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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद ब्यूरो संतराम कुर्रे
खल्लारी-भीमखोज - शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गौरव ग्राम बी. के. बाहरा में 12वीं के विद्यार्थियों के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्रोण पटेल, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष,विशेष अतिथि आर्य प्रकाश चंद्राकर,सांसद प्रतिनिधि,अंकित चंद्राकर प्राचार्य,पंचूराम ध्रुव,धनेश्वरी चंद्राकर,कांति यादव द्वारा संयुक्त रूप से माँ सरस्वती क़े समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बन गया। कक्षा 11 के विद्यार्थियो ने कक्षा 12 के छात्र-छात्राओ का तिलक लगाकर स्वागत किया। कक्षा 11 के छात्र-छात्राओं ने कविता, भाषण, गेम, नाटक आदि रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।विदा होने वाले विद्यार्थियों ने कविता, कॉमेडी आदि के माध्यम से विद्यालय में एकत्र की गई अपनी यादों को प्रधानाचार्य और शिक्षकों के साथ साझा किया।
शाला विकास प्रबंधन समिति क़े अध्यक्ष द्रोण पटेल नें कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों को लक्ष्य पर केंद्रित रहकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों ने अपने परिश्रम और अनुशासन से विद्यालय की गरिमा बढ़ाई है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ये छात्र-छात्राएं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन करेंगे। अंत में उन्होंने परीक्षा के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं। सांसद प्रतिनिधि आर्य प्रकाश चंद्राकर नें जीवन में योग के माध्यम से योगासन, प्राणायाम, और ध्यान के नियमित अभ्यास द्वारा शरीर और मन को शांत करना,व मानसिक शांति प्राप्त कर स्मरण शक्ति को बढ़ाने के उपाय बताएं। प्राचार्य अंकित चंद्राकर नें महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारों का उदाहरण समझाते हुए बच्चों को उज्जवल भविष्य की कामनायें प्रेषित किया।समारोह के दौरान कक्षा 12वीं से सुरेंद्र ध्रुव को "मिस्टर फेयरवेल" एवं कुमारी रानी ध्रुव को "मिस फेयरवेल" चुना गया।कार्यक्रम के पश्चात समस्त विद्यार्थियों को प्रतीक चिन्ह अतिथियों के द्वारा प्रदान किया गया।
इस विदाई समारोह में कलाराम साहू,हरिशंकर हिरवानी,अजय चंद्राकर, भारत तंबोली, रमेश गिरी,घनश्याम साहू,धर्मेंद्र साहू, धनेश्वरी चंद्राकर,यामिनी साहू,योगिता कुर्वंशी, सुनीता साहू, दिव्या साहू,शैलेंद्र साहू , सुनीता बाई साहू,तारा क्षेत्रपाल एवं विद्यालय के समस्त शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं कर्मचारीगण,गाँव क़े गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नगर के सभी देवी–देवताओं को मंदिर जाकर आमंत्रण, गुजरात से मंगवाया गया अलौकिक ध्वज, फूल–इत्र वर्षा के साथ निकलेगी ऐतिहासिक यात्रा
दुर्ग /
छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी दुर्ग इस वर्ष फाल्गुन एकादशी के पावन अवसर पर भक्ति और श्रद्धा के एक अद्भुत दृश्य की साक्षी बनने जा रही है। पहली बार शहर में श्री श्याम बाबा की खाटू धाम की तर्ज पर विशाल और भव्य फाल्गुन निशान यात्रा निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और श्याम भक्ति का माहौल बन गया है।
फाल्गुन मास की पावन ग्यारस पर आयोजित होने वाली श्री श्याम फाल्गुन निशान यात्रा 2026 की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन श्याम भक्तों को खाटू श्याम की अनुभूति कराना है, जो किसी कारणवश राजस्थान के सीकर स्थित खाटू धाम नहीं पहुंच पाते। अब दुर्ग में ही भक्तों को खाटू जैसी परंपरा, रीति-रिवाज और भव्यता के साथ बाबा श्याम के सजीव दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।
खाटू की झलक दिखेगी दुर्ग की सड़कों पर
