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April 05, 2026
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आस्था /शौर्यपथ /वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेदों की 28 हजार पांडुलिपियाँ भारत में पुणे के 'भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट' में रखी हुई हैं। इनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं जिन्हें यूनेस्को ने विरासत सूची में शामिल किया है। यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ई.पू. की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को की 158 सूची में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है। 23 अगस्त
2007 में यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियां शामिल की गईं थी। आओ जानते हैं ऋग्वेद के 25 आश्चर्यजनक तथ्‍य।
1. दुनिया का पहला धर्म और विज्ञान का ग्रंथ ऋग्वेद है। इसे दुनिया की प्रथम पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।
2. ऋग्वेद का ज्ञान हजारों वर्ष पुराना है जिसे वाचिक परंपरा के माध्यम से संवरक्षित रखा गया। हालांकि संस्कृत पांडुलिपियां बनाने की शुरुआत हुई तब ऋग्वेद को लिपिबद्ध किया गया। इसीलिए यह नहीं समझना चाहिए कि वैदिक काल 1500 ई.पू. विद्यमान था।
3. ऋग्वेद के ही ज्ञान को विषयबद्ध किए जाने के चलते यजुर्वेद, सामवेद और बाद में अथर्ववेद लिखा गया। जो कुछ भी इन तीनों में है वह सभी ऋग्वेद में मिलेगा।
4. वेद के तीन भाग राम के काल में पुरुरवा ऋषि ने किए थे, जिसे वेदत्रयी कहे गए हैं। फिर अंत में अथर्ववेद को लिखा अथर्वा ऋषि ने। महाभारत काल में ऋषि वेदव्यसजी ने इस ज्ञान को पुन: क्रमबद्ध करके अपने शिष्यों को सुनाया।
5. 'वेद' परमेश्वर के मुख से निकला हुआ 'परावाक' है, वह 'अनादि' एवं 'नित्य' कहा गया है। वह अपौरूषेय ही है। इस सर्वप्रथज्ञ ब्रह्मा ने सुना, फिर अग्नि, वायु, आदित्य और (तु अर्थात) अंगिरा से ऋग, यजुः, साम और अथर्ववेद का ग्रहण किया।
6. ऋग्वेद से ही अन्य वेदों का जन्म हुआ और सभी वेदों से उपनिषदों की रचना हुई। उपनिषद 1008 थे जिसमें से अब केवल 108 पाए जाते हैं।
7. वेद और उपनिषदों के आधार पर ही गीता का ज्ञान प्रकट हुआ। गीता सभी वेद और उपनिषदों का सार या कहें कि निचोड़ है।
8. ऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान। ऋग्वेद सबसे पहला वेद है जो पद्यात्मक है। इसके 10 मंडल (अध्याय) में 1028 सूक्त है जिसमें 11 हजार मंत्र हैं। इस वेद की 5 शाखाएं हैं - शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन, मंडूकायन।
9. ऋग्वेद में तात्कालिन काल की भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है।
10. ऋग्वेद में में जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है। इसके साथ ही अणु-परमाणु और अंतरिक्षा आदि के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है।
11. ऋग्वेद में ब्रह्मांड कैसा है और परमात्मा का अस्तित्व है या नहीं इस संबंध में बहुत ही गहन और गंभीर वर्णन प्रमाणों और तर्कों के साथ मिलता है।
12. ऋग्वेद के दसवें मंडल में औषधि सूक्त यानी दवाओं का जिक्र मिलता है। इसमें औषधियों की संख्या 125 के लगभग बताई गई है, जो कि 107 स्थानों पर पाई जाती है। औषधि में सोम का विशेष वर्णन है। ऋग्वेद में च्यवनऋषि को पुनः युवा करने की कथा भी मिलती है।
13. ऋग्वेद में उस काल का सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक इतिहास का वर्णम भी मिलता है
14. ऋग्वेद में ही विश्‍व प्रसिद्ध दाशराज्ञ के युद्ध का वर्णन है जिसे विश्‍व इतिहास में 'बैटल ऑफ टेन किंग' के नाम से भी जाना जाता है।
इसमें आर्यों की राजनीतिक प्रणाली एवं इतिहास के विषय में जानकारी प्राप्त होती है
15. ऋग्वेद के मन्त्रों या ऋचाओं की रचना किसी एक ऋषि ने एक निश्चित अवधि में नहीं की, अपितु विभिन्न काल में विभिन्न ऋषियों द्वारा ये रची और संकलित की गयीं।
16. ऋग्वेद में यातुधानों को यज्ञों में बाधा डालने वाला तथा पवित्रात्माओं को कष्ट पहुंचाने वाला कहा गया है।
17. ऋग्वेद काल में सुर, असुर, राक्षस, दानव, किन्नर, नाग, गंधर्व, चारण, आदि विभाजन को महत्व दिया जाता था चार वर्णों को नहीं।
18. ऋग्वेद में कई ऋषियों द्वारा रचित विभिन्न छंदों में लगभग 400 स्तुतियां या ऋचाएं हैं। ये स्तुतियां अग्नि, वायु, वरुण, इन्द्र, विश्वदेव, मरुत, प्रजापति, सूर्य, उषा, पूषा, रुद्र, सविता आदि देवताओं को समर्पित हैं।
19. ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के रचयिता अनेक ऋषि हैं जबकि द्वितीय के गृत्समय, तृतीय के विश्वासमित्र, चतुर्थ के वामदेव, पंचम के अत्रि, षष्ठम् के भारद्वाज, सप्तम के वसिष्ठ, अष्ठम के कण्व व अंगिरा, नवम् और दशम मंडल के अनेक ऋषि हुए हैं।
20. ऋग्वेद में दो प्रकार के विभाग मिलते हैं- 1.अष्टक क्रम और 2.मण्डलक्रम। अष्टक क्रम में समस्त ग्रंथ आठ अष्टकों तथा प्रत्येक अष्टक आठ अध्यायों में विभाजित है। प्रत्येक अध्याय वर्गो में विभक्त है। समस्त वर्गो की संख्या 2006 है। इसी प्रकार मण्डलक्रम में समस्त ग्रन्थ 10 मण्डलों में विभाजित है। मण्डल अनुवाक, अनुवाक सूक्त तथा सूक्त मंत्र या ॠचाओं में विभाजित है। दशों मण्डलों में 85 अनुवाक, 1028 सूक्त हैं। इनके अतिरिक्त 11 बालखिल्य सूक्त हैं। ऋग्वेद के समस्य सूक्तों के ऋचाओं (मंत्रों) की संख्या 10600 है।
21. ऋग्वेद के उपवेद:- ऋग्वेद का उपवेद आयुर्वेद है। आयुर्वेद के कर्ता धन्वंतरि देव हैं।
22. ऋग्वेद के उपनिषद:- वर्तमान में ऋग्वेद के 10 उपनिषद पाए जाते हैं। संभवत: इनके नाम ये हैं- ऐतरेय, आत्मबोध, कौषीतकि, मूद्गल, निर्वाण, नादबिंदू, अक्षमाया, त्रिपुरा, बह्वरुका और सौभाग्यलक्ष्मी।
23. ऋग्वेद के ब्रह्मण ग्रंथ : ब्राह्मण ग्रंथों की संख्या 13 है, जिसमें ऋग्वेद के 2 ब्रह्मण ग्रंथ हैं। 1. ऐतरेयब्राह्मण-(शैशिरीयशाकलशाखा) और 2. कौषीतकि- (या शांखायन) ब्राह्मण (बाष्कल शाखा)। वेद के मंत्र विभाग को 'संहिता' भी कहते हैं। संहितापरक विवेचन को 'आरण्यक' एवं संहितापरक भाष्य को 'ब्राह्मण ग्रंथ' कहते हैं।
24. अरण्यक ग्रंथ : ऐतरेय और सांख्य।
25. ऋग्वेद में ज्ञान, विज्ञान, खगोल, भूगोल, धर्म, अध्यात्म, राजनीति, समाज, शिक्षा, संस्कृति, नैतिकता, नियम, ईश्‍वर, देवता, भगवान, मोक्ष आदि मानव जीवन से जुड़ी सभी तरह की जानकारियां मिलती है जो आज भी प्रासंगिक है।

