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मेलबॉक्स / शौर्यपथ / आज जब कोरोना से निपटने में सरकार की नाकामी पर चर्चा होनी चाहिए, डीजल के लगातार बढ़ते दाम के बीच पहली बार इसकी कीमत पेट््रोल से पार जाने पर चिंता जताई जानी चाहिए, चीन की सेना के सीमा पार करने के खिलाफ सरकार की रणनीति पर बहस होनी चाहिए, तब 1975 के आपातकाल को तूल देना अफसोसनाक है। सबको मालूम है कि जनता ने इंदिरा गांधी को इसका सबक 1977 के आम चुनाव में सीखा दिया था। आज लोकतंत्र के काले अध्याय के रूप में इतिहास के अनैतिक फैसलों पर शोक मनाने से बेहतर है कि मौजूदा भारतीय लोकतंत्र पर मंडराते संकट के बादल का अंदाजा लगाया जाए। ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ द्वारा जारी 2019 के डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 160 देशों की सूची में 51वें स्थान पर एक त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र के रूप में मौजूद है। इसलिए बेहतर होगा कि इतिहास के दुर्भाग्यपूर्ण फैसलों को पीछे छोड़कर आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
अंकित कुमार मिश्रा, पटसा, समस्तीपुर
काल बनी बारिश
मानसून आते ही भारतीय किसान खुशी से झूम उठते हैं, क्योंकि यह वक्त खेतों की मेड़ बांधकर पानी को इकट्ठा करके धान रोपने का होता है। मगर इस बार 25 जून को यही मानसूनी बारिश बिहार और उत्तर प्रदेश में लोगों पर काल बनकर बरसी। इसमें बिजली गिरने से बिहार में लगभग 85 और उत्तर प्रदेश में करीब 25 लोगों की मौत हो गई। पर यह भी सच है कि प्राकृतिक आपदा रोकी नहीं जा सकती, सिर्फ सावधानी ही इसका बचाव है। इसलिए किसानों को कृषि-धर्म निभाने से पहले चैनलों या रेडियो पर जारी अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए। मूसलाधार बारिश के समय विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि हमारे अन्नदाताओं की जान बहुत कीमती है।
आनंद पाण्डेय, पंजियार टोली, रोसड़ा
अविश्वास बढ़ाता चीन
चीन की कथनी और करनी एक-दूसरे के विपरीत हैं। ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा लगाने वाला चीन 1962 में हमारी पीठ में छुरा घोंप चुका है। भारत के साथ ताजा घटनाक्रम में चीन ने अविश्वास और धोखेबाजी की वही पुरानी तरकीब अपनाई। इस बार बातचीत के बहाने उसने हमें धोखा दिया। जाहिर है, चीन पर अब कतई विश्वास नहीं किया जा सकता। वह इसलिए भी अविश्वास के लायक है, क्योंकि वहां लोकतंत्र नहीं है। वह भारत को अपने लिए बड़ी चुनौती मानता है, इसीलिए आर्थिक, राजनीतिक एवं सैन्य, तीनों स्तरों पर वह हमें घेरना चाहता है। मगर भारत भी अब बचाव की बजाय आक्रामक मुद्रा अपनाने को तैयार है। अब हम पलटकर उसे बखूबी जवाब दे सकते हैं। कोरोना महामारी के दौरान विश्व भी यह जान चुका है कि चीन मानवता का कितना बड़ा दुश्मन है और अपने हितों के लिए वह कितना नीचे गिर सकता है। भारत को अब इसी के मुताबिक अपनी रणनीति बनानी चाहिए।
उपेंद्र कुमार राय, पटना
खाली जेब पर बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। दिल्ली जैसे महानगर में तो डीजल की कीमत पेट्रोल से ज्यादा हो गई। आखिर तेल के दाम इस कदर क्यों बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल के दामों में गिरावट है? क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि सरकार सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ऐसा कर रही है? फिर भी, अभी इसकी कीमतों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आम जनता को बडे़ संकटों का सामना करना पडे़गा। उनकी मुश्किलें इसलिए भी बढ़ेंगी, क्योंकि कोरोना की वजह से उनकी जेबें पहले से ही खाली हैं। उम्मीद है, सरकार लोगों की मुश्किलों को समझेगी और जल्द ही कीमतों में कमी करेगी।
