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June 13, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

*मेयर ने सीएम को लिखा पत्र राजस्व हानि रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग* भिलाई। शौर्यपथ । भिलाई इस्पात संयत्र में अधिकारियों की सांठगांठ से नीजी वाहन व सैकड़ों कंडम वाहन चल रहे हैं। इनमें ट्रेवल एजेंसी द्वारा अधिकारियों की सेवा में लगाए गए वाहनों से लेकर भारी वाहन भी शामिल हैं। संयंत्र में ऐसे कई वाहन चल रहे हैं जिनकी न तो फिटनेस सही है और न ही वे मानकों पर खरे उतरते हैं। केवल अधिकारियों की मिलीभगत से इन वाहनों का संचालन हो रहा है। इससे छत्तीसगढ़ सरकार को वर्षों से भारी मात्रा में राजस्व की हानि हो रही है। इस मामले में भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव ने सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर राजस्व हानि को रोकने ऐसे अधिकारियों व कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मेयर देवेन्द्र यादव ने पत्र में लिखा है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में विभिन्न टूर एवं ट्रेवल्स के माध्यम से संचालित वाहन टैक्सी परमिट के स्थान पर संयंत्र के उच्च अधिकारियोंं की सांठगांठ से नीजी वाहन संलग्र कर संचालित किए जा रहे हैं। वहीं संयंत्र के भीतर काफी संख्या में भारी वाहन ट्रक, डंफर, जेसीबी आदि बिना पंजीयन व फिटनेस के लंबे समय से अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित हो रहे हैं। इससे संयंत्र के भीतर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। साथ ही वाहनों का परमिट व पंजीयन शुल्क राज्य सरकार को नहीं मिल पा रहा है। जिससे सरकार को वर्षों से राजस्व की हानि हो रही है। विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव ने पत्र के माध्यम से सीएम भूपेश बघेल से कहा है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में चल रहे वाहनों की जांच कराई जाए। राजस्व हानि को लेकर स्थानीय प्रशासन से जांच कराने के बाद संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

