August 05, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि पर आप माता रानी को बहुत सरल और सस्ते उपायों से खुश कर सकते हैं। जानिए वे सस्ते उपाय क्या हैं? पढ़ें सरल उपाय...
    पान :- ताजे नए पान लाकर उस पर एक रुपए का सिक्का रखकर मां भवानी के सामने रखें।
    सुपारी :- 5 रुपए की पूजा सुपारी लाकर देवी मां को समर्पित करें तो भी वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगी।
    रुई :- 5 रुपए की रुई खरीद कर उसे माता रानी को अर्पित करें तो वह उतनी ही प्रसन्न होंगी जितनी मंहगे पौराणिक उपायों से होती है।
    गुड़ :- अगर आप महंगे प्रसाद / भोग माताजी को नहीं चढ़ा सकते तो 5 रुपए का गुड़ लाकर पूरे भक्ति भाव से देवी के समक्ष रखें। आपको शुभ आशीर्वाद अवश्य मिलेंगे।
    काले उबले चने :- देवी मां को प्रसन्न करने का यह भी बहुत सरल और सस्ता उपाय है। 5 रुपए के काले उबले चने भी अंबे मां को प्रसन्न करेंगे।
    मिश्री : यह मीठा भोग मां प्रेम से ग्रहण करती हैं।
    ध्वजा : नवरात्रि में लाल वस्त्र की छोटी सी ध्वजा चढ़ाकर मां को प्रसन्न किया जा सकता है।
    मेहंदी-कुमकुम : मेहंदी के छोटे पैकेट थोड़े से कुमकुम के साथ रखने से भी मां का आशीष मिलता है।
    लौंग-इलायची : 5 रुपए की लौंग और इलायची अर्पित करने से भी माता रानी खुश हो जाती हैं।
    दूध और शहद : छोटी सी कटोरी में जरा सा दूध और बूंद भर शहद भी मां को प्रसन्न करता है।
    नवरात्रि में अखंड दीप क्यों जलाते हैं, जानिए महत्व, लाभ, नियम, मंत्र और शुभ मुहूर्त
    दीप प्रकाश का द्योतक है और प्रकाश ज्ञान का। परमात्मा से हमें संपूर्ण ज्ञान मिले इसीलिए दीप प्रज्वलन करने की परंपरा है। कोई भी पूजा हो या किसी समारोह का शुभारंभ। समस्त शुभ कार्यों का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन से होता है।
    जिस प्रकार दीप की ज्योति हमेशा ऊपर की ओर उठी रहती है, उसी प्रकार मानव की वृत्ति भी सदा ऊपर ही उठे, यही दीप प्रज्वलन का अर्थ है। अत: समस्त कल्याण की चाह रखने वाले मनुष्य को दीप जलाते समय दीप मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए।
    हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाए जाते हैं। सुबह-शाम होने वाली पूजा में भी दीपक जलाने की परंपरा है। वास्तुशास्त्र में दीपक जलाने व उसे रखने के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। दीपक की लौ की दिशा किस ओर होनी चाहिए, इस संबंध में वास्तुशास्त्र में पर्याप्त जानकारी मिलती है। वास्तुशास्त्र में यह भी बताया गया है कि दीपक की लौ किस दिशा में होने पर उसका क्या फल मिलता है।
    नवरात्रि में अखंड दीपक क्यों जलाते हैं
    नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। साल में हम 2 बार देवी की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दौरान माता रानी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु कलश स्थापना, अंखड ज्योति, माता की चौकी आदि तरह के पूजन-अर्चन करते हैं। नवरात्रि के 9 दिन हम घर पर कलश स्थापना और अखंड ज्योत जलाते हैं। अखंड ज्योति पूरे 9 दिन तक बिना बुझे जलाने का प्रावधान है। अखंड ज्योति जलाने के बाद आप उसे अकेला नहीं छोड़ सकते हैं और अगर ये ज्योति बुझ जाए तो अपशगुन होता है।
    नवरात्रि में अखंड ज्योति
    नवरात्रि में 9 दिनों तक देवी मां को प्रसन्न करने और मनवांछित फल पाने के लिए गाय के देशी घी से अखंड ज्योति प्रज्जवलित की जाती है। लेकिन अगर गाय का घी नहीं है तो अन्य घी से भी आप माता के सामने अखंड ज्योति जला सकते हैं।
    नवरात्रि के दौरान 9 दिन तक दीपक को जलाए रखना अखंड ज्योति कहलाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में दीपक जलाए रखने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन संकल्प करते हुए अखंड दीपक को जलाना चाहिए और नियमानुसार उसका सरंक्षण करना चाहिए।
    अखंड ज्योति जलाने की विधि
