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// माडमसिल्ली में वाटर स्पोर्टस और माना-तूता में बढ़ाएं पर्यटक सुविधाएं
// होटल प्रबंधन संस्थान में इसी सत्र से शुरू होगा पाठ्यक्रम
// पर्यटन मण्डल के संचालक मण्डल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रमुख बांधों और वाटर बॉडी में वाटर स्पोर्ट, कैफेटेरिया सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएगी। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोडऩे के लिए भी इस सत्र से नवा रायपुर स्थित होटल मेनेजमेंट संस्थान में पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया। पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के संचालक मंडल की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में कहा कि कोरोना संकट काल में राज्य के पर्यटन स्थलों में स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनित बनायी जाए। पर्यटन स्थलों में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि पहले चरण में धमतरी जिले के माडम सिल्ली बांध में वाटर टूरिज्म के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए।
बैठक में मंत्री साहू ने रायपुर स्थित जोहार छत्तीसगढ़ होटल में साज सज्जा कर इसे नया रूपरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस होटल के परिसर में कामर्शियल दृष्टिकोण से पर्यटन भवन का निर्माण किया जाए ताकि इसका बहुउद्देशीय उपयोग हो सके। उन्होंने अधिकारियों को इस सबंध में जल्द प्रस्तार तैयार करने भी कहा। मंत्री साहू ने राजधानी के निकट स्थित माना-तूता में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में पर्यटन विकास से संबंधित कार्यों को त्वरित गति से संपन्न करने के लिए प्रदेश के सभी पर्यटन क्षेत्रों को दो या तीन जोन में विभाजित करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पर्यटन से संबंधित विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट के संचालन, पर्यटन की पोस्ट कोविड तैयारियों, पर्यटन के प्रचार प्रसार, वॉटर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, राम वन पाथ गमन के विकास कार्य सहित विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गई। बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., प्रबंध संचालक इफ्फत आरा, महाप्रबंधक सुनील अवस्थी सहित वाणिज्य, वित्त, परिवहन, वन, संस्कृति, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
// स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने जो कहा वह जनता से किए वादा के प्रति प्रतिबद्धता और वचनबद्धता को दर्शाता है भाजपा तो चुनाव में किए वादों को चुनावी जुमला बताकर जनता से धोखा बाजी कर रही
// मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले डॉ रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आये न्याय योजना की पहली किश्त का आंकलन करना चाहिए
// मोदी द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाली भाजपा और रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पूरा पढऩा चाहिए
// मोदी-भाजपा देश से की हुई वादों को पूरा करने में असफल रमन सिंह भाजपा से इस्तीफा देने की नैतिक साहस करें
रायपुर /शौर्यपथ / पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बयान पर कांग्रेस ने तीखा जवाब दिया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आए न्याय योजना की पहली किस्त की राशि का आकलन करना चाहिए। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से 5700 करोड़ रुपए किसानों को धान की अंतर राशि चार किस्तों में मिलेगी। प्रदेश के किसानों के खाते में 1500 करोड़ की पहली किस्त जमा हुई है। लोकसभा चुनाव में मोदी के द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाले भाजपा और डॉ रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पढऩा चाहिए।
