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नई दिल्ली / एजेंसी /
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में 17 फरवरी 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह करेंगे। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित बनाना है।
बैठक में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और भविष्य की साझा कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
मंथन बैठक का प्रमुख फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर रहेगा। इसके तहत 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर विचार किया जाएगा। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत आधुनिक गोदामों के विस्तार से किसानों को बेहतर भंडारण और बाज़ार तक सीधी पहुंच देने पर चर्चा होगी।
बैठक में नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में राज्यों की भागीदारी पर भी विमर्श होगा, जिससे निर्यात, जैविक खेती और बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका सुदृढ़ हो सके।
इसके अलावा सहकारिता कानूनों में सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने, डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी, सहकारी बैंकों की मजबूती, सदस्यता विस्तार, डिजिटलीकरण, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
यह मंथन बैठक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहकारिता को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई अग्रणी नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए एकत्रित हुए
नई दिल्ली /
राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। यह शिखर सम्मेलन इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर इस स्तर का वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य समावेशी विकास, मजबूत सार्वजनिक प्रणालियों और सतत प्रगति के लिए एआई की भूमिका को वैश्विक दृष्टिकोण से परिभाषित करना है।
16 से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 60 से अधिक मंत्री एवं उपमंत्री, तथा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही, विश्वभर से 500 से अधिक सीईओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और परोपकारी संगठनों के प्रतिनिधि इस मंच पर एकत्रित हुए हैं।
19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भाषण देंगे। उनका संबोधन वैश्विक सहयोग को सशक्त करने और जिम्मेदार, सुरक्षित एवं समावेशी एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को दिशा देने वाला होगा।
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन वैश्विक प्रभाव चुनौतियाँ — एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई हैं। इन पहलों के तहत दुनिया भर से 60 से अधिक देशों के 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो एआई नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। बहुस्तरीय मूल्यांकन के बाद 70 शीर्ष टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है, जो 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम एवं सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी।
18 फरवरी को आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से आयोजित एआई एवं इसके प्रभाव पर अनुसंधान संगोष्ठी शिखर सम्मेलन का प्रमुख अकादमिक मंच होगा। इसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से प्राप्त लगभग 250 शोध प्रस्तुतियों पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की उपस्थिति प्रस्तावित है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जन, ग्रह और प्रगति के तीन मूल स्तंभों पर आधारित है और सात विषयगत कार्य समूहों के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई, मानव पूंजी और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर परिणाम-उन्मुख सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई सहयोग का प्रमुख केंद्र बनाने और जिम्मेदार नवाचार को जनहित से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
रायपुर / /महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज श्रीलंका के कोलंबो में खेले गए टी-20 विश्व कप मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 61 रनों से पराजित कर राष्ट्र का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जांबाज खिलाड़ियों ने संयम, रणनीति और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय देते हुए यादगार जीत दर्ज की। यह क्षण करोड़ों देशवासियों के लिए गर्व, उत्साह और उल्लास का अवसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों को इस गौरवपूर्ण सफलता के लिए हार्दिक बधाई देते हुए आगामी मुकाबलों के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
नई दिल्ली।