    नवरात्रि के दौरान जलाए जाने वाले दीपक यानि अखंड ज्योति को जलाने के भी कुछ नियम हैं, जिनका पालन हमें करना चाहिए ताकि हमें मनवांछित फल की प्राप्ति हो सके।
    आमतौर पर लोग पीतल के दीपपात्र में अखंड ज्योति प्रज्वल्लित करते हैं। यदि आपके पास पीतल का पात्र न हो तो आप मिट्टी का दीपपात्र भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर मिट्टी के दीपपात्र में अखंड ज्योति जलाने से पहले दीपपात्र को 1 दिन पहले पानी में भिगो दें और उसे पानी से निकालकर साफ कपड़े से पोछकर सुखा लें।
    शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से पहले हम मन में संकल्प लेते हैं और मां देवी से प्रार्थना करते हैं कि हमारी मनोकामना जल्द पूर्ण हो जाएं। अखंड दीपक को कभी भी जमीन पर न रखें।
    दीपक को चौकी या पटरे में रखकर ही जलाएं। दुर्गा मां के सामने यदि आप जमीन पर दीपक रख रहे हैं तो अष्टदल बनाकर रखें।
    यह अष्टदल आप गुलाल या रंगे हुए चावलों का बना सकते हैं।
    अखंड ज्योति की बाती का विशेष महत्व है। यह बाती रक्षासूत्र यानि कलावा से बनाई जाती है। सवा हाथ का रक्षासूत्र(पूजा में प्रयोग किया जाने वाला कच्चा सूत) लेकर उसे बाती की तरह दीपक के बीचोंबीच रखें।
    अखंड ज्योति जलाने के लिए शुद्ध घी का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आपके पास दीपक जलाने के लिए घी न हो तो आप तिल का तेल या सरसों के तेल का भी दीपक जला सकते हैं। मगर ध्यान ऱखें कि इनमें सरसों का तेल शुद्ध हो और उसमें कोई मिलावट न हो।
    अखंड ज्योति को देवी मां के दाईं ओर रखा जाना चाहिए लेकिन यदि दीपक तेल का है तो उसे बाईं ओर रखना चाहिए। अखंड दीपक की लौ को हवा से बचाने के लिए कांच की चिमनी से ढक कर रखना चाहिए। संकल्प समय खत्म होने बाद दीपक को फूंक मारकर या गलत तरीके से बुझाना सही नहीं है, बल्कि दीपक को स्वयं बुझने देना चाहिए।
    ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व दिशा को देवी-देवताओं का स्थान माना गया है। इसलिए अखंड ज्योति पूर्व- दक्षिण कोण यानि आग्नेय कोण में रखना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि पूजा के समय ज्योति का मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा में होना चाहिए।
    अखंड ज्योत जलाने से पहले हाथ जोड़कर श्रीगणेश, देवी दुर्गा और शिवजी की आराधना करें। दीपक प्रज्जवलित करते वक्त मन में मनोकामना सोच लें और मां से प्रार्थना करें कि पूजा की समाप्ति के साथ आपकी मनोकामना भी पूर्ण हो जाए।
    अखंड ज्योत जलाते वक्त यह मंत्र पढ़ें
    ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।
    दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन:
    दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते।
    दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:।
    दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।।
    शुभ करोतु कल्याणामारोग्यं सुख संपदा
    दुष्ट बुद्धि विनाशाय च दीपज्योति: नमोस्तुते।।
    शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
    शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।
    अखंड ज्योति जलाने के शुभ नियम
    नवरात्रि में अखंड ज्योति की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है। दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दु:ख बढ़ता है। दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलाभ होता है। दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखने से हानि होती है। यह हानि किसी व्यक्ति या धन के रूप में भी हो सकती है। किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सपलता मिलती है।
    अखंड ज्योति की गर्मी दीपक से 4 अंगुल चारों ओर अनुभव होनी चाहिए। ऐसा दीपक भाग्योदय का सूचक होता है।
    दीपक की लौ सुनहरी जलनी चाहिए, जिससे आपके जीवन में धन-धान्य की वर्षा होती है और व्यापार में प्रगति होती है।
    अगर अखंड ज्योति बिना किसी कारण के स्वयं बुझ जाए तो घर में आर्थिक तंगी आने की संभावना रहती है।
