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April 05, 2026
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टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /आमतौर पर लोग भोजन के बाद सौंफ खाना पसंद करते हैं, आखिर ये पाचन के लिए फायदेमंद जो होती है। अगर आप भी सौंफ खाना पसंद करते हैं तो आइए, आपको इसके सेवन से होने वाले कुछ अन्य फायदे भी बताते हैं और साथ ही जानिए सौंफ के कुछ चमत्कारी नुस्खे -
1 भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है।

2 पांच-छे ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की रोशनी ठीक रहती है। अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिकी हुई सौंफ और बिना तली सौंफ के मिक्चर से अपच होने पर बहुत लाभ होता है।
3 दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होने में मदद मिलती है।
4 अस्थमा और खांसी के उपचार में भी सौंफ का सेवन सहायक है।
5 कफ और खांसी होने पर भी सौंफ खाना फायदेमंद होता है।
6 गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होने लगते है।
7 यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।
8 एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए।
9 सौंफ के पावडर को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है। भोजन के बाद 10 ग्राम सौंफ लेनी चाहिए।

आस्था / शौर्यपथ /मान्यता अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था। इस दिन घर घर में मिट्टी के गणेशजी की स्थापना होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार 10 सितंबर 2021 से गणेश उत्सव का प्रारंभ हो रहा है और विसर्जन अनंत चतुर्दशी अर्थात 19 सितंबर के दिन होगा। आओ जानने हैं कि किस तरह गणेश प्रतीमा को घर में लाना चाहिए।
1. ऐसे नहीं कि आप बाजार गए और प्रतिमा को खरीदकर ले आएं और स्थापित कर दिया। गणेशजी को प्रसन्न करना है तो प्रसन्नतापूर्वक और विधिवत रूप से श्री गणेशजी का घर में मंगल प्रवेश होना चाहिए।
2. गणेशजी के आगमन के पूर्व घर और द्वार को सजाया जाता है और जहां उन्हें स्थापित किया जाएगा उस जगह की सफाई करके कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और हल्दी से चार बिंदी बनाएं। फिर एक मुट्ठी अक्षत रखें और इस पर छोटा बाजोट, चौकी या लकड़ी का एक पाट रखकर उस पर पीला, लाल या केसरिया वस्त्र बिछाएं। मतलब यह कि स्थापित करने वाली जगह को पहले से ही सजाकर रखें, जहां पर पूजा और आरती का सामान भी पहले से ही रखा हो।
3. बाजार जाने से पहले नवीन वस्त्र धारण करें, सिर पर टोपी या साफा बांधें, रुमाल भी रखें। पीतल या तांबे की थाली साथ में ले जाएं नहीं तो लकड़ी का पाट ले जाएं जिस पर गणेशजी विराजमान होकर घर में पधारेंगे। इसके साथ ही घंटी और मंजीरा भी ले जाएं।
4. बाजार जाकर जो भी गणेशजी पसंद आए उसका मोलभाव न करें उसे आगमन के लिए निमंत्रित करके दक्षिणा दे दें।
5. फिर गणेशजी की प्रतिमा को धूम-धाम से घर के द्वारा पर लाएं और द्वार पर ही उनकी आरती उतारें। मंगल गीत गाएं या शुभ मंत्र बोलें।
6. इसके बाद बप्पा के नारे लगाते हुए उन्हें अंदर लेकर आएं और पहले से तैयार स्थान पर विराजित करें।
7. मंगल प्रवेश के बाद विधिवत पूजा और आरती करें। इस तरीके से किए गए मंगल प्रवेश से सभी तरह के विघ्न दूर होकर जीवन में भी मंगल ही मंगल हो जाता है, क्योंकि गणेशजी विघ्न हरता और मंगलकर्ता हैं।

शौर्यपथ / किसी भी साल के सितंबर महीने में अगर आपका जन्म हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप दिल के अत्यंत उदार है लेकिन एक अजीब तरह की सनक आपमें पाई जाती है। स्वयं की प्रगति के लिए आप थोड़े से स्वार्थी भी हो जाते हैं। आपके सबसे खास मित्र को भी कभी नहीं पता चल पाता है कि आपके अंदर क्या खिचड़ी पक रही है।
