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दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रीन लाइम्स फिल्म एंड इंटरटेंमेंट और मित्रों प्रोडक्शन प्रा. लि. के बेनर तले बनने वाली भोजपूरी फिल्म सपना के निर्माण कार्य की तैयारी जोर शोर से चल रही है। फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने इसके निर्देशन की जिम्मेदारी यूपी के फाजिल नगर क्षेत्र के दो युवा निर्देशक
बिभांशु तिवारी और चांद अख्तर को दी है। फिल्म के हिरो और हिराईन का भी चयन कर लिया है। इसके हिरों के रोल के लिए राघव नैय्यर और हिरोइन की भूमिका के लिनए प्रियांशु सिंह को लिया गया है। इसके अलावा बाकी अन्य कलाकारों का चयन जारी है। इस फिल्म का दो पोस्टर हाल ही में लांच किया गया है। पोस्टर भी बहुत आकर्षक है । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब पोस्टर इतना बढिया बनाया गया है तो फिल्म कितनी अच्छी बनेगी।
निर्देशक बिभांशु तिवारी और चांद अख्तर ने संयुक्त रूप से बताया कि इस फिल्म की शूटिंग अक्टूबर महीने से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि भोजपुरी फिल्म 'सपनाÓ बेहद खास है। इसकी पटकथा बेहद महत्वपूर्ण है। फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आयेगी। वहीं फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के वक्त इस फिल्म की पटकथा पर हमने खूब मेहनत की। साथ ही हमने इसके गीत संगीत पर भी बखूबी ध्यान दिया। फिल्म में गीत और संगीत छोटे बाबा (बसही) का है। फिल्म में लीड रोल में राघव नैय्यर और प्रियांशु सिंह नजर आने वाले हैं। बांकी कास्टिंग जोर – शोर से चल रही है। फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने बताया कि इस फि़ल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में अक्टूबर से शुरू की जाएगी। वो अपनी इस फि़ल्म को लेकर बहुत ही उत्साहित है। फि़ल्म के लेखक - बिभांशु तिवारी और चाँद अख़्तर है, एसोसिएट डायरेक्टर सुब्रत गौतम और प्रोजेक्ट मैनेजर हरीओम सरन गुप्ता हैं।
जांजगीर - चांपा / शौर्यपथ / आमनदुला के नाली निर्माण में गैर-तकनीकी एवं घटिया निर्माण की शिकायत पर सीईओ ने 2 सदस्यों का जांच दल गठन किया है तथा जांच प्रतिवेदन 7 दिवस के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिए है। इस मामले को गंभीरता लेते हुए एस.एन वर्मा सीईओ मालखरौदा ने सुक्ष्म जांच के निर्देश दिए है। ग्राम पंचायत आमनदुला में महात्मा गांधी रोजगार ग्रारंटी योजना के अंतर्गत मंडी से शासकीय प्राथमिक शाला ओर 10 लाख का नाली का निर्माण कराया गया है। जिसमें घटिया मटेरियल की जांच किए जाने हेतु निम्नानुसार दो सदस्यों का जांच दल गठन किया गया है। जिसमें ग्रामीणों का आरोप है की 10 लाखों की लागत के नाली निर्माण कार्य में गैर तकनीकी एवं घटिया स्तर का निर्माण कार्य किया गया है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का विरोध करते हुए जनपद सीईओं एस एन वर्मा मालखरौदा अधिकारी को इस संबंध में अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। वार्ड में लाखों की लागत से बनाई जा रही नाली निर्माण में ठेकेदार द्वारा बड़े स्तर पर गड़बड़ी किए जाने की आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। आक्रोशितों ने उक्त के अनुसार निर्माण को गैरतकनीकी एवं घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग कर निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया है। आरोप है नाली का स्टीमेट के अनुसार घटिया समाग्री का उपयोग किया गया है। जिसके चलते कुछ सालों में नाली टूट जाने की आशंकाए बनी हुई है। साथ ही नाली को ऐसे स्थान से बनाया जा रहा है जहां से 2 से 3 घरों का पानी ही जाएगा। जबकि वार्ड के दर्जनों घरों को इस निर्माण से कोई फायदा नहीं मिलेगा. जिसके चलते लाखों रुपए का यह निर्माण अनुपयोगी साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण के समय इंजीनियर द्वारा घटिया निर्माण एवं गैर-तकनीकी निर्माण की बात कहने पर उनके द्वारा कार्य के गुणवत्ता में सुधार के बजाए वार्डवासियों को गुणवत्ता सहित ही कार्य कराए जाने की बात कहते रहे। तथा निर्माण में सुधार के किसी प्रकार के निर्देश ठेकेदार को नहीं दिए गए जिसके चलते यह संदेह जताया जा रहा है कि ठेकेदार द्वारा इंजीनियर से मिलीभगत कर उक्त निर्माण में गड़बड़ी की गई है।
- जनपद में 6त्न देकर लाते है काम,तो कमाएंगे क्यों नही..
