August 20, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दिया गया कि देश में निःशुल्क…

    बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर जिले के 17 राजस्व न्यायालयों में काम ढप्प और जनरल पेशी से डेट आगे बढा दी जाती है। किन्तु यह आधा सच है ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे प्रकरण जो व्हीआईपी दर्जा रखते हैं न केवल सूने जा रहे हैं बल्कि सामान्य गति के मुकाबले उन्हें तेजी से निपटाया जा रहा है. और इस तरीके से असल में जिसके पक्ष में व्हीआईपी का फोन नहीं आया है उसे निपटाने की तैयारी चल रही है .
    कुछ प्रकरणों पर तहसीलदार घर बैठे आदेश कर देते हैं एक तरफ बिलासपुर एसडीएम कुछ मामलों पर रोज सुनवाई पर आतुर हैं तो दूसरी ओर अपीलीय न्यायालय में ताला लटक रहा है ऐसे में जिस पक्ष के विरुद्ध आदेश होगा वह अपील करने कहां जाएगा और यही व्हीआईपी संस्कृति है सब जानते हैं कि आमतौर पर शासन अपने आदेश निर्देश जानबूझकर शुक्रवार को देते हैं जिससे शनिवार इतवार को अपीलीय न्यायालय से राहत ना मिले और व्हीआईपी संस्कृति का काम पूरा हो जाए कुछ इसी तरह का काम बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में चल रहा है यह रोचक होगा कि वीआईपी प्रकरणों की लिस्ट पर नजर रखी जाए तब पता चलेगा कि इस प्रकरण का किस जनप्रतिनिधि ने दबाव बनाया.....( अजित कुमार की कलम से )

    बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ राज्य शासन ने जिले के निजी अस्पताल कोविड-19 का इलाज किस दर पर करेंगे कि घोषणा की है। इस गाइड लाइन के जारी होने के बाद निजी चिकित्सकों ने दावा किया कि हम तो इससे कम दर पर इलाज कर रहे है, दूसरी तरफ निजी अस्पतालों से जो खबर छन के आ रही है वह यह कहती है कि अस्पताल में कोविड-19 का इलाज नही मरीज से लूट हो रही है। राज्य सरकार की सूची के अनुसार सुपर स्पेसिलटी सुविधा के आधार पर जिले के अस्पतालों को तीन श्रेणी में रखा गया है, और उसी के आधार पर प्रति मरीज प्रति दिन की दर तय की गई है। इलाज की यह व्यवस्था 6200 से लेकर 17 हजार प्रति दिन तक है। राज्य सरकार ने अस्पतालों को एनएबीएच (राष्ट्रीय प्रत्यायन अस्पतालों का बोर्ड) से मान्यता प्राप्त और गैर मान्यता प्राप्त के बीच में बांटा है, किन्तु जिले के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों को तो छोड़ दे शहर के भीतर भी कोई भी निजी अस्पताल अपने सूचना पटल पर अपने बारे में सूचनाएं नही देता।
    अस्पतालों की नजर से देखे तो जिला स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल चलाने की अनुमति भी नही वह भी स्वयं को सुपर स्पेसिलटी बोलता है, गली-गली मल्टी स्पेसिलटी अस्पताल खुल गए है। शहर के भीतर एक अस्पताल में तो चौपाटी खुल गई है, और अस्पताल बन्द हो चुका है किंतु प्रोटेक्शन एक्ट के लाभ पाने के लिए अस्पताल को चलता दिखाया जाता है।
    कोविड-19 ने सिटी स्कैन कर दिया मजा। कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव है या नही यह जानने के लिए तीन टेस्ट ही पर्याप्त है किंतु चिकित्सको ने सिटी स्कैन का रास्ता भी खोल दिया। जिसकी प्रचलित दर 6-7 हजार के बीच है। सिम्स में विधायक शैलेश पांडेय ने 10 लाख रुपये दिया। एसईसीएल से भी लंबी फंडिंग हुई, किन्तु मेडिकल कॉलेज में आज तारीख तक सिटी स्कैन शुरू नही हुआ,और अब लंग्स में कोरोना का प्रभाव देखने सिटी स्कैन की पर्ची काटने का नया खेल शुरू हो गया है। कुल मिलाकर आम जनता या तो कोविड से मरे या बच जाए तो आर्थिक बर्बादी से ।

