक्स में है, वो किसी और में नहीं हो सकती। आलू चाट भी एक ऐसा देसी स्नैक्स है जिसे ज्यादातर लोग पसंद करते हैं। खासतौर पर शाम को चाय के साथ इस स्नैक्स की अलग ही बात है। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं आलू चाट-
सामग्री :
चटनी बनाने के लिए:
1 कप हरा धनिया
1 हरी मिर्च
1/2 टी स्पून काला नमक
1/2 नींबू का रस
चाट बनाने के लिए:
2-3 उबले आलू
एक चुटकी काला नमक
एक चुटकी काली मिर्च
एक चुटकी जीरा पाउडर
1/2 टी स्पून चाट मसाला
1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
1 प्याज , टुकड़ों में कटा हुआ
1/2 नींबू का रस
1 टी स्पून इमली की चटनी


चाट बनाने के लिए :
1।उबले हुए आलू के टुकड़ों को गर्म तेल में डालकर फ्राई कर लें।
आलू को गोल्डन ब्राउल होने तक फ्राई करें।
आलू को एक बाउल में निकाल लें।
अब इसमें काला नमक, काली मिर्च, जीरा पाउडर, चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर डालें।
इसके ऊपर कटा प्याज और आधा नींबू का रस डालें।
इसमें अब इमली की चटनी और हरी चटनी डालें।
इन सभी चीजों को आलू के साथ अच्छे से मिलाएं।
चाट को प्लास्टिक के बाउल में निकाल लें, प्याज से गार्निश करके सर्व करें।
चटनी बनाने का तरीका :
एक जार में हरा धनिया लें।
इसमें हरी मिर्च और काला नमक डालें।
सभी सामग्री को एक साथ पीस लें।
तैयार की गई चटनी में खट्टा स्वाद देने के लिए नींबू का रस डालें।
इसे अच्छे से मिलाएं।

