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ओपिनियन / शौर्यपथ / इस हफ्ते की शुरुआत में, जब भारत सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर टिक टॉक सहित 59 चीनी एप पर पाबंदी लगाई, तब देश भर में हर्ष और विलाप, दोनों तरह के स्वर सुनाई दिए। कुछ के लिए सरकार की यह पहल चीन के साथ हुए सीमा-संघर्ष के खिलाफ एक वाजिब प्रतिक्रिया थी, तो अन्य लोगों ने पेटीएम, जोमैटो जैसी भारतीय कंपनियों में शामिल चीन के शेयरधारकों के खिलाफ भी दंडात्मक प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। मगर एक सच यह भी है कि सरकार के इस फैसले से भारतीय डिजिटल उद्यमियों की पूरी पीढ़ी राहत महसूस कर रही है, बावजूद इसके कि उपरोक्त किसी भी तर्क से वह बेशक इत्तिफाक न रखती हो।
देशों का द्विपक्षीय रिश्ता एक जटिल मसला है, विशेष रूप से कटुता के लंबे इतिहास वाले पड़ोसियों के बीच। इसमें आपसी व्यापार, विदेशी संबंध और अंतरराष्ट्रीय संचार को प्रभावित करने के लिए मुद्दों का मूल-बिंदु से विस्तार किया जा सकता है। भारत में चीनी एप पर प्रतिबंध ठीक ऐसा ही मामला है। यह सामने वाले को महज तकलीफ पहुंचाने वाला कदम है, जो भविष्य की वार्ताओं में मोलभाव का हमारा हथियार बन सकता है। इससे दोनों देशों के बीच लद्दाख में जारी तनातनी का कतई हल नहीं निकलेगा। इसे चीन के पूर्ण बहिष्कार का संकेत समझने की गलती भी नहीं की जानी चाहिए। फिर भी, इस प्रतिबंध का भारत के घरेलू डिजिटल सेवा उद्योग के लिए गहरा निहितार्थ है।
दरअसल, पिछले कुछ दशकों से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की तरफ ही हमारी आर्थिक नीतियों का जोर रहा है। भारत की विशाल, नौजवान और आकांक्षी आबादी स्वाभाविक तौर पर सभी प्रकार की विदेशी वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक आकर्षक बाजार है। अपने दरवाजे विदेशी कारोबारियों के लिए कुछ-कुछ खोलकर सरकारों ने वर्षों से इस अवसर को भुनाया भी है। हालांकि, इस रुख की वजह से भारतीय कंपनियों को भी विदेशी प्रतियोगियों के खिलाफ मैदान में उतरने में मदद मिली है। मगर, भारत कोई अकेला देश नहीं है, जो अपने बाजार पर नियंत्रण रखता है। औद्योगिकीकरण की अपनी यात्रा में यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया व अधिकांश विकसित देशों ने भी ऐसा किया है। बाजार-पहुंच और विदेशी स्वामित्व की बाधाएं दुनिया भर में हैं और तमाम तरह के चलन, व देशों के बीच व्यापार को व्यवहार-कुशल बनाने के एकमात्र उद्देश्य के साथ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) भी अस्तित्व में है।
हालांकि, भारत में दूरसंचार लाइसेंस, फ्रीक्वेंसी के आवंटन और नीलामी के इर्द-गिर्द ही बहसें सिमटती गई हैं, आधुनिक दूरसंचार की सहायता से होने वाले कारोबार की तरफ बहुत कम ध्यान दिया गया। ऐसा इसलिए है, क्योंकि नई पीढ़ी की डिजिटल सेवाओं के कामकाज के बारे में बहुत से लोगों को पता नहीं है। भारत के उपभोक्ता बाजार में विदेशी कंपनियों का कितना दखल हो, यह व्यापार और राजनीति में तीखी बहस का विषय रहा है। नागरिक उड्डयन, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, बीमा, बैंकिंग, खुदरा, रेलवे, यहां तक कि आउटसोर्सिंग भी ऐसे उद्योग हैं, जिनके लिए विदेशी निवेश और बाजार में पहुंच को मंजूरी बारीक जांच-पड़ताल के बाद ही मिली है। मगर अब तक इस पर शायद ही गंभीर चर्चा हुई है कि एक अरब से अधिक डिजिटल उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने के लिए विदेशी कंपनियों को कितना अधिकार देना चाहिए। स्थिति को और बेहतर समझने के लिए विमानन उद्योग से इसकी तुलना कर सकते हैं।