नजरिया /शौर्यपथ / ट्वंटी-20 विश्व कप के स्थगित होते ही आईपीएल के 13वें सत्र के आयोजन की तैयारियों में तेजी आ गई है। आईपीएल के चेयरमैन बृजेश पटेल ने इसे 19 सितंबर से 8 नवंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित करने की घोषणा कर दी है। हालांकि, इस आयोजन के लिए सरकार की अनुमति का इंतजार है, पर जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उनसे लगता है कि बीसीसीआई को अनुमति मिल जाने का पूरा भरोसा है। यह सही है कि यूएई में 2014 में आईपीएल के कुछ मैचों का आयोजन हो चुका है, पर इस बार कोविड-19 के कारण यह आसान नहीं होगा। हां, इतना जरूर है कि इस बार का आयोजन आईपीएल के पिछले संस्करणों से भिन्न होगा। बीसीसीआई को मैच से ज्यादा इंतजाम स्टेडियम के बाहर करने होंगे। फें्रचाइजियों को भी इस बार ज्यादा खिलाड़ी साथ रखने होंगे, क्योंकि किसी खिलाड़ी के कोरोना पॉजिटिव आ जाने पर उसे आइसोलेशन में भेजना जरूरी हो जाएगा। फिर बार-बार टेस्ट होने से खिलाड़ियों के ऊपर भी मानसिक दबाव बना रहेगा। मगर इतना जरूर है कि इंग्लैंड जैसी व्यवस्था करके खिलाड़ियों को दबाव मुक्त किया जा सकता है, पर इसके लिए प्रॉटोकोल को सख्ती से लागू करना पड़ेगा।
आईपीएल क्रिकेट और मनोरंजन का मिला-जुला रूप है। इसे देखने के लिए पहुंचने वाले हजारों दर्शकों में तमाम ऐसे होते हैं, जो क्रिकेट की बजाय मैच के माहौल का लुत्फ उठाने जाते हैं। अव्वल तो यूएई में भारत जैसा माहौल मिलना संभव नहीं है, फिर यदि वहां की सरकार दर्शकों को स्टेडियम में आने की अनुमति दे देती है, तब भी सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाने से स्टेडियम में एक चौथाई दर्शक ही आ सकेंगे। बीसीसीआई के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम होगा, खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, टीम प्रबंधन से जुड़े लोगों को ठहरने के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया कराना। इस संबंध में ईसीबी ने इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच टेस्ट सीरीज के दौरान बहुत अच्छा काम किया है, मगर ईसीबी जैसा जैव सुरक्षित माहौल यूएई में बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इंग्लैंड में सीरीज के दौरान दोनों टीमों को आयोजन स्थल पर ही ठहराया गया, जबकि आईपीएल में आठ टीमों को एक जगह ठहराना संभव नहीं है।
आईपीएल शुरू होने से पहले बीसीसीआई को एक बड़ा काम दुनिया भर से क्रिकेटरों, सपोर्ट स्टाफ, कमेंटेटरों व अन्य अधिकारियों को यूएई पहुंचाने का करना होगा। अभी ज्यादातर देशों में उड़ान की शुरुआत हुई नहीं है। बताया जा रहा है कि फ्रेंचाइजियों से निजी विमानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। यही नहीं, इन सभी को लाने से पहले 72 घंटों में दो बार कोविड टेस्ट भी करना होगा। कोविड टेस्ट निगेटिव आने पर ही उन्हें विमान में चढ़ने की अनुमति मिलेगी। हां, इतना जरूर है कि यूएई में कोविड टेस्ट निगेटिव लेकर आने वालों को क्वारंटीन में नहीं रहना पडे़गा। हालांकि, कुछ फ्रेंचाइजी मालिक तो आयोजन से जुड़ने वालों, खासकर खिलाड़ियों के रोजाना कोविड टेस्ट का सुझाव दे रहे हैं। लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि बीसीसीआई इस संबंध में क्या दिशा-निर्देश जारी करता है?
आईपीएल बीसीसीआई ही नहीं, दुनिया भर के क्रिकेटरों व पूर्व क्रिकेटरों के लिए क्या मायने रखता है, यह कोई छिपी बात नहीं है। यह अच्छी-खासी कमाई का साधन है। यही वजह है कि ज्यादातर क्रिकेटर ट्वंटी-20 विश्व कप की बजाय आईपीएल के आयोजन के पक्षधर थे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इसे मार्च में आयोजित होना था और चूंकि बीसीसीआई प्रायोजकों से करीब आधी रकम ले भी चुका है, इसलिए वह हर हाल में इस आयोजन के पक्ष में है। यदि यह आयोजन नहीं होता, तो उसे यह रकम लौटानी पड़ सकती थी। वैसे, फ्रेंचाइजी को मौजूदा माहौल में प्रायोजक तलाशने में दिक्कत हो सकती है, पर इंग्लैंड-वेस्ट इंडीज टेस्ट सीरीज को टीवी दर्शकों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया है, उससे लगता नहीं है कि आईपीएल देखने वालों में कोई कमी आएगी।
आईपीएल का आयोजन यदि सफलतापूर्वक हुआ, तो अन्य खेलों के लीग आयोजनों की भी मांग तेज होगी। क्रिकेटर ही नहीं, आज अन्य खेलों के खिलाड़ी भी बहुत उम्मीद लगाए बैठे हैं। खेल आयोजन बढ़े, तो महामारी के समय लोगों का मनोबल और उत्साह भी बढ़ेगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार

 