    दीपक में बार-बार बाती नहीं बदलनी चाहिए। दीपक से दीपक जलाना भी अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से रोग में वृद्धि होती है और मागंलिक कार्यों में बाधाएं आती है।
    मिट्टी के दीपक में अखंड ज्योति जलाने से आर्थिक समृद्धि आती है और चारों दिशाओं में आपकी कीर्ति का बखान होता है।
    नवरात्रि में दीपक जलाए रखने से घर-परिवार में सुख-शांति एवं पितृ शांति रहती है।
    नवरात्रि में घी एवं सरसों के तेल का अखंड दीपक जलाने से त्वरित शुभ कार्य सिद्ध होते हैं।
    नवरात्रि में विद्यार्थियों को सफलता के लिए घी का दीपक जलाना चाहिए।
    अगर आप वास्तु दोष से परेशान है तो उसे दूर करने के लिए वास्तु दोष वाली जगह पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाकर रखना चाहिए।
    शनि के कुप्रभाव से मुक्ति के लिए नवरात्रि में तिल्ली के तेल की अखंड जोत शुभ मानी जाती है।
    अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन का शुभ मुहूर्त
    आइए जानते हैं कि नवरात्रि 2020 में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन का शुभ मुहूर्त कब-कब है-
    1. अभिजित मुहूर्त
    - अपराह्न 11:41 मिनट से 12:27 मिनट तक।
    2. दिवस मुहूर्त-
    - प्रात: 7:45 मिनट से 9:11 मिनट तक
    - प्रात: 12:00 बजे से 4:30 मिनट तक।
    3. सायंकालीन मुहूर्त-
    - सायं 6:00 बजे से 7:30 मिनट तक।
    4. रात्रिकालीन मुहूर्त-
    - रात्रि 9:00 बजे से 12:04 मिनट तक।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद कृतवर्मा, कृपाचार्य, युयुत्सु, अश्वत्थामा, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव, श्रीकृष्ण, सात्यकि आदि जीवित बचे थे। इसके अलावा धृतराष्ट्र, द्रौपदी, गांधारी, विदुर, संजय, बलराम, श्रीकृष्ण की पत्नियां आदि भी जीवित थे। अब सवाल यह है कि धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती की मृत्यु कैसे हुई थी?
    धृतराष्ट्र और गांधारी के दुर्योधन सहित 100 पुत्र और एक पुत्री थी। युयुत्सु भी उनका ही पुत्र था, जो एक दासी से जन्मा था। संजय और विदुर धृतराष्ट्र के मंत्री थे। दोनों ने धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ उन्होंने भी संन्यास ले लिया था। बाद में धृतराष्ट्र की मृत्यु के बाद वे हिमालय चले गए, जहां से वे फिर कभी नहीं लौटे। धृतराष्ट्र का दामाद जयद्रथ था जिसका वध अर्जुन करते हैं।
    मृत्यु : महाभारत युद्ध के 15 वर्ष बाद धृतराष्ट्र, गांधारी, संजय और कुंती वन में चले जाते हैं। तीन साल बाद एक दिन धृतराष्ट्र गंगा में स्नान करने के लिए जाते हैं और उनके जाते ही जंगल में आग लग जाती है। वे सभी धृतराष्ट्र के पास आते हैं। संजय उन सभी को जंगल से चलने के लिए कहते हैं, लेकिन दुर्बलता के कारण धृतराष्ट्र वहां से नहीं जाते हैं, गांधारी और कुंती भी नहीं जाती है। जब संजय अकेले ही उन्हें जंगल में छोड़ चले जाते हैं, तब तीनों लोग आग में झुलसकर मर जाते हैं।
    संजय उन्हें छोड़कर हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां वे एक संन्यासी की तरह रहते हैं। बाद में नारद मुनि युधिष्ठिर को यह दुखद समाचार देते हैं। युधिष्ठिर वहां जाकर उनकी आत्मशांति के लिए धार्मिक कार्य करते हैं।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो देखकर आप भी कहेंगे कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती. लद्दाख के चुशूल गांव का एक वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में एक छोटा बच्चा आईटीबीपी के जवानों को बहुत जोश के साथ सैल्यूट करता नजर आ रहा है. बच्चे को सैल्यूट करता देख वहां मौजूद जवानों ने बच्चे को सही से सैल्यूट करना सिखाया. सिखाए जाने के बाद बच्चे ने फिर से जवानों को सही से सैल्यूट किया. ये वीडियो 8 अक्टूबर की सुबह का है. जब आईटीबीपी के जवान सामने से गुजर रहे थे और पास ही खड़े नामग्याल नाम के इस बच्चे ने जवानों को सैल्यूट किया.
