October 29, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या कम करने का किया आग्रह; दुर्ग में पूर्व जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और शासकीय आवासों के उपयोग की व्यवस्था पर भी चर्चा तेज

    दुर्ग। जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली शासकीय सुविधाओं और उन पर खर्च होने वाली सरकारी राशि को लेकर दुर्ग जिले में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने शासन को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा में तैनात शासकीय सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने और उन जवानों को प्रदेश की कानून-व्यवस्था मजबूत करने में लगाने का आग्रह किया है। उनके इस निर्णय ने जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुरक्षा, सरकारी संसाधनों के उपयोग और सार्वजनिक धन की बचत जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    ‘जनता ही मेरी सबसे बड़ी सुरक्षा’, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    विधायक रिकेश सेन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को प्रेषित पत्र में कहा है कि वे जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और जनता ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। पत्र में उन्होंने भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी की कार्यशैली से प्रेरित होकर शासकीय सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने की इच्छा जताई है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या घटाकर उन्हें प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उपयोग में लिया जाए। विधायक की इस पहल को सरकारी संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग की दृष्टि से देखा जा रहा है।

    एक निर्णय से उठे कई सवाल

    रिकेश सेन के इस पत्र के बाद अब चर्चा केवल उनकी सुरक्षा तक सीमित नहीं है। दुर्ग जिले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन पूर्व जनप्रतिनिधियों के पास वर्तमान में कोई संवैधानिक या निर्वाचित पद नहीं है, उन्हें कौन-कौन सी शासकीय सुविधाएं मिल रही हैं और उनका खर्च किस आधार पर जारी है?

    पूर्व जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय खतरे के आकलन और निर्धारित नियमों के आधार पर लिया जाता है। इसलिए किसी पूर्व विधायक या अन्य व्यक्ति को सुरक्षा मिलना अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। लेकिन ऐसी सुरक्षा की समय-समय पर समीक्षा, उसकी आवश्यकता और उस पर होने वाले सरकारी खर्च की पारदर्शिता निश्चित रूप से महत्वपूर्ण विषय हैं।

    पूर्व विधायक अरुण वोरा की सुरक्षा भी चर्चा में

    दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा की सुरक्षा में जवानों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें सुरक्षा किस श्रेणी में, किस आधार पर और कितनी अवधि के लिए प्रदान की गई है। यदि सुरक्षा की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है, तो उसके निष्कर्षों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाना चाहिए।

    सवाल किसी व्यक्ति विशेष को सुरक्षा देने या हटाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि शासकीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप हो और कानून-व्यवस्था के लिए उपलब्ध मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।

    स्वर्गीय हेमचंद यादव के सरकारी आवास पर भी उठ रहे सवाल

    दुर्ग के सिविल लाइन स्थित उस शासकीय आवास का मुद्दा भी चर्चा में है, जिसका उपयोग पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव करते थे। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनके परिवार के पास इस आवास का उपयोग जारी होने की बात कही जा रही है।

    इस मामले में यह जानना आवश्यक है कि आवास वर्तमान में किस वैधानिक अनुमति या आवंटन के आधार पर उपयोग किया जा रहा है, क्या इसकी अवधि बढ़ाई गई है और क्या इसके लिए निर्धारित किराया अथवा अन्य शुल्क जमा किया जा रहा है। यदि आवास का उपयोग बिना वैध अनुमति के जारी है, तो शासन को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, यदि कोई वैध अनुमति प्रभावी है, तो उसकी शर्तों और अवधि की जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दृष्टि से उचित होगा।

    सरकारी धन की बचत के लिए व्यवस्था की समीक्षा जरूरी

    शासकीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, सरकारी आवासों का आवंटन और पूर्व जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुविधाएं सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं। इनका उद्देश्य आवश्यकता के अनुरूप सुविधा उपलब्ध कराना है, न कि अनिश्चितकाल तक बिना समीक्षा के संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करना।

    यदि सुरक्षा की समीक्षा और शासकीय आवासों के आवंटन की नियमित जांच की जाए, तो अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण लगाने के साथ सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे कानून-व्यवस्था के लिए जवानों की उपलब्धता बढ़ाने और सार्वजनिक धन की जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है।

    क्या रिकेश सेन की पहल बनेगी व्यापक समीक्षा का आधार?