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना के समय भी अंतरिक्ष विज्ञान विकास का न रुकना न केवल सुखद, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। विशेष रूप से मंगल अभियान की दिशा में जो प्रगति हुई है, वह बहुत प्रेरित करती है। अव्वल तो 19 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का पहला मुस्लिम देश हो गया, जिसने मंगल की ओर अपना यान भेजा है, दूसरी ओर, 23 जुलाई को चीन ने भी उधर अपना यान रवाना किया है। अब एशिया में भारत सहित तीन देश हो गए, जो मंगल की खोज में आगे बढे़ हैं। 1960 के बाद से करीब 60 अभियान मंगल की ओर गए हैं, लेकिन उनमें से 26 को ही थोड़ी या ज्यादा कामयाबी मिली है। इसलिए मंगल पर किसी खोज के लिए चलाया जाने वाला कोई भी अभियान पूरी दुनिया के लिए ही बहुत महत्व रखता है।
वैसे चीन ने रूस के साथ मिलकर एक प्रयास 2011 में भी किया था, लेकिन वह यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया था। इसके बाद भारत ने 2014 में अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में यान स्थापित कर इतिहास रच दिया। ध्यान रहे, तब चीन ने भी भारत की तारीफ की थी। फिलहाल चीन के अभियान की सफलता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उसने न केवल मंगल की कक्षा में घूमने वाला यान ऑर्बिटर रवाना किया है, बल्कि साथ में लैंडर और रोवर भी भेजे हैं। यूएई और चीन, दोनों के ही यान आगामी फरवरी में मंगल की कक्षा में पहुंच जाएंगे। उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों को सफलता मिले। अभी तक दुनिया में अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन और भारत को ही मंगल अभियान में सफलता मिली है। इसमें भी सबसे खास भारत की सफलता है, पहली ही बार में कामयाब भारत का यान अभी भी मंगल की परिक्रमा कर रहा है। चीन ने इस मिशन को तियानवेन नाम दिया है, यह दो सदी पुरानी एक कविता के शीर्षक पर आधारित है, जिसका अर्थ है, जन्नत से सवाल। वाकई, जब हम अंतरिक्ष में किसी भी अभियान में जुटते हैं, तब हमारी जिज्ञासा दूसरी दुनिया या जन्नत की खोज से जुड़ जाती है। ऐसी खोज सकारात्मक होती है और हमारे दिलो-दिमाग को सपने और खुशी देती है, जिसकी जरूरत आज कोरोना काल में बहुत ज्यादा है।
अभी अमेरिका, यूरोप और भारत के करीब आठ अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर हैं या उसकी परिक्रमा कर रहे हैं, चीन और यूएई के यानों को अगर कामयाबी मिली, तो न केवल मुस्लिम देशों, बल्कि चीन को भी एक सकारात्मक दिशा मिलेगी। अमेरिका मंगल पर पहले भी रोवर स्थापित कर चुका है और जल्दी ही ज्यादा बड़ा रोवर भेजने वाला है। अपने अभियान के शुरू होने के बाद चीन ने जिस भावना का प्रदर्शन किया है, उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। चीन के एक वैज्ञानिक ने कहा है, ‘यह चीनी अभियान एक वैज्ञानिक पहल है, किसी के साथ प्रतिस्पद्र्धा के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सहयोग के लिए है’। चीन मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ के संकेतों की खोज करेगा, उसके रोवर में 13 वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं। चीन का यान उत्तरी गोलाद्र्ध में एक मैदान, यूटोपिया प्लैनिटिया में उतरने की कोशिश करेगा। वहां लैंडर की मदद से रोवर तैनात करेगा। मंगल पर दक्षिणी यूटोपिया प्लैनिटिया में कोई भी खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वैज्ञानिकों को लगता है, मंगल के इस हिस्से पर कभी महासागर था।

 

मेलबॉक्स /शौर्यपथ / कोरोना महामारी से मानव जीवन का हरेक पहलू प्रभावित हुआ है। ऐसे में, शिक्षा-व्यवस्था में परिवर्तन समय की मांग है। मौजूदा शिक्षा-सत्र पूरी तरह से कोरोना की भेंट चढ़ गया है और विकल्प के तौर पर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की गई है। हालांकि, हर जगह ऑनलाइन कक्षा संभव नहीं है। बेशक कॉलेज व विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को कुछ नियमित तरीके से, और कुछ विषयों में पत्राचार से पढ़ाई कराते रहे हैं, लेकिन अभी जिस माध्यम से पढ़ाई हो रही है, वह खुला विश्वविद्यालय की तरह ही है। ऐसे में, सरकार को अब यह निर्णय लेना चाहिए कि हर विश्वविद्यालय खुले विश्वविद्यालय की तरह ऑनलाइन नामांकन ले और विद्यार्थियों को पाठ्य-सामग्रियां डाक से भेजे, ताकि वे अपने-अपने घर पर ही पढ़ाई कर सकें। परीक्षा भी खुले विश्वविद्यालय के मानकों की तरह आयोजित हो। इस तरह की व्यवस्था होने से बच्चों के सत्र बरबाद नहीं होंगे।
मिथिलेश कुमार, भागलपुर

पोल खोलती बारिश
दिल्ली में बारिश अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई है और नाले उफनने लगे हैं। यह दयनीय स्थिति है, क्योंकि जब मूसलाधार बारिश होगी, तब हालात कैसे होंगे? दिक्कत यह है कि हर बरसात में लोगों को इस संकट से गुजरना पड़ता है, फिर भी हमारे नगर निगम सिर्फ निरीक्षण की खानापूर्ति कर शांत हो जाते हैं। नालों की सफाई रोजाना नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक बार तो हो ही सकती है। यदि ऐसी व्यवस्था बन जाए, तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
रितिक सविता, दिल्ली विश्वविद्यालय