ICC पुरुष T20 विश्व कप 2026 के ग्रुप-A मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए नामीबिया को 93 रनों के विशाल अंतर से पराजित किया। यह मुकाबला 12 फरवरी 2026 को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया, जहां भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी—दोनों विभागों में अपना वर्चस्व कायम रखा।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 209 रन बनाए। भारतीय पारी के हीरो इशान किशन रहे, जिन्होंने मात्र 24 गेंदों में 61 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनके अलावा हार्दिक पांड्या ने 28 गेंदों में 52 रन बनाकर नामीबियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता के सामने नामीबिया का गेंदबाजी आक्रमण बेबस नजर आया।
210 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 18.2 ओवरों में महज 116 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से वरुण चक्रवर्ती ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके। वहीं, हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल ने 2-2 विकेट लेकर नामीबिया की रनचेज को पूरी तरह पटरी से उतार दिया।
ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए हार्दिक पांड्या को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्होंने न केवल अर्धशतकीय पारी खेली, बल्कि महत्वपूर्ण विकेट भी अपने नाम किए।
इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है और ग्रुप-A में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें भारत के अगले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां भारतीय टीम रविवार, 15 फरवरी को कोलंबो में चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से भिड़ेगी। यह मुकाबला ग्रुप चरण का सबसे चर्चित और निर्णायक मैच माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य भवनों का किया उद्घाटन, सुशासन और 'राष्ट्र प्रथमÓ के संकल्प को मिली नई ऊर्जा
नई दिल्ली /
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 'सेवा तीर्थÓ को राष्ट्र को समर्पित किया। संध्या समय आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 'सेवा तीर्थÓ परिसर में पट्टिका का अनावरण कर कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया गया।
यह कार्यक्रम देश की प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों की सेवा के अपने अटूट संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह परिसर 'नागरिक देवो भवÓ की पावन भावना से प्रेरित है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 'सेवा तीर्थÓ केवल एक भवन नहीं, बल्कि कर्तव्य, करुणा और 'राष्ट्र प्रथमÓ के सिद्धांत के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की सेवा के संकल्प और 'नागरिक देवो भवÓ की भावना को साथ लेकर इस पहल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाली पीढिय़ों को नि:स्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण हेतु समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस परिसर में प्रवेश करते समय 'कर्तव्यÓ की सर्वोच्च भावना को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर,प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तथा केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू विशेष रूप से उपस्थित थे।
तोखन साहू का वक्तव्य
इस अवसर पर श्री तोखन साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'सेवा तीर्थÓ प्रधानमंत्री की जन-केंद्रित शासन व्यवस्था की सोच का मूर्त रूप है और यह भारत की प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रशासन को संवेदनशील, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम बनाने की जो दिशा दी है, यह पहल उसी संकल्प की अभिव्यक्ति है।
श्री साहू ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए गर्व का विषय है और यह आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र बिलासपुर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास और आशीर्वाद के कारण ही उन्हें राष्ट्र निर्माण के इस गौरवपूर्ण क्षण में सहभागी बनने का अवसर मिला है।
उन्होंने अपने परिवारजनों के प्रति भी हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके संस्कार, मार्गदर्शन और सतत सहयोग ने उन्हें सदैव जनसेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा,
"यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प का सजीव प्रतीक है। मैं अपने संसदीय क्षेत्र की जनता और अपने परिवार का हृदय से आभारी हूँ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सेवा तीर्थÓ आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा और हम सभी को 'राष्ट्र प्रथमÓ की भावना के साथ निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।"
'सेवा तीर्थÓ को सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केन्द्रित प्रशासन की दिशा में एक नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक माना जा रहा है, जो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नई दिल्ली ।
भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की प्रतिष्ठित हस्ती और दूरदर्शन की जानी-मानी वरिष्ठ न्यूज़ एंकर सरला माहेश्वरी का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे पार्किंसन (Parkinson’s) जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रही थीं। उनका अंतिम संस्कार 12 फरवरी को शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर संपन्न हुआ।
