February 05, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

*रेट प्रिंट से ऊपर बिक रहा ज़हर!

कोंडागांव में गुटखा-सिगरेट की अवैध बिक्री,
नए टैक्स से पहले थोक व्यापारियों की जमाखोरी,
विभागीय चुप्पी से पनप रहा काला कारोबार**

कोंडागांव | दीपक वैष्णव की  विशेष रिपोर्ट

एक ओर आम आदमी महंगाई की मार से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर कोंडागांव का बाजार नए नियम लागू होने से पहले ही मनमानी महंगाई और कालाबाजारी का गवाह बन चुका है। नगर में गुटखा, जर्दा और सिगरेट बिना रेट प्रिंट, तय मूल्य से कहीं अधिक दामों पर खुलेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि संबंधित विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है।

नए नियम से पहले ही ‘लूट का लाइसेंस’!

भारत सरकार द्वारा 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर नए उत्पाद शुल्क, स्वास्थ्य उपकर और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू किया जाना है। साथ ही चबाने वाले तंबाकू, जर्दा व पान-मसाला के लिए नए पैकिंग नियम अधिसूचित किए जा चुके हैं।

लेकिन कोंडागांव में नियम लागू होने से पहले ही
? थोक व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी है
? पुराने स्टॉक को नए दामों पर खपाया जा रहा है
? छोटे दुकानदार मजबूरी में अधिक कीमत पर बेचने को विवश हैं

यह स्थिति केवल महंगाई नहीं, बल्कि संगठित कालाबाजारी का संकेत देती है।

प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से गुटखा बिक्री

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश के कई राज्यों में गुटखा के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद कोंडागांव के हर चौक-चौराहे, ठेले-गुमटी और किराना दुकानों में
थोक और चिल्लर दोनों स्तर पर प्रतिबंधित गुटखा खुलेआम बिक रहा है।

यह सवाल खड़ा करता है कि
➡️ यह माल आ कहां से रहा है?
➡️ किसकी मिलीभगत से बाजार तक पहुंच रहा है?
➡️ और विभाग की निगाहें आखिर कहां टिकी हैं?

**त्योहारों में मिठाई दुकानों पर छापे,

लेकिन गुटखा पर ‘अघोषित संरक्षण’?**

विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है।
त्योहारी सीजन में
✔️ मिठाई दुकानों पर लगातार दबिश
✔️ सैंपल लेकर ‘खाना-पूर्ति’ की कार्रवाई

लेकिन शहर भर में चल रहे गुटखा-सिगरेट के अवैध कारोबार पर न कोई छापा, न कोई कार्रवाई।
यह चयनात्मक सक्रियता स्पष्ट रूप से विभागीय लापरवाही या मौन सहमति की ओर इशारा करती है।

राजस्व चोरी और सुशासन की पोल

बिना रेट प्रिंट, बिना वैध टैक्स और तय मूल्य से अधिक दामों पर बिक्री
? सीधे-सीधे सरकारी राजस्व की चोरी है
? स्वास्थ्य कानूनों की खुली अवहेलना है
? और सुशासन के दावों पर करारा तमाचा है

प्रदेश सरकार भले ही सुशासन की बात करे,
लेकिन कोंडागांव की जमीनी हकीकत बताती है कि नियम सिर्फ कागजों में जिंदा हैं।

सबसे बड़ा सवाल — जिम्मेदार कौन?

अब सवाल यह नहीं कि
❓ गुटखा बिक रहा है या नहीं
बल्कि सवाल यह है कि
कब जागेगा संबंधित विभाग?
किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी?
या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा?

यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ कानून की हार नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और राजस्व दोनों के साथ खुला अपराध माना जाएगा।

संपादकीय |( शरद पंसारी )

व्यापार केवल आयात–निर्यात का खेल नहीं होता, वह राष्ट्रों की रणनीतिक स्वायत्तता, वैश्विक हैसियत और भविष्य की दिशा तय करता है।
3 फरवरी 2026 को अमेरिका और भारत के बीच हुआ नया व्यापार समझौता इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब 2025 में लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यात की रीढ़ तोड़ दी थी। उस पृष्ठभूमि में 18 प्रतिशत पर पहुँचना निश्चित रूप से राहत है—लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भारत की जीत है, या हालात के आगे झुककर निकाला गया रास्ता?