    वैशाली नगर विधायक की ओर से सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने का आग्रह एक व्यक्तिगत निर्णय है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पत्र पर क्या निर्णय लेती है और क्या इसके साथ ही पूर्व जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा तथा शासकीय आवासों के उपयोग की व्यवस्था की भी समीक्षा होती है।

    बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन सभी संबंधित मामलों में नियमों के अनुरूप पारदर्शी समीक्षा कर सार्वजनिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करेगा, या रिकेश सेन की यह पहल केवल एक व्यक्तिगत उदाहरण बनकर रह जाएगी? जनहित में जरूरी है कि सुरक्षा की आवश्यकता का आकलन निष्पक्ष हो, शासकीय संपत्तियों का उपयोग नियमों के अनुसार हो और सरकारी धन के प्रत्येक व्यय की जवाबदेही तय की जाए।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया लोकार्पण, महिला स्व-सहायता समूहों और वन उपज संग्राहकों की आय बढ़ाने पर जोर; प्रीमियम और सामान्य श्रेणी में उपलब्ध होंगे उपहार पैक

    रायपुर । छत्तीसगढ़ की वन संपदा, पारंपरिक स्वाद और महिला स्व-सहायता समूहों के परिश्रम को नई पहचान देने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार इन उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ वन उपज संग्राहकों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो, ताकि इसका आर्थिक लाभ सीधे संग्राहकों और महिला समूहों तक पहुंचे। उन्होंने प्रदेशवासियों से त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील भी की।

    प्रीमियम और सामान्य श्रेणी में गिफ्ट पैक

    ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक दो श्रेणियों में तैयार किए गए हैं। प्रीमियम पैक में नौ प्रकार के चयनित उत्पाद, जबकि सामान्य पैक में पांच प्रकार के उत्पाद शामिल हैं। आम नागरिक इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे।

    जामुन जूस से महुआ कुकीज़ तक, स्थानीय स्वाद की झलक

    गिफ्ट पैक में जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो एवं महुआ से बने कुकीज़, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी और एलोवेरा जेल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के जरिए प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय उद्यमिता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।

    सात वन धन केंद्रों में तैयार हो रहे उत्पाद

    इन गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद राजनांदगांव के कौरीनभाटा, कवर्धा के बोड़ला, जशपुर के पंचक्की, जगदलपुर के आसना, धमतरी के दुगली, कटघोरा के डोंगानाला स्थित वन धन विकास केंद्रों और दुर्ग के जामगांव (एम) स्थित केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई में तैयार किए जा रहे हैं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपये है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण, निर्माण और पैकेजिंग के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। महिला स्व-सहायता समूह भी उत्पादन से लेकर विपणन तक की गतिविधियों में भागीदारी निभा रहे हैं।

    स्थानीय उत्पादों से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर स्थानीय उत्पादों को उपहार के रूप में बढ़ावा देने से उनकी मांग और बाजार तक पहुंच बढ़ने की संभावना है। इससे वन उपज संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को लाभ मिल सकता है। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के जरिए ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ को व्यापक पहचान दिलाने की यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    31 दिसंबर तक पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों की सेवा समाप्त होने की तैयारी; साय सरकार ने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी भर्ती में आरक्षण का बनाया प्रावधान

    रायपुर। अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र सेनाओं में भर्ती हुए पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत तक पूरा होने जा रहा है। सेवा समाप्ति के बाद इन युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने की चुनौती होगी। इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026 को मंजूरी देते हुए तृतीय श्रेणी के चिन्हित पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

    पुलिस, वन और जेल विभाग में मिलेगा अवसर

    राज्य सरकार के निर्णय के तहत पूर्व अग्निवीरों को पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर भर्ती में आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य सैन्य सेवा के दौरान अर्जित अनुशासन, शारीरिक दक्षता और प्रशिक्षण का उपयोग राज्य की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में करना है।

