August 01, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे, जहां उन्होंने जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए।
    जन चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री साय के समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
    इस दौरान ग्राम सुआरपारा निवासी राजेश शुक्ला ने अपनी आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बिजली बिल माफी और आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर संज्ञान लिया और आश्वस्त किया कि उनकी स्थिति को देखते हुए बिजली बिल माफी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, साथ ही आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
    मुख्यमंत्री के इस त्वरित निर्णय से भावुक हुए राजेश शुक्ला ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर परेशान थे, लेकिन आज मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी बात को गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह चौपाल उनके लिए राहत और विश्वास का माध्यम बनी है।
    जन चौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सुशासन तिहार’ शासन की कार्यप्रणाली में बेहतर और सकारात्मक बदलाव का संकल्प है। उन्होंने बताया कि 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचेगा और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगा और उनका निराकरण करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन चौपाल में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए।
    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ग्रामीणों से ली तथा हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक प्राप्त किया।
    इस अवसर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, कलेक्टर अजीत वसंत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री साय अपने बलरामपुर जिला प्रवास के दौरान ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं और युवाओं से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रशिक्षण कक्ष में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री ने “जय बिहान” कहकर अभिवादन किया, जिससे पूरे वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन करते हुए विशेष रूप से पशु सखियों और ‘लखपति दीदी’ से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना। संवाद के दौरान ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता ने बताया कि बिहान योजना से जुड़कर वे पशु सखी के रूप में गांव में पशुओं का सर्वे, उपचार में सहयोग और जागरूकता का कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को नजदीक से महसूस किया और कहा कि कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। उल्लेखनीय है कि RSETI के माध्यम से जिले में अब तक 16 बैचों में 510 प्रशिक्षणार्थियों को स्वरोजगार हेतु तैयार किया जा चुका है।
    इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में स्व-सहायता समूहों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यहां उन्होंने विभिन्न समूहों की महिलाओं से संवाद करते हुए उनके उत्पादों और अनुभवों की जानकारी ली। कोमल स्व-सहायता समूह की श्रीमती पूर्णिमा बासिन ने बताया कि बैंक लिंकेज और CIF के माध्यम से प्राप्त ऋण से उन्होंने जैविक खेती शुरू की और जीराफूल चावल का उत्पादन कर एक वर्ष में 3 लाख रुपये की बिक्री की है। मुख्यमंत्री ने उनकी इस सफलता की सराहना करते हुए 5 समूहों को 21 लाख रुपये के चेक प्रदान किए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं जमीन पर बदलाव की स्पष्ट तस्वीर बनकर सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं और स्थानीय उत्पादों को प्रदेश स्तर तक पहचान मिल रही है।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कछिया की सरपंच श्रीमती खुशबू सिंह एवं सचिव श्रीमती सुनीता मरावी को बाल हितैषी पंचायत श्रेणी में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर शील्ड एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है, तो वे समाज के सबसे महत्वपूर्ण वर्ग—बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए विकास की नई दिशा तय करती हैं।
    उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के गांवों में महिलाओं की यह भागीदारी राज्य को आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी।

    रायपुर, शौर्यपथ।
    छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को स्पष्ट और दो टूक संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि आम जनता के साथ शालीन, धैर्यपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार ही एक सच्चे प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होनी चाहिए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका व्यवहार सीधे तौर पर सरकार की छवि को प्रभावित करता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा—“लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं।” उनका स्पष्ट मत है कि संवाद तभी सार्थक होता है, जब उसमें संवेदना हो और समाधान की नीयत झलकती हो।
    जनसमस्याओं के समाधान पर हो फोकस
    मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह अनुभव होना चाहिए कि उसकी बात गंभीरता से सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है। यही अनुभव शासन के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।
    जमीनी स्तर पर सक्रियता जरूरी
    उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए प्रशासन को लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में विनम्रता भी जरूरी है।
    सुशासन तिहार में होगी व्यवहार की भी परीक्षा
    मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि “सुशासन तिहार 2026” के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार और संवेदनशीलता का भी आकलन किया जाएगा।
    उल्लेखनीय है कि 1 मई से 10 जून तक आयोजित इस अभियान के तहत प्रदेशभर में समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर आमजन की समस्याओं के आवेदन लेकर उनका त्वरित निराकरण किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और मुख्यमंत्री के सीधे निरीक्षण के चलते इस अभियान को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
    मुख्यमंत्री का यह संदेश केवल निर्देश नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है—जहां सुशासन का आधार केवल योजनाएं नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार और जनता के प्रति सम्मान होगा।