उनके निधन पर प्रसार भारती और दूरदर्शन नेशनल ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके समकालीन और प्रसिद्ध न्यूज़ एंकर शम्मी नारंग सहित कई पूर्व सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय प्रसारण जगत की एक बड़ी क्षति बताया।
सरला माहेश्वरी 1980 और 90 के दशक में दूरदर्शन का एक प्रतिष्ठित चेहरा थीं। उन्होंने वर्ष 1976 में दूरदर्शन ज्वाइन किया और लगभग तीन दशकों तक (1976–2005) समाचार वाचन से जुड़ी रहीं। वे उन अग्रणी एंकर्स में शामिल थीं जिन्होंने देश में लाइव न्यूज़ बुलेटिन पढ़ने की परंपरा को मजबूत किया।
उनकी पहचान केवल एक समाचार वाचक के रूप में नहीं, बल्कि भाषा की शुद्धता, सटीक उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और शालीन व्यक्तित्व के कारण भी थी।
जन्म: 21 जुलाई 1954 (दिल्ली में जन्म; मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर से संबंध)
विवाह से पूर्व उनका नाम सरला जरीवाला/भदानी रहा।
वे दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी और गुजराती साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में पीएचडी थीं।
पत्रकारिता के साथ-साथ वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी की लेक्चरर भी रहीं। उल्लेखनीय है कि उसी दौरान अभिनेता शाहरुख खान वहां छात्र थे।
1984 में वे इंग्लैंड गईं, जहां उन्होंने BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) में समाचार वाचक के रूप में कार्य किया। 1988 में भारत लौटकर वे पुनः दूरदर्शन से जुड़ गईं और अपने संयमित वाचन से दर्शकों का विश्वास अर्जित किया।
सरला माहेश्वरी ने कई ऐतिहासिक और भावनात्मक घटनाओं की खबरें देश तक पहुंचाईं—
1982 के एशियाई खेलों के रंगीन प्रसारण का दौर
इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से जुड़ी खबरें
1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की दुखद सूचना
1997 में मदर टेरेसा के अंतिम संस्कार का प्रसारण
इन क्षणों में उनकी आवाज़ देश के करोड़ों घरों तक पहुंची और वे विश्वसनीयता का प्रतीक बन गईं।
वे अपने सीधे पल्ले की साड़ी और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। गुजराती शैली में पहनी गई उनकी साड़ियां उस दौर में महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थीं। दर्शक उनके समाचारों के साथ-साथ उनके सौम्य व्यक्तित्व और मर्यादित प्रस्तुति से भी जुड़ाव महसूस करते थे।
उनके पति डॉ. पवन माहेश्वरी, एक प्रख्यात गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
उस दौर में समाचार वाचन गरिमा, तटस्थता और भाषा की शुद्धता का प्रतीक था। उनके प्रमुख समकालीनों में शामिल रहे—
शम्मी नारंग – अपनी गहरी और प्रभावशाली आवाज़ के लिए प्रसिद्ध
सलमा सुल्तान – बालों में गुलाब लगाने की सिग्नेचर शैली
गीतांजलि अय्यर – लोकप्रिय अंग्रेज़ी समाचार वाचिका
रीनी साइमन खन्ना
नीति रवींद्रन
1980 और 90 का दशक भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का स्वर्ण काल माना जाता है। उस समय ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की होड़ नहीं, बल्कि संतुलित, संयमित और तथ्यपरक प्रस्तुति पर जोर था। सरला माहेश्वरी उसी परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि थीं।
उनका निधन केवल एक व्यक्तित्व का अवसान नहीं, बल्कि उस दौर की गरिमा, भाषा-संस्कृति और प्रसारण परंपरा की स्मृतियों को भी भावुक कर गया है।
भारतीय पत्रकारिता जगत उन्हें सदैव एक विश्वसनीय, शालीन और प्रेरणादायी आवाज़ के रूप में याद करेगा।
श्रद्धांजलि।
नई दिल्ली /
बजट सत्र के 12वें दिन 12 फरवरी 2026 को लोकसभा में विधायी कार्यवाही और राजनीतिक टकराव का तीखा संगम देखने को मिला। एक ओर सदन ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित किया, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लाए गए ‘सब्सटैंटिव मोशन’ के नोटिस ने सियासी तापमान बढ़ा दिया।
? इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (संशोधन) विधेयक पारित
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने सदन में स्पष्ट किया कि यह संशोधन पुराने श्रम कानूनों—जैसे ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926—के निरसन से उत्पन्न संभावित कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है।
विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान ‘फ्लोर वेज’ (न्यूनतम वेतन की आधार सीमा) को वैधानिक समर्थन देना है। इसके तहत कोई भी राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित आधार सीमा से कम न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकेगा। सरकार ने इसे श्रमिकों के हित में एक संरचनात्मक सुधार बताया, जबकि विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर और व्यापक चर्चा की आवश्यकता जताई।
? राहुल गांधी के खिलाफ ‘सब्सटैंटिव मोशन’
