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April 03, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम और घोटाला एक सिक्के के दो पहलु जैसे हो गए है . निगम के कार्य में जमीनी स्तर पर निरिक्षण करने वाले इंजीनियरों द्वारा ना जाने ऐसे कितने कार्य है जो सिर्फ कागजो पर हो गए और राशि आहरित कर ली गयी . ये तो एक लम्बी जाँच का विषय है . जाँच के बाद भी ये सुनिश्चित नहीं कि कोई कार्यवाही हो क्योकि कार्यवाही के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है जिसका अभाव अधिकारियो पर कम ही नजर आता है . एक तरफ तो निगम प्रशासन जनता से अपील करती नजर आती है की शहर की व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दे और अनियमितता की शिकायत करे किन्तु दुर्ग निगम प्रशासन के अधिकारी कार्यवाही के नाम पर आम जनता पर तो अपना प्रशासनिक ताकत दिखाते है किन्तु जब अनियमितता किसी अधिकारी के द्वारा होती है तो मामले को दबाने की हर संभव कोशिश की जाती है और एक समय तक सफल भी हो जाते है तभी तो आज तक ऐसे कई कार्यो के घोटालो की बात सामने आयी है किन्तु किसी पर कोई सख्त कार्यवाही हुई हो ऐसा प्रतीत नहीं होता .
ऐसे ही कुछ मामलो को लेकर शौर्यपथ समाचार पत्र प्रतिदिन निगम के एक घोटालो को मय दस्तावेज आम जनता के सामने लाता रहेगा निगम प्रशासन भले ही अपने जिम्मेदार अधिकारी को बचाते रहे किन्तु समाचार पत्र प्रतिदिन एक घोटाले सामने लाता रहेगा . दुर्ग निगम में सब इंजिनियर भीम राव द्वारा एक ऐसे जगह पाथवे का निर्माण किया गया जो सिर्फ दस्तावेजो में ही है और ऐसे स्थान का नाम दस्तावेज में अंकित है जिस पर किसी को शक भी होगा तो जा कर आसानी से देख सके ऐसा आम जनता के लिए संभव नहीं हो .
ऐसे ही एक मामले में वार्ड के तात्कालिक सब इंजिनियर के निरिक्षण में भाजपा की राष्ट्रिय महासचिव और राज्यसभा संसद डॉ सरोज पाण्डेय के निवास जल परिसर के बगल में सड़क किनारे पाथवे का निर्माण किया गया जिसकी लागत लगभग 48 हजार रूपये खर्च हुए और ये खर्च संधारण मद से किये गए चूँकि राशि 50 हजार से कम है इस लिए तात्कालिक नियम के अनुसार कोई निविदा नहीं निकली ऑफलाइन निविदा नियम के तहत ये कार्य हुआ . जबकि अगर जमीनी स्तर पर देखे तो जल परिसर के समीप सडक किनारे ऐसा कोई निरमान विगत 2 सालो में नहीं हुआ . फिर सब इंजिनियर भीम राव किस जगह पाथवे बना कर आ गए क्या मामले को संज्ञान में लेकर निगम के नए पीडब्ल्यूडी प्रभारी इस पर जाँच की पहल करेंगे ?

रायपुर / शौर्यपथ / पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुख्यमंत्री निवास में हुई तीजा पोला तिहार के आयोजन पर टीका टिप्पणी से भाजपा के छत्तीसगढ़ विरोधी चाल चरित्र उजागर हुआ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ के तीज त्यौहार परंपरा संस्कृति का आयोजन करते है।त्योहारों में आम जनता के साथ सरकार की सहभागिता सुनिििश्चत करते है तो भाजपा नेताओं के पेट में दर्द क्यों होता है?15 साल के रमन शासन काल के दौरान छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति परम्परा विलुप्तप्राय होने की कगार पर खड़ी थी। 15 साल मेंं रमन भाजपा ने छत्तीसगढ़ में हरेली,हरितालिका तीज,कर्मा जयंती,विश्वआदिवासी दिवस के दिन अवकाश नही दिए।
रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते मुख्यमंत्री निवास में कभी छत्तीसगढ़ के हरेली तीजा पोला, गोधन पूजा का आयोजन नही हुआ।रमन सरकार के के दौरान उनके मंत्री और भाजपा के नेता पंडाल लगाकर दीनदयाल की कथा सुनने में मग्न थे ,सत्ता रहते रमन भाजपा मजदूर किसान छात्र महिलाओं की व्यथा सुनते परेशानी का निराकरण करते,चुनाव में किये वादा को पूरा करते,युवाओं की भावना को समझते,आदिवासी वर्ग को उनका कानूनी अधिकार देते तो विधानसभा चुनाव में भाजपा15 सीटों में नही सिमटती। भाजपा के नेता निरन्तर रोका छेका,गोबर खरीदी,का भी विरोध कर रहे है।

बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर जिले में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा नियमित रूप से की जा रही है । जांच से पूर्व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जाता है। पंजीयन उपरांत गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर प्रसव पूर्व जांच कर टिटनेस का टीका दिया जाता है साथ ही जांच के लिए फालोअप भी किया जाता है। इस कार्य में एएनएम और मितानिन का कार्य काफी सराहनीय है। जब प्रसव हो जाता है तब मितानिन द्वारा प्रसव पश्चात जांच के तहत जच्चा बच्चा का 42 दिनों तक नियमित ख्याल रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग हर साल इसके लिए एक लक्ष्य निर्धारित करता है। इस बार लक्ष्य के सापेक्ष स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में अच्छा कार्य किया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रमोद महाजन ने बताया कि साल 2020-21 में विभाग को 49,761 गर्भवतियों के पंजीयन का लक्ष्य दिया गया था। इसमें विभाग ने माह अप्रैल से जून तक मात्र तीन महीने में 95.93 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की है।
उन्होंने बताया कि तीन माह की प्रगति को देखें तो विभाग ने 12,440 गर्भवती पंजीयन के अनुपातिक लक्ष्य के सापेक्ष 11,934 पंजीयन करके अच्छी सफलता हासिल की है। जि़ले में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए 12,440 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन किया गया है जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि समय से गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और प्रसव पूर्व जांच होने से जोखिम की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं ।
नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच से समय से जटिलताओं की पहचान की जाती है और आवश्यक उपचार प्रदान किया जाता है जो कि मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर को कम करने में बहुत हद तक सहायक है । समय से पंजीयन से गर्भवती महिलाओं और नवजातों को सरकार द्वारा दी गयी सुविधायें भी आसानी से मिल जाती हैं।
गर्भवती की प्रसव पूर्व चार जांचें हैं बेहद जरूरी !
प्रथम चरण में गर्भधारण के तुरंत बाद या गर्भावस्था के पहले 3 महीने के अंदर जांच होती है। द्वितीय चरण में गर्भधारण के चौथे या छठे महीने में। तृतीय चरण में गर्भधारण के सातवें या आठवें महीने में तथा चतुर्थ चरण में गर्भधारण के नौवें महीने में जरूरी जांचे की जाती हैं। इसमें प्रत्येक गर्भवती के हीमोग्लोबिन की मात्रा अनुसार आईएफए, कैल्शियम के साथ साथ टीकाकरण, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह की स्क्रीनिंग की जाती है।