राहत को जीत कह देना जल्दबाज़ी होगी

इस समझौते के बाद अमेरिकी बाज़ार में भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क पूरी तरह हट गया है और पारस्परिक टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया है।
कपड़ा, रत्न-आभूषण, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए यह जीवनदान से कम नहीं।

लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि
2024 तक यही टैरिफ मात्र 3 प्रतिशत के आसपास था।
इस दृष्टि से देखा जाए तो भारत आज भी उस स्थिति से नीचे खड़ा है, जहाँ वह दो साल पहले था।


व्यापार युद्ध से बाहर निकलना—यही असली उपलब्धि

संपादकीय दृष्टि से इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि टैरिफ 18 प्रतिशत हुआ,
बल्कि यह है कि भारत 50 प्रतिशत के दंडात्मक व्यापार युद्ध से बाहर निकल पाया

2025 में अमेरिकी प्रतिबंधों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अब व्यापार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार बन चुका है।
ऐसे माहौल में भारत का समझौते की मेज़ पर लौटना एक व्यावहारिक निर्णय था।


जहाँ भारत मजबूत हुआ

यह समझौता भारत को एक ऐसे लाभकारी मोड़ पर ले आया है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती—

  • चीन पर आज भी 30–35% या उससे अधिक अमेरिकी टैरिफ लागू है

  • वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर लगभग 20% शुल्क है

  • जबकि भारत अब 18% पर है

यह स्थिति भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाज़ार में स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती है।
यह बढ़त 2024 में भारत के पास नहीं थी।


लेकिन कीमत भी चुकानी पड़ी है

हर समझौते की एक कीमत होती है—और यह डील भी अपवाद नहीं।

भारत ने:

  • रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे बंद करने

  • अमेरिकी LNG और तकनीक के आयात बढ़ाने

  • तथा लगभग 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता ली है

यह सब भारत की ऊर्जा लागत और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है।
सस्ती ऊर्जा छोड़कर महँगे विकल्प अपनाना, अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है।


रणनीतिक प्रश्न यहीं से शुरू होता है

यह समझौता भारत की उस रणनीतिक स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े करता है,
जिस पर वह लंबे समय से गर्व करता आया है।

क्या वैश्विक दबावों के सामने भारत को बार-बार आर्थिक रियायतें देनी पड़ेंगी?
और क्या भविष्य में व्यापारिक फैसले विदेश नीति के दबाव में लिए जाते रहेंगे?

इन सवालों के उत्तर आसान नहीं हैं।


निष्कर्ष: न पराजय, न पूर्ण विजय—एक परिपक्व समझौता

यह कहना गलत होगा कि भारत इस समझौते में हार गया।
यह कहना भी सच नहीं होगा कि भारत ने सब कुछ जीत लिया।

सच्चाई यह है कि—

भारत ने टकराव के दौर से निकलकर समझौते का रास्ता चुना है।

यह रास्ता महँगा है, समझौतों से भरा है,
लेकिन वैश्विक व्यापार की वर्तमान वास्तविकताओं में
शायद यही सबसे व्यावहारिक विकल्प भी था।

अब चुनौती यह है कि भारत इस मिली हुई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को
निर्यात विस्तार, घरेलू उद्योग संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा में बदल पाए—
वरना यह समझौता केवल राहत बनकर रह जाएगा, उपलब्धि नहीं।

भिलाई। शौर्यपथ /

इस्पात नगरी भिलाई के लिए यह गर्व का क्षण है। भिलाई निवासी एवं अमेरिका में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर मयंक जैन के नेतृत्व में हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। उनकी संस्था हिंदी-यूएसए को अमेरिका की प्रतिष्ठित वैधानिक संस्था एक्रीडिटिंग कमीशन फॉर स्कूल्स – वेस्टर्न एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स एंड कॉलेजेस (्रष्टस्-ङ्ख्रस्ष्ट) से प्रारंभिक मान्यता प्राप्त हुई है।
अमेरिका के सेंट लुइस, मिसूरी में रह रहे मयंक जैन ने बताया कि यह मान्यता विस्तृत आत्म-मूल्यांकन और ङ्ख्रस्ष्ट की आधिकारिक निरीक्षण टीम द्वारा शैक्षणिक संरचना, शिक्षण पद्धतियों और नेतृत्व क्षमता के गहन परीक्षण के बाद दी गई। उन्होंने कहा कि यह लगभग दो वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जो अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार को नई मजबूती देगा।
ङ्ख्रस्ष्ट निरीक्षण समिति की सदस्य एलिज़ाबेथ ओबरराइटर ने हिंदी-यूएसए के पाठ्यक्रम और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ के पूर्व छात्र आज स्वयं शिक्षक बनकर समाज को योगदान दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हिंदी-यूएसए अमेरिका के 29 स्कूलों में संचालित एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था है, जो 4,000 से अधिक छात्रों को हिंदी शिक्षा प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि भिलाई, छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।