खाना खजाना /शौर्यपथ / 16 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है, ऐसे में आप शिवजी को भोग लगाने के लिए घर में स्वादिष्ट बंगाली मिठाई संदेश बना सकती है। इसकी रेसिपी बेहद आसान है साथ ही इसे बनाने में बहुत कम सामान लगता है। तो चलिए नोट करें इसकी रेसिपी
सामग्री
1 लीटर दूध
1 से 1.5 चम्मच नींबू का रस
5 चम्मच शक्कर
4 से 5 पिस्ता, बादाम
10-12 किशमिश
विधि- दूध को गर्म करें और जब उबाल आने लगे, तो उसमें नींबू डालें और चलाते रहें। जब दूध और पानी अलग हो जाए तो इसे कॉटन के कपड़े में लेकर छान लें। इसे एक साथ इकट्ठा करें और निचोड़ दें।
फिर पानी से छैना को धो लें, ताकि नींबू का स्वाद खत्म हो जाए। अब 20 से 25 मिनट सेट होने के लिए रख दें। जब ये सेट हो जाए तो एक प्लेट में निकालें और हाथ की मदद से मसलना शुरू करें। कम से कम 5 मिनट के लिए इसे अच्छे से मसलें। फिर इसमें 2 चम्मच शक्कल मिलाएं और 2 से 3 मिनट के लिए मसलें।
जब आप इसे अच्छे से मसलेंगे तो आप देखेंगे की मिक्शर मॉइश्चर छोड़ देगा। इसके बाद नॉन स्टिक पैन में इसे डालें और थोड़ा चलाते हुए सेक लें। जब मॉइस्चर कम होगा तो ये एक जगह इकट्ठा होना शुरू हो जाएगा। अब गैस बंद करें और इसे ठंड़ा होने के बाद शेप दें। शेप देने के लिए टूथपिक या फोर्क का इस्तेमाल करें। अब पिस्ता, किशमिश और बादाम को बीच में लगाएं और ठंडा करने के बाद सर्व करें।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /बढ़ा हुआ पेट सभी को परेशान करता है, बढ़ता वजन जहां सेहत के लिए खतरनाक है वहीं ये लुक्स को भी बिगाड़ता है, अगर आप भी चाहते है अपने पेट को कम करना वो भी जल्दी तो हम आपको इस लेख में कुछ ऐसे टिप्स बता रहे है जिन्हें अपनाकर आप बहुत आसानी से अपने पेट को कम कर सकते है आइए जानते हैं....
अगर आप एक ही बार में अधि‍क भोजन करने में यकीन करते हैं, और आपको इसकी आदत है, तो यह आदत बदल डालिए। अपनी डाइट को 2 या 3 भागों में बांट लें, और हर दो या तीन घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाएं। इससे आपका पेट भरा रहेगा, ऊर्जा का स्तर भी बना रहेगा और पेट का मोटापा भी कम होगा।
2 गरम पानी - सुबह-सुबह खाली पेट गर्म पानी पीना, पेट कम करने के लिए बेहद फायदेमंद होगा। इससे पेट में जमा वसा धीरे-धीरे कम होगा। इसके अलावा अगर आप गरम पानी में नींबू और शहद डालकर पिएंगे तो यह और भी फायदेमंद साबित होगा। इतना ही नहीं, इसे रोजाना पीने से आप तरोताजा और ऊर्जावान भी महसूस करेंगे।
3 मॉर्निंग वॉक - सुबह-सुबह पैदल चलना, जॉगिंग करना या फिर पेट संबंधी व्यायाम करना, पेट की चर्बी कम करने का बेहतरीन विकल्प है। इससे धीरे-धीरे फैट भी कम होगा और आपका पाचन तंत्र भी बेहतर होगा। साथ ही शरीर में दिनभर ऊर्जा का स्तर बना रहेगा।
4 नौकासन - योगा आपके शरीर के साथ-साथ मानसिक परेशानियों को भी कम करता है। बढ़े हुए पेट को कम करने के लिए नौकासन योग का सबसे बेहतर विकल्प है। इससे पेट की चर्बी जिस तरह से कम होगी, आप खुद इस बदलाव को देख और महसूस कर पाएंगे।
देर रात न खाएं - देर रात को खाना खाना भी पेट की चर्बी बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। हमेशा सोने से 2 घंटे पहले ही रात का भोजन कर लें। इसके अलावा आप चाहें तो रात के खाने में कुछ हल्का फुल्का ही खाएं। अगर खाना खाने के बाद थोड़ा समय टहलने के लिए निकालेंगे, तो यह सोने पर सुहागा होगा।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /इस नए दौर में हर किसी को मोबाइल फोन यूज करने की आदत हो चुकी है। मोबाइल के बगैर कुछ भी संभव नहीं। सुबह उठते ही सबसे पहले फोन उठाकर नए नोटिफिकेशन चेक करते हैं। यहां तक की मॉर्निंग वॉक करते समय भी लोग मोबाइल का इस्‍तेमाल करना बंद नहीं करते। अगर आपको भी सुबह टहलते वक्त मोबाइल की आदत है तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।
मांसपेशियों में दर्द
मॉर्निंग वॉक करते समय हम अपनी दोनों हाथों को ऊपर नीचे करते हैं। इस प्रक्रिया में पूरे हाथों और मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जब हम मोबाइल को एक हाथ में पकड़कर टहलते हैं तो हमारे मसल्स में असंतुलन पैदा हो जाता है। यह मांसपेशियों में दर्द का कारण बन सकता है।
पोस्चर करता है खराब
मॉर्निंग वॉक करते समय लगातार फोन के इस्तेमाल से हमारा बॉडी पोस्चर खराब हो जाता है। टहलते समय स्पाइनल कॉर्ड हमेशा सीधी रहना चाहिए। मोबाइल इस्तेमाल करने से हमारा सारा ध्यान उसी पर रहता है और हमारी रीढ़ की हड्डी सीधी नहीं रहती। लंबे समय तक इस तरह टहलने से आपका बॉडी पोस्चर खराब हो जाता है।
हो सकता है बैक पेन
लंबे समय तक गलत तरीके से टहलने से हमारा बॉडी पोस्चर खराब हो जाता है। ऐसे में यह की समस्या का कारण बन सकता है। इसलिए टहलते वक्त मोबाइल का यूज इग्नोर करें।
एकाग्रता होती है खत्म
टहलते वक्त हमारा सारा ध्यान केवल अपने शरीर पर रहना चाहिए लेकिन, मोबाइल के इस्तेमाल के कारण ऐसा नहीं हो पाता है। हमारा ध्यान मोबाइल पर रहता है, जिससे मन की एकाग्रता खत्म हो जाती है और हमें वो लाभ नहीं मिल पाता जो एक्सरसाइज करने से मिल सकता था।

