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April 05, 2026
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शौर्यपथ

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दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस के फेसबुक पेज पर आज दुर्ग शहर के नगर पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला एवं एसडीएम विनय पोयम लाइव आकर जिले के लोगो को कोरोना संक्रमण के रोकथाम व वैक्सीनेशन एवं शासन प्रशासन के दिशा निर्देश लॉकडाउन के संबंध में जो भी शंकाये थी उसका समाधान करते हुए लोगो से अपील की मास्क व वैक्सीन ही बचाव का सही मार्ग है वैक्सीन हर पात्र व्यक्ति को अवश्य लगाना चाहिए और दूसरे को भी वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। रात्रि 7 बजे दुर्ग पुलिस के फेसबुक पेज पर लाइव थे इस दौरान उन्होंने कोविड 19 के रोकथाम व वैक्सीन को लेकर हर उम्र के लोगो के सवाल का जवाब दिए। जिसमें 120 से अधिक लोगों के द्वारा अपने घर पर रहकर प्रश्न पूछा गया, जिनका जवाब उपरोक्त फेसबुक लाइव गेस्ट के द्वारा दिया गया। फेसबुक लाइव पर राम नगर सुपेला में लोगों का जमावड़ा होने की सूचना मिलने पर सीएसपी विवेक शुक्ला के द्वारा तुरंत कंट्रोल को अपने मेन तक सेट से कॉल करके सूचना देकर पेट्रोलिंग भिजवाया गया।
फेसबुक लाइव के माध्यम से घर बैठे लोगों को एक कमेंट कर उनके समस्या का निपटारा किया जा रहा है जिसमें आज दिनांक 0 मई को फेसबुक लाइव को 7000 से अधिक लोगों ने देखा, 249 से अधिक लोगों ने लाइक किया एवं 120 से अधिक लोगों ने कमेंट किया। दुर्ग पुलिस के द्वारा फेसबुक पेज के माध्यम से हर दिन प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों द्वारा लाइव आकर डिजिटलाइजेशन के माध्यम से जागरूक कर शासन के दिशा निर्देशों का पालन संबंधी बातें बताई जा रही हैं एवं उनके समस्याओं का निपटारा भी तुरंत किया जा रहा है।

-दुर्ग पुलिस द्वारा किया गया सराहनीय कार्य
-सड़क में रह रही बुजुर्ग महिला को भेजा गया आश्रय स्थल
-सीएसपी दुर्ग ने समाज कल्याण विभाग से समन्वय स्थापित कर भेजा वृद्धाआश्रम

दुर्ग / शौर्यपथ / पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय ध्रुव के निर्देशन में लगातार दुर्ग पुलिस अपराध को रोकने हेतु कार्रवाई कर रही है, साथ ही अपना सामाजिक दायित्व भी निभाते हुए एक बेहतर समाज बनाने हेतु अपना प्रयास कर रही है। इसी क्रम में आज मदर्स डे के दिन जब सीएसपी दुर्ग विवेक शुक्ला राजेन्द्र पार्क से गुजर रहे थे तो खुले में सड़क में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला को बरसात में भीगते हुए देखा। जिसके पश्च्यात उक्त महिला के आश्रय स्थल के प्रबंधन हेतु तत्काल समाज कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डी डी ठाकुर को फोन लगाकर उन्हें वृद्धाआश्रम भेजने हेतु सहयोग मांगा, और पद्मनाभपुर पेट्रोलिंग को मौके पर बुलवाया। उक्त बुजुर्ग महिला जो कि अपना नाम नेम बाई निवासी राजनांदगांव बताई उसे वृद्धा आश्रम चलने हेतु राजी किया।
सीएसपी दुर्ग विवेक शुक्ल समाज कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डीडी ठाकुर एवं पद्मनाभपुर चौकी की एएसआई शैल शर्मा तथा आरक्षक नेमु साहू एवं राजपूत के सहयोग से उक्त महिला को कादंबरी नगर स्थित वृद्धाआश्रम में पहुंचाया गया।