अयोध्या का कायाकल्प
लंबे समय से लंबित श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा होने के बाद हर भारतवासी की निगाहें अयोध्या की तरफ थीं कि आखिर मंदिर कब बनेगा? अब इसका रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री मंदिर का भूमि पूजन करने वाले हैं। मंदिर बनने से सबसे ज्यादा फायदा अयोध्यावासियों को होगा, क्योंकि इससे पर्यटकों का आना बढ़ेगा, जिससे व्यापार के नए मार्ग खुलेंगे और यहां का चौतरफा विकास हो सकेगा। आखिर बरसों से उपेक्षित अयोध्या में रामराज्य पुन: स्थापित होगा और उम्मीद है कि आगामी वर्षों में अयोध्या का विकास उसे देश के बड़े दार्शनिक स्थलों में शुमार कर देगा।
शुभम पांडेय गगन
अयोध्या, फैजाबाद

चुनाव कराना बड़ी चुनौती
बिहार में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए इस राज्य में विधानसभा का चुनाव कराना खतरे को बढ़ावा देना है। इससे बिहार में संक्रमण की गति और बढ़ सकती है। सरकार को अभी लोगों की फिक्र करने की जरूरत है, न कि चुनाव की। चुनाव आयोग को करोड़ों बिहारवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए, क्योंकि जान है, तभी जहान है। यदि कोई भी कोरोना संक्रमित मतदाता वोट देने मतदान केंद्र पर पहुंच जाता है, तो वह दूसरे को भी संक्रमित करेगा। इसलिए इस साल चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए। ‘न्यू नॉर्मल’ में नए तरीके से चुनाव आयोग को सोचना चाहिए।
मो. अजहरुद्दीन
जनता बाजार, छपरा

महिलाओं का सम्मान
काफी लंबे समय से महिलाओं के स्थाई कमीशन की मांग सेना में चल रही थी, जिसे अब जाकर पूरा किया गया है। अब महिलाएं भी सेना में अहम भूमिका निभा सकेंगी। सवाल यह है कि इस फैसले को अमल में लाने में इतना वक्त क्यों लग गया? खैर, कहते हैं न कि देर आए, दुरुस्त आए। इस एक फैसले से बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति हीन भावना खत्म होगी। हमें इसका स्वागत करना चाहिए।
अमन कुमार