डबल इंजन सरकार का ऐतिहासिक तोहफा, प्रधानमंत्री मोदी व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जताया आभार

रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को ?7,470 करोड़ का ऐतिहासिक बजट प्रावधान दिया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेश की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे डबल इंजन सरकार की दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2009-14 के दौरान जहां छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए वार्षिक औसतन मात्र ?311 करोड़ प्राप्त होते थे, वहीं वर्ष 2026-27 में यह राशि बढ़कर ?7,470 करोड़ हो गई है, जो लगभग 24 गुना वृद्धि को दर्शाती है। वर्तमान में राज्य में ?51,080 करोड़ की लागत से रेलवे से जुड़े विभिन्न कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए रेल ट्रैक का निर्माण, रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और सुरक्षा व्यवस्था का उन्नयन प्रमुख रूप से शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर अंचल के विकास के लिए रावघाट–जगदलपुर रेल परियोजना का प्रारंभ होना जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार का अमूल्य उपहार है। यह परियोजना न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।

उन्होंने बताया कि परमलकसा–खरसिया रेल कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य में यात्री रेल सेवाओं की संख्या आने वाले समय में लगभग दोगुनी हो जाएगी और माल परिवहन को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इनमें डोंगरगढ़ (फेज-ढ्ढ), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण होकर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की दो जोडिय़ां तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी सेवाएं प्रारंभ होने से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और विश्वस्तरीय रेल सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक छत्तीसगढ़ में लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 से अधिक फ्लाईओवर एवं अंडरपास तथा 'कवचÓ जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना की गई है। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज रेलवे विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होता जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आम नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और अवसरों का सृजन हो रहा है। उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।

नई दिल्ली।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा उस समय तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन और 2017 के डोकलाम विवाद को लेकर गंभीर दावे कर दिए। राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण (ठ्ठश्चह्वड्ढद्यद्बह्यद्धद्गस्र रूद्गद्वशद्बह्म्) का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब आ गए थे। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही भारी हंगामे में तब्दील हो गई।
राहुल गांधी ने अपने तर्क के समर्थन में पत्रिका 'द कारवांÓ (ञ्जद्धद्ग ष्टड्डह्म्ड्ड1ड्डठ्ठ) में प्रकाशित एक लेख का उल्लेख किया, जिसमें जनरल नरवणे की प्रस्तावित पुस्तक के अंश होने का दावा किया गया था। हालांकि सरकार ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित दस्तावेज का हवाला संसद के नियमों के खिलाफ है।

सरकार का कड़ा विरोध, स्पीकर का हस्तक्षेप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का कहना था कि बिना आधिकारिक प्रकाशन और प्रमाणिकता के किसी पुस्तक या उसके कथित अंशों को सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा के नियम 352 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में असत्यापित या आपत्तिजनक दस्तावेज पेश करना नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि बिना प्रमाणिकता वाली सामग्री को सदन के रिकॉर्ड में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को कथित संस्मरण के अंश पढऩे की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

सदन के बाहर भी जारी रही जंग
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई से डर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण निर्णय लेने के बजाय जिम्मेदारी दूसरों पर डालते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पूर्व थल सेना प्रमुख की बात सामने आ रही है, तो सरकार उससे घबराकर उसे दबाने की कोशिश क्यों कर रही है।
इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सेना को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि "भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं खोई है।"