शौर्यपथ विशेष / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है कि भारत के नक्शे में सिर्फ एक अलग राज्य के रूप में एक भौगोलिक क्षेत्र की मांग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सदियों की पीड़ा थी। ये छत्तीसगढ़िया सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने की मांग थी। आम छत्तीसगढ़िया की तासीर और उनकी अपेक्षाएं बिलकुल अलग हैं, बरसो की उपेक्षा और तिरस्कार, पिछड़ेपन का दंश के बावजूद अपनी आस्मिता और स्वामिमान को बचाकर चलना यहां की खासियत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इन्हें समझने में जरा भी देर नहीं लगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में न केवल सांस्कृतिक उत्थान के लिए छत्तीसगढ़ के त्यौहारों को महत्व दिया बल्कि छत्तीसगढ़ के किसानों, मजदूरों सहित सभी वर्गाे के हितों को और अधिक मजबूत करने के लिए न्याय योजनाओं की श्रृखला शुरू की। उनके विकास के छत्त्ीसगढ मॉडल में है माटी की सौंधी महक।
मुख्यमंत्री बघेल के विकास के छत्तीसगढ़ माडल में आवश्यक अधोसंरचना विकास के साथ-साथ लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, विकास का संतुलित स्परूप ही इस मॉडल की विशेषता है। उन्होंने आम छत्तीसगढ़िया की आखों में खुशहली और उनके चेहरे चमक में लाने के लक्ष्य को लेकर सरकार बनते ही कई ऐतिहासिक फैसले लिए। उन्होंने बरसों से छत्तीसगढ़ के साथ हुए अन्याय को न्याय योजनाओं के जरिए न्याय देने की पहल की है। चाहे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना हो, चाहे किसानों की कर्ज मुक्ति की बात हो या धान का वाजिब मूल्य देने की बात हो, अपने वायदे से वे कभी नहीं डिगे। उन्होंने हमेशा साहसिक फैसले लेकर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़िया दोनो के हितों की रक्षा की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विकास के छत्तीसगढ़ी माडल में सबके लिए न्याय की अवधारणा है। यहां सिर्फ किसानों, मजदूरों, श्रमिकों के लिए ही न्याय नहीं है, न्याय की बयार, वनवासियों, और मध्यम वर्ग और उद्यमियों तक भी पहुंच रही है। हर वर्ग को राहत पहुंचाने के लिए अनेक फैसले लिए गए हैं। अन्नदाता किसानों का मान बढ़ाने के लिए न्याय की पहल की गई किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरूआत हुई। मध्यम वर्ग को न्याय देने के लिए छोटे भू-खंडों के क्रय विक्रय के साथ ही भूमि के क्रय विक्रय की गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी के साथ ही रियल इस्टेट सेक्टर को नया बूूम देने के लिए 75 लाख तक के मकानों की खरीदी पर पंजीयन राशि में छूट दी गई। वनवासियों को न्याय देने की पहल के तहत वनोपजों की संग्रहण मजदूरी तथा समर्थन मूल्य में वृद्धि के साथ समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजें 7 से बढ़ाकर 52 की गयी, जिसके कारण 13 लाख से अधिक आदिवासियों और वन आश्रित परिवारों को लाभ मिल रहा है। उद्योगों को राहत देने कई फैसले लिए गए।
पिछले ढाई सालों पर नजर डालें तो राज्य में विकास का एक अलग स्वरूप नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ विकास का मॉडल देश में एक अलग पहचान के रूप में स्थापित हो रहा है। इस विकास मॉडल के केन्द्र में गांव और किसान हैं। गांवों के गौरव को फिर से जगाने और हर हाथ को काम से जोड़ने का लक्ष्य रखकर सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योेेेजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसी योजनाए प्रारंभ की गई है। लाख उत्पाद और मछली पालन को कृषि का दर्जा दिया गया। कोदो-कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित करने के साथ ही लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए मिलेट मिशन भी शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री बघेल का कहना है कि नरवा-गरवा-घुरवा-बारी को छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास से, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अस्मिता से जोड़ना निश्चित तौर पर यह हमारी प्राथमिकता है। हम छत्तीसगढ़ के बुनियादी विकास की बात करते हैं और उसी दिशा में सारे प्रयास किए गए हैं, जिसके कारण आर्थिक मंदी और कोरोना जैसे संकट के दौर में भी, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था अपनी पटरी पर बनी रही। जब देश और दुनिया के बाजारों में सन्नाटा था, तब छत्तीसगढ़ में ऑटो-मोबाइल से लेकर सराफा बाजार तक में उत्साह था। हमारे कल-कारखाने भी चलते रहे और गौठान भी। हमारे फैसले छत्तीसगढ़ को न सिर्फ तात्कालिक राहत देते हैं बल्कि दूरगामी महत्व के साथ, चौतरफा विकास के रास्ते खोलते हैं।
देश में पहली बार किसानों को विभिन्न फसलों के लिए इनपुट सब्सीडी देने की शुरूआत हुई। न्याय की यह बयार यहीं नहीं रूकी। गोधन न्याय योजना में इसे और बढ़ाया गया पशुपालकों और ग्रामीणों से गोबर खरीदी का काम शुरू हुआ। इस योजना से लगभग 76 प्रतिशत भूमिहीन कृषि मजदूर लाभान्वित हो रहे हैं। इससे इन वर्गाे को जहां आय का जरिया मिला वहीं गांव की महिला समूहों को वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट से जोड़कर उन्हें भी स्वावलंबन से जोड़ा गया है। सुराजी गांव योजना में बनाए गए गौठानों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की अवधारणा ने यहां ग्रामोद्योग और परम्परागत हस्तशिल्पियों के रोजगार का नया द्वार खोल दिया है। यहां प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के साथ ही इन उत्पादों की मार्केटिंग के लिए व्यापारियों की भी मदद ली जा रही है।
ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खेती किसानी के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योंगों को प्राथमिकता दी जा रही है। सभी विकास खंडों में फूड पार्क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। लघुवनोपज से वनवासियों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए इन वनोपजों के वेल्यूएडिशन पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना काल में देश में सबसे अधिक लघु वनोपज का समर्थन मूल्य पर संग्रहण छत्तीसगढ़ में किया गया। सुराजी गांव योजना में गौठानों में रूरल इंड्रस्ट्रीयल पार्क के जरिए ग्रामीणों और युवाओं को उत्पादक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। गांवों में सिंचाई क्षमता के विकास के लिए नरवा कार्यक्रम हाथ में लिया गया है।
पिछले ढाई सालों में ऐसे अनेक छोटे-बड़े नवाचार हुए हैं, जिसका लाभ लोगों को मिल रहा है। डेनेक्स कपड़ा फैक्ट्री से लेकर वनोपज संग्रह में महिला स्व-सहायता की भूमिका, देवगुड़ी के विकास से लेकर स्थानीय उपजों के वेल्यूएडिशन तक बहुत से काम किए गए हैं। छत्तीसगढ़ के कोयले से अगर बिजली बनती है तो उसके लाभ में सीधे हिस्सेदारी आम जनता की होनी चाहिए। यही वजह है कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल हाफ योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के 39 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को विगत 27 महीने में 1822 करोड़ रू. का लाभ मिल चुका है।
कोरोना से लड़ने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वस्थ्य सुविधाएं विकसित की गयी। कोरोना काल में देश के 10 राज्यों को आक्सीजन की सप्लाई की गई। कांकेर, कोरबा तथा महासमुंद में नए मेडिकल कॉलेज भी खोलने की स्वीकृति दी गयी है। बस्तर में कुपोषण मुक्ति से लेकर मलेरिया उन्मूलन तक सफलता का नया कीर्तिमान रचा गया है। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना और दाई-दीदी मोबाइल क्लीनिक जैसी पहल का लाभ लाखों लोगों को मिला है।
प्रदेश की नई औद्योगिक नीति में पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करने के प्रावधान किए गए हैं। हर विकासखंड में फूडपार्क स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही शुरू की गयी है। गरीब परिवारों के बच्चों को अंगेजी माध्यम में शिक्षा देने के लिए स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 172 शालाओं का संचालन किया जा रहा है। कोरोना से जिन बच्चों के पालकों का निधन हुआ है, उन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए ‘महतारी दुलार योजना’ शुरू की गई है।
प्रदेश के ग्रामीण अंचल, वन अंचल, बसाहटों, कस्बों और शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए आगामी दो वर्षों में 16 हजार करोड़ की लागत से सड़कों का नेटवर्क बनाया जा रहा है। सिर्फ एक साल 2020-21 में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत प्रदेश में 4 हजार 228 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं। इतना काम पिछले किसी एक साल में नहीं हुआ। पूरे ढाई साल में 8 हजार 545 किलोमीटर सड़कें बनाई, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

