August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

      रायपुर/नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 मार्च 2026 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस ट्रेन और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित करेंगे। साथ ही केरल के एर्णाकुलम से एक और पैसेंजर ट्रेन की शुरुआत की जाएगी। इन नई रेल सेवाओं से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

    प्रधानमंत्री इस अवसर पर पोदानूर–धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस और नागरकोइल–चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस को भी शुरू करेंगे। पोदानूर–धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पहली बार कोयंबटूर के औद्योगिक क्षेत्र को झारखंड के कोयला और इस्पात क्षेत्र से सीधे जोड़ेगी, जिससे विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों और उद्योगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। वहीं नागरकोइल–चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस कन्याकुमारी और केरल-तमिलनाडु तट को तेलंगाना से जोड़ेगी, जिससे विद्यार्थियों, श्रमिकों और यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।

    इसके अलावा रामेश्वरम–मंगलुरु एक्सप्रेस और तिरुनेलवेली–मंगलुरु एक्सप्रेस ट्रेनें तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तीर्थयात्रियों और तटीय क्षेत्रों के यात्रियों को सीधी रेल सुविधा प्रदान करेंगी। साथ ही मयिलादुथुराई–तिरुवरूर–काराईकुडी पैसेंजर और पालक्काड–पोल्लाची पैसेंजर ट्रेन सेवाएं भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी।

    इस कार्यक्रम के दौरान केरल के शोरनूर, कुट्टिप्पुरम और चंगनास्सेरी रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित कर राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही शोरनूर–निलांबुर रेलवे लाइन के विद्युतीकरण का भी उद्घाटन किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में तेज, स्वच्छ और आधुनिक रेल सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

    अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को सामान्य और स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए किफायती और आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। इन ट्रेनों के शुरू होने से देश के विभिन्न औद्योगिक, तटीय और तीर्थ क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा और यात्रियों को बेहतर एवं तेज़ रेल सेवाओं का लाभ मिलेगा।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 जारी किया है, जिसके तहत उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।

    सरकार के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को उनके पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन निरंतर जारी रह सके। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक LNG आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

    उर्वरक विभाग ने बताया कि संभावित वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार ने पहले से ही उर्वरकों का बड़ा बफर स्टॉक तैयार कर लिया है। 10 मार्च 2026 तक देश में कुल 180.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 131.79 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया 61.51 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 25.17 लाख मीट्रिक टन और एनपीके 56.30 लाख मीट्रिक टन का प्रमुख योगदान है।

    सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक शिपमेंट की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। फरवरी 2026 तक भारत 98 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आयात कर चुका है और अगले तीन महीनों में 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का अतिरिक्त आयात भी पाइपलाइन में है।

    उर्वरक विभाग के अनुसार यह निर्णय किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और खेती-किसानी को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    कोटा-बून्दी एयरपोर्ट का हुआ शिलान्यास, प्रधानमंत्री ने हाड़ौती क्षेत्र को दी बधाई