    वीडियो में जवान बच्चे को बता रहे हैं कि पैर खोल कर नहीं, पैर मिलाकर सैल्यूट करो. जवानों के कहने पर बच्चा फिर से विश्राम , सावधान करता नजर आ रहा है. जब से वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है तब से ही जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को 24 घंटों से भी कम समय में ट्विटर पर डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है.
    वीडियो पर रिएक्ट करते हुए लोगों ने लिखा, ''ये वीडियो देखकर मेरा दिन बन गया.'' एक यूजर ने लिखा कि ये बच्चा भविष्य का सिपाही है. कई लोगों ने बच्चे को भविष्य का सेना प्रमुख तक बता दिया.
    एक यूजर ने लिखा लद्दाख जैसी जगह में रहकर भी बच्चे में देशभक्ति का जज्बा कूट कूटकर भरा है. लोगों ने कहा कि देश को सैनिकों का सम्मान करने वाले नागरिकों की भी जरूरत है.
    गौरतलब है कि लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर वार्ता के कई दौर के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है. कुछ महीनों में भारतीय और चीन के सैनिकों का कई मौकों पर आमना-सामना हुआ है. दोनों ओर से सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए गए हैं.

    धर्म संसार / शौर्यपथ / पुरुषोत्तम मास की यह एकादशी बहुत खास है। यह एकादशी तीन साल बाद पड़ी है और अब 2023 में आएगी। अधिकमास की एकादशी के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।इस एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी या फिर परम एकादशी भी कहते हैं। इस दिन श्री भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस एकादशी में स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से कई यज्ञों के फल का पुण्य प्राप्त होता है। इस व्रत का पारण अगले दिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक किया जा सकता है।
    इस प्रकार करें व्रत
    एकादशी का व्रत करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी बहुत अच्छा माना जाता है। भगवान श्री हरि को पीले पुष्प अर्पित करें। उनका स्मरण करें। व्रत में धूप, दीप, नेवैद्य और पुष्प आदि से पूजा करने का विधान है। एकादशी के दिन विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी का पूजन भी किया जाता है। इस व्रत में नैवेद्य भी अर्पित किए जाते हैं।
    पूजा करते समय आपको व्रत का संकल्प लेना है। इस दिन पूरे दिन फलाहार किया जाता है। चावल इस व्रत में न ही घर में बनाए जाते हैं और न ही कोई खा सकता है। पूजा के बाद यथाशक्ति दान करना चाहिए, किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि ग्रहण न करें। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन किया गया दान बहुत ही लाभकारी होता है।

    सेहत / शौर्यपथ /क्या आपने सभी संभव उपाय इस्तेमाल कर लिए हैं, परंतु फिर भी आप नाखून चबाने की आदत को छोड़ने में सफलता नहीं प्राप्त कर पाई हैं। तो चिंता न करें क्योंकि आप अकेली नहीं है। चाहे आप माने या ना माने इस पृथ्वी पर हर तीसरा आदमी अपने नाखूनों को चबाता है। हालांकि यह एक अजीब आदत है, परंतु इससे निजात पाना बहुत कठिन है।क्या आपने कभी सोचा है कि नाखून चबाना एक आदत से बढ़कर बहुत कुछ है! यदि नहीं, तो हम हैं यहां आपकी नेल बाइटिंग के बारे में अब तक की सारी उलझन सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं –
    1 हो सकता है कि आप परफेक्‍शनिस्‍ट हों