खाना खजाना / शौर्यपथ /आलू गोभी की सब्जी तो आपने कई बार बनाई होगी लेकिन आज हम आपको ऐसी ट्रिक से यह सब्जी बनाने की रेसिपी बता रहे हैं, जिससे आपकी सब्जी और भी टेस्टी बनेगी।
सामग्री
700 ग्राम गोभी
आलू आलू
200 ग्राम मेथी
4 टेबल स्पून सरसों का तेल
1 टी स्पून सरसों के दाने
1 टी स्पून जीरा
12 कढ़ीपत्ता, हल्का उबला
5 ग्राम अदरक, बारीक कटा हुआ
स्वादानुसार नमक
2 मीडियम हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ
1 टी स्पून नींबू का रस
1 टी स्पून आमचूर
30 ग्राम अनार
वि​धि -गोभी को धो लें और उसे छोटे टुकड़ों में काट लें।
गोभी के टुकड़ों को 5 मिनट के लिए नमक वाले पानी में भिगो दें। नमक वाले पानी से गोभी को निकालने के बाद दोबारा पानी से धोएं।
स्टेनर में गोभी को डालकर एक तरफ रख दें ताकि एक्सट्रा पानी निकल जाए।
ताजी मेथी को काट लें, मेथी के पत्तों पर नमक छिड़के और अपने हाथों से इसे रगड़ें।
5 मिनट के लिए एक तरफ रख दें और उसके बाद चलते पानी में तब तक धोएं जब तक नमक पूरी तरह न निकल जाए।( ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मेथी का कड़वापन कम हो जाए।)
इसे पानी निचोड़ने के लिए एक तरफ रख दें।
आलूओं को धो लें, सूखा लें और बिना छीलें और उन्हें आठ टुकड़ों में लम्बाई में काट लें।
मीडियम आंच पर सबसे पहले आलूओं को फ्राई कर लें और उसका बाहरी हिस्सा गोल्डन ब्राउन होन क्रंची हो जाए।
नमक छिड़के और एक तरफ रख दें।
एक कड़ाही में सरसों का तेल डालें, आंच तेज़ कर दें जब तक तेल में धुआ न उठने लगे। आंच को धीमा कर दें ताकि तेल में उठने वाला धुआं कम हो जाए और तेल नॉर्मल तापमान पर आ जाए।
इसमें सरसों के दाने डालें, 2.3 सेकेंड इंतजार करें और इसमें जीरा डालें, इसी के साथ इसमें कढ़ीपत्ता भी डालें।
इसके बाद कटी हुई अदरक डालें, इसे चलाएं और इसमें मेथी के पत्ते डालें।
थोड़ी सी आंच बढ़ा दें और इसे लगातार चलाते हुए रोस्ट करें। तब तक जब तक किनारों पर तेल न आ जाए।
इसमें अब गोभी डालें, इस पर नमक डालकर दोबारा चलाएं, कड़ाही को ढक दें और इसे धीमी आंच पर पकाएं। बीच-बीच में 3-4 मिनट के बाद इसे चलाते रहे।
ढक्कन हटा दें और इसमें हरी मिर्च डालकर लगातार चलाएं ताकि गोभी पूरी तरह पक जाए। गोभी थोड़ी नरम रहे।
आंच बढ़ा दें, आलू डालें, आमचूर पाउडर डालकर इसे चलाएं। लगातार चलाएं इसमें नींबू का रस डालें। एक मिनट के लिए पकाएं और इसे आंच से हटा लें।
एक बाउल में निकाल लें, अनार के दानों से गार्निश करके सर्व करें।