अप्रकाशित पुस्तक और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति
जिस पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनीÓ (स्नशह्वह्म् स्ह्लड्डह्म्ह्य शद्घ ष्ठद्गह्यह्लद्बठ्ठ4) का उल्लेख राहुल गांधी ने किया, उसके प्रकाशन पर रक्षा मंत्रालय पहले ही कुछ आपत्तिजनक अंशों को लेकर आपत्ति जता चुका है। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी का दावा है कि पुस्तक में डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के दौरान सरकार की कथित अनिर्णय की स्थिति का उल्लेख है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में उजागर किया गया है।

विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
राहुल गांधी ने बहस को केवल सैन्य स्तर तक सीमित न रखते हुए भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीब आ गए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए "सबसे बड़ा खतरा" है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में दोहराया कि भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी क्षेत्र में संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया है।

हंगामे में बाधित हुई कार्यवाही
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। अंतत: भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
यह विवाद एक बार फिर यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना और विदेश नीति जैसे मुद्दे संसद में सबसे संवेदनशील और टकरावपूर्ण बहसों का केंद्र बने हुए हैं, जहां नियम, राजनीति और राष्ट्रहित आमने-सामने आ खड़े होते हैं।

  रायपुर / शौर्यपथ / जब इरादे मजबूत हों, तो विपरीत परिस्थितियाँ भी रास्ता रोक नहीं पातीं। बिलासपुर के राज्य प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे पैरा तीरंदाज श्री तोमन कुमार ने इसे साकार कर दिखाया है। उन्होंने 7वीं एनटीपीसी पैरा राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
पंजाब के एनएसआईएस पटियाला में 30 जनवरी से 2 फरवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में श्री तोमन कुमार ने व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक तथा टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को दोहरी सफलता दिलाई। टीम स्पर्धा में उन्होंने श्री अमित कीर्तनिया के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की। श्री तोमन कुमार पिछले दो वर्षों से बिलासपुर आर्चरी एकेडमी में तीरंदाजी का नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ पैरा तीरंदाजी टीम के मुख्य प्रशिक्षक श्री मनमोहन पटेल के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियों में प्रशिक्षक श्री पंकज सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
बालोद जिले के श्री तोमन कुमार सीआरपीएफ के जवान रह चुके हैं। नक्सल ऑपरेशन के दौरान आईईडी ब्लास्ट में उन्होंने अपना बायाँ पैर खो दिया, लेकिन इस कठिन हादसे ने उनके हौसले को कमजोर करने के बजाय और अधिक सशक्त बना दिया। जीवन की इस बड़ी चुनौती के बाद उन्होंने खेल को अपना संबल बनाया और पैरा तीरंदाजी में नया मुकाम हासिल किया। पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीतना उनका सपना है।
श्री तोमन कुमार वर्ष 2017 तक सक्रिय रूप से देश सेवा में कार्यरत रहे और आज भी उसी राष्ट्रभक्ति और जज़्बे के साथ खेल के मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खेल प्रेमियों में उत्साह और गर्व का माहौल है। उनकी संघर्ष गाथा न केवल पैरा खिलाडिय़ों, बल्कि सामान्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
श्री तोमन कुमार अपनी उपलब्धियों और जज्बे से केवल एक सफल पैरा तीरंदाज ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पैरा खेल जगत के लिए यूथ-आइकॉन के रूप में उभरकर सामने आए हैं। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश में पैरा खेलों को नई पहचान, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनकी उपलब्धि पर खेल अधिकारी श्री ए. एक्का सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े अधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं।

दुर्ग / शौर्यपथ विशेष
31 जनवरी को महापौर श्रीमती अलका बाघमार का जन्मदिन शहर में बड़े पैमाने पर पोस्टर-बैनरों के साथ मनाया गया। इन पोस्टरों में दुर्ग को "बुलडोजर की सरकार" वाला शहर बताया गया, अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के दावे किए गए और महापौर को "विकास की वीरांगना" के रूप में प्रस्तुत किया गया। बधाइयों और प्रशंसा के इस शोर-शराबे के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गई कि शहर की बड़ी समस्याओं का समाधान हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश करती है।

पोस्टर बनाम जमीनी सच्चाई
शहर की आम जनता, जो रोज़ जाम, अव्यवस्था और असमान कार्रवाई का सामना करती है, उसके लिए पोस्टरों में दिखाई जा रही कहानी वास्तविकता से मेल नहीं खाती। सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई वास्तव में निष्पक्ष और समान है, या फिर यह सिर्फ चुनिंदा इलाकों और वर्गों तक सीमित होकर लोकप्रियता का माध्यम बन गई है।

