August 01, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    राजनांदगांव | 

    छत्तीसगढ़ की 'मदर टेरेसा' कही जाने वाली और प्रसिद्ध समाज सेविका पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के साथ कल (5 मई) एक रूह कंपा देने वाली घटना घटी। राजनांदगांव जिले में बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में उनका अपहरण करने की कोशिश की, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ ने नाकाम कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एक मुख्य आरोपी महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

    सेल्फी के बहाने रची गई साजिश: घटना का पूरा विवरण

    जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी खुशबू साहू (निवासी बेमेतरा) अपने अन्य साथियों के साथ राजनांदगांव के सुकुलदैहान गांव स्थित फूलबासन बाई के निवास पर पहुंची। आरोपियों ने बड़ी चतुराई से इस साजिश को अंजाम दिया:

    बहाना: खुशबू ने फूलबासन जी को घर से बाहर बुलाया और कहा कि कार में एक दिव्यांग महिला बैठी है जो उनके साथ सेल्फी लेना चाहती है।

    अपहरण: जैसे ही फूलबासन बाई कार के पास पहुंचीं, आरोपियों ने उन्हें जबरदस्ती खींचकर गाड़ी के अंदर डाल लिया और तेजी से फरार हो गए।

    कार के अंदर बर्बरता: पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने कार के भीतर ही फूलबासन जी के हाथ-पैर बांध दिए और उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वे मदद के लिए शोर न मचा सकें।

    चिखली पुलिस चौकी पर 'मिर्गी' का ड्रामा और गिरफ्तारी

    अपहरणकर्ता खैरागढ़ मार्ग की ओर भाग रहे थे, लेकिन उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया। चिखली पुलिस चौकी के पास पुलिस की टीम रूटीन चेकिंग कर रही थी।

    पुलिस का संदेह: जब संदिग्ध कार को रोका गया, तो घबराए हुए आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठ बोला कि "फूलबासन जी को मिर्गी का दौरा पड़ा है और वे उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल ले जा रहे हैं।"

    सतर्क पुलिसकर्मी की पहचान: चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी ने कार के भीतर बंधक स्थिति में पद्मश्री फूलबासन बाई को पहचान लिया। संदिग्ध स्थिति देख पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर चारों आरोपियों (2 महिला और 2 पुरुष) को हिरासत में ले लिया।

    क्यों हुआ अपहरण? साजिश के पीछे की कहानी

    प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मुख्य आरोपी खुशबू साहू पिछले 4 महीनों से फूलबासन जी के संपर्क में थी। पुलिस को संदेह है कि:

    बेमेतरा क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के नाम पर अवैध वसूली की कोई बड़ी योजना थी।

    रोजगार प्रशिक्षण के बहाने पद्मश्री के नाम का उपयोग कर कोई बड़ा वित्तीय लाभ कमाने की साजिश रची जा रही थी।

    वर्तमान स्थिति

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई की पूरे राज्य में सराहना हो रही है। पद्मश्री फूलबासन बाई अब सुरक्षित हैं और उन्हें उनके घर पहुंचा दिया गया है। पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस अपहरण कांड के पीछे छिपे असली मकसद और किसी बड़े गिरोह के शामिल होने की पुष्टि की जा सके।

    "अपराधियों के हौसले बुलंद थे, लेकिन पुलिस की एक छोटी सी रूटीन चेकिंग ने छत्तीसगढ़ की एक महान हस्ती को बड़ी अनहोनी से बचा लिया।"

    दुर्ग | 

    दुर्ग शहर के विभिन्न वार्डों में गहराते जल संकट और बदहाल जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर आज जन-प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। शहर के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पानी की बूंद-बूंद के लिए मची हाहाकार और स्थानीय तालाबों के सूखने/खाली किए जाने के विरोध में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

    प्रमुख समस्याएँ: क्यों प्यासा है दुर्ग?