दुर्ग / शौर्यपथ / लॉक डाउन की जिम्मेदारी के साथ ही दुर्ग पुलिस ने आज बुजुर्ग नागरिकों को वैक्सिनेशन सेंटर तक पहुंचाने में भी अपनी प्रभावी भूमिका निभाई। एसपी प्रशांत ठाकुर ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि कोई भी बुजुर्ग जिसे वैक्सिनेशन सेंटर तक पहुंचने में दिक्कत हो रही हो, उसकी मदद करें।
जिला दुर्ग में वैक्सीनेशन के दूसरे चरण में दुर्ग वासियों में सकारात्मक ऊर्जा के साथ लोग वैक्सीनेशन के लिए कतार बद्ध होते हुए दिखाई दिए। सभी में टीकाकरण को लेकर उत्साह नजर आया। वहीं दूसरी ओर जिले में सभी वैक्सीनेशन सेंटर में कुछ ऐसे लोग जिनके पास आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं थे, उन्हें टीकाकरण में थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन परिस्थितियों को भांपते हुए पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री प्रशांत ठाकुर के द्वारा सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि वैक्सीनेशन के दौरान विकलांग,बुजुर्ग लोग जिन्हें आने-जाने की दिक्कत हो, अपने साधन से टीकाकरण के बाद उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए। टीकाकरण में प्रशासन के साथ वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए दुर्ग पुलिस के द्वारा ऐसे लोगों को वैक्सीनेट करवाकर वैक्सीन से होने वाले लाभ दुर्ग वासियों को बता कर अधिक से अधिक टीकाकरण बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। इसी तारतम्य में थाना खुर्सीपार के कर्मचारियों द्वारा बुजुर्ग व्यक्ति का टीकाकरण कराया गया एवं उन्हें अपने साधन से घर तक पहुंचाया गया।


जिला पंचायत सीईओ जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक द्वारा थाना बोरी में पहुंचकर वैक्सीनेशन सेंटर में व्यवस्था का जायजा लिया तथा क्षेत्र में लोगों को वैक्सीनेशन कराने के लिए जोर दिया। थाना बोरी के कर्मचारियों द्वारा आवागमन साधन उपलब्ध नहीं होने सें ग्रामीण महिलाओं को उनके घरों तक पहुंचाया गया तथा अन्य परिवारजनों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया।
थाना मोहन नगर द्वारा वैक्सीनेशन सेंटर ढूंढते हुए एक महिला को डायल 112 के माध्यम से वैक्सीनेशन सेंटर ले जाकर वैक्सीन लगवाया गया। थाना वैशाली नगर भिलाई -3, उतई द्वारा जरूरतमंद लोगों को वैक्सीनेशन कराया गया।
पुलिस अधीक्षक दुर्ग प्रशांत ठाकुर द्वारा आश्वस्त किया गया कि शासन द्वारा टीकाकरण अभियान और भी प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी दुर्ग पुलिस प्रशासन के साथ पूर्ण रूप से सामंजस्य स्थापित कर सकारात्मक प्रयास करेंगी जिससे जिले में अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो एवं जागरूक होकर समाज के सभी वर्गों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें।

नई दिल्ली /शौर्यपथ / बीजिंग चीन का बेकाकू 5b रॉकेट अब खतरे की वजह नहीं बनेगा. चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि इसका बड़ा हिस्सा हिंद महासागर में गिर चुका है. वहीं इस रॉकेट का एक बड़ा हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही खत्म हो गया था. रॉकेट की क्रैश लैंडिंग को लेकर आशंकित दुनियाभर के वैज्ञानिकों की इसपर नजर बनी हुई थी.
चीनी रॉकेट का अनियंत्रित बड़ा हिस्सा खतरे के तौर पर देखा जा रहा था. इसके 9 मई को धरती पर गिरने की आशंका व्यक्त की गई थी. लेकिन इसके लैंडिंग को लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं मिल सकी थी. नासा समेत दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर इसपर टिकी हुई थी. लॉन्ग मार्च 5b रॉकेट के कोर स्टेज का वजन 21 टन था. अगर रॉकेट का यह हिस्सा किसी आबादी वाले क्षेत्र में गिरता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था.
इसे लेकर बीजिंग के अधिकारियों ने कहा था कि लॉन्ग मार्च -5 बी रॉकेट के फ्रीफ़ॉलिंग सेगमेंट से बहुत कम जोखिम था. बता दें कि 29 अप्रैल को चीन के नए अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को पृथ्वी की कक्षा में लॉन्च किया था. चीनी एजेंसी ने बताया कि रॉकेट का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही नष्ट हो गया था.
अमेरिकी सैन्य डेटा पर आधारित मॉनिटरिंग सर्विस स्पेस-ट्रैक ने भी चीनी रॉकेट के मलबे के बारे में पुष्टि की। स्पेस ट्रैक ने ट्वीट कर कहा कि जो लोग #LongMarch5B की री-एंट्री को फॉलो कर रहे थे वे अब चैन की सांस ले सकते हैं।