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा ‘‘मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना’’ के अंतर्गत संचालित उत्कृष्ठ संस्था प्रयास आवासीय विद्यालय, दुुर्ग में राज्य के सुदूर नक्सल प्रभावित जिले के विद्यार्थियों का कक्षा 11 वीं प्रवेष परीक्षा के माध्यम से प्रवेषित होकर अपने षिक्षा के स्तर में उन्नयन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा जे.ई.ई. मेन-2020 मे उत्कृष्ठ प्रदर्षन किया है।
          विभाग की जिला प्रमुख श्रीमती प्रियंवदा रामटेके, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, दुर्ग द्वारा जानकारी दिया गया कि इस वर्ष जे.ई.ई. मेन-2020 में 59 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 29 विद्यार्थियों ने एडवांस हेतु क्वालिफाई किया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के 16 विद्यार्थी (भोजकुमार, देवेन्द्र कुमार, फलेन्द्र कुमार, गोकुल राम, हेमन्त कुमार, खिलेेष कुमार, निखिल देहारी, नोहेल कोर्राम, प्रकाष कुमार, पुष्पेन्द्र ठाकुर, राजीव ध्रुव, दिप्ती कोमिया, हरिष्मा मरकाम, करिष्मा, लीना एवं मनीषा) अनुसूचित जाति वर्ग के 05 विद्यार्थी (किषोर कुमार टंडन, मनीष कुमार, रूपेष, सचिन बंबोड़े एवं नेहा) अन्य पिछड़ा वर्ग के 07 विद्यार्थी (ऐष्वर्य कुमार, हरोष सोनवानी, हिरेष कुमार, नमेष नमन निषाद, पोषण कुमार वर्मा, निषा गुप्ता एवं प्रियंका) तथा अनारक्षित वर्ग के 01 विद्यार्थी (रवि कुमार विष्वकर्मा) है। इन विद्यार्थीयों में अधिकतर विद्यार्थियो के पालक कृषि/ दैनिक मजदूर किसान निम्न आय वर्ग के हैं। शासन द्वारा विद्यार्थियो को संस्था में हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाकर उत्कृष्ठ षिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के प्रतिभा को निखार कर भविष्य निर्माण करने का प्रयास किया जाता है।
    पिता-कृषि मजदूर बेटा बनेगा इंजिनियर
    बालोद जिले के डौण्डी लोहारा से फलेन्द्र कुमार, प्रयास आवसीय विद्यालय, दुर्ग के छात्र है। माता-पिता कृषि मजदूर है। जब माता पिता को पता चला कि मेरा बेटा एडवांस के लिए क्वालिफाई किया है, उनके आखों से खुषी के आंसू निकल आए। छात्र द्वारा मुबंई आई.आई.टी. से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करके देष के निर्माण में योगदान करने की इच्छा व्यक्त की है।
    मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, अब बेटा बनेगा आई.आई.टी. से इंजिनियर
    महासमुंद जिले के बागबहरा ब्लाक के छात्र देवन्द्र कुमार जे.ई.ई. परीक्षा में अच्छा रैंक दृढ़ शक्ति से हासिल कर सफलता प्राप्त की। वह भी देष के उत्कृष्ठ आई.आई.टी. से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करना चाहता है। मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पिता कृषि मजदूरी करते हैं।
    स्कूल के महौल से हुए मोटिवेट-जे.ई.ई. हेतु 8 घंटे रोजाना अध्ययन
    प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग की छात्रा प्रियंका राजनांदगाॅव जिले के डोगरगढ़ ब्लाक की रहने वाली है। उसने बताया कि संस्था में पढ़ाई का अच्छा माहौल एवं षिक्षकों के मोटिवेषन से रोजाना 8 घंटे पढ़ाई कर एडवांस हेतु सफलता प्राप्त की। उसने कहा कि मैं आई.आई.टी. से पढ़ाई कर इंजीनियरिंग सेवा में जाना चाहती है।
    मेरे अरमानों की पूर्ति का स्तंभ है प्रयास, दुर्ग
    कुमारी नेहा जिला बालोद ब्लाॅक डौण्डी लोहारा की रहने वाली छात्रा ने भी एडवांस की परीक्षा की तैयारी कर आई.आई.टी. से बी.टेक करना चाहती है। उसके अनुसार मेरे अरमानों की पूर्ति इस संस्था में आने से सफल हो रही है। प्रयास संस्था भविष्य निर्माण का अच्छा प्लेटफार्म है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे के लिए विशेष प्रयास लगातार जारी हैं।बिहान योजना के तहत महिलाओं को रोजगार मूलक…

