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राजनांदगांव। शौर्यपथ । शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रायवेट विद्यालयों में गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार प्रायवेट विद्यालयों को प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति राशि देती है। इस राशि की भुगतान को लेकर विगत कुछ वर्षो से गड़बड़ी की लगातार शिकायते हो रही है लेकिन जिला स्तर पर जिम्मेदार अधिकारीयों ने इसे गंभीरता से नही लिया, तो शिकायतकर्त्ता ने संचालक के समक्ष लिखित शिकायत कर प्रतिपूर्ति राशि गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की, तो संचालक ने संयुक्त संचालक, दुर्ग को बनाया जांच अधिकारी और प्रकरण को टीएल में रखा गया है। यानि डीपीआई ने मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और एक सप्ताह में जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है।
शिकायतकर्त्ता दिनांक 22 जून को नवपदस्थ सचिव डॉ. एस. भारतीदासन के समक्ष उपस्थित होकर जब दस्तावेजी साक्ष्य के साथ रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल, वि.ख. छुईखदान की लिखित शिकायत कर एफआईआर मांग की गई तो सचिव महोदय ने प्रकरण को समय सीमा के भीतर जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया था।
जिसके बाद दिनांक 30 जून को लोक शिक्षण संचालनालय ने संयुक्त संचालक दुर्ग को जांच अधिकारी बना कर समय सीमा के भीतर यानि एक सप्ताह के भीतर जांच कर कार्यवाही कर डीपीआई को सूचित करने का निर्देश दिया है।
बीते दिनों गौतम टेकनो, वि.ख. मोहला को एक लाख सैंतालिस हजार प्रतिपूर्ति राशि ट्रांसफर करने की भी शिकायत हुई थी क्योंकि शिकायतकर्त्ता का कहना था कि इस स्कूल का नाम आरटीई वेबपोर्टल में पंजीकृत ही नही है और बताया गया है कि इस स्कूल में आरटीई के 21 बच्चे पढ़ रहे है जबकि यह स्कूल के संचालकगण स्कूल बंद कर वर्ष 2019 से फरार है लेकिन जांच के नाम से सिर्फ खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
आठ बिन्दुओं पर हुई शिकायतः
1.रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल वर्ष 2019 के बाद खुला ही नही, लेकिन इस स्कूल को कागजों में संचालित कर लाखों रूपया प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान किया गया।
2.इस स्कूल को कागजों में संचालित कर 120 बच्चों को प्रवेश दिलाने का दावा किया गया।
3.इस स्कूल में अध्ययनरत आरटीई के बच्चे आज कहां है, इसकी जानकारी नोडल और डीईओ के पास नही है।
4.इस स्कूल के दस्तावेजों को जप्त कर पालको का बयान दर्ज हो।
5.इस स्कूल को मान्यता देकर आरटीई वेबपोर्टल में पंजीकृत कैसे कराया गया जबकि यह स्कूल विगत तीन वर्षो से बंद है।
6.इस स्कूल के नाम से दो और स्कूल संचालित है उनकी भी जांच की जावे।
7.इस संगठित अपराध में प्राचार्य, नोडल, डिलिंग क्लर्क और जिला शिक्षा अधिकारी की संल्पित्ता की जांच की जावे।
8.इस जांच में जिला स्तर के अधिकारी को सम्मिल ना किया जावे।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