नजरिया / शौर्यपथ / जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे रोजगार बाजार का परिदृश्य भी बदलता जा रहा है। स्थिति यह है कि भविष्य में कई रोजगार ऐसे भी होंगे, जिनके नाम हमने अब तक सुने भी नहीं हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और देश तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में, डिजिटल होती भारतीय अर्थव्यवस्था के तहत स्थानीय एवं वैश्विक, दोनों ही स्तरों पर कौशल प्रशिक्षित भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ गए हैं।
यह स्पष्ट दिख रहा है कि कोविड-19 के बीच भी वैश्विक डिजिटल कंपनियां भारत में डिजिटलीकरण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि व खुदरा क्षेत्र के ई-कॉमर्स में बड़ी मात्रा में निवेश करती दिखाई दे रही हैं। कोविड-19 के बीच भारत में डिजिटल भुगतान उद्योग, ई-कॉमर्स तथा डिजिटल मार्केटिंग जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढे़ हैं और इनमें रोजगार के मौके भी बढ़े हैं। यदि हम डिजिटल भुगतान उद्योग की ओर देखें, तो पाते हैं कि नोटबंदी में भी डिजिटल भुगतान उतनी तेजी से नहीं बढ़ा था, जितनी ऊंची छलांग उसने कोरोना महामारी के पिछले चार महीनों में लगाई है।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की अध्यक्ष देवयानी घोष द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं के रोजगार मौकों पर हाल ही में दी गई टिप्पणी का उल्लेख करना उपयुक्त होगा। देवयानी ने कहा है कि इस समय प्रतिभा के संदर्भ में भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में लाभ की स्थिति में है, लेकिन कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में मौजूदा आईटी प्रतिभाओं को उभरते तकनीकी कौशल से फिर से लैस करने और दुनिया में खुद को खड़ा रखने के लिए नवाचार यानी इनोवेशन पर जोर देना होगा। निस्संदेह, सरकारी कदमों से डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला है, पर अभी इस दिशा में बहुआयामी प्रयासों की जरूरत बनी हुई है। हमें डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी जरूरत संबंधी कमियों को दूर करना होगा। चूंकि बिजली डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत है, अत: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त पहुंच और आपूर्ति जरूरी है।
चूंकि हमारी आबादी का एक बड़ा भाग अब भी डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था की दृष्टि से पीछे है, अत: उसे डिजिटल बैंकिंग की ओर आगे बढ़ाना होगा। खासतौर से अभी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के पास डिजिटली भुगतान के लिए बैंक-खाते, इंटरनेट की सुविधा वाले मोबाइल फोन या क्रेडिट-डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए ऐसी सुविधाएं बढ़ाने का अभियान जरूरी होगा। फिर ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों का ऑनलाइन लेन-देन में अविश्वास बना हुआ है, इसलिए ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करनी पड़ेगी।
देश में डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में देश को आगे बढ़ाना जरूरी है। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड टेस्ट करने वाली वैश्विक कंपनी ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में 139 देशों की सूची में भारत 132वें पायदान पर है। ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में भारत की औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 9.81 एमबीपीएस रही, वहीं इसकी औसत अपलोड स्पीड 3.98 एमबीपीएस थी। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में दक्षिण कोरिया, कतर, चीन, यूएई, नीदरलैंड, नॉर्वे बहुत आगे हैं। इतना ही नहीं, स्पीड के मामले में भारत को पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों ने भी पीछे छोड़ रखा है। ऐसे में, भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौकों का फायदा लेने के लिए इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के अधिकतम प्रयास करने होंगे।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के आधार को मजबूत करने की जरूरत है, तभी यह क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की स्थिति में होगा। उम्मीद है कि देश की नई पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे छिपे अवसरों को तलाशेगी और देश-दुनिया की नई जरूरतों के मुताबिक अपने आप को सुसज्जित करेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री

 

मेलबॉक्स / शौर्यपथ / फिल्म ‘दामिनी’ में सनी देओल वकील की भूमिका निभाते हुए एक डायलॉग कहते हैं, तारीख पे तारीख-तारीख पे तारीख, पर इंसाफ नहीं मिलता... ठीक इसी तरह सरकार सिर्फ योजनाएं लाती है, उनकी सफलता या विफलता का विवेचन नहीं किया जाता। कहीं-कहीं तो योजनाएं भ्रष्टाचार के तहखाने में दब जाती हैं और जनता मुंह ताकती रह जाती है। आज का सच यही है कि सरकारें जनता को लुभाने के लिए या सीधे शब्दों में कहें, तो राष्ट्र-हित के लिए योजनाएं लाती हैं, लेकिन वे कहां तक सफल हो पाती हैं, इस पर कभी मनन नहीं किया जाता। मौजूदा सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कुछ योजनाएं लेकर आई, जिनको 2020 में काफी हद तक पूरा हो जाना था। इनमें प्रमुख हैं, नमामि गंगे योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, स्वच्छ भारत अभियान, सांसद आदर्श ग्राम योजना, मिशन इंद्रधनुष आदि। बावजूद सरकार नित्य नई योजना बनाने के लिए तत्पर दिख रही है। सवाल है, पुरानी योजनाओं का मूल्यांकन किए बिना नई योजनाएं भला कितनी सार्थक होंगी?
उदय कुमार आजाद

