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धर्म संसार /शौर्यपथ /त्रेता युग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा महिष्मतिपुरी में राज्य करते थे। इनकी एक हजार पत्नियां थीं किन्तु सन्तान कोई नहीं थी, जो राज्य संभाल सके। देवताओं, पितरों व साधुओं के निर्देशानुसार विभिन्न व्रतों के अनुष्ठान करने से भी उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। वे अपने मंत्री को सम्पूर्ण राज्य-भार देकर, राजसी वेष त्याग कर तपस्या करने चले गए। महाराज के साथ उनकी बड़ी रानी, जो की इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न महाराज हरिश्चन्द्र की कन्या पद्मिनी थी ने भी उनका अनुसरण किया। उन दोनों ने मन्दराचल पर्वत पर जाकर दस हज़ार वर्ष तक घनघोर तपस्या की।
तपस्या करने से महाराज का शरीर एकदम कमज़ोर हो गया। इधर महारानी पद्मिनी ने महासाध्वी अनुसूयाजी से विनीत होकर पूछा कि हे साध्वी! मेरे पति ने दस हज़ार वर्ष तक तपस्या की परन्तु फिर भी सर्व-दु:ख विनाशकारी भगवान केशवदेव अब तक प्रसन्न नहीं हुए। आप कृपा करके मुझे किसी ऐसे व्रत का उपदेश दीजिए कि जिसके पालन करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हो जाएं एवं हमें राजचक्रवर्ती की तरह कीर्तिमान श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति हो सके। पतिपरायणा साध्वी अनुसूया, रानी पद्मिनी की प्रार्थना सुनकर बड़ी प्रसन्न हुईं एवं रानी से बोलीं – 32 महीने बाद एक बार अधिक मास आता है। इस महीने में पद्मिनी एवं परमा नाम की दो एकादशियां आती हैं, इन एकादशियों के व्रत का पालन करने पर पुत्रदाता भगवान बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अनुसूया देवी जी के कथनानुसार रानी पद्मिनी ने विधिपूर्वक एकादशी व्रत का पालन किया। तब भगवान केशवदेव गरुड़ पर स्वार होकर रानी के समीप आए और उन्होंने रानी से वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने बड़ी श्रद्धा से भगवान की स्तुति-वन्दना की तथा पतिदेव की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए निवेदन किया। भगवान ने कहा- हे भद्रे! मैं तुम पर अति प्रसन्न हूं।
अधिक मास को मेरे नाम पर ही पुरुषोत्त्म मास कहते हैं। इस पवित्र महीने के समान अन्य कोई महीना मेरा प्रिय नहीं है। इस महीने की एकादशी भी मुझे अत्यन्त प्रिय है। आप लोगों ने इस व्रत का सही विधि-विधान से पालन किया है। अत: आपके पतिदेव को उनका अभिलषित वरदान अवश्य दूंगा। राजा को इच्छानुसार वरदान देकर भगवान अन्तर्हित हो गए। कालान्तर में उसी रानी के गर्भ से महाराज कृतवीर्य का पुत्र कार्तवीर्यार्जुन का जन्म हुआ। तीनों लोकों में कार्तवीर्यार्जुन के समान कोई बलवान नहीं था। इसी कार्तवीर्यार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया था।
कमला एकादशी (पद्मिनी एकादशी) व्रत वाले दिन क्या करे
वरुण मंत्र को जपकर पवित्र तीर्थों के अभाव में उनका स्मरण करते हुए किसी तालाब में स्नान करना चाहिए ।
अधिक मास की शुक्लपक्ष की 'पद्मिनी एकादशीÓ का व्रत निर्जल करना चाहिए ।
यदि मनुष्य में निर्जल रहने की शक्ति न हो तो उसे जल पान या अल्पाहार से व्रत करना चाहिए ।
इस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए भूमि पर सोना चाहिए।
स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करके संध्या, तर्पण करके मंदिर में जाकर भगवान की धूप, दीप, नैवेघ, पुष्प, केसर आदि से पूजा करनी चाहिए ।
इस व्रत को करने के लिए दशमी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए।
प्रति पहर मनुष्य को भगवान या महादेवजी की पूजा करनी चाहिए ।
इसके पश्चात सफेद वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करें और कथा का पाठ करें।भक्तजनों के साथ भगवान के सामने पुराण की कथा सुने ।
रात्रि में जागरण करके नाच और गान करके भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए ।
