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मनोरंजन / शौर्यपथ /कंगना रनौत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह हर मुद्दे पर अपनी बात रखती हैं। अब वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर कंगना ने फैन्स से अपनी फिल्म जजमेंटल है क्या को देखने की अपील की और साथ ही डिप्रेशन की दुकान चलाने वालों पर निशाना साधा।
कंगना ने ट्वीट किया, 'फिल्म जो हमने मेंटल हेल्थ अवेयरनेस के लिए बनाई थी जिसे उन लोगों ने कोर्ट में घसीट लिया था जो डिप्रेशन की दुकान चलाते हैं। मीडिया बैन के बाद फिल्म का नाम बदला गया जिससे इसकी मार्केटिंग पर बहुत असर पड़ा लेकिन यह एक अच्छी फिल्म है और इसे आज ही देखें।'
कंगना के इस ट्वीट के बाद कहा जा रहा है कि उन्होंने बिना नाम लिए दीपिका पादुकोण पर निशाना साधा है। इससे पहले कंगना, दीपिका के लिए डिप्रेशन की दुकान और डिप्रेशन का धंधा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुकी हैं।
कंगना की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो वह लास्ट फिल्म पंगा में नजर आई थीं। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। अब कंगना जल्द ही फिल्म थलाइवी में नजर आई थीं। कुछ दिनों पहले ही कंगना ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू की है।
बताते चलें कि फिल्म थलाइवी में कंगना रनौत पॉलिटिकल लीडर जयललिता के किरदार में नजर आएंगी। इस फिल्म का निर्देशन एएल विजय कर रहे हैं। फिल्म को 'मणिकर्णिका', 'बाहुबली' के राइटर केव्ही विजयेंद्र प्रसाद और 'द डर्टी पिक्चर', 'वन्स अपॉन टाइम इन मुंबई' के राइटर रजत अरोड़ा ने मिलकर लिखा है। यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी लेकिन कोरोना के चलते इसकी शूटिंग पूरी नहीं हो पाई।
मुंंबई / शौर्यपथ / मुंबई में कोरोना वायरस से हुई कुल मौतों में 85% मौतें 50 से ऊपर की उम्र के लोगों और बुजुर्गों की हुई है. इस कठिन घड़ी में अच्छी ख़बर ग्लोबल अस्पताल से आई जहां हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके, 56 साल के एक कोविड पॉज़िटिव मरीज़ जो, मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया, हार्टस्ट्रोक जैसी कई गंभीर तकलीफ़ों में थे, फिर भी एक हफ़्ते में कोविड को मात दे दी. डॉक्टर इसे चमत्कार मान रहे हैं. मुंबई में अब तक कोविड से 9,199 मौतें हुईं हैं जिनमें 7,793 मौतें 50 साल से ऊपर के मरीज़ों की हुईं हैं, यानी क़रीब 85 फीसदी. वैसे कोविड के कुल मामलों में 50 से ऊपर के संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब 42% है. बीएमसी, 50 से ऊपर के हर कोविड मरीज़ को अस्पताल भेजने की कोशिश में है. लक्षण-तकलीफ़ें हों या नहीं.
बीएमसी के एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर सुरेश ककानी कहते हैं, 'हमने ऐसा प्रयास किया है कि 50 के ऊपर के मरीज़ को भले ही होम आइसोलेशन की सुविधा प्राप्त हो, लेकिन इन्हें निजी या सरकारी या महानगर पालिका के अस्पताल में दाखिल कराना ही सही रहेगा. इसको लेकर एक सर्कुलर जारी किया है.'मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में 56 साल के महादेव हरी पटेल भर्ती हुए जिनका कोविड के कारण मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया से सामना हुआ. दो साल पहले ही वो हार्ट ट्रान्स्प्लैंट भी करवा चुके हैं. हालत गम्भीर थी लेकिन एक हफ़्ते में ही इन्होंने कोरोना को हरा दिया. कोविड नेगेटिव होने के साथ ही इनके रिकवर होने को डॉक्टर चमत्कार मानते हैं और खुद महादेव कहते हैं कि उन्हें नई ज़िंदगी मिली है.