शुभम पांडेय गगन
दुर्ग / शौर्यपथ / आज से पैंतालिस वर्ष पूर्व 25 जून 1975 आजाद भारत में सत्ता के लालच में आपातकाल लगाया गया था जिसमें ना सिर्फ देश में सत्तासीन पार्टी के विरोध करने वालों को तमाम तरह की यातनाएं दी गई साथ ही साथ उन्हें कारावास में भी डाल दिया गया, यह हमारे आजाद भारत का काला अध्याय इसी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश इकाई के आह्वान पर राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे के द्वारा दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों को संबोधित किया इसके पश्चात जिला भाजपा कार्यालय में आपातकाल के विरोध दर्ज कराते हुए आपातकाल के समय तमाम यातनाएं सहने वाले मीसा बंदियों को याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए शहर में निवासरत मीसाबंदी गोवर्धन जायसवाल एवं जनार्दन सिंह ठाकुर का सम्मान करते हुए उन्हें श्रीफल एवं साल भेंट किया गया इस दौरान प्रमुख रूप से जिला भाजपा अध्यक्ष उषा टावरी महामंत्री डोमार सिंह वर्मा उपाध्यक्ष कांतिलाल जैन अरविंदर खुराना वरिष्ठ भाजपा नेता कांतिलाल बोथरा मंत्री संतोष सोनी मीडिया प्रभारी सतीश समर्थ उपस्थित रहे
सांसद संतोष पांडे ने आगे कहा कि आपातकाल की घोषणा होते ही स्वयं सेवकों और तमाम गैर कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गई और उन पर प्रताडऩा का सिलसिला चल पड़ा देशभर में लाखों लोगों को गिरफ्तार किया गया लोकनायक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी भाई देसाई,अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, के आर मलकानी, जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, सुशील मोदी,रामविलास पासवान,शरद यादव, राम बहादुर राय आदि गिरफ्तार रहे। आपातकाल के दौर में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था उन्हें यह नहीं पता था कि आपातकाल कब हटे गा और वह कब रिहा होंगे। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री संतोष सोनी ने किया और आभार जिला महामंत्री डोमार सिंह वर्मा ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता अजय तिवारी, मंडल अध्यक्ष लुकेश बघेल, दीपक चोपड़ा, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष राहुल पंडित, भाजपा सह मीडिया प्रभारी राजा महोबिया, गौरव शर्मा , मंडल भाजयुमो अध्यक्ष निलेश अग्रवाल, नीरज कांत पांडे उपस्थित रहे।
भिलाई / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में जुनवानी रोड पर सड़क किनारे अतिक्रमण करने वालों को हटाया गया। बिना अनुमति गुमटी लगाने और बांस बल्ली से अवैध कब्जा करने वालों पर निगम की टीम ने बेदखली की कार्यवाही की। निगम क्षेत्र में अवैध कब्जा या अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने निर्देश दिए है। आदेश के परिपालन में जोन 01 नेहरू नगर की टीम आज शंकरचार्य कॉलेज के पास बिना अनुमति गुमटी लगाने वाले को हटाने तथा झोपड़ी बनाकर अवैध कब्जा करने वालों को जेसीबी के माध्यम से ध्वस्त किया गया, इस दौरान एक अतिक्रमणधारी ने तोडफ़ोड़ के नुकसान से बचने एक दिन के भीतर कब्जा हटाने लिखित में दिया। जोन 01 के एआरओ विनोद चंद्राकर ने बताया कि जुनवानी रोड में अवैध कब्जे की शिकायत मिली थी, जिस पर जोन 01 के आयुक्त सुनील अग्रहरि के अगुवाई में शंकराचार्य कॉलेज के पास राजस्व विभाग का अमला पहुंचा जहां कुछ लोगों के द्वारा मुख्य सड़क किनारे बांस बल्ली से झोपड़ीनुमा बनाया गया था जहां अस्थाई रूप से मोटर मैकेनिक व गैरेज का काम कर रहे थे जिसे जेसीबी से तोड़कर बेदखल किया गया। इसी स्थान पर 3 अन्य व्यक्तियों द्वारा निगम से बिना कोई अनुमति लिए बगैर गुमटी लगाकर दुकान संचालन कर रहे थे जिनमें 2 गुमटी को तत्काल जेसीबी के माध्यम से हटाया और एक व्यक्ति तोडफ़ोड़ के नुकसान से बचने अवैध रूप से संचालित कर रहे गुमटी को हटाने लिखित में दिया अवैध रूप से झोपड़ी व गुमटी लगाकर व्यवसाय करने वालों को निगम की टीम ने समझाइश दिया कि दोबारा ऐसा करने पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। अवैध कब्जे से बेदखली की कार्यवाही के दौरान जोन 01 की राजस्व विभाग की टीम एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
