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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
विद्यार्थियों की सफलता उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन से छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी कर परीक्षा में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष हाई स्कूल परीक्षा में 77.15 प्रतिशत तथा हायर सेकेंडरी परीक्षा में 83.04 प्रतिशत विद्यार्थियों ने सफलता अर्जित की है, जो प्रदेश की शैक्षणिक प्रगति का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बेटियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियां लगातार शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने इसे न केवल छात्राओं के आत्मविश्वास और परिश्रम का प्रमाण बताया, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का भी प्रतीक बताया।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची में स्थान बनाकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इन विद्यार्थियों ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें और विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने परिवार, समाज और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ऐसे विद्यार्थियों, जिन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली है, उन्हें निराश न होने, आत्मविश्वास बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास करने से एक दिन निश्चित ही सफलता उनके कदम चूमेगी।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु पिल्लै, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
प्रिंटिंग पॉलिसी पर किया जा रहा है अन्य राज्यों की पॉलिसी का अध्ययन
रायपुर, // सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और नई पहलों के प्रचार-प्रसार में आउटडोर मीडिया एक अत्यंत प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित है। इसमें होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, ब्रांडिंग, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स और एलईडी वैन अभियान शामिल हैं। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों, बस स्टॉप्स तथा प्रमुख यातायात मार्गों जैसे उच्च आवागमन वाले स्थानों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से अधिक होता है।
आउटडोर मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी मॉनिटरिंग एक बड़ी चुनौती रही है। कई मामलों में यह शिकायतें सामने आई हैं कि वेंडर्स द्वारा सरकारी विज्ञापनों की स्थापना में देरी की गई या निगरानी के अभाव में उन्हें समय से पहले हटाकर उनकी जगह व्यावसायिक विज्ञापन लगा दिए गए।
इस समस्या के समाधान के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल करते हुए प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम ”प्रचार ऐप” विकसित किया गया है। यह प्रणाली तीन चरणों में कार्य करती है। पहले चरण में विभाग प्रचार अभियान की योजना बनाती है, पैनल में शामिल एजेंसियों और उनके एसेट्स का चयन कर प्रचार अभियान कार्य आवंटित करती है। दूसरे चरण में वेंडर्स प्रचार अभियान की समीक्षा कर क्रियान्वयन की योजना बनाती है और एसेट्स को माउंटर्स को सौंपती है। तीसरे चरण में माउंटर्स मैदानी स्तर पर निर्धारित स्थानों पर क्रिएटिव सामग्री स्थापित करती है।
रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करने के लिए माउंटर्स हेतु एक एंड्रॉइड ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से माउंटर्स को जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो तीन चरणों में अपलोड करना अनिवार्य किया गया है-स्थापना से पहले, स्थापना के तुरंत बाद, और अभियान अवधि के दौरान प्रतिदिन कम से कम एक बार। इन तस्वीरों की पहले वेंडर एजेंसी द्वारा समीक्षा की जाती है और फिर उन्हें ऑनलाइन विभाग को भेजा जाता है।
यह एंड-टू-एंड प्रणाली पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है और विभाग को सभी सक्रिय अभियानों की लगभग वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रत्येक आउटडोर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव हो पाती है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसी क्रम में जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को पैनल में शामिल सभी एजेंसियों के साथ एक कार्यशाला आयोजित की। उन्होंने आउटडोर मीडिया की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए तकनीक आधारित ”प्रचार ऐप” समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया।