साल 2014 में हवाई यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2019 में दोगुनी हो गई। इस क्षेत्र में वर्तमान और पिछली सरकारों ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़ाने की तरफ पर्याप्त ध्यान दिया और हर वर्ष यहां विदेशी कंपनियों को अनुमति दी गई। मगर भारतीय डिजिटल दुनिया को कीमती नहीं माना गया, जबकि अपने यहां टिक टॉक के अनुमानित 12 करोड़ उपभोक्ता हैं और वाट्सएप के 40 करोड़। यह हर साल हवाई यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या से कहीं अधिक है।
अब इसकी तुलना जरा चीन से करें। चीन का चर्चित ‘ग्रेट फायरवाल’ नियमों और तकनीक का ऐसा मजबूत संयोजन है कि चीन में सूचना, सामग्री और डाटा का स्वतंत्र आवागमन संभव ही नहीं है। इसी वजह से चिनगारी (टिक टॉक का भारतीय संस्करण) जैसे एप के लिए अपना मालिकाना हक चीनी हाथों में सौंपे बिना चीन की आभासी दुनिया में काम करना असंभव होगा। वाट्सएप पर तो वर्षों से वहां पाबंदी लगी हुई है। वहां स्थानीय एप वीचैट के एक अरब से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसमें वाट्सएप को आसानी से टक्कर दे सकने की संभावना है। यही नहीं, चीन फेसबुक, यू-ट्यूब, गूगल, इंस्टाग्राम, स्पॉटिफाई, विकिपीडिया, गूगल मैप्स जैसी अन्य सेवाओं का भी उपयोग नहीं करता, जबकि इन पर हमारी रोजाना की निर्भरता है। इन जैसी सेवाओं के लिए वहां स्थानीय एप हैं, जिनमें से कई तो अपेक्षाकृत बडे़ उपभोक्ता-आधार वाले और बेहतर हैं। यहां तक कि कनाडा, फ्रांस और यूरोपीय संघ के देशों में भी कुछ सख्त नियम-कानून हैं, जिससे उन्होंने बड़ी डिजिटल कंपनियों को भी खास रियायत देने के लिए मजबूर किया है। लिहाजा, भारत सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध को दुनिया व्यापक तौर पर समझेगी।
आधुनिक दुनिया में क्लाउड पर सूचनाओं को जमा करके रखने का चलन बढ़ा है, इसलिए भौगोलिक सीमाएं अब काफी हद तक बेमानी हो गई हैं। बेहतर व विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आने वाली बड़ी कंपनियों को मुफ्त और पूरे भूगोल तक पहुंच से पर्याप्त लाभ मिलती रही है, जबकि छोटी कंपनियों के लिए मुकाबला समान नहीं रह पाता है। स्थानीय कंपनियों का समर्थन करना देशों के लिए सामान्य बात है। बड़ी डिजिटल कंपनियों को पता है कि इसी कारण स्थानीय निवेश के नियम जटिल हो सकते हैं। भारतीय स्टार्टअप्स में भी तभी तक चीनी निवेश की अनुमति होनी चाहिए, जब तक कि उस पर नियमबद्ध प्रभावी नियंत्रण बना रहे। मुफ्त बाजार का हिमायती होने के नाते मेरा यह भी मानना है कि इस तरह के नियम लंबे समय में प्रभावहीन हो जाएंगे। लिहाजा, हालिया प्रतिबंध भारतीय उद्यमियों के लिए एक अच्छा मौका है कि वे बाजार में बन आए खालीपन को तेजी से भरें। उन्हें जल्द ही यह करना होगा, क्योंकि वक्त बीत रहा है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)ज्योतिर्मय साहा, संस्थापक सीईओ, ऑगस्ट मीडिया
शौर्यपथ लेख / शरद पंसारी / पिछले दिनों सीमा पर 20 जवानो की शहादत के बाद भारतीयों का खुल खौल उठा हर तरफ से बदला लेने की आवाज़ उठने लगी . पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामो पर कई ज्ञानियों ने तथ्य पेश किये कि युद्ध हो सकता है असला बारूद की जरुरत पड़ेगी , कई महाज्ञानियो ने तर्क दिया कि पहले के पाप है अब धो रहे है , कई महा पंडितो ने तो भारत के कुछ राजनितिक पार्टी के नेताओ को दलाल भी बता दिया . ऐसा माहौल बन गया कि कोरोना से बाद में निपटेंगे पहले चीन से निपट ले चीन को मजा चखाएंगे . कुछ अत्यधिक प्रेमी देश भक्तो ने तो चाइना कम्पनी के साइन बोर्ड भी तोड़ दिए ये अलग बात है कि जेब में रखे चाइना कम्पनी के मोबाइल में मोबाइल गार्ड लगा लिए ताकि चाइना कम्पनी के मोबाइल की लाइफ दुगनी हो जाए और लगाए भी क्यों नहीं देशभक्ति एक तरफ खुद की संपत्ति एक तरफ . क्योकि ऐसे देशभक्तों की देशभक्ति चाइना सामान के ईस्तमाल करने वाले दुसरो पर पाबंदी लगाने की है नुक्सान करने की है . खुद ईस्तमाल करे तो उनका दुधभात है ....
