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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु मुख्यमंत्री की दूरदर्शी पहल
सीएसआर निधि से प्रदत्त एम्बुलेंस में उपलब्ध है बेसिक लाइफ सपोर्ट समेत आधुनिक सुविधाएँ
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया स्थित कैम्प कार्यालय परिसर से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एम्बुलेंस बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि से प्रदत्त है, जिसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम सहित अन्य उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
यह एम्बुलेंस मुख्य रूप से मनोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रखी जाएगी, जिसकी सेवाएँ आवश्यकता अनुसार पूरे जिले में ली जा सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा परिवहन सेवा सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सहायता मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित है। उनकी पहल पर विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि कुनकुरी में मेडिकल कॉलेज और 50 बिस्तर वाला मातृ एवं शिशु अस्पताल, जशपुर में प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का कार्य प्रगति में है।
इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
'नियद नेल्ला नार' बना सुशासन का जीवंत प्रमाण: जहाँ कभी बंदूकें थीं, वहाँ अब किताबें हैं – बस्तर में भय से विश्वास की ओर बढ़ती नई सुबह
रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के वे सुदूरवर्ती गाँव, जो वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहे, आज नई उम्मीदों और उजालों की ओर अग्रसर हैं। जहाँ कभी बिजली, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं अब वही गाँव प्रगति के रास्ते पर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की नींव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और जन सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप 15 फरवरी 2024 को 'नियद नेल्लानार – आपका आदर्श ग्राम योजना' के रूप में रखी गई। यह योजना उन क्षेत्रों तक शासन की संवेदनशील और सक्रिय पहुँच सुनिश्चित करने का क्रांतिकारी प्रयास है, जहाँ अब तक केवल उपेक्षा और प्रतीक्षा का सन्नाटा था।
मुख्यमंत्री साय का स्पष्ट मानना रहा है कि केवल सुरक्षा शिविर स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं, जब तक वहाँ शासन की संवेदनशील उपस्थिति और समग्र विकास की किरण नहीं पहुँचे। इसी सोच के साथ बस्तर के पाँच नक्सल प्रभावित जिलों—सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कांकेर—में 54 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए। इन शिविरों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 327 गाँवों को चिन्हित कर यह निर्णय लिया गया कि इन सभी को शत-प्रतिशत योजनाओं से जोड़ते हुए एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा।
इस पहल के साथ ही गाँवों में बदलाव की हवा बहने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 31 नए प्राथमिक विद्यालयों की स्वीकृति दी, जिनमें से 13 स्कूलों में कक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं। 185 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 107 पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे बच्चों को पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा मिलने लगी है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 20 उप-स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए, जिनमें से 16 स्वास्थ्य केंद्र प्रारम्भ हो चुके हैं। ये वही गाँव हैं जहाँ पहले एक सामान्य दवा के लिए भी लोगों को मीलों जंगल पार करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में संचार और संपर्क साधनों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। पहले जहाँ मोबाइल सिग्नल का नामोनिशान नहीं था, वहाँ अब 119 मोबाइल टावरों की योजना बनी और 43 टावर कार्यशील हो चुके हैं। 144 हाई मास्ट लाइट्स की मंजूरी दी गई, जिनमें से 92 गाँवों में अब रात के अंधेरे में उजियारा फैलने लगा है। सड़क और पुल निर्माण के लिए 173 योजनाएँ बनाई गईं, जिनमें से 116 को स्वीकृति मिल चुकी है और 26 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। यह विकास केवल अधोसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक जुड़ाव और पहचान का सशक्त माध्यम बन चुका है। आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 70,954 लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं, 46,172 वृद्धजनों को आयु प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं और 11,133 नागरिकों का मतदाता पंजीकरण हुआ है, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार बन पाए हैं। 46,172 लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी कर मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12,232 मकानों का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से 5,984 परिवारों को स्वीकृति मिल चुकी है। किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,677 किसानों को सहायता राशि प्रदान की गई है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 6,460 घरों में व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं। रसोई को धुएँ से मुक्त करने के उद्देश्य से 18,983 महिलाओं को उज्ज्वला और गौ-गैस योजना के तहत गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। 30 गाँवों में डीटीएच कनेक्शन भी दिए गए हैं, जिससे ये गाँव अब सूचना और मनोरंजन के मुख्य प्रवाह से जुड़ चुके हैं।