योग / शौर्यपथ / योगा शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है। योग मानसिक और शारीरिक दोनों परेशानियों का समाधान है। कई बार गलत पॉश्चर के कारण बॉडी स्ट्रक्चर खराब हो जाता है। डिप्रेशन और बेचैनी के साथ-साथ मन को भी शांत करने के लिए योग बेस्ट दवा मानी जाती है। वर्कहॉलिक्स लोगों में अक्सर तनाव और लंबे समय तक काम करने से शरीर में अकड़न हो जाती है। ऐसे में कुछ योगासन हैं, जिसको रोजाना करने से आप तरोताजा और अपना ध्यान फॉकस में रखने में कामयाब होते हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कामकाजी लोगों को होने वाली परेशानियों के लिए कॉमन योग प्रोटोकोल के बारे में बताया है। आइए, जानते हैं योगासन के बारे में ।
1) अर्ध चक्रासन
अर्ध चक्रासन, शरीर आधे पहिए के आकार में होता है इसलिए इसे हाफ व्हील पोज भी कहा जाता है। इसे करने से एब्डोमेन मसल्स को मजबूत करें, पाचन को बेहतर करें, रीढ़ को लचीला बनाता है, कमर को स्ट्रेच करें, क्षमता बढ़ाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और अपने हाथों को कमर पर रखें। धीरे-धीरे ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर मोड़ें, कुछ सेकेंड तक इसी पोज में रहें। अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिती में वापस आ जाएं।
2) नाड़ी शोधन प्राणायाम
'नाड़ी' का अर्थ है 'मार्ग' 'शोधन' का अर्थ है 'शुद्ध करना'। इसे करने से चिंता, तनाव और अनिंद्रा की समस्या से राहत मिलती है। इसे करने से पूरे शरीर को ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचता है। इसे करने के लिए ध्यान मुद्रा में बैठें लेफ्ट पैर पर लैफ्ट हाथ को पैरों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। सीधे हाथ को नासाग्र मुदॅा में रखें। सीधे हाथ के अंगुठे से नोस्ट्रिल को बंद करें और दूसरी तरफ से सांस लें और रिंग फिंगर से दूसरी नोस्ट्रिल को बंद करें और दूसरी तरफ से सांस छोड़ें। इसे रिपीट करें।

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /बेकिंग सोडा को खाना बनाने के साथ सुंदरता निखारने में भी किया जाता है लेकिन कई लोग बेकिंग सोडा की बिना पूरी जानकारी के डायरेक्ट स्किन पर बेकिंग सोडा लगा लेते हैं, जिससे फायदे की जगह नुकसान हो जाता है। बेकिंग सोडा ब्यूटी हैक्स में भी इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इस्तेमाल से पहले आपको इसकी जानकारी रखनी जरूरी है कि कैसे स्किन या बालों पर इसका इस्तेमाल करना है। हम आपको बता रहे हैं, बेकिंग सोडा के हैक़्स-

ग्लोइंग स्किन के लिए बेकिंग सोडा
सामग्री:
2 बड़े चम्मच संतरे का छिलका
1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा
उपयोग करने का तरीका:
बेकिंग सोडा और संतरे के छिलके को मिक्स करके पेस्ट बना लें।
अब साफ चेहरे पर फेस मास्क की तरह इस मिश्रण को लगाएं।
15 मिनट बाद चेहरे पर पानी की छीटें डालकर एक मिनट तक हल्के-हल्के हाथों से मसाज करें।
अब ठंडे पानी से चेहरे को धो लें और तौलिये से चेहरा साफ कर लें।
अंत में चेहरे पर मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।