      शौर्यपथ लेख / मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।

    छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।

    विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
    वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।

    प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) श्री धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

    रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

    भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।
    साभार
    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक
    अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

    धमतरी, शौर्यपथ।
    छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बोरई थाना क्षेत्र में थाना प्रभारी द्वारा एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने का वायरल वीडियो अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो घटना का आंशिक हिस्सा है, जबकि पूरे घटनाक्रम में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने तत्काल डीएसपी स्तर के राजपत्रित अधिकारी से जांच के आदेश दे दिए हैं।

    नाकाबंदी के दौरान शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
    पुलिस के अनुसार, जिले में अवैध गतिविधियों, विशेषकर गांजा तस्करी पर रोक लगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर संवेदनशील स्थानों पर लगातार नाका चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। बोरई थाना क्षेत्र में भी उड़ीसा की ओर से आने वाले संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की जा रही थी।

    इसी दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वाहन चालक ने नाके पर रुकने के बजाय तेज गति से आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद थाना प्रभारी द्वारा उसका पीछा किया गया और बाजार क्षेत्र में वाहन को रुकवाया गया।

    विवाद और वायरल वीडियो का दूसरा पहलू
    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि वाहन रुकने के बाद संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। इसी दौरान विवाद बढ़ा, जिसका एक हिस्सा वीडियो में रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    पुलिस का कहना है कि वायरल किया गया वीडियो पूरे घटनाक्रम को नहीं दिखाता, बल्कि केवल एक सीमित अंश प्रस्तुत करता है। आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से वीडियो को एकतरफा रूप में प्रसारित किया गया।

    जांच जारी, कार्रवाई तय
    धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    पुलिस की अपील: अफवाहों से बचें
    धमतरी पुलिस ने आम नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि अधूरी या भ्रामक जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना सभी की जिम्मेदारी है।

    निष्कर्ष:
    यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को बिना सत्यापन के स्वीकार करना भ्रामक हो सकता है। वास्तविकता अक्सर सतह से कहीं अधिक जटिल होती है, जिसकी पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव है।

    दुर्ग। राष्ट्र निर्माण की नींव में अपना पसीना बहाने वाले 'श्रमयोगियों' के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ द्वारा अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। दुर्ग के गायत्री मंदिर (वार्ड–25) स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था ने मेहनतकश मजदूर भाई-बहनों को उपहार एवं मिष्ठान भेंट कर उनके समर्पण को सलाम किया।

    कठिन परिश्रम को कृतज्ञता का नमन

    इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय उन श्रमिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना था, जो चिलचिलाती धूप और विपरीत परिस्थितियों की परवाह किए बिना समाज और देश के विकास चक्र को गतिमान रखते हैं। संस्था का मानना है कि हर ईंट और हर निर्माण के पीछे एक मजदूर के सपनों और संघर्ष की कहानी छिपी होती है।

    नेतृत्व के विचार: "मजदूर राष्ट्र की रीढ़"

    संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में कहा:

    "मजदूर हमारे समाज की असली रीढ़ हैं। उनके पसीने की हर बूंद से राष्ट्र की प्रगति की इबारत लिखी जाती है। उनके सम्मान और सहयोग के बिना किसी भी विकसित समाज की कल्पना करना असंभव है। हमारा यह लघु प्रयास उनके असीम योगदान के प्रति एक विनम्र कृतज्ञता है।"

    वहीं, कार्यक्रम की प्रभारी और वार्ड–25 की पार्षद व संस्था अध्यक्ष मनीष सोनी ने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा कि मजदूरों का सम्मान हमारे संस्कारों का अभिन्न अंग है। हमें सदैव उनके परिश्रम की कद्र करनी चाहिए और उनके जीवन को सुगम बनाने हेतु तत्पर रहना चाहिए।

    इनकी रही गरिमामय उपस्थिति

    आयोजन को सफल बनाने में संस्था के मार्गदर्शकों और सदस्यों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से:

    संरक्षक: अंजन राय चौधरी

    वरिष्ठ सदस्य: प्रीति खरे, साधना चौधरी, रूपलता साहू, अनुपम जैन

    सहयोगी: शैलेश वर्मा, सीमा गुप्ता, रानी साहू, संगीता देवांगन, रानी भाटिया

    सभी अतिथियों ने मजदूरों के साथ खुशियाँ साझा कीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के अंत में श्रमिकों के चेहरों पर खिली मुस्कान ने इस आयोजन की सार्थकता को सिद्ध कर दिया।

    श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़: सेवा, समर्पण और सम्मान का संकल्प।

    ? शौर्यपथ विशेष आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, जिससे भावनात्मक उतार-चढ़ाव और निर्णयों…
    दुर्ग। शौर्यपथ विशेष सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो जनप्रतिनिधि अपनी मर्यादा भूलकर जनता को ही धमकाने पर उतर आते हैं। दुर्ग नगर निगम की महापौर अलका…

    अंबिकापुर/शौर्यपथ। शहर के बीचों-बीच स्थित एक अवैध पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग के मामले ने अब प्रशासनिक और पुलिसीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर दर्ज अपराध में अपेक्षित गंभीर धाराएं नहीं जोड़े जाने को लेकर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने सख्त रुख अपनाया है और इस संबंध में एसएसपी सरगुजा से जवाब तलब किया है।

    प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, थाना अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 259/2026 (धारा 125, 270, 287 बीएनएस) के प्रकरण में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ है कि 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्मपारा क्षेत्र में एक रिहायशी इलाके में अवैध रूप से भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए कथित तौर पर वेल्डिंग कार्य के दौरान उठी चिंगारी से विस्फोटक सामग्री में आग लगी, जिससे आसपास के मकानों और लोगों को भारी नुकसान पहुंचा।

    गंभीर धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं?

    आईजी कार्यालय ने अपने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 324, 326(छ) के साथ-साथ विस्फोटक अधिनियम, 1984 की धारा 9(ख) भी प्रथम दृष्टया लागू होती है। इसके बावजूद प्रारंभिक कार्रवाई में इन धाराओं को शामिल नहीं किया गया, जिसे लापरवाही माना जा रहा है।

    थाना प्रभारी पर भी सवाल

    पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रकरण की विवेचना और धाराएं जोड़ने में थाना स्तर पर गंभीर चूक हुई है, जो कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही को दर्शाती है। आईजी ने निर्देश दिए हैं कि:

    संबंधित थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण लिया जाए

    विवेचक की भूमिका की समीक्षा की जाए

    7 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब आईजी कार्यालय को भेजा जाए

    साथ ही, प्रकरण में आवश्यक धाराएं जोड़कर आगे की विवेचना सुनिश्चित की जाए

    जनता में आक्रोश, उठ रहे बड़े सवाल

    अंबिकापुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखों का अवैध भंडारण और उसके बाद हुई इतनी बड़ी घटना ने आम नागरिकों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:

    यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी

    प्रारंभिक FIR में हल्की धाराएं लगाना पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है

    प्रशासनिक सख्ती के संकेत

    आईजी का यह पत्र न केवल इस मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि उच्च स्तर पर अब लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:

    किन अधिकारियों पर कार्रवाई होती है

    क्या प्रकरण में नई धाराएं जोड़कर गिरफ्तारी या अन्य सख्त कदम उठाए जाते हैं

    निष्कर्ष

    अंबिकापुर अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस की कार्यशैली की परीक्षा बन गया है। आईजी के हस्तक्षेप के बाद यह मामला नई दिशा में बढ़ता दिख रहा है, जिससे कई जिम्मेदारों की भूमिका पर से पर्दा उठ सकता है।

    दुर्ग। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में दुर्ग में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति सामने आई है। दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा पर अनुसूचित जाति विभाग के दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी में गुड्डा उरे को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय एवं प्रभावशाली बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में संगठन लगातार विस्तार और सामाजिक समावेश की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

    जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार—

    उपाध्यक्ष: 5 पद

    महामंत्री: 5 पद

    सचिव: 5 पद

    इन पदों के बीच गुड्डा उरे की नियुक्ति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

    गुड्डा उरे के उपाध्यक्ष बनने की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों, समाजजनों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। इसे संगठन में नई ऊर्जा और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आगामी समय में संगठन की जमीनी पकड़ को और सुदृढ़ करेगी तथा सामाजिक संतुलन के साथ कांग्रेस को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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