वही एक ओर ठेकेदार और संबंधितों का कहना है की जनपद में इंजिनियर सहित अधिकारियों को कामों के लिए 6त्न देते है,तभी तो काम की मंजूरी करतें है. कहना है की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठती है तो उठने दो अधिकारियों को जब काम के लिए 6त्न दिए है तो इन शिकायतों से क्या होने वाला है। यहा तक अधिकारीयों द्वारा इस मामले को रफादफा करने की बात कही गई है।
- विधायक के आदमी होने का धौंस
संबंधित ठेकेदार तथा पंचायत के कामों को देखरेख करने वाले संबंधितों का कहना है की विधायक हमारे है हम उनके करीबी है ऐसी छोटी मोटी शिकायतों से कुछ भी नही होने वाला है। हम चुनाव लडऩे में विधायक के सहयोग किए है . चाहे कोई एडी-छोटी लगा ले। जबतक कांग्रेस सत्ता पक्ष विधायक की छत्र छाया है तबतक ऐसे शिकायतों से कुछ भी नही हो सकता है।
- मामला रफा-दफा करने में जुटे अधिकारी
बेशक मालखरौदा जनपद के अधिकारी अनेकों नियम बनाकर गुणवत्ता की जांच करता हो लेकिन कुछ अधिकारियों द्वारा इससे दबाने के प्रयास में नियम, कानूनों को ताक पर रख दिया जाता है. जानकारी में यह बात स्पष्ट हो रही है कि मालखरौदा जनपद के जांच अधिकारियों द्वारा नियमों को तोड़कर जमकर गोलमाल किया जा रहा है। इस संबंध मे जब जांचकर्ता अधिकारीयों को बात की जा रही है तो गोलमाल जवाब आने लगी है। जिसको समझा जा सकता है. जांच अधिकारी जांच में गोलमाल जांच प्रतिवेदन दर्शाने की तैयारी में है। यानी के इससे प्रभाव का नतीजा कहें या फिर कुछ ओर लेकिन कारण जो भी हो आखिरकार विभाग का खामियाजा आम लोगों को जरूर झेलना पड़ेगा। लेकिन जांच अधिकारी इस मामले में अपने को केवल जांच तक ही सीमित बताकर पल्ला झाडऩे की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कहा जा रहा कि रिकवरी डालने व छोडऩे का काम अधिकारी का है। हां, इससे एक बात जरूर स्पष्ट नजर आ रही कि मालखरौदा जनपद क्षेत्र के आमनदुला में हुए 10 लाख के गुणवत्ताहिन् नाली निर्माण कार्य के गोलमाल में अधिकारियों की मंशा इस मामले को रफा-दफा करने की लगती है।
,, *इस संबंध में उक्त मामले की जांचकर उचित करवाई की जाएगी।*
एस. एन वर्मा जनपद सीईओं मालखरौदा।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने खुलासा करते हुए कहा कि कल आत्महत्या का प्रयास करने वाले धमतरी निवासी हरदेव सिन्हा ने दिनांक 29/03/2017 को तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को भृत्य पद की नियुक्ति हेतु आवेदन जनदर्शन कार्यक्रम में सौंपा था जिसका की क्रमांक-2017/848 था।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने ट्विटर में लिखा है कि हरदेव सिन्हा के आत्महत्या के प्रयास को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सफलता समझे या विफलता अब जब सारे तथ्य सामने आ चुके हैं और यह स्पष्ट हो चुका है कि धमतरी निवासी हरदेव सिन्हा तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह को लिखित में पत्र सौंपकर सरकारी नौकरी की मांग की थी उस पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अपने डेढ़ साल के अंतिम कार्यकाल में पहल क्यों नहीं किया?