कपड़ा लाइन और कुआं चौक: 10 मीटर की दूरी, नीति में भारी अंतर
कपड़ा लाइन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को महापौर के सशक्त नेतृत्व का उदाहरण बताया जा रहा है। यह भी तथ्य है कि लगभग आठ महीने की लगातार कोशिशों के बाद वहाँ कार्रवाई सफल हो पाई। लेकिन इस कार्रवाई को जिस तरह एक विशेष समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए।
वहीं, कपड़ा लाइन से मात्र 10 मीटर दूर स्थित कुआं चौक पर स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आती है। वहाँ ठेले, गुमठियाँ, चाट-फल की दुकानें और खुलेआम चौक के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा दिखाई देता है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित रहता है, फिर भी वहाँ कार्रवाई नाममात्र की क्यों रह जाती है, यह सवाल जनता के मन में लगातार बना हुआ है।

शुल्क लेकर लौट आना: कार्रवाई या समझौता?
सूत्रों और प्रत्यक्ष स्थिति के अनुसार, कुआं चौक क्षेत्र में निगम का अतिक्रमण अमला कुछ रस्मी शुल्क वसूलकर औपचारिकता निभाता है और फिर लौट आता है। यदि यही सच्चाई है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है कि क्या कानून सबके लिए समान है, या फिर कार्रवाई का पैमाना नाम, पहचान और नज़दीकी के आधार पर तय हो रहा है।

संवादहीनता पर उठते सवाल
महापौर स्वयं को संवेदनशील नेतृत्व और परिवार की मुखिया के रूप में प्रस्तुत करती हैं, लेकिन कपड़ा लाइन में आठ महीनों तक चली कार्रवाई के दौरान व्यापारियों, सड़क पर व्यवसाय कर रहे परिवारों और यातायात व रोज़ी-रोटी के संतुलन को लेकर कोई प्रत्यक्ष संवाद या समझाइश सामने नहीं आई। यह संवादहीनता प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।

भेदभाव से उपजता अविश्वास
जब एक ही सड़क और एक ही समस्या पर कहीं कठोरता और कहीं संरक्षण दिखाई देता है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, बल्कि समाज में अविश्वास और नफरत का संदेश देती है। ऐसी स्थिति शहर की सामाजिक एकता और प्रशासन पर भरोसे को कमजोर करती है।

लोकप्रियता पोस्टरों से नहीं, न्याय से बनती है
आज जिन लोगों को संरक्षण या मंच मिल रहा है, उन्हें यह नीति भले ही अच्छी लगे, लेकिन आम जनता सब कुछ देख और समझ रही है। शायद यही वह समय है जब महापौर को अपने शपथ ग्रहण के शब्द—"बिना भेदभाव के कार्यवाही"—को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।

अगला जन्मदिन: पोस्टरों से नहीं, विश्वास से
शहर की जनता यह नहीं चाहती कि हर जन्मदिन पोस्टरों और अतिशयोक्ति से भरा हो। जनता की अपेक्षा है कि कार्रवाई निष्पक्ष हो, नियम सबके लिए एक हों और नेतृत्व स्वयं उदाहरण बने। ताकि अगले जन्मदिन पर महापौर को पोस्टरों की नहीं, बल्कि जनता की सच्ची शुभकामनाएँ मिलें—एक ऐसी विकास की वीरांगना के रूप में, जो सच में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बिना भेदभाव खड़ी हो।
अब फैसला महापौर की सोच और कार्यप्रणाली पर है, और पूरा शहर इस फैसले का इंतज़ार कर रहा है।