यह नई प्रणाली 01 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स के लिए लागू की जा चुकी है और जल्द ही इसे एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग तथा डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य प्रारूपों तक भी विस्तारित किया जाएगा।
इसी तरह प्रिंटिंग पर काफी शिकायतें सामने आ रही थीं, इन शिकायतों के कारण टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। नई प्रिंटिंग पॉलिसी यथा-शीघ्र लागू की जावेगी। इस हेतु बेहतर एवं पारदर्शी पॉलिसी लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों की मुद्रण नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है।
ग्राम पंचायतों में QR कोड आधारित जागरूकता अभियान और समन्वित कार्यप्रणाली को बताया अनुकरणीय
रायपुर, / केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जीरामजी) अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के प्रावधानों को ग्राम स्तर तक पहुंचाने के लिए सुविचारित, व्यापक एवं रणनीतिक पहल की जा रही है, जो ग्रामीण विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विशेष रूप से ग्राम चौपालों, ग्राम सभाओं एवं सोशल मीडिया के माध्यम से चलाए जा रहे व्यापक जन-जागरूकता अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में QR कोड स्थापना की पहल को नवाचारपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे योजनाओं की जानकारी आमजन तक सरलता से पहुंचेगी तथा पारदर्शिता एवं मॉनिटरिंग को मजबूती मिलेगी।
अपने पत्र में केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने उल्लेख किया कि वन क्षेत्रों एवं विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (PGVT) के समग्र विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है, जो राज्य के समावेशी एवं सतत विकास दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ के श्रम बजट को राज्य में मानव-दिवस सृजन रुझान को देखते हुए 850 लाख मानव-दिवस से बढ़ाकर 1250 लाख मानव-दिवस स्वीकृत किया गया है। उन्होंने इसे राज्य के सतत प्रयासों एवं बढ़ती कार्यगत आवश्यकता का सकारात्मक परिणाम बताया।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य प्रशासन इसी प्रतिबद्धता एवं ऊर्जा के साथ योजनाओं के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका सृजन को नई गति देगी, बल्कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ड्रोन तकनीक ने बढ़ाई कार्रवाई की गति और सटीकता
ड्रोन की मदद से कांकेर जिले में हुई बड़ी कार्रवाई, पोकलेन मशीन और हाईवा जप्त
रायपुर // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए तकनीक और नवाचार का सहारा लेते हुए एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। इसी कड़ी में अब खनन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की शुरुआत कर दी गई है, जो राज्य में कानून व्यवस्था, खनिज संसाधन की सुरक्षा तथा राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब खनन क्षेत्रों में रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी, जिससे अवैध उत्खनन, परिवहन और संबंधित गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम न केवल राजस्व हानि को रोकेगा, बल्कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी साबित होगा। खनिज विभाग का मैदानी अमला पहले से ही अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहा था, लेकिन अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से इस कार्रवाई की गति और सटीकता दोनों बढ़ेंगी। ड्रोन से लगभग 5 किलोमीटर तक की रेंज और 120 मीटर तक ऊंचाई से निगरानी की क्षमता के चलते बड़े और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर मौके पर कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे अवैध गतिविधियों में संलिप्तों के बच निकलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, नाइट विजन और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो व्यापक और सटीक निगरानी सुनिश्चित करती हैं। इसके जरिए बड़े और दुर्गम खनन क्षेत्रों पर भी आसानी से नजर रखी जा सकती है।
यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। सरकार का यह साहसिक निर्णय न केवल कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि खनिज संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। ड्रोन निगरानी की यह नई व्यवस्था राज्य में सुशासन और तकनीकी नवाचार का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।