निशान यात्रा आयोजक समिति के योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि फाल्गुन एकादशी के दिन दुर्ग की सड़कों पर खाटू धाम जैसा दिव्य वातावरण नजर आएगा। बाबा श्याम का रथ, घोड़े-बग्गी, मधुर भजनों की स्वर लहरियां, फूलों व इत्र की वर्षा और सैकड़ों श्रद्धालुओं के हाथों में श्याम बाबा का निशान—यह यात्रा श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम होगी।
यात्रा की प्रमुख विशेषताएं
निशान यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जहां जगह-जगह पुष्पवर्षा और इत्र वर्षा की विशेष व्यवस्था की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में श्याम भक्त केसरिया, नारंगी और लाल रंग के पवित्र निशान लेकर बाबा के जयकारों के साथ पदयात्रा करेंगे।
निशान का धार्मिक महत्व
बंटी शर्मा ने बताया कि बाबा खाटू श्यामजी को चढ़ाया जाने वाला निशान (ध्वज) विजय, बलिदान और दान का प्रतीक है। मान्यता है कि बाबा ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्म की विजय के लिए अपना शीश समर्पित किया था। इसी परंपरा के तहत भक्त मन्नत पूरी होने पर या मन्नत पूर्ण होने से पहले भी निशान चढ़ाते हैं। इस ध्वज पर श्रीकृष्ण व श्याम बाबा के चित्र, मंत्र, नारियल और मोरपंख अंकित होते हैं। मान्यता है कि निशान चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन मंगलमय होता है।
नगर के देवी–देवताओं को दिया गया आमंत्रण
भव्य आयोजन से पूर्व आयोजक समिति ने धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए नगर के प्रमुख मंदिरों में जाकर देवी–देवताओं का आह्वान किया और निशान यात्रा में आशीर्वाद देने हेतु आमंत्रण पत्र भेंट किया। सत्ती माता मंदिर, माँ दुर्गा मंदिर, लंगूरवीर मंदिर, श्याम मंदिर, राम मंदिर, सिद्धि विनायक गणेश मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, रामदेव बाबा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना कर यात्रा की विधिवत शुरुआत की गई।
गुजरात से मंगवाया गया अलौकिक ध्वज
आयोजकों ने बताया कि गुजरात से विशेष रूप से बाबा श्याम का आकर्षक और अलौकिक निशान मंगवाया गया है, जिसे श्री सत्तीचौरा माँ दुर्गा मंदिर में श्याम भक्तों द्वारा विधि-विधान से तैयार किया जाएगा।
सर्वसमाज का सहयोग, शहर में भक्तिमय माहौल
निशान यात्रा को लेकर दुर्ग शहर में उत्साह चरम पर है। सभी समाजों के लोग इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। फाल्गुन एकादशी पर दुर्ग नगरी श्याम भक्ति के रंग में रंगी नजर आएगी और यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक नई धार्मिक परंपरा की नींव रखेगा।
280 जोड़ों के विवाह से ‘गोल्डन बुक’ में नाम दर्ज, लेकिन व्यवस्थागत खामियों ने बिगाड़ा आयोजन का स्वाद
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। मंगलवार को जगदलपुर में संपन्न हुआ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का भव्य आयोजन मुख्यमंत्री के इसी 'सुशासन' का प्रतीक था, जहाँ 280 गरीब परिवारों की बेटियों का घर बसाया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर पिता की तरह नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया। लेकिन, अफ़सोस कि मुख्यमंत्री की इस पवित्र मंशा को जमीन पर उतारने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली से सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी?
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता बनाम अफसरों की संवेदनहीनता
एक ओर साय सरकार ने प्रदेशभर में 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया, वहीं दूसरी ओर जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में विभाग की घोर लापरवाही ने इस गौरवशाली क्षण को शर्मसार कर दिया। शासन की योजना तो बेटियों को सम्मान देने की थी, लेकिन विभाग के लापरवाह प्रबंधन ने कई नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों को तपती धूप में खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर भोजन करने के लिए मजबूर कर दिया।
क्या यही है सुशासन?