कांग्रेस पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह कर आरोप लगाते हुए कह रही है की भाजपा शासनकाल में 25 लाख बेरोजगार पंजीकृत और 25 लाख बेरोजगार अपंजीकृत थे और जिस युवक ने आत्मदाह का प्रयास किया वह भी पूर्ववर्ती भाजपा से ही प्रताडि़त था इस सवाल का जवाब भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को जनता के समक्ष आ कर देना चाहिए।
शौर्यपथ लेख / आजकल एक पोस्ट वायरल हो रही है कि पेशेंट नही बचा तो Dr को पैसे मत दो या कोरोना काल मे हॉस्पिटल फ्री कर दो। हालांकि कोरोना काल में Dr का योगदान देखते हुए थोड़ी कमी भी आई। पर ऐसी मानसिकता क्यों? क्या Dr साहब ने गलत दवा ,इलाज दिया? फिर भी परिणाम के आधार पर उनको मेहनताना नही देना चाहते। अच्छा एक बात बताइए,जब मूवी जाते हैं पसंद नही आती तो क्या पैसे वापस होते हैं? जब इंडियन टीम हारती है तो क्या खिलाड़ियों का खाना पीना बन्द हो जाता है? मैच टिकिट वापस हो जाएगी या होटल में समोसा खाकर क्या टेस्ट के हिसाब से पेमेंट कर सकते हैं? गलवान वेली में शहीद जवानो के परिजन क्या आर्थिक मदद के हकदार नही? क्योकि बच्चा युद्ध मे मारा गया और मरकर युद्ध जीते नही जाते? या हम उनकी कुर्बानी, उनके जस्बे ,उनकी कोशिश को महत्व देते हैं??
तो सारा इंसानियत का ठीकरा अकेले Dr का ही क्यो है? एक कपड़ा व्यापारी भी बिका माल नही लेता वो ठीक है पर Dr की कब्र खोदना देशहित में है। अगर परिवार को उनके फेवर में रिजल्ट नही मिलता तो वो हॉस्पिटल जलाने को तैयार हो जाते हैं। क्या इंडियन क्रिकेट प्लेयर्स के साथ हारने पर ऐसा सरकार होने देगी? दारू पी पी के लिवर सड़ा चुका व्यक्ति भी Dr के इलाज को ही दोष देता है चाहे चेकअप और इलाज का विचार मरने के 2 दिन पहले देवयोग से आया होगा। अगर किसी ज्योतिष की गणना गलत निकली तो क्या फाँसी दे दोगे?
क्या ये मानव स्वभाव है कि जब ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश टकराते थे और कांटे का मैच गलती से हो गया तो सब बांग्लादेश की जीत चाहते थे। क्योकि जब व्यक्ति टॉप पर होता है तब सब जयजयकार करते है पर जब वो ऊंचाई से गिरता है नाकामयाब होता है तब भी लोगो को मजा आता है।अभी पतंजलि पर जोक मारे जा रहे हैं। असल मे हमारे अंदर का ईगो हमे ये करने पाए मजवूर करता है।
एक बच्चा कठोर मेहनत करके माँ बाप की आर्थिक मानसिक मदद से Dr बनता है। उसके बाद कड़ी मेहनत से जॉब करता है या महंगे उपकरण खरीदकर क्लिनिक लगाता है। तब भी उसे काम करके ही कमाना होता है। जिन परिस्थितियो में आम आदमी का दिमाग बन्द हो जाये वो अपना कैरियर अपनी प्रतिष्ठा अपना नाम दाव पर लगाकर जटिल परिस्थितियों में आपरेशन कर एक व्यक्ति की जान बचाता है। क्या बाहर तलवार लिए लोगो की कल्पना के बाद वो बिना हाथ कंपकपाये वो जटिल काम कर पायेगा? लोग हर काम गलती कर सीखते हैं क्या Dr के पेशे में गलती जायज है? खुद को उस जगह रखकर देखिए। तो उस व्यक्ति को धन्यवाद देने के बजाय हम चाहते है कि उसे सजा हो अगर परिणाम हमारे हक में नही आया।
अब क्या मौत पर Dr काबू पा सकता है? क्या साइंस वहां तक पहुच चुकी है ?नही न। पर कोशिश तो जरूरी होती है तो उस कोशिश का पार्ट बनने के बजाय हम जज क्यो बन जाते हैं? जहाँ तक भ्रष्टाचार की बात है वो हर फील्ड में है पर मेडिकल भ्रष्टाचार हाईलाइट ज्यादा होता है फिर सभी को उसी नजर से देखा जाने लगता है। समझदारी इसमे है कि गलत सही का फर्क समझा जाए और धारणा बनाने के बजाय बुद्धि की कसौटी पर कसकर फैसला लिया जाए।।
आप पहले ये बात समझिये की आप पैसे देकर दवा खरीद सकते है जिन्दगी नही। संजीवनी बुटी अगर खोज ली जाये तो अलग बात है। रही बात मरीज के इलाज की,तो 99% केसेस मे इलाज पूरी ईमानदारी से किया जाता है। बिलिंग हर हॉस्पिटल की अलग जरुर हो सकती है। जैसा बाकी होटल, थिएटर सभी मे अलग अलग होता है।
दिक्कत तब आती है जब व्यक्ति पैसे देकर हॉस्पिटल को अपना ससुराल समझने लगता है और Dr को गुलाम। फिर उसको कोशिश से नही परिणाम से मतलब होता है। इंडियन मैडिकल लॉ बोलता है की कोई भी इलाज शर्तिया नही किया जा सकता न ही ऐसा दावा वैध है। कोरोनिल पर हुआ विरोध का एक कारण ये भी था।।अगर लापरवाही होती है तो उसमे treatment quality चेक की जाती है न की रिजल्ट।
