August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

       नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश भर में 30 लाख घरों को रूफटॉप सोलर से सशक्त बनाने की सफलता की प्रशंसा की। उन्होंने इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक सराहनीय उपलब्धि बताया।
    प्रधानमंत्री ने रूफटॉप सोलर अपनाने वाले सभी लाभार्थियों को बधाई दी और रेखांकित किया कि यह पहल नागरिकों के बीच बचत, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।
    श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक अभिन्न अंग है।
    केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी के एक पोस्ट का उत्तर देते हुए, प्रधानमंत्री ने पोस्ट किया;

    “भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक सराहनीय उपलब्धि!
    उन सभी को बहुत-बहुत बधाई जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाया है और रूफटॉप सोलर को अपनाया है, जिससे बचत, सतत जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को बल मिला है। यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण के हमारे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है।

       नई दिल्ली /  भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SEC) का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, इससे पूर्व ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में आयोजित हुआ था।
    सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार करेंगे। इस अवसर पर निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहेंगे। देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भाग लेंगे, वहीं सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
    समन्वय और सहकारी संघवाद पर जोर
    इस राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के संदर्भ में ईसीआई और राज्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच तालमेल को मजबूत करना है। सम्मेलन से निर्वाचन प्रबंधन में सहकारी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।
    तकनीक, ईवीएम और मतदाता सूची पर मंथन
    दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने,प्रौद्योगिकी के उपयोग,ईवीएम की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा,तथा मतदाता सूचियों को साझा करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में शुरू किए गए ईसीआईएनईटी (ECINET) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुतियां देंगे और बताएंगे कि यह प्लेटफॉर्म निर्वाचन सेवाओं को किस प्रकार सरल और प्रभावी बना रहा है।
    मतदाता पात्रता पर तुलनात्मक प्रस्तुति
    सम्मेलन में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता पात्रता से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर एक तुलनात्मक प्रस्तुति भी दी जाएगी, जिससे मतदाता सूची निर्माण से जुड़े कानूनों पर सूचनात्मक चर्चा संभव हो सके।
    संवैधानिक पृष्ठभूमि
    राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत संबंधित राज्य कानूनों द्वारा किया जाता है। अनुच्छेद 243के और 243जेडए के अंतर्गत पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव तथा मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयुक्तों को सौंपी गई है।
    कुल मिलाकर, यह सम्मेलन देश की निर्वाचन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समन्वित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

    नई दिल्ली/ 
    शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

    क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
    आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

    कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
    यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

    पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
    गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
    महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

    पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
    सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
    राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
    धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

    व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
    यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
    अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
    यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

    नई दिल्ली/ 
    शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

    क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
    आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

    कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
    यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

    पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
    गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
    महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

    पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
    सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
    राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
    धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

    व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
    यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
    अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
    यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

    नई दिल्ली।
    फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।

    ‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल

    प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—

    M – Moral (नैतिक मूल्य)
    A – Accountable (जवाबदेही)
    N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
    A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
    V – Valid (वैध और सुरक्षित)

    पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।

    एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
    प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।

    दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
    पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।

    समावेशी तकनीक की मिसाल
    समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।

    नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
    प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
    विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
    पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
    एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
    नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
    समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
    समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।

    भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
    मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।

    राजनीतिक संदेश
    मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।

    **एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

    गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

    नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

    जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


    जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

    जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
    विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


    वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

    यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
    विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


    सरकारी मंच, निजी लापरवाही

    सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
    पर सवाल यह है कि—

    • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

    • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


    माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

    घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

    “प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

    लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

    • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

    • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


    गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

    यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
    खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
    ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
    समझ लिया गया।


    एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
    यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

    नई दिल्ली / एजेंसी /
    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव का उद्घाटन किया।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, अपनी लिपि के अभाव में संताली भाषा को प्रारंभ में रोमन, देवनागरी, उड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था। नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग भी वहाँ प्रचलित लिपियों का उपयोग करते थे। ये लिपियां संताली भाषा के मूल शब्दों का सही उच्चारण सही तरीके से नहीं कर पा रही थीं. साल 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। तब से यह संताली भाषा के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आज यह लिपि विश्वभर में संताल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है और समुदाय में एकता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि की शताब्दी समारोह इस लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर होना चाहिए। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बंगाली या किसी अन्य भाषा में शिक्षा मिल सकती है, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली भी अलचिकि लिपि में सीखनी चाहिए।

    https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PRpic316022026EZ79.JPG

    राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि अनेक लेखक अपने साहित्यिक कार्यों से संताली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की सलाह दी।

    https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PRpic416022026D4MF.JPG

    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का उपवन है। भाषा और साहित्य समुदायों के भीतर एकता को बनाए रखने वाले सूत्र हैं। साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध होती हैं। संताली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक अनुवाद और लेखन के माध्यम से पहुंचाने तथा अन्य भाषाओं के साहित्य को संताली में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच अलचिकि लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।

