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राजनांदगांव / शौर्यपथ।
“उम्मीदों के जुगनू झिलमिलाते हैं, मन में हौसला हो तो ख्वाब पूरे होते हैं।”
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम खुटेरी की लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू की कहानी महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव में अपनी एक अलग पहचान भी स्थापित की।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर अमृता साहू को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा मिली। वे जय मां शारदा स्व सहायता समूह की सदस्य बनीं और नियमित बचत की शुरुआत की। समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त कर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और फैंसी स्टोर की शुरुआत की।
अमृता साहू ने बताया कि सिलाई का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्हें गांव और आसपास से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे। साथ ही अपने फैंसी स्टोर में श्रृंगार सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुएं रखने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई।
वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 8 हजार रुपये और वार्षिक आय लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। इस आय से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
अमृता साहू बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले वे मजदूरी का कार्य करती थीं, जबकि उनके पति कृषि कार्य पर निर्भर थे। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। लेकिन बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
अमृता साहू वर्तमान में शासन की कई योजनाओं से भी लाभान्वित हो रही हैं, जिनमें
राशन कार्ड
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
आयुष्मान कार्ड
महतारी वंदन योजना
शामिल हैं। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है।
अमृता साहू का सपना है कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाएं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए भविष्य में कपड़ों की दुकान का विस्तार करें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मिले सहयोग ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमृता साहू की यह कहानी बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प साथ हो, तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