आयोजन स्थल पर टेंट, दरी और पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का कमी विभाग की तैयारियों की पोल खोल रहा था। जिस आयोजन को विभाग की देखरेख में यादगार और सम्मानजनक होना चाहिए था, उसे अधिकारियों की उदासीनता ने बदइंतजामी की भेंट चढ़ा दिया। बारातियों को घंटों भोजन के लिए तरसना पड़ा, जो यह सवाल खड़ा करता है कि जब सरकार ने बजट की कोई कमी नहीं रखी, तो फिर व्यवस्थाओं में यह 'कंजूसी' और 'लापरवाही' किसके संरक्षण में हुई?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की दरकार
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति के बावजूद विभाग के मैदानी अमले की निष्क्रियता साफ दिखी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहाँ अपनी योजनाओं से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा रहे हैं, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के ऐसे जिम्मेदार अधिकारी अपनी लचर व्यवस्था से सरकार की छवि धूमिल करने का काम कर रहे हैं। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या इन लापरवाह जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी, या फिर रिकॉर्ड की आड़ में इन व्यवस्थागत खामियों को दबा दिया जाएगा?
इस कार्यक्रम मे महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, राजस्व सभापति संग्राम सिंह राणा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में विवाह संस्कार संपन्न हुए, पर सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने आयोजन की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाया।
विभाग का पक्ष
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सिन्हा ने कहा कि 280 जोड़ों का सामूहिक विवाह योजनानुसार संपन्न हुआ। भोजन में दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी और रसगुल्ला रखा गया था तथा सभी को भोजन उपलब्ध कराया गया। उनके अनुसार आयोजन स्थल पर सामूहिक रूप से भोजन कराया गया और वे स्वयं निरीक्षण किये हैं।
हालाँकि, मौके पर मौजूद कुछ नवविवाहित जोड़ों ने अव्यवस्था के चलते भोजन नहीं कर पाने की बात कही, जिससे विभागीय दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता (India–US Interim Trade Agreement) भारत की वैश्विक आर्थिक साख और सामर्थ्य को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस समझौते से छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अमेरिकी बाजार तक नई पहुँच मिलेगी। विशेष रूप से राज्य के वन-आधारित उत्पाद, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, वस्त्र तथा कृषि आधारित उत्पादों के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस व्यापारिक ढांचे में किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही यह पहल महिला सशक्तिकरण को गति देने, स्थानीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूती प्रदान करने और मेक इन इंडिया की भावना को और सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता छत्तीसगढ़ के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में छत्तीसगढ़ एक सशक्त और सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह समझौता राज्य के समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को नई गति देगा।
बस्तर -जगदलपुर/
शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।
बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।
रायपुर / शौर्यपथ / पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भारत सरकार, रायपुर के नेतृत्व में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में भारत सरकार प्रवर्तित लोक कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन एवं प्रगति के अवलोकन के साथ ही साथ इस केन्द्र शासित प्रदेश की कला, संस्कृति और विरासत को जानने व समझने के लिए छत्तीसगढ़ की 12 सदस्यीय मीडिया टीम आज, 08 फरवरी, 2026 को रायपुर से पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना हो रही है ।
इस मीडिया टीम में हरिभूमि से श्री ब्रम्हवीर सिंह, नवप्रदेश से श्री यशवंत धोटे, स्वदेश से श्री जयप्रकाश मिश्रा, पिपुल्स समाचार से श्री वरूण कुमार चौहान, पत्रिका से श्री राहुल जैन, नवभारत से श्री जितेन्द्र मिश्रा, छत्तीसगढ़ से श्री पी. श्रीनिवास राव, दि हितवाद से श्री अभिषेक कुमार, आईबीसी-24 टीवी से श्री सौरभ सिंह परिहार, लल्लुराम डॉट कॉम से श्री प्रतीक चौहान और पीआईबी-रायपुर के दो ऑफिशियल्स श्री रमेश जायभाये तथा श्री परमानन्द साहू शामिल हैं ।
छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम 09 से 14 फरवरी, 2026 तक केन्द्र शासित प्रदेश का भ्रमण करेगी । इस दौरान मीडिया टीम 20 मेगावाट एनएलसी सोलर पावर प्लांट, डालीगंज, सेंट्रल आईलैंड एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, प्राणीशास्त्र संग्रहालय, मानव विज्ञान संग्रहालय, सेलुलर जेल, नार्थ-बे एवं नार्थ-बे लाइटहाऊस, एनएच-4 अपग्रेडेशन परियोजना, स्मार्ट सिटी परियोजना, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी, मिडिल स्ट्रेट क्रीक ब्रिज, बाराटांग लाइमस्टोन गुफाएं, मड वाल्केनो (गारामुखी), हम्प्रे स्ट्रेट ब्रिज, अमकुंज ईको-डेवलपमेंट साइट, धानी नल्ला मैंग्रेाव, कालीपुर ईको-टूरिज्म परियोजना, रॉस एवं स्मिथ द्वीप, चेन्नई-अंडमान सबमरीन ओएफसी परियोजना, बीएसएनएल केबल लैंडिंग स्टेशन, लालाजी बे इको-टूरिज्म रिसार्ट परियोजना, प्रस्तावित सी-प्लेन जेट्टी साइट, ताज एक्सोटिका एवं न्यू ईको-टूरज्मि स्थल और राधानगर बीच का भ्रमण करेगी ।
इसके अलावा मीडिया टीम अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल, मुख्य सचिव, मत्स्य एवं पर्यटन सचिव, फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया, भारतीय नौसेना, भारतीय कोस्ट गार्ड और भारत संचार निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगी ।
जगदलपुर/बस्तर।
“मां दंतेश्वरी की जय… सियान-सज्जन, दादा-दीदी मनके जोहार।”
इन्हीं आत्मीय शब्दों के साथ भारत की राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम महोत्सव में अपने ऐतिहासिक संबोधन की शुरुआत की। मां दंतेश्वरी के पावन धाम में उपस्थित होकर राष्ट्रपति ने इसे अपना सौभाग्य बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा लगता है। यहां के लोगों से मिलने वाला अपनत्व और स्नेह उनके लिए अमूल्य है।
राष्ट्रपति ने बस्तर को वीरों की धरती बताते हुए उन सभी सपूतों को नमन किया जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक वैभव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो मां दंतेश्वरी ने स्वयं इस धरती को संवारा हो।
राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय जीवन-शैली की सराहना करते हुए कहा कि यहां हर मौसम, हर फसल और हर ऋतु एक पंडुम है। बीज बोने से लेकर आम के मौसम तक, बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। यह जीवन-दर्शन पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के माध्यम से देशभर के लोगों ने जनजातीय संस्कृति की झलक देखी थी और इस वर्ष 50 हजार से अधिक कलाकारों व प्रतिभागियों द्वारा जनजातीय संस्कृति और जीवन-शैली के विविध रूपों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है। यहां की प्राचीन संस्कृति, जलप्रपात, गुफाएं और प्रकृति पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। उन्होंने होम-स्टे जैसे नए पर्यटन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चार दशकों तक बस्तर माओवाद की हिंसा से पीड़ित रहा, जिसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासियों और दलित समुदायों को हुआ। लेकिन अब भारत सरकार और राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई से भय और असुरक्षा का माहौल समाप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में माओवाद से प्रभावित लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वे सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकें। ‘नियद नेल्लानार योजना’ को उन्होंने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव बिजली, सड़क और पानी पहुंच रहा है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे शिक्षा की ओर लौट रहे हैं। यह बदलाव पूरे देश के लिए आशा और विश्वास का संदेश है।
हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यही ताकत है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति बनकर बस्तर की जनता को संबोधित कर रही है।
राष्ट्रपति ने बताया कि पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों को विकास से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा को उन्होंने व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला बताया और माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं। जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना को उन्होंने भविष्य निर्माण की दिशा में अहम कदम बताया।
राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती, डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी लोग ही समाज को संवेदनशील और समावेशी बनाते हैं।
अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति ने कहा कि मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपराओं और भाईचारे का प्रतीक है। विकास का वही मॉडल सफल होता है जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करें।
राष्ट्रपति ने बस्तरवासियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि आपकी प्रगति ही छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की नींव है।
“जय जय छत्तीसगढ़ महतारी” के उद्घोष के साथ उन्होंने मां दंतेश्वरी से देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