    इस सुविधा का लाभ छत्तीसगढ़ के मूल निवासी उन पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र सेनाओं में चार वर्ष का निर्धारित कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया हो। इसके लिए सेवा समाप्ति का वैध डिस्चार्ज प्रमाणपत्र अथवा सर्विस सर्टिफिकेट आवश्यक होगा। आरक्षण का लाभ संबंधित भर्ती नियमों, निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया के अधीन मिलेगा।

    आरक्षक भर्ती में भी लागू होगा प्रावधान

    गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक पदों पर विशेष भर्ती की अनुमति दिए जाने के साथ पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सैन्य सेवा पूरी कर लौटने वाले युवाओं को राज्य पुलिस में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड और अन्य भर्ती शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

    अग्निवीर भर्ती के लिए युवाओं को प्रशिक्षण

    छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से युवाओं को सेना और अग्निवीर भर्ती के लिए तैयार करने हेतु रोजगार विभाग के माध्यम से पूर्व-भर्ती लिखित एवं शारीरिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है। इससे युवाओं को सैन्य भर्ती की तैयारी में सहायता मिलती है। अब पूर्व अग्निवीरों के लिए राज्य की सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की पहल को इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ₹11.71 लाख की सेवा निधि, लेकिन नियमित सैन्य पेंशन नहीं

    अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को नियमानुसार लगभग ₹11.71 लाख की सेवा निधि मिलने का प्रावधान है। हालांकि, चार वर्ष की संविदा सेवा पूरी करने वाले और नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों को नियमित सैन्य पेंशन नहीं मिलती। योजना के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का अवसर मिलता है।

    ऐसे में सेवा समाप्ति के बाद रोजगार उपलब्ध कराना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विभिन्न राज्यों में पूर्व अग्निवीरों को पुलिस, सुरक्षा सेवाओं और अन्य सरकारी पदों पर अवसर देने के लिए अलग-अलग प्रावधान किए जा रहे हैं।

    रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास पर टिकी निगाहें

    छत्तीसगढ़ में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है, जो सैन्य सेवा के बाद अपने गृह राज्य में रोजगार पाना चाहते हैं। इससे एक ओर पूर्व अग्निवीरों के अनुभव का लाभ राज्य को मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को सेवा समाप्ति के बाद नए करियर की दिशा मिल सकती है।

    अब इस पहल का वास्तविक लाभ भर्ती नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, रिक्त पदों की उपलब्धता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर निर्भर करेगा। पूर्व अग्निवीरों को समयबद्ध भर्ती और पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो यह कदम उनके सम्मानजनक पुनर्वास के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

    पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये अतिरिक्त ब्याज भुगतान के निर्देश; बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर धारा 59 के तहत अलग कार्रवाई होगी

    रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने रायपुर के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6,87,496 रुपये ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया है कि परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक 1 नवंबर 2026 से प्रतिमाह 7,314 रुपये ब्याज का भुगतान किया जाए। परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले में प्रमोटर के विरुद्ध पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    2019 से अक्टूबर 2026 तक का ब्याज देना होगा

    प्राधिकरण के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8,12,643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना करते हुए 6,87,496 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक निर्धारित मासिक ब्याज राशि का भुगतान करना होगा।

    अधूरे विकास कार्य और प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई

    सुनवाई के दौरान परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूरे नहीं होने तथा सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने का मामला सामने आया। प्राधिकरण ने परियोजना को अपूर्ण मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया।

    बिना पंजीयन परियोजना विकसित करने पर अलग प्रकरण

    CG-RERA ने परियोजना का पंजीयन नहीं कराए जाने को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में धारा 3 के तहत पंजीयन की अनिवार्यता का उल्लेख करते हुए प्रमोटर के विरुद्ध धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रावधान के तहत बिना अनिवार्य पंजीयन परियोजना का विज्ञापन, विपणन, बुकिंग या विक्रय करने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

    भूखंड बेचने के बाद भी विकास की जिम्मेदारी प्रमोटर की

    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भूखंडों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल और अन्य निर्धारित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का दायित्व है।

    CG-RERA का यह आदेश उन आबंटियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें परियोजनाओं में विकास कार्य अधूरे रहने या आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह मामला रियल एस्टेट परियोजनाओं में समयबद्ध विकास, पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