आप बताओ एक मरीज जो पूरी चिकित्सा पद्धति से अंजान है किस तरह हॉस्पिटल को दोषी घोषित कर सकता है? फिर खुद दण्डाधिकारी बनने लगता है? Dr को पैसा देने मरीज नही जाता अपनी समस्या हल करवाने जाता है। भगवान तब तक है Dr जब तक मरीज के काम आ रहा है। अब तो लोग नारियल चढाकर भगवान को खरीदते है तो Dr क्या चीज है पर मौत बिकती नही। Dr के खिलाफ बढती हिंसा और सोशल मीडिया पर उड़ती कहानियां इसके लिये उतनी ही जिम्मेदार है।
मैने हमेशा देखा है एक दंत चिकित्सक के तौर पर जो आदमी 50 गुटके डेली खा रहा है अपनी तकलीफ का कारण Dr की दांत सफाई को बताता है। 10 साल बाद भी बोलता है अगर चेकअप नही करवाता तो सब ठीक होता। फिर विमल का पैकेट फाडता है।लोगो को बस हर हाल मे अच्छा रिजल्ट चाहिये होता है। खुद किसी चीज़ की जिम्मेदारी नही उठाते न स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं पर हॉस्पिटल मे पैसा भरकर मौत को खरीदने की इच्छा रखते हैं। जब दिल की धड़कन थम जाती है तो वही Dr जो अभी भगवान्ं का रुप था अचानक यमराज नजर आने लगता है, हॉस्पिटल नर्क का द्वार दिखाई देने लगता है। फिर शुरु होता है गुण्डागर्दी, दंगाई का दौर। शरीफ आदमी रोड,सलिया,मशाल लेकर ट्रको मे भरकर पहुचते है हॉस्पिटल जलाने । तब इनको ख्याल नही आता की अस्पताल मे और मरीज भी है, Dr की फैमिली भी है । वो भी एक इंसान है जो सिर्फ अच्छा करने की कोशिश कर रहा है जैसे हम सब करते हैं।। विश्वास पर दुनिया कायम है हम अपने पिता से पिता होने का सबूत नही मांगते। वैसे ही मरीज और Dr का आपसी विश्वास ही सही इलाज की तरफ पहला कदम है। पर जैसे 1 मछली तालाब को गंदा करती है इस प्रोफेशन में भी कुछ दिक्कतें है पर सोशल मीडिया की अतिवादिता का शिकार होने के बजाय आँख नाक कान खोलकर हॉस्पिटल की सेवाएं लें बिना किसी पूर्वग्रह से ग्रस्त हुए। किसी एक घटना को पूरे सिस्टम की बदनामी का कारण न बनने दें। साथ ही सभी Dr और हॉस्पिटल से भी अनुरोध करूँगा की जीवन की अंधी दौड़ में इस देवतुल्य प्रोफेशन से समझौता ना करें।
स्वास्थ्य रहें। stay safe ( लेखक - डॉ.सिद्धार्थ शर्मा )
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में लोग अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सारे जतन कर रहे हैं। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ आद की खूब डिमांड है। पहले की तुलना में इस वक्त इनकी खपत बढ़ गई है।
डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, वह कोरोना वायरस से बचे हैं। इसीलिए लोग अब अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए पूरी तरह जुटे हैं। आयुर्वेदिक दवाओं एवं जड़ी बूटियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आमतौर पर खाने में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी एवं काली मिर्च का लोग जोशांदा या काढ़ा बनाकर भी पी रहे हैं। खाने में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजार में सोंठ की बिक्री भी बढ़ गई है। लोग इसका इस्तेमाल कई तरह से कर रहे हैं। तुलसी का उपयोग चाय या फिर काढ़ा में किया जा रहा है। गिलोय को भी लोग पानी में उबालकर पी रहे हैं। दुकानदार अहमद रशीद बताते हैं कि पहले इन सामग्रियों की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन माहभर से इनकी डिमांड बढ़ गई। लोग अधिक मात्रा में आकर ले जा रहे हैं। डिमांड अधिक होने से कीमत भी बढ़ी हुई है। डॉक्टर भी इन सामग्रियों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर बता रहे हैं। घरों में चाय की जगह काढ़ा: कोरोना की वजह से कई घरों में देखने को मिल रहा है कि वहां सुबह-शाम चाय की जगह काढ़ा ही बनाया जा रहा है। बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक सभी को इसे पीने के लिए दिया जा रहा है। मां-बाप बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दूध में हल्दी भी डालकर दे रहे हैं।
दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसके उपयोग से कोई नुकसान नहीं है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी जड़ी बूटियों का फार्मूला भेजा है। इनमें उक्त सामग्रियां भी शामिल हैं। इन सब के साथ अगर लोग गुनगुने पानी का भी सेवन करें तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और तनाव के मामले बढ़े जरूर हैं, पर इसका घरेलू समाधान भी है। ताजा शोध से पता चला है कि काले तिल के नियमित सेवन से हाइपरटेंशन को काबू में रखा जा सकता है। थाईलैंड के महिडोल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप पर अपने शोध के बाद यह दावा किया है।