ये सत्य है कि भारत एक बड़ा बाज़ार है किन्तु साथ ये भी सत्य है कि अधुरा बहिष्कार पतन का कारण भी बन सकता है . चाइना सामन का बहिष्कार करने वाले सोशल मिडिया पर एक्टिव है और पुरे देशभक्ति के साथ चाइना मोबाइल के बहिष्कार की बात चाइना मोबाइल से ही फारवर्ड कर रहे है देश में लगभग ६०-७० प्रतिशत स्मार्ट फोन चाइना के है और रोज बिक्री हो रहे है . पर पता नहीं ये देशभक्त चाइना मोबाइल की सार्वजनिक होली क्यों नहीं जला रहे है क्या सिर्फ दिखावा कर आम जनता को गुमराह करने की सोंचे है .
ऐसे महाज्ञानी लोग कहा थे जब सरहद पर २० जवान शहीद हुए २०१४ के पहले ये लोग १ के बदले १० सर लाने की बात करते थे अब क्यों मौन है . महंगाई पर सड़क पर नाचते थे और चिल्लाते थे अब क्यों मौन है . स्थिति अलग अलग समय में अलग कारणों के कारण जानी जाती है . ये हकीकत है कि वर्तमान समय में स्थिति बेहद विकत है ऐसे समय में आम जनता पेट की चिंता करे कि देशभक्ति कि परिवार की चिंता करे कि देश कि . क्या कोई ऐसा बाप होगा जो सामने परिवार मुसीबत में है और प्रदर्शन करने वो चौक पर है .ऐसा करना किसी भी परिवार के मुखिया के लिए असंभव है और यही जीवन है . इंसान पहले , परिवार फिर देश की सोंचता है . एक फौजी भी देश की सेवा करता है तो परिवार की सुरक्षा के लिए ही क्या कोई बड़े से बड़ा अधिकारी सुनने में आया है कि देश सेवा बिना मेहनताना के सेलेरी के कर रहा हो क्या कोई ऐसा जनप्रतिनिधि नजर आया जो सिर्फ सेवा कर रहा हो और सरकारी सुविधा का त्याग किया हो ऐसा कोई नहीं मिलता जो मिलते है वो इतिहास में दर्ज हो जाते है . ऐसा नहीं है कि देश में पुरानी सरकारों ने सीमा की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया ऐसा नहीं है कि पूर्व की सरकारों को देश की चिंता नहीं थी .
सोशल मिडिया में खूब देशभक्त मिलेंगे जो पुरानी सरकारों के काम काज का उल्लेख घोटालो से करते नजर आ जाते है लाखो करोडो के घोटालो को पेश करते है अगर ये देशभक्त सही है तो वर्तमान सरकार ६ साल में ऐसे लोगो को अभी तक जेल में क्यों नहीं डाल पा रही है क्यों सोशल मिडिया के देशभक्तों के पोस्ट को संज्ञान में नहीं ले रही है . कुछ मामलो को छोड़ कर सारी बाते सिर्फ हवा हवाई है आरोप लगाना बहुत आसान है तथ्य भी पेश करते है फलां नेता जमानत पर है , फला नेता पर केस दर्ज है . क्या वो विश्वास से बोल सकते है कि fir दर्ज करने के लिए प्रमाण की जरुरत होती है शासन की शक्ति की नहीं सभी जानते है कि शासन की शक्ति के आगे fir दर्ज करना कोई बड़ी बात नहीं थी . अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ में ३ दिनों तक सरकारी एजेंसी राजधानी में डेरा डाले रही क्या हुआ एक fir तक नहीं हुई मामले का अभी तक कुछ पता नहीं चला जबकि सोशल मीडिया में करोडो रूपये जब्ती के पोस्ट फोटो सहित आ गए थे कहा है अब वो ...
साहब शहीदों की शहादत का बदला कोई एप्प नहीं , कोई सामान नहीं कोई बहिष्कार नहीं . शहीदों का बदला एक के बदले दस सर है जिसका आम जनता को इंतज़ार है .....