अश्लीलता और वेब सीरीज
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज में जिस तरह से गाली-गलौज और नग्नता परोसी जा रही हैं, उससे देश के युवाओं की मानसिकता तो बुरी तरह प्रभावित हो ही रही है, सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर क्यों इन वेब सीरीज को फिल्म एवं सेंसर बोर्ड के दायरे से बाहर रखा गया है? एक तरफ तो सरकार पोर्न वेबसाइट्स व अश्लील फिल्मों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा चुकी है, जबकि दूसरी तरफ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इनके खुलेआम प्रसारण की अनुमति दी जा रही है। इसका नतीजा दुष्कर्म और हिंसा की बढ़ती घटनाओं के रूप में देखने को मिल रहा है। हैरत की बात यह है कि बडे़-बडे़ प्रोडक्शन हाउस और नामचीन कलाकार भी ऐसे दृश्यों को करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में, जिस तरह से सरकार द्वारा पोर्न साइट्स पर पाबंदी लगाई गई है, उसी तरह से वेब सीरीज पर भी सख्ती बरतने की आवश्यकता है।
प्रत्यूष आनंद, नवादा, बिहार

योग शामिल करें
हमारी शिक्षा-नीति में चरित्र-निर्माण काफी पीछे छूट गया है। इसके लिए शिक्षा-व्यवस्था में योग को शामिल किया जाना अनिवार्य था। इसका कोई विकल्प नहीं है। योग मात्र आसन या प्राणायाम तक सीमित नहीं है, नई शिक्षा-व्यवस्था के अंतर्गत इसके अष्टांग रूप (यम, नियम, आसन, प्रत्याहार, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि) का विधिवत अभ्यास कराया जाना चाहिए, तभी हमारे देश के नौजवानों का चारित्रिक और मानसिक विकास हो सकेगा। स्वस्थ तन और मन वाला कुशल नागरिक ही देश की पूंजी होता है।
सत्य प्रकाश, लखीमपुर खीरी

इंस्टाग्राम पर क्यों
पिछले तीन दिनों से महेंद्र सिंह धौनी की महानता बताते हुए खूब लिखा जा रहा है। लंबी-लंबी तकरीरें हो रही हैं। उनके जैसा न कोई था, न कोई आगे होगा का एहसास कराया जा रहा है। यहां तक कि बीसीसीआई से जुड़े लोग भी धौनी को महानतम खिलाड़ी की संज्ञा दे रहे हैं। वाकई, धौनी की महानता पर किसी को कोई संदेह नहीं है, लेकिन क्या किसी ने यह सोचने की जहमत उठाई कि इस महान खिलाड़ी को आखिर क्यों मैदान की जगह इंस्टाग्राम पर अपने संन्यास की घोषणा करनी पड़ी? ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें मालूम चल गया था कि बीसीसीआई अब उन्हें मैदान पर उतरने का मौका नहीं देने वाला है। आशीष नेहरा ने धौनी के बारे में एक बात बताई थी कि उनके अंदर वह क्षमता है कि वह विरोधी खिलाड़ियों का दिमाग तुरंत पढ़ लेते हैं। धौनी ने बीसीसीआई के कर्ता-धर्ताओं का दिमाग पढ़ लिया था, इसलिए उन्होंने मैदान के बाहर ही अपने संन्यास की घोषणा कर दी।
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

 

रायगढ़ / शौर्यपथ / कलेक्टर भीम सिंह ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये रायगढ़ जिले के किरोड़ीमल नगर पंचायत संपूर्ण क्षेत्र को 19 से 25 अगस्त 2020 तक संपूर्ण सार्वजनिक सभी गतिविधियां प्रतिबंधित किया है।
कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 24 की उपधारा (1)के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 19 से 25 अगस्त 2020 तक रायगढ़ जिले के किरोड़ीमल नगर पंचायत संपूर्ण क्षेत्र में संचालित देशी/विदेशी मदिरा दुकानों से मदिरा की बिक्री को काउन्टर से बंद रखते हुये ऑनलाईन होम डिलीवरी के माध्यम से किये जाने हेतु आदेश जारी किया है।
नगर पंचायत किरोड़ीमल नगर पंचायत अंतर्गत देशी मदिरा दुकान-कोकड़ीतराई एवं विदेशी मदिरा दुकान-कोकड़ीतराई शामिल है। यहां ऑनलाईन होम डिलीवरी यथावत चालू रहेगी। जिले की शेष मदिरा दुकानों के खुलने एवं बंद होने का समय यथावत रहेगा। सोशल डिस्टेंसिंग एवं फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा।

जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ /राजस्व अनुविभाग चाम्पा अंतर्गत आने वाले नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों में कोरोना संक्रमण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने, आम नागरिकों तथा ब्यवसायियों को लॉक डाउन का परिपालन सुनिश्चित कराने, पृथक वास केंद्रों (क्वारंटीन सेंटर ) में ठहरे हुए प्रवासी मजदूरों को उत्कृष्ट मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने हेतु सक्रिय रूप कार्य करने के लिए एस डी एम बजरंग दुबे का सम्मान शिक्षा समृद्धि अभियान छत्तीसगढ़ द्वारा किया गया।
ज्ञातव्य है कि मार्च माह से केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा लगाये गये लॉक डाउन में फँसे श्रमिकों तथा यात्रियों के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था कर उन्होंने मजदूरों तथा यात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाया था। आश्रय स्थलों में भोजन तथा ठहरने हेतु बहुत अच्छी व्यवस्था की गई थी। एस डी एम श्री दुबे ने अन्य राज्यों से विशेष ट्रेनों से आने वाले मजदूरों को होम आइसोलेशन हेतु 100 से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर स्थापित कर उन्हें उत्कृष्ट मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाया गयी। कोरोना काल में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य हेतु शिक्षा समृद्धि अभियान द्वारा उनका सम्मान किया गया है।
इस अवसर पर नायब तहसीलदार श्रीमती प्रियंका चंद्रा, राजस्व निरीक्षक श्रीमती वर्षा गोस्वामी, शिक्षा समृद्धि अभियान के प्रदेश संयोजक परमेश्वर स्वर्णकार, शिक्षक गण धन्य कुमार पाण्डेय, छोटे लाल देवांगन, भुवनेश्वर प्रसाद देवांगन, मोती राम अंचल,विष्णु यादव, चुन्नी सिंह मरकाम,दिनेश कुमार देवांगन ,शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला भोजपुर के प्राचार्य आर के राठौर उपस्थित थे।

सम्पादकीय / शौर्यपथ / पीएम केयर्स फंड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल महत्वपूर्ण, बल्कि अनुकरणीय है। इस फंड को लेकर शुरू से ही जो विवाद रहे हैं, उन पर अलग से विचार-विमर्श की जरूरत भले हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाने का कोई विशेष औचित्य नहीं था। इस मामले में अदालत की भावनाएं कमोबेश पहले ही सामने आ गई थीं। अप्रैल के महीने में ही जब अलग से पीएम केयर्स फंड बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, तभी उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बिना समय गंवाए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने चुनौती देने को खड़े हुए वकील से तब कहा था, ‘आपके पास दो ही विकल्प हैं, या तो आप याचिका वापस ले लीजिए या आप पर हम भारी जुर्माना लगाएंगे।’ जाहिर है, इस फंड को दोबारा चुनौती नहीं दी जा सकती थी, इसलिए इसके फंड को एनडीआरएफ अर्थात राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में जमा कराने के लिए याचिका लगाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख को बरकरार रखा है। इससे निश्चित रूप से उन लोगों को निराशा होगी, जिनको यह आशंका है कि इस फंड में गड़बड़ी हुई है या की जाएगी। कहना न होगा, केवल आशंका के आधार पर कोई शिकायत करने से बचना चाहिए। सरकार की किसी भी बड़ी पहल को मजबूत आधार पर ही चुनौती देनी चाहिए। कोर्ट ने अप्रैल में ही फंड के गठन को चुनौती देने वाली याचिका के बारे में कहा था कि इससे राजनीति की बू आ रही है। अब इस मामले का यहीं पटाक्षेप हो जाना चाहिए।
यह हमारे समय का सच है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार ने एक पीएम केयर्स फंड बना रखा है, जिसमें 3,100 करोड़ रुपये से ज्यादा देश और विदेश के लोगों ने स्वेच्छा से जमा किए हैं। इस धन का उपयोग चिकित्सकीय साजो-सामान से लेकर वैक्सीन की खोज तक में हो रहा है। तमाम राज्यों को भी इस फंड के तहत मदद नसीब हो रही है। सरकार के अनुसार, पीएम केयर्स फंड के 3,100 करोड़ में से 2,100 करोड़ रुपये से वेंटिलेटर खरीदने; 1,000 करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों पर; और 100 करोड़ रुपये वैक्सीन बनाने पर खर्च होने हैं।
आज जरूरत यह नहीं कि पीएम केयर्स फंड पर बहस की जाए, जरूरी है कि इस फंड का देश को सेहतमंद बनाने के लिए बेहतर से बेहतर सदुपयोग हो। केंद्र सरकार पहले ही यह इशारा कर चुकी है कि इस फंड का ऑडिट किया जाएगा। जहां तक विपक्षी दलों का प्रश्न है, तो यह उनका दायित्व है कि वे सरकारी व्यवस्था में खामी खोजें और उसका राजनीतिक इस्तेमाल भी करें। कोरोना के लिए जो धन लोगों ने दिया है, उसकी एक-एक पाई सही जरूरतमंदों तक पहुंचनी चाहिए। पीएम केयर्स फंड में धन दान करने वाले सभी लोग यही चाहेंगे कि उनके धन का देशहित में ईमानदारी से सदुपयोग हो जाए। यह हमारी सरकारों के लिए भी चुनौती है कि वे ऐसे किसी विशेष कोष को पूरी ईमानदारी से निचले स्तर तक पारदर्शिता के साथ खर्च करके देश के सामने पूरा खाता रख दें। ऐसे कोषों पर शंका-आशंका नई बात नहीं है, अपने देश में राहत कोषों पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महाविपत्ति के समय के इस विशेष फंड को एक आदर्श स्थापित करना चाहिए। पुरानी आशंकाओं को झुठला देना चाहिए। हमारे विशाल विकासशील देश में ऐसे विशेष कोष की सफलता से दान और सेवा का भविष्य भी तय होगा।