आपयकायक कोई उपलब्धि सामने लाकर सबको चौंका देते हैं। अपने आप से आपको इतनी मोहब्बत होती है कि कोई थोड़ा सा भी आपके विरूद्ध कुछ कह दें तो आप भड़क उठते हैं। आपमें सीखने और समझने की क्षमता अन्य की तुलना से अधिक होती है। खुद को कैसे निरंतर आगे बढ़ाया जाए यह कोई आपसे सीखें।
गुस्से के तो आप बादशाह है लेकिन हमेशा इसी गलतफहमी में रहते हैं कि आपके जैसा विनम्र कोई दूसरा नहीं होगा। तानाशाही आपके रग-रग में समाई है। दूसरों से काम करवाना हो तो जोंक की तरह पीछे लगना भी आपसे ही सीखना चाहिए। अपने नजदीकी लोगों से आपकी भारी-भरकम अपेक्षाएं होती है। यहाँ तक कि प्यार का इजहार करने में भी आपका अहंकार हावी रहता है। आप ऊर्जा से लबालब रहते हैं।
धुन के इतने पक्के कि अपने काम के लिए 24 घंटे आप भूखे-प्यासे रहकर काम कर सकते हैं लेकिन बुरी आदत यही है कि आप चाहते हैं आपकी इस आदत का लोग हरदम गुणगान करें। तारीफ के इतने भूखे होते हैं कि हर समय कोई आपको स्तुति गान करने वाला चाहिए। अक्सर चाटूकार आपकी इस कमजोरी का फायदा उठा ले जाते हैं। आप अपने आपको हर समय अप-टू-डेट रखते हैं। इसीलिए आपका हर काम अप-टू-द-मार्क होता है। किसी को कुछ देते हैं तो उसकी वसूली भी कर लेते हैं।
आपको जीवन में संघर्ष भी खूब करना पड़ता है। खासकर अगर आप करियर के मामले में बेहतरीन पोजिशन पर हैं तो हो सकता है प्यार के मामले में फिसड्डी हों, या फिर अगर प्यार आपके पास भरपूर है तो शादी का लड्डू आपकी थाली में नहीं होगा। कहने का मतलब यही कि जीवन के किसी एक क्षेत्र में आपको हमेशा खालीपन लग सकता है। आप असंतुष्ट प्राणी भी हैं।
हर समय आपको कुछ नया ना मिले तो आप कुंठित हो जाते हैं। सेक्स आपके जीवन में कई रूपों में आता है लेकिन आप बेचारे, पद-प्रतिष्ठा के मारे कभी उनका आनंद नहीं उठा पाते। आपमें अगर चिपकने की प्रवृत्ति थोड़ी सी कम हो जाए तो आप एक शानदार इंसान के रूप में याद किए जाएंगे। अक्सर सितंबर माह में जन्मे लोग बेहतरीन सिंगर, राइटर, एडिटर या साइंटिस्ट होते हैं।
सितंबर माह की लड़कियां, उफ भगवान बचाएं इनसे। स्वयं को परम ज्ञानी समझने वाली ये कन्याएं अक्सर सच्चे प्यार से वंचित रह जाती है। इधर की उधर करने में उस्ताद हैं। कोई शक नहीं कि इनमें विलक्षण प्रतिभा होती है। कोई एक खास गुण भी होता है। लेकिन अभिमान के चलते यह उस गुण की सही कद्र नहीं कर पाती हैं।
अपार रूप-सौंदर्य की मल्लिका होती है पर प्यार के मामले में अव्वल दर्जे की बेवकूफ होती हैं। अपना सबकुछ लूटाकर भी खुश रहती है। सच्चे प्यार को परख नहीं पाती और गलत व्यक्ति के साथ नैया डूबो लेती है। सितंबर माह में जन्मी कुछ लड़कियों का मन शीशे की तरह साफ होता है। दुनिया के छल-कपट से कोसों दूर ये मोहतरमाएं अन्याय के विरूद्ध शेरनी बन जाती है।
अगर इनका कहीं अफेयर चल रहा हो तो अपना किया-धरा सब भूल जाएंगी लेकिन अगले का पाई-पाई का हिसाब रखेंगी। अपने प्यार को लेकर पजेसीव भी होती हैं। जुबान कड़वी, अंदाज मीठा यही इनकी पहचान है। इन्हें सलाह है कि सच्चे दोस्त असली मोती की तरह होते हैं उन्हें सहेजना सीखें। मतलबपरस्ती से दोस्तों का कुछ दिन तक फायदा तो उठा लेंगी लेकिन संभव है एक दिन बिलकुल अकेली पड़ जाए।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / खाने के साथ थाली में परोसा गया अचार न सिर्फ भूख बल्कि खाने का स्वाद भी बढ़ा देता है। लेकिन बारिश के मौसम में अक्सर अचार जैसी खाने -पीने की चीज़ों में फंगस लग जाती है। ये फंगस न सिर्फ खाने के स्वाद खराब करती है बल्कि सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आपको भी बारिश के मौसम में इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है तो अपनाएं ये टिप्स एंड ट्रिक्स।