सेहत /शौर्यपथ /चना कई गुणों से भरपूर होता है। इसका सेवन करने से शरीर को एनर्जी मिलती है। भारत में इसे अलग-अलग प्रकार से बनाकर खाया जाता है। और यह हर तरह से सेहत के लिए फायदेमंद है। चने में मैंगनीज, मैग्‍नीशियम, फास्फोरस जैसे पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं। इसका सेवन करने से एक्‍ट्रा फैट बर्न होता है और एनर्जी बढ़ती है। लेकिन वहीं भीगे चने के पानी के भी लाभ है। अगर आप नहीं जानते हैं तो आज जान लीजिए।
- भीगे हुए चने का पानी पीने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है। वहीं कोरोना काल में आप इस पानी को जरूर पी सकते हैं। चने में जरूरी मिनरल्‍स, क्‍लोरोफिल और फास्‍फोरस भी होते हैं। जब चने को पानी में भिगोया जाता है तो उसके मिनरल्‍स पानी में भी घुल जाते हैं। इसलिए इसका पानी पीने की सलाह दी जाती है।
-रात में चने को भिगोकर रख देना चाहिए। इसके बाद सुबह वह पानी पी लें चाहिए। अगर आप वह पानी नहीं पी पाते हैं तो उन्‍हें चने के साथ थोड़ा सा काला नमक डालकर उबाल लीजिए। इसके बाद उसका सेवन कर लीजिए।
-भीगे हुए चने के पानी का सेवन करने से पेट का डाइजेशन अच्‍छा रहता है। पाचन तंत्र से जुड़ी अधिकतम परेशानी का हल आपको मिल सकता है। कब्‍ज, पेट दर्द, ब्‍लोटिंग, अपच
जैसी समस्‍या होने पर यह पानी सबसे अधिक लाभकारी है।
- सूप या दाल बनाते समय भी इस पानी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
- चने के पानी को और भी हेल्‍दी बनाया जा सकता है। इसमें आप नींबू, काला नमकऔर पुदीने की पत्तियों को मिक्‍स कर सकते हैं।

धर्म संसार / शौर्यपथ /यदि आप मध्यप्रदेश की तीर्थनगरी उज्जैन में पुण्य सलिला शिप्रा तट के निकट स्थित 6ठी शताब्दी ईसा पूर्व में निर्मित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकालेश्वर के दर्शन करने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी 10 बात अवश्य जान लें।
1. भस्म आरती : कालों के काल महाकाल के यहां प्रतिदिन अलसुबह भस्म आरती होती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें ताजा मुर्दे की भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। इस आरती में शामिल होने के लिए पहले से बुकिंग की जाती है।
2. जूना महाकाल : महाकाल के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन जरूर करना चाहिए। यह महाकाल प्रांगण में ही स्थित है।
3. तीन महाकाल विराजमान हैं उज्जैन में : उज्जैन में साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। यदि महाकाल बाबा और जूना महाकाल बाबा के दर्शन कर लिए हैं तो यहां के दर्शन भी जरूर करें।
4. 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे खास : 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकाल ही एकमात्र सर्वोत्तम शिवलिंग है। कहते हैं कि 'आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम्। भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते।।' अर्थात आकाश में तारक शिवलिंग, पाताल में हाटकेश्वर शिवलिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।
5. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के तीन भाग हैं : वर्तमान में जो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है, वह 3 खंडों में विभाजित है। निचले खंड में महाकालेश्वर, मध्य खंड में ओंकारेश्वर तथा ऊपरी खंड में श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर स्थित है। नागचन्द्रेश्वर शिवलिंग के दर्शन वर्ष में एक बार नागपंचमी के दिन ही करने दिए जाते हैं।
6. गर्भगृह का दृश्य : गर्भगृह में विराजित भगवान महाकालेश्वर का विशाल दक्षिणमुखी शिवलिंग है। इसी के साथ ही गर्भगृह में माता पार्वती, भगवान गणेश व कार्तिकेय की मोहक प्रतिमाएं हैं। गर्भगृह में नंदी दीप स्थापित है, जो सदैव प्रज्वलित होता रहता है। गर्भगृह के सामने विशाल कक्ष में नंदी की प्रतिमा विराजित है।
7. उज्जैन के राजा : उज्जैन का एक ही राजा है और वह है महाकाल बाबा। विक्रमादित्य के शासन के बाद से यहां कोई भी राजा रात में नहीं रुक सकता। जिसने भी यह दुस्साहस किया है, वह संकटों से घिरकर मारा गया। यदि आप मंत्री या राजा हैं तो यहां रात ना रुकें। वर्तमान में भी कोई भी राजा, मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री आदि यहां रात नहीं रुक सकता।
8. महाकाल की सवारी : उज्जैन के राजा महाकाल बाबा श्रावण मास में प्रति सोमवार नगर भ्रमण करते हैं और अपनी प्रजा को देखते हैं। महाकाल की सवारी में किसी भी प्रकार का नशा करके शामिल नहीं होते हैं। महाशिवरात्रि के दिन समूचा शहर शिवमय हो जाता है। चारों ओर बस शिव जी का ही गुंजन सुनाई देता है। सारा शहर बाराती बन शिवविवाह में शामिल होता है।
9. क्यों कहते हैं महाकाल : काल के दो अर्थ होते हैं- एक समय और दूसरा मृत्यु। महाकाल को 'महाकाल' इसलिए कहा जाता है कि प्राचीन समय में यहीं से संपूर्ण विश्व का मानक समय निर्धारित होता था इसीलिए इस ज्योतिर्लिंग का नाम 'महाकालेश्वर' रखा गया है। हालांकि महाकाल कहने का संबंध पौराणिक मान्यता से भी जुड़ा हुआ है।
10. महाकाल की पौराणिक कथा : पौराणिक कथा के अनुसार इस शिवलिंग की स्थापना राजा चन्द्रसेन और गोप बालक रूप की कथा से जुड़ी है। कथा से हनुमानजी का संबंध भी जुड़ा हुआ है।