नई दिल्ली / शौर्यपथ/ कोविड हालातों को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सुप्रीमो और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किया है. केंद्र सरकार को अब तक की सबसे अवैज्ञानिक सरकार करार देते हुए ओवैसी ने कहा कि पहली लहर के बाद सरकार ने जीत का ऐलान कर दिया और खुद से ही खुद को शाबाशी दे दी. उन्होंने कहा कि अब दूसरी लहर के कहर को देखकर सरकार कुछ भी बोलने से कतरा रही है. उनके अपने वैज्ञानिक सलाहकार तीसरी लहर को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार के आदेश पर वैज्ञानिक अपनी स्थिति को बदल रहे हैं. ओवैसी की यह प्रतिक्रिया केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन के उस बयान पर आई है जहां उन्होंने तीसरी लहर की आशंका को व्यक्त किया है.
इसके बाद उन्होंने अगले ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेशनल टास्क फोर्स गठित करने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अगर दूसरी लहर के लिए सरकार तैयार रहती और उसका रवैया लापरवाही भरा नहीं होता तो इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम दर्शाता है कि सरकार किस तरह संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को खंडित करने की कोशिश कर रही है. यह एक तरह कार्यकारी के क्षेत्र में न्यायलय का हस्तक्षेप है.
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक नेशनल टॉस्क फोर्स का गठन किया है. जोकि देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति का आकलन और सिफारिश करेगी. टॉस्क फोर्स में 12 सदस्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टास्क फोर्स अभी और भविष्य के लिए पारदर्शी और पेशेवर आधार पर महामारी की चुनौतियों का सामना करने के लिए इनपुट और रणनीति प्रदान करेगी. दिल्ली, कर्नाटक समेत कई राज्य ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर शिकायत कर रहे हैं.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / भोपाल मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां एक पिता को अपने बेटी का शव खाट पर लेकर 35 किलोमीटर तक पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ा. सुशासन की सरकार में विकास के दावे के बीच सिस्टम की अनदेखी की इस शर्मनाक तस्वीर को देखकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. क्या हम इंसानी बस्ती में रहते हैं या फिर वाकई ये सिस्टम सड़ गया है? जिसके चलते एक लाचार बाप खाट पर अपनी बेटी के शव को लेकर पैदल चलने को मजबूर है.
यह मामला सिंगरौली के निवास पुलिस चौकी क्षेत्र के गड़ई गांव का है. जहां एक 16 साल की नाबालिग ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. इसकी सूचना परिजनों ने निवास पुलिस चौकी में दी, लेकिन पुलिस प्रशासन व अन्य किसी जगह से सहयोग नहीं मिलने पर मृतका के लाचार पिता को बेटी का शव खाट पर लेकर पोस्टमार्टम कराने के लिए 35 किलोमीटर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
आपको जानकर हैरानी होगी कि यहीं से सिस्टम की शरारत शुरू हुई. पीड़ित को न ही शव वाहन मिला न ही निवास पुलिस ने कोई संजीदगी दिखाई. आखिरकार सिस्टम से हारे पिता को कलेजे के टुकड़े के शव को खाट पर लेकर 35 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ा.
मृतका के पिता ने कहा, "करें तो क्या करें पुलिस ने सहयोग नहीं किया. शव वाहन बुलाने पर भी नहीं आया. अब इस सिस्टम से कितनी देर तक गुहार लगाते इसलिए मजबूरी में पोस्टमार्टम जैसे औपचारिकता पूरी करने के लिए शव को किसी तरह लेकर आ गए."