मरीज महादेव हरी पटेल ने कहा, ''मुझे घर जाने की अब ख़ुशी है, ऐसा लग रहा है मुझे तीसरी ज़िंदगी मिली है.'' वहीं उनके बेटे दिनेश पटेल ने कहा, ''डैडी की हालत 2018 में भी ख़राब थी, उनका तब हार्ट ट्रांसप्लांट करवाया था, ठीक थे तब से. लेकिन कोविड के कारण हालत काफ़ी सीरियस हो गयी. ग्लोबल में वेंटिलेटर पर रखा, डॉक्टरों की टीम ने अब इनको अच्छा ट्रीटमेंट देकर एकदम ठीक कर दिया है.'' ग्लोबल हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉक्टर प्रशांत बोराडे ने कहा, 'जब ये ग्लोबल हॉस्पिटल आए, हमने काफ़ी टेस्ट किए, तो हमें पता चला कि इनको स्ट्रोक हो चुका था, किडनी फेल हुआ था, हार्ट कमजोर था, फेफड़े में पानी जम गया था, फेफड़े में कोविड निमोनिया की मात्रा काफ़ी थी. बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन भी था. तो चुनौती ये थी कि मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर के साथ हार्ट ट्रांसप्लांट भी हुआ था इनका. कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी टीम, किडनी की टीम और इंटेन्सिव केयर जैसी सारी टीमों ने मिलकर ट्रीटमेंट दी. पांच दिन के बाद वेंटिलेटर से बाहर आये और इनका सक्सेसफ़ुली ट्रीटमेंट हो गया.'
कोविड के इलाज के लिए मरीज़ों की इम्यूनिटी बढ़ाई जाती है लेकिन ऑर्गन ट्रांसप्लानट वाले मरीज़ों के इलाज के लिए इम्यूनिटी घटानी पड़ती है. 17 सितम्बर को भर्ती हुए महादेव पटेल हफ़्ते भर बाद डिस्चार्ज तो हुए लेकिन सांस की दिक़्क़त के बाद फ़िलहाल स्थिर हालत में ऑक्सिजन बेड पर रिकवर कर रहे हैं. इनकी केस स्टडी डॉक्टर, मेडिकल जर्नल में छापने वाले हैं. ऐसे मरीज़ों की स्टडी में डॉक्टर मानते हैं कि कोविड के प्रकोप में भी वक्त पर इलाज कमजोर से कमजोर मरीज़ की ज़िंदगी बचा सकता है.
पटना / एजेंसी / राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव को चारा घोटाले के एक और मामले में ज़मानत मिल गई है लेकिन दुमका कोषागार के एक मामले में फ़िलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली हैं इसलिए उन्हें रिहा होने के लिए अभी इंतज़ार करना होगा. इस मामले में सजा का पचास प्रतिशत अगले महीने यानी 9 नवम्बर को पूरा होगा. इसलिए, तब तक लालू यादव को जेल में ही रहना होगा. राष्ट्रीय जनता दल के नेता और कार्यकर्ता अब यह मानकर चल रहे हैं कि पहली बार बिहार विधान सभा चुनाव में लालू यादव प्रचार अभियान के लिए उपलब्ध नहीं होंगे.
हालाँकि, इससे पहले पिछले साल हुए लोक सभा चुनाव में भी लालू यादव ने चुनाव प्रचार में भाग नहीं लिया था.उस समय भी लालू जेल में बंद थे. ऐसे में सारा ज़िम्मा उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के कंधों पर था. शुक्रवार (9 अक्टूबर) के कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब साफ़ हो गया कि इस बार के विधान सभा चुनाव में भी तेजस्वी यादव के ऊपर ही सभी प्रत्याशियों के प्रचार की ज़िम्मेवारी होगी.
लालू यादव ने पहली बार लोक सभा चुनाव 1977 में लड़ा था. उसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी. 1990 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बने. 1990 के बिहार विधान सभा चुनाव से पहले लालू यादव जनता दल और बाद में राष्ट्रीय जनता दल के ना सिर्फ स्टार प्रचारक रहे बल्कि चुनाव प्रबंधन का पूरा ज़िम्मा उन्हीं पर होता था. इस बार ये सारी जिम्मेदारी तेजस्वी यादव के कंधों पर आ गई है. हालाँकि इसका वोटर पर कोई असर नहीं होता लेकिन महागठबंधन के प्रत्याशियों का कहना है कि लालू यादव की अनुपस्थिति सबको खलती है. लोगों से संवाद का उनका तरीका अलग होता था. 1980 में पहली बार लालू यादव बिहार विधान सभा के लिए चुने गए थे.