आस्था / शौर्यपथ / हर साल सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तुलसीदास का जन्मोत्सव मनाया जाता है। तुलसीदास जी का जन्म 16वीं सदी में हुआ था। इस साल 15 अगस्त को तुलसीदास जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। तुलसीदास जी ने कई ग्रंथों की रचना की। श्री रामचरितमानस की रचना कर गोस्वामी तुलसीदास हमेशा के लिए अमर हो गए। आइए जानते हैं तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी खास बातें....
हनुमान जी को गुरु माना
श्राी राम भक्त हनुमान जी को तुलसीदास का अध्यात्मिक गुरू कहा जाता है। महाबलि हनुमान की उपासना के लिए भी तुलसी दास ने विभिन्न रचनाएं लिखी हैं। जिनमें हनुमान चालिसा और बजरंग बाण आदि प्रमुख हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गुरु माना था। गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा की रचना की थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
कष्टों से भरा रहा था बचपन
गोस्वामी तुलसीदास का जन्म बचपन में कष्टों से भरा रहा। तुलसीदास जी की माता की मृत्यु के बाद उनके पिता ने उन्हें त्याग दिया था।
पत्नी की कड़वी बातों ने बदल दिया जीवन
तुलसीदास जी को पत्नी रत्नावली से अत्यंत लगाव था। एक बार तुलसीदास ने अपनी पत्नी से मिलने के लिए उफनती नदी को भी पार कर लिया था। तब उनकी पत्नी ने उन्हें उपदेश देते हुए कहा जितना प्रेम आप मुझसे करते है, उतना स्नेह यदि प्रभु राम से करते, तो तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती। यह सुनते ही तुलसीदास की चेतना जागी और उसी समय से वह प्रभु राम की वंदना में जुट गए।
अंतिम समय काशी में व्यतीत किया
तुलसीदास जी ने अपना अंतिम समय काशी में व्यतित किया और वहीं राम जी के नाम का स्मरण करते हुए अपने शरीर का त्याग किया।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने 12 ग्रंथों की रचना की-
महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली। श्रीरामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा उनकी लोकप्रिय रचना है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों में श्रीरामचरितमानस, कवितावली, जानकीमंगल, विनयपत्रिका, गीतावली, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण इत्यादि प्रमुख हैं।

आस्था / शौर्यपथ /हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां दुर्गा की पूजा- अर्चना की जाती है। सावन माह में 15 अगस्त, 2021, रविवार को मासिक दुर्गाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। मां दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं, मासिक दुर्गाष्टमी पूजा- विधि, शुभ समय और सामग्री की पूरी लिस्ट....

मासिक दुर्गाष्टमी मुहूर्त

श्रावण, शुक्ल अष्टमी प्रारम्भ - 09:51 ए एम, अगस्त 15
श्रावण, शुक्ल अष्टमी समाप्त - 07:45 ए एम, अगस्त 16
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा-विधि

इस दिन सुबह उठकर जल्गी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।
मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।
धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
इन मुहूर्तों में करें पूजा-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:37 पी एम से 03:30 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 06:47 पी एम से 07:11 पी एम
अमृत काल- 08:07 पी एम से 09:37 पी एम
निशिता मुहूर्त- 12:04 ए एम, अगस्त 16 से 12:47 ए एम, अगस्त 16
त्रिपुष्कर योग- 05:50 ए एम से 09:51 ए एम
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

