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दुर्ग / "वाद से समाधान, मध्यस्थता से सम्मान और सौहार्द से सशक्त समाज का निर्माण" के मूल उद्देश्य को साकार करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा 25 जुलाई 2026 से 29 जुलाई 2026 तक पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 25 जुलाई 2026 को प्रातः 08:45 बजे आयोजित होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह के साथ किया जाएगा।
कम्यूनिटी मीडियेशन अर्थात् सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण भारत में सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनहितकारी पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालयों तक पहुँचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" के निर्माण के संकल्प के साथ जिले के पांच ग्राम घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है, जहाँ कम्यूनिटी मीडियेशन की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाने एवं सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएँ एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन ग्रामों से चयनित 15 कम्यूनिटी मीडियेटर्स इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे, जिन्हें Potential Trainers द्वारा कम्यूनिटी मीडियेशन की संपूर्ण प्रक्रिया, उसके व्यावहारिक पक्षों एवं विवाद समाधान के कौशलों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने हेतु मल्टी सेक्टोरियल एप्रोच (Multi-Sectoral Approach) को अपनाया गया है। इसके अंतर्गत राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला दुर्ग स्थित समस्त विधि महाविद्यालयों के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण का सक्रिय सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।
दुर्ग में देर रात धरना स्थल हटाने की कार्रवाई के बाद फिर जुटे शिक्षक, कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का लगाया आरोप
दुर्ग। प्रदेशभर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों और राज्य सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई तक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने का अंतिम अवसर (अल्टीमेटम) दिया है, वहीं दूसरी ओर दुर्ग में देर रात प्रशासन द्वारा धरना स्थल हटाने और आंदोलनकारियों को हटाए जाने की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है।
देर रात प्रशासन की कार्रवाई, सुबह फिर धरने पर लौटे शिक्षक
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात जिला प्रशासन और पुलिस ने धरना स्थल पर पहुंचकर वहां लगाए गए टेंट, बैनर और अन्य सामग्री को हटाया। इसके बाद आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को वहां से हटाकर अस्थायी निवास स्थलों तक पहुंचाया गया। हालांकि गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पुनः धरना स्थल पर पहुंचे और बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा।
अरुण वोरा का हमला, बोले— संवाद छोड़ दमन का रास्ता अपनाया गया
पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने प्रशासन की कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वर्षों से प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले अतिथि शिक्षक अपनी आजीविका और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांगों का समाधान बातचीत और संवेदनशीलता से होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन का समाधान दमन नहीं, बल्कि सार्थक संवाद और सहमति से निकाला जाना चाहिए।
संचालनालय का स्पष्ट आदेश— 27 जुलाई तक लौटें, अन्यथा सेवा समाप्त
स्कूल शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से ही हड़ताल के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक हित प्रभावित हो रहा है।
आदेश के अनुसार यदि कोई अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो वर्ष 2019 की अतिथि शिक्षक व्यवस्था के प्रावधानों के तहत उसकी सेवाएं समाप्त मानते हुए संबंधित विद्यालयों में नई नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। साथ ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं स्कूल प्रबंधन समितियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षकों का रुख बरकरार
आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी लंबित मांगों—नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, वेतनमान और मानदेय वृद्धि—पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय दबाव की नीति अपना रही है।
शिक्षा व्यवस्था और राजनीति दोनों के लिए अहम मुद्दा
सरकार विद्यार्थियों के हितों का हवाला देकर शिक्षकों से कार्य पर लौटने की अपील कर रही है, जबकि अतिथि शिक्षक अपने भविष्य और रोजगार सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
शौर्यपथ विश्लेषण
अतिथि शिक्षकों का आंदोलन ब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच शीघ्र संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो इसका सीधा प्रभाव प्रदेश की सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
जिंदल स्टील में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने और पार्टनर बनाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने का आरोप, पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट ने दिया हस्तक्षेप का आदेश