भुवनेश्वर / शौर्यपथ / ओडिशा के भुवनेश्वर में एक स्थानीय कोर्ट के जज ने दहेज प्रताड़ना के एक केस में आधी रात को सुनवाई की. इस केस में सेना के एक मेजर पर अपनी पत्नी पर दहेज के लिए प्रताड़ना देने का आरोप लगा था. जज ने आधी रात में इसके लिए सुनवाई करते हुए आर्मी मेजर को जेल भेजने के बजाय आर्मी की कस्टडी में भेज दिया.
सब-डिवीजनल न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज एसके मिश्रा इस केस के लिए सुनवाई करने रात के 10 बजे कोर्ट पहुंचे थे. दरअसल, इसके पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केस की सुनवाई करने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन कामयाबाी नहीं मिली थी, जिसके बाद जज ने कोर्ट जाकर सुनवाई करने का फैसला किया. सुनवाई रात के डेढ़ बजे के बाद तक चलती रही. सुनवाई खत्म होने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि गिरफ्तार मेजर को जेल की बजाय आर्मी कस्टडी में भेजा जाए.
इसके पहले महिला पुलिस स्टेशन ने मेजर को गिरफ्तार किया था. मेजर की पत्नी ने उसपर दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने और हत्या करने की कोशिश के आरोप लगाए थे. आर्मी ऑफिसर का घर भुवनेश्वर के नायापल्ली में है.
ऑफिसर के खिलाफ पुलिस में भारतीय दंड संहिता और दहेज (रोकथाम) अधिनियम की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं. आरोप हैं कि ऑफिसर ने अपनी पत्नी को अपने मायके से पैसे लाने को कहा था और पैसे न लाने की स्थिति में गोली मारने की धमकी दी थी.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जयपुर / राजस्थान के करौली जिले में भूमि विवाद में एक पुजारी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है. पेट्रोल डालकर कुछ लोगों ने पुजारी को जलाने की कोशिश की. बुरी तरह से झुलसे पुजारी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई है. पुजारी ने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने उस पर हमला किया था और पेट्रोल छिड़कर जिंदा जलाने की कोशिश की थी. यह विवाद मंदिर की जमीन का बताया जा रहा है. पुजारी को आय के स्त्रोत के रूप में मंदिर के ट्रस्ट की ओर से 13 बीघा जमीन दी गई थी.
गांव के पुजारी बाबू लाल वैष्णव अपनी जमीन के पास स्थित एक प्लॉट पर अपना घर बनाना चाहते थे. मीणा समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और जमीन को अपना बताया. विवाद होने पर यह मामला गांव के बुजुर्गों के पास पहुंचा, उन्होंने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया.
इसके बाद पुजारी ने जमीन पर बाजरा की गांठें लगा दी ताकि पjता चल सके कि जमीन पर उसका मालिकाना हक है. हालांकि, आरोपियों ने उस जगह पर अपनी झोपड़ी बनाना शुरू कर दी. जिसकी वजह से दोनों पक्षों में विवाद हो गया है.
पुलिस में दर्ज कराए बयान में पुजारी ने कहा कि छह लोगों ने बाजरे की गांठों पर पेट्रोल डालकर बुधवार को आग लगा दी. उन्होंने दावा किया उन लोगों ने उस पर भी पेट्रोल डाला और जलाने की कोशिश की. जलने की वजह से, पीड़ित पुजारी को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार शाम को उसने दम तोड़ दिया.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हरजी लाल यादव ने एनडीटीवी को बताया, "फिलहाल शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है. हमने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी कैलाश मीणा को हिरासत में ले लिया है." पुलिस को दिए बयान में पुजारी ने छह लोगों कैलाश, शंकर, नमो मीणा और तीन अन्य लोगों का नाम लिया है.