    ज्ञापन में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए प्रमुख रूप से तीन बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया:

    तालाबों का अस्तित्व खतरे में: शहर के पारंपरिक जल स्रोतों (तालाबों) को खाली किया जा रहा है, जिससे न केवल भूजल स्तर गिर रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

    अनियमित जलापूर्ति: कई मोहल्लों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी का दबाव (Pressure) बहुत कम है, और कुछ क्षेत्रों में तो घंटों तक पानी की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

    भीषण गर्मी में आम नागरिक बेहाल: पारा बढ़ने के साथ ही पानी की खपत बढ़ी है, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभाग सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रहे हैं।

    ज्ञापन की मुख्य मांगें

    कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

    जलापूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग: उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए जहाँ पानी नहीं पहुँच रहा है और वहां टैंकरों के बजाय पाइपलाइन व्यवस्था को सुधारा जाए।

    तालाबों का संरक्षण: तालाबों को खाली करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए जल संचय की योजना बनाई जाए।

    दोषियों पर कार्रवाई: जलापूर्ति बाधित होने के पीछे यदि कोई तकनीकी लापरवाही या प्रशासनिक ढिलाई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    प्रशासनिक आश्वासन

    कलेक्टर महोदय ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को वस्तुस्थिति की जांच करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि "हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

    "पानी का अधिकार, बुनियादी अधिकार है। दुर्ग की जनता को प्यासा रखकर विकास की बातें बेमानी हैं। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस पर त्वरित एक्शन लेगा।"

    कोलकाता | 

    पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ लोकतांत्रिक परंपराएं और संवैधानिक नियम आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद राज्य में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) की आहट सुनाई दे रही है। चुनावी नतीजों के बाद उभरी यह स्थिति अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजभवन की शक्तियों और संविधान के अनुच्छेदों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

    संवैधानिक मर्यादा और राज्यपाल की शक्तियाँ

    विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना किसी व्यक्तिगत इच्छा का नहीं, बल्कि विधायी संख्याबल का विषय है। इस स्थिति में निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:

    अनुच्छेद 164 और 'प्रसादपर्यंत' का सिद्धांत: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और सरकार राज्यपाल के "प्रसादपर्यंत" (Pleasure of the Governor) पद पर बनी रहती है। यदि विधानसभा में बहुमत खो जाता है, तो राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने की संवैधानिक शक्ति होती है।

    फ्लोर टेस्ट (Floor Test): यदि बहुमत को लेकर कोई भी धुंधली तस्वीर सामने आती है, तो 'शक्ति परीक्षण' ही एकमात्र रास्ता है। राज्यपाल सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दे सकते हैं। आंकड़े पक्ष में न होने पर इस्तीफा अनिवार्य हो जाता है।

    अनुच्छेद 356 की संभावना: यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देतीं और नई सरकार के गठन में बाधा उत्पन्न होती है, तो इसे 'संवैधानिक तंत्र की विफलता' माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।

    ममता बनर्जी की रणनीति: 'फ्री बर्ड' बनाम कानूनी लड़ाई

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी भावी रणनीति के संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को सड़क और अदालत दोनों जगह लड़ेंगी:

    चुनावी नतीजों को चुनौती: मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए परिणामों को न्यायालय में चुनौती देने का मन बनाया है।

    जनता के बीच संघर्ष: उन्होंने खुद को एक "फ्री बर्ड" की संज्ञा देते हुए कहा है कि वे अब आम नागरिक के रूप में जनता के बीच जाकर 'संघर्ष' करेंगी।

    INDIA गठबंधन का साथ: राज्य की राजनीति से इतर, ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।

    निष्कर्ष: अंतिम निर्णय संख्याबल का

    लोकतंत्र की बुनियादी शर्त 'बहुमत' है। यदि विपक्षी खेमे (भाजपा) के पास स्पष्ट बहुमत है, तो राजभवन को नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी मुख्यमंत्री बिना सदन के विश्वास के अनिश्चितकाल तक पद पर काबिज नहीं रह सकता।

    आने वाले 48 घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक होने वाले हैं। क्या राज्य एक सुचारू सत्ता परिवर्तन देखेगा, या फिर यह विवाद देश के सबसे बड़े कानूनी और संवैधानिक मामलों में तब्दील हो जाएगा? पूरे देश की नजरें अब कोलकाता के राजभवन पर टिकी हैं।

    *बालोद शौर्यपथ संवाददाता,*

    छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को आखिरकार उसका ‘कप्तान’ मिल गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लंबा ने सोमवार को वो फैसला कर दिया जिसका पूरे प्रदेश को इंतजार था - संजारी-बालोद की दमदार विधायक संगीता सिन्हा अब महिला कांग्रेस की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हैं।

    *‘सियासी पारा हाई’*  

    सोमवार दोपहर आदेश की कॉपी वायरल होते ही कांग्रेस खेमे में जश्न और विपक्ष में सन्नाटा छा गया। व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर चौपाल तक बस एक ही नाम - संगीता सिन्हा। कार्यकर्ता बोले - “दीदी आईं, अब आंधी आएगी”।