    14 मिलियन से अधिक डाउनलोड, 10 लाख लोगों ने घर बैठे अपडेट किया मोबाइल नंबर

    नई दिल्ली /
    भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित नया आधार ऐप देश में डिजिटल पहचान प्रबंधन का एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों के बीच इसे जबरदस्त स्वीकार्यता मिल रही है, जो सुरक्षित, सरल और गोपनीयता-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
    यूआईडीएआई के इस नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल ऐप को अब तक 14 मिलियन (1.4 करोड़) से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। 28 जनवरी 2026 को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से यह ऐप औसतन प्रतिदिन एक लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज कर रहा है।

    घर बैठे आधार सेवाएं, लाखों नागरिकों को राहत
    आधार ऐप ने नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बना दिया है।
    अब तक—
    10 लाख से अधिक लोगों ने ऐप के माध्यम से अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया
    3.57 लाख आधार धारकों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक की सुविधा का उपयोग किया
    लगभग 8 लाख लोगों ने ई-आधार डाउनलोड किया
    यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आधार से जुड़ी सेवाएं अब बिना कतार और बिना कार्यालय गए, घर बैठे संभव हो रही हैं।

    गोपनीयता और सुरक्षा पर विशेष जोर
    यह ऐप डेटा मिनिमाइजेशन, कंसेंट कंट्रोल और सेलेक्टिव डेटा शेयरिंग जैसी आधुनिक अवधारणाओं को बढ़ावा देता है। फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से पहचान सत्यापन, सिंगल क्लिक में बायोमेट्रिक प्रबंधन और ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने जैसी सुविधाएं इसे और अधिक सुरक्षित बनाती हैं।

    QR आधारित वेरिफिकेशन से आसान हुआ दैनिक जीवन
    आधार ऐप के जरिए अब—
    होटल चेक-इन
    अस्पतालों में भर्ती
    कार्यक्रमों में प्रवेश
    आयु सत्यापन
    गिग वर्कर्स एवं सर्विस पार्टनर्स का सत्यापन
    जैसे कार्य ऑफलाइन QR कोड वेरिफिकेशन के माध्यम से आसानी से किए जा सकते हैं। इसके लिए UIDAI एक मजबूत ऑफलाइन वेरिफिकेशन इकोसिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिससे संस्थाएं पंजीकरण कर इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

    “वन फैमिली – वन ऐप” की अवधारणा
    यह आधार ऐप एक ही मोबाइल डिवाइस पर पांच आधार प्रोफाइल प्रबंधित करने की सुविधा देता है, जिससे पूरे परिवार के लिए एक ही ऐप पर्याप्त हो जाता है। पता अपडेट के साथ-साथ अब पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट की सुविधा भी इसमें शामिल है। भविष्य में और भी सेवाओं को जोड़ने की योजना है।

    डिजिटल भारत की दिशा में मजबूत कदम
    आधार ऐप की यह व्यापक स्वीकार्यता सेवा वितरण में सुधार, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में UIDAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नियमित अपडेट, उन्नत सुरक्षा फीचर्स और सरल इंटरफेस के कारण यह ऐप सभी आयु वर्ग और क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
    आधार ऐप आज केवल एक एप्लिकेशन नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पहचान का नया चेहरा बन चुका है।

    नई दिल्ली /
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया।
    श्री मोदी ने कहा कि नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी उत्साही लोगों के बीच उपस्थित होना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए बदलावकारी समाधान तैयार करेगी, बल्कि वैश्विक विकास में भी योगदान देगी।
    एक्स पर अपनी पोस्ट में श्री मोदी ने कहा, “भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। यहां नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और तकनीक प्रेमियों के बीच रहकर एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है। हम मिलकर ऐसे समाधान तैयार करेंगे जो केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए होंगे!”

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