ओपिनियन / शौर्यपथ /खबर अमेरिका से आई है। मगर चिंता पूरी दुनिया की है। कोरोना का हाल सुधरते-सुधरते अचानक बिगड़ता नजर आया। अनिश्चितता बढ़ रही है कि यह बीमारी काबू में आती दिखे, तब भी चैन से नहीं बैठा जा सकता। इसी तरह, अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता मांगने वालों की गिनती भी पिछले हफ्ते अचानक तेजी से उछली है। जुलाई के पहले हफ्ते में करीब 3.20 करोड़ अमेरिकियों ने यह भत्ता लिया है। कोरोना की वजह से हरेक बेरोजगार के खाते में 600 डॉलर अलग से पहुंचते हैं। सरकार पर दबाव बन रहा है कि कोरोना थम नहीं रहा है और इस मदद की मीयाद भी बढ़ाई जाए। इधर, 18 जुलाई को जो हफ्ता खत्म हुआ, उसमें करीब 14 लाख नए लोगों ने बेरोजगारी भत्ते की अर्जी लगाई है। यह पिछले हफ्ते से करीब एक लाख नौ हजार ज्यादा है। ऐसी बढ़त पिछले चार महीने में पहली बार हुई है। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि रोजगार के मोर्चे पर अमेरिका में हालत खराब है।
इसके उलट भारतीय रोजगार बाजार में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, शहरी इलाकों में रोजगार का आंकड़ा अप्रैल के 26 प्रतिशत से बढ़ते-बढ़ते जुलाई में करीब 38 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। शहरी इलाकों में लोगों के काम पर लौटने की रफ्तार तेज है और इसमें ज्यादातर वे लोग हैं, जो मध्यमवर्गीय घरों में जरूरी काम करते हैं। जैसे बाई, रसोइए, ड्राइवर या सफाईकर्मी। इस तरह के लोग ही सबसे तेजी से काम पर लौटे हैं और इसका नतीजा है कि मध्यवर्ग के लिए अब लॉकडाउन शायद उतना कष्टकारी नहीं रह गया है।
हालांकि सीएमआईई के ही एक सर्वे में पता चला है कि लोगों के बजट टाइट हो रहे हैं। खासकर अप्रैल से जून के बीच बहुत से परिवारों की कमाई पर भारी असर पड़ा है। जहां पिछले साल इस दौरान 33 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि उनकी कमाई बढ़ गई है, वहीं इस साल ऐसा कहने वालों की गिनती छह प्रतिशत के आसपास है। हालांकि कई और आंकड़े हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि कामकाज वापस पटरी पर आ रहा है। दोपहिया बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बिक्री में तेज उछाल दिख रहा है। जून में हीरो मोटो ने साढ़े चार लाख गाड़ियां बेचीं, मई से चार गुना ज्यादा। हालांकि, पिछले साल के जून के मुकाबले यह 26 प्रतिशत कम है। कंपनी के चेयरमैन सुनील मुंजाल के अनुसार, सबसे अच्छी मांग गांव और कस्बों से आ रही है। इसकी वजह सरकार के आर्थिक पैकेज से निकली रकम का इन इलाकों तक पहुंचना है। सामान्य मॉनसून और रबी की बंपर पैदावार के बाद उन्हें लग रहा है कि अब अगर कोई नया झटका नहीं लगा, तो साल खत्म होते-होते बिक्री में इतनी तेजी आ चुकी होगी कि दो महीने की बंदी से हुआ नुकसान भी धुल जाएगा।
रोजमर्रा की चीजें बनाने वाली कंपनियों का हाल भी अलग नहीं है। जिस दौरान पूरा देश लॉकडाउन की सबसे गंभीर मार झेल रहा था, उसी समय यानी अप्रैल से जून के बीच ब्रिटैनिया का मुनाफा पिछले साल से दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यही हाल कुछ अन्य कंपनियों का है।
दूसरी तरफ, कोरोना के आंकड़े देखिए, जो डरावनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद शेयर बाजार को देखिए, तो लगता ही नहीं कि कहीं कोई मुसीबत है। भारी गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी फिर से नई ऊंचाई की ओर रेस लगा रहे हैं। छोटी और मंझोली कंपनियों में भी तेजी दिख रही है। बाजार में इस तेजी के कई कारण बताए जा रहे हैं। एक तो नए लोगों को बताया जा रहा है कि भारी गिरावट के बाद बाजार में तेजी आती है और ऐसी गिरावट ही पैसा बनाने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। इस चक्कर में बहुत से नए लोग शेयर बाजार में आ गए हैं। लेकिन 23 मार्च की तेज गिरावट के बाद उछाल की शुरुआत इन लोगों के भरोसे नहीं हुई थी। दरअसल, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में सरकारों ने बहुत बड़ी रकम लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए दी है। उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा उन देशों के म्यूचुअल फंड के रास्ते भारत पहुंचा है। यह रकम कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों में ही लगती है, लेकिन इससे आई तेजी से दूसरे निवेशक आकर्षित होते हैं।
एक समस्या यह है कि बैंकों में पैसा रखना करीब-करीब बेकार लगने लगा है। ऐसे में, अगर कोई शेयर बाजार का लालच दिखा दे, तो मन मचलना स्वाभाविक है। कुछ लोग हिम्मत कर रहे हैं और कूद रहे हैं। जनवरी से मई के बीच देश में करीब 29 लाख नए डीमैट अकाउंट खुले हैं और शेयर बाजार में कैश सेगमेंट में जो कारोबार हो रहा है, अप्रैल से जून के बीच उसका आधे से ज्यादा हिस्सा छोटे निवेशकों से ही आया है। पिछले साल से मुकाबला करें, तो इस दौरान रिटेल निवेशकों का कारोबार 78 प्रतिशत बढ़ा है और उन्होंने 33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन किया है।
बाजार में इस तेजी से सबको मजा आ रहा है, लेकिन यह खतरनाक स्थिति है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी शुक्रवार को जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि बाजार और बाजार के सूचकांक जिस तरह चल रहे हैं, उनका देश की आर्थिक स्थिति या जमीनी सच्चाई से कोई रिश्ता नहीं दिखता। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि बैंकों के डूबे कर्ज दोगुने हो सकते हैं और उस स्तर पर पहुंच जाएंगे, जहां पिछले 20 साल में कभी नहीं रहे। साफ है, जमीनी तकलीफ दूर किए बिना इस समस्या से पार नहीं पाया जा सकता। आर्थिक विशेषज्ञ शोभना सुब्रमण्यम कहती हैं कि सरकार को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च करना होगा। इसके लिए कम से कम चार-पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना होगा। सवाल है कि इस वक्त सरकार कर्ज लेगी, तो चुकाएगी कब और कैसे? क्या कमाई का कोई दूसरा रास्ता है? काम-धंधे बिगड़ते रहे, तो टैक्स की कमाई भी घटेगी। रास्ता एक ही है कि सरकार खर्च करे। इसके लिए पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का सुझाव है कि सरकार को सारी हिचक और रेटिंग वगैरह की चिंता छोड़ नए नोट छापने चाहिए और उसे प्रोजेक्ट्स में भी लगाने चाहिए और जनता की जेब में भी पैसा डालना चाहिए। इससे इकोनॉमी में वह रफ्तार आ सकेगी, जो इस आपदा को अवसर में बदल पाएगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) आलोक जोशी, वरिष्ठ पत्रकार