अध्ययन में पाया गया कि चार सप्ताह तक काले तिल के सेवन से रक्तचाप में छह प्रतिशत तक की कमी आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि तिल में मौजूद मैग्निशियम,उच्च पॉलीसेचुरेटेड फैटी एसिड,फाइटोस्टेरॉल और लिगनान समेत अन्य तत्व रक्तचाप को दुरुस्त रखने में मददगार हैं।
भोजन में मैग्निशियम की कम मात्रा रहने से रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। क्लीनिकल ट्रॉयल में भी पाया गया कि मैग्निशियम लेने से रक्तचाप घटाने में मदद मिलती है।
इसके पहले ऑस्ट्रेलिया के मेंजिस हेल्थ इंस्टीट्यूट क्वींसलैंड एंड स्कूल ऑफ मेडीसिन ने भी अपने अध्ययन में पाया था कि काले तिल का सेवन रक्तचाप को कम रखने में सहायक है।
काला तिल खनिजों का खजाना:
काला तिल मैगनीज, मैग्निशियम, कॉपर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे खनिज तत्वों का स्रोत है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी-1 और पाचन को सुगम बनाने वाले फाइबर भी पाए जाते हैं।
शारीरिक सक्रियता जरूरी:
शोधकर्ताओं ने रक्तचाप घटाने के लिए शरीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहने, स्मोकिंग से दूर रहने तथा कॉफी-चाय और कोला जैसे पेय से दूर रहने की सलाह दी है। गौरतलब है कि हाइपरटेंशन का हृदय की बीमारियों और असामयिक मौत से सीधा संबंध है।
क्या है रक्तचाप:
रक्तचाप का अभिप्राय इस बात से है कि अपकी धमनियों पर रक्त कितना दबाव डालता है। यदि किसी का रक्तचाप 120/80 एमएम एचजी मापा गया, तो इसमें पहला नंबर यानी 120 उस दबाव को दर्शाता है जो हृदय द्वारा रक्त को पंप करते समय उत्पन्न होता है। इसे सिस्टोलिक रक्तचाप भी कहते हैं। दूसर नंबर यानी 80 उस दबाव को दर्शाता है जब हृदय शिथिल होकर खून को अपने अंदर भरता है, इसे डायस्टोलिक रक्तचाप कहते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / वार्ड 60 कातुलबोर्ड में भाजपा की पूर्व पार्षद अल्का बाघमार की पार्षद निधी से निर्मित बस स्टॉप में लगे शीला पट्टिका से पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकर व पूर्व पार्षद के फोटो में वर्तमान कांग्रेस पार्षद के इशारे में द्वेषपूर्ण ढ़ंग से पोतकर मिटाए जाने के मामले अब तूल पकड़ लिया है इस मुद्दे को लेकर आज नेता प्रतिक्षपक्ष अजय वर्मा व पटरीपार मंडल भाजपा अध्यक्ष लोकेश बघेल के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों व पार्टी पदाधिकारियों ने निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन को ज्ञापन सौंपकर इस प्रकार की ओछी राजनीति करने वालो पर कड़ी आपत्ति करते हुए इस पूरे मामले की जांच कर पूर्व महापौर व पूर्व पार्षद के फोटो व नाम मिटाने वाले दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग करते हुए पूर्ववत स्थिति नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
कातुलबोर्ड वार्ड में स्कूल बस व यात्री बस के रुकने व वहा के नागरिकों के सुविधा के लिए वर्ष 2019 के पार्षद निधी से तत्कालीन वार्ड पार्षद अल्का बाघमार ने अपने पार्षद निधी से 3 लाख की राशि की अनुसंशा की थी जिसके स्वीकृति पश्चात गत वर्ष निगम चुनाव पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकर के हाथो लोकार्पित किया गया था जिसमें पूर्व महापौर व वार्ड पार्षद अल्का बाघमार का नाम फोटो की पट्टिका व निर्माण निधी के वर्ष लिखकर लगाई गई थी जिसे अब वर्तमान कांग्रेस पार्षद के इशारे से वार्ड में कार्यरत निगम के दो कर्मचारियों द्वारा खुलेआम पोतकर मिटा दिया गया ताकि वर्तमान पार्षद जयश्री जोशी अपनी फोटो लगा सके और इस कार्य को खुलेआम किया गया जिसे स्थानीय नागरिकों द्वारा देखकर मना भी किया गया जिससे वे पार्षद के निर्देश पर पोतने की बात करते हुए पूरे नाम व फोटो को मिटा दिया जिससे आक्रोशित भाजपा पार्षदों व कार्यकर्ताओं ने गंभीरता से लेते हुए आज इस मुद्दे को लेकर निगम आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर इस प्रकार की घटिया हरकत करने वाले कर्मचारी पर कड़ी कार्यवाही मांग किया.