रमन सिंह और भाजपा के नेताओं ने तो निरंतर प्रदेश और देश की जनता को गुमराह करने का काम किया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में रमन सिंह ने सरकार बनने पर किसानों को धान के कीमत ?2100 क्विंटल और ?300 बोनस प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। ठीक वैसे ही लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोदी-भाजपा ने दो करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष रोजगार, 15 लाख रुपए जनता के खाते में आएंगे, महंगाई कम होगी अच्छे दिन आएंगे, पेट्रोल-डीजल ?30-?35 लीटर में मिलेगा, रसोई गैस के दाम कम होंगे, बेटियां सुरक्षित होगी, पाकिस्तान को करारा जवाब देंगे, भारत की ओर आंख दिखाने वाले दुश्मनी को ईट का जवाब पत्थर से देंगे, आतंकवाद खत्म होगा सहित अनेक लोक लुभावने वादा मोदी ने लच्छेदार भाषणों के माध्यम से जनता से किया था। मोदी ने नोटबंदी के दौरान 50 दिन जनता से मांगे थे 50 दिनों में अगर नोटबंदी फेल होती है तो किसी भी चैराहा में आकर जनता के द्वारा दिए हुए सजा को भुगतने का वादा किया था। बीते 6 साल में मोदी-भाजपा-रमन जनता से किये वादा को पूरा करने में असफल रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार 36 बिंदुओं में जनता से किए वादों में से 22 बिंदुओं से अधिक में काम करने में सफल हुई है किसानों का कर्ज माफी, बिजली बिल हाफ, धान की कीमत ?2500, आदिवासियों की जमीन लौटाना, जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से बाहर निकालना बस्तर में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट लगाना, 25 से अधिक वनोपज को समर्थन मूल्य में खरीदना, तेंदूपत्ता का मानक दर 2500रुपया से बढ़ाकर 4 हजार प्रति बोरा करना, एनएमडीसी में बस्तर में स्थानीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करना, 15,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती, ढाई हजार से अधिक पुलिस विभाग में भर्ती, 3000 नर्सों की भर्ती सहित नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के माध्यम से 22 सौ से अधिक गोठानो का निर्माण, राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से धान के अंतर राशि के अलावा गन्ना एवं मक्का उत्पादकों को भी लाभ देना और आने वाले दिनों में दलहन-तिलहन सहित भूमिहीन किसानों को भी न्याय योजना के माध्यम से करना, यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम राइट टू फूड मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक मुख्यमंत्री शहरी स्लम क्लीनिक, शिक्षककर्मियों का संविलियन, पुलिस विभाग के भत्ता में बढ़ोत्तरी, छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री, शराबबंदी हेतु राजनीतिक सामाजिक और प्रशासनिक कमेटी का गठन 60 से अधिक शराब दुकानों को बंद करना, कोरोना संकटकाल में प्रवासी मजदूरों के सकुशल घर वापसी उनके रहने खाने का प्रबंध उनके रोजगार की व्यवस्था सहित अनेक जन हितेषी कार्य किए हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के जनहितैषी कार्यो के आगे भाजपा मुद्दाविहीन हो चुकी है। भाजपा किसानों और मजदूरों के नाम से झूठ बोलकर स्तरहीन मंगढ़तन बात कर गुमराह कर जो राजनीति कर रही है। इससे दुखी होकर टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि अगर 20 अगस्त को न्याय योजना की दूसरी किस्त किसानों को नहीं मिलेगी तो वह इस्तीफा दे देंगे। ये जनता से किए वादों के प्रति कांग्रेस नेताओं की प्रतिबद्धता और वचनबद्धता का जीता जागता प्रमाण है।
भाजपा के नेताओं को टी.एस. सिंहदेव से सीख लेनी चाहिए और मोदी-भाजपा ने जनता के साथ जो वादा खिलाफी किया है इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, भाजपा के 9 सांसद और विधायक को तत्काल अपने पद से और भाजपा से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि भाजपा नेताओं में वादा निभाने में असफल नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांगने की क्षमता नहीं है।
कोरोना के कहर से जूझ रहे ज्यादातर देश 'लॉकडाउनÓ से 'अनलॉकÓ की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन सहित तमाम मुल्कों में जुलाई से जिम तक खोलने की योजना है। हालांकि, तीन महीने की शारीरिक असक्रियता के बाद जिम जाकर कठिन व्यायाम करने पर लेने के देने पड़ सकते हैं। आपको मांसपेशियों में खिंचाव से लेकर कंधे, पीठ, कमर, कूल्हे, जांघ आदि में चोट की शिकायत हो सकती है। ब्रिटेन की जानी-मानी फिटनेस एक्सपर्ट मरियम अलरूबी ने इसी के मद्देनजर पांच ऐसे व्यायाम सुझाए हैं, जिनसे मांसपेशियों को खोलने और शरीर को लचीचा बनाने में मदद मिल सकती है। आइए इन पर नजर डालें-
1.कंधे-गर्दन में दर्द से ऐसे बचें
-एक डंडा हाथ में लेते हुए फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं। अब डंडे को दोनों हाथों से पकड़ते हुए बाजुओं को कंधे की सीध में सामने की ओर ले जाएं। ध्यान रखें कि इस दौरान कोहनियां एकदम सीधी होनी चाहिए। धीरे-धीरे जितना हो सके, हाथ सिर के ऊपर ले जाएं और फिर वापस कंधे की सीध में ले आएं। इस प्रक्रिया को 15 से 20 बार दोहराएं। यह एक सेट हुआ। ऐसे कम से कम पांच सेट करें।
2.पीठ में खिंचाव का खतरा यूं घटाएं