एसएसपी यादव ने सीसीटीएनएस पर सड़क हादसों में जानकारी में भिन्नता पाने पर सख्त लहजे के साथ 21 थानेदारों का थमाया नोटिस
ओपिनियन / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 26 जून को ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का शुभारंभ कर दिया। वास्तव में, यह देश में कोरोना काल में रोजगार के लिए शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है, जिस पर अपने राज्य लौटे मजदूरों के साथ ही देश की भी नजरें टिकी हैं। इसके तहत देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में करीब सवा करोड़ लोगों को विभिन्न परियोजनाओं के तहत रोजगार नसीब होगा।
वस्तुत: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में वापस आए प्रवासी कामगारों को उनके ही क्षेत्र में हुनर व रुचि के आधार पर रोजगार प्रदान करने, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक संगठनों और अन्य संस्थानों को साथ जोड़ना है। जब लोग भी रोजगार के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं, तब यह एक सराहनीय कदम है। देश के विभिन्न राज्यों में भी रोजगार निर्माण के लिए ऐसे विशेष अभियानों की जरूरत दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के इस अभियान से अन्य राज्यों को भी यथोचित प्रेरणा मिलेगी।
आज निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के प्रयासों के साथ ही सरकारी स्तर पर ऐसी पहल बहुत जरूरी है। विशेष अभियानों के अलावा सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर तत्परता के साथ नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने पर भी ध्यान देना होगा। सरकार ने विगत 14 मार्च को संसद में बताया है कि रेलवे, रक्षा, डाक सहित अन्य सरकारी विभागों में करीब 4.76 लाख भर्तियां की जानी हैं। इनमें से यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए 1.34 लाख और रक्षा विभाग में 3.4 लाख खाली पदों को भरा जाना है। केंद्र सरकार के अलावा राज्यों सरकारों के भी लाखों पद रिक्त हैं। सरकार के स्तर पर रिक्त पदों को भरने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की जरूरत है। विशेष रोजगार अभियान को कुछ बहुत जरूरतमंद जिलों में चलाने के साथ ही मनरेगा में भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए। काम मांगने वाले लोगों को रोजगार देकर समाज को व्यापक संकट से बचाया जा सकता है। ज्यादा लोगों को रोजगार देने से अर्थव्यवस्था को भी सीधे फायदा होगा। इससे मांग और आपूर्ति बढ़ेगी, विकास दर में तेजी आएगी।
यह साफ दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 और लॉकडाउन की वजह से देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार संकट ज्यादा बढ़ा है। इस दौर में देश में बेरोजगारी की चुनौती कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अनुमान प्राइवेट थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मॉनिर्टंरग इंडियन इकोनॉमी’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक, भारत में जनवरी 2020 में बेरोजगारी दर 7.2 प्रतिशत थी, यह फरवरी में 7.8 प्रतिशत और मार्च में 8.7 प्रतिशत हो गई। यह अप्रैल 2020 में 23.52 फीसदी तथा मई 2020 में 23.48 फीसदी हो गई। यद्यपि लॉकडाउन समाप्त होने के साथ-साथ बेरोजगारी दर में कमी बताई जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