        कोटा / एजेंसी / बहुप्रतीक्षित नए कोटा एयरपोर्ट का भूमि पूजन शनिवार को शंभुपुरा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने वर्चुअल सम्बोधन में कोटा-बून्दी सहित हाड़ौतीवासियों को शुभकामनाएं दी।
    श्री मोदी ने कहा कि पिछले दिनों वे अजमेर गए थे, जहां हजारों करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। उसी कार्यक्रम में राजस्थान के लगभग 21 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए थे।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि अजमेर यात्रा के कुछ ही दिनों बाद उन्हें कोटा से जुड़े इस महत्वपूर्ण एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को शुरू करने का अवसर मिला है। एक ही सप्ताह में राजस्थान के इन दो बड़े कार्यों की शुरुआत इस बात का संकेत है कि आज राजस्थान तेज गति से विकास की ओर बढ़ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, किसानों और माताओं-बहनों के लिए योजनाएं, हर क्षेत्र में राजस्थान में तेजी से काम हो रहा है। आज का दिन कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के लिए नई आशा और उपलब्धि का दिन है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने जा रहा यह एयरपोर्ट आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2023 में जब वे कोटा आए थे, तब उन्होंने जनता से वादा किया था कि कोटा का एयरपोर्ट केवल सपना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि उसे साकार किया जाएगा। आज वही क्षण आ गया है, जब कोटा एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक कोटा के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए जयपुर एवं जोधपुर जाना पड़ता था। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यात्रा का समय कम होगा और व्यापार को भी गति मिलेगी।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि कोटा ऊर्जा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां ऊर्जा के लगभग सभी स्रोतों से बिजली का उत्पादन होता है। हाड़ौती की धरती अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। कोटा की कचौरी, कोटा डोरिया साड़ी, सैंडस्टोन की चमक, यहां का धनिया और बूंदी के बासमती चावल की पहचान विदेशों तक है।
    उन्होंने कहा कि कोटा की यह धरती आस्था का भी बड़ा केंद्र है। सदियों से देश-दुनिया के श्रद्धालु यहां श्री मथुराधीश जी पावन पीठ, श्री खड़े गणेश जी महाराज एवं श्री गोदावरी धाम के बालाजी जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आते रहे हैं। हवाई कनेक्टिविटी मिलने से इन सभी धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी नया लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि कोटा एयरपोर्ट बनने से हाड़ौती क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी और यह क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
    इस संदर्भ में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की सराहना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वे जितने शानदार सांसद हैं, उतने ही बेहतरीन लोकसभा अध्यक्ष भी हैं। वे संविधान को पूरी तरह समर्पित हैं और संसदीय प्रणालियों के प्रति पूरी तरह निष्ठा रखते हैं। बिरला जी ऐसे स्पीकर महोदय हैं, जो सांसदों का सर्वाधिक सम्मान करने का स्वभाव रखते हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कभी-कभी कुछ बड़े घरानों के अहंकारी, उत्पाती छात्र आ भी जाते हैं, तो भी वे सदन के मुखिया की तरह सबको संभालते हैं। वे किसी को भी अपमानित नहीं करते, सबके कड़वे बोल भी वो झेल लेते हैं।

    कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा: लोक सभा अध्यक्ष

    लोकसभा स्पीकर एवं कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि कोटा की जनता का बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का सपना साकार होने जा रहा है। कोटा एयरपोर्ट के निर्माण में कई बाधाएं आई लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज हाड़ौती को बड़ी सौगात मिली है। उन्होनें कहा कि कोटा में इंडस्ट्रीज लाने के लिए मैं कई बार उद्यमियों से मिलता था लेकिन एयरपोर्ट नहीं होने से वे पीछे हट जाते हैं। वर्ष 2027 में एयरपोर्ट बनने के बाद कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा। इडस्ट्रीज के आने के साथ ही आईटी सेक्टर भी कोटा में विकसित होगा, पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम विकसित होंगे।

    बड़ा औद्योगिक केन्द्र बनेगा कोटा - सीएम, राजस्थान

    सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि कोटा रेल व सड़क के साथ अब एयर से भी जुड़ने जा रहा है। यहां पानी प्रचुर मात्रा में है और आने वाले समय में कोटा शिक्षा के साथ-साथ उद्यम के क्षेत्र में भी अग्रणी रहने वाला है। कनेक्टिविटी बढ़ने से औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित होगा। देश के कोने-कोने से लोग कोटा पहुंचेंगे। राजस्थान में सरकार के आने के साथ ही हमने रोड मैप बनाया था। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में सरकार लगातार काम कर रही है। राइजिंग राजस्थान के तहत 35 लाख करोड़ के एमओयू किए। जिसमें से 8 लाख करोड़ रूपए के एमओयू हमने धरातल पर उतार दिए। इससे 3 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।