    साइंटिफिक अमेरिकन माइंड पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि, जब अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों ने तनाव के दौरान नेल बाइटिंग शुरू की, तो उनका व्यवहार मापा गया। अध्ययन जब पूर्ण हुआ तब यह पाया गया कि जो लोग परफेक्‍शनिस्‍ट थे वे औरों की तुलना में ज्‍यादा नाखून चबाते थे।जो हर काम को परफेक्‍ट तरीके से करना चाहते हैं, वे अपना बेस्‍ट देना चाहते हैं। यही चीज तनाव और चिंता में बदल सकती हैं। तो अगर आप नाखून चबाते हैं, तो इसके लिए ज्यादा सोचना नहीं चाहिए।
    2 आप ओसीडी से ग्रसित हो सकती हैं
    अमेरिकन साइकाइट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक अगर आप नाखून चबाती हैं, तो आप ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिजीज से ग्रसित हो सकते हैं जिसे ओसीडी (OCD) भी कहा जाता है। यह एक विवादास्पद या कंट्रोवर्शियल बयान हो सकता है। हालांकि कई वैज्ञानिक नाखून चबाने के ओसीडी के संबंध को सिरे से नकारते हैं। ओसीडी आवेग नियंत्रण में असफल होने के वजह से होती हैं और नाखून चबाने में ऐसा कुछ नहीं होता।
    3 आप किसी मनोवैज्ञानिक विकार से ग्रस्‍त हो सकती हैं
    अगर आप हर समय अपने नाखून चबाती हैं तो इसकी बहुत संभावना है कि आप किसी मनोवैज्ञानिक समस्‍या से गुजर रहीं हों। ईरान की मेडिकल साइंसेस की पत्रिका में प्रकाशित कि गए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि दुनिया के 80% बच्चे जिनमें मनोवैज्ञानिक विकार है, वह नाखून चबाते हैं।
    4 आप में किसी किस्‍म की कुंठा हो सकती है
    बिहेवियर थेरेपी एंड एक्सपेरिमेंटल साइकाइट्री की एक पत्रिका में प्रकाशित किए गए अध्ययन में प्रतिभागियों की 4 प्रकार की भावनाओं को परखा गया। इनमें से कुंठा भी एक थी। आप सोच सकती हैं कि जो लोग ज्‍यादा फ्रस्‍ट्रेटिड थे, वे ज्‍यादा नाखून चबाते थे।क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप फ्रस्‍ट्रेटिड होते हैं, तो आप अपने नाखून चबाते हैं। यह इसलिए कि जब आप कुंठित होती हैं तो कुछ न कुछ करना चाहती हैं और जब कुछ नहीं मिलता, तो आप नाखून चबाने लगती हैं।
    5 आपके साइकोसेक्सुअल विकास मे कुछ खराबी हो सकती है
    सिगमंड फ्रूड जो कि एक ऑस्ट्रेलियाई न्यूरोलॉजिस्ट है मानते हैं कि नाखून चबाना साइकोसेक्सुअल विकास की खराबी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी सोचा कि जो व्यक्ति नाखून चबाते हैं वे ओरल फि‍क्‍सेशन से ग्रसित हो सकते हैं। यह एक तरह की कंडीशन है जिसमें व्‍यक्ति तनाव से छुटकारा पाने के लिए स्‍मोकिंग, शराब जैसी ओरल एक्टिविटी का सहारा लेते हैं। अब आप जान गईं हैं कि नाखून चबाना सिर्फ एक आदत ही नहीं, इससे कुछ ज्‍यादा है। तो इनमें से जो भी कारण आपको नेल बाइटिंग के लिए ट्रिगर करता है, उस पर काम करें और जल्‍द से जल्‍द इस आदत को छोड़ दें।

     

    टिप्स / शौर्यपथ / क्या आप नाश्ते में अंडे खाते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो अंडे खाने से भी बहुत-सी सावधानियां जुड़ी हुई हैं, जिनका ख्याल रखना बेहद जरूरी है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार अगर अंडे का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए, तो अंडे फायदे की जगह नुकसान करने लगते हैं।
    अंडे में होती है सबसे ज्यादा प्रोटीन की मात्रा
    अंडा आपके लिए एक पूर्ण आहार है। दूध तथा मांस की भांति इससे प्रोटीन बहुत बड़ी मात्रा में प्राप्त होती है, इससे चर्बी तथा खनिज भी काफी मात्रा में प्राप्त होते हैं। इनके अतिरिक्त अंडे से शरीर को वह सभी पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं, जिनसे शारीरिक वृद्धि होती है। इसमें 2 भाग खोल 58 भाग सफेदी और शेष जर्दी (योक) होती है। खोल में अधिकतर कैल्शियम कार्बोनेट होता है, सफेदी में पानी और प्रोटीन होते हैं, इसके साथ-साथ इसमें चर्बी भी होती है।