युवाओं को अपना मनोबल और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना चाहिए। चुनौतियां बढ़ी हैं, पर स्थिति ऐसी बुरी भी नहीं है कि जिससे उबरना मुश्किल हो। अच्छा रोजगार चाह रहे लोगों को किसी न किसी चीज में विशेषज्ञता या कार्य कुशलता के लिए प्रयास जरूर करना होगा। विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों में तथ्य उभरकर सामने आ रहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर में जोरदार गिरावट होगी, लेकिन आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में देश की विकास दर में तेजी दिखाई देगी। भारत में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे में, दुनिया के मानव संसाधन शोध संगठनों का कहना है कि कोविड-19 की चुनौतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं शीघ्रतापूर्वक बाहर निकलेगी और रोजगार के मौके बढ़ेंगे। पिछले दिनों न्यूयॉर्क के मैनपॉवर ग्रुप द्वारा प्रकाशित 44 देशों के रोजगार के वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, कोविड-19 के बीच रोजगार के मामले में सकारात्मक परिवेश दिखाने वाले दुनिया के चार शीर्ष देशों में भारत भी शामिल है। भारत के अलावा केवल जापान, चीन और ताइवान में रोजगार को लेकर सकारात्मक परिदृश्य पाया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद और कोरोना काल के बीच भारत में जुलाई से सितंबर 2020 की तिमाही में पांच सेक्टरों- खदान, निर्माण, वित्त, बीमा और रियल एस्टेट में नौकरियों के नए रास्ते खुलेंगे।
प्रमुख मानव संसाधन कंपनी टीमलीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार महानगरों, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को छोड़कर मेट्रो के रूप में उभरते शहरों- बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, चंडीगढ़, कोच्चि, कोयंबटूर, आदि में रोजगार बढें़गे। इन शहरों में हेल्थ, फार्मा, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, कृषि, एग्रो-केमिकल्स, ऑटो-मोबाइल्स और इनसे जुड़ी सेवाओं, बीपीओ सेवाएं, निर्माण तथा रिएल एस्टेट व ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के मौके तेजी से बढ़ेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिए गए आर्थिक पैकेज से देश के उद्योग-कारोबार क्षेत्र को जो लाभ मिलेगा, उससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
युवाओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोविड-19 के बाद आने वाले वर्षों में दुनिया के कई देशों में अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए प्रशिक्षित युवा हाथों की कमी होने वाली है। मानव संसाधन परामर्श संगठन कार्न फेरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल श्रम बल का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल श्रम बल होगा। साल 2030 तक दुनिया के 19 विकसित व कई विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल श्रम शक्ति की कमी हो जाएगी। ऐसे में,भारत इकलौता देश होगा, जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल श्रम बल होगा। भारत दुनिया के तमाम देशों में कुशल श्रम बल को भेजकर फायदा उठा सकेगा।
निजी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इससे सरकारों की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। सरकारों को अपनी रोजगार योजनाओं को चाक-चौबंद तरीके से चलाकर समाज में राहत का भाव बनाए रखना होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री
दो नर्स सहित चार महिला एक पुरूष और 7 बीएसएफ के जवान का रिपोर्ट आया पॉजेटिवबीएमशाह और स्पर्श हॉस्टिल को किया जायेगा शील
दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग निगम में इस बार 20 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनी । 20 साल बाद बनने वाली शहरी सरकार में ऐसी कई बातें हुईं जो एक यादगार पलो के रूप में याद आती रहेंगे जिसमे कुछ अच्छी तो कुछ बुरी याद शामिल है जिन्हें जनता नही भूल पाएगी ।
प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनते ही दुर्ग निगम में भी बदलाव आया और कांग्रेस की लहर में दुर्ग निगम भी शामिल हो गया । इस जीत के बाद जो यादे सदैव बनी रहेगी उसमें मदन जैन , राजेश यादव , राजकुमार नारायणी , हमीद खोखर , अब्दुल गनी और धीरज बाकलीवाल की जिंदगी में बहुत बदलाव हुआ । धीरज बाकलीवाल जो पहली बार लोकतंत्र में चुनाव लड़े और विजयी हुए महापौर के रूप में चयनित हुए वही मदन जैन जो मोती लाल वोरा के साथ राजनीति किये एमआईसी में भी जगह पाने से वंचित हुए तो पूर्व सभापति को भी प्रभारी के रूप में जगह नही मिली किन्तु अब्दुल गनी के भाग्य ने साथ दिया और दो बार कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भी पीडब्ल्यूडी का प्रभार मिला वही कांग्रेस में प्रवेश हुए हमीद खोखर को भी स्वास्थ्य विभाग से नवाजा गया ।
अब्दुल गनी , राजकुमार नारायणी और मदन जैन तीनो में एक समानता रही तीनो ने ही महापौर के लिए दावेदारी पेश की थी और धीरज बाकलीवाल का विरोध किया था । अब्दुल गनी तो विरोध स्वरूप वोरा के निवास भी पहुंच गए थे और गर्मागर्म बहस भी हो गई थी जिसका वीडियो भी वाइरल हो गया था एक पल तो ऐसा लगा कि पूर्व की तरह एक बार फिर कांग्रेस से बगावत करेंगे किन्तु प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने से इसकी संभावना कम ही नजर आ रही थी शायद यह विरोध काम आया और गनी को पीडब्ल्यूडी का प्रभार उपहार स्वरुप मिल गया वही विरोध करने वाले मदन जैन और राजकुमार नारायणी को एमआईसी में जगह नही मिली जबकि दोनो ने कभी कांग्रेस का विरोध नही किया और पार्टी से जुड़े रहे .
इन सबमे एक ऐसा व्यक्ति भी है जो सालो से राजनीति से दूर रहा एक समय वर्तमान मुख्यमंत्री बघेल के साथ राजनीति में सक्रिय रहा जिसके बारे में मुख्यमंत्री बघेल ने शपथग्रहण के दौरान भी इस बात को कही गयी । राजेश यादव जो वर्तमान में निगम के सभापति है जो कभी वर्तमान मुख्यमंत्री के साथ राजनीति में सक्रिय रहे किन्तु निगम के लापरवाह या गैर जिम्मेदाराना कार्य कह सकते है लगातार निगम के कांग्रेसी सभापति को अनदेखा किया जा रहा है । आखिर ऐसी क्या वजह है कि निगम के कार्यक्रमो में राजेश यादव कम ही देखे जाते है , उद्घाटन पट्टिका हो या साइन बोर्ड राजेश यादव का नाम गायब रहता है । जबकि संविधान के नियम के अनुसार सवैधानिक पद में आसीन है राजेश यादव . फिर उद्घाटन पट्टिका में आखिर किस कारण से राजेश यादव के नाम को अनदेखा किया जाता है क्या निगम के जिम्मेदार अधिकारी राजेश यादव को जानबूझ कर अनदेखी कर रहे है या ये किसी के इशारे पर हो रहा है या फिर इन अधिकारियों की मंशा महापौर व विधायक वोरा को बदनाम करने का एक तुच्छ प्रयास है कारण जो भी हो किन्तु दुर्ग निगम में कांग्रेस के सभापति का यू अपरोक्ष अपमान करके जिम्मेदार अधिकारी क्या संदेश देना चाहते है । क्या महापौर इस मामले को संज्ञान लेंगे ?
भाजपा शासन में भी नहीं हुआ विपक्षी सदस्यों का अपमान
प्रदेश में १५ साल भाजपा का राज था वाही निगम में २० सालो तक भाजपा का शासन था . पूर्व के सालो में निगम के सभापति राजकुमार नारायणी थे तब भाजपा ने बिना भेदभाव के स्वक्ष राजनीती का परिचय देते हुए सभापति के पद का मन रखते हुए उद्घाटन पट्टिका पर महापौर के साथ सभापति का नाम भी अंकित करवाते रहे किन्तु ऐसी पारदर्शिता और संस्कार जाने अब क्यों विलुप्त हो गए .