    कोटा पूरे देश से कह रहा - पधारो सा

    शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के बाद कोटा की रेल व सड़क के साथ-साथ एयर कनेक्टिविटी भी पूरे देश से हो जाएगा। ऐसा लग रहा है कि मानो कोटा पूरे देश से कह रहा हो कि पधारो सा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन में देश में हर 45 दिन में एक नया एयरपोर्ट खुल रहा है। उन्होनें कहा कि करीब 440 हैक्टर क्षेत्रफल में 3 हजार 200 मीटर लंबे रनवे के साथ 1507 करोड़ रुपए की लागत से नए कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। श्री नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के खुलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोटा में पर्यटन, शिक्षा सहित सभी सेक्टर्स में वृद्धि होगी।

       पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।

    संसदीय यात्रा पूरी करने की इच्छा

    नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
    वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है
    सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।

    बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री

    इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।

    मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की बात

    नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।


    विपक्ष के आरोप: “जनादेश के साथ विश्वासघात”

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
    वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।

    विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।

    भाजपा का बढ़ता दबाव भी चर्चा में

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    स्वास्थ्य और पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
    वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।


    कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं

    मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —

    1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
    2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
    3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
    4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

    सरकार का संभावित स्वरूप

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।


    राज्यसभा चुनाव: 16 मार्च को मतदान

    बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है
    नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।

    एनडीए के उम्मीदवार

    एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —

    • नीतीश कुमार (JD-U)

    • नितिन नबीन (BJP)

    • शिवेश कुमार राम (BJP)

    • रामनाथ ठाकुर (JD-U)

    • उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)

    विपक्ष का उम्मीदवार

    वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

    खाली हो रही सीटें

    ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।

    जीत का गणित

    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
    एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।

       नई दिल्ली / पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व से उच्चस्तरीय संवाद स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को कतर के अमीर, कुवैत के क्राउन प्रिंस और ओमान के सुल्तान से टेलीफोन पर अलग-अलग वार्ता कर क्षेत्रीय शांति, संप्रभुता और भारतीय समुदाय की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

    कतर के अमीर से बातचीत
    प्रधानमंत्री मोदी ने कतर के अमीर महामहिम शेख तमीम बिन हमद अल सानी से बातचीत में भारत की ओर से कतर के साथ अटूट एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कतर की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन की कड़ी निंदा की।
    दोनों नेताओं ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने इस चुनौतीपूर्ण समय में कतर में रह रहे भारतीय समुदाय को वहां के नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन और स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया।

    कुवैत के क्राउन प्रिंस से सार्थक संवाद
    प्रधानमंत्री ने कुवैत के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से भी फोन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करता है तथा इस कठिन समय में कुवैत के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।
    वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति बहाली में कूटनीतिक प्रयासों और संवाद की अहम भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने में कुवैती नेतृत्व के सहयोग की सराहना की।

    ओमान के सुल्तान से पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श
    प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक से भी बातचीत की और पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने ओमान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करते हुए क्षेत्र में स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए निरंतर कूटनीतिक संवाद को आवश्यक बताया।
    प्रधानमंत्री ने ओमान द्वारा भारतीय समुदाय को दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

    भारत का स्पष्ट संदेश
    इन तीनों वार्ताओं के माध्यम से भारत ने एक स्पष्ट और संतुलित कूटनीतिक संदेश दिया है—
    खाड़ी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता।
    तनाव की स्थिति में संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता।
    विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।
    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की यह सक्रिय पहल न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन का संकेत है, बल्कि खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत रणनीतिक और मानवीय संबंधों को भी रेखांकित करती है।
    भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक मंच पर शांति, स्थिरता और सहयोग की नीति पर अडिग है।

    विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

    सनातन धर्म, जो त्याग, तप, सत्य और चरित्र की शुचिता का प्रतीक माना जाता है, आज एक गंभीर विमर्श के केंद्र में है। कारण है—स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी, जिनका नाम दीक्षा, ब्रह्मचर्य और धार्मिक संगठनों से जुड़ने के साथ-साथ एक लंबे और विवादास्पद आपराधिक इतिहास से भी जुड़ा रहा है।