लाल चुनरी
लाल वस्त्र
मौली
श्रृंगार का सामान
दीपक
घी/ तेल
धूप
नारियल
साफ चावल
कुमकुम
फूल
देवी की प्रतिमा या फोटो
पान
सुपारी
लौंग
इलायची
बताशे या मिसरी
कपूर
फल-मिठाई
कलावा

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ/ वर्किंग कपल्स के सामने वर्क फ्रॉम होम के दौरान कई तरह की चुनौतियां आईं। खासकर जो कपल्स जॉइंट फैमिली में रहते हैं उनके लिए लॉकडाउन का वक्त काफी चुनौती भरा रहा, लेकिन नेगेटिव चीजों से अलग ज्वाइंट फैमिली में रहने के कई फायदे भी हैं।
किसी एक पर भार नहीं पड़ता
इस परिवारिक व्यवस्था में किसी एक व्यक्ति पर पूरा भार नहीं पड़ता। घर के कामों का आपस में बंटवारा हो जाता है। इस कारण काम को लेकर घर के सदस्यों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
दादा-दादी/नाना-नानी की सीख
कपल्स के पास अपने बच्चों को पारिवारिक मूल्य सिखाने का समय नहीं मिल पाता। ऐसे में अगर वो संयुक्त परिवार में रह रहे हैं, तो दादा दादी और चाचा चाची की सहायता से बच्चों को कई पारिवारिक मूल्य सीखने को मिलते हैं। इसके अलावा बच्चे अपने दादा दादी से कई अच्छी चीजें भी सीखते हैं।
फाइनेंशियल सपोर्ट
संयुक्त परिवार में रहने से आर्थिक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है। अक्सर संयुक्त परिवार में देखने को मिलता है कि घर में किसी सदस्य के ऊपर धन संबंधी दिक्कतें आने पर दूसरे सदस्य उसको आर्थिक रूप से मदद कर देते हैं। इससे उसको फाइनेंशियल सपोर्ट मिलता है।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /मानसून के दिनों में क्या आप भी फुटवियर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं? आपका जवाब अगर हां है, तो हम आपको बारिश के दिनों के लिए ऐसे फुटवेयर्स सजेस्ट कर रहे हैं, जो न सिर्फ पहनने में आरामदायक हैं बल्कि इनसे आपको स्टाइलिश लुक भी मिलेगा-
स्नीकर्स
मानसून में कलरफुल स्नीकर्स साधारण आउटफिट को स्टाइलिश और प्लेफुल बनाते हैं। रेट्रो लुक अभी इन है। हाई फैशन और रेट्रो लुक का कोलैबोरेशन दिख रहा है । आने वाले दिनों में स्नीकर्स में स्वेड और कॉड्रॉय जैसे रफ टेक्सचर दिखाई देंगे।
फैशनेबल स्लीपर्स
स्लीपर्स को बाहर भी पहना जाएगा। स्लीपर का मेकओवर कुछ ऐसे किया जा रहा है कि इन्हें फॉर्मल्स के साथ भी पहना जा सके।पैटर्न्ड सैंडल भीगे मौसम में हवादार, स्मार्ट, आरामदायक और हल्के फुटवेयर पसंद किए जा रहे हैं।
फ्लिप फ्लॉप्स
फ्लिप फ्लॉप्स न केवल बारिश के लिए बेस्ट हैं, बल्कि इनका कम्फर्ट लेवल भी शानदार है। आप इसे शॉर्ट्स, ड्रेस, जींस, किसी के भी साथ पहन सकते हैं। पानी से फ्लिप फ्लॉप्स को कोई नुकसान नहीं होता और यह सूख भी जल्दी जाते हैं।
स्ट्रैप्स सैंडल
प्लेटफॉर्म हील्स की जगह स्ट्रैप्स पसंद किए जा रहे हैं। ये एंकल से थोड़ा ज्यादा पैर कवर करते हैं। इस मौसम में ज्यादा स्ट्रैप्स वाला बोल्ड लुक पसंद किया जा रहा है।
क्रॉक्स
क्रॉक्स का चलन आजकल काफी बढ़ गया है। यह हल्के मटेरियल के होते हैं, इसमें हवा भी आसानी से जाती है जिससे पैर सूखे बने रहते हैं और यह सूखते भी जल्दी जाते हैं। दिखने में भी यह काफी अच्छे होते हैं। ऐसे में मॉनसून में क्रॉक्स पहन आप भी कूल लग सकते हैं।

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