जिस प्रकार आयुक्त ने इस पर अनभिज्ञता प्रकट करते हुए इसकी तत्काल जांच कराने व कार्यवाही हेतु निर्देशित किया इस अवसर पर भाजपा नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा ने विधायक व महापौर पर हमला बोलते हुए कहा कि निगम जब से कांग्रेस की परिषद आई है तब से पूरे निगम में विधायक वोरा के इशारे पर ही निगम के कार्य प्रणाली चल रही है और उनके लगातार बेवजह हस्तक्षेप व बदलापुर की राजनीति के चलते न केवल विपक्ष बल्कि उन्ही के पार्टी के सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि के साथ भी सौतेलापन होते जा रहा है एक तरफ उन्हीं के चाटुकार लोगो के इशारे पर पूर्व के भाजपा पार्षद के कार्यकाल में लगे पट्टिका के नाम व फोटो को अनैतिक रूप से मिटाया जा रहा है तो वहीं अपनी गुटीय राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते अपने निगम के सभापति राजेश यादव व विभागीय प्रभारियों का नाम भी अब अपने भूमिपूजन लोकार्पण पत्थरो से गायब कर रहे है जिसका ताजा उदाहरण वार्ड 46 पद्मनाभपुर में उद्यान लोकार्पण में देखने को मिला जिसमें सभापति सहित प्रभारियों का नाम पत्थरो में नहीं लिखा गया और नहीं बुलाया गया जिसका भाजपा पार्षद दल विरोध करती है व जनप्रतिनिधियों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी।
निगम आयुक्त को ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराने वालों में नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा, मंडल भाजपा अध्यक्ष लोकेश बघेल,जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन,पार्षदगण श्रीमती गायत्री साहू, देवनारायण चंद्राकर,शिवेंद्र परिहार,नरेंद्र बंजारे,चमेली साहू अजय वैद्य,पार्षद कमल देवांगन,पुष्पा गुलाब वर्मा,कुमारी राकेश साहू,पूर्व पार्षद अल्का बाघमार,विजय जलकारे,दिलीप साहू,सविता साहू,पूर्व एल्डरमैन विद्या नामदेव,पूर्व मंडल अध्यक्ष सुरेश दीक्षित,अभिषेक गुप्ता,युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष तेखन सिन्हा,महिला मोर्चा महामंत्री गायत्री वर्मा,सीमा तिडके,श्वेता बख़्शी,मन्नू साहू सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर वनमण्डल के तेंदूपत्ता संग्राहकों को तेंदूपत्ता संग्रहण के पारिश्रमिक की राशि का नगद भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखमा ने आज मुख्यमंत्री बघेल को तेन्दूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक की राशि के नगद भुगतान के लिए पत्र लिखकर अनुरोध किया, जिस पर उन्होंने तत्काल स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मंत्री ने लिखा है कि वनमण्डल सुकमा, वनमण्डल दंतेवाड़ा और वनमण्डल बीजापुर तीनों घोर संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिलों में हैं। इन जिलों के तेंदूपत्ता संग्राहकों और जनप्रतिनिधियों ने तेंदूपत्ता पारिश्रमिक का नगद भुगतान कराने का आग्रह किया है। श्री लखमा ने पत्र में लिखा है कि इन तीनों जिलों में भी तेंदूपत्ता का भुगतान बैंक के माध्यम से करने का प्रावधान है। परंतु संग्राहकों के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता नहीं होने के कारण बैंक के माध्यम से भुगतान में काफी दिक्कत होती है। एक तो यह क्षेत्र संवेदनशील है और अंदरूनी गांवों से बैंक की दूरी 70 से 80 किलोमीटर तक है। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों और इन जिलों के जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर तेंदूपत्ता संग्राहकों को बैंक से पारिश्रमिक से भुगतान के आदेश को निरस्त करते हुए सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर तीनों वनमण्डलों में तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक की राशि का नगद भुगतान कराने के निर्देश दिए हैं।