    *बालोद बना ‘मिनी रायपुर’, रात तक बजी बधाइयां*  

    नियुक्ति की खबर लगते ही संजारी-बालोद में दिवाली जैसा नजारा था। संगीता सिन्हा के घर के बाहर आतिशबाजी, ढोल और लड्डुओं का दौर चला। बुजुर्ग बोले - “बेटी ने पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया”। संगीता सिन्हा की मिलनसार छवि और हर घर में पहचान ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

    *‘महिला कार्ड’ से 2026 की बिसात*  

    अलका लंबा ने संगीता सिन्हा को कमान देकर सीधा 2026 के चुनाव पर निशाना साधा है। संगीता सिन्हा का जमीनी नेटवर्क और महिलाओं में पकड़ कांग्रेस के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। एक कार्यकर्ता ने कहा - “संगीता दीदी जिस घर में चाय पी लें, उस घर का वोट पक्का”।

    *हिमांशु लावत्रे ने दी बधाई*  

    युवा नेता हिमांशु लावत्रे ने कहा - “संगीता सिन्हा जी की नियुक्ति से महिला कांग्रेस को नई दिशा मिलेगी। उनकी मिलनसार कार्यशैली पूरे संगठन में जोश भरेगी”।

    *अब मिशन ‘आधी आबादी’*  

    पद संभालते ही संगीता सिन्हा का ऐलान - “अब हर ब्लॉक, हर गांव, हर वार्ड में महिला कांग्रेस की टीम खड़ी करेंगे। 2026 में आधी आबादी का पूरा आशीर्वाद कांग्रेस को दिलाएंगे।”

    भिलाई ब्यूरो 

    भिलाई। छत्तीसगढ़ और नागपुर विदर्भ क्षेत्र में तबलीग़ जमात के 'अमीर' हाजी मोहम्मद असलम का शनिवार 2 मई को तड़के दो बजे इंतकाल हो गया। हाजी असलम कई दिनों से बीमार चल रहे थे। खुर्सीपार निवासी सैय्यद असलम ने बताया कि मरहूम हाजी मोहम्मद असलम के जनाजे की नमाज़ यंग मुस्लिम फुटबॉल ग्राउंड मोमिनपुरा नागपुर में उनके बेटे मौलाना अब्दुल्ला ने पढ़ाई। 

     नमाजे जनाजा मे निजामुद्दीन मरकज दिल्ली, बरार, महाराष्ट्र, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के उलेमा के साथ आम लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के मुस्लिम समाज के लोगों ने हजारों की तादाद में नागपुर पहुंच कर अपनी अकीदत का इजहार किया। 

    गौरतलब है कि तबलीग़ जमात में आध्यात्मिक स्तर पर संगठन प्रमुख 'अमीर' का पद मशविरा से तय होता है। हाजी मोहम्मद असलम नागपुर के रहने वाले थे और तबलीग़ के काम को लेकर छत्तीसगढ़ बरार , महाराष्ट्र सहित देश विदेश में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि हाजी मोहम्मद असलम ने अल्लाह के दीन और हज़रत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की पाकीजा जिंदगी को अपनाने लोगों की सच्ची रहनुमाई की। समाज के लिए उनका दुनिया से जाना एक रहनुमा एक सच्चा दाई (प्रेरक व्यक्तित्व) और बुर्जुग शख्सियत का चला जाना है।

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    आईकेएफ सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान संवाद किया वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच ने

    भिलाई। टाइगर कैपिटल के सहयोग से इंडिया खेलो फुटबॉल (आईकेएफ) के सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने पालकों और उभरते फुटबॉलरों से संवाद किया। उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों की परवरिश में सामने आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए पालकों को कुछ सुझाव भी दिए। उल्लेखनीय है कि यहां 2 और 3 मई 4 अलग-अलग सत्रों में सेक्टर-2 के फुटबॉल ग्राउंड में ट्रायल रखा गया था। जिसमें 200 से ज्यादा उभरते फुटबॉलरों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया।

    ट्रायल के आखिरी दौर के बाद 3 मई की शाम पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन का संवाद सत्र रखा गया। उन्होंने इस दौरान समाज में खास तौर पर बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजीटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता को बड़ी चुनौती बताया।

    उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज स्मार्ट फोन की लत के चलते मैदान के बजाए डिजीटल दुनिया में खेल खेला जा रहा है, जो हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों को सलाह दी कि दूसरों को भी खेल के लिए प्रेरित करें।