अभियान चलाकर 15 दिन और धान खरीदी की जाये -कांग्रेस

   रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी प्रदेश के लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाये है। इस साल सरकार ने मात्र 53 दिन ही धान खरीदा। अंतिम तिथि भी 31 जनवरी थी, लेकिन अंतिम 2 दिन शनिवार और रविवार होने के कारण खरीदी नहीं हुई। पूर्व में घोषित 75 दिन भी पूरी खरीदी नहीं किया गया। इस वर्ष सरकार के द्वारा घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था, लेकिन सरकार ने मात्र 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही धान खरीदी किया गया। लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी किया गया। पिछले साल सरकार ने 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था, इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम की खरीदी की गयी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कुल 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, जिसमें से 2.5 लाख किसान अपना धान नहीं बेच पाये। लगभग 5 लाख किसानो का एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानी के कारण पंजीयन नहीं हुआ। किसानों को धान बेचने से रोकने बिना सहमति जबरिया रकबा सरेंडर करवा दिया गया। पूर्व से जारी टोकन को निरस्त करवाया गया। हजारो किसान सरकार के इस षडयंत्र का शिकार हुये। धान का टोकन नहीं मिलने, धान की खरीदी नहीं होने के कारण प्रदेश के महासमुंद, कवर्धा, कोरबा, जैसे स्थानों पर अनेको किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया। एक ने आत्महत्या भी किया। यह बताता है कि प्रदेश में धान खरीदी के कारण किसान परेशान हुये। सिर्फ नारायणपुर, बलरामपुर, बस्तर में पिछले साल के लगभग बराबर धान की खरीदी हुई, शेष सभी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक कम खरीदी सरकार ने किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तरफ से कम खरीदी के लिये जश्न मनाया गया। अपने कर्मचारियो को जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से जिलेवार हुई धान खरीदी के आंकड़े जारी किये गये, जिसमें किस जिले में कितनी खरीदी हुई। पिछले साल से कितने प्रतिशत कमी हुई इसका ब्योरा है। सरकार ने अपने आंकड़े में माना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलो में पिछले साल के मुकाबले कम खरीदी हुई इसके लिये खाद विभाग, राजस्व विभाग, सहकारिता विभाग नान एवं जिला तथा ब्लाक के अधिकारियो को एसएमएस के जरिये बधाई दिया गया है। यदि लक्ष्य से कम खरीदी हुई है तो किस बात की बधाई। बधाई दे रहे मतलब साफ है आपका ईरादा कम खरीदी का था, आप उसमें कामयाब हुये। लक्ष्य से कम के लिये फटकार लगानी थी, नहीं लगाये क्यो? मतलब कम खरीदी ही आपका लक्ष्य था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार अभियान चलाकर धान खरीदी 15 दिनों के लिये फिर शुरू करें ताकि बचे सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदा जा सके।

गरियाबंद की घटना बिगड़ती कानून व्यवस्था का परिणाम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि गरियाबंद से बेहद ही दुर्भाग्यजनक खबर आ रही है, वहां के दुतकैया गांव में एक समुदाय के घरों को जला दिया गया। वहां पर एक अपराधी के द्वारा फैलाए जा रहे आतंक के कारण यह घटना घटी। यह घटना पुलिस और सरकार की लापरवाही का परिणाम है। पुलिस सचेत होती अराजक तत्व पर कार्यवाही करती तो शायद यह घटना नहीं होती। मै दोनों पक्षों से शांति की अपील करता हूं तथा घटना की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। इसके पहले बलौदाबाजार, कवर्धा, बलरामपुर के बाद गरियाबंद में जनता ने कानून हाथ में लिया है। इससे साफ है लोगों का सरकार और उसके कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।

बजट से छत्तीसगढ़ ठगा गया

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कल मोदी सरकार का जो बजट प्रस्तुत हुआ। उसमें एक बार फिर छत्तीसगढ़ का उल्लेख सिर्फ एक जगह है। विशेष कारीडोर में वह भी छत्तीसगढ़ की जनता के लिये नहीं छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का दोहन उद्योगपति मित्र आसानी से कर सके। इसलिये राज्य के विकास के लिये बस्तर, सरगुजा क विकास के लिये बजट में कुछ नहीं है।

एपस्टीन फाईल को लेकर भाजपा चुप क्यों है

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एपस्टीन फाइल के बारे में मोदी और भाजपा चुप क्यों है इस मामले में प्रधानमंत्री और भाजपा को स्पष्टीकरण देना चाहिये की एपस्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम से देश की छवि धूमिल हो रही है।

पत्रकार वार्ता में प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, महामंत्री दीपक मिश्रा, सकलेन कामदार, वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, अशोक राज आहूजा, अमरजीत चावला, प्रवक्ता सत्य प्रकाश सिंह, अजय गंगवानी उपस्थित थे।