    अंडे खाने से जुड़ी सावधानियां
    अंडे को पूरी तरह पकाकर खाएं
    अंडे को अच्छे से पकाकर खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। इस तरह से पकाया गया अंडा आसानी से पच जाता है। स्टडी के मुताबिक कच्चे अंडे में 51 फीसदी प्रोटीन पाया जाता है जबकि पकाए हुए अंडे में 91 फीसदी प्रोटीन पाया जाता है। तापमान की वजह से प्रोटीन में कई तरह के संरचनात्मक बदलाव आ जाते हैं।
    कच्चे अंडे को नहीं पिएं
    कच्चे अंडे में प्रोटीन अलग-अलग हिस्सों में होता है और इनकी बनावट ऐसी होती है कि ये आपस में मिल नहीं पाते हैं। वहीं जब अंडे को तापमान पर पकाया जाता है तो प्रोटीन की ये अलग-थलग बनावट टूट जाती है और ये सारे प्रोटीन एक साथ मिल जाते हैं। अंडे के इस प्रोटीन को शरीर के लिए पचाना आसान होता है।
    ज्यादा देर तक न उबालें अंडा
    ज्यादा तापमान से नुकसान- वैसे तो अंडे को पकाकर ही खाना सबसे सही है लेकिन तेज तापमान पर पकाने से इसके कई पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। एक स्टडी के मुताबिक, अंडे को देर तक पकाने से उसका विटामिन ए लगभग 17-20 फीसदी तक कम हो जाता है। अंडे के माइक्रोवेव करने, उबालने और फ्राई करने से इसके एंटीऑक्सीडेंट में 6 से 18 फीसदी तक की कमी आ जाती है।
    इस तरह खाएंगे, तो बढ़ जाएगा दिल की बीमारी का खतरा
    अंडे की जर्दी में बहुत सारा कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। एक बड़े अंडे में लगभग 212 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। जब अंडे को ज्यादा तापमान पर पकाया जाता है तो ये कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीकृत होकर ऑक्सीस्टेरोल में बदल जाता है। कई लोगों के लिए ये चिंता की बात है क्योंकि ऑक्सीस्टेरोल से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    सेहत / शौर्यपथ / बढ़ते तनाव और खराब लाइफस्टाइल की वजह से आज लोग सेहत से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। ओवरइटिंग, ज्यादा मसालेदार भोजन, समय पर खाना न खाने या फिर टेंशन ज्यादा लेने से अकसर लोगों को बदहजमी की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा भोजन अच्छे से नहीं पचने की वजह से भी लोगों को बदहजमी होती हैं। इसकी वजह से व्यक्ति को खट्टी डकार आने लगती हैं जिसकी वजह पूरा दिन खराब हो जाता है। अगर आपको भी अकसर बदहजमी की शिकायत रहती है तो जल्द राहत दिलाएंगे ये देसी घरेलू नुस्खे।
    बदहजमी से राहत दिलाएंगे ये 5 घरेलू उपाय-
    हींग-
    बदहजमी से राहत दिलाने में हींग बेहद कारगर उपाय है। यह गैस हो या खट्टी डकार की समस्या, इसका सेवन करने से जल्द फायदा मिलता है। इसके लिए हींग को पानी में घोलकर पीने से पेट का भारीपन और खट्टी डकार की समस्या दूर होती है।
    मेथी-
    अगर आपको खट्टी डकारों की समस्या है तो आप मेथी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए मेथी को रात भर पानी में भिगोकर सुबह इसका पानी खाली पेट पीने से खट्टी डकार की समस्या से छुटकारा मिलता है।

    जीरा-
    जीरा पेट की समस्यायों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। खट्टी डकार, गैस या बदहजमी होने पर जीरे को भूनकर खाने से आराम मिलता है।
    इलायची-
    खट्टी डकार की समस्या में इलायची का सेवन करने से गैस और खट्टी डकार जैसी दिक्कतों से छुटकारा मिलता है।
    लौंग-
    लौंग का इस्तेमाल करने से पाचन तंत्र अच्छा बना रहता है। खट्टी डकार की समस्या होने पर लौंग का पानी या लौंग का सेवन करने से फायदा मिलता है।