 

 रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित प्रदेश के समस्त शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं एवं विशेष (आदिवासी) औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में सत्र अगस्त 2020-21 एवं 2020-22 में प्रवेश के लिए इच्छुक आवेदक 25 अगस्त तक ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन (आवेदन) करा सकते हैं। संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा इस संबंध में सूचना जारी कर दी गई है। 

 जारी सूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ स्थित शासकीय आईटीआई में संचालित एनसीव्हीटी/एससीव्हीटी के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इच्छुक छत्तीसगढ़ के मूल निवासी आवेदक, स्वयं अथवा छत्तीसगढ़ स्थित किसी भी लोक सेवा केन्द्र (च्वाइस सेंटर) के माध्यम से संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण की वेबसाईटcgiti.cgstate.gov.in के ’ऑनलाईन एप्लिकेशन 2020’ पर क्लिक कर अपना पंजीयन एवं प्रवेश हेतु व्यवसाय का चयन कर सकते हैं। आवेदकों के पंजीयन के लिए वेबसाईट पर यूजर मैन्यूवल दिया गया है, जिसका अवलोकन किया जा सकता है। 

 पंजीयन के पूर्व, प्रवेश विवरणिका जो कि cgiti.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन कौशल विकास विभाग के अधीन संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण के अंतर्गत शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में संचालित विभिन्न व्यवसायों में सत्र अगस्त 2020-21 एवं 2020-22 में प्रवेश हेतु निर्धारित संस्थावार/व्यवसायवार सीटों एवं आवश्यक शैक्षणिक अर्हता एवं अन्य समस्त जानकारी दर्शित है, उसे डाउनलोड कर आवेदक उसका सावधानी पूर्वक अध्ययन कर लें। 