    21 से 27 मुकदमों का साया

    विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आशुतोष पांडे पर 21 से 27 तक आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। इन मामलों में गैंगरेप (धारा 376), धोखाधड़ी (420), जबरन वसूली, गैंगस्टर एक्ट, गोवध अधिनियम, आईटी एक्ट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
    शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र में वे एक घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है। पुलिस रिकॉर्ड में उनके नाम आशु शर्मा और अश्वनी सिंह के रूप में भी दर्ज होने की बात सामने आई है।

    जिलों में फैला आपराधिक नेटवर्क

    आशुतोष पांडे के खिलाफ मुकदमे केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं।

    • शामली (कांधला): 2019 में उन पर ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया था।

    • मथुरा: कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में पक्षकार होने के साथ धोखाधड़ी और धमकी के आरोप।

    • गोंडा, लखनऊ, मुजफ्फरनगर: यहां भी उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण लंबित बताए जाते हैं।

    फर्जी दस्तावेज और गौ-तस्करी के आरोप

    उन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे चुनाव लड़ने, फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल और गौ-तस्करी में संलिप्तता के आरोप भी लगे हैं। कुछ मामलों में पुलिस को रिश्वत देने की कोशिश और जेल यात्रा की पुष्टि भी रिपोर्ट्स में की गई है।

    हालिया पुलिस कार्रवाई

    • शामली: अक्टूबर 2025 में कांधला थाने में एक महिला की शिकायत पर घर में घुसकर मारपीट, चोट पहुंचाने और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ।

    • मथुरा: मई 2024 में गोविंद नगर थाने में धोखाधड़ी और धमकी (धारा 406, 504, 506 IPC) का केस। इस एफआईआर को रद्द कराने की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दी, केवल प्रक्रियागत राहत दी गई।

    दीक्षा और विवाद का संगम

    वर्ष 2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा लेने के बाद आशुतोष पांडे ने स्वयं को आशुतोष ब्रह्मचारी घोषित किया और सन्यासी जीवन अपनाने का दावा किया। इसके बाद वे मथुरा में बस गए और “श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट” के अध्यक्ष बने।
    यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या दीक्षा मात्र से अतीत के आपराधिक आरोप धुल जाते हैं, या फिर यह धार्मिक आवरण का दुरुपयोग है?

    फरवरी 2026 का नया मोड़

    फरवरी 2026 में एक पत्रकार द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना कि उसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को झूठे यौन शोषण के मामले में फंसाने के लिए उकसाया गया, इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना देता है। हालांकि आशुतोष की शिकायत पर प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश से एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन अब पुलिस आरोपकर्ता के आपराधिक इतिहास और शिकायत की सत्यता की गहन जांच कर रही है।

    सनातन धर्म की गरिमा पर प्रश्न

    धर्माचार्य, संत और समाज के प्रबुद्ध वर्ग मानते हैं कि सनातन धर्म का वस्त्र केवल बाहरी आवरण नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र की कसौटी है। यदि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग धार्मिक पदों, ब्रह्मचारी या पीठाधीश्वर जैसे शब्दों का सहारा लेकर समाज को भ्रमित करते हैं, तो यह न केवल कानून बल्कि धर्म की आत्मा के साथ भी अन्याय है।

    निष्कर्ष

    आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी का मामला केवल एक व्यक्ति या एक आरोप तक सीमित नहीं है। यह उस बड़ी चुनौती की ओर संकेत करता है, जहां धर्म की आड़ में आपराधिक अतीत को छिपाने की कोशिश समाज को दिग्भ्रमित कर सकती है।
    अब यह जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका और धर्मगुरुओं—तीनों की है कि सनातन धर्म की गरिमा को बचाया जाए और यह स्पष्ट संदेश जाए कि धर्म का चोला अपराधों पर पर्दा नहीं बन सकता