-एक मोटी इलास्टिक की डोरी लें। उसे बंद दरवाजे के हैंडल में अपने कमर जितनी ऊंचाई पर फंसाएं। अब हैंडल से दो फीट की दूरी पर खड़े होकर डोरी के दोनों सिरों को हाथों में थाम लें और जितना हो सके पीछे की ओर खींचें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में आपके दोनों हाथ पेट के किनारे से सटे होने चाहिए, ताकि कंधे की भी एक्सरसाइज हो सके। इस प्रक्रिया को दस के सेट में दो से तीन बार दोहराएं।
3.कमर की मांसपेशियां लचीली बनाएं
-फर्श पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर के घुटने को दोनों हाथों से पकड़ते हुए ऊपर उठाएं। इस दौरान दाएं पैर के पंजे बाएं पैर के ऊपर आ जाने चाहिए। इसके बाद घुटने को हाथों से सहारा देते हुए पैर दाईं और बाईं तरफ ले जाएं, ताकि जांघों की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव महसूस हो। संभव हो तो घुटने को गोलाई में भी घुमाएं। दोनों पैरों से इस प्रक्रिया दस-दस के सेट में पांच बार दोहराएं।
4.कूल्हे में खिंचाव की शिकायत नहीं होगी
-दायां घुटना फर्श पर टिकाते हुए कुछ इस तरह बैठें कि शरीर का सारा भार बाएं पंजों पर आए। इस दौरान यह सुनिश्चित करें कि दाएं पैर का घुटना और बाएं पैर का पंजा एक सीध में हो। अब दायां हाथ ऊपर उठाएं और कमर के पास से बाईं ओर मुड़ें। 30 सेकेंड तक इसी अवस्था में रहें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में कंधे, कोहनी और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब वापस उसी मुद्रा में जाएं। दोनों घुटनों से इस प्रक्रिया को दो-दो बार करें।
5.जांघों की मांसपेशियां आसानी से खुलेंगी
-जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और तलुए के किनारे एक तौलिया फंसाएं। तौलिये के सहारे पैरों को दस सेकेंड तक जितना हो सके, चेहरे की तरफ खींचने की कोशिश करें। इसके बाद पैर ऊपर रखते हुए तौलिये को पांच से सात सेकेंड के लिए थोड़ा ढीला छोड़ दें। दोनों पैरों पर पूरी प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराएं। इससे शारीरिक सक्रियता की कमी से स्थिर हुईं जांघों और कूल्हे की मांसपेशियां आसानी से खुल जाएंगी।
आधे से ज्यादा लोगों का वजन बढ़ा
-लॉकडाउन में 67त्न लोगों ने चॉकलेट-चिप्स ज्यादा खाने की बात मानी ।
-35त्न ने सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा कोल्डड्रिंक पीने का खुलासा किया।
-55त्न लोगों ने कहा, शारीरिक सक्रियता घटने से उनका वजन काफी बढ़ गया।
-80त्न ने लॉकडाउन खुलने के बाद कसरत के जरिये मोटापा घटाने का वादा किया।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हर साल 1 जुलाई को देशभर में डॉक्टर्स डे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह खास दिन डॉक्टर्स के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। बता दें, 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय का जन्मदिन और पुण्यतिथि होती है। डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय के साथ देश की सेवा में लगे समस्त चिकित्सकों को सम्मान देने के लिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस) मनाया जाता है। आज पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। ऐसे में जीवन रक्षा करने वाले डॉक्टरों ने लोगों को 'कोविड-19' नाम के इस दानव से बचे रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये जरूरी सलाह।
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुधीर रावल की मानें तो पहले से किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा काफी अधिक होता है। ऐसे में रोगी को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि किस परिस्थिति में उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह-
डॉ. सुधीर रावल का कहना है कि कोरोना काल एक ऐसा समय है, जिसके बारे में किसी को भी पहले से कोई अनुमान नहीं था। ऐसे में सतर्कता ही लोगों के लिए कोरोना से बचने के लिए सबसे बड़ा कवच है। मौजूदा हालात में कैंसर मरीजों का उदाहरण देते हुए डॉ. सुधीर कहते हैं कि कैंसर मरीजों का इम्यून कमजोर होता है। इसकी वजह से ऐसे लोगों का कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्यादा बना रहता है।
ऐसे में कोविड-19 से बचने के लिए न सिर्फ कैंसर रोगियों को बल्कि उन सभी लोगों को जो पहले से ही किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
- जहां तक संभव हो बाहर नहीं निकलना चाहिए।
-संतुलित आहार लेना चाहिए और सकारात्मक विचार रखना चाहिए।
-इलाज करा रहे मरीजों को लगातार अपने डॉक्टर्स के संपर्क में रहना चाहिए।