शौर्यपथ लेख / डॉ. सिद्धार्थ शर्मा की कलम से ../ सनातन धर्म या वैदिक धर्म का आधार ही ये छोटा सा निशान ? है, जिसने महाकाव्यों की रचना करवा दी। जब भगवान कृष्ण से अर्जुन ने सवाल पूछा तो विश्व को गीता मिली। जब माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा तो शिवपुराण का प्रादुर्भाव हुआ। एक अंधविश्वास को विश्वास से अलग ये सवाल ही तो करता है। सिर्फ ये सवाल ही तो है जो न्यूटन के सर पर सेब ने पूछा था। इसी सवाल के जवाब ने तो हमें गति के सिद्धांत तक पहुचा दिया। गुरुत्वाकर्षण की खोज हुई। हम उनमें से तो नही जिनपर सवाल उठाया जाए तो तलवारें निकल आती है? भारत का लोकतंत्र चाइना की डेमोक्रेसी से अलग कैसे है? इस सवाल पूछने के अधिकार पर हम आज लोकतांत्रिक हैं।
पर आज कुछ धर्म के ठेकेदार हमसे हमारा लोकतांत्रिक अधिकार ही छीन लेना चाहते हैं। रियलिटी शो में अपनी अंधी माँ और विधवा बहन पर रोता प्रतिभागी संगीत को पीछे छोड़ते हुए अपनी दुखद स्थिति पर संगीत का सिरमौर बन जाता है। जनता भावुक है और कमजोर का साथ देने एकजुटता भी दिखती है पर किस कीमत पर? आज समय अलग है। कभी कहा जाता था जात न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान। पर अब के साधु ज्ञान पूछने पर जात बताने लगे हैं। जब ईश्वर सवालों से परे नही तो व्यक्ति कैसे? पतंजलि के दावे पर सवाल उठना पतंजलि पर उंगली उठाना और पतंजलि पर उंगली उठाना आयुर्वेद पर उंगली उठाना? क्या ये सवाल पूछने के उस मौलिक अधिकार का हनन नही? बाबा ने सवाल पूछने वाले बुद्धिजीवियों को आयुर्वेद,भगवा,सनातन का विरोधी बता दिया साथ ही अपनी जाति का भी। बाबाजी आयुर्वेद आपके पहले भी था और आपके बाद भी होगा। हम सब आयुर्वेद के लाभार्थी हैं इसके ठेकेदार नही। आज भी हाथ कट जाए तो हमारी माताजी हल्दी ढूंढने लगती है। चाहे आपकी महत्वकांशा हो पर राजनीति को आयुर्वेद से दूर रखिये।
बाबा रामदेव का इंटरव्यू विरोधियों को घेरता हुआ जाती,आयुर्वेद, सनातन के आसपास घूमता रहा पर मजे की बात थी कि उन्होंने एक बार भी कोरोनिल के कोरोना की दवा होने का दावा इस घंटे भर चले इंटरव्यू में नही किया। साथ ही शब्दों की जादूगरी दिखाते हुए आयुष मंत्रालय की तारीफ के कसीदे पढ़े और कोरोना के इलाज की ओर बढ़ता कदम बताया। ध्यान दीजिए कदम। शुरुवात। हालांकि 23 तारीख को ये कदम चांद की धरती पर था।।
बालकृष्ण जी के इंटरव्यू ने साफ किया कि उन्होंने कोरोना इलाज का न कभी दावा किया न प्रचार, हालांकि दिव्य कोरोना किट की क्लोजप फ़ोटो और बाबाजी के 100% सफलता के दावे को दरकिनार करते हुए उन्होंने सिर्फ ट्रायल में कोरोना रोगियों के ठीक होने की बात को माना पर कोरोनिल को इसका कारण बताने से इनकार कर दिया। अब इस फजीहत के बाद आखरी हथियार बचा था जो बाबाजी ने आज निकाल लिया। आयुर्वेद का नाम और सनातन की साख।।
बाबाजी ने जिस युग और आनंद हॉस्पिटल में ट्रायल का दावा किया उसका सच भी सामने आ गया कि 2 कोरोना मरीजों के पाये जाने के बाद 65 मरीजों को quaranteen किया गया उनमें से कोई भी कोरोना पॉजिटिव कभी था ही नही। आयुष मंत्रालय ने भी बताया कि सिर्फ असिम्प्टोमैटिक मरीजों पर ट्रायल हुआ था जो वैसे भी बिना दवा 3 दिन में ठीक हो रहे थे। आयुष मंत्रालय से सर्दी का लायसेंस लेकर ये दवा कोरोना की कब और कैसे बनी इसपर विश्व आश्चर्यचकित है और अब तो बाबा भी।
रातों रात गिरता शेयर मार्केट के बीच supporters ने सोशल मीडिया ने कभी नकली लायसेंस दिखाया कभी फर्जी Dr मुजाहिद हुसैन को बाहर का रास्ता दिखाया। लेकिन सच छुपता नही। दर्ज होते fir और प्रदेशों में लगते बैन ने सच को फिर सबके सामने ला दिया।
सच ही तो है कि
#बिना विचारै जो करे सो पाछे पछताए, काम बिगड़ौ आपनो जग मा होत हँसाये
अब तक 15 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक कोरबा लौटे, चार हजार 829 अभी भी प्रवासी क्वारेंटाइन में
सेंटरों में आवास एवं भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं, स्वास्थ्य की भी नियमित जांच , साढ़े आठ हजार से अधिक प्रवासियों की हुई कोरोना जांच ,लगभग आठ हजार दो सौ की रिपोेर्ट निगेटिव, 282 संक्रमित मिले