पहले पहर में भगवान को नारियल, दूसरे में बिल्वफल, तीसरे में सीताफल और चौथे में सुपारी, नारंगी अर्पण करना चाहिए ।
इस तरह से सूर्योदय तक जागरण करना चाहिए और स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए ।
स्नान में तिल, मिट्टी, कुश व आंवले के चुर्ण भी शामिल करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / देश के अलग-अलग भागों में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से सबसे खास है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में क्षिप्रा नदी के निकट रुद्र सरोवर के तट पर स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में इनकी गणना तीसरे स्थान पर आती है, किंतु प्रभाव की दृष्टि से इसका प्रथम स्थान है, क्योंकि इनकी पूजा-आराधना, अभिषेक आदि का प्रभाव कुछ ही मिनटों में प्रत्यक्ष दिखाई देने लगता है।
सृष्टि में तीन महाकाल ज्योतिर्लिंग हैं-आकाशे तारकं लिंग पाताले हाटकेश्वरम्। मृत्युलोके महाकालं लिंगत्रय नमोस्तुते ।। अर्थात्- श्रीमहाकाल आकाश में स्वयं तारक ज्योतिर्लिंग के रूप में, पाताल लोक में हाटकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में तथा पृथ्वी पर श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं। पृथ्वी पर ये दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में विद्यमान हैं। इसीलिए तांत्रिक साधक भी इनकी पूजा-अर्चना करते रहते हैं। इन्हें अवंतिका (उज्जैयिनी) का महाराजा कहा जाता है, इसलिए रात्रि में कोई भी राज्य अध्यक्ष अथवा राष्ट्र अध्यक्ष यहां नहीं ठहरता।
यहीं पर इनका सम्पूर्ण परिवार तथा अनेकों शिवगण प्रत्यक्ष रूप में विराजमान रहकर महाकाल की सेवा में तत्पर रहते हैं। कहा जाता है कि यहां पर किए गए रुद्राभिषेक तथा पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नम: शिवाय’ का जप जीवात्माओं को सभी कष्टों से मुक्ति प्रदान करके मोक्ष प्राप्ति कराता है। महाकाल की प्रथम आरती चिताभस्म से होती है, जो भस्म आरती के नाम से प्रसिद्ध है। इस आरती का इतना महत्व है कि इसमें सम्मिलित होने के लिए शिवभक्त मध्यरात्रि से ही पंक्ति में लग जाते हैं। महाकाल ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ यहां अन्य और भी कई तीर्थस्थल हैं-
हरिसिद्धी शक्तिपीठ: यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी। यहां सम्राट विक्रमादित्य के समय से ही अखंड ज्योति जल रही है। रोजाना 1001 दीयों को प्रज्वलित करके मां की आरती होती है।
नागतीर्थ: महाकाल ज्योतिर्लिंग के ठीक ऊपर ही नागतीर्थ मंदिर है, जो सिर्फ नागपंचमी के दिन ही जनदर्शन के लिए खुलता है।
भैरव तीर्थ: यहां ‘काल-भैरव’ का सबसे चमत्कारी मंदिर भी है। चिंताहरण गणेश, भर्तृहरि गुफा, ऋण मुक्तेश्वर व गढ़कालिका आदि साधकों के तांत्रिक स्थान भी हैं।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। अब उन्होंने अपनी कुछ नई तस्वीरें शेयर की हैं, जिन्हें बहुत पसंद किया जा रहा है। फोटोज में काजोल ऑरेंज कलर की साड़ी में नजर आ रही हैं। इन फोटोज को कोई और नहीं बल्कि उनकी बेटी न्यासा ने क्लिक की है।
काजोल ने इन तस्वीरों को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की हैं जिसमें वह काफी खूबसूरज नजर आ रही हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'बस अपनी साड़ियों को पहनना बहुत मिस कर रही थी तो आज इस इच्छा को मैंने पूरा कर लिया। हर संभावनाओं में मुझे साड़ी बहुत पसंद है। एक और हाउस फोटोग्राफर, इस बार मेरी बेटी।'
काजोल की इन फोटोज पर उनके फैन्स खूब कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, 'इन खूबसूरत फोटोज के लिए न्यासा आपना धन्यवाद।' दूसरे यूजर ने लिखा, 'आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं।' वहीं, एक यूजर ने काजोल की तारीफ में लिखा, 'आप क्वीन की तरह दिख रही हैं।'