इम्यून कंप्रोमाइज्ड लोग रहें बेहद सतर्क-
डॉ. रावल ने कहा कि इस समय इम्यून कंप्रोमाइज लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। इम्यून सिस्टम का प्राथमिक काम संक्रमण से लड़ना होता है। ’इम्यून कंप्रोमाइज’ का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसका इम्यून सिस्टम सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में कमजोर हो। ऐसे लोगों में कोविड-19 जैसे संक्रमणों की चपेट में आने की आशंका ज्यादा रहती है।
कैसे होता है इम्यून सिस्टम कमजोर-
कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियां व्यक्ति के इम्यून को कमजोर करती हैं। इसी तरह बड़ी उम्र और धूम्रपान, ज्यादा शराब पीने, आलसी जीवन जीने और जंक फूड खाने वाली लाइफस्टाइल से भी इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। कैंसर के मरीजों में कीमोथेरेपी जैसे इलाज के दौरान इम्यून ज्यादा कमजोर होने का खतरा रहता है। डॉ. रावल ने कहा कि हर डॉक्टर लोगों को ऐसी आदतों से बचने की सलाह देता है, जो सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस डॉक्टर दिवस के मौके पर अगर हर व्यक्ति डॉक्टर की सलाह मानने का निश्चय कर ले तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस ने न सिर्फ लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है बल्कि शादी के तौर-तरीकों और रिवाजों में भी बदलाव कर दिया है। लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन की सरकार ने शादी के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को एक-दूसरे को अंगूठी पहनने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। वहीं, नए नियमों में लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया गया। शनिवार से सामाजिक दूरी एक मीटर से ज्यादा होगी। नए नियमों में शादी के दौरान एक-दूसरे से कम संपर्क रखने और जल्द से जल्द समारोह को खत्म कर देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि शादियों को सुरक्षित वातावरण में किया जाए।
पिता हाथ में हाथ डालकर बेटियों को नहीं ला सकेंगे-
नए नियमों के कारण पिता और ब्राइड्समेड दुल्हन के हाथ में हाथ डालकर उन्हें चर्च में नहीं ला सकेंगे। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी दुल्हन या किसी अन्य को न तो गले लगा सकेंगे न चूम सकेंगे। ये गतिविधियां सिर्फ समारोह के कानूनी रिवाज के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने कहा है कि शादी समारोह में कम से कम लोग शामिल हों। समारोह में 30 से ज्यादा लोगों को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। इसमें दूल्हा-दुल्हन, गवाह, अधिकारी, मेहमान और फोटोग्राफर या सुरक्षा गार्ड जैसे कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, इसमें स्थान के कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।
रिसेप्शन पार्टी नहीं कर सकेंगे-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के बाद रिसेप्शन पार्टी का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। छोटे समारोह आयोजित किए जा सकेंगे जिसमें दो घरों के समूह के अलावा बाहर से सिर्फ छह लोगों को आने की अनुमति होगी।
चर्च में गाने या चिल्लाने की अनुमति नहीं-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के दौरान चर्च में गाने, चिल्लाने, चीखने या संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी। चिल्लाने या गाने से कोरोनावायरस के प्रसार का जोखिम बढ़ता है इसलिए इस पर पाबंदी लगाई गई है। अगर कोई एक व्यक्ति गाना चाहता है तो उसे फेश शील्ड पहनकर गाना पड़ेगा ताकि उसकी थूक से अन्य लोगों को खतरा न हो। सरकार ने गाना गाने की जगह रिकॉर्डिंग वाले गानों का इस्तेमाल करने को कहा है।
सामाजिक दूरी का पालन करें-
सभी मेहमानों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा समारोह स्थल के बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना होगा। इसके अलावा वेंटिलेशन में सुधार करना होगा और सभी को मास्क का इस्तेमाल करना होगा। मेहमानों से कहा गया है कि वे किसी दूसरे का सामान न छुएं।
अंगूठी पहनाने से पहले और बाद हाथ धोएं-
नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को अंगूठी पहनाने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। यह ध्यान रखना होगा कि अंगूठी ज्यादा हाथों में न जाए। समारोह स्थल पर किसी तरह के पैर धोने या शरीर के अन्य अंगों को धोने का रिवाज करने की इजाजत नहीं होगी। इन रिवाजों को घर से ही पूरा करके आना पड़ेगा। वेन्यू मैनेजरों को नकद दान को हतोत्साहित करने और जहां संभव हो ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग जारी रखने के लिए कहा गया है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि को पद्मनाभा, विष्णुशयन भी कहा जाता है। देवशयन के साथ ही चातुर्मास भी प्रारंभ हो जाता है। देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी समय से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रीहरि भगवान विष्णु, पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं। इस अवधि में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर आते हैं और चार मास तक संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं। भगवान शिव गृहस्थ होते हुए भी संन्यासी हैं। अत: उनके राज में विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं।
देवशयनी एकादशी के बाद चार माह तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है। देवशयनी एकादशी से साधुओं का भ्रमण भी बंद हो जाता है। वह एक जगह रुककर प्रभु की साधना करते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान सभी धाम ब्रज में आ जाते हैं। इसलिए इस दौरान ब्रज की यात्रा शुभकारी मानी जाती है। देवशयन की अविधि में पत्तल पर भोजन करें। वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए इस अवधि में मीठे पदार्थों का त्याग करें। आरोग्य की प्राप्ति के लिए इस अवधि में तली हुई वस्तुओं का त्याग करें। संतान की उन्नति के लिए देवशयन की अवधि में दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं का त्याग करें। देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। मन शुद्ध होता है, सभी विकार दूर हो जाते हैं। दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं।
अब 5 महीने बाद होंगे मांगलिक कार्य
देवशयनी एकादशी के साथ बुधवार को भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन को चले जाएंगे और चार महीने तक खरमास रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 25 नवंबर को देव जागृत होने के साथ फिर से सहालग शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषविदों के अनुसार इस बार नवंबर व दिसम्बर में कम ही सहालग हैं।
मंगलवार को आखिरी सहालग के चलते शादी समारोह हुए। अब 25 नवंबर से फिर से समारोह होंगे। ज्योतिषविद् विनोद त्रिपाठी बताते हैं कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से चतुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। नवंबर में 25, 27 व 30 यानि तीन दिन ही साए हैं जबकि दिसंबर में 1, 6, 7, 9, 10 व 11 को शादी समारोह किए जा सकते हैं। वह कहते हैं कि 17 जनवरी को गुरु अस्त होगा, जो 15 फरवरी को उदय होगा। इससे दो दिन पहले 13 फरवरी को शुक्र डूब जाएगा। इसके बाद 18 अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
खेल / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अंपायरों के एलीट पैनल के सबसे युवा सदस्य नितिन मेनन एशेज सीरीज को सर्वोच्च चुनौती मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी जानबूझकर या अनजाने में गेंद पर लार नहीं लगाएं। 22 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना छोड़ने वाले 36 साल के मेनन इसके बाद अंपायरिंग से जुड़े जिसका हिस्सा उनके परिवार में कई सदस्य हैं। मेनन ने तीन साल पहले अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और सोमवार को 12 सदस्यीय एलीट पैनल में उनका प्रवेश सोने पर सुहागा रहा।
कोविड-19 महामारी के बीच एलीट पैनल का हिस्सा बने मेनन को नहीं पता कि उन्हें कब अंपायरिंग का मौका मिलेगा, लेकिन उन्हें पता है कि आईसीसी के मौजूदा दिशानिर्देशों को लागू करना बड़ी चुनौती होगी। मेनन ने पीटीआई से कहा, ''मुख्य चुनौती गेंद को संभालना होगा, यह चुनौती टेस्ट मैचों में अधिक होगी। शुरुआत में नियमों को लागू करने से पहले हम खिलाड़ियों को चेतावनी देंगे, जैसा कि हम तब करते हैं जब कोई खिलाड़ी खतरनाक तरीके से पिच पर दौड़ता है।''
इंदौर के रहने वाले इस अंपायर ने कहा, ''खिलाड़ियों के जानबूझकर की जगह गलती से लार लगाने की संभावना अधिक है, इसलिए हम इसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे। इंग्लैंड में सीरीज (अगले महीने शुरू होने वाली) के बाद खेलने के हालात को लेकर विस्तृत नियम आएंगे जिसके बाद हमें बेहतर पता चलेगा कि खेल में हाल में किए गए बदलावों को कैसे लागू करना है।''