कोरबा / शौर्यपथ / कोरोना संकट के कारण हुए लाॅक डाउन से कामकाज की तलाश में कोरबा जिले से देश के विभिन्न हिस्सों में गये लगभग 15 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक वापस लौट आये हैं। जिले में लौटे प्रवासी श्रमिकों से कोरोना संक्रमण का जिले में फैलाव रोकने के लिए सभी श्रमिकों को 14 दिनों के लिए 260 क्वारेंटाइन सेंटर्स में अवलोकन में रखा गया हैं। इन क्वारेंटाइन सेंटरों से अब तक दस हजार 686 प्रवासी श्रमिक क्वारेंटाइन अवधि पूरी होने के बाद अपने घर पहुंच गये है। जिले के क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी चार हजार 829 लोग रह रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से वापस आए इन सभी प्रवासियों को कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए उनके परिजनों और स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों में कोरोना संक्रमण को रोकने और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए 14 दिनों तक क्वारेंटाइन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में 211 क्वारेंटाइन सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये गये हैं। इन सभी क्वारेंटाइन सेंटर्स का संचालन एवं नियंत्रण संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इनके संचालन में ग्राम पंचायतें, जनपद पंचायतें और जिला पंचायतें सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार इन क्वारेंटाइन सेंटरों में आकर रूके प्रवासी श्रमिकों में से अब तक आठ हजार 627 श्रमिकों की कोरोना जांच कराई जा चुकी है, जिनमें से आठ हजार 176 श्रमिकों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। दो सोै ब्यासी प्रवासियों को जांच में कोरोना संक्रमित पाया गया है। जिन्हे ईलाज के लिए कोरबा, रायपुर, बिलासपुर के कोविड अस्पतालों और एम्स रायपुर भेजा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों को आवास और भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। स्थायी-अस्थायी शौचालयों, पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानगृहों, स्वच्छ पेयजल, लाइट एवं पंखों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कई सेंटर्स में प्रवासी श्रमिकों के लिए मनोरंजन के साधनों की भी व्यवस्था की गई है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अस्वस्थ लोगों को ईलाज और दवाईयां मुहैया कराई जा रही है। संक्रमण की संभावना और लक्षण वाले व्यक्तियों के तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। वृद्ध, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज, ब्लड पे्रशर जैसी बिमारियों से पहले से ही ग्रसित व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कोरबा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक 77 क्वारेंटाइन सेंटर पाली विकासखंड में बनाये गये हैं। करतला विकासखंड में 40, कटघोरा विकासखंड में 36, कोरबा विकासखंड में 34 और पोंड़ीउपरोड़ा विकासखंड में 24 क्वारेंटाइन सेंटर हैं। इन सभी क्वारेंटाइन सेंटरों में अब तक लगभग 12 हजार प्रवासी श्रमिकों को ठहराया जा चुका है। इनमें से सात हजार 790 श्रमिक क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर जा चुके हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के क्वारेंटाइन सेंटरों में चार हजार 161 श्रमिक रूके हैं।
कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल गांवों में क्वारेंटाइन सेंटर्स के सुचारू संचालन के लिए लगातार व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं। क्वारेंटाइन सेंटरों के लगातार निरीक्षण के लिए जोनल अधिकारियों सहित सभी एसडीएम, तहसीलदार और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर के निर्देष पर सेंटर्स की कमियों-खामियों को तत्परता से दूर किया गया है। उन्होंने क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों की सेहत की लगातार निगरानी और संक्रमण के लक्षण वाले लोगों के तत्काल सैंपल जांच के निर्देष स्वास्थ्य विभाग को दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 211 क्वारेंटाइन सेंटरों में रूके लगभग 12 हजार प्रवासी श्रमिकों में से कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार छह हजार 247 का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसमें से छह हजार की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 189 प्रवासी मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में कोरोना संक्रमित मिले हैं। जिनका ईलाज कोविड अस्पतालों में कराया गया है और इनमें से भी कई स्वस्थ्य होकर वापस लौट आये हैं। क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर वापस लौट चुके प्रवासी श्रमिकों के लिए जिला स्तर पर मनरेगा के तहत जष्ब-कार्ड बनाकर रोजगार दिया जा रहा है। अन्य योजनाओं के माध्यम से भी उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। मजदूरों की स्किल-मैपिंग कर जिले के सार्वजनिक उपक्रमों, निजी औद्योगिक संस्थानों, भवन निर्माण और अन्य क्षेत्रों में उन्हें काम दिलाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