सामग्री के पूरी तरह सूखने पर ही बनाएं अचार -
जब कभी आप अचार बनाएं तो यह सुनिश्चित कर लें कि अचार को बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सारी सामग्री अच्छी तरह सूखी हुई हो वरना अचार में बारिश के मौसम में नमी ज्यादा होने की वजह से पानी आने लगता है और ये जल्दी खराब होने लगता है। इसके अलावा अचार को बीच-बीच में धूप भी जरूर दिखाएं।
अचार में अतिरिक्त तेल और नमक मिलाएं -
कई बार अचार में पड़ने वाले तेल मसालों की कमी की वजह से उसमें फफूंदी लगने लगती है। इसके अलावा जब अचार में तेल ठीक से मिक्स नहीं हो पाता है तब भी अचार में फंगस लग जाती है। अचार को फंगस से बचाने के लिए इसमें थोड़ी ज्यादा मात्रा में तेल और नमक मिक्स करें। कोशिश करें कि अचार तेल में अच्छी तरह से डूब जाए। ऐसा करने से इसमें जल्दी फंगस नहीं लगता है।
फंगस से बचाने के लिए अचार को ऐसे करें स्टोर-
अचार को ठीक से स्टोर नहीं कर पाने की वजब से वह लंबे समय तक नहीं चल पाता है और इसमें फंगस लगने लगता है। अचार को हमेशा कांच के कंटेनर या चीनी मिट्टी की बरनी में ही स्टोर करना चाहिए। कभी भी अचार को प्लास्टिक के कंटेनर या जार में न रखें। इससे अचार का प्लास्टिक के साथ रिएक्शन हो जाता है जो फंगस के साथ अचार में बदबू भी पैदा कर देता है।
ध्यान रखें ये बातें -
-अचार निकालने के लिए सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें।
-अचार के बड़े जार को बार-बार खोलने की जगह थोड़ा सा अचार रोजाना इस्तेमाल के लिए अलग से किसी छोटी बर्तन में निकालकर रख लें।
-अगर थोड़ी मात्रा में अचार को स्टोर करना है तो आप इसे फंगस से बचाने के लिए फ्रिज में स्टोर कर सकती हैं।
-अचार बनाने से पहले सभी मसालों को हल्का सा रोस्ट कर लें जिससे नमी दूर हो जाती है।

सेहत / शौर्यपथ / कद्दू का नाम सुन कर लोगों में एक अलग सा रिएक्शन देखने को मिलता है, जो लोग इसे खाना पसंद नहीं करते, वह अक्सर इसका नाम आते ही मुंह सिकोड़ते नजर आते हैं। नाम से भले ही ये कूल नहीं लगता, लेकिन इसे खाने के खूब फायदे हैं। कैलोरी की मात्रा कम होने के साथ विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है कद्दू। इसमें बीटा कैरोटिन का भी बहुत बड़ा स्त्रोत है, एक कैरोटीनॉयड जिसे आपका शरीर विटामिन ए में परिवर्तित करता है। इसे खाने के ढरों फायदे हैं। आइए, जानते हैं।
1) कद्दू में एंटीऑक्सीडेंट अल्फा कैरोटीन, बीटी क्रिप्टोक्सैन्थिन और कई अन्य होते हैं, जो कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचा सकता है।
2) कद्दू में विटामिन ए और सी की मात्रा अधिक होती है, जो आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन ई, आयरन और फोलेट इम्यूनिटी को भी मजबूत कर सकते हैं।
3) कद्दू में विटामिन ए, ल्यूटिन और जेक्सैंथिन मौजूद होता है, जो आंखों की दृष्टि को होने वाली हानि से बचा सकता है। जो बढ़ती उम्र के साथ होना सामान्य है।
4) कब्ज की परेशानी से पीड़ित लोग रोजाना कद्दू के बीज का सेवन कर सकते हैं। इसके बीजों में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। साथ ही कब्ज से राहत मिलती है।
5) कद्दू में मौजूद फाइबर और विटामिन मोटापा कम करने में मदद करते हैं। साथ ही इसे खाने से स्किन स्ट्रॉन्ग और हेल्दी रहती है।