स्थिति सामान्य होने पर मेनन को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक एशेज सीरीज का हिस्सा बनने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं कि मैंने एशेज में अंपायरिंग का सपना देखा है। यह एकमात्र सीरीज है जो मैं टीवी पर देखता हूं। वहां का माहौल, जिस तरह से सीरीज खेली जाती है उसका मैं भी हिस्सा बनना चाहता हूं। यह इंग्लैंड में हो या ऑस्ट्रेलिया में मैं इसका हिस्सा बनना पसंद करूंगा। और विश्व कप में अंपायरिंग, यह चाहे टी20 हो या वनडे अंतरराष्ट्रीय।''
कोरोना वायरस महामारी के कारण यात्रा संबंधी पाबंदियों को देखते हुए आईसीसी ने फैसला किया है कि सीरीजओं में केवल स्थानीय अंपायर अंपायरिंग करेंगे। इंग्लैंड में पहुंचने के बाद ट्रेनिंग शुरू करने से पहले वेस्टइंडीज टीम को जिस तरह पृथकवास में रहना पड़ा अंपायरों को भी वैसा ही करना होगा और मेनन को लगता है कि इसका अंपायरों पर मानसिक प्रभाव पड़ेगा।
खिलाड़ियों का गेंद पर लार नहीं लगाना सुनिश्चित करने के अलावा अंपायरों को यह भी देखना होगा कि खिलाड़ी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें और गेंद के संपर्क में आने के बाद वे हाथ को नियमित रूप से सैनिटाइज करें। अंपायरों को भी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा ओर अब उन्हें मैदान पर खिलाड़ी की निजी चीजों को नहीं संभालना होगा।
मेनन ने कहा, ''ग्लव्स पहनना अंपायरों की व्यक्तिगत पसंद होगी लेकिन हमने फैसला किया है कि हम अपनी जेब में सैनिटाइजर रखेंगे। विकेट गिरने के बाद और ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हमें हाथ में गेंद रखी होगी इसलिए सुरक्षित रहना बेहतर है।'' उन्होंने कहा, ''और अगर खिलाड़ी गेंद पर लार लगा देते हैं तो हमें उसे तुरंत सेनेटाइज करना होगा। यह चौथे अंपायर का काम होगा। वह वाइप्स लेकर आएगा और गेंद को सैनिटाइज करेगा।''
खेल में हो रहे इन बदलावों का ओवर गति पर असर पड़ सकता है लेकिन मेनन ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, ''हम वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ इंग्लैंड की घरेलू सीरीज में अंपायरिंग करने वालों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। आईसीसी जो भी नियम बनाएगा हम उसका पालन करेंगे।''
तीन टेस्ट सहित 43 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग कर चुके मेनन ने कहा कि घरेलू अंपायर पर अधिक दबाव होता है और एलीट पैनल का हिस्सा होने के कारण उन पर इस तरह का कोई दबाव नहीं होगा। भारत नियमित रूप से विश्वस्तरीय अंपायर तैयार करने में विफल रहा है लेकिन मेनन का मानना है कि अब स्थिति बेहतर हो रही है।
मनोंरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने शादी के बाद इंडस्ट्री में वापसी की है। फिल्म 'सीजन्स ग्रीटिंग' से इन्होंने एक्टिंग की दुनिया में धमाकेदार एंट्री मारी है। हाल ही में एक इंटरव्यू में सेलिना ने बताया कि अच्छी एक्टिंग और एक टैलेंटेड एक्टर होने के बावजूद मुझे इंडस्ट्री को अलविदा कहना पड़ा। मेरे बच्चे और शादी इसके पीछे की वजह कभी नहीं रही, बल्कि मुझे अच्छे रोल्स ऑफर नहीं किए जा रहे थे यह सोचकर कि मैं एक आउटसाइडर हूं, इसलिए मैंने इंडस्ट्री को अलविदा कहा था। ब्रेक लिया था।
न्यूज पोर्टल से बातचीत में सेलिना ने बताया कि मैंने जानबूझकर इंडस्ट्री से ब्रेक लिया। शादी और बच्चे इसकी वजह कभी नहीं रहे। मैं थक चुकी थी। अच्छे रोल्स नहीं मिल रहे थे। एक आउटसाइडर होने की वजह से मैं अपने अंदर के एक्टर को सेलिब्रेट ही नहीं कर पा रही थी। मुझे हर बार खुद को प्रूव करना पड़ रहा था। हर किसी के आगे अच्छे रोल के लिए हाथ फैलाना पड़ रहा था। पिछले साल मेरी मां का देहांत हो गया। तब मैंने फिल्मों में वापसी करने का तय किया। मेरी मां की आखिरी ख्वाहिश थी कि मैं एक्टिंग की दुनिया में दोबारा कदम रखूं और फिल्म करूं।
गौरतलब है कि एक इंटरव्यू में सेलिना ने बताया था कि माता-पिता की मौत के बाद और बेटे के जन्म के बाद वह डिप्रेशन में आ गई थीं। डिप्रेशन एक ऐसी चीज है जो किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। ऐसा नहीं है कि इसे ठीक नहीं किया जा सकता। सपोर्ट सिस्टम के साथ आप इसे ठीक कर सकते हैं, बस इसे कभी इग्नोर न करें।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से सेलिना जेटली को धक्का लगा। सुशांत ने 14 जून को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह, डिप्रेशन से जूझ रहे थे। एक्टर की मौत पर शोक जताते हुए सेलिना कहती हैं कि बहुत दुखद खबर है यह, क्योंकि हम सभी ने एक बहुत ही शानदार एक्टर को खोया है। किसी ने अपने बेटे को खोया है, किसी ने अपने प्यार को खोया है, किसी का भाई गया है और फिल्म इंडस्ट्री का एक चमकता सितारा गया है। एक शानदार टैलेंटेड एक्टर, जो भविष्य में भारत का पहला ऑस्कर जीतने का दम रखता था, आप नहीं जानते। पता नहीं ऐसा क्या हुआ जिसने सुशांत को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