कोरबा के शहरी क्षेत्रों में 49 क्वारेंटाइन सेंटर बनाये गये हैं। शहरी क्षेत्रों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए दस, छात्रों, व्यापारियों, पर्यअकों और अन्य लोगों के लौटने पर क्वारेंटाइन के लिए 21 सेंटर स्ािापित है। जिले में स्थित सार्वजनिक उपक्रमों ने भी अपने-अपने कामगारों और उनके परिजनों के बाहर से कोरबा लौटने पर क्वारेंटाइन के लिए 18 सेंटर बनाये हैं। इन क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी तक साढ़े तीन हजार से अधिक लोग बाहर से कोरबा लौटकर ठहर चुके हैं। इनमें से दो हजार 900 लोग अपनी 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर वापस अपने घर जा चुके हैं। शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी साढ़े छह सौ से अधिक लोगों को क्वारेटाइन में रखा गया है। शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में रूके प्रवासी श्रमिकों में से कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार दो हजार 374 का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसमें से दो हजार 216 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 87 प्रवासी शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में कोरोना संक्रमित मिले हैं।
क्वारेंटाइन सेंटर्स में खाने-पीने के लिए प्र्याप्त संख्या में दोना-पत्तल, डिस्पोजेबल थाली- गिलासों के इंतजाम किए गए हैं। बार-बार हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ ही हैंड-सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुंह ढंकने के लिए मास्क एवं गमछा भी दिया गया है। कई क्वारेंटाइन सेंटर्स में भोजन बनाने के सभी इंतजामों के साथ सोने के लिए गद्दा, दरी और चादर उपलब्ध कराया जा रहा है। इन सेंटर्स में साफ-सफाई की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। इसके लिए सभी सेंटरों को प्र्याप्त मात्रा में डस्ट-बिन, झाड़ू, फिनाइल एवं बाल्टियां दी गई हैं। लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई क्वारेंटाइन सेंटर्स में योग और प्राणायाम कराए जा रहे हैं। महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के लिए सेनेटरी पैड भी वितरित किए जा रहे हैं। कचरे और बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान के लिए सभी सेंटरों में समुचित व्यवस्था की गई है। क्वारेंटाइन सेंटर्स की व्यवस्था राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आपदा राहत निधि तथा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए चैदहवें वित्त आयोग व मूलभूत की राषि से की जा रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त चावल से एथेनॉल उत्पादन करने की अनुमति देने के संबंध में केन्द्र सराकर से आग्रह किया था। मुख्यमंत्री के आग्रह पर राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की 24 अप्रैल 2020 की बैठक में भारतीय खाद्य निगम में उपलब्ध सरप्लस चावल से एथेनॉल उत्पादन करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसी परिप्रेक्ष में प्रदेश के खाद्य सचिव ने भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ में अतिशेष 4 लाख मिट्रिक टन चावल से एथेनॉल बनाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
केन्द्रीय सचिव को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में प्रदेश के किसानों से समर्थन मूल्य पर 83 लाख 94 हजार मिट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। इसमें से बनाए गए कुल चावल से केन्द्रीय पूल एवं राज्य पूल में राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आवश्यक मात्रा तथा 28.1 लाख मिट्रिक चावल केंद्रीय पूल में भारतीय खाद्य निगम को देने के बाद राज्य में लगभग 4 लाख मिट्रिक टन चावल अधिशेष रहेगा। इस अधिशेष चावल के लम्बे समय तक भण्डारित रहने के कारण खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस महामारी की नियंत्रण के लिए डिस्टलरी से एथेनॉल आधारित सैनिटाइजर एवं ईबीपी कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त 4 लाख मिट्रिक टन चावल को एथेनॉल बनाने वाले प्लांट को आपूर्ति की जा सकती है। खाद्यान्न से एथेनॉल बनाने वाले प्लांटों की स्थापना के संबंध में राज्य की औद्योगिक नीति 2019-24 से इस संबंध में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। खाद्य सचिव ने छत्तीसगढ़ राज्य को लगभग 4 लाख मिट्रिक टन चावल से एथेनॉल बनाने की शीघ्र अनुमति देने का अनुरोध किया है।
रायपुर / शौर्यपथ / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार प्रदान करने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल रहा है। कबीरधाम जिला वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब-तक सर्वाधिक परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में राज्य में प्रथम स्थान पर है, वहीं बिलासपुर और राजनांदगांव जिले क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर है। पूरे राज्य में जून माह तक 55 हजार 981 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से कबीरधाम जिला में सर्वाधिक 6 हजार 139 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराए गए है, जो कि पूरे प्रदेश का 11 प्रतिशत है।