    नई दिल्ली / 
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलमÓ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी है। यह फैसला केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।
    राज्य की विरासत को उसकी असली पहचान
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर साझा किए गए अपने संदेश में श्री अमित शाह ने कहा कि 'केरलमÓ नाम राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को उसकी पूरी सच्चाई के साथ प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की प्राचीन पहचान को सहेजता है, बल्कि उसके गौरव और आत्मसम्मान को भी बनाए रखेगा।
    लंबे समय की मांग को मिला संवैधानिक सम्मान
    श्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केरलवासियों की उस भावना का सम्मान है, जो वर्षों से अपनी मातृभाषा और परंपरा के अनुरूप राज्य के नाम को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत को और अधिक सशक्त करता है।
    मोदी सरकार की सांस्कृतिक संवेदनशीलता का प्रतीक
    राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय मोदी सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें स्थानीय पहचान, भाषा और परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामों को पुनस्र्थापित करने की दिशा में कई अहम फैसले किए हैं।
    केरलम: नाम नहीं, आत्मा की पहचान
    'केरलमÓ शब्द मलयालम भाषा और राज्य की सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम राज्य के इतिहास, समुद्री व्यापार, आयुर्वेद, साहित्य और सामाजिक चेतना की पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करता है।

    नई दिल्ली/
    भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर वार्ता का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रारंभ हुआ, जो 26 फरवरी 2026 तक चलेगा। यह पहल दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नवंबर 2025 में दोनों पक्षों ने वार्ता के लिए संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर कर एक संरचित ढांचा तैयार किया था। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और इजरायल के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.62 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के पूरक हैं, ऐसे में प्रस्तावित एफटीए से व्यापार में स्थिरता और पूर्वानुमेयता आएगी, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।

    इन प्रमुख विषयों पर होगी चर्चा

    वार्ता के इस दौर में तकनीकी विशेषज्ञ वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजिन, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय (SPS), व्यापार में तकनीकी बाधाएं (TBT), सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं व्यापार सुगमीकरण, तथा बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

    प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ अहम शुरुआत

    उद्घाटन सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वार्ता 25-26 फरवरी 2026 को नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के अवसर पर प्रारंभ होना दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, हाई-टेक विनिर्माण, कृषि और सेवाओं के क्षेत्रों में अपार संभावनाओं पर जोर दिया।

    भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अजय भादू ने संतुलित और भविष्योन्मुखी समझौते की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं इजरायल की मुख्य वार्ताकार यिफ़त अलोन पेरेल ने कहा कि यह एफटीए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने और नए बाजारों के द्वार खोलने में सहायक होगा।

    रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

    यह पहल भारत-इजरायल संबंधों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है। दोनों देश एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं। प्रस्तावित एफटीए को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।

      नई दिल्ली / एजेंसी /
    भारतीय नौसेना पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आठ युद्धपोतों वाली एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) परियोजना के तीसरे पोत अंजदीप को शामिल करने जा रही है। इस युद्धपोत को 27 फरवरी, 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।

    इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी करेंगे।

    इस शुभारंभ समारोह से रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में राष्ट्र की तीव्र प्रगति का पता चलता है, क्योंकि एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट परियोजना स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित, अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है - यानी तटीय और उथले जल क्षेत्र जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

    यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है, जिसमें हल माउंटेड सोनार अभय भी शामिल है, और हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है। अपनी प्राथमिक पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा, यह फुर्तीला और अत्यधिक पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम युद्धपोत तटीय निगरानी, ​​कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (एलआईएमओ) और खोज एवं बचाव अभियान चलाने में भी सक्षम है। 77 मीटर लंबे इस पोत में एक उच्च गति वाला वाटर-जेट प्रोपल्सन प्रणाली है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

    कारवार तट से दूर स्थित ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप के नाम पर नामित अंजदीप नामक पोत को नौसेना में शामिल करने से तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र सहित देश के विशाल समुद्री हितों और तटीय क्षेत्रों की रक्षा करने की नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो भारतीय नौसेना को एक दुर्जेय 'निर्माता नौसेना' में बदलने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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