एक्ने व पिंपल से छुटकारा
सामग्री:
1 चम्मच बेकिंग सोडा
1 चम्मच पानी
उपयोग करने का तरीका:
बेकिंग सोडा और पानी को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
अपने हाथों व चेहरे को धो लें और तौलिये से चेहरे की नमी को साफ कर लें।
कील-मुंहासों से प्रभावित त्वचा पर बेकिंग सोडा का पेस्ट लगाएं और कुछ मिनटों तक उंगलियों की मदद से धीरे-धीरे त्वचा की मसाज करें।
मसाज के दो-तीन मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।
अब अपने चेहरे पर मॉइस्चराइजर का उपयोग करें।

सनबर्न के लिए बेकिंग सोडा
सामग्री:
एक कप बेकिंग सोडा
दो-चार कप ओट्स पाउडर
नहाने योग्य पानी
उपयोग करने का तरीका:
टब को पानी से भर दें।
अब उसमें बेकिंग सोडा और ओट्स पाउडर डाल दें।
लगभग 20 मिनट तक इस पानी में बैठें।
टब न हो तो बाल्टी में इन सामग्रियों को डालकर मग की मदद से नहा सकते हैं।

 

काले होठों के लिए बेकिंग सोडा
सामग्री:
1 चम्मच शहद
नींबू के रस की कुछ बूंदें
1 चम्मच बेकिंग सोडा
उपयोग करने का तरीका
तीनों सामग्रियों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें।
अब इस मिश्रण को होठों पर लगाएं और लगभग 2 मिनट के लिए छोड़ दें।
अब धीरे-धीरे उंगलियों की मदद से होठों को रगड़ें।

 

त्वचा के अनचाहे बाल
सामग्री:
1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा
200 ml गर्म पानी
उपयोग करने का तरीका:
गर्म पानी में बेकिंग सोडा मिलाएं और घोल को ठंडा होने दें।
अब एक पट्टी को घोल में भिगोकर हल्का निचोड़ लें।
पट्टी को त्वचा पर लगाकर छोड़ दें।
फिर कुछ देर बाद बेकिंग पाउडर से हल्की मसाज करें।
इसके बाद त्वचा को साफ पानी से धो लें।
धोने के बाद चेहरे को तौलिये से पोंछकर मॉइस्चराइजर लगाएं।

दांतों को सफेद करने के लिए
सामग्री:
आधा चम्मच बेकिंग सोडा
पानी की कुछ बूंदें
उपयोग करने का तरीका:
पानी की कुछ बूंदों के साथ बेकिंग सोडा मिलाकर पेस्ट बना लें।
अपने टूथब्रश पर बेकिंग सोडा पेस्ट लगाएं और धीरे-धीरे दांतों को ब्रश करें।
तीन-चार मिनट अच्छी तरह ब्रश करने के बाद पानी से कुल्ला कर लें।


डैंड्रफ से छुटकारा
सामग्री:
एक बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा
उपयोग करने का तरीका:
अपने बालों को हल्का गीला कर लें और बेकिंग सोडे को सीधा स्कैल्प पर लगाएं।
फिर उंगलियों की मदद से धीरे-धीरे कुछ सेकंड तक स्कैल्प की मालिश करें।
अब अपने बालों को कंडीशन करें।


घने बाल
सामग्री:
तीन कप पानी
एक कप बेकिंग सोडा
अरंडी का तेल (आवश्कतानुसार)
उपयोग करने का तरीका:
सभी सामग्रियों को मिलाएं और किसी बोतल में स्टोर कर लें।
बालों को हल्का गीला कर लें और बेकिंग सोडा के घोल को सीधा स्कैल्प पर लगाएं।
इसके बाद धीरे-धीरे बालों की मालिश करें।

 

सेहत / शौर्यपथ /आप जिम में कितना भी पसीना क्यों न बहा लें लेकिन जब तक आप अपनी डाइट में कुछ जरूरी सुधार नहीं करेंगे, तब तक आपकी फिटनेस की बात अधूरी रह जाएगी। ऐसे में अपनी डाइट में कुछ बातों का सुधार करके हम अपना वजन कम करके फिटनेस पर पूरा ध्यान दे सकते हैं। ऐसे में आपको रोटी छोड़ने की बजाय अपनी रोटी पर कुछ बातों का ध्यान देना चाहिए। जी हां, आपको रोटी बदलने की जरुरत है। ज्यादातर लोग गेंहू की रोटी खाते हैं लेकिन कुछ सुधार करके हम रोटी में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा सकते हैं। आइए, एक नजर डालते हैं-
चोकर की रोटी
आप अगर रोटी का पूरा पोषण पाना चाहते हैं, तो आप आटे से चोकर को पूरी तरह अलग न करें। आपकी रोटी में आटे की जगह अगर चोकर की मात्रा ज्यादा होगी, तो आपको ज्यादा पोषण मिल पाएगा।गेहूं की रोटी में कार्ब्स, आयरन, नियासिन, विटामिन बी 6, थायमिन और कैल्शियम होता है जबकि चोकर फाइबर से भरपूर होता है।
मल्टीग्रेन रोटी
आप अगर अपनी रोटी का टेस्ट बढ़ाकर उसे हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो आटे में एक मुट्ठी बेसन मिला दें।चने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो शरीर में कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया को तेज करता है। अपने गेहूं के आटे में थोड़ा-सा बेसन मिला कर उसे मल्टीीग्रेन आटा बनाया जा सकता है।
सत्तू की रोटी
आपने गर्मियों के मौसम में सत्तू घोलकर कई लोगों को पीते हुए देखा होगा, इसके साथ ही सत्तू की रोटी भी सेहत के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। वजन कंट्रोल रखने के साथ यह आपके शरीर को एक्टिव भी बनाए रखती है।
सोया रोटी
शरीर पर जमा फैट कम करने के लिए आपको सोया रोटी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होने के अलावा सोया रोटी में विटामिन और खनिज की काफी मात्रा होती है।सोया रोटी बुर्जुगों के लिए बेहद सेहतमंद मानी जाती है।
जौ की रोटी
आपको अगर बार-बार भूख लगती है, तो आप जौ की रोटी खाना शुरू कर दें क्योंकि इसे खाने के बाद लम्बे समय तक आपका पेट भरा रहता है। जौ की रोटी में प्रोटीन और फाइबर की काफी मात्रा पाई जाती है।