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / स्किन प्रॉब्लम का सामना किसी भी उम्र में करना पड़ सकता है। कई बार ये प्रॉब्लम्स स्किन पर धीरे-धीरे नजर आती है, तो वहीं कई बार ये समय से पहले ही नजर आने लगती हैं। जैसे फाइन लाइन्स की समस्या आदि। ऐसे में इसके कारण चेहरे की रंगत पर खूब फर्क पड़ता है। जिसकी वजह से किसी-किसी की स्किन डल, बेजान और रूखी हो जाती है। ऐसे में आप घर में ही बने फेस पैक से अपनी स्किन को प्रोटेक्ट कर सकती है। आज जानते हैं स्किन पर काजू फेस पैक के फायदे और बनाने के तरीकों के बारे में।
काजू का फेस पैक के फायदे
काजू और दूध का मास्क ऑइली और ड्राई दोनों स्किन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। पैक बनाने में कच्चे दूध का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्किन को अंदर से पोषण देने का काम करता है। वहीं बेसन के इस्तेमाल से स्किन की फाइन लाइन्स को कम किया जा सकता है।
काजू में प्राकृतिक एजिंग के संकेतों को कम करने में मदद करता है। इस फेस पैक को हफ्ते में कम से
कम एक बार चेहरे पर इस्तेमाल करने से रंगत में निखार और ग्लो आ जाता है।
काजू का फेस पैक बनाने का सामान
8-10 काजू
1/2 कप ताजा दूध
2 चम्मच बेसन
काजू का फेस पैक बनाने का तरीका
काजू को कम से कम 15 मिनट के लिए दूध में भिगोकर रख दें। 15 मिनट बाद दोनों को मिक्सी में पीस लें और पेस्ट तैयार करें। अब एक बाउल में पेस्ट डालें और उसमें बेसन को अच्छी तरह से मिक्स करें। सभी सामग्रियों को मिला कर फेस पैक तैयार करें।
कैसे करें इस्तेमाल
चेहरे को सबसे पहले कच्चे दूध से साफ करें, पूरे चेहरे और गर्दन में फेसपैक अच्छी तरह से लगा लें। फिर 15 मिनट सूखने के बाद पानी से धो लें। इस फेस पैक को हफ्ते में कम से कम 3 बार अप्लाई कर सकते हैं। इस फेस पैक के इस्तेमाल से चेहरा ग्लोइंद हो जाता है।

खाना खजाना / शौर्यपथ / नॉनवेज के शौकीन लोगों को ढाबा स्टाइल चिकन करी का स्वाद बेहद पसंद आएगा। इस रेसिपी के जरिए आप भी अपनी किचन में ढाबा स्टाइल में चिकन तैयार कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह रेसिपी बनने में बेहद आसान और खाने में उतनी ही टेस्टी होती है। तो आइए देर किस बात की जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी रेसिपी।
ढाबा स्टाइल चिकन की सामग्री-
6 टुकड़े चिकन लेग
1 टी स्पून नमक
2 टी स्पून लेमन
2 टी स्पून अदरक लहसुन का पेस्ट
2 प्याज
अदरक
8-9 लहसुन की कलियां
3 हरी मिर्च
3 टेबल स्पून तेल
2 टेबल स्पून जीरा
1 तेजपत्ता
1 दालचीनी स्टिक
5 बड़ी इलाइची
8 कालीमिर्च
4 लौंग
4 टमाटर
1 हल्दी
1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
1 टी स्पून नमक
2 टी स्पून धनिया पाउडर
1 कप पानी
1 टी स्पून गरम मसाला
2 टी स्पून हरा धनिया
2 टेबल स्पून घी
1 टी स्पून अदरक
4 हरी मिर्च
ढाबा स्टाइल चिकन बनाने की वि​धि
मैरीनेशन के लिए:
एक बाउल में चिकन के पीस लें और उसमें नमक, नींबू का रस और अदरक लहसुन का पेस्ट डालें।इसे अच्छे से मिलाएं और 30 मिनट के लिए एक साइड में रख दें।अब प्याज, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च को एक साथ पीसकर पेस्ट बना लें।
करी बनाने के लिए:
एक पैन में तेल लें, इसमें जीरा, तेजपत्ता, दालचीनी, बड़ी इलाइची, काली मिर्च और लौंग डालें।गोल्डन ब्राउन होने तक भूनें और अब इसमें प्याज का पेस्ट डालें।इसे अच्छे से मिलाएं और पैन को कुछ देर ढककर पकाएं।कुछ देर बाद इसमें टमाटर डालें और इसी के साथ हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक और धनिया पाउडर मिलाएं।अब इसमें चिकन के पीस डालकर भूनें।इसमें थोड़ा सा पानी डालें।इसे प्रेशर कुकर में डालकर पकाएं।इसके बाद कुकर में गरम मसाला और हरा धनिया डालें।
तड़का बनाने के लिए:
एक पैन में घी गर्म करें, अब इसमें अदरक और हरी मिर्च डालें। इसे पकने दें और इसके बाद तड़के को प्रेशर कुकर में डालें।एक उबाल आने तक पकाए और हरे धनिये से गार्निश करके गर्मागर्म सर्व करें।

व्रत त्यौहार / शौर्यपथ /श्रावण माह में रक्षा बंधन के बाद भाद्रपद प्रारंभ हो जाता है तब अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी रहती है। उसके बाद गणेशोत्सव का प्रारंभ हो जाते हैं। 19 सितंबर 2021 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन हो जाता है। इसके बाद पूर्णिमा से पितृपक्ष प्रारंभ हो जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक कुल 16 दिनों तक चलता है।
इस बार पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ होंगे। पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा।
पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां-
पूर्णिमा श्राद्ध - 20 सितंबर 2021
प्रतिपदा श्राद्ध - 21 सितंबर 2021
द्वितीया श्राद्ध - 22 सितंबर 2021
तृतीया श्राद्ध - 23 सितंबर 2021
चतुर्थी श्राद्ध - 24 सितंबर 2021
पंचमी श्राद्ध - 25 सितंबर 2021
षष्ठी श्राद्ध - 27 सितंबर 2021
सप्तमी श्राद्ध - 28 सितंबर 2021
अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर 2021
नवमी श्राद्ध - 30 सितंबर 2021
दशमी श्राद्ध - 1 अक्तूबर 2021
एकादशी श्राद्ध - 2 अक्तूबर 2021
द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 2021
त्रयोदशी श्राद्ध - 4 अक्तूबर 2021
चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर 2021
अमावस्या श्राद्ध- 6 अक्तूबर 2021
इस साल 26 सितंबर को श्राद्ध तिथि नहीं है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / सितंबर माह में 2 बड़ी एकादशियां आएगी। पहली अजा एकादशी और दूसरी परिवर्तनी एकादशी। एकादशी का व्रत रखने का खास महत्व है। आओ जानते हैं कि यह दोनों एकाशशियां कब आ रही और क्या है इनका महत्व।
3 सितंबर अजा एकादशी -
कब है अजा एकादशी : भाद्रपद माह में कृष्णपक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। इस बार उदयातिथि के मान से यह व्रत 3 सितंबर 2021 को रखा जाएगा।
अजा एकादशी का महत्व : भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली तथा अश्वमेध यज्ञ का फल देने वाली है। अजा एकादशी से पुत्र पर कोई संकट नहीं आता, दरिद्रता दूर हो जाती है, खोया हुआ सबकुछ पुन: प्राप्त हो जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
17 सितंबर परिवर्तनी एकादशी -
कब है परिवर्तनी एकादशी : भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तनी एकादशी कहते हैं। इसके अलावा इसे जलझूलनी यानी डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 17 सितंबर शुक्रवार को रहेगी।
परिवर्तनी एकादशी का महत्व : इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसीलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के व्रत से सभी दु:ख दूर होकर मुक्ति मिलती है। इस दिन को व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप का जलवा पूजन किया गया था। इसीलिए इसे डोल ग्यारस कहा जाता है। इसी दिन राजा बलि से भगवान विष्णु ने वामन रूप में उनका सर्वस्व दान में मांग लिया था एवं उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर अपनी एक प्रतिमा को राजा बलि को सौंप दी थी, इसी वजह से इसे वामन ग्यारस भी कहा जाता है।

शौर्यपथ /31 अगस्त 2021, मंगलवार को भाद्रपद कृष्णा नवमी के दिन गोगा नवमी मनाई जा रही है। यह त्योहार राजस्थान का लोकपर्व है। गोगा नवमी का त्योहार भारत के अन्य कई राज्यों में भी मनाया जाता है, जहां इस पर्व को गुग्गा नवमी भी कहा जाता है। भाद्रपद महीने में कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन यानी नवमी तिथि को गोगा नवमी पर्व के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है ।