    जैन ने पालकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय दें और उन्हें सुनने की कोशिश करें। क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए माता-पिता से बेहतर काउंसलर कोई नहीं होता। जिस तरह किसी भी पौधे की शुरूआती अवस्था में सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ से घेरा लगाना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह बच्चों को भी एक उम्र तक पैरेंट्स की जरूरत पड़ती है। इसलिए अपने बच्चों को भरपूर समय दें और उनके खानपान के साथ नींद पर भी ध्यान दें। इस दौरान कुछ पालकों और बच्चों ने सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की।

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    तमिलनाडु की राजनीति में इस बार ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने लोकतंत्र की असली ताकत को फिर से साबित कर दिया। विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में जहां विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया, वहीं एक सीट ऐसी रही जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    ? तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर श्रीनिवास सेतुपति ने इतिहास रच दिया। उन्होंने के.आर. पेरियाकरुप्पन को महज़ 1 वोट से हराकर राजनीति के दिग्गज को पटखनी दे दी।

    पेरियाकरुप्पन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के कद्दावर नेता और मंत्री रहे हैं, 2006 से लगातार 4 बार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे थे। उनका प्रभाव इतना मजबूत था कि इस सीट को लगभग ‘अजेय गढ़’ माना जाता था। लेकिन इस बार जनता के एक-एक वोट ने सियासी समीकरण बदल दिए।

    ? जीत का अंतर—सिर्फ 1 वोट!

    लोकतंत्र के इतिहास में यह परिणाम एक मिसाल बन गया है, जहां एक वोट ने न सिर्फ चुनाव का नतीजा बदला, बल्कि एक लंबे समय से स्थापित राजनीतिक दबदबे को भी खत्म कर दिया।

    ? राजनीतिक संदेश क्या है?

    यह परिणाम साफ संकेत देता है कि जनता का मूड बदल रहा है और अब हर वोट की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। नए चेहरों और नई सोच को मतदाता खुलकर मौका दे रहे हैं।

    ? सरकार गठन की तस्वीर

    हालांकि टीवीके को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के समर्थन से विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ नजर आ रहा है।

    ? निष्कर्ष:

    तिरुपत्तूर की यह सीट सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की ताकत का जीवंत उदाहरण बन गई है—जहां “एक वोट” भी इतिहास लिख सकता है।

    ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता

    कवर्धा। जिले के सुदूर वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे गांव, जो कभी विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे, आज तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के कारण यहां के ग्रामीणों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब प्रधानमंत्री जनमन योजना से इन गांवों की तस्वीर बदल रही है।

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक विजय शर्मा के सतत प्रयासों से पहाड़ों की घाट कटिंग कर सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक पक्की सड़कों का निर्माण किया गया है। कवर्धा विधानसभा अंतर्गत संभूपीपर से बरहापानी तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल लागत 3.89 करोड़ रुपए है। बारहपानी गांव, जिसकी कुल जनसंख्या 231 है, इस सड़क निर्माण के बाद अब विकास की गति प्राप्त कर रहा है। यह सड़क न केवल आवागमन का माध्यम बनी है, बल्कि गांव के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास की आधारशिला भी साबित हो रही है। 

    किसानों को भी मिलेगा भारी लाभ 

    संभूपीपर से बरहापानी तक सड़क निर्माण होने से क्षेत्र के लोगों के जीवन में बदलाव आया है। पहले जहां ग्रामीणों को बरसात के दिनों में पहाड़ी पगडंडियों से गुजरना पड़ता था, वहीं अब वे आसानी से वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंच पा रहे हैं। सड़क निर्माण से न केवल आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। अब किसान अपनी उपज को बाजार तक आसानी से पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। साथ ही, क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। बरहापानी के निवासी गौतर बताते हैं कि पहले उनके गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं थी।

    प्रमुख स्थानों में जाना अब बेहद आसान 

     संभूपीपर से बरहापानी तक सड़ बन जाने से वाहन पहुंचने लगे हैं और चिल्फी व कवर्धा जैसे प्रमुख स्थानों तक जाना बेहद आसान हो गया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सड़क उनके जीवन में एक नई उम्मीद लेकर आई है। अब वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आया है। पीएमजीएसवाई विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. ठाकुर ने बताया कि इस प्रकार के कार्यों का उद्देश्य सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है, ताकि वहां के निवासियों को सुविधाएं मिल सकें। प्रधानमंत्री जनमन योजना और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से आज कबीरधाम के वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई राह खुल रही है।