 छत्तीसगढ़ शासन के विद्यमान नियमों एवं नीति के अंतर्गत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2020 तक निर्धारित है। आवेदक को ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति के आवेदक को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुल्क 40 रूपए तथा पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के आवेदक को 50 रूपए देना होगा। वेबसाईट पर पंजीयन के दौरान रजिस्ट्रेशन शुल्क लोक सेवा केन्द्र (च्वाइस सेंटर) में नगद अथवा स्वयं ऑनलाईन पेमेंट द्वारा शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। ऑनलाईन भुगतान हेतु निम्न सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम सह डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य किसी ऑनलाईन पेमेंट माध्यम से शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। एक बार आवेदन रजिस्ट्रेशन होने के पश्चात अपने आवेदन में मोबाइल नम्बर को छोड़कर आवेदन भरने की अंतिम तिथि तक सुधार कर सकते हैं। यदि आवेदक ने अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा किया है और सुधार के पश्चात अनारक्षित (सामान्य) या अन्य पिछड़ा वर्ग करना चाहता है तो उसे आवेदन शुल्क के अंतर की राशि जमा करनी होगी। व्यवसाय ड्रायवर कम मैकेनिक में प्रवेश के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 1 अगस्त 2020 को 18 वर्ष एवं शेष व्यवसायों के लिए 14 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। उच्चतम आयु सीमा का बंधन नही है। प्रवेश हेतु स्थानों की संख्या परिवर्तनीय है। चूंकि चयन संबंधी जानकारी एसएमएस के माध्यम से भेजी जाती है, अतः ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के समय आवेदक अपना मोबाइल नम्बर एवं ई-मेल आईडी की जानकारी अवश्य दें, ताकि प्रवेश हेतु चयन संबंधी जानकारी एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त हो सके। आवेदक का चयन होने पर आवेदक को संबंधित संस्था में आवश्यक समस्त अभिलेखों, प्रमाण पत्रों एवं निर्धारित शुल्क सहित स्वयं उपस्थित होकर प्रवेश लेना होगा। आवेदन हेतु वेबसाईट का लिंक इस प्रकार है-