हाल ही काजोल और अजय देवगन ने बेटे युग का बर्थडे सेलिब्रेट किया। युग ने अपने बर्थडे के मौके पर पौधे लगाए थे। अजय ने युग की फोटो शेयर करते हुए अजय ने लिखा, 'एक हरे-भरे कल की ओर काम। इससे ज्यादा नहीं मांग सकते। हैप्पी बर्थडे युग। अभी बहुत कुछ है आने को।' वहीं, काजोल ने बेटे युग का एक वीडियो शेयर किया और लिखा, 'मुझे कुछ नहीं पता, मुझे सब पता है- युग देवगन। मेरे छोटे बुद्धा को 10वें जन्मदिन की शुभकामनाएं। मैं तुम्हें इतना मिस कर रही हूं कि बता भी नहीं सकती।'
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर निगम की सामान्य प्रशासन विभाग की प्रभारी जयश्री जोशी ने भाजपा पार्षदों के आरोपो का जवाब देते हुए दोहराया है कि शहर में बार-बार पानी सप्लाई बंद होने और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था ठप होने के लिए पिछले 20 साल में पूर्व महापौरों की कार्य प्रणाली जिम्मेदार है। जयश्री ने कहा कि शहरवासियों की फिक्र किए बगैर जिस तरह से 20 साल तक नगर निगम का पूरा सिस्टम चौपट रहा। सही मायनों में जनता की समस्याएं दूर न करने के कारण ही शहर का समग्र विकास नहीं हो पाया।
जयश्री ने कहा कि भाजपा पार्षदों को 20 साल के कार्यकाल का महिमा मंडन करने से पहले यह स्पष्ट कर दें कि अगर बहुत अच्छे काम किए गए हैं तो दुर्ग में भाजपा विधानसभा और दुर्ग नगर निगम चुनाव में कैसे हार गई। जयश्री ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में महापौर चंद्रिका चंद्राकर के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाने वाले भाजपा पार्षद बताएं कि खुद के वार्ड में वे अपने पति रत्नेश चंद्राकर को क्यों नहीं जिता पाई।
जयश्री ने कहा कि बीते 20 वर्षों के कार्यकाल में काम नहीं हुआ बल्कि विकास के नाम पर दिखावेबाजी होती रही। कमीशनखोरी चरम पर रही। इसी दिखावेबाजी और कमीशनखोरी के कारण भाजपा की इतनी करारी हार हुई है। जयश्री ने कहा कि उनके द्वारा पूर्व महापौरों पर लगाए गए आरोप नगर निगम की पिछली परिषद के कार्यकाल पर करारा तमाचा है।
राज्य निर्माण के बाद पहली बार दुर्ग शहर में इतनी बेहतरीन प्लानिंग के साथ विकास कार्य हो रहे हैं। जयश्री ने भाजपा पार्षदों से कहा है कि शहर में जनहित का ध्यान रखकर समग्र विकास कैसे होता है, यह जानने-समझने के लिए उन्हें विधायक अरुण वोरा और महापौर धीरज बाकलीवाल से विकास का सबक सीखना चाहिए। 20 साल तक विकास कार्यों को लेकर भाजपा पार्षदों के ज्ञान चक्षु नहीं खुल पाए हैं, तो अब खुल जाएंगे।
जयश्री ने कहा कि उन्होंने भा जपा से पार्षद चुनाव जीता और लोक कर्म प्रभारी बनने के बाद लगातार मेहनत की और सभी 60 वार्डों में लगातार विकास कार्य कराने सक्रिय रही। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें दूसरी बार भी लोक कर्म प्रभारी बनाया गया। कठपुतली बनने से इंकार करने और नगर निगम में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण 2014 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें सामान्य सीट होने और योग्यता के बावजूद महापौर की टिकट नहीं दी।
जयश्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सम्मान के साथ इस बार के चुनाव में पार्षद की टिकट दी और एमआईसी प्रभारी बनाया। उनके पार्टी बदलने पर हायतौबा मचाने वाले भाजपा पार्षद बताएं कि मध्यप्रदेश में 22 विधायकों को किसने दलबदल कराया? उन्होंने कहा कि जिनके घर कांच के होते हैं उन्हें हाथ में पत्थर रखने से बचना चाहिए।
नई दिल्ली / शौर्यपथ/ भारतीय नौसेना में लिंग-समानता को साबित करने वाले एक कदम के तहत सब-लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी तथा सब-लेफ्टिनेंट रिति सिंह को नौसेना के युद्धपोत पर क्रू के रूप में तैनात किया जाएगा, और वे ऐसा करने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी.हालांकि भारतीय नौसेना कई महिला अधिकारियों को भर्ती करती रही है, लेकिन अब तक महिला अधिकारियों को युद्धपोतों पर लम्बे अरसे के लिए तैनात नहीं किया गया है, जिसके पीछे कई कारण हैं - क्रू क्वार्टरों में निजता की कमी तथा महिलाओं के लिए विशेष बाथरूम व्यवस्था की उपलब्धता न होना.