दिन का सबसे चर्चित घटनाक्रम भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और उन पर चुनाव लड़ने का आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए ‘सब्सटैंटिव मोशन’ का नोटिस देना रहा।
दुबे ने स्पष्ट किया कि यह विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र प्रस्ताव (Substantive Motion) है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। विवाद की पृष्ठभूमि राहुल गांधी के उस भाषण से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और केंद्रीय बजट को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि फिलहाल विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की कोई योजना नहीं है। अब यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर निर्भर करेगा कि वे इस नोटिस को स्वीकार करते हैं या नहीं। स्वीकार होने की स्थिति में सदन में इस पर बहस और मतदान संभव है।
राहुल गांधी ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसानों और देश के हितों के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे, चाहे उनके खिलाफ कोई भी प्रस्ताव लाया जाए।
? नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ₹3,500 करोड़ का निवेश
सदन में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जानकारी दी कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने वर्ष 2026-2028 के दौरान हवाई नेविगेशन बुनियादी ढांचे और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट (ATM) प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग ₹3,500 करोड़ का पूंजीगत परिव्यय निर्धारित किया है। सरकार ने इसे विमानन क्षेत्र की क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
? विपक्ष का प्रदर्शन और अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस
विपक्षी सांसदों ने कथित “जनविरोधी” व्यापार समझौतों और किसानों के मुद्दों को लेकर सदन के भीतर और मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने से कार्यवाही का माहौल और अधिक तनावपूर्ण रहा।
? अब 9 मार्च को फिर गूंजेगा सदन
सदन की कार्यवाही 13 फरवरी 2026 से अवकाश (recess) पर स्थगित कर दी गई है। लोकसभा की बैठक अब 9 मार्च 2026 को पुनः प्रारंभ होगी, जहां इन राजनीतिक और विधायी मुद्दों की गूंज दोबारा सुनाई देने की संभावना है।
बजट सत्र के इस दिन ने स्पष्ट कर दिया कि जहां एक ओर सरकार श्रम सुधार और अवसंरचना निवेश जैसे विधायी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है। आगामी सत्र में यह टकराव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
जगदलपुर/बस्तर।
“मां दंतेश्वरी की जय… सियान-सज्जन, दादा-दीदी मनके जोहार।”
इन्हीं आत्मीय शब्दों के साथ भारत की राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम महोत्सव में अपने ऐतिहासिक संबोधन की शुरुआत की। मां दंतेश्वरी के पावन धाम में उपस्थित होकर राष्ट्रपति ने इसे अपना सौभाग्य बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा लगता है। यहां के लोगों से मिलने वाला अपनत्व और स्नेह उनके लिए अमूल्य है।
राष्ट्रपति ने बस्तर को वीरों की धरती बताते हुए उन सभी सपूतों को नमन किया जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक वैभव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो मां दंतेश्वरी ने स्वयं इस धरती को संवारा हो।
राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय जीवन-शैली की सराहना करते हुए कहा कि यहां हर मौसम, हर फसल और हर ऋतु एक पंडुम है। बीज बोने से लेकर आम के मौसम तक, बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। यह जीवन-दर्शन पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के माध्यम से देशभर के लोगों ने जनजातीय संस्कृति की झलक देखी थी और इस वर्ष 50 हजार से अधिक कलाकारों व प्रतिभागियों द्वारा जनजातीय संस्कृति और जीवन-शैली के विविध रूपों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है। यहां की प्राचीन संस्कृति, जलप्रपात, गुफाएं और प्रकृति पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। उन्होंने होम-स्टे जैसे नए पर्यटन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चार दशकों तक बस्तर माओवाद की हिंसा से पीड़ित रहा, जिसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासियों और दलित समुदायों को हुआ। लेकिन अब भारत सरकार और राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई से भय और असुरक्षा का माहौल समाप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में माओवाद से प्रभावित लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वे सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकें। ‘नियद नेल्लानार योजना’ को उन्होंने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव बिजली, सड़क और पानी पहुंच रहा है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे शिक्षा की ओर लौट रहे हैं। यह बदलाव पूरे देश के लिए आशा और विश्वास का संदेश है।
हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यही ताकत है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति बनकर बस्तर की जनता को संबोधित कर रही है।