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर के विधायक व महापौर देवेंद्र यादव जी ने आज अमृत मिशन फेस 2 योजना के तहत भिलाई नेहरू नगर में निर्माणाधीन 66 एमएलडी फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ठेकेदार और निगम इंजीनियरों से सख्त लफ्जों में कहा कि जनहित के कार्यो पर किसी भी प्रकार की लापरवाही गैर जिम्मेदारी और लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अमृत मिशन फेस 2 लोगों के लिए बहुत ही जरूरी है। इसलिए इस काम को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही महापौर ने ठेकेदार व निगम के इंजीनियरों से पूछा कि अमृत मिशन के इस 66 एमएलडी फिल्टर प्लांट को शुरू करने में अभी क्या-क्या काम बचा है। तब निगम के इंजीनियरों ने बताया कि मैनुअली सारा काम हो गया है। प्लांट भी बन कर तैयार हो गया है। कुछ तकनीकी चीजें ही बची है जिसे वह जल्द ही पूरा कर लेंगे। लॉकडाउन की वजह से उनकी टीम जो बाहर प्रदेश से यहां आकर काम कर रही थी। वह लोग सभी अपने घर चले गए हैं। उनकी पूरी टीम 1 तारीख तक भिलाई आ आएगी। उसके बाद जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
महापौर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जल्द से जल्द फिल्टर प्लांट को चालू किया जाए और अब किसी भी प्रकार का एक्सक्यूज नहीं सुना जाएगा। प्लांट को शुरू करने के अमृति मिशन फेस 2 के बचे हुए कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। महापौर यादव फिल्टर प्लांट का पूरा निरीक्षण किए।
इस दौरान निगम फिल्टर प्लांट के इंचार्ज संजय शर्मा, ईई बृजेश श्रीवास्तव, सब इंजीनियर हरप्रित बंजारे, पीडीएमसी से राजेश और मनोज पात्रा सहित एजेंसी की तरफ से 66 एमएमडी और 6 एमएलडी के इंचार्ज नितेश वर्मा भी मौके पर उपस्थित रहे।
दुर्ग ( भिलाई स्टील प्लांट ) / शौर्यपथ / सेक्टर पांच निवासी एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के आरसीएल विभाग मे ंकार्यरत बेदनलाल गेन्द्रे ने अपने ही विभाग के तीन अधिकारियों के उपर मानिसक रूप से प्रताडि़त करने, अपमानित करने, जातिगत रूप से मजाक उड़ाने के साथ साथ मुझे आत्महत्या के लिए विवश करने के अलावा मुझे झूठे मामले में फंसाने और मेरी नौकरी खाने जैसी धमकियां पिछले कई दिनों से दे रहे हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, एसएसपी दुर्ग। अजाक थानाप्रभारी और कोतवाली थाना प्रभारी भिलाई के पास शिकायती आवेदन दिया है। आवेदन मिलने के बाद कोतवाली थाना प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी ने बताया कि ेसंयंत्र कर्मी गेन्द्र द्वारा बीएसपी के तीन अधिकारियों के विरूद्ध प्रताडि़त करने का शिकायत प्राप्त हुआ है, मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस मामलें शिफ्ट मैनेजर कुलदीप कुमार शेट्टी ने हमारे संवाददाता ने उनके सेलफोन से चर्चा करने पर उन्होंगे अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैं अभी प्लांट में हूं, यहां शोर गुल अधिक है, मैं आपसे बाद में चर्चा करूंगा।