अब यह सब जल्द ही बदलना तय है. दो युवा महिला अधिकारी नौसेना के मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों में लगे सेंसरों को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग ले रही हैं. माना जा रहा है कि ये दो अधिकारी नौसेना के नए एमएच-60 आर हेलीकॉप्टरों में उड़ान भरेंगी. एमएच-60 आर हेलीकॉप्टरों को अपनी श्रेणी में दुनिया में सबसे अत्याधुनिक मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर माना जाता है. इसे दुश्मन के पोतों और पनडुब्बियों को डिटेक्ट करने और उन्हें उलझाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. वर्ष 2018 में तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकहीड-मार्टिन द्वारा निर्मित हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंज़ूरी दी थी, जिसका मूल्य लगभग 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर था.
महिला अधिकारियों की युद्धपोतों पर तैनाती की ख़बर ऐसे वक्त में सामने आई है, जब भारतीय वायुसेना ने भी महिला लड़ाकू पायलट को राफेल विमानों की फ्लीट को ऑपरेट करने के लिए शॉर्टलिस्ट किया है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ/ जेल से छूटने के बाद डॉक्टर कफील खान ने आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की. डॉक्टर कफ़ील खान की जेल से रिहाई के बाद कांग्रेस महासचिव ने कफ़ील खान और उनके परिजनों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल लिया था और हरसंभव मदद का वादा किया था. कफ़ील खान ने अपने परिवार के साथ प्रियंका गांधी से मुलाकात की.
डॉक्टर कफ़ील खान दिल्ली में अपने परिवार के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिले. डॉक्टर कफ़ील के साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी प्रियंका गांधी से मिले.दिल्ली में हुई इस मुलाकात के वक्त यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन शाहनवाज आलम मौजूद थे.
यूपी में कांग्रेस पार्टी ने डॉक्टर कफ़ील की रिहाई के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था. पूरे सूबे में हस्ताक्षर अभियान, विरोध प्रदर्शन और पत्र लिखकर कांग्रेसियों ने डॉक्टर कफ़ील खान की रिहाई के लिए आवाज़ बुलंद की थी.
डॉक्टर कफील खान को भड़काऊ भाषण के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद हाल ही में जेल से रिहा कर दिया गया. उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं. उन्होंने कुछ दिन पहले इस पर विराम लगाते हुए कहा कि वे डॉक्टर हैं और डॉक्टर ही बने रहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस ही नहीं, कोई दूसरी पार्टी भी ज्वाइन करने का नहीं सोच रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसी अन्य मामले में फंसाए जाने की आशंका के मद्देनजर मानवता के आधार पर मेरी मदद की थी लेकिन इसका यह मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए कि मैं कांग्रेस में शामिल होने जा रहा हूं.'
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि, इसी बीच सोमवार को देश के कई राज्यों में आंशिक रूप से स्कूल खोल दिए गए. वहीं, देश में सबसे बड़ा पर्यटन स्थल ताजमहल भी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. मार्च में लॉकडाउन के पहले से ही ताजमहल बंद था, लेकिन 21 सितंबर यानी आज से ताजमहल एक बार फिर जनता के लिए खोल दिया गया है.