राष्ट्रपति ने बताया कि पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों को विकास से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा को उन्होंने व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला बताया और माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं। जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना को उन्होंने भविष्य निर्माण की दिशा में अहम कदम बताया।
राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती, डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी लोग ही समाज को संवेदनशील और समावेशी बनाते हैं।
अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति ने कहा कि मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपराओं और भाईचारे का प्रतीक है। विकास का वही मॉडल सफल होता है जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करें।
राष्ट्रपति ने बस्तरवासियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि आपकी प्रगति ही छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की नींव है।
“जय जय छत्तीसगढ़ महतारी” के उद्घोष के साथ उन्होंने मां दंतेश्वरी से देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
नई दिल्ली।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा उस समय तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन और 2017 के डोकलाम विवाद को लेकर गंभीर दावे कर दिए। राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण (ठ्ठश्चह्वड्ढद्यद्बह्यद्धद्गस्र रूद्गद्वशद्बह्म्) का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब आ गए थे। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही भारी हंगामे में तब्दील हो गई।
राहुल गांधी ने अपने तर्क के समर्थन में पत्रिका 'द कारवांÓ (ञ्जद्धद्ग ष्टड्डह्म्ड्ड1ड्डठ्ठ) में प्रकाशित एक लेख का उल्लेख किया, जिसमें जनरल नरवणे की प्रस्तावित पुस्तक के अंश होने का दावा किया गया था। हालांकि सरकार ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित दस्तावेज का हवाला संसद के नियमों के खिलाफ है।
सरकार का कड़ा विरोध, स्पीकर का हस्तक्षेप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का कहना था कि बिना आधिकारिक प्रकाशन और प्रमाणिकता के किसी पुस्तक या उसके कथित अंशों को सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा के नियम 352 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में असत्यापित या आपत्तिजनक दस्तावेज पेश करना नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि बिना प्रमाणिकता वाली सामग्री को सदन के रिकॉर्ड में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को कथित संस्मरण के अंश पढऩे की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
सदन के बाहर भी जारी रही जंग
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई से डर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण निर्णय लेने के बजाय जिम्मेदारी दूसरों पर डालते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पूर्व थल सेना प्रमुख की बात सामने आ रही है, तो सरकार उससे घबराकर उसे दबाने की कोशिश क्यों कर रही है।
इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सेना को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि "भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं खोई है।"
अप्रकाशित पुस्तक और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति
जिस पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनीÓ (स्नशह्वह्म् स्ह्लड्डह्म्ह्य शद्घ ष्ठद्गह्यह्लद्बठ्ठ4) का उल्लेख राहुल गांधी ने किया, उसके प्रकाशन पर रक्षा मंत्रालय पहले ही कुछ आपत्तिजनक अंशों को लेकर आपत्ति जता चुका है। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी का दावा है कि पुस्तक में डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के दौरान सरकार की कथित अनिर्णय की स्थिति का उल्लेख है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में उजागर किया गया है।
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
राहुल गांधी ने बहस को केवल सैन्य स्तर तक सीमित न रखते हुए भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीब आ गए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए "सबसे बड़ा खतरा" है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में दोहराया कि भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी क्षेत्र में संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया है।
हंगामे में बाधित हुई कार्यवाही
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। अंतत: भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
यह विवाद एक बार फिर यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना और विदेश नीति जैसे मुद्दे संसद में सबसे संवेदनशील और टकरावपूर्ण बहसों का केंद्र बने हुए हैं, जहां नियम, राजनीति और राष्ट्रहित आमने-सामने आ खड़े होते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