मनरेगा अंतर्गत जिले में बड़ी संख्या पर रोजगार मूलक कार्य कराए जा रहे है। लॉकडाउन के समय कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया गया। कबीरधाम जिले में इस वित्तीय वर्ष में 1 लाख 47 हजार 862 परिवारों को रोजगार देते हुए अब तक 63.49 लाख से अधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है।
जिले के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष लगभग 77 लाख मानव दिवस का लक्ष्य रखा गया था, उसके विरूद्ध इस वित्तीय वर्ष के तीन माह में ही 63 लाख से अधिक के मानव दिवस रोजगार का सृजन कर लिया गया है। जो कि लक्ष्य का 82 प्रतिशत है। इस तरह आने वाले समय में मनरेगा के तहत लक्ष्य से और अधिक ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हो जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वनवासियों एवं किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कांकेर जिले के सिंगारभाट स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में कोदो, कुटकी व रागी के प्रोसेसिंग के लिए संयत्र स्थापित किया जायेगा। इस संयंत्र के लग जाने से कोदो, कुटकी और रागी की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
विधायक शिशुपाल शोरी, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, कलेक्टर के.एल. चौहान तथा वन मण्डाधिकारी अरविंद पी.एम. की उपस्थिति में आज इस संबंध में जिला कार्यालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। कोदो, कुटकी और रागी के प्रोसेसिंग व विपणन के लिए किसानों, महिला स्व-सहायता समूह एवं युवा समूहों को दायित्व सौंपा जायेगा। कृषक उत्पादक संगठन बनाकर उसके माध्यम से कोदो, कुटकी और रागी फसलों का उत्पादन एवं संग्रहण किया जायेगा। महिला और युवा समूह के माध्यम से इसका प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन का कार्य कर कृषकों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में कांकेर विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मर्दापोटी सर्कल के ग्राम इच्छापुर में हर्रा लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए भी एक पृथक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी पूर्व से की जा रही है। इस प्रकार कांकेर में लघु धान्य और लघु वनोपज आधारित दो प्रोसेसिंग यूनिट लग रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की राज्य स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के विविध कम्पोनेंट्स पर विस्तार से विचार विमर्श और रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बस्तर में प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त अमिताभ जैन एवं मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी शामिल हुए।
मुख्य सचिव ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना पूरी गुणवत्ता और तकनीकी से करने के निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग को दिए। बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कम्पोनेंट्स के संबंध में प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी के लिए 163 करोड़ 48 लाख रूपए की योजना तैयार की गई है। मुख्य सचिव ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कार्यो की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्ट्रीटलाईट के लिए टाईमर निर्धारित करने के निर्देश दिए है। नगरीय विकास विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेल मंगई डी. ने बताया कि रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 190 करोड़ रूपए व्यय किए जा चुके है। रायपुर नगर निगम के आयुक्त ने बताया कि रायपुर में पेयजल आपूर्ति के तहत वाटरमीटर लगाए जाने की योजना है। उन्होंने बताया रायपुर में मोतीबाग और गंज मंडी क्षेत्र में उच्च क्षमता की पानी टंकियां बनायी गयी है। जल संसाधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के तहत सर्वे का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव श्रीमती संगीता पी. सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मंडल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की 47वीं बैठक सम्पन्न हुई। प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सेक्टर-13 नवा रायपुर अटल नगर में मंडल द्वारा अत्याधुनिक केन्द्रीय पर्यावरणीय प्रयोगशाला लोक निर्माण विभाग के माध्यम से तैयार की जाएगी। विभिन्न पर्यावरणीय पैरामीटर्स को मापने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला होगी, जिसमें जन-जागरूकता के लिए विभिन्न पर्यावरणीय विषयों पर मॉडल्स की प्रदर्शनी भी रहेगी।