यह परिवर्तन मात्र योजनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच एक नए भरोसे का रिश्ता है, जिसकी बुनियाद सहभागिता और पारदर्शिता पर टिकी है। वर्षों तक शासन से कटे रहे लोग अब स्वयं विकास की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं। अब ग्रामीण स्वयं आंगनबाड़ी की उपस्थिति पंजी, राशन दुकान की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे हैं। यह वही बस्तर है, जो भय से विश्वास और उपेक्षा से भागीदारी की ओर बढ़ चला है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस दूरदर्शिता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन से आता है। 'नियद नेल्लानार' केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह बस्तर के पुनर्जागरण की यात्रा है—एक ऐसी यात्रा जिसमें बंदूक की जगह अब किताबें हैं, अंधेरे की जगह उजियारा है और असहमति की जगह अब सहभागी लोकतंत्र की भावना है।
मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री श्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने श्री नीरज शर्मा, श्री अजय कुमार कुशवाहा और श्री शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है।
इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है।
इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर श्री प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के श्री रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की दिखी झलक
श्री साव ने हल और कृषि औजारों की पूजा कर गौमाता को आटे की लोंदी खिलाई, गेड़ी का भी लिया आनंद
प्रदेशवासियों को दी हरेली की बधाई और शुभकामनाएं
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास पर आज सुबह से हरेली की धूम रही। उन्होंने सपरिवार हल और कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गौमाता को आटे की लोंदी और गुड़ खिलाया। उन्होंने गेड़ी का भी आनंद लिया। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री रोहित साहू और श्री मोतीलाल साहू भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
हरेली पर उप मुख्यमंत्री साव के निवास पर चहुंओर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की झलक दिखी। उन्होंने हरेली पर्व में शामिल होने अपने निवास पहुंचे सभी लोगों का परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों चौसेला, गुलगुल भजिया, बरा, टमाटर की चटनी और भजिया खिलाकर स्वागत व आवभगत किया। उन्होंने हरेली पर अपने निवास में शीशम का पौधा लगाया।
उप मुख्यमंत्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली तीज-तिहारों से संपन्न छत्तीसगढ़ का साल का पहला लोक पर्व है। मुख्यतः कृषि और किसानों को समर्पित यह पर्व आज पूरे प्रदेश में उत्साह व उमंग के साथ मनाया जा रहा है। हरेली में गेड़ी का परंपरागत साथ बच्चों के लिए भी इस त्योहार को उत्साहपूर्ण बनाता है। हरेली से मेरे बचपन की कई अच्छी और सुखद यादें जुड़ी हुई हैं। रायपुर नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौर, खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष छगन मूंदड़ा, बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशवंत जैन, पवन साय और अनुराग अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
? कोरबा |
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में एक विशेष विवाह आवेदन को लेकर सामाजिक हलकों में गहरी हलचल मची हुई है। एक युवक द्वारा विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत आवेदन देने के बाद, जिले के कई प्रमुख सामाजिक संगठनों ने इस विवाह को संदिग्ध मानते हुए प्रशासन को गहरी आपत्ति पत्र सौंपे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तौसीफ़ मेमन नामक युवक ने शोभा सिंह नाम की युवती से विवाह हेतु आवेदन दिनांक 23 जून 2025 को कार्यालय अपर कलेक्टर एवं विवाह अधिकारी, कोरबा में प्रस्तुत किया था। प्रथम दृष्टया यह एक वैधानिक प्रक्रिया प्रतीत होती है, परंतु जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, हिन्दू मंदिर नारायणी सेना, महाराणा प्रताप चौक व्यापार मंडल, राजपूत क्षत्रिय समाज, समेत कई सामाजिक संस्थाओं ने इस पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
इन संगठनों ने अपने ज्ञापनों में आरोप लगाया कि:
युवक तौसीफ़ मेमन की पृष्ठभूमि संदिग्ध है।
वह मूलतः बांग्लादेशी घुसपैठिया रोहिंग्या मुसलमान हो सकता है।
उसका संबंध झींगुर बाबा गिरोह जैसे संगठनों से होने की आशंका भी जताई गई है।
इस विवाह का उद्देश्य केवल लव जिहाद या धार्मिक छल हो सकता है।
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए विवाह अधिकारी ने दिनांक 23 जुलाई 2025 को पुलिस अधीक्षक, कोरबा को पत्र जारी कर संबंधित युवक की पूरी पृष्ठभूमि की गहन जांच कर सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पत्र में यह स्पष्ट कहा गया है कि यदि आपत्तियों की पुष्टि होती है, तो आवेदन को नियमों के तहत रद्द किया जाएगा।
? क्या कहा है पत्र में?