भिलाई/दुर्ग। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर राजेश चौहान कानूनी विवादों में घिर गए हैं। दुर्ग जिले की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अदालत ने कथित ₹17.52 लाख की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े मामले में सुपेला थाना पुलिस को उनके तथा उनके सहयोगी निकेश झा के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यह मामला भिलाई निवासी ठेकेदार उपेन्द्र सिंह द्वारा दायर आवेदन पर सामने आया है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने जिंदल इस्पात लिमिटेड (JSP) में ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने और अपनी फर्म में 50 प्रतिशत साझेदारी देने का भरोसा दिलाकर लाखों रुपये प्राप्त किए, लेकिन न तो काम दिलाया और न ही राशि वापस की।
वर्ष 2021 से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
याचिका के अनुसार वर्ष 2021 में उपेन्द्र सिंह की मुलाकात निकेश झा के माध्यम से पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान से हुई। शिकायत में दावा किया गया है कि राजेश चौहान ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने और बड़े औद्योगिक संस्थानों में प्रभाव होने का हवाला देकर विश्वास अर्जित किया।
इसके बाद दोनों आरोपियों ने जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्टिंग का कार्य दिलाने तथा 'आरएन इंटरप्राइजेज' में 50 प्रतिशत साझेदार बनाने का प्रस्ताव रखा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुरक्षा राशि और व्यवसाय शुरू करने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में ₹17,52,500 बैंक ट्रांसफर एवं चेक के माध्यम से लिए गए।
काम नहीं मिला, लौटाए गए चेक भी हुए बाउंस
शिकायत में कहा गया है कि लंबे समय तक कोई कार्य आवंटित नहीं किया गया। जब शिकायतकर्ता ने अपनी राशि वापस मांगी तो आरोपियों ने भुगतान के लिए कुछ चेक दिए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वे पर्याप्त शेष राशि न होने के कारण बाउंस हो गए।
आरोप है कि इसके बाद रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया और शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकी भी दी गई।
पुलिस से निराश होकर अदालत पहुंचे पीड़ित
उपेन्द्र सिंह ने पहले सुपेला थाना और दुर्ग पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया।
अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और चेक बाउंस संबंधी अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद सुपेला थाना पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधि अनुसार जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
व्यापारिक और खेल जगत में चर्चा
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर का नाम सामने आने से यह मामला व्यापारिक और खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया है। अब पुलिस न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
महत्वपूर्ण: यह मामला वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायालय की आगामी कार्यवाही के बाद ही होगा।
दुर्ग/भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित रूप से पिछले 40 वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी के आरोपों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित और बाद में हटाई गई पोस्ट बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब केवल निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच से ही सामने आ सकता है।
भोपाल से प्रकाशित बताए जाने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र 'जगत विजन' की एडिटर के रूप में अपना परिचय देने वाली विजया पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में भिलाई के प्रतिष्ठित व्यापारी इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम लेते हुए उन पर वर्षों से कथित लोहा चोरी सिंडिकेट संचालित करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट में पुलिस, भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत तक का उल्लेख किया गया था।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर vijaya pathak की पोस्ट पर अभी भी समाचार लिखे जाने तक देखी जा सकती है। पोस्ट को शौर्यपथ की टीम ने उसका स्क्रीनशॉट और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ली थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि उक्त सामग्री वास्तव में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित हुई है।
रिकेश सेन लगातार उठा रहे हैं 10 हजार करोड़ के कथित घोटाले का मुद्दा
उल्लेखनीय है कि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन पिछले कई दिनों से अपने सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए भिलाई स्टील प्लांट में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पोस्ट में बड़े खुलासे, जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने, केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिलाने तथा विधानसभा में मामला उठाने जैसी बातें कही हैं।
हालांकि अब तक विधायक ने किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया है। राजनीतिक और संवैधानिक मर्यादाओं को देखते हुए उनका यह रुख समझा जा सकता है, लेकिन लगातार संकेतों और दावों के बीच नाम सामने न आने से जनमानस में संशय की स्थिति भी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने भी नहीं दिया था स्पष्ट जवाब
इसी मुद्दे पर जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मीडिया ने सवाल किया था, तब उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की थी। ऐसे में मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पोस्ट के बाद उठे कई महत्वपूर्ण सवाल
सोशल मीडिया पर हुए पोस्ट के बाद हिसार में एक बार फिर चर्चा का विषय है कि क्या मामले की जांच की दिशा अब आगे बढ़ेगी या फिर सोशल मीडिया में हुए पोस्ट को हटाने का दबाव बनाया जाएगा?
यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बिना न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक कर देना उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। वहीं यदि आरोप सही हैं, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
दोनों परिस्थितियों में जांच जरूरी
यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। निष्पक्षता की दृष्टि से दोनों संभावनाओं की समान रूप से जांच होनी चाहिए—
यदि पोस्ट में लगाए गए आरोप प्रमाणित और तथ्यों पर आधारित हैं, तो पूरे कथित लोहा चोरी नेटवर्क की गहन जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
यदि आरोप निराधार या अपुष्ट थे, तो किसी प्रतिष्ठित नागरिक की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की भी विधिसम्मत जांच होनी चाहिए तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज कराएंगे और पोस्ट के पीछे के तथ्यों की जांच की मांग करेंगे, अथवा इस पूरे विवाद को नजरअंदाज करने का रास्ता अपनाएंगे।
वहीं दूसरी ओर, भिलाई स्टील प्लांट में कथित 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन से भी अब यह अपेक्षा बढ़ गई है कि यदि उनके पास इस संबंध में ठोस तथ्य और साक्ष्य हैं तो उन्हें उचित मंच पर सार्वजनिक करें, ताकि आरोप, संकेत और अटकलों की जगह सत्य सामने आ सके।
(नोट : यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्क्रीनशॉट तथा विभिन्न सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप संबंधित पोस्ट और सार्वजनिक दावों का उल्लेख हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध होना शेष है।)
ढाई वर्ष के कार्यकाल में जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और पुलिस परिवार के सहयोग के लिए जताया आभार, कहा— दुर्ग की यादें रहेंगी हमेशा साथ
दुर्ग/शौर्यपथ।
दुर्ग शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुखनंदन राठौर का लगभग ढाई वर्ष का कार्यकाल भावनात्मक विदाई के साथ संपन्न हो गया। उनका स्थानांतरण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगदलपुर के रूप में होने के बाद उन्होंने दुर्ग शहर के प्रभार से स्वयं को मुक्त करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से एक भावुक संदेश जारी किया, जिसने आम नागरिकों, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया जगत को भावुक कर दिया।
अपने संदेश में एएसपी राठौर ने कहा कि मार्च 2024 में दुर्ग जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) के रूप में शुरू हुआ उनका प्रशासनिक सफर अब सुनहरी यादों के साथ समाप्त हो रहा है। इस दौरान उन्हें जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया के साथियों, समाजसेवियों, विभिन्न संस्थाओं, अधिकारियों, कर्मचारियों, मित्रों, शुभचिंतकों एवं सहयोगियों से भरपूर स्नेह, विश्वास और सहयोग प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और विश्वास के कारण ही वे अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सके। इसके लिए उन्होंने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि स्थानांतरण के बाद भी दुर्गवासियों का स्नेह और अपनापन उन्हें इसी प्रकार मिलता रहेगा।
एएसपी राठौर ने अपने संदेश में दुर्ग की धार्मिक आस्था का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दुर्ग चंडी माई एवं सेक्टर-9 हनुमान जी की कृपा सदैव उन पर बनी रहे। उन्होंने कहा कि दुर्ग और भिलाई से जुड़ी मधुर स्मृतियाँ उनके मन-मस्तिष्क में हमेशा जीवित रहेंगी और जीवनभर उन्हें प्रेरित करती रहेंगी।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए भावुक शब्दों में लिखा—
"अलविदा दुर्ग... अलविदा भिलाई।"
एएसपी सुखनंदन राठौर के इस विदाई संदेश पर बड़ी संख्या में नागरिकों, पुलिस अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए जगदलपुर में भी सफल एवं जनहितकारी कार्यकाल की कामना की।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा इस वर्ष का भव्य सावन मेला छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उत्सव बनने जा रहा है। महापौर अलका बाघमार के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण समिति की प्रभारी हर्षिका संभव जैन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इस बार सावन मेले को पहले से अधिक आकर्षक, व्यवस्थित और जनभागीदारी से परिपूर्ण बनाया जाएगा।
समिति ने निर्णय लिया कि मेले में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय कलाकारों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक एवं पारंपरिक प्रतियोगिताओं का मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रमों की तिथियां, आयोजन स्थल, पंजीयन प्रक्रिया और व्यवस्थाओं की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र तैयार की जाएगी।
लोक संस्कृति और पारंपरिक खेल होंगे मुख्य आकर्षण
सावन मेले में पारंपरिक खेलों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिनमें फुगड़ी, रस्सीकूद, रस्साकशी, कंची दौड़, मटका फोड़ तथा दौड़ प्रतियोगिताएं शामिल रहेंगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अरसा, ठेठरी-खुर्मी, फरा और चीला जैसे पारंपरिक व्यंजनों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
मेले में छत्तीसगढ़ी वेशभूषा प्रतियोगिता, छत्तीसगढ़ी मॉडलिंग, लोक गायन प्रतियोगिता तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। समिति का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
'सावन मेला हमारी संस्कृति का उत्सव है'
समिति की प्रभारी हर्षिका संभव जैन ने कहा कि सावन मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी समिति सदस्यों से समन्वय, सक्रिय सहभागिता और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ आयोजन को सफल एवं यादगार बनाने का आह्वान किया।
बैठक में पार्षद विद्यावती सिंह, मनीष कोठारी, युवराज कुंजाम, लोकेश्वरी ठाकुर, शरद निर्मलकर, रामचंद सेन, लिपिक लता यादव, विकल निर्मलकर सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने आयोजन को भव्य बनाने के लिए अपने सुझाव दिए तथा विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई की नवनियुक्त आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह ने शुक्रवार को निगम सभागार में शहर के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों के साथ पहली बार परिचयात्मक एवं सीधा संवाद स्थापित किया। इस संवाद में 50 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया और शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं तथा निगम की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का मूल उद्देश्य नागरिकों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल, स्वच्छता, सड़क, जलनिकासी और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शहर के समग्र विकास के लिए प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जाएगा।