आपको बता दें कि सेलिना जेटली को उनके पति ने काफी सपोर्ट किया। डिप्रेशन पर सेलिना कहती हैं कि मैं उन लोगों से घिरी थी जो मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरे पति ने मेरी बहुत देखभाल की। डॉक्टर्स ने मेरी मदद की। हालांकि, यह अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है लेकिन मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं।
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना, बारिश और त्योहारों के समय गरीब वर्ग को अन्न से संबल देने का प्रयास सराहनीय और स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा घोषणा मूल रूप से देश के दरिद्र नारायण की सुधि लेने की ऐसी कोशिश है, जिसकी उम्मीद पिछले एक महीने से बंधी हुई थी। सरकार ने जुलाई से नवंबर तक पूरे पांच महीने तक देश के करीब 80 करोड़ जरूरतमंदों को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और चना मुफ्त देने का जो फैसला किया है, उससे देश को एक मानवीय आधार मिलेगा। यह आधार पूरे गुजारे के लिए भले पर्याप्त न हो, लेकिन इससे अभावग्रस्त परिवारों का मनोबल बढे़गा। इस राहत के उपरांत वे अपने थोडे़ से प्रयास या रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने दिन ठीक से गुजार सकेंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के नवंबर तक विस्तार से अभावग्रस्त लोगों को अपने यथास्थान रहने की प्रेरणा भी मिलेगी। विशेष रूप से बिहार जैसे श्रमिक बहुल राज्य में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी जाहिर किया है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार होंगे, जो अब नवंबर में छठ पूजा के समापन के बाद ही यात्रा की योजना बनाएंगे। बेशक, देखने वाले इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर भी देखेंगे, लेकिन वह भी इस योजना के व्यापक महत्व से इनकार नहीं कर पाएंगे। एक और अच्छी बात है कि इस योजना का श्रेय किसानों और ईमानदार करदाताओं को दिया गया है।
जब देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, तब सरकार का लोक-कल्याणकारी स्वरूप सशक्त होना ही चाहिए। इस योजना के विस्तार पर अगर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, तो कोई बात नहीं। इस देश में ऐसी क्षमता है कि वह गरीबों के साथ खड़ा हो सकता है। यदि कोरोना के समय अमेरिका की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकारों ने मुफ्त अनाज दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि ऐसी उदार योजनाओं का लाभ पूरी ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचे। निचले स्तर पर वितरण से जुड़े लोगों के लिए भी यह परीक्षा और दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा का समय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी बहाने से किसी भी जरूरतमंद को योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए।
प्रधानमंत्री के भाषण में एक और महत्वपूर्ण बात शामिल है, जो सबका ध्यान खींच रही है। ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की घोषणा वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई महीने के मध्य में ही कर दी थी और उन्होंने यह भी बता दिया था कि ऐसा मार्च 2021 में संभव हो जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री के बोलने से लोगों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। एक देश एक राशन कार्ड लंबे समय से इस देश की जरूरत रही है। सभी राज्य अगर इस व्यवस्था को मिलकर पहले ही साकार कर लेते, तो संभव है, कोरोना के समय लाखों की संख्या में लोगों को अपने घर न लौटना पड़ता। जो जहां है, वहीं रहता और वहीं उसे राशन कार्ड के तहत जरूरी सामान और अनाज उपलब्ध करा दिया जाता। अब समय आ गया है कि एक देश एक राशन कार्ड और मुफ्त अनाज जैसे बुनियादी इंतजामों को स्थानीय सियासत से परे रखकर मदद का स्थाई ढांचा विकसित किया जाए। ऐसी मदद की व्यवस्था जितनी उदार और व्यापक बनेगी, हमारा देश उतनी ही राहत और खुशी महसूस करेगा।