    जल जीवन मिशन ने बदली ग्रामीणों की दिनचर्या, हैंडपंप की कतारों और पानी ढोने की मशक्कत से राहत

    रायपुर. ।. कभी सुबह की शुरुआत पानी की चिंता से होती थी। बर्तन लेकर हैंडपंप तक पहुंचना, अपनी बारी के लिए घंटों कतार में खड़े रहना और फिर पानी ढोकर घर लाना रोज की मजबूरी थी। गर्मियों में हैंडपंप खराब हो जाता तो एक बाल्टी पानी जुटाना भी चुनौती बन जाता। अब उन्हीं घरों में नल से पानी भर रहा है। न हैंडपंप तक दौड़ लगानी पड़ रही है, न कतार में घंटों गंवाने पड़ रहे हैं। यह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के बारीउमराव गांव की नई तस्वीर है, जहां जल जीवन मिशन के तहत हर घर में नल कनेक्शन लगाया गया है। 

    घर पर ही पानी की उपलब्धता ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान कर दी है। सबसे बड़ा फर्क उस समय और मेहनत का है, जो पहले सिर्फ पानी जुटाने में खर्च हो जाते थे। बारीउमराव के श्री करमदास पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि पीने और घरेलू जरूरतों के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मियों में वहां लंबी कतार लगती थी। कई बार हैंडपंप खराब होने पर दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था। अब घर में ही नियमित पानी मिलने से यह परेशानी दूर हो गई है।

    *महिलाओं और बुजुर्गों की मशक्कत हुई कम*

    श्री करमदास कहते हैं, "पहले पानी भरने में काफी समय और मेहनत लगती थी। अब घर में ही नल से पानी मिल जाता है। न दूर जाना पड़ता है, न लाइन लगानी पड़ती है। बचा हुआ समय दूसरे कामों में लगा पाते हैं। पूरा परिवार खुश है।" 

    बारीउमराव में जल जीवन मिशन से सभी घरों में नल लगने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के बर्तन लेकर हैंडपंप तक आना-जाना पड़ता था। घर में ही पानी मिलने से अब दूसरे कामों के लिए ज्यादा वक्त मिलने लगा है। करमदास जैसे ग्रामीणों के लिए इस बदलाव की अहमियत सिर्फ नल लगने तक सीमित नहीं है। उनके लिए असली राहत पानी जुटाने की रोज की भागदौड़ से छुटकारा और अपने कीमती समय को अपने हिसाब से उपयोग करने की है।

    रायपुर । छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के कारण आम जनता को समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। गरीब मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने को मजबूर हैं।

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि प्रदेश में कुल 9,392 पद रिक्त बताए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के 2,025 पदों के मुकाबले केवल 408 विशेषज्ञ कार्यरत हैं। यानी लगभग 80 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसी तरह स्टाफ नर्सों के 2,745 पद रिक्त बताए गए हैं। ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की बदहाल स्थिति को बताते है।

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर होना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और गंभीर मरीजों के उपचार में देरी का खतरा पैदा होता है। निजी अस्पतालों का महंगा इलाज हर परिवार की पहुंच में नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की बदहाली गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन रही है। स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों की व्यवस्था संभालने में विफल साबित हो रहे है।

      बिलासपुर / शौर्यपथ / पुरातत्व अधिकारी भर्ती में मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल करने के बावजूद करीब तीन साल तक नियुक्ति नहीं मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। कांकेर जिले के गोविंदपुर निवासी हैग्रिव परिहार की याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जब अभ्यर्थी के दस्तावेज सही पाए गए हों और उसके खिलाफ कोई शिकायत न हो, तो अन्य उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच के कारण उसकी नियुक्ति अनिश्चितकाल तक नहीं रोकी जा सकती।

    मेरिट में पहला स्थान, फिर भी नियुक्ति का इंतजार

    पुरातत्व अधिकारी पद के लिए 31 मई 2023 को जारी विज्ञापन के आधार पर हैग्रिव परिहार ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के बाद 17 अगस्त 2023 को जारी मेरिट सूची में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया। दस्तावेज सत्यापन के बाद पुरातत्व एवं संग्रहालय संचालनालय ने 9 अक्टूबर 2023 को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी करने की अनुशंसा भी कर दी। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    दूसरे अभ्यर्थियों की जांच में अटकी प्रक्रिया

    भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। राज्य सरकार ने इन शिकायतों की जांच कराई, जो 4 जून 2024 को पूरी हुई। इस दौरान नियुक्तियां नहीं हो सकीं। सरकार ने मेरिट सूची की वैधता बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया, लेकिन वर्ष 2014 के प्रक्रिया नियमों के तहत सूची की एक वर्ष की वैधता बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली। परिणामस्वरूप मेरिट सूची की अवधि समाप्त हो गई।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी: अभ्यर्थी को क्यों मिले देरी के परिणाम?

    याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उनके दस्तावेजों में कोई कमी नहीं थी और न ही उनके खिलाफ कोई शिकायत थी। इसके बावजूद दूसरे अभ्यर्थियों की जांच के कारण उनकी नियुक्ति रोक दी गई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं थे। दूसरे उम्मीदवारों की जांच और मेरिट सूची की वैधता समाप्त होने का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।

    चार सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस आदेश से लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैग्रिव परिहार को राहत मिलने की उम्मीद है। अब सरकार को निर्धारित समयसीमा में अदालत के निर्देश के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी।

    रायपुर से नागपुर ले जाई जा रही थी नकदी, वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके आरोपी; हवाला कनेक्शन समेत अन्य पहलुओं की जांच में जुटी पुलिस और आयकर विभाग

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन के गुप्त चेंबर से करीब ₹4 करोड़ नकद बरामद किए हैं। खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा के पास की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने वाहन सवार दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नकदी रायपुर से नागपुर ले जाई जा रही थी।
    दुर्ग पुलिस के मुताबिक संदिग्ध नकदी परिवहन की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने सफेद पिकअप वाहन को रोककर तलाशी ली। वाहन के पिछले हिस्से में विशेष रूप से बनाया गया गुप्त चेंबर मिला, जिसमें नोटों के बंडल छिपाकर रखे गए थे। नकदी की गिनती में करीब ₹4 करोड़ की राशि सामने आई।

    नकदी के स्रोत और गंतव्य की जांच

    इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वाहन चालक भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी बरामद नकदी के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और न ही संतोषजनक जानकारी दे पाए।

    मामले में हवाला नेटवर्क अथवा अन्य अवैध वित्तीय लेन-देन की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। हालांकि, नकदी के स्रोत और उसके वास्तविक मालिक के संबंध में स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    आयकर विभाग को दी गई सूचना

    पुलिस ने बरामद रकम और आरोपियों से संबंधित जानकारी आयकर विभाग को सौंप दी है। अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतनी बड़ी नकदी किसकी है, इसे रायपुर से नागपुर क्यों ले जाया जा रहा था और वहां किसे सौंपा जाना था।

    करीब ₹4 करोड़ की नकदी को वाहन के गुप्त चेंबर में छिपाकर ले जाने का मामला कई सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से ही नकदी के वास्तविक स्रोत, संभावित वित्तीय अनियमितताओं और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

    रायपुर / शौर्यपथ / भारत सरकार के केबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने आज नई दिल्ली से देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान अर्नब के मद्देनजर राज्यों को व्यापक तैयारियों एवं चक्रवात से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। छत्तीसगढ़ राज्य से यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ ने राज्य में चक्रवाती तूफान से निपटने के लिए राज्य में जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।
    अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने छत्तीसगढ़ राज्य की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। दक्षिण बस्तर क्षेत्र में 28 अक्टूबर को भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में सात राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार हैं। होमगार्ड तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें भी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों, स्वास्थ्य सुविधाओं, खाद्य सामग्री, परिवहन तथा संचार व्यवस्था से संबंधित आवश्यक तैयारियां की गई हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत शिविर संचालित करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। राज्य शासन द्वारा जनहानि को रोकने तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।
    बैठक में कैबिनेट सचिव ने राज्यों में चक्रवात के दौरान शून