 

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों लॉक डाउन है और लॉक डाउन का सबसे ज्यादा फायदा अमृत मिशन के कार्य करने वाले ठेकेदार उठा रहे है , अमृत मिशन के कार्यो में पाइप लाइन बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य किया जाना है जिसमे तय मानक मात्रा में मटेरियल मिला कर फिलिंग करना है किन्तु इस कार्य में स्तर हीन मसाला मिश्रण का उपयोग खुल कर किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन है .
इन जिम्मेदार अधिकारियों में निगम क्षेत्र में नाली में कचरा फेकने वालो से कचरा उठवा कर अपनी प्रशासनिक ताकत का अहसास कराने वाले निगम आयुक्त इन्द्रजीत बर्मन भी शामिल . आयुक्त बर्मन को शौर्यपथ समाचार के माध्यम से पूर्व में भी सुचना दी गयी किन्तु आयुक्त द्वारा मामले को संज्ञान में ना लेना और जिम्मेदार अधिकारी ईई बाबर व सब इंजिनियर भीम राव को कार्य में सतत निगरानी का निर्देश ना देना ही इस ओर इशारा करता है कि आयुक्त सिर्फ शहर की आम जनता से जुर्माना वसूल कर सकते है अधिकारियों की लापरवाही पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं कर सकते .


पूर्व में भी ऐसे कई मामले आये जिसमे आयुक्त द्वारा लापरवाह अधिकारियो पर कार्यवाही का आश्वासन ही दिया जाता रहा कार्यवाही नहीं हुई . भ्रष्टाचार की जड़ निगम के लापरवाह इंजिनियर ही होते है . इंजीनियरों की लापरवाही के कारण ठेकेदार मिलावटी कार्य कर घटिया निर्माण करते हुए शासन को चुना लगा रहे है और जिम्मेदार अधिकारी मौन होकर ऐसे ठेकेदार का साथ दे रहे है .
क्या आयुक्त बर्मन अमृत मिशन के कार्यो में हो रहे घटिया निर्माण पर निष्पक्ष जाँच करेंगे या फिर जिस तरह भीम राव ( सब इंजिनियर ) के पूर्व में किये अनैतिक कार्य पर पर्दा डाल कर बचाते रहे है इस बार भी ऐसा ही कार्य कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देनेगे और फिर शहर के एक आम जनता की तलाश में निकल जायेंगे जो नाली में कचरा डाल कर निगम के नियमो की अवहेलना कर रहा हो और उससे जुर्माना वसूल कर एक बार फिर वाह वाही बटोरेंगे ?

बढ़ते कोरोना के मरीजों को देखते हुए मेयर देवेंद्र यादव ने की पहल
सीएम हॉस्पिटल में मरीजों का हो सकेगा बेहतर इलाज