नजरिया /शौर्यपथ / इस साल दसवीं में बागपत की रिया जैन ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिया ने 96.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बागपत की रहने वाली रिया श्रीराम एस एम इंटर कॉलेज की छात्रा है। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक विद्यार्थी बैठे थे। रिया के पिता भारत भूषण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह पटरी पर चुन्नियां बेचने का काम करते हैं। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। रिया की फीस देने को भी पैसे नहीं थे। तब स्कूल मैनेजमेंट ने रिया की फीस चुकाई। पिता अपनी बच्ची की सफलता से बहुत खुश हैं। उन्हें शहर के बड़े-बड़े अधिकारी फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी बेटी के कारण ही यह सब हो सका। रिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। पैसे की तंगी भी उसमें बाधा नहीं बनती। अगर कोई बाधा है, तो मदद के हाथ भी उठते हैं। जैसे, उसकी परेशानी जानकर स्कूल प्रबंधन आगे आया। रिया ने बताया कि वह हर रोज चौदह-पंद्रह घंटे पढ़ाई करती थी। मुश्किलों का हल उसने परिश्रम में ढूंढ़ा। परेशानी से हार न मानने का उसका फैसला अनुकरणीय है।
दूसरे स्थान पर बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा रहे, उन्हें 95.83 प्रतिशत अंक मिले। तीसरा स्थान भी बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह को मिला। छोटे शहरों के इन बच्चों की कहानियां अभूतपूर्व हैं। ऐसी ही एक बच्ची के पिता मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम भी छूट गया था, मगर उसने भी बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
बच्चे आफत में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। गरीबी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती। इससे मध्यवर्ग के उन माता-पिता को जरूर सबक लेना चाहिए, जिन्हें लगता है कि जब तक बच्चे किसी नामी-गिरामी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक वे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके लिए उनकी गुंजाइश हो न हो, वे बड़े-बड़े स्कूलों की तरफ भागते हैं। कर्ज भी लेना पड़े, तो बच्चों की ऊंची फीस भरते हैं। दिल्ली में यह मारामारी बहुत दिखाई देती है। आज के दिन में, जब बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई हैं, वे बातचीत में पहली चिंता यही प्रकट करते हैं कि अब बच्चों की हजारों की फीस और ऊपरी खर्चे कहां से देंगे? बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में भेजना नहीं चाहते। समाज और जान-पहचान वालों में हंसी उड़ेगी, सो अलग। इसके अलावा माता-पिता सोचते हैं कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होंने अपने बचपन में किया था, वे अपने बच्चों को उनसे बचाएं। इसीलिए वे बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जबकि अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करना सिखाना चाहिए, क्योंकि माता-पिता उनकी मदद करने के लिए हमेशा नहीं रहेंगे। इस दुनिया का सामना उन्हें अपने दम पर ही करना होगा। यह भी कहा जाता है कि जिन बच्चों ने कभी कठिनाइयां नहीं देखीं, यदि उनके सामने अचानक मुश्किलें आएं, तो वे उनका सामना नहीं कर पाते हैं। वे उनसे दूर भागते हैं। कई बार अवसाद का शिकार हो जाते हैं। और आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं।
रिया जैन के बारे में जानकर अपने पुराने नेता याद आते हैं। कितनों की कहानियां हमने पढ़ी हैं। गांधीजी अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अनेक परेशानियों का जिक्र करते हैं, पर कभी घुटने नहीं टेकते हैं। परेशानियों का सामना करने का हौसला उनमें हमेशा दिखाई देता है। किसी भी बड़ी हस्ती को बनाने में चुनौतियों का बड़ा हाथ होता है। इसी तरह से भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण है। बताया जाता है कि नदी पार करके उन्हें स्कूल जाना पड़ता था। वह तैरकर नदी पार करते थे। जाहिर है, मल्लाह को देने के लिए पैसे नहीं रहे होंगे। जब वह प्रधानमंत्री बने, तब भी उनके पास बहुत मामूली कपड़े थे। उन्हें फटे कपड़े पहनने से भी परहेज नहीं था। उन्होंने पद के कारण अपने रहन-सहन और सादगी से कोई समझौता नहीं किया। इस तरह की कथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। सादगी एक बड़ा जीवन मूल्य है। पंक्ति के अंतिम आदमी की चिंता ने भी इसे हमेशा बनाए रखा है। अपने बड़े नेताओं के संघर्ष और उनकी सफलता से भी तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
सोहनलाल द्विवेदी की मशहूर पंक्तियां हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)क्षमा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