जगदलपुर, शौर्यपथ। शहर की भागदौड़, धूल और शोर-शराबे से दूर बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का एक अनुपम स्थल मिल गया है। कुम्हड़ाकोट में निर्मित जनजातीय गौरव वाटिका का लोकार्पण शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा विधायक किरण सिंह देव के कर-कमलों से हुआ। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह वाटिका अब आमजन के लिए समर्पित कर दी गई है, जो बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी है।
लोकार्पण समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी, संचालक कांगेर वैली सुश्री स्टायलो मंडावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
लोकार्पण के पश्चात अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना की शुरुआत हेल्थ पार्क की अवधारणा से हुई थी, जिसे बाद में एक बहुआयामी और आकर्षक वाटिका के रूप में विकसित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा जोन, ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
वाटिका में बनाए गए गपशप जोन, पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा, प्लास्टिक फ्री जोन की व्यवस्था तथा इको-फ्रेंडली अवधारणा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। परिसर के मध्य स्थित तालाब और आइलैंड ने वाटिका की सुंदरता को और निखार दिया है। आगंतुकों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार पर पार्किंग और प्रसाधन की समुचित व्यवस्था भी की गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में ट्री-हाउस और एडवेंचर गतिविधियों की योजना भी प्रस्तावित है। लोकार्पण के साथ ही जनजातीय गौरव वाटिका अब बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण के रूप में दर्ज हो गई है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों एवं हितग्राहियों को एक करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया।
बकावण्ड की मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह को काजू प्रसंस्करण एवं विपणन हेतु 50 लाख रुपये, आसना के गोधन स्व-सहायता समूह को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये, घोटिया एवं भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए 13-13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। यह पहल स्थानीय रोजगार को मजबूती देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को दो लाख रुपये की बीमा सहायता राशि का चेक सौंपा। यह सहायता उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी।
उप मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए इमली एवं काजू प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के विस्तार, बाजार उपलब्धता और मार्केटिंग व्यवस्था पर भी चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल विकास और पर्यटन को गति देने वाला रहा, बल्कि बस्तर के वनांचलों में रोजगार, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता नजर आया।
आदिवासी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों ने जताई नाराज़गी
प्रमुख प्रश्न: DMFT व CSR फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग
जगदलपुर, शौर्यपथ। वीर आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर की जयंती (भूमकाल दिवस) के आयोजन को लेकर बस्तर संभाग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कुछ प्रश्न और आपत्तियाँ सामने रखी गई हैं। सर्व आदिवासी समाज सहित एसटी-एससी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों का कहना है कि उन्होंने नगरनार स्टील लिमिटेड (NMDC) से कार्यक्रम के लिए सहयोग का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
समाज प्रतिनिधियों के अनुसार, 10 फरवरी को प्रस्तावित गुंडाधुर जयंती कार्यक्रम के संबंध में बस्तर संभाग के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने नगरनार स्टील लिमिटेड के एडीजीएम बाबजी से मुलाकात कर औपचारिक आमंत्रण सौंपा था। इस दौरान सामाजिक सहभागिता और सहयोग का निवेदन किया गया।
समाज प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन की ओर से यह जानकारी दी गई कि स्टील प्लांट आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, जिस कारण किसी प्रकार का सहयोग फिलहाल संभव नहीं है। इसके बाद उन्हें परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई, जहाँ से भी उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कार्यकारी निदेशक से मुलाकात के प्रयास के दौरान व्यस्तता का हवाला दिया गया, जिससे वे अपनी बात सीधे रखने में असमर्थ रहे। इस स्थिति से समाजों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।
इसी क्रम में समाजों की ओर से यह प्रश्न भी उठाया गया है कि जिले के लिए स्वीकृत DMFT और CSR फंड का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जा रहा है। समाजों का कहना है कि यदि यह राशि स्थानीय विकास और सामाजिक गतिविधियों के लिए है, तो ऐसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि गुंडाधुर जयंती बस्तर के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में सामाजिक संवाद और समन्वय के माध्यम से ऐसे विषयों का समाधान निकाला जाएगा।