खाना खजाना / शौर्यपथ /ओणम केरल का एक लोकप्रिय त्योहार है। इस पर्व के लिए विशेष रूप से ओणम साद्य यानी जिसका मलयालम में अर्थ होता है 'भोज'। इसमें शाकाहारी भोजन बनाएं जाते हैं। जिसमें खास तौर पर अवियल (केरला अवियल रेसिपी), नारियल चटनी, सांबर और चावल आदि व्यंजन बनाएं जाते हैं, क्योंकि किसी भी त्योहार का मजा उसमें बनने वाले पकवानों से ही आता है। इसमें केले के पत्ते पर 24 व्यंजन होते हैं, जिनसे यह खास पर्व मनाया जाता है।
इसमें खास तौर पर ओणम साद्य में इन व्यंजनों को शामिल किया जाता है- खिचड़ी (हल्के से मसालेदार दही में लौकी), पचड़ी (दही में अनानास), ओलान (एक नारियल के दूध की ग्रेवी में काली फलियों के साथ सफेद कद्दू), नारियल के साथ कद्दूकस तली हुई सब्जियां, काया वरूथ (केला चिप्स), चेना वरुथा (यम चिप्स), सरकरा अपर (गुड़ में लिपटे केले के चिप्स), थीयल (मिश्रित सब्जी की ग्रेवी), एरीसेरी (मैश की हुई फलियां और नारियल के साथ कद्दू), चावल के आटे को भाप में पका कर और कई तरह की सब्जियां मिलाकर बनाया गया व्यंजन 'अवियल', दही पर आधारित करी (पुलीसेरी), काले छोले की सब्जी (कूटू करी), सांभर, रसम, मसालेदार छाछ, केला, पापड़, उबले चावल, आम का अचार, नींबू का अचार, इमली और अदरक की चटनी (पुली इनजी)।
यहां पढ़ें 5 खास रेसिपीज-
अवियल रेसिपी
अवियल केरला की एक पारंपरिक रेसिपी है, जिसमें सब्जियों को नारियल के साथ पकाया जाता है। बहुत कम समय में बनने वाली इस डिश को बनाने के लिए नारियल के तेल का इस्तेमाल होता है, नारियल के तेल में बनी यह डिश फ्लेवर में लाजवाब होती है।
लाजवाब पायसम डिश
सामग्री : 2 लीटर ताजा दूध, 2 मुट्ठी बासमती चावल, पाव कटोरी बादाम-पिस्ता व काजू की कतरन, 4 बड़े चम्मच शकर, आधा चम्मच पिसी इलायची और 3-4 लच्छे केसर।
विधि : खीर बनाने से पूर्व कुछ देर चावल को धोकर पानी में गला दें। अब मोटे तले वाले बर्तन में दूध लेकर अच्छी तरह उबाल लें। चावल का पूरा पानी निथार लें और उबलते दूध में डाल दें। बीच-बीच में चलाती रहें। चावल पक जाने पर शकर डाल दें और लगातार चलाती रहें, बीच में छोड़ें नहीं। शकर गलने दें और खीर जब अच्छी तरह गाढ़ी हो जाए, तब उसमें मेवा कतरन, इलायची डाल दें। ऊपर से केसर घोंट कर डालें। अब अच्छी तरह उबाल लें और फिर तैयार शाही पायसम (खीर) से भगवान को भोग लगाएं।
स्वादिष्ट केले का हलवा
सामग्री : 6 अधपके केले, 1 कप मिल्क पाउडर, 250 ग्राम शकर, 1 कप फुल क्रीम दूध, 2 चम्मच घी, 1/4 चम्मच इलायची पाउडर, 1/ 2 कप मेवा बारीक कटा हुआ या कतरन, 4-5 केसर के लच्छे इच्छानुसार।
विधि : हलवा बनाने के लिए सबसे पहले सभी केलों को छीलकर कद्दूकस कर लें। अब प्रेशर कुकर में केले और दूध को डालकर एक सीटी आने दें। एक कड़ाही में घी गरम करके इस मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक भूनें, जब तक कि यह कड़ाही न छोड़ने लगे। अब इसमें मिल्क पाउडर और शकर मिलाएं। 4-5 मिनट तक चलाएं। इलायची पाउडर, घोटी हुई केसर और मेवे की कतरन डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार केले का हलवा सर्व करें।
नारियल चटनी
सामग्री : पाव कटोरी ताजा हरा धनिया, 1 कटोरी गीला नारियल (कद्दूकस किया हुआ), 4-5 हरी मिर्च, अदरक 1 इंच का टुकड़ा, 1 चम्मच जीरा, 1/2 चम्मच शकर, 1 नींबू, नमक स्वादानुसार।
कैसे बनाएं- उपरोक्त सभी सामग्री को धो लें और थोड़ा-सा पानी मिलाकर मिक्सी में पीसें। ऊपर से नींबू डालकर अच्छी तरह मिला लें। नारियल चटनी तैयार है।
मसाला सांभर
सामग्री : 1 कप अरहर दाल, 4-5 साबुत लाल मिर्च, 3 चम्मच किसा हुआ गीला नारियल, 3 बड़े चम्मच किसा हुआ सूखा नारियल, 1 टुकड़ा अदरक, थोड़ी सी हींग, नमक, हल्दी, 1/2 कप कटी हुई लौकी, 1/2 कप कटा हुआ कद्दू, 1-2 कटी हुई सुरजना फली, मीठा नीम, राई, जीरा, लहसुन की कुछ कलियां और तेल।
विधि : अरहर की दाल को साफ करके धो लें। अब कुकर में आवश्यकतानुसार पानी डालकर उसमें दाल, थोड़ा-सा घी, स्वाद अनुसार नमक, हल्दी, लालमिर्च, इमली का पानी डालकर पकाने के लिए रख दें। अब वे सब्जियां लें, जो आप सांभर में डालना चाहते हैं, जैसे आलू, टमाटर, गाजर, बैंगन, मुंगने की फली (सहजन की फली), लौकी आदि। इन्हें अच्छी तरह से धोकर काट लें। एक कड़ाही में तेल डालें। तेल गर्म होने के बाद इसमें थोड़ा प्याज, थोड़ा नमक, हल्दी व सांभर मसाला डालकर सब्जियों को पका लें। जब सब्जियां अच्छी तरह से पक जाएं तो इसमें दाल को डालकर अच्छी तरह मिला लें।
एक कड़ाही में घी लें। घी के गर्म होने के बाद इसमें लाल खड़ी मिर्च, मीठा नीम, राई, जीरा, लहसुन की कुछ कलियां व हींग डालकर इसे अच्छी तरह फ्राई करने के बाद इसमें दाल और सब्जियां डालकर ढंककर रख दें। एक उबाल आने के बाद गैस बंद कर दें। लीजिए तैयार है चटपटा सांभर।