    -4 जोन में बांटा गया जिला, 40 स्टाफ नर्स संभाल रही जिम्मेदारी
    -कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, डिप्टी कलेक्टर प्रियंका वर्मा, दिव्या वैष्णव भी समय समय पर कर कॉल कर व्यवस्था का कर रहे रिव्यु
    -फीडबैक मिलते ही दिक्कत आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से भेजी जा रही टीम

       दुर्ग / शौर्यपथ / होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखने शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। यहां 40 स्टाफ नर्स लगातार कॉल कर लोगों से स्वास्थ्य का हाल पूछ रही हैं। ऑक्सीमीटर की रीडिंग पूछ रही है और तापमान भी पूछ रही हैं। किसी तरह की दिक्कत होने पर सुझाव दे रही हैं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से हेल्थ टीम भेजी जा रही है। डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव ने बताया कि यह टीम पाली में रात दिन काम कर रही है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के मार्गदर्शन में यह कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर भी इस संबंध में मरीजों से बात करते हैं। उद्देश्य यह है कि घर में रहकर भी मरीज अपना मनोबल बनाये रखें। जब फोन आता है तो वे आश्वस्त हो जाते हैं। हम छोटी छोटी बारीकियां भी पूछते हैं जैसे कि आज भोजन में क्या खाया। हम उन्हें रीच प्रोटीन डाइट की सलाह देते हैं। खूब दाल खाएं, पनीर खाएं। बीमारी को दूर करने में प्रोटीन की बड़ी भूमिका होती है। मौसमी फलों की सलाह देते हैं। कॉलेज की प्राचार्य ने बताया कि 6 मरीजों ने बताया कि ऑक्सीजन लेवल थोड़ा कम हुआ है। हमने उन्हें तुरंत हॉस्पिटल रेफेर कर दिया।