इसी कड़ी में 29 अप्रैल 2026 को जिला कांकेर के तहकापार रेत खदान क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए सघन निगरानी और छापामार कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों एवं उपकरणों की पहचान की गई। ड्रोन निगरानी शुरू होते ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए।
इसके बाद केंद्रीय उड़नदस्ता दल और कलेक्टर (खनिज शाखा) के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए महानदी के किनारे भूईगांव की सीमा पर विशेष अभियान चलाकर एक चेन माउंटेन पोकलेन मशीन जेसीबी (215 एलसी) तथा एक हाईवा (क्रमांक CG08AV0975) जब्त किया गया।
भिलाई, छत्तीसगढ़ । शौर्यपथ । इस पृथ्वी दिवस पर भारत के युवाओं ने देश के डेयरी उद्योग की पर्यावरणीय और नैतिक लागत के विरुद्ध आवाज़ उठाई। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और साथ ही गोमांस निर्यात में भी अग्रणी एक ऐसा तथ्य जो प्रायः सार्वजनिक विमर्श से ओझल रहता है। भिलाई में युवा प्रतिनिधियों ने सूर्या टी आई मॉल, भिलाई में एक सार्वजनिक प्रतिष्ठापन के माध्यम से डेयरी के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और उसके गोमांस उद्योग से गहरे संबंध को उजागर किया। इस समय देशभर के 20 शहरों में युवा इस सच्चाई की ओर ध्यान दिला रहे हैं कि "दूध और गोमांस एक ही जानवर से आते हैं", और नागरिकों से आग्रह कर रहे हैं कि वे डेयरी आपूर्ति श्रृंखला में पशुओं की यात्रा और उनके अंततः गोमांस उद्योग में पहुँचने की वास्तविकता पर विचार करें।
दूध और गोमांस के बीच के संबंध पर भारत में जो दीर्घकालीन मौन रहा है, वह अब टूटने लगा है। @animalsaveindia के एक इंस्टाग्राम रील में कौन बनेगा करोड़पति की एक क्लिप साझा की गई, जिसमें प्रतियोगी सिद्धार्थ शर्मा द्वारा डेयरी पशुओं के भविष्य का वर्णन सुनकर प्रस्तोता अमिताभ बच्चन स्पष्ट रूप से चौंके हुए दिखे। यह रील वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक देखे गए रीलों में से एक बन गई 1.2 अरब से अधिक बार देखी गई और 65 लाख लाइक्स अर्जित किए। बाद में बच्चन ने स्वयं भी इस बात को दोहराया कि गाय का दूध वास्तव में उसके बछड़े के लिए होता है, न कि मनुष्यों की चाय के लिए।इस प्रतिष्ठापन में जनता को डेयरी उद्योग के पर्यावरणीय परिणामों पर भी विचार करने का आह्वान किया गया।
भारत में एक लीटर दूध उत्पादन के लिए 1,078 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश,कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख डेयरी राज्यों में पहले से गहराते भूजल संकट पर एक अतिरिक्त बोझ है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी उद्योग वर्गीकरण अधिसूचना 2025 में डेयरी और वधशालाओं को "रेड" श्रेणी में रखा है: अर्थात इन्हें सर्वाधिक प्रदूषणकारी उद्योगों में गिना जाता है। यह वर्गीकरण दूध-गोमांस के अंतःसंबंध को और पुख्ता करता है तथा इन उद्योगों में संलग्न किसानों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
इसके साथ ही, पशुपालन से उत्सर्जित मीथेन को अब निकट भविष्य में वैश्विक तापमान वृद्धि के एक प्रमुख कारक के रूप में मान्यता मिल रही है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 1.27 करोड़ टन मीथेन उत्सर्जित करता है। ये दुष्प्रभाव गोमांस उद्योग से अलग नहीं किए जा सकते, क्योंकि डेयरी और गोमांस एक ही तंत्र के परस्पर जुड़े हिस्से हैं। जब गाय और भैंसें दूध देना बंद कर देती हैं, तो उनमें से अनेक को गोमांस आपूर्ति श्रृंखला में बेच दिया जाता है।
प्राणी प्रोटेक्शन फाउंडेशन की प्रबंध न्यासी प्रांजलि शुक्ला ने कहा, "हमारा शहर गर्मियों के चरम महीनों में जलता रहता है और हर बीतते वर्ष के साथ यह असह्य होता जा रहा है। इसके बावजूद राज्य लाखों गायों और भैंसों के अंधाधुंध प्रजनन को बढ़ावा देता है, और दूध उत्पादन के लिए उपयोगिता समाप्त होते ही उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। इस अनियंत्रित प्रजनन और परित्याग के चक्र से मीथेन उत्सर्जन निरंतर बढ़ता जा रहा है। रोज़मर्रा के आहार में डेयरी की केंद्रीय भूमिका के बावजूद, उसके जलवायु प्रभाव को लेकर समाज में व्यापक अज्ञानता बनी हुई है।"
जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में लू और जलसंकट गहराता जा रहा है, खाद्य सुरक्षा की माँगों को अब स्वयंसिद्ध नहीं माना जा सकता। प्रश्न अब नीति-निर्माताओं, संस्थाओं और उद्योग की ओर मुड़ता है- भारत की खाद्य प्रणालियाँ उन जलवायु और नैतिक चुनौतियों का सामना कैसे करेंगी जो वे स्वयं उत्पन्न कर रही हैं?