दुर्ग / शौर्यपथ / भिलाई नगर विधायक व मेयर देवेंद्र यादव की पहल से सीएम हॉस्पिटल कचांदुर को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। मेयर यादव की पहल से 800 बिस्तर वाले इस अस्पताल को क्वारंटाइन सेंटर बनाने से क्षेत्र की जनता को काफी लाभ होगा। जनता की सुविधाओं को देखते हुए मेयर यादव ने पहल की है और शहर में अन्य जगह क्वारंटाइन सेंटर बनाने के बजाए सीएम हॉस्पिटल कचांदुर में ही 800 बिस्तर वाला क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है।
महापौर की पहल के बाद आज निगम के अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण करने भी गए। जहां अस्पताल प्रबंधन ने भी अपनी ओर से इस बेहतर पहल के लिए हामी भर दी है और जो भी भिलाई क्षेत्र में काेरोना मरीज मिलेंगे। उन्हें इसी अस्पताल में क्वारंटाइन किया जाएगा। मरीजों के लिए बेहतर सुविधा हैं। इससे शहर में लगातार मिल रहे कोरोना मरीजों को समय पर जल्द से जल्द बेहतर इलाज मिल पाएगा। मरीजों को रायपुर के अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। साथ ही मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख रेख में रहेंगे। इससे मरीजों जल्दी ठीक हो जाएंगे।
गौरतलब है कि शहर में लगातार कोरोना के मरीज मिल रहे है। स्वास्थ्य विभाग ने काेरोना जांचने सैम्पल बढ़ा दिया है। विभाग जितने ज्यादा लोगों की जांच कर रहा है। उतने ही ज्यादा मरीज शहर में मिल रहे हैं। ऐेसे में स्वास्थ्य विभाग के पास भी इन मरीजों को क्वारंटाइन रखने के लिए पर्याप्त सुविधा युक्त जगह की कमी थी। खुर्सीपार सहित शहर के कुछ स्थानों पर विभाग के मार्गदर्शन में क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया था। इस वजह से क्वारंटाइन सेंटर के आसपास के लोगों में कोरोेना का भय व्याप्त था और इस वजह से लोग क्वारंटाइन सेंटरों का विरोध कर रहे थे। ऐसे में जनता की हित और सुरक्षा को देखते हुए मेयर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने पहल की और शहर से बाहर सीएम हास्पिटल को क्वारंटाइन सेंटर बनाने की पहल की है।

नई दिल्ली / अमरीकी राजनयिक चीन के दक्षिणी-पश्चिमी शहर चंगडू स्थित अमरीकी महावाणिज्य दूतावास को छोड़कर निकल गए हैं. दरअसल चीन ने इस मिशन को बंद करने का फ़ैसला लिया था और यहां के अमरीकी राजनयिकों को सोमवार सुबह तक जाने की डेडलाइन दी थी. डेडलाइन ख़त्म होने के कुछ घंटों पहले कर्मचारियों को बक्से की फाइलें और कूड़े के बैग ले जाते हुए देखा गया.

इस बीच स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा हो गई. कई लोग चीन के झंडे लहरा रहे थे और सेल्फी ले रहे थे. चीन ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमरीका का ये महावाणिज्य दूतावास बंद किया है, क्योंकि अमरीका ने पिछले हफ़्ते टेक्सस के ह्यूस्टन स्थित उसके दूतावास को बंद कर दिया था. ह्यूस्टन मिशन को छोड़ने की 72 घंटे की डेडलाइन शुक्रवार को ख़त्म हो गई थी. जिसके बाद पत्रकारों ने अमरीकी अधिकारी लग रहे कई आदमियों को चीनी दूतावास में के दरवाज़े जबरन खुलवाते हुए देखा.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमरीका ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि चीन "बौद्धिक संपदा" चुरा रहा था.

वहीं चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता वांग वेनबिन ने जवाब देते हुए कहा कि ये अमरीकी कदम "चीन-विरोधी झूठ के घालमेल" पर आधारित है. इन दो परमाणु शक्तियों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का प्रशासन व्यापार और कोरोना वायरस महामारी के मुद्दे पर चीन से बार-बार उलझत रहा है.अमरीका ने हॉन्ग कॉन्ग में चीनी की ओर से विवादित नए सुरक्षा क़ानून लागू करने का विरोध भी किया है.
चंगडू में नया क्या हुआ है?