ओबीसी महासभा एवं अन्य समाज संगठनों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार, सामाजिक सहभागिता तथा DMFT-CSR फंड के उपयोग से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
समाज प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर संवाद और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।
10वें दिन 130 से अधिक प्रदर्शनों का आंकड़ा पार; अंतर्राष्ट्रीय नाटकों और नुक्कड़ नाटकों ने जीता दर्शकों का दिल
बिलासपुर / शौर्यपथ / नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वां भारत रंग महोत्सव (BRM), अपने 10वें दिन भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सिल्वर जुबली मना रहे इस महोत्सव ने अपनी विविधता और भव्यता से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के 19 केंद्रों पर थिएटर की एक नई ऊर्जा का संचार किया है। अब तक इस फेस्टिवल में 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें माइक्रो ड्रामा, वन-एक्ट प्ले और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं।
महोत्सव के 10वें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली के मंच पर "बदज़ात" और "डैडी" जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ, वहीं कश्मीरी लोक परंपरा 'भांड पाथर' पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” और रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को मजबूती प्रदान की।एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल 'आद्वित्य' के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया। इसमें बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर "कुछ अनसुने", पेरेंटिंग स्टाइल पर आधारित "बेबी शार्क डू डू डू डू" और कैदियों के जीवन के संघर्ष को दर्शाते नाटकों ने युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही एफटीआईआई की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने सिनेमाई बारीकियों से दर्शकों को परिचित कराया।
भारत रंग महोत्सव 2026 की खास बात इसकी व्यापक पहुंच है। दिल्ली के मुख्य केंद्र के साथ-साथ यह महोत्सव छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। रायपुर के रंगमंच प्रेमी इन उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का गवाह बन रहे हैं, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच और नई दृष्टि मिल रही है। रायपुर के अलावा बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में भी नाटकों का मंचन जारी है।
यह 25वां संस्करण 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे 25 दिनों के इस सफर में 9 देशों और भारत के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के थिएटर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन दिखाए जाएंगे, जिनमें कई दुर्लभ और कम बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / साहित्य समिति, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) द्वारा वार्षिक साहित्यिक महोत्सव “आईरिस 2026” का आयोजन 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांच दिनों तक चले इस आयोजन के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें मिथोलॉजिकल क्विज, स्लोगन लेखन, कविता पाठ, गेस द डिज़ीज, मेडिकल एटलस, मेडिकल क्विज, एक्सटेम्पोर और वाद-विवाद प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता का अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पाया।
सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन महाविद्यालय के अनुभवी और सम्मानित संकाय सदस्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से किया गया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कार्यक्रम की गुणवत्ता बनी रही।
महोत्सव के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जो माननीय अधिष्ठाता (डीन) डॉ. पी. एम. लुका की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. लुका ने साहित्य समिति और आयोजक दल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह संपूर्ण आयोजन संकाय समन्वयकों डॉ. दिव्या साहू, डॉ. अनिल बरन चौधरी, डॉ. इंदु पद्मेय एवं डॉ. रूबी साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वहीं छात्र समन्वयकों आशुतोष चंद्र कुमार एवं जी. सृष्टि ने कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाई और सभी व्यवस्थाओं को अच्छे ढंग से संभाला।
आईरिस 2026 का समापन अत्यंत सफल और यादगार रहा। इस महोत्सव ने विद्यार्थियों को सीखने, अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान किया, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण और भी समृद्ध हुआ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