गेन्द्रे ने अपने आवेदन के माध्यम से बताया कि महाप्रबंधक केे व्ही शंकरराव, सिफ्ट मैेनेजर कुलदीप कुमार शेट्टी जातिगत आधार पर मेंरा बार बार मजाक उडाते है, और मेरी जाति को लेकर अभद्र टिप्पणी करतेहैं। विभाग में हम सभी सहकर्मी आपस मे ंबैठकर चाय नाश्ता करते थे। इन दोनो अधिकारियों ने अपने पद और शक्ति का उपयोग करते हुए उन्हें जातिगत आधार पर मेरे साथ दुव्र्यवहार करने दूसरे कर्मचारियों पर दबाव बनाते है। भोजन करते समय ये लोग मुझे अपने पास भी नही बैठने देते और मेरे साथ छुआछुत वाली स्थिति अपनाते है और मुझे दूर भगाते हैं। मेरे द्वारा इन दोनो अधिकारियों से जब इस प्रकार का कृत्य मेरे साथ नही करने कहा जाता था तो ये नाराज होकर कुलदीप शेट्टी मुझे बहुत बुरा भला कहकर उल्टा सीधा सुनाने लगता था। और कहता था कि अपने अधिनस्थ लोगों के साथ तुम्हारा काम करना मुश्किल कर देेंगे और तुम्हारे उपर झूठी विभागी कार्यवाही करूंगा कहकर मुझे धमकी देते थे। इसके कारण मैं काफी डरा सहमा हुुआ हूं।
मेरे द्वारा इस मामले की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग में भी की गई है। इसकी जानकारी मिलते ही ये दोनो अधिकारी मुझसे और अधिक नाराज हो गये। मेरी शिकायत इन लोगों ने मेरी शिकायत कार्मिक महाप्रबंधक संजय द्विवेदी से किये। उसके बाद संजय द्विवेदी ने मुझे अपने कार्यालय बुलाया तो मैं अपने दो सहकर्मियों रिखीराम साहू, कुशलप्रसाद खुंदे को लेकर संजय द्विवेदी के कार्यालय पहुंचा। वहां पर महाप्रबंधक द्विवेदी भी मुझे देखकर जोर जोर से झिल्लाते हुए जातिगत गालियां देने लेगे और कहने लगे कि अनुसूचित जाति आयोग तुम्हारे बाप ने बनाया है क्या जो वहां बार बार पहुंच जाते है, तुमलोगों को मुफ्त में नौकरी मिली है हराम का खा रहे हो,इधर उधर अधिक शिकायत करोंगे तो पूरी नेतागिरी निकाल दूंगा। अच्छे अच्छे कास्ट वालों को मैंने सुधार दिया है, तुम्हारी क्या औकात है अब सिर्फ तुम्हारी पिटाई करना बाकी है, वह भी जल्दी हो जायेगी। उस समय महाप्रबंधक संजय द्विवेदी मुझे मारने के लिए जुता भी निकाल लिये थे। ये तीनों अधिकारी मेरे खिलाफ षडयंत्र रच रहे है। 15 अगस्त 2019 से 16 नवंबर 2019 तक जबरन मेरा हाजिरी भी ये लोट काट दिये। बिना किसी आधार के ये लोग मुझे बार बार मेरी नोैकरी को लेकर पत्र जारी कर रहे है, ताकि ये लोग षडयंत्र रचकर मुझे मेरी नौकरी से ये लोग निकाल सके।
इन दिनों मैं बहुत ही विषम परिस्थितियों से गुजर रहा हूं, इसके कारण मेरी मानसिक स्थिति भी ठीक नही है, मुझे बीएसपी के कार्मिम विभाग से न्याय की कोईउम्मदी नही रही। संजय द्विवेदी पूर्व मे ंभी कई अनु.जाति एवं जनजाति के कर्मचारियों पर अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर नौकरी में बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। संजय द्विवेदी जातिगत दुर्भावना से ग्रसित है। छोटी जाति वालों पर व्यक्तिगत विद्व्रेष रखता है। कर्मियों का ट्रंास्फर, पोस्टिंग एवं प्रमोशन जैसे कार्यों के लिए ये अधिकारी भ्रष्टाचार में पूर्णत: लिप्त है। इनका जीवन विलासिता से भरा हुआ है। तीनों अधिकारी बहुत ही प्रभावशील है, मुझे किसी भी षडयंत्र से नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके डर से कोई भी बीएसपीकर्मी साहस नही जुटा पता। इनका प्रभाव संयंत्र के अंदर इतना अधिक है, कि इनके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायत करने का भी कोई साहस नही कर रहा है। इनके अत्याचार से यहां के सभी बीएसपी कर्मचारी चुप है। इन तीनों अधिकारियों ने मुझे जातिगत आधार पर बहुत अधिक प्रताडि़त कर रहे है.
मेरे साथ परिवार की जान को खतरा
गेंद्रे ने कहा कि इन तीनों से मेरे अलावा मेरे परिवार को भी जान से खतरा है। मेरे परिवार और मेरी नौकरी को भी नुकसान पहुंचा सकते है। यदि ये लोग मुझे इसी तरह प्रताडि़त करेंगे तो मैं आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाऊंगा। मेरे और मेरे परिवार के साथ यदि कोई भी घटना होती है तो इसके जिम्मेदारी भी यही तीनों अधिकारी होंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