शौर्यपथ / कोरोना वायरस का कहर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों द्वारा लगातार तीसरे लहर की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इस बीच सीजनल बुखार और वायरल भी
काफी लोगों में फैल रहा है। इस मौसम में लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसलिए जल्दी सर्दी, खांसी, जुकाम और फ्लू की चपेट में आ जाते हैं। इस मौसम में बच्चे और
बुजुर्ग बहुत अधिक बीमार पड़ते हैं। ऐसे में सावधानी रखने की जरूरत है, और डाइट में बदलाव की जरूरत होती है ताकि वायरल इंफेक्‍शन नहीं हो।
लेकिन वायरल, सर्दी-जुकाम होना भी खतरे की घंटी लगती है। क्योंकि वायरस और कोविड-19 के लक्षण बहुत हद तक मिलते-जुलते हैं। अगर एक दिन भी सर्दी-खांसी जुकाम और
बुखार होने पर लापरवाही नहीं करें। साथ ही आप जल्दी बीमार पड़ते हैं तो घरेलू नुस्खे आजमाते रहें।
सीजनल फ्लू के लक्षण
-बुखार
-कंपकंपी होना
-ठंड लगकर बुखार आना
-नाक बंद होना
-गले दुखना
-हाथ पैर में दर्द होना
-मांसपेशियों में खिंचाव होना
यह लक्षण कोविड-19 से मिलते-जुलते हैं। इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। और पूरी तरह से ठीक नहीं होने तक अपना उपचार जारी रखें।
सीजनल फ्लू से बचाव के घरेलू नुस्‍खें
1. हल्दी वाला दूध पीएं - सर्दी-खांसी लगातार बनी हुई है तो हमेशा की तरह हल्दी वाला दूध पीकर सो जाएं। इसमें मौजूद गुण इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करते हैं और हल्दीएंटीबायोटिक का काम करती है। रोज रात को आधा गिलास हल्दी का दूध पीकर सोएं।
2.शहद और काली मिर्च - अगर आप कफ और खांसी से परेशान हो गए है तो शहद और काली मिर्च को 1 चम्‍मच में मिक्‍स कर लें और खाकर सो जाएं।
ध्‍यान रहे इसे खाने के
बाद पानी भी नहीं पीना है और कुछ खाना भी नहीं है। दरअसल, शहद की तासीर गर्म होती है, और काली मिर्च की भी। यह शरीर में नेचुरल गर्मी पैदा करता है।
3. च्यवनप्राश खाएं -च्यवनप्राश में कई सारी जड़ी-बूटियां शामिल होती है। इसका सेवन करने से शरीर का तापमान सामान्य रहता है। जिससे फ्लू और सर्दी जुकाम का खतरा टल जाता हैइसलिए प्रतिदिन दूध के साथ 1 चम्‍मच च्यवनप्राश का सेवन जरूर करना चाहिए। च्यवनप्राश को आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में जाना जाता है।
4. भाप लें - बहुत अधिक सर्दी-जुकाम होने पर भाप लेना नहीं भूलें। आप गर्म पानी में कैप्सूल या विक्स डालकर भी भाप लें सकते हैं। इसके बजाय टी ट्री ऑयल,लेमन ग्रास तेल, लौंगका तेल भी डाल सकते हैं। नाक खोलने से सांस लेने में परेशानी नहीं होती और छाती में भी काफी राहत मिलती है।
5.पुदीना और अजवाइन की भाप - अगर आपको बहुत अधिक खांसी या कफ हो रहा है तो आप गर्म पानी में पुदीने की पत्तियां या अजवाइन की पत्तियों की भाप लें। इससे तुरंत
आराम मिलेगा। सर्दी-खांसी होने पर अदरक की चाय पीना नहीं भूलें। और स्वास्थ्य के लिहाज से चाय में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें।