          प्रभारी अधिकारी डिप्टी कलेक्टर प्रियंका वर्मा ने बताया कि जब पहली बार मरीज को जब कॉल किया जाता है तो उन्हें कहा जाता है कि यह नंबर सेव कर लें। यह होम आइसोलेशन सेंटर का नंबर है। दिक्कत हो तो तुरंत फोन करें। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा लाभ लोगों के मनोबल बढ़ाने में होता है। फोन आता है तो वे मनोवैज्ञानिक रूप से निश्चिंत हो जाते हैं। स्टाफ नर्स उनकी स्थिति के बारे में उन्हें बताती हैं कि आप बिल्कुल रिकवरी की ट्रैक पर हैं। डिप्टी कलेक्टर दिव्या वैष्णव ने बताया कि वे भी रोज 10 वीडियो कॉल करती हैं और लोगों से पूछती है। आक्सीमीटर में हमारे सामने आंकड़े दिखाते हैं और हम लोग कहते हैं कि आप बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे, बस होम आइसोलेशन के कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करें। उन्होंने बताया कि हमने जनप्रतिनिधियों को भी अपने प्रयासों में शामिल किया है। उनके माध्यम से पड़ोसियों से अपील की है कि होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को ग्रोसरी की जरूरत हो तो उपलब्ध कराएं। किसी तरह की दवा की आवश्यकता होने पर हेल्थ की टीम वहां पहुंचकर इसकी व्यवस्था कर देती है। उल्लेखनीय है कि कालिंग के लिए और व्यवस्था देखने 4 जोन बनाये गए हैं। इनमें दुर्ग, भिलाई, भिलाई 3 और ग्रामीण क्षेत्र हैं। जिनके माध्यम से पूरे जिले को कवर किया जा रहा है। स्टाफ नर्स शकुंतला का कहना है कि यह अनुभव अद्भत है। रिकवर होते लोगों को सुनना बहुत अच्छा लगता है। हम उन्हें सलाह भी देते हैं। कॉल सेंटर की व्यवस्था बहुत उपयोगी साबित हुई है। होम आइसोलेशन में रह रहे केलाबाड़ी के आकाश ने बताया कि उनके पास प्रशासन की ओर से वीडियो कॉल आया। बहुत खुशी हुई कि इस तरह से हमारा ध्यान रखा जा रहा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / सोमवार से जिला अस्पताल में फीवर सेंटर में 3 काउंटर आरम्भ हो जाएंगे। इस संबंध में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने पुनः जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां वे कैसुअल्टी वार्ड भी पहुंचे। यहां 15 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें 15 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए।
    उन्होंने अस्पताल आने वाले पेशेंट को आते ही स्टेबल करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अस्पताल में दवा की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। साथ ही उन्होंने कोरोना वारियर के लिए आवश्यक पीपीई जैसे सुरक्षा उपकरणों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि जो गंभीर मरीज आते हैं और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों से गुजर रहे हों, उन्हें आपात कालीन कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक स्टेबल करे। इसके लिए पूर्व में प्रशिक्षण भी दिए गए हैं।
    कलेक्टर ने कहा कि फीवर क्लिनिक में व्यवस्था बेहद अहम है। सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। नए काउंटर आरम्भ होने के पश्चात समय काफी घट जाएगा, इससे सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने में आसानी होगी। कलेक्टर ने फीवर क्लिनिक में कार्य कर रहे हेल्थ स्टाफ से भी चर्चा की। उन्होंने सिविल सर्जन से लगातार इस दिशा में मॉनिटरिंग करने कहा ताकि जल्द से जल्द सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी की जा सके और लोगों को टेस्ट के लिए न्यूनतम समय लगे। कलेक्टर ने रात की पाली में जिला चिकित्सालय की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सिविल सर्जन ने रात के समय डयूटी के लिए लगाए गए स्टाफ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी को दायित्वों की जानकारी दे दी गई है और वे इसका निर्वहन कर रहे हैं। आपात केस के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि रात के समय सैंपलिंग के लिए भी दल बनाया गया है।
    इस दौरान एसडीएम खेमलाल वर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शनिवार को मौके पर किये गए निरीक्षण के अनुरूप दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। नए काउंटर की तैयारियां हो गई हैं। सोमवार से यह आरम्भ हो जाएंगी। कलेक्टर ने अस्पताल परिसर के नियमित सैनिटाइजेशन तथा साफ सफाई की उत्तम व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कगना रनौत को दिए जा रहे वाई श्रेणी सुरक्षा पर और प्रियंका गाँधी के सुरक्षा हटाने पर प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेन्द्र साहू ने केंद्र सरकार की दोहरी मानसिकता की निति पर वार करते हुए कहा कि माना आज देश में भाजपा की सरकार ने एक महिला के सुरक्षा के लिए वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है किन्तु क्या ऐसी ही भावना देश की अन्य महिलाओं के लिए भी केंद्र सरकार ने अपनाई है . कौन है कंगना जिसे केंद्र ने एक प्रदेश के मुखिया सहुए बहस के कारण वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी जबकि इसी देश में एक महिला ऐसी है जिसके पिता की ही नहीं दादी की भी क्रूर तरीके से हत्या हुई और देश की विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी की नेता है जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए किन्तु सरकार द्वारा एक ऐसी महिला को सुरक्षा देने में इतनी तत्परता सिर्फ इस लिए कि सरकार के पुराने दोस्त जो वर्तमान में राजनैतिक विरोधी है के खिलाफ कंगना मुखर हो रही है क्या कंगना के सहारे महाराष्ट्र में अपने आप  को ताकतवार घोषित करने के लिए ये किसी साजिश के तहत हो रहा है जबकि देश की एक बेटी जिसके पूर्वजों ने देश के लिए त्याग और बलिदान किया जिसके दादी और पिता की हत्या हो गयी उसको मिलने वाली सुरक्षा छिन ली गयी मकान ख़ाली करवा दी गई और दूसरी ओर जिस परिवार का देश हित में कोई योगदान नहीं है केंद्र सरकार उसे सुरक्षा दे रही हैं और मीडिया उसे झाँसी की रानी साबित करने में लगी है जो देश का दुर्भाग्य हैऔर इस दुर्भाग्य में केंद्र सरकार परदे से पीछे अपना राजनैतिक खेल खेल रही है . केंद्र सरकार की इस दोहरी निति से भाजपा सरकार की दोहरी मानसिकता ही सामने आ रही है .

    सेहत / शौर्यपथ / हमारे जीवन में बहुत बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब हम अपने ही विचारो में खो जाते हैं। फिर इस उलझन…
    दुर्ग / शौर्यपथ / मुझे राजनीति की उतनी समझ नहीं कि किसी के कार्यो का आंकलन करू किन्तु जैसा कि पिछले दिनों कांग्रेस में बड़े बदलाव हुए और कई कद्दावर…

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