गोगा जी राजस्थान के लोक देवता हैं, जिन्हें 'जाहरवीर गोगा जी' के नाम जनमानस में जाना जाता है। इस दिन श्री जाहरवीर गोगा जी का जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। गोगा देव को सिर्फ हिन्दू ही नहीं मुसलमान भी इनको पूजते हैं।
इस दिन को गोगा नवमी के रूप में वाल्मीकि समाज अपने आराध्य देव वीर गोगादेव जी महाराज का जन्मोत्सव परंपरागत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह एवं उमंग के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाते हैं। एक किंवदंती के अनुसार गोगा देव का जन्म नाथ संप्रदाय के योगी गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। योगी गोरक्षनाथ ने ही इनकी माता बाछल को प्रसाद रूप में अभिमंत्रित गुग्गल दिया था जिसके प्रभाव से महारानी बाछल से गोगा देव (जाहरवीर) का जन्म हुआ।
नवमी तिथि मंगलवार, 31 अगस्त 2021 को 2:00 एएम.से शुरू होकर 01 सितंबर, 2021 सुबह 4:23 बजे पर नवमी तिथि समाप्त होगी।
जानिए खास बातें-

1. गोगा नवमी को जाहरवीर गोगा, गोगा बीर, गोगा महाराज, राजा मंडलिक, गुग्गा, गोगा पीर, जाहरपीर, गोगा चौहान और गोगा राणा आदि कई नामों से भी जाना जाता है।
2. भाद्रपद कृष्ण नवमी के दिन राजस्थान, हनुमानगढ़, गोगामेड़ी, गोगा जी मंदिर आदि कई महत्वपूर्ण जगहों पर गोगा देव का पूजन, भजन, कीर्तन, नाग पूजा, मेले आदि लगाए जाते है।
3. गोगा नवमी के दिन जल्दी उठकर स्‍नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करके गोगा देव का पूजन तथा नाग देवता की मूर्ति पर दूध चढ़ाने की मान्यता है।
4. गोगा देव की पूजा के लिए दीवार की गेरू से पुताई करके कच्चे दूध में कोयला मिलाकर चौकोर आकृति बनाने के बाद 5 सर्प बना‍ते हैं।
5. अब सर्प की आकृतियों पर कच्चा दूध, जल चढ़ाकर रोली, चावल अर्पित करके बाजरा आटा, घी और चीनी मिलाकर चढ़ाया जाता है।
6. इस दिन विधि-विधान से शिव जी का जलाभिषेक करके बिल्व पत्र अर्पित करके 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
7. मान्यतानुसार नाग देव के पूजन के साथ ही रुद्राभिषेक करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
8. मान्यता के अनुसार गोगा देव के पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्पभय से मुक्ति मिलती है।
9. गोगा देव को खीर, चूरमा, गुलगुले आदि पकवानों का भोग लगाएं।
10. इस दिन सांपों के देवता के रूप में गोगा वीर का पूजन किया जाता हैं। लोककथाओं के अनुसार गोगा जी को सांपों के देवता के रूप में लोकमान्यता है।
11. गुरु गोरखनाथ के द्वारा दिए गए वरदान स्वरूप गोगा नवमी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता हैं।
12. पौराणिक मान्यता के अनुसार गोगा जी महाराज की पूजा करने से सर्पदंश का खतरा नहीं रहता है और सर्पभय से मुक्ति मिलती है।
13. गोगा नवमी के दिन गोगा देव की मिट्‍टी की मूर्ति अथवा वीर गोगा जी की घोड़े पर सवार तस्वीर को गंगाजल, रोली, चावल, पुष्प आदि से पूजन करने का प्रचलन है। खीर, चूरमा, गुलगुले आदि का प्रसाद तथा गोगा जी के घोड़े पर श्रद्धापूर्वक चने की दाल चढ़ाई जाती है।
14. इस दिन गोगा देव जी की कथा का वाचन किया जाता है।
15. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी शहर में भाद्रपद (भादों) शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को गोगा जी देवता का मेला लगाया जाता है।

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