      धमतरी / शौर्यपथ / जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत धमतरी पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। सांकरा चेक पोस्ट पर सघन वाहन जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 55 किलो गांजा के साथ तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। जब्त सामग्री में गांजा, एक रेनॉल्ट डस्टर कार और चार मोबाइल फोन शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत 33 लाख 53 हजार 500 रुपये आंकी गई है।
    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 4 मई 2026 को की गई। मैनपुर की ओर से आ रही रेनॉल्ट डस्टर (MH 45 AD 9001) को रोककर जांच की गई। वाहन की डिक्की से 38 पैकेटों में भरा 54.970 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 27.50 लाख रुपये है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे यह गांजा ओडिशा के बलांगीर से खरीदकर महाराष्ट्र के नासिक ले जा रहे थे।

    गिरफ्तार आरोपी:
    अमोल अरुण ओढेंकर (33 वर्ष), निवासी नासिक, महाराष्ट्र
    तनिष गायकवाड (19 वर्ष), निवासी अहमदनगर, महाराष्ट्र
    ऋषिकेश सिरसाट (23 वर्ष), निवासी अहमदनगर, महाराष्ट्र
    तीनों के खिलाफ थाना सिहावा में अपराध क्रमांक 38/26, धारा 20(बी) NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा रहा है।
    जब्त सामग्री:
    गांजा: 54.970 किलोग्राम (₹27,50,000)
    रेनॉल्ट डस्टर वाहन: ₹5,00,000
    4 मोबाइल फोन: ₹1,03,500
    कुल जब्ती: ₹33,53,500
    पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। खासतौर पर ओडिशा-छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र ट्राई-जंक्शन (बोरई, कुन्दई, विश्रामपुरी) क्षेत्र में सख्ती बढ़ाई गई है, जिससे अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क पर दबाव बना है।
    उल्लेखनीय है कि 15 दिन पहले ही सांकरा चेक पोस्ट पर 127 किलो गांजा की बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसकी कुल कीमत करीब 72.71 लाख रुपये आंकी गई थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि धमतरी पुलिस तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए रणनीतिक और सख्त कदम उठा रही है।

     रायपुर / शौर्यपथ / ​कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक बाधाएं केवल एक पड़ाव मात्र रह जाती हैं, मंजिल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम 'हरदी' के रहने वाले भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक मिशाल बन गई है।

    जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा
    ​भीमा की जिंदगी तब बदल गई जब हैदराबाद में निर्माण कार्य (मजदूरी) के दौरान वे ऊंचाई से गिर गए। कमर में आई गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की शक्ति छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना पहाड़ तोड़ने जैसा था। बैसाखी ही उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।

    उम्मीद की नई किरण:समाज कल्याण विभाग की पहल
    ​भीमा ने हार मानने के बजाय स्वावलंबन का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से 'बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल' के लिए आवेदन किया। राजनांदगांव के मोतीपुर में 4 मई 2026 को आयोजित सुशासन तिहार मे मिला यह आधुनिक उपकरण उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी आजादी साबित हुआ।

    मजबूरी बनी मजबूती: भीमा की कहानी, आत्मनिर्भरता की जुबानी
    अब बाधाएं नहीं रोकेंगी रास्ता
    विभाग द्वारा प्रदान की गई बैटरी चलित ट्राइसाइकिल और बैसाखी से भीमा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव का रास्ता मजबूत होगा। भीमा अब रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक बिना किसी मदद के जा सकेंगे। दूसरों पर निर्भरता खत्म होने से भीमा अब समाज की मुख्यधारा में एक सक्रिय नागरिक की भूमिका निभा सकेगा। अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए अब वे शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ चुके हैं। भीमा शासन द्वारा दिए गए मदद की प्रशंसा करते हुए कहते है कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने आमजनों की समस्याओं का निराकरण सुशासन तिहार के माध्यम से कर रहे है। मैं मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद करता हूँ।

    ​भीमा की कहानी के साथ-साथ जिले के अन्य दिव्यांगों के लिए भी अच्छी खबर है
    ​ समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक सुश्री वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की विशेष योजना के तहत नवाचार करते हुए 40 से 79% तक के दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। इसके लिए ​ ऑलिम्को (ALIMCO) CSR मद से जिले के 109 पात्र दिव्यांगों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी।
    ​भीमा मारकंडे के हस्ताक्षर आज उनके अटूट संकल्प की गवाही देते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मन का दृढ़ निश्चय मिलकर किसी भी अंधेरी राह को रोशन कर सकता है। भीमा अब रुकने वाले नहीं हैं, वे उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

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