खाना खजाना / शौर्यपथ / खास पर्व पर अपनों की पसंदीदा मिठाई को बाजार से खरीदने की बजाय खुद ही अपने हाथों से बनाएं और अपनी स्वादिष्ट मिठाई खिलाकर भाई का दिल जीत लें।
पढ़ें इन 15 सरल टिप्स को अपनाएं और राखी पर बनाएं ये खास मिठाइयां...
1.खीर बनाते समय कड़ाही में शक्कर पिघलाकर उसमें दूध मिलाकर औटा लेने से तो कम समय में दूध गाढ़ा हो जाता है और स्वादिष्ट खीर बनती है।
2. मालपुआ बनाते समय उसमें थोड़ी सूजी मिला दीजिए, इससे मालपुआ खस्ता बनेगा।
3. सेवइयां को गाढ़ी व स्वादिष्ट बनाने के लिए बनाते समय उसमें जरा-सा कस्टर्ड पावडर मिला दें। सेवइयों का स्वाद बढ़ जाएगा
4. बेसन के लड्डू बनाते समय भुने बेसन में दूध के छींटे दें और गरम घी मिलाएं। जहां तक हो सके शक्कर का बूरा प्रयोग करें। ये लड्‍डू दिखने में दानेदार दिखेंगे और खाने में अधिक स्वादिष्ट लगेंगे।
5. बर्फी को और अधिक लुभावनी बनाने के लिए किसी भी बर्फी पर, किसी नए टूथब्रश पर कोई भी खाने वाला हल्का रंग लगाकर ब्रश को हल्के हाथ से दबाएं जिससे रंग बर्फी पर छिड़काव की तरह फैल जाएगा और बर्फी सुंदर दिखाई देगी। खासकर सफेद रंग की बर्फी पर तो अधिक लुभावनी दिखाई देगी।
6. बेसन के लड्डू बनाना हो तो बेसन रवेदार होना चाहिए।
7. कस्टर्ड में यदि गुठलियां पड़ गई है तो घबराएं नहीं उसे छलनी से छान लें और फिर गुठलियों में थोड़ा दूध डालकर मिक्सी में चला दें।
8. अगर आप लड्डू, शकरपारे जैसी मिठाइयां 10-15 दिनों तक स्टोर करना चाहते हैं तो उन्हें एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें। सूखी मिठाइयों को हवा लगने से ज्यादा समय तक क्रिस्‍पी नहीं रहती हैं।
9. मूंग दाल का हलवा बनाते समय पिसी दाल को भूनने पर वह कड़ाही में चिपकता है इसीलिए भूनते समय उसमें थोड़ा-सा बेसन मिला दिया जाए, तो दाल कड़ाही से चिपकेगी भी नहीं और भूनना भी आसान होगा।
10. किसी भी मिठाई को बनाते समय जो भी खुशबू डालना है, वह मिठाई ठंडी होने पर डालें, जैसे इलायची, जायफल आदि।
11. जब भी बर्फी बनाना हो तो मिश्रण को आंच से उतारने के बाद थोड़ी देर तक कड़ाही में अच्छी तरह चलाएं, इससे बर्फी अच्छी बनती है।
12. खीर बनाते समय यदि दूध पतला हो तो उसमें थोड़ी-सी खसखस या चावल पीसकर डाल देना चाहिए, इससे खीर गाढ़ी भी बनेगी और स्वाद भी बढ़ेगा।
13. घर पर बाजार में मिलने वाली दानेदार एवं खस्ता बेसन की बर्फी बनाने के लिए बेसन में थोड़ी-सी भुनी हुई सूजी मिला दें। इससे बर्फी खस्ता होकर उसका स्वाद भी बढ़ जाएगा।
14. चावल या गाजर की खीर बनाते समय शकर अंत में डालें, वरना चावल या गाजर कच्चे रह जाएंगे। शकर डालने के बाद दूध को थोड़ी देर और उबालें।
15. किसी खास अवसर पर अगर आपने चाश्नी वाली मिठाई बनाई है और उसे कुछ दिनों तक स्टोर करना चाहती हैं, तो उसे कांच के जार में डालकर ठंडी जगह पर रखें। इस तरह आप मिठाइयों को कुछ दिन बाद भी उपयोग में ले सकते हैं।

व्रत त्यौहार / शौर्यपथ /दक्षिण भारत में ओणम का प्रसिद्ध त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्र माह की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 12 अगस्त 2021 से प्रारंभ होकर 23 अगस्त तक चलेगा। 21 अगस्त को ओणम का मुख्य पर्व रहेगा। आओ जानते हैं कि ओणम के त्योहार में फूलों का घर क्यों बनाते हैं।
1. राजा बलि करते हैं इस दिन नगर भ्रमण : यह त्योहार किसी देवी-देवता के सम्मान में नहीं बल्की एक दानवीर असुर राजा बलि के सम्मान में मनाया जाता है जिसने विष्णु के अवतार भगवान वामन को 3 पग भूमि दान में दे दी थी और फिर श्री वामन ने उन्हें अमरता का वरदान देकर पाताल लोक का राजा बना दिया था। ऐसी मान्यता है कि अजर-अमर राजा बलि ओणम के दिन अपनी प्रजा को देखने आते हैं और इसीलिए ओणम के पर्व के दिन घर को सजाने के साथ ही फूलों का घर बनाते हैं हैं।
2. बनाते हैं फूलों का घर : जिस तरह दशहरे में दस दिन पहले रामलीलाओं का आयोजन होता है या दीपावली के पहले घर की रंगाई-पुताई के साथ फूलों से सजावट होती रही है। उसी तरह ओणम से दस दिन पहले घरों को फूलों से सजाने का कार्य चलता रहता है। घर को अच्छे से सजाकर बाहर रंगोली बनाते हैं। खासकर घर में कमरे को साफ करके एक फूल-गृह बनाया जाता है जिसमें गोलाकार रुप में फूल सजाए जाते हैं। प्रतिदिन आठ दिन तक सजावट का यह कार्यक्रम चलता है। इस दौरान राजा बलि की मिट्टी की बनी त्रिकोणात्मक मूर्ति पर अलग-अलग फूलों से चित्र बनाते हैं। प्रथम दिन फूलों से जितने गोलाकार वृत बनाई जाती हैं दसवें दिन तक उसके दसवें गुने तक गोलाकार में फूलों के वृत रचे जाते हैं।
3. फूलों की सजावट के आसपास उत्सव मनाती हैं महिलाएं : नौवें दिन हर घर में भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा होती है तथा परिवार की महिलाएं इसके इर्द-गिर्द नाचती हुई तालियां बजाती हैं। वामन अवतार के गीत गाते हैं। रात को गणेशजी और श्रावण देवता की मूर्ति की पूजा होती है। मूर्तियों के सामने मंगलदीप जलाए जाते हैं। पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति विसर्जन किया जाता है।
इस दौरान पापड़ और केले के चिप्स बनाए जाते हैं। इसके अलावा 'पचड़ी–पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर' भी बनाया जाता है। दूध, नारियल मिलाकर खास तरह की खीर बनाते हैं। कहते हैं कि केरल में अठारह प्रकार के दुग्ध पकवान बनते हैं। इनमें कई प्रकार की दालें जैसे मूंग व चना के आटे का प्रयोग भी विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है। भोजन को कदली के पत्तों में परोसा जाता है।

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