"...आवेदक की पहचान को लेकर प्रस्तुत आपत्तियाँ अत्यंत गंभीर हैं। यदि वह वास्तव में बांग्लादेश से आया रोहिंग्या शरणार्थी है अथवा धर्मांतरण हेतु छल कर रहा है, तो यह विवाह कानून की मूल भावना के प्रतिकूल होगा..."
प्रशासन ने इस मामले में केवल दस्तावेज़ों को देखकर निर्णय नहीं लिया, बल्कि सामाजिक संगठनों की शंकाओं को आधार बनाकर जाँच प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। विवाह अधिकारी ने यह भी उल्लेख किया है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों का निजी मामला नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा का पहलू भी गहराई से जुड़ा है।
आपत्ति करने वाले संगठनों ने कहा है कि यदि इस प्रकार के मामलों में प्रशासन मौन रहता है तो यह भविष्य में मासूम लड़कियों के साथ धोखा, शोषण और कट्टरपंथी नेटवर्क के प्रसार का मार्ग खोल सकता है।
विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत दो अलग-अलग धर्मों के युवक-युवती विवाह कर सकते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी सत्यापन से जुड़ी होती है। किसी भी प्रकार की झूठी जानकारी, विदेशी नागरिकता छिपाना या पहचान से छेड़छाड़ इस अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
यह मामला न केवल प्रशासन की सतर्कता का उदाहरण है, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और सजगता का भी प्रतीक है। यदि वाकई इस विवाह के पीछे किसी प्रकार का छल, पहचान की धोखाधड़ी या सांप्रदायिक उद्देश्य छिपा हो, तो यह हर नागरिक के लिए एक खतरे की घंटी है।
"बेटियों को बचाने के लिए कानून, समाज और प्रशासन — तीनों का सजग रहना अनिवार्य है।"
कोरबा प्रशासन ने सही दिशा में कदम उठाते हुए सामाजिक आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया है। अब यह जिम्मेदारी पुलिस जांच पर है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर न्यायसंगत निर्णय के लिए मार्ग प्रशस्त करे।
इस तरह के मामलों में सिर्फ भावनाओं से नहीं, सत्यता और प्रमाण के साथ ही कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – “नक्सलवाद की रात ढल रही है, बस्तर में विकास की नई सुबह हो रही है”
रायपुर/शौर्यपथ ब्यूरो/
(साभार: जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़ शासन)
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि "नक्सलवाद की रात अब ढल रही है और विकास की नई सुबह का उदय हो चुका है।" उन्होंने बताया कि बस्तर रेंज में ₹2.54 करोड़ के इनामी 66 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। इस आत्मसमर्पण में ₹25 लाख के इनामी माओवादी SZCM (South Zonal Committee Member) रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश भी शामिल है, जो संगठन का एक शीर्ष रणनीतिकार रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक आत्मसमर्पण डबल इंजन सरकार की सुशासन, सुरक्षा और पुनर्वास नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार की समावेशी और सशक्त योजनाओं ने इस दिशा में निर्णायक बदलाव लाया है।
एक ही दिन में 5 जिलों से आए 66 नक्सली मुख्यधारा में
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि:
बीजापुर से 25, दंतेवाड़ा से 15, कांकेर से 13, नारायणपुर से 8, सुकमा से 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
इन सभी ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ शांति और विकास की दिशा में चलने का निर्णय लिया।
‘पूना मारगेम’ – पुनर्वास से पुनर्जीवन की नीति बनी बदलाव की धुरी
मुख्यमंत्री साय ने “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति को इस परिवर्तन का केंद्रीय तत्व बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इन नक्सलियों के भविष्य को संवारने और उन्हें समाज के सम्मानित नागरिक के रूप में पुनः स्थापित करने हेतु पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
18 महीनों में 1,570 माओवादियों का आत्मसमर्पण – सरकार की नीति की व्यापक स्वीकार्यता
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 18 महीनों में 1,570 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह सरकार की पारदर्शी, नागरिक हितैषी और मानवीय दृष्टिकोण से प्रेरित नीति की सफलता का प्रमाण है। आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात और रणनीतिक स्तर के माओवादी शामिल हैं।
केंद्र-राज्य समन्वय से बस्तर में विकास और सुरक्षा की नई लहर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य और केंद्र सरकार मिलकर बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास का समवेत अभियान चला रही हैं।
उन्होंने बताया कि अब बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में:
सड़कों का विस्तार, पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन, बिजली एवं डिजिटल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुँच चुकी हैं।
रामन्ना ईरपा का आत्मसमर्पण – माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका
सूत्रों के अनुसार, रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश माओवादी संगठन का दक्षिण जोनल कमेटी सदस्य (SZCM) था, जो रणनीति, भर्ती और स्थानीय नेटवर्क संचालन का प्रमुख चेहरा रहा है। उसका आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने जैसा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री का संदेश – “बस्तर भय से नहीं, भविष्य से पहचाना जाएगा”
मुख्यमंत्री साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा:
"हम हर उस हाथ को थामेंगे, जो हथियार छोड़कर शांति, शिक्षा और सृजन की राह पर लौटना चाहता है। यह बस्तर के पुनर्निर्माण का समय है। यह सामाजिक भागीदारी से संचालित नया युग है।"
निष्कर्ष: नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार, विकास की ठोस जमीन
बस्तर की यह घटना केवल एक प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि आशा, पुनर्वास और सामाजिक पुनरुत्थान की ऐतिहासिक पटकथा है। नक्सलवाद के आतंक से लंबे समय से जूझते बस्तरवासियों के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है — अब बस्तर की पहचान भय नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना होगी।
? रिपोर्ट: शरद पंसारी
संपादक: शौर्यपथ दैनिक समाचार
? www.shouryapathnews.in | ? संपर्क: 8962936808
(साभार: जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़ शासन)
कृषि यंत्रों के साथ ही आधुनिक कृषि यंत्र ड्रोन की पूजा कर लगाया गुड़ के चीला का भोग
रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक और प्रथम त्यौहार हरेली आज जिले भर में अपार उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सावन मास की अमावस्या को मनाए जाने वाला यह पर्व, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि, संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है, इस बार भी अपने रंग-रूप और परंपराओं के साथ लोगों के दिलों में उत्सव का माहौल लेकर आया। इस अवसर पर किसानों ने अपने पारंपरिक कृषि यंत्रों हल, नांगर, कुदाली और फावड़े की पूजा कर फसलों की सुखद पैदावार और समृद्धि की कामना की। वहीं बालोद जिले की तीन ड्रोन दीदियों ने आधुनिक तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम पेश करते हुए आधुनिक कृषि यंत्र ड्रोन की पूजा कर हरेली तिहार को नया आयाम दिया।
जिले में तीन ड्रोन दीदियों श्रीमती चित्ररेखा साहू, श्रीमती भावना साहू और सुश्री रूचि साहू ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हरेली तिहार को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। ये ड्रोन दीदियां, जो शासन की ड्रोन दीदी योजना के तहत तकनीकी रूप से प्रशिक्षित हैं, जो कि नियमित रूप से किसानों के मित्र के रूप में तथा कृषि कार्य में अहम भूमिका निभाते हुए फसलों में नैनो उर्वरक छिड़काव का कार्य मिनटों में पूरा कर देती हैं। आज उन्होंने हरेली तिहार के अवसर पर ड्रोन को धूप-दीप से पूजित किया और नारियल व गुड़ के चीले का भोग लगाया। ड्रोन दीदी श्रीमती चित्ररेखा साहू ने कहा कि हमारी परंपरा हमें कृषि यंत्रों का सम्मान सिखाती है। ड्रोन आज हमारा आधुनिक कृषि यंत्र है, जो दवाई छिड़काव और फसलों की निगरानी में मदद करता है। इसे पूजकर हम प्रकृति और तकनीक के मेल को बढ़ावा दे रहे हैं।
ड्रोन दीदी श्रीमती भावना साहू ने बताया कि ड्रोन तकनीक से खेती में समय और मेहनत की बचत हो रही है, और हरेली तिहार के इस अवसर पर उन्होंने संकल्प लिया कि वे जिले के अन्य किसानों को भी इस तकनीक से जोड़ेंगी। ड्रोन दीदी सुश्री रूचि साहू ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि बालोद जिले के हर खेत तक ड्रोन की पहुंच हो, ताकि फसल उत्पादन दोगुना हो और किसानों का जीवन आसान बने। ड्रोन दीदियों ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोंच से हम महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस योजना से हमें आत्मनिर्भर बनकर जीवन में बेहतर कार्य करने का आत्मबल मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयासों से आज कृषि के क्षेत्र में निरंतर नवाचार देखने को मिल रहा है। इससे हम लोगों को बेहतर आय और सुखद जीवन मिला है। हमारे द्वारा निरंतर ही किसानों के फसलों में नैनो उर्वरक का छिड़काव व देखरेख किया जा रहा है। ड्रोन दीदियों ने हरेली तिहार के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, उन्हें हरेली तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की है।
छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली
ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी।
बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है।
इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशों पर राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सुधार और शिक्षक समुदाय के हित में त्वरित निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक 23 जुलाई 2025 को विभिन्न विषयों के 1227 व्याख्याता (टी संवर्ग) शिक्षकों को पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। इन व्याख्याताओं की पदस्थापना काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी। इन विषयों में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और वाणिज्य जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। यह निर्णय सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत राज्य के शिक्षकों को उनके कार्य, वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर समय पर पदोन्नति और अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि विगत एक वर्ष में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला एवं संभाग स्तर पर लगभग 7000 पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही संपन्न की गई है। इसके साथ ही, 2621 सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) की सीधी भर्ती काउंसिलिंग के माध्यम से की गई, जिससे स्कूलों में प्रयोगात्मक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
इससे पूर्व दिनांक 30 अप्रैल 2025 को लगभग 2900 प्राचार्यों के पदोन्नति आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में पदोन्नत टी संवर्ग के प्राचार्यों की पदस्थापना भी काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और स्थान-आवश्यकता के आधार पर समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
ई संवर्ग के प्राचार्यों का प्रकरण माननीय न्यायालय में लंबित है। माननीय न्यायालय के निर्णयानुसार समयबद्ध रूप से आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है।
श्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।
रायपुर / शौर्यपथ /
भारतीय कृषि में जैविक और अजैविक तनाव प्रबंधन तथा नीतियों पर दो दिवसीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन 21 और 22 जुलाई को आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर में हुआ। यह कार्यक्रम आईसीएआर–राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एनआईएएसएम), बारामती और भारतीय कृषि अर्थशास्त्र सोसायटी (आईएसएई), मुंबई के सहयोग से तथा नाबार्ड, रायपुर के आंशिक समर्थन से आयोजित किया गया।
सत्र में देशभर के करीब 70 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री और नीति निर्माता शामिल थे। उन्होंने कृषि में जैविक (कीट, रोग, आक्रामक प्रजातियां) और अजैविक (सूखा, लवणता, बाढ़, ताप) तनावों के प्रबंधन के विज्ञान आधारित दृष्टिकोण पर चर्चा की। इस अवसर पर भविष्य की नीतियों और कार्यक्रमों के लिए एक नीति पत्र तैयार करने पर सहमति बनी।
उद्घाटन सत्र में डॉ. एच.सी. शर्मा, पूर्व कुलपति, एचपीकेवी, पालमपुर; डॉ. पी.के. चक्रवर्ती, पूर्व एडीजी (पीपी एंड बी), सदस्य, एएसआरबी; डॉ. पी.के. राय, निदेशक, एनआईबीएसएम; डॉ. के. सम्मी रेड्डी, निदेशक, एनआईएएसएम; डॉ. डी.के. मारोठिया, अध्यक्ष, आईएसएई; श्री ज्ञानेंद्र मणि, सीजीएम, नाबार्ड और डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी, संयुक्त निदेशक, एनआईबीएसएम ने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान तनाव प्रबंधन पर आधारित दो प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।
तकनीकी सत्रों में जैविक तनाव प्रबंधन में वैज्ञानिक और नियामक नवाचार पर डॉ. एच.सी. शर्मा, जैविक तनाव के लिए नीति और संस्थागत रणनीतियों पर डॉ. पी.के. चक्रवर्ती, अजैविक तनाव के लिए तकनीकी हस्तक्षेप पर डॉ. अंजनी कुमार (आईएफपीआरआई) और अजैविक तनाव लचीलापन बढ़ाने की रूपरेखाओं पर डॉ. के.एल. गुर्जर (डीपीपीक्यूएस) ने प्रस्तुतियां दीं।
चर्चाओं से तैयार नीति पत्र भविष्य में शोध, निवेश और राष्ट्रीय कार्यक्रमों को दिशा देगा। कार्यक्रम का समापन डॉ. के. श्रीनिवास द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
बच्चों के समुचित विकास के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग समन्वय के साथ करें कार्य
अगली कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित योजनाओं की होगी गहन समीक्षा
बच्चों से जुड़ी योजनाओं का हो शत-प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करें कलेक्टर
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नौनिहालों के पोषण और उनको सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों के समुचित विकास हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ मिलकर कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित योजनाओं की जिलेवार नियमित मॉनिटरिंग सचिव स्तर से की जाए तथा आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारभूत संरचना, बजट और संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभाग बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के पोषण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों की देखभाल और पोषण जितनी संवेदनशीलता और कुशलता से की जाएगी, उनका शारीरिक और मानसिक विकास उतना ही प्रभावी और सुदृढ़ होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चे हमारे देश के भविष्य की नींव हैं और इस नींव को मजबूत करने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अमले को जमीनी स्तर पर सक्रियता और स्वप्रेरणा के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को पूरक पोषण आहार और विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो।
उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहार, गर्म भोजन, उसकी मात्रा, गुणवत्ता और कैलोरी मानकों सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की और वितरण की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री साय ने पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित 197 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जानकारी ली तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों की समीक्षा करते हुए अपेक्षित सुधार लाने हेतु ठोस प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सूचकांकों के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आंकलन संभव होता है, और जहां भी कमी दिखाई दे, वहां त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि यह प्रगति इसी प्रकार सतत बनी रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास पर छोटी-छोटी बातों और व्यवहार का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संवेदनशीलता के साथ बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव बनाएं।
मुख्यमंत्री साय ने विभागीय अमले के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि वे तकनीकी रूप से दक्ष और अनुसंधानपरक दृष्टिकोण के साथ परिणामोन्मुखी कार्य कर सकें।
बैठक में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन, महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला कोष, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन वात्सल्य तथा अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, श्री राहुल भगत, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक श्री पी. एस. एल्मा सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
- कलेक्टर ने राजस्व प्रकरणों को समय-सीमा के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए
- किसान निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर या लोक सेवा केन्द्रों में जाकर कराए अपना एग्रो स्टेट में रजिस्ट्रेशन
- कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर राजस्व संबंधी कार्यों की गहन समीक्षा की
राजनांदगांव /शौर्यपथ /कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर राजस्व संबंधी कार्यों की गहन समीक्षा की। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने कहा कि राजस्व से जुड़े प्रकरणों के लिए जनसामान्य को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राजस्व प्रकरणों को समय-सीमा के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने पटवारियों को जनसामान्य के साथ अच्छा व्यवहार रखने के निर्देश दिए। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने एग्रो स्टेट में किसानों का रजिस्ट्रेशन प्राथमिकता के साथ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने धान उपार्जन केन्द्रों में जिन किसानों ने पिछले वर्ष धान का विक्रय किया है उनका प्राथमिकता के साथ अनिवार्य रूप से एग्रो स्टेट में रजिस्ट्रेशन कराने कहा। उन्होंने तहसीलदारों को किसानों का निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर या लोक सेवा केन्द्रों में जाकर अपना एग्रो स्टेट में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जागरूकता लाने कहा। उन्होंने स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेख वितरण की कार्रवाई 1 अगस्त तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिन्हांकित तहसीलों के वन भूमि का राजस्व एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त सर्वे कर 15 दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा। वृक्षारोपण के लिए स्थल का चिन्हांकन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। नक्शा बटांकन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। किसानों का आधार सीडिंग और मोबाईल नंबर सीडिंग के कार्य को प्राथमिकता के साथ कराने कहा।
कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों को प्राथमिकता के साथ तत्काल भेजने के निर्देश दिए। जिससे संबंधित व्यक्ति को समय पर सहायता राशि मिल सके। उन्होंने जिले में संचालित बंद खदानों में दुर्घटना की आशंका को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही खुले बोर, कुओं का चिन्हांकन सुरक्षा व्यवस्था करने कहा। आदिवासी जमीन की खरीदी-बिक्री प्रकरण के संबंध में प्रतिवेदन पर विशेष ध्यान देने कहा। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए। जिले में चल रहे अवैध प्लाटिंग पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने डिजिटल क्राप सर्वे खरीफ के लिए फिल्ड सर्वेयरों को प्रशिक्षण देने कहा। उन्होंने अविवादित नामांतरण, विवादित खाता विभाजन एवं सीमांकन के कार्यों को समय-सीमा में करने के निर्देश दिए। जियोरिफरेसिंग नक्शा का स्थल भौतिक सत्यापन, नजूल जांच, गलत प्रविष्टि का सुधार कार्य, लोक सेवा केन्द्र में लंबित प्रकरण सहित राजस्व के विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा की। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल, एसडीएम राजनांदगांव श्री खेमलाल वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती सरस्वती बंजारे, संयुक्त कलेक्टर सुश्री हितेश्वरी बाघे सहित अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