नई दिल्ली / शौर्यापथ / पटना बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सियासी आरोपों-प्रत्यारोपों को दौर तेज होता जा रहा है. राज्य में कोरोना वायरस के कम टेस्ट को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. नीतीश के पूर्व सहयोगी रहे प्रशांत अब उनके विरोधी बन चुके हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा-कोरोना की वजह से चुनाव और उसकी तैयारियों में कोई बाधा ना आए इसलिए नीतीश कुमार ने तय कर लिया है कि बिहार में कोरोना की जांच की रफ़्तार को नहीं बढ़ाएंगे. #बिहार में देश में सबसे कम टेस्टिंग हो रही है. कोरोना से संक्रमित लोगों के पता न चलने या उसमें देरी के भयावह परिणाम हो सकते है.गौरतलब है कि प्रशांत किशोर को इस वर्ष जनवरी में ही जेडी-यू ने निलंबित किया गया है.
गौरतलब है कि 25 जून के शाम 4 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटों में बिहार में कोरोना के 201 नए मामले सामने आए हैं. बीते 24 घंटों में 374 मरीज ठीक हुए हैं, इस तरह राज्य में अब तक 6480 मरीज कोरोना से रिकवर कर चुके हैं. बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक 56 लोगों की मौत हुई है. राज्य में कोरोना के केसों की संख्या 8381 है जबकि एक्टिव केसों की संख्या 1844 है. 24 जून को राज्य में 6634 कोरोना टेस्ट हुए थे. राज्य में अब तक कुल एक लाख 81 हजार 737 कोरोना टेस्ट हुए हैं, यह संख्या दिल्ली, महाराष्ट्र और यूपी जैसे राज्यों की तुलना में काफी कम है.
गौरतलब है कि कोरोना वायरस की महामारी के बीच बिहार में चुनावी हलचल शुरू हो चुकी है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह वर्चुअल रैली करके बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुके हैं. अमित शाह ने इस रैली में घोषणा की कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए बिहार में चुनाव में उतरेगा. बिहार के चुनावों में सत्तारूढ़ जेडीयू-बीजेपी का मुकाबला आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन से है.
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / गुवाहाटी/ कोरोना वायरस के बढ़ते केसों के मद्देनजर असम के गुवाहाटी शहर में जारी लॉकडाउन को सोमवार से अगले दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है. असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार दोपहर को कहा, 'अगले सप्ताह, केवल दवाओं की दुकाने खुली रहेंगी.' राज्य में कोरोना के लिए सख्त लॉकडाउन की घोषणा करते हुए उन्होंने लोगों से "रविवार तक जरूरी सामान की खरीदारी करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह तक असम में रात को कर्फ्यू जारी रहेगा. मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 15 जून से गुवाहाटी में कोरोना वायरस के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण राज्य में लॉकडाउन बढ़ाने पर विचार करना पड़ा है.6,300 से अधिक कोरोना वायरस मामलों के साथ असम, पूर्वोत्तर क्षेत्र में सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है. राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 9 लोगों की मौत हुई है.
गौरतलब है कि देश में कोरोना के मामलों में कमी नहीं आ रही है. शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना के अब तक कुल 490,401 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. वहीं मृतकों की संख्या 15301 के आंकड़े पर पहुंच गई है. इसके अलावा 285637 मरीज इस खतरनाक वायरस को हराने में कामयाब रहे हैं. बात करें पिछले 24 घंटों की तो आपको बता दें कि इस दौरान देश में सबसे ज्यादा 17296 नए मामले सामने आए हैं. यह 24 घंटों में आए अब तक के सबसे ज्यादा मामले हैं. इस दौरान 407 लोगों की मौत भी हुई है. रिकवरी रेट के आंकड़े में सुधार देखने को मिला है. यह 58.24 फीसदी पर पहुंच गया है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