नई दिल्ली /शौर्यपथ / देश में आनुपातिक आधार पर सबसे बड़ी युवा आबादी वाले प्रांत बिहार के विधानसभा चुनाव में इस बार डिजिटल प्रचार निर्णायक साबित हो सकता है. राज्य में करीब एक चौथाई मतदाता 30 साल से कम उम्र के हैं. ऐसे में मनोरंजन से लेकर खबरों की थाह लेने के लिए छह से आठ घंटे स्मार्टफोन पर बिताने वाला युवा वोटर चुनावी पासे को किसी भी ओर पलट सकता है.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब 7.29 करोड़ मतदाता हैं. इसमें 24.5 फीसदी यानी करीब 1.77 करोड़ मतदाता 18 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के हैं. जबकि तीन करोड़ 66 लाख मतदाताओं की उम्र 18 से 39 साल के बीच है. ऐसे में सियासी दलों की डिजिटल प्रचार की रणनीति बेहद मायने रखेगी. लोकसभा चुनाव के बाद बढ़े मतदाताओं की बात करें तो करीब सात लाख वोटर लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार वोट डाल सकेंगे. राज्य के 7.29 करोड़ मतदाताओं में करीब 3.85 करोड़ पुरुष और 3.44 करोड़ महिलाएं हैं.
रैलियों और वाहनों के रेले पर रोक रहेगी
चुनाव प्रचार से जुड़े सोशल मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना काल में रैलियों और वाहनों के रेले पर रोक रहेगी. चुनाव आयोग के अंकुश के कारण रैलियों में इस बार जन सैलाब देखने को नहीं मिलेगा. सोशल डिस्टेंसिंग के कारण 5-10 कार्यकर्ताओं या वाहनों की टोली में ही प्रचार होगा, ऐसे में डिजिटल प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. खासकर युवा वोटरों पर इसका अहम प्रभाव देखने को मिलेगा. बिहार की 57 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की है.
गांवों में भी छाप छोड़ेगा ऑनलाइन कैंपेन
विश्लेषकों का कहना है कि राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब या लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग ऐप का रुख कर सकते हैं. चुनाव प्रबंधन कंपनी डिजाइनबॉक्स्ड के निदेशक और डिजिटल कंपेन एक्सपर्ट नरेश अरोड़ा कहना है कि भले ही बिहार के शहरी इलाकों में ही सिर्फ 11 फीसदी आबादी हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में भी चुनाव प्रचार में इसका चलन बढ़ेगा. क्योंकि गांवों में लोग सूचनाएं पाने के लिए टीवी की बजाय स्मार्टफोन पर ज्यादा निर्भर रहने लगे हैं. ऐसे में चुनाव आयोग को भी गलत तरीके से डिजिटल माध्यमों पर चुनाव खर्च करने वालों की निगरानी बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे.
दस गुना तक बढ़ेगा पिछले चुनाव के मुकाबले खर्च
अरोड़ा के मुताबिक, प्रत्याशियों और दलों का डिजिटल प्रचार का खर्च पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले दस गुना तक बढ़ेगा. बीजेपी के अलावा युवाओं को रिझाने के लिए राजद भी डिजिटल कैंपेन पर ज्यादा फोकस कर रही है. जदयू इस मामले में थोड़ा पीछे है. ऑनलाइन प्रचार तो पहले से है, लेकिन कोरोना काल के बाद यह हिन्दी बेल्ट में और देश के दूसरे सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य में डिजिटल कैंपेन नया ट्रेंड सेट करेगा.
सोशल मीडिया पर सक्रिय दो तिहाई युवा
स्टैस्टिटा की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब 29 करोड़ युवा फेसबुक और 20 करोड़ व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं. इसमें से 74 फीसदी 19 से 24 साल के युवा हैं, जो रोजाना करीब ढाई घंटे समाचार और सामाजिक गतिविधियों के लिए सोशल मीडिया पर बिताते हैं. अगर बिहार में भी कमोवेश यही ट्रेंड माना जाए तो कोई भी दल डिजिटल कंपेन की अनदेखी नहीं कर सकता.