भारत में सोमवार तक कोरोना के मामले 54 लाख के पार हो चुके हैं. सबसे ज्यादा मामले वाले देशों में भारत दूसरे नंबर पर यानी बस USA से आगे है और यह स्थिति भी जल्द बदल सकती है. लेकिन मार्च से लगे लॉकडाउन के बीच लाखों लोगों का रोजगार खत्म हो गया है और लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर बन आई है, जिसके चलते केंद्र की मोदी सरकार का फोकस अर्थव्यवस्था को खोलने पर है. पिछले कुछ महीनों में सरकार ने लॉकडाउन में लगातार छूट को बढ़ाया है और अब लगभग सबकुछ खोल दिया गया है. स्कूल-कॉलेजों को भी आंशिक रूप से और कुछ शर्तों के साथ खोल दिया गया है, हालांकि, कई राज्यों ने अभी भी स्कूलों को न खोलने का फैसला किया है.
कई लोगों का मानना है कि उन्हें अब वायरस के साथ रहने की आदत डालनी होगी. ताजमहल देखने अपने परिवार के साथ आए बैंक कर्मचारी अयूब शेख ने कहा, 'बहुत से लोगों ने लॉकडाउन के चलते अपना रोजगार खो दिया है. लोगों ने बहुत झेला और वक्त आ गया है कि अब सबकुछ पूरी तरह से खोल दिया जाए. हमें वायरस से डर नहीं लगता है. अगर हमें संक्रमण होना है तो हो जाएगा. बहुत से लोग इससे मर नहीं रहे हैं. मुझे नहीं लगता है कि ये इतनी जल्दी जाएगा, हमें इसकी आदत डाल लेनी चाहिए.'
आगरा के ताजमहल को हर साल 70 लाख से ज्यादा लोग देखने आते हैं लेकिन 17 मार्च से ही यह बंद है. अधिकारियों का कहना है कि कोविड-19 गाइडलाइंस लागू किए गए हैं. सोमवार को 200 से कुछ ज्यादा लोग ताजमहल पहुंचे थे. यहां पर रोज आने वाले पर्यटकों की संख्या 5,000 तक सीमित रखी गई है. स्पेन से आए पर्यटक ऐन्होआ पर्रा ने कहा, 'कोरोनावायरस हर देश में है. हम हर जरूरी बचाव के कदम उठा रहे हैं. हमें सावधान रहना होगा लेकिन अगर हमें संक्रमण होना है तो हो जाएगा.' वहीं एक स्थानीय कर्मचारी सतीश ने कहा कि 'ताजमहल से कितनों को रोजगार मिलता है. बिजनेस वापस शुरू कर अच्छा लग रहा है.'
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / रेप केस में आरोपी यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो महीने की अंतरिम जमानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. प्रजापति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. यूपी सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है. प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी. गत चार सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को अंतरिम जमानत दी है. अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे प्रजापति सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में लखनऊ जेल में बंद हैं. कोर्ट ने पांच लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड तथा दो जमानतदारों की शर्त के साथ उन्हें जमानत दी थी.
गायत्री प्रसाद प्रजापति ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपनी अंतरिम बेल की अर्जी दी थी. कोर्ट ने सुनवाई के बाद दो महीने की अंतरिम जमानत की मंजूरी दी. कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह अंतरिम जमानत के दौरान देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस वेद प्रकाश वैश्य ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दो महीने की अंतरिम बेल मंजूर की थी. दो महीने बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति को सरेंडर करना था. गायत्री प्रजापति को तीन साल में पहली बार जमानत मिली थी. इस अंतरिम जमानत के लिए गायत्री प्रजापति को तीन साल पांच महीना और 20 दिन का इंतजार करना पड़ा था. बता दें कि प्रजापति ने 15 मार्च 2017 को सरेंडर किया था.
गायत्री प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर बेल की मंजूरी मिली थी. गायत्री ने अपनी एप्लिकेशन में हार्ट, इन्फेक्शन इत्यादि की दिक्कत बताई थी. यह बेल लखनऊ के गौतम पल्ली थाने में दर्ज रेप के मुकदमे में मिली थी. बताते चलें कि गायत्री प्रसाद प्रजापति इस समय अपना इलाज पीजीआई में करा रहे हैं. वहीं कोर्ट ने साफ कहा था कि जमानत पर बाहर रहने के दौरान गायत्री द्वारा किसी भी तरह से पीड़ित परिवार को न डराया जाएगा न ही धमकाया जाएगा. साथ ही किसी भी तरह से उन्हें प्रभवित नहीं किया जाएगा.
अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति के खिलाफ 2017 में सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ था. केस में तीन जून, 2017 को गायत्री के अलावा छह अन्य पर चार्जशीट दाखिल की गई थी. इसके बाद 18 जुलाई, 2017 को लखनऊ की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने सातों आरोपियों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ/ केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि देश में वर्ष 2017 और 2018 के दौरान पुलिस द्वारा सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत करीब 1200 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 563 अभी तक हिरासत में हैं. केंद्रीय मंत्री गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2018 की नवीनतम प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में से मध्य प्रदेश ने वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में रासुका के तहत सबसे अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और उसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान आता है. उन्होंने कहा कि इस सख्त कानून के तहत वर्ष 2017 में देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 501 लोगों को हिरासत में लिया गया, इसमें से 229 को को समीक्षा बोर्ड के द्वारा छोड़ दिया गया और 272 अभी हिरासत में हैं.
इसी तरह, वर्ष 2018 में, देश भर में रासुका के तहत 697 लोगों को हिरासत में लिया गया जिसमें से 406 को समीक्षा बोर्डों द्वारा रिहा किया गया जबकि 291 हिरासत में हैं. मध्य प्रदेश में, वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में एनएसए के तहत 795 लोगों को हिरासत में लिया गया था. समीक्षा बोर्डों द्वारा 466 लोगों को रिहा किया गया जबकि 329 हिरासत में हैं. मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में, वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में रासुका के तहत 338 लोगों को हिरासत में लिया गया जिसमें से समीक्षा बोर्ड द्वारा 150 लोगों को रिहा कर दिया गया जबकि 188 हिरासत में हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अवैध प्रवासियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सोमवार को कहा कि अवैध प्रवासी भारत में 'बहुत गुप्त तरीके से छुप-छुपाकर' आते हैं, ऐसे में उनका पता लगाना, हिरासत में लेना और फिर उन्हें वापस भेजने की 'प्रक्रिया चल रही है.' सरकार से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास देश में अवैध प्रवासियों का कोई रिकॉर्ड है?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि 'अवैध प्रवासी बहुत ही गुप्त तरीके से बिना किसी वैध दस्तावेज के देश में घुसते हैं. ऐसे विदेशी नागरिकों का पता लगाने, उन्हें हिरासत में लेने और फिर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है.'
बता दें कि सालों की कार्रवाई के बाद बांग्लादेश से पिछले दशकों में अवैध रूप से भारत आए प्रवासियों की पहचान करने के लिए बनाए जा रहे National Register of Citizens की फाइनल लिस्ट पिछले साल सामने आई थी. इनमें लगभग 19 लाख लोगों का नाम लिस्ट से बाहर रह गए थे. केंद्र का कहना है कि जिन लोगों के नाम लिस्ट में नहीं आए हैं, उनके पास हर कानूनी रास्ता चुनने का विकल्प है और तब तक उन्हें अवैध घोषित नहीं किया जाएगा.
तेलंगाना के सांसद डॉक्टर बांदा प्रकाश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह साफ करने को कहा था कि सरकार बताए कि उसके पास अवैध प्रवासियों के आंकड़े हैं या नहीं और अगर हैं तो इसकी जानकारी दे. हालांकि, मंत्रालय की ओर से कुछ विशेष सवालों के जवाब नहीं दिए गए और एक साधारण सा जवाब दिया गया कि केंद्र के पास कानून की धाराओं के तहत ऐसी शक्तियां मिली हुई हैं, जिनके आधार पर वो 'देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर वापस भेज सकता है.'
हालांकि, एनआरसी की आखिरी लिस्ट फिलहाल पड़ी हुई धूल खा रही है क्योंकि असम की सरकार ने इसमें गड़बड़ियां बताते हुए मान्यता देने से इनकार कर दिया है. असम के लिए इस लिस्ट के बड़े मायने हैं क्योंकि राज्य ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की पहचान करने और फिर उन्हें वापस भेजने को लेकर 1979 से लेकर 1985 तक छह साल लंबा अभियान देखा है. यहां पर अगले साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
