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May 24, 2026
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लहराया चांद पर तिरंगा सफल लैंडिंग के साथ ही साउथ पोल पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना भारत

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तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के कार्यकाल में रखी गयी थी इसरो की नीव
चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर सफ लतापूर्वक लैंडिंग कर ली है. अब इसके अंदर से रोवर प्रज्ञान के निकलने का इंतजार है. इसमें करीब 1 घंटा 50 मिनट लगेगा. डस्ट सेटल होने के बाद विक्रम चालू होगा और कम्युनिकेट करेगा
   नई दिल्ली/ शौर्यपथ / भारत ने इतिहास रच दिया है. चंद्रयान-3   ने चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ली है. चंद्रयान-3   के साथ ही भारत चांद के साउथ पोल पर यान उतारने वाला पहला देश बन गया है. जबकि चांद के किसी भी हिस्से में सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है. भारत से पहले अमेरिका, सोवियत संघ (अभी रूस) और चीन ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं.
   चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग को पीएम मोदी ने साउथ अफ्रीका से वर्चुअली देखा. सफल लैंडिंग के बाद पीएम मोदी ने इसरो और देश को बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा कि चंदा मामा अब दूर के नहीं, टूर के हैं.
                 ऐसे हुई लैंडिंग
     चंद्रयान-3 के लैंडिंग की शुरुआत 5 बजकर 30 मिनट पर हुई. रफ लैंडिंग बेहद कामयाब रही. इसके बाद 5 बजकर 44 मिनट पर लैंडर ने वर्टिकल लैंडिग की. तब चंद्रयान-3 की चंद्रमा से दूरी 3 किमी रह गई थी. इसके 20 मिनट में चंद्रमा की अंतिम कक्षा से चंद्रयान-3 ने 25 किमी का सफर पूरा किया. फिर लैंडर को धीरे-धीरे नीचे उतारा गया. शाम 6 बजकर 04 मिनट पर लैंडर ने चांद पर पहला कदम रखा. इस तरह भारत चांद के साउथ पोल पर कदम रखने वाला दुनिया का पहला देश बन गया.
        रोवर के निकलने का है इंतजार
   चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम के सफलतापूर्वक चांद पर उतरने के बाद अब इसके अंदर से रोवर प्रज्ञान के निकलने का इंतजार है. इसमें करीब 1 घंटा 50 मिनट लगेगा. डस्ट सेटल होने के बाद विक्रम चालू होगा और कम्युनिकेट करेगा. फिर रैंप खुलेगा और प्रज्ञान रोवर रैंप से चांद की सतह पर आएगा. इसके बाद इसके व्हील चांद की मिट्टी पर अशोक स्तंभ और ISRO के लोगो की छाप छोड़ेंगे. फिर 'विक्रमÓ लैंडर 'प्रज्ञान की फोटो खींचेगा और प्रज्ञान विक्रम की तस्वीर लेगा. ये फोटो वे पृथ्वी पर भेजेंगे.
      स्पेस पावर के रूप में उभरा भारत
     चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग से जहां भारत का  स्पेस पावर के रूप में उभरा है. साथ ही ISRO का दुनिया की अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के मुकाबले कद कहीं ऊंचा हो गया है. देशवासी ISRO के वैज्ञानिकों को बधाई दे रहे हैं और उनके काम की जमकर सराहना कर रहे हैं.
  सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की बाढ़
   सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों का तांता लगा है. देशभर में मिठाई बांटकर और आतिशबाजी करके इस गौरव के क्षण का जश्न मनाया जा रहा है.
भारत ने पहले कब-कब भेजे चंद्रयान
    चंद्रयान-3 से पहले भारत ने चंद्रयान-2 और चंद्रयान-1 मिशन लॉन्च किया था। 22 अक्टूबर, 2008 को चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया था। इससे वैज्ञानिकों को चांद के रहस्यों को जानने में मदद मिली। चंद्रयान-2 मिशन को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया। यह मिशन सॉफ्ट लैंडिंग में असफल रहा था, जिससे इसके लिए तय लक्ष्य हासिल नहीं हुए थे। अब चंद्रयान- 3 के जरिए चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और घूमने की क्षमता के प्रदर्शन का लक्ष्य है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक, जिन्होंने डाली थी ISRO की नींव , ऐसे हुई की शुरुआत
   भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1962 में हुई थी। साराभाई और भाभा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे। इसके बाद साराभाई की देखरेख में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति गठित  हुई और 21 नवंबर, 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम के करीब थुंबा से पहला रॉकेट लॉन्च किया गया। 15 अगस्त, 1969 को INCOSPAR का नाम बदलकर ISRO रख दिया गया और इस तरह भारत को अपनी अंतरिक्ष एजेंसी मिली।

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