भाजपा ने की थी डिजिटल रैली की पहल
वर्ष 2014 से ही धुआंधार डिजिटल प्रचार का लाभ उठा रही भाजपा ने कोरोना काल में भी देश भर में डिजिटल जनसंवाद रैलियां की थीं. गृह मंत्री अमित शाह ने सात जून को बिहार में ऐसी ही एक रैली को संबोधित किया था. पार्टी का दावा है कि रैली को डिजिटल मंचों से 14 लाख लोगों ने सुना और देखा. इसमें 1.5 लाख यूट्यूब और 64 हजार ट्विटर के जरिये लाइव रैली में शामिल हुए. चुनाव के दौरान पार्टी की ओर से ऐसी ही रैलियां देखने को मिल सकती हैं. स्टार प्रचारकों की इन रैलियों का खर्च भी प्रत्याशियों के खाते में नहीं जुड़ेगा.
बड़ा सवाल- मतदान प्रतिशत बढ़ेगा या नहीं
बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में 58 फीसदी वोट पड़े थे. कोरोना काल में चुनाव आयोग ने मतदान का वक्त एक घंटे बढ़ा दिया है. 80 साल से ज्यादा उम्र के वोटरों को पोस्टल बैलेट का विकल्प भी दिया है. साथ ही 1500 की जगह एक हजार वोटर पर एक बूथ बनाने का निर्णय किया है. ऐसे में देखना होगा कि डिजिटल प्रचार वोटरों को किस कदर बूथ तक खींच पाता है.
नई दिल्ली /शौर्यपथ /ओस्लो / नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2020 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. 'वर्ल्ड फूड प्रोग्राम' को शांति पुरस्कार दिया गया है. 'वर्ल्ड फूड प्रोग्राम' को प्रभावित क्षेत्रों में भुखमरी से लड़ने व शांति कायम करने से जुड़े सराहनीय कार्यों के चलते शांति पुरस्कार दिया गया है. ओस्लो में यह घोषणा की गई. नोबेल समिति अपने पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर पूरी गोपनीयता बरतती है. इसके बावजूद विजेता की घोषणा से पहले अटकलें लगती रहती हैं.
इस बार, अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस साल का शांति पुरस्कार जलवायु कार्यकर्ता एवं स्वीडन की नागरिक ग्रेटा थनबर्ग, नर्व एजेंट हमले से उबर रहे रूस के नेता अलेक्सेई नवलनी और कोरोना वायरस संकट से निपटने में भूमिका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन में से किसी को दिया जा सकता है. नवलनी ने अपने ऊपर हमले के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भी मानना था कि उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए. इस पुरस्कार के लिए 318 उम्मीदवार थे, जिनमें से 211 व्यक्ति और 107 संगठन शामिल थे. नामांकन के लिए अंतिम समय सीमा 1 फरवरी, 2020 थी. इसका मतलब यह है कि मार्च में वैश्विक महामारी घोषित किए गए कोविड -19 से लड़ रहे योद्धाओं में से किसी को पुरस्कार मिलने की संभावना नहीं थी.
मुंबई / शौर्यपथ / पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में एक शख्स की गिरफ्तारी की गई है. महाराष्ट्र ATS ने नासिक स्थित हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी के एक कर्मचारी को अरेस्ट किया है. कर्मचारी पर आरोप है कि वो भारतीय लड़ाकू विमानों और कंपनी की गुप्त जानकारी पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आई एस आई को देता था. आरोपी का नाम दीपक बताया जा रहा है. एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने बयान में यह जानकारी दी.
भाषा की खबर के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि व्यक्ति भारतीय लड़ाकू विमान और उसकी विनिर्माण इकाई संबंधी खुफिया जानकारी आईएसआई को दे रहा था. एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) की नासिक इकाई को व्यक्ति के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी. व्यक्ति आईएसआई के लगातार संपर्क में था.''