नई दिल्ली /शौर्यपथ / गुवाहाटी असम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 6 दिन बाद तक मुख्यमंत्री पद को लेकर बना सस्पेंस आखिरकार रविवार को खत्म हो गया. बीजेपी नेता और पूर्वोत्तर में पार्टी के चाणक्य माने जाने वाले हेमंत बिस्वा सरमा असम के नए मुख्यमंत्री होंगे. मुख्यमंत्री के नाम पर फैसले के लिए आज राजधानी गुवाहाटी में बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई. बीजेपी सूत्रों ने कहा कि हेमंत बिस्वा सरमा असम के मुख्यमंत्री के रूप में सर्बानंद सोनोवाल की जगह लेंगे.
सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सरमा के नाम हरी झंडी मिलने के बाद रविवार को गुवाहाटी में आयोजित विधायक दल की बैठक में सोनोवाल ने हेमंत बिस्वा सरमा के नाम का प्रस्ताव रखा. हेमंत बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.
असम में हाल ही सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले राजग ने जीत दर्ज की है. 126 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 60 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि उसके सहयोगी दल एजीपी को 9 सीटों और यूपीपीएल को 6 सीटों पर जीत मिली है.
साल 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सर्बानंद सोनोनवाल को अपनी मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था और चुनाव में जीत के साथ असम में पहली बार सरकार बनाई थी. इस बार पार्टी ने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान चुनावों के बाद करने का फैसला किया था.
करीब 6 साल पहले कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए हेमंत बिस्वा सरमा को पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है. वह सर्बानंद सोनोवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

नई दिल्ली /शौर्यपथ / राज्य में कोरोना वायरस के केस में बढ़ोतरी होने के कारण उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान 20 मई तक बंद करने का ऐलान किया है. इसी के साथ ऑनलाइन क्लासेज की भी अनुमति नहीं दी है. आपको बता दें, उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस संक्रमण को काबू करने के लिए 30 अप्रैल से लागू कर्फ्यू की अवधि रविवार को 17 मई तक बढ़ा दी गई है.
कोरोना वायरस के कारण कई राज्यों में लॉकडाउन घोषित कर दिया है, जिस कारण स्कूल, कॉलेज, कोचिंग समेत राज्य के सभी संस्थान बंद है. 2020 और 2021 में देशभर के छात्रों की पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है. ऐसे में कई राज्यों ने अपनी बोर्ड परीक्षा भी स्थगित कर दी है.
बता दें, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महीने पहले कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था और अधिकारियों को अभी यह तय नहीं करना है कि क्या कोरोनावायरस मामलों में वृद्धि के बीच इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाएगा या नहीं.
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में, स्कूलों को 15 मई तक बंद करने का निर्णय लिया गया था. उत्तर प्रदेश में स्कूल शिक्षकों को भी 20 मई तक घर से काम करने की अनुमति दी गई थी. बता दें, केंद्र द्वारा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा रद्द करने और कक्षा 12वीं की परीक्षा स्थगित करने के फैसले के तुरंत बाद यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं.