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योग जैसे स्पंज आयरन संयंत्र, स्टील प्लांट, सीमेंट प्लांट आदि में बड़ी मात्रा में लगने वाले कच्चे माल आयरन ओर, जिप्सम, कोयला, स्पंज आयरन, सीमेंट आदि का परिवहन सड़क मार्ग से मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों से ही किए जाने का निर्णय लिया गया आदि एवं वाहनों मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों की अनुपलब्धता की स्थिति में उद्योगों को एक वर्ष का समय इस शर्त के साथ प्रदान किया गया कि उद्योगों द्वारा कच्चे माल/उत्पादों का परिवहन तारपोलिन अथवा उपयुक्त मटेरियल से उचित एवं पर्याप्त रूप से ढंककर किया जाए। बैठक में गंभीर प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र रायपुर के सिलतरा एवं उरला तथा अन्य प्रदूषित क्षेत्र कोरबा एवं भिलाई में प्रदूषण के मुख्य स्त्रोतों का अनुपात एवं उसे वहन करने की क्षमता का अध्ययन ख्यातिलब्ध संस्थाओं जैसे आई.आई.टी., एनआईटी अथवा नीरी नागपुर से कराए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में नेशनल क्लीन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसी प्रकार प्रदेश की 5 प्रदूषित नदियों में अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में 10 कंटीन्यूअस वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु मंडल रायपुर, भिलाई-दुर्ग एवं बिलासपुर के ऐतिहासिक महत्व के कुछ तालाबों में पर्यावरणीय सुधार एवं उनके जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा। इसके लिए कार्य प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रबंध संचालक वन विकास निगम श्री राजेश गोवर्धन, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम अनिल राय, आयुक्त नगर पालिक निगम बिलासपुर प्रभाकर पाण्डेय एवं सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल आर.पी. तिवारी उपस्थित थे।
राज्यपाल से खादी और ग्रामोद्योग आयोग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिभुवन ने भेंट की
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से यहां राजभवन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के छत्तीसगढ़ के राज्य कार्यालय के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एस.एस. त्रिभुवन ने सौजन्य मुलाकात की। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर अभियान की शुरूआत की है। उन्होंने इसके लिए आवश्यक है कि युवा स्वरोजगार से जुड़े, इससे वे स्वयं अपने पैरों पर खड़े होंगे और दूसरों को भी रोजगार देंगे। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं भी स्वयंसहायता समहू बनाकर स्वयं का उद्यम शुरू कर सकते हैं। इससे महिलाएं जागरूक और सशक्त होंगी। इस कोरोना काल में बड़ी संख्या में श्रमिक प्रदेश में आए हैं। उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित योजना सहित अन्य योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि वे अपना जीवनयापन कर सके। श्रमिकों एवं किसी भी व्यक्ति को स्वरोजगार का ऋण देने से पहले उन्हें संबंधित रोजगार का प्रशिक्षण देना चाहिए, जिससे तकनीकी रूप से दक्ष होने पर वह व्यक्ति योजना के तहत दिये जाने वाले सहयोग का सदुपयोग कर सकेगा।
सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की एक अति महत्वपूर्ण योजना है, प्रदेश के बेरोजगार युवक-युवती इसका लाभ उठाएं। श्री त्रिभुवन ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत इस योजना के तहत स्वयं के उद्यम शुरू करने के लिए रू. 25 लाख तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें 35 प्रतिशत तक सब्सिडी हितग्राही को प्राप्त होता है। एस.टी.एस.सी. एवं महिला वर्ग को ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक छूट दी जाती है तथा 5 प्रतिशत तक स्वयं का अंशदान होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 लाख रू. पर एक व्यक्ति को रोजगार देना अनिवार्य होता है। इच्छुक युवक-युवतियां खादी ग्रामोद्योग के कार्यालय के संपर्क कर सकते हैं और इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे कार्यालय का दूरभाष क्रमांक 07712886428 है और वेबसाईट www.pmegpeportal.gov.in है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग के निर्देशिका का विमोचन किया। आयोग की तरफ से राज्यपाल को कोसे की बनी शाल और साड़ी भेंट की गई।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