भिलाई | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) भिलाई जिले की नवनियुक्त कार्यकारिणी विवादों के घेरे में आ गई है। पार्टी की नई टीम में 'युवा जोश' की जगह 'आपराधिक इतिहास' को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जैसे ही कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, पार्टी के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है।
प्रमुख बिंदु: जो पार्टी की साख पर सवाल उठा रहे हैं
दागी चेहरों का दबदबा: नई कार्यकारिणी में ऐसे युवाओं को पदाधिकारी बनाया गया है, जिन पर लूट, मारपीट, धोखाधड़ी और महिलाओं से बदसलूकी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
महादेव सट्टा एप से कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पदाधिकारी चर्चित 'महादेव सट्टा एप' मामले में भी आरोपी हैं और जेल की हवा खा चुके हैं।
गैंगस्टर लिंक: रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कुछ नामों का संबंध कुख्यात गैंगस्टरों के साथ भी बताया जा रहा है।
भीतरघात और बगावत: घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को खारिज करते हुए अपनी समानांतर सूची जारी कर दी है, जिससे पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
पार्टी की फजीहत, नेतृत्व ने माँगा स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भिलाई जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा अध्यक्ष सौरभ जायसवाल को तलब किया है।
जिलाध्यक्ष का बचाव: सौरभ जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे "चरित्र प्रमाण पत्र" माँगे गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अभी सिर्फ आरोप लगे हैं, अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक साबित हो रही है। एक तरफ जहां युवाओं को जोड़ने की बात हो रही है, वहीं 'लिस्टेड अपराधियों' को पद बांटने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इन नियुक्तियों को रद्द कर 'छवि सुधार' की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।
नई दिल्ली/गुवाहाटी, । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।
पुणे–सतारा मार्ग पर आधुनिक 6-लेन सुरंग परियोजना से घटेगा यात्रा समय, बढ़ेगी सुरक्षा और पर्यटन-व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ
नई दिल्ली/महाराष्ट्र, ।
दशकों से चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले Khambatki Ghat में अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। National Highways Authority of India द्वारा NH-48 (पूर्व में NH-4) पर विकसित की जा रही ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना इस क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित राजमार्ग अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।
परियोजना का एक हिस्सा परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के तहत आम जनता के लिए खोला गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और इसका उद्घाटन 2026 की पहली छमाही में होने की संभावना है।
पहले जहां खंबटकी घाट का सफर संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण तनावपूर्ण रहता था, वहीं नई सुरंग के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो गया है।
यात्रियों के अनुसार:
नई सुरंग में आधुनिक रिफ्लेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन बिंदु और चौड़ी लेन जैसी सुविधाएं यात्रियों को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान कर रही हैं।
Khambatki Ghat मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को जोड़ती है, जैसे—
साथ ही यह मार्ग लोकप्रिय पर्यटन स्थलों—
नई छह-लेन ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना से कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है:
✔️ यात्रा समय में बड़ी कमी
✔️ दुर्घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट
✔️ ईंधन की बचत और वाहन रखरखाव लागत कम
✔️ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
✔️ दैनिक यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
पहले जहां एक दिशा में केवल 0.85 किमी की दो-लेन सुरंग और दूसरी दिशा में लगभग 8 किमी घाट सड़क थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक से लैस नई सुरंग इन सभी समस्याओं का समाधान बनकर उभरी है।
नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का प्रतीक बनती जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि जब अवसंरचना को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, तो यह न केवल दूरी कम करती है, बल्कि समय बचाती है, जानें सुरक्षित करती है और यात्रा को भरोसेमंद बनाती है। ??