चीन का सरकारी मीडिया अमरीकी महावाणिज्य दूतावास से बाहर निकलती बड़ी गाड़ियों की तस्वीरें दिखा रहा है और इन तस्वीरों में ये भी दिख रहा है कि कर्मचारी इमारत से राजनयिक प्रतीक चिन्ह हटा रहे हैं. बाहर दर्जनों चीनी पुलिसकर्मी हैं, जो वहां खड़े लोगों को हटने की अपील कर रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह के उकसावे की स्थिति ना बने. हालांकि समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के मुताबिक़, रविवार को जब काली फ़िल्म चढ़ी खिड़कियों वाली बस इमारत से निकली तो हूटिंग की आवाज़ें सुनी गईं. पिछली बार जब चीनी राजनयिक ह्यूस्टन स्थित अपने मिशन से निकले थे तो वहां प्रदर्शनकारियों ने उन्हें चिढ़ाया था. चंगडू का अमरीकी महावाणिज्य दूतावास 1985 में बनाया गया था जिसमें 200 से अधिक लोग काम करते थे और ये रणनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह तिब्बत के क़रीब था.
अपने उद्योगों और बढ़ते सर्विस सेक्टर की वजह से चंगडू को अमरीका कृषि उत्पादों, कारों और मशिनरी के निर्यात के अवसर देने वाली जगह के रूप में देखता था. इस महावाणिज्य दूतावास के बंद हो जाने के बाद चीन में अमरीका के चार दूतावास बचेंगे और राजधानी बिजिंग में उसकी एक एम्बेसी है. वहीं हॉन्ग कॉन्ग में भी अमरीका का एक महावाणिज्य दूतावास है. चीन ने पिछले हफ़्ते ह्यूस्टन स्थित अपना दूतावास खो दिया था. हालांकि अभी भी अमरीका में उसके चार अन्य महावाणिज्य दूतावास हैं और राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक एम्बेसी है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत ने 275 चीनी ऐप की लिस्ट बनाई है, जिनकी जांच की जाएगी कि कहीं वो राष्ट्रीय सुरक्षा या लोगों की निजता का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक़, संभावना है कि और भी कई चीनी इंटरनेट कंपनियां देश में बैन हो सकती हैं.
एशिया के इन दो बड़े देशों में जारी सीमा विवाद के बीच पिछले महीने ही 59 चीनी ऐप पर हाई प्राफाइल बैन लगाया गया था. जिसमें टिकटॉक जैसे ऐप शामिल थे.
इकॉनोमिक टाइम्स अख़बार का कहना है कि उसने नई लिस्ट देखी है, जिसमें लोकप्रिय गेमिंग ऐप - पबजी, शाओमी का ज़िली, अलीबाबा का अलीएक्सप्रेस के अलावा रेसो और टिकटॉक की मालिकाना कंपनी बाइटडांस का एक और ऐप - यूलाइक शामिल है.
मामले के जानकार एक शख़्स ने बताया, "सरकार इन सभी ऐप को बैन कर सकती है. या हो सकता है कुछ को करे या किसी को ना करे." हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. लेकन आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि समीक्षा जारी है जिसका मक़सद और चीनी ऐप्स की पहचान करना और उनकी फंडिग का पता लगना है.

एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से कुछ ऐप्स की सुरक्षा कारणों को लेकर शिकायत आई है, वहीं कुछ के बारे में डेटा शेयरिंग करने और निजता की चिंता को लेकर आगाह किया गया है.

शौर्यपथ । सेहत । शिक्षा । ज्यादातर लोगों को क्या लगता है कि सेक्स के बाद सभी कपल्स फिल्मों की तरह एक दूसरे को बांहों में भर कर सो जाते हैं या फिर दोनों एक दूसरे से प्यार भरी बातें करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि फिल्मों में जैसा दिखाते हैं वैसा आपके साथ रियल में भी हो ऐसा मुमकिन नहीं है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आपका ये भ्रम दूर हो जाएगा। जी हां कुछ कपल्स ने सेक्स के बाद एक दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार किया जो हैरान करने लायक था। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार सेक्स किया तो मर्द पार्टनर सेक्स के बाद बिल्कुल चुप हो गया। घर जाकर बाद में उसने मैसेज करके पूछा कि बैड पर मैं कितना सक्सेस हुआ। मर्द पार्टनर को ये लग रहा था कि कहीं अगर महिला को मजा नहीं आया तो शायद वो उससे इस बात के लिए रिश्ता भी तोड़ सकती है। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने सेक्स किया तो महिला पार्टनर सेक्स के तुरंत बाद बहुत जोर-जोर से रोने लगी। जब वो ज्यादा देर तक रोने लगी तो मर्द पार्टनर ने उससे पूछा कि तुम क्यों रो रही हो तो महिला पार्टनर ने बताया कि कुछ दिनों पहले तुम्हारी मां से मेरी लड़ाई हो गई थी। एक लड़के ने बताया कि एक बार उसने एक लड़की के साथ सेक्स किया तो उससे पहले हमने काफी देर बात की और एक दूसरे को अपने बारे में बताया। जब हमने सेक्स कर लिया तो लड़की ने बोला कि मेरा असली नाम कुछ और ही है। एक लड़की ने बताया कि एक बार वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स कर रही थी तो उसे याद आया कि थोड़ी देर बार उसकी रूप मेट आने वाली है। तो लड़की ने सेक्स के तुरंत बाद ही लड़के से कहा कि तुम यहां से निकल जाओ अभी के अभी। फिर लड़की ने बाद में फोन पर लड़के को सारी बात बताई। नोट: 18+ स्टोरी का उद्देश्य अश्लीलता परोसना नहीं, बल्कि सेक्स के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि आपके जीवन में खुशहाली आए।

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