मुंबई/शौर्यपथ / कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार की ओर से लगाई गई सख्ती का असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ता नज़र आ रहा है. लोगों के पास न काम है और न ही पैसा. टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन करना पड़ता है, लेकिन स्मार्टफोन नहीं होने के वजह से लोग वह भी नहीं करा पा रहे हैं. किन्नर समाज भी इस लॉकडाउन से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. मुंबई से सटे उल्हासनगर में रहने वालीं रवीना जगताप किन्नर समाज से आती हैं, लॉकडाउन के कारण इनकी आमदनी के सारे साधन बंद हो चुके हैं. उनका कहना है कि अब तो हमें ये भी नहीं पता कि अपना गुजारा कैसे करें. रवीना जगताप का सवाल है कि क्या हमें कोई काम दे सकता है? अगर हम बिज़नेस करना चाहें तो कोई करेगा क्या?
उनका कहना है कि शासन ने जो महिला और पुरुष के लिए कुछ सुविधा की है, उसमें हमारा नाम तो लिया ही नहीं है, हम भी समाज के घटक हैं, हमारे तरफ भी ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार हम पर ध्यान नहीं देती है. केवल किन्नर समाज के लोग ही नहीं बल्कि मजदूर और घरों में काम करने वाले लोग भी परेशान हैं. 64 वर्षीय सबीना डिकोस्टा की तबीयत अक्सर खराब रहती है, काम करने की इच्छा नहीं है, लेकिन घर का गुज़ारा करने के लिए कुछ घरों में बर्तन धोने का काम करती हैं. अगले महीने बेटे की शादी है, जोकि मजदूरी करता है. कुछ दिनों से उसके पास भी काम नहीं है, शादी कैसे होगी पता नहीं. साथ ही बीमारी होने के वजह से दवाई के लिए भी पैसे जुटाना पड़ता है. वो कहती हैं कि मैं किसी से पैसे मांगकर दिन निकालती हूं, दवाई लेकर आती हूं. 8 दिन की दवाई एक दो दिन छोड़कर खाती हूं और किसी तरह 15 दिन निकालती हूं.
यही हाल लता अडगले का भी है, कहीं काम नहीं मिलने के वजह से वो घर पर ही रहने को मजबूर हैं. वो बताती हैं कि नाके पर जाते हैं, कोई काम नहीं मिलता है तो वापस आते हैं. घरों में काम है, बस वही करते हैं. इसी तरह मजदूरी और पेंटिंग का काम करने वाले विजय दाभाड़े हर रोज़ सुबह लेबर चौक जाते हैं, इस उम्मीद के साथ कि काम मिल जाएगा. सरकार ने कहा है कि मजदूरों को काम करने दिया जाएगा, लेकिन काम कहीं है ही नहीं. उन्होंने बताया कि हर महीने घर में 10 हज़ार का खर्च है ही, पिछले महीने केवल 10 दिन काम मिला है और इस महीने 3 दिन काम किया हूं. इतने रुपयों में घर नहीं चलेगा, इसलिए कहीं ना कहीं से कर्ज लेना है.
अपने गुज़ारे के लिए हो रही परेशानी के अलावा इन सभी लोगों के सामने टीका लगवाना भी एक चुनौती से कम नहीं. असंघटित कष्टकरी कामगार संघटना के अध्यक्ष सुनील अहिरे बताते हैं कि अधिकांश लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है इसलिए वो टीकाकरण के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक नहीं कर पाते हैं और टीकाकरण केंद्र पर इनके लिए कोई सुविधा भी नहीं दी गई है . सरकार की ओर से जब भी किसी नियम का ऐलान किया जाता है, तब यह उम्मीद की जाती है कि अंतिम छोर में खड़े व्यक्ति के बारे में सोचकर उस नियम को बनाया गया होगा लेकिन ज़मीनी हालात देखकर ऐसा लगता नहीं है कि आम आदमी के बारे में सोचा गया होगा. ऐसे में केवल उम्मीद की जा सकती है कि सरकार इन परेशानियों को समझे और बदलाव लाए ताकि आदमी को इससे राहत मिल सके.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / तिरुवनंतपुरम केरल के एक कवि ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार पर वीडियो पोस्ट करने के लिए उन्हें 24 घंटे के लिए फेसबुक द्वारा ब्लॉक कर दिया गया. कवि सत्चिदानंदन ने कहा कि उन्हें एक "व्यंग्यात्मक वीडियो" व्हाट्सएप फॉरवर्ड के रूप में भेजा गया था. उन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया. इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा ने किसी भी भूमिका से इनकार किया है.
कवि सत्चिदानंदन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "मुझे फेसबुक पर पोस्ट करने या कमेंट करने से इसलिए रोक दिया गया क्योंकि मैंने केरल में भाजपा की हार पर तेजी से वायरल हो रहे एक व्यंगात्मक वीडियो को अपनी वाल पर पोस्ट किया. इस वीडियो में एक फिल्म की क्लिप है. जिसमें हिटलर हार के बाद अपने सैनिकों को संबोधित कर रहा है. जिसे एडिट कर अमित शाह पर मलयाली भाषा में फिल्माया गया, जिसमें चुनाव में हार के बाद शाह केरल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं से बात कर रहे हैं.'' कवि ने कहा कि यह पोस्ट एक व्यंग्य था, लेकिन किसी के लिए अपमानजनक नहीं था.
कवि ने दावा किया कि उन्हें पहले भी फेसबुक से चेतावनी मिली थी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक पोस्ट डाली थी.

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