   रायपुर/ शौर्यपथ / आम बजट में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि इस बजट से महिलाएं काफी हताश एवं निराश है। आम बजट में महिलाओं को हर बार की तरह इस बार भी निराशा ही मिला। 2014 में 100 दिन में महंगाई कम करने की बात नरेन्द्र मोदी जी ने कहे थे महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि नरेन्द्र मोदी के गिनती में 100 दिन आएंगे या नहीं। आम बजट पर महंगाई से निजात मिलेगा आश लगाये महिलाएं बैठी थी लेकिन बेलगाम महंगाई पर वित्त मंत्री भी चुप्पी साध ली है। जब सीतारमण जी वित्त मंत्री बनी तब महिलाओं में खुशी की लहर थी कि महिला वित्त मंत्री है तो हमारा किचन हरा भरा रहेगा, महिला होने के नाते महिलाओं की परेशानी अच्छा से समझेगी लेकिन सब विपरीत हो गया, किचन में संकट छा गया। किचन में लगने वाले चिमनी के दाम बढ़ाये गये है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बेलगाम महंगाई को कम करने के लिये केंद्र सरकार का कोई प्रयास नही है। आम बजट सिर्फ नाम का रह गया है। 9.6 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की इस बजट में बात कही जा रही है लेकिन इस बात का जिक्र नही किया गया कि मोदी सरकार के गलत नीति के कारण गैस सिलेंडर के दाम 1200 रुपये हो गये है। दैनिक जीवन के आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ती जा रही है। उस पर इस बजट में कुछ भी नही। सोना, चांदी आम व्यक्ति के पहुँच से पहले ही बाहर थी अब इस बजट के बाद से सोना, चांदी को लोग सिर्फ सपने में देखेंगे हकीकत में खरीदने के बारे में सोचेगे भी नहीं। मोदी ने कहा था कि सबके खाते में 15-15 लाख आयेंगे महिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि इस बजट से 15 लाख मिल जायेंगे लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगा।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सीता रमन जी का नवां बजट था इस बजट ने भी पिछले बजट के समान आधी आबादी महिलाओं का बजट में अनदेखी किया गया है। महिला सुरक्षा के नाम पर बजट में कुछ नही। इस बजट से हर वर्ग निराश है। बजट के नाम से जनता के साथ धोखा है।

 

पाटन।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का नववर्ष मिलन एवं सम्मान समारोह शुक्रवार 31 जनवरी 2026 को पाटन में गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में कर्मचारियों के आपसी समन्वय, एकता और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट संदेश देखने को मिला।

समारोह के मुख्य अतिथि फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक एवं छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष कमल वर्मा रहे, जबकि अध्यक्षता संभाग प्रभारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ राजेश चटर्जी ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांतीय उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ शिक्षक फेडरेशन चंद्रशेखर चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जागेन्द्र साहू एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्वेता यादव की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
स्वागत भाषण कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पाटन के संयोजक एवं पंचायत सचिव संघ, जिला दुर्ग के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार साहू ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय सह-प्रवक्ता छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ललित बिजौरा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन फेडरेशन पाटन के संरक्षक टिकेन्द्र नाथ वर्मा द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि कमल वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कर्मचारी हितों की रक्षा, पारदर्शी प्रशासन और कर्तव्यनिष्ठ कार्य संस्कृति ही फेडरेशन का मूल संकल्प है। उन्होंने नए वर्ष में संगठित होकर अधिकारों एवं दायित्वों के संतुलन के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर फेडरेशन द्वारा उन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने विगत वर्ष अपने-अपने दायित्वों का उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय निर्वहन किया।

समारोह में प्रमुख रूप से हेमंत कुमार वर्मा (मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत पाटन), छाया वर्मा (महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी), भानु प्रताप यादव (जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एवं जिला मीडिया प्रभारी), रोशनी धुरंधर, चंचल द्विवेदी, गिरधर वर्मा, वरुण साहू, पूर्णनेंद्र बंछोर, कन्हैया लाल मन्नाड़े, प्रमेश साहू, प्रदीप चंद्राकर, हीरा सिंह वर्मा, देवेन्द्र कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पाटन के सदस्य उपस्थित रहे।

उक्त जानकारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला मीडिया प्रभारी भानु प्रताप यादव द्वारा दी गई।

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