    शौर्यपथ / बंद जगहों पर संक्रमण फैलने के बढ़े मामलों के कारण कोरोना वायरस ताकतवर होता जा रहा है। हॉर्वर्ड मेडिसन स्कूल की वैज्ञानिक नैंसी एनोरिया ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि दुनियाभर की सरकारों को एरोसोल और एयरबोर्न संक्रमण के बारे में आम लोगों तक स्पष्ट तरीके से जरूरी जानकारी पहुंचानी चाहिए। अगर समय रहते लोगों को इनडोर संक्रमण के बारे में नहीं बताया गया तो यह वायरस और विकराल रूप ग्रहण कर लेगा।
    एरोसोल : धुएं की तरह लंबे वक्त तक मौजूद रहता है वायरस
    जिस तरह धूल और धुआं लंबे समय तक वातावरण में मौजूद रहते हैं, ठीक वैसे ही एरोसोल के गुण वाले वायरस लंबे वक्त तक हवा के साथ उड़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना है कि विशेष परिस्थितियों में कोविड-19 का वायरस एरोसोल संक्रमण फैला सकता है।
    एयरबोर्न : इनडोर संक्रमण का मुख्य कारण
    वायरस से संक्रमित नम बूंदें जब अपने छोटे आकार व हल्के वजन के कारण हवा में उड़ने लग जाती हैं तो इसे एयरबोर्न संक्रमण कहते हैं। ऐसा संक्रमण उन बंद जगहों पर ज्यादा फैलता है, जहां भीड़ मौजूद हो। रेस्टोरेंट, नाइट क्लब, सिनेमाहॉल और दफ्तरों में फैलने वाला संक्रमण इसका उदाहरण है।
    ड्रॉपलेट : संक्रमण फैलने का मुख्य माध्यम
    कोरोना वायरस फैलाने का यह सबसे मुख्य माध्यम माना जाता है, जिसमें किसी संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकली बूंदों या ड्रॉपलेट किसी दूसरे व्यक्ति की आंख, नाक या मुंह के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर जाती हैं। ड्रॉपलेट वजन में भारी होती हैं इसलिए वे ज्यादा देर तक हवा में मौजूद नहीं रह पातीं पर दो मीटर से कम दूरी पर खड़े व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।
    सर्दी में इनडोर संक्रमण का खतरा ज्यादा
    शोधकर्ता नैंसी कहती हैं कि अगर सरकारें एरोसोल और एयरबोर्न संक्रमण से बचाव के लिए जनता को जागरूक करने में कामयाब नहीं हुईं तो सर्दियों में बंद जगहों पर कोरोना संक्रमण बहुत ज्यादा फैलेगा क्योंकि लोग ज्यादातर समय अपने घरों में बंद होंगे।
    बेहतर वेंटिलेशन से बचाव
    शोधकर्ता नैंसी का सुझाव है कि कार्यक्षेत्र, रेस्टोरेंट, पब व अन्य बंद स्थानों पर अगर सही वेंटिलेशन हो तो इनडोर संक्रमण से बचा जा सकता है। सरकारों को बंद जगहों की हवा को स्वच्छ करने के लिए वेंटिलेशन की बेहतर तकनीक अपनानी होंगी। साथ ही इनडोर स्थानों पर मौजूद लोगों को शारीरिक दूरी बनाकर और मास्क पहनकर रहने के लिए प्रेरित करना होगा।

    सेहत / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण ने रातों की नींद उड़ा दी है? कभी नौकरी जाने तो कभी वायरस की जद में आने के डर से पूरी रात करवटें बदलते गुजर जाती है? अगर हां तो सोने से 20 मिनट पहले पसंदीदा लेखक की किताब पढ़ें। आपकी आंखों में आधे घंटे के भीतर मीठी नींद भर जाएगी। ब्रिटेन स्थित ससेक्स यूनिवर्सिटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
    शोधकर्ताओं के मुताबिक किताबें पढ़ना रोजमर्रा की चिंताओं से ध्यान भटकाने का बेहतरीन जरिया है। इससे स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के स्त्राव में 68 फीसदी तक की गिरावट आती है। बिस्तर पर जाने से पहले पसंदीदा गाना सुनने, गुनगुना दूध पीने या फिर पार्क में चहलकदमी करने पर भी तनाव का स्तर इस कदर नहीं घटता है। इन तीनों ही गतिविधियों से ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में क्रमशः 61 फीसदी, 54 फीसदी और 42 फीसदी कमी दर्ज की गई है।