अधिकारी ने बताया कि व्यक्ति भारतीय लड़ाकू विमान और उसकी संवेदनशील विस्तृत जानकारी संबंधी खुफिया सूचना के अलावा नासिक स्थित ओझर में एचएएल विमान विनिर्माण इकाई, वायुसेना अड्डे और विनिर्माण इकाई में प्रतिबंधित क्षेत्र संबंधी जानकारी दे रहा था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / लोकजनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्र की नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उपभोक्ता मामलों के मंत्री का पद संभाल रहे राम विलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. उनकी जगह पर शुक्रवार को पीयूष गोयल को नया उपभोक्ता मामलों का मंत्री बनाया गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से पीयूष गोयल को दिए जा रहे अतिरिक्त प्रभार की घोषणा की गई. गोयल के पास पहले ही रेलवे और वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की प्रोफाइल है.
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई अन्य नेता दिल्ली में उनके घर उनके पार्थिव शरीर का दर्शन करने पहुंचे थे. पीएम के साथ बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता थे. पीएम ने गुरुवार को निधन की खबर आने के बाद एक ट्वीट कर कहा था कि 'मैंने एक दोस्त, एक बहुमूल्य सहयोगी को खो दिया है, जो हर गरीब को सम्मानजनक जीवन देने के प्रति अत्यधिक प्रतिबद्ध था.' पीयूष गोयल भी पूर्व केंद्रीय नेता के घर पर उनको अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे.
बिहार की राजनीति के बड़े चेहरों में से एक पासवान का अंतिम संस्कार शनिवार को पटना में किया जाना है. इस मौके पर कानून व आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद केंद्रीय सरकार और केंद्रीय कैबिनेट का प्रतिनिधित्व करेंगे.
रामविलास पासवान का निधन ऐसे वक्त में हुआ है, जब बिहार के विधानसभा चुनावों में महज कुछ दिन बचे हैं. ये चुनाव उनके बेटे चिराग पासवान के लिए बहुत अहम हैं क्योंकि उनकी पार्टी पहली बार उनकी अध्यक्षता में चुनाव लड़ रही है, वो भी अकेले. एलजेपी ने बिहार में इस बार एनडीए महागठबंधन से अलग हो गए हैं और उनका सीधा निशाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं.
धर्म संसार / शौर्यपथ / ज्योतिष में भगवान शिव की पूजा-अर्चना को चंद्रमा से जुड़े सभी दोषों या नकारात्मक योग से मुक्ति के लिए बहुत ही शुभ और रामबाण उपाय माना गया है। इसमें भी विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक करना श्रेष्ठ और शीघ्र परिणाम देने वाला होता है। ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा नीच राशि में हो, चंद्रमा-राहु की युति से चंद्रग्रहण योग बना हो, चंद्रमा-सूर्य की युति से अमावस्या योग बना हो, चंद्रमा-शनि की युति से विष योग बना हो, केमद्रुम योग बना हो या फिर कालसर्प यो, इन सभी दोषाों या नकारात्मक योग से व्यक्ति के जीवन में विशेष से मानसिक अशांति हमेशा बनी रहती है। मन कभी स्थिर नहीं हो पाता और व्यक्ति हमेशा नकारात्मक विचारों एवं अवसाद में डूबा रहता है। ऐसे लोगों के जीवन में संघर्ष एवं बाधाएं भी आती रहती हैं जिससे जीवन में उथल-पुथल बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान ही रहता है।
अगर कुंडली में ये छह योग बने हों तो प्रतिदिन शिवलिंग का अभिषेक करने से इनका दुष्परिणाम क्षीण हो जाता है। इससे व्यक्ति बुरे परिणामों से बच जाता है। उसके जीवन में स्थिरता और शांति आने लगती है। विभोर इंदुसुत के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में ये योग बन रहे हों तो उन्हें भगवान शिव का प्रतिदिन अभिषेक अवश्य करना चाहिए। ऐसे लोग अपने घर में भी एक छोटा शिवलिंग रखते हुए उसका रोज अभिषेक कर सकते हैं। भगवान शिव के अभिषेक से चंद्रमा मजबूत होता है। चंद्रमा जल एवं दूध दोनों का कारक है। इसलिए जल और धूल के मिश्रण से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। जिन लोगों को तनाव, मानसिक अशांति, घबराहट, एकाग्रता की कमी और नकारात्मक विचारों की समस्या हो उनके लिए यह उपाय रामाबाण सिद्ध होता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