1.64 लाख डाकघरों के विशाल नेटवर्क से जुड़ेगी निजी लॉजिस्टिक्स ताकत, दूरदराज क्षेत्रों तक तेज और भरोसेमंद सेवाओं का रास्ता होगा आसान
नई दिल्ली, ।
संचार मंत्रालय के अधीन Department of Posts और देश की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी DTDC Express Limited ने देशभर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
नई दिल्ली स्थित Dak Bhavan में आयोजित कार्यक्रम में डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस समझौते का आदान-प्रदान किया।
यह साझेदारी वर्ष 2025 से जारी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए देश में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को अधिक तेज, प्रभावी और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान मिलकर लॉजिस्टिक्स सेवाओं को आधुनिक और सशक्त बनाने पर काम करेंगे। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
इस समझौते के तहत DTDC Express Limited को Department of Posts के देशभर में फैले 1.64 लाख डाकघरों के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
इससे कंपनी को—
में मदद मिलेगी।
यह सहयोग डाक विभाग के पार्सल कारोबार को नई गति देगा। डीटीडीसी के अनुभव और तकनीकी सहयोग से—
Department of Posts विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क संचालित करता है, जो देशभर में संचार, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वहीं DTDC Express Limited देश की प्रमुख एक्सप्रेस पार्सल डिलीवरी कंपनियों में शामिल है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराती है।
डाक विभाग और डीटीडीसी के बीच यह साझेदारी देश में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे न केवल पार्सल डिलीवरी सेवाएं तेज और सुलभ होंगी, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल व्यापार की पहुंच बढ़ेगी और भारत के वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा को भी नई मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली, ।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बनने की दिशा में अग्रसर है।
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की, जो इस परियोजना की सफलता का अहम पड़ाव माना जा रहा है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा विकसित और भाविनी (BHAVINI) द्वारा निर्मित यह रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन पर आधारित यह तकनीक भारत को भविष्य में अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता देती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भारत, रूस के बाद वाणिज्यिक स्तर पर FBR संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। वर्तमान में रूस ही एकमात्र देश है जो इस तकनीक का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने इसे प्रयोगात्मक स्तर तक ही सीमित रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद अहम है। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फास्ट ब्रीडर तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण के लिए स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा इस जरूरत को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, “परमाणु मिशन” के तहत वर्ष 2033 तक 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 5 लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने की योजना है। यह रिएक्टर उद्योगों, दूरदराज क्षेत्रों और सीमित ग्रिड कनेक्टिविटी वाले इलाकों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोगी साबित होंगे।
सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों का संतुलित मिश्रण ही वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का आधार बनेगा।
नई दिल्ली ।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की व्यापक समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई, जिससे जमीनी स्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कदमों पर जोर दिया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा के साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा विभिन्न निर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कर्नाटक के 7,926 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और केरल की 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर मार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि राजमार्ग निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन, कड़े गुणवत्ता मानकों के पालन और आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि टिकाऊ और सुरक्षित सड़क ढांचा ही देश की आर्थिक गति को मजबूती देता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए तथा आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाकर यात्रा अनुभव को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, प्रमुख राजमार्ग गलियारों में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी फोकस करने को कहा गया।
आगामी मानसून को देखते हुए गडकरी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात का सुचारू प्रवाह बना रहे। इसके लिए व्यापक जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
केंद्र सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अब गुणवत्ता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर यातायात अनुभव मिल सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