    मुख्य शोधकर्ता डॉ. डेविड लुइस की मानें तो किताब के पन्ने पलटने से महज छह मिनट में तन और मन आराम की मुद्रा में आ जाते हैं। इससे मस्तिष्क को संकेत मिलता है कि अब सोने का समय आ गया है और वह स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन करने लगता है। लुइस ने सिर्फ उन्हीं विषयों से जुड़ी किताबें पढ़ने की नसीहत दी, जो दिल को भाते हैं। ऐसा न करने पर मन फिर रोजमर्रा के तनाव में उलझ जाएगा और व्यक्ति सोने के लिए संघर्ष करेगा।
    ई-बुक से परहेज करें-
    -अध्ययन में किताबें पढ़ने के लिए स्मार्टफोन, टैबलेट या ई-बुक रीडर के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है। इससे दिमाग आराम की मुद्रा में नहीं जा पाता और व्यक्ति को सोने में दिक्कत पेश आती है।
    गुनगुने पानी से नहाएं-
    -एक अन्य अध्ययन में सोने से पहले गुनगुने पानी में बाइकार्बोनेट सोडा मिलाकर नहाने की सलाह दी गई है। इससे त्वचा को डिटॉक्स करने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही तन-मन पर थकान हावी होने से ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन तेज हो जाता है और व्यक्ति आसानी से नींद के आगोश में समा पाता है।
    रूम फ्रेशनर भी कारगर-
    -साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के शोध में लैवेंडर, चंदन, पीपरमिंट, मरुआ और बबूने के फूल की खुशबू को मांसपेशियों को सुकून पहुंचाने व हृदयगति को धीमा करने में कारगर पाया गया था। कमरे में ऐसे गंध वाले रूम फ्रेशनर का छिड़काव करने से व्यक्ति न सिर्फ गहरी नींद सोता है, बल्कि सुबह उठकर तरोताजा भी महसूस करता है।
    शवासन आजमाएं-
    -वहीं, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक शोध में शवासन और शशांकासन जैसे योग आसन को अनिद्रा की शिकायत से निजात दिलाने में असरदार पाया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक इन आसनों के अभ्यास से तंत्रिका तंत्र तो शांत होता ही है, साथ में रीढ़ की हड्डी भी शिथिल पड़ती है, जिससे व्यक्ति को अच्छी नींद आती है।

    खाना खजाना / शौर्यपथ / रात की रोटियां अगले दिन खाने में स्वादिष्ट नहीं लगती लेकिन रोटियों को फेंकना भी समझदारी नहीं है। ऐसे में आप रात की रोटियों से टेस्टी नाश्ता बना सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं बासी रोटियों से उपमा बनाने की रेसिपी-
    सामग्री :
    4 रोटियां
    एक प्याज बारीक कटा हुआ
    एक टमाटर बारीक कटा हुआ
    2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
    आधी शिमला मिर्च बारीक कटी हुई
    आधी छोटी चम्मच राई
    आधा कप मटर के दाने
    एक बड़ी चम्मच मूंगफली दाने (भुने हुए)
    एक चम्मच धनिया पाउडर
    आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    एक छोटा चम्मच नींबू रस
    स्वादानुसार नमक
    तेल
    विधि :
    सबसे पहले को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें।
    अब गैस पर पैन में तेल गर्म करें. इसमें राई का तड़का लगाएं।
    जब राई चटकने लगे तो इसमें हरी मिर्च और प्याज डालकर मध्यम आंच पर पकाएं।
    प्याज को सुनहरा होने तक पकाएं, फिर इसमें टमाटर मिर्च और मटर डालकर 3 मिनट तक पकाएं।
    इसके बाद पैन में धनिया, लाल मिर्च पाउडर और मूंगफली दाने डालकर एक मिनट पकाएं।
    अब रोटियों के टुकड़े और नमक डालकर मिक्स करें. इसे 2 मिनट तक पकाएं और गैस बंद कर दें।
    लीजिए तैयार है बची हुई रोटी का इसे हरी धनिया पत्तियों से गार्निश करके गर्मागर्म सर्व करें।

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