वर्षा में जलभराव वाले क्षेत्रों पर होगी त्वरित कार्रवाई
संवाद के दौरान आयुक्त ने कहा कि बारिश के दौरान जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्य कर नागरिकों को राहत पहुंचाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण कर स्थायी समाधान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
बीएसपी के साथ बेहतर समन्वय से सुधरेंगी नागरिक सुविधाएं
सुश्री सिंह ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यों को गति दी जाएगी। विशेष रूप से बीएसपी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए बीएसपी प्रबंधन के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
हर सोमवार होगी जनसुनवाई, लंबित प्रकरणों का होगा त्वरित निराकरण
आयुक्त ने घोषणा की कि प्रत्येक सोमवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक निगम कार्यालय में नियमित जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां नागरिकों की समस्याएं सीधे सुनी जाएंगी और उनके त्वरित समाधान का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निगम में लंबित फाइलों की समीक्षा कर विलंब के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
100 प्रतिशत ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का लक्ष्य
निगम की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे फाइलों के निस्तारण में गति आएगी और कार्यों की ऑनलाइन निगरानी भी संभव होगी।
राजस्व बढ़ाने के लिए कर वसूली और दुकानों की पारदर्शी नीलामी
नगर निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए करों की समयबद्ध वसूली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही निगम की दुकानों की पारदर्शी नीलामी कर राजस्व में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे, ताकि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ सके।
'मिशन क्लीन सिटी' में शामिल कराने की तैयारी
स्वच्छता को लेकर आयुक्त ने कहा कि भिलाई को 'मिशन क्लीन सिटी' में शामिल कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। इससे शासन से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त होगी और शहर की सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
नई पानी टंकियां, शहीद पार्क और संजय नगर तालाब भी प्राथमिकता में
आयुक्त ने बताया कि शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई पानी टंकियों के निर्माण की योजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही शहीद पार्क सेक्टर-5 के बेहतर संचालन, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) की योजनाओं को गति देने तथा संजय नगर तालाब के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
मॉल पार्किंग व्यवस्था होगी व्यवस्थित
शहर के प्रमुख मॉलों में पार्किंग शुल्क और पार्किंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी आयुक्त ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों से चर्चा कर नागरिकों की सुविधा के अनुरूप व्यवस्थित और पारदर्शी पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में पहल की जाएगी।
मीडिया के सुझावों का होगा स्वागत
संवाद के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने जलभराव, स्वच्छता, पेयजल, कर वसूली, पार्किंग, बीएसपी क्षेत्र की समस्याओं सहित अनेक जनहित के मुद्दे उठाए। आयुक्त ने सभी प्रश्नों का तथ्यपरक एवं विस्तार से उत्तर देते हुए भरोसा दिलाया कि नगर निगम पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता के साथ शहर के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि मीडिया और नगर निगम के बीच सकारात्मक समन्वय शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए नागरिकों तक विकास कार्यों की सही और समय पर जानकारी पहुंचाने के लिए संवाद की यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
दुर्ग । शौर्यपथ । पंचशील नगर स्थित चंद्रशेखर आज़ाद स्कूल में कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना को लेकर पटरी पार मंडल अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पूरे मामले की जानकारी दी और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कथित रूप से एक छात्र द्वारा अन्य बच्चों को गोलियां दिए जाने के बाद कई बच्चों की तबीयत खराब हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मनमोहन शर्मा ने तत्काल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को अवगत कराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की मांग की।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि जामुल हॉस्पिटल में भर्ती सभी बच्चों के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि घटना के वास्तविक कारणों का शीघ्र पता लगाया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस दौरान मंडल उपाध्यक्ष बलराम यादव, कोषाध्यक्ष यशवंत चंद्राकर, महेंद्र यादव, चंद्रशेखर यादव एवं सुदीप शर्मा भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में घटना की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की।
दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका, डॉग स्क्वाड और क्राइम ब्रांच जांच में जुटी
दुर्ग। पुलगांव थाना क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब पुलगांव नाला किनारे जंगलनुमा क्षेत्र में एक 55 वर्षीय महिला का अर्धनग्न शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान उरला निवासी भगवंतीन बाई (55 वर्ष) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, महिला गुरुवार से लापता थी। परिजनों ने शुक्रवार को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच पुलगांव नाला के पास जंगलनुमा इलाके में उसका शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।
सूचना मिलते ही पुलगांव थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है।
महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में मिलने से दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