https://slcm.cgstate.gov.in/ITI_OnlineApplication/

ओपिनियन / शौर्यपथ / हमारे राष्ट्रीय मानस में पंडित मार्तंड जसराज गहरे बसे रहे। वह हमारे सांस्कृतिक लोकाचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उनके गुजर जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसको कभी भरा नहीं जा सकता। यह शून्य मेरे निजी जीवन के लिए कहीं अधिक गहरा है। ऐसा कोई शुभ अवसर मुझे याद नहीं आता, जब उन्होंने अपनी जादुई आवाज में मुझे शुभकामना न दी हो, फिर चाहे वह मौका मेरे गृह प्रवेश का हो या मेरे बेटे की शादी का।
पंडित जसराज हमारी शास्त्रीय गायन परंपरा के महान चटुष्टय के आखिरी स्तंभ थे। ये चार महान गायक थे- किराना घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित भीमसेन जोशी; जयपुर घराने की किशोरी अमोनकर; सेनिया और बनारस घराने की गिरिजा देवी, और मेवाती घराने के खुद पंडित जसराज। भारतीय संगीत के प्रति अपने गहरे लगाव के कारण मुझे इन चारों के साथ निजी ताल्लुकात बनाने का सौभाग्य मिला। हालांकि, कुछ खासियत सिर्फ पंडित जसराज में थीं।
सदाशयता, दुलार और समभाव उनके स्वभाव के खास गुण थे। किसी भी मौके पर मैंने उन्हें नाराज होते नहीं देखा। न तो उनको बेअदब श्रोताओं से कोई शिकायत रही और न ही किसी बीमारी से वह खीझते हुए देखे गए। एक बार उन्हें वायरल बुखार हुआ, तो जब मैंने उनसे अपना ख्याल रखने को कहा, तो मजाकिया अंदाज में उन्होंने जवाब मिला, ‘प्रतिष्ठित संगीत प्रेमियों की उपस्थिति और उनका उत्साह मेरी पीड़ा खत्म कर देती है’।
हिसार में जन्मे पंडित जसराज ने विभिन्न शैलियों के गायन को अपनाते हुए एक लंबी यात्रा तय की। मैंने उनके बड़े भाई पंडित मणिराम द्वारा सिखाए जा रहे कुछ बोलों को भी उनसे सुना है, और वाकई सर्वश्रेष्ठ गुरु-शिष्य परंपरा को एक साथ सुनना मेरे लिए एक अनमोल अनुभव है। मेवाती घराने से संबंध रखने की वजह से उन्होंने विभिन्न संगीत शैलियों का मिश्रण बनाने की कोशिश की। इस अर्थ में उनके पास एक दूरदर्शी नजरिया था। उनका मानना था कि अपनी निर्मलता और मूल को खोए बिना शास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। यही कारण है कि मेवाती घराने से सीखने के दौरान उन्होंने अपनी संगीत-शैली, खासतौर से कीर्तन को काफी निखारा। देश-दुनिया में चर्चित ‘जसरंगी’ के वह प्रणेता हैं, जिसमें महिला गायिका के साथ मिलकर वह साथ-साथ गायन किया करते थे। कई अवसरों पर वह ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: गाया करते, जो श्रोताओं को अध्यात्म के चरम भाव पर में पहुंचा देता था। उनकी एक बड़ी खूबी यह थी कि शास्त्रीय परंपरा को आत्मसात करते हुए वह लगातार उसे सुधारते रहे।
मुझे याद है। 8 मई, 1998 को एक उमस भरी दोपहर में उन्होंने राग धुलिया मल्हार गाने का फैसला किया था। इस राग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि यह बारिश का अग्रदूत है और इसमें बारिश की बूंदें अक्सर धूल कणों से मिलती हैं, ताकि तेज बरसात से पहले धूल का तूफान पैदा हो सके। जब उन्होंने अपना गायन शुरू किया, तब बादल का नामो-निशान नहीं था। मगर गायन के साथ ही दूर बादल दिखने लगे और बूंदाबांदी भी शुरू हो गई, जिससे वातावरण काफी ठंडा हो गया। बादलों की जादुई उपस्थिति और सुदूर हो रही बारिश से वहां मौजूद सभी लोगों को तानसेन की याद हो आई। कहते हैं कि जब तानसेन राग मल्हार गाया करते थे, तो बारिश होने लगती थी और दीपक राग से दीपक जल उठते थे। निश्चय ही, वैसा कि हम सभी ने उस शाम अनुभव किया। पंडित जसराज 21वीं सदी के तानसेन थे।
एक अर्थ में यह विडंबना ही है कि एक व्यक्ति, जिसका जन्म हिसार में हुआ और जो भारत की संगीत परंपराओं को संपूर्णता में जीता रहा, उसने अपनी अंतिम सांस न्यू जर्सी में ली। दुख की इस घड़ी में सांत्वना की बात बस यही है कि वह एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिससे वह बेपनाह प्यार करते थे, यानी छात्रों को शास्त्रीय संगीत की महान भारतीय परंपरा को सिखाने का काम, जिसके वह सर्वश्रेष्ठ वाहक थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा को वैश्विक बनाने के अपने आह्वान के बाद पंडितजी ने अटलांटा, टम्पा, वैंकूवर, टोरंटो, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, पिट्सबर्ग, मुंबई और केरल में स्कूलों की स्थापना की।
उनकी बेटी दुर्गा जसराज आखिरी पल तक पंडित जी की देखभाल करती रहीं। वह उनकी प्यारी बेटी हैं और उनसे प्रशिक्षित भी हैं। पंडित जसराज ने उन्हें तिरंगा कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए खासा प्रोत्साहित किया था, इससे जाने-माने कवि व गीतकार जावेद अख्तर भी जुड़े थे। पंडित जी का यूं जाना मुझे इसलिए और ज्यादा गमगीन कर रहा है, क्योंकि न्यू जर्सी के इस प्रवास में मैं उनसे अक्सर बातें किया करता था और बातचीत में वह अक्सर उत्सुक होकर कहते कि भारत लौटने पर वह संगीत प्रेमियों के लिए अपने गायन का एक कार्यक्रम करेंगे। मेरा यह सपना अब अधूरा ही रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर कहा है, ‘पंडित जसराज जी के निधन से भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में एक गहरा शून्य पैदा हुआ है। न केवल उनकी प्रस्तुतियां उत्कृष्ट थीं, बल्कि उन्होंने कई अन्य गायकों के एक असाधारण गुरु के रूप में अपनी पहचान भी बनाई’। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी, जिनके साथ भी मैंने काम किया है, उन्हें खूब पसंद किया करते थे। वह उन्हें ‘रसराज’ कहकर संबोधित करते थे, जिसका अर्थ होता है रसों का राजा। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 2019 में मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच परिक्रमा करने वाले एक लघु ग्रह का नाम ‘जसराज’ रखा था। अब वह उसी ग्रह-नक्षत्र का हिस्सा बन गए हैं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत जिस आध्यात्मिकता की महान विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, वह हमेशा आगे बढ़नी चाहिए। पंडित जसराज हम सभी को यह जिम्मेदारी सौंप गए हैं कि सुरीली परंपराएं आम भारतीयों के जीवन में प्रासंगिक बनी रहें। भारतीय शास्त्रीय संगीत में आम लोगों की भागीदारी के लिहाज से उनका अतुलनीय योगदान है। उनका तिरंगा और ऊंची उड़ान भरता रहे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) एन के सिंह, अध्यक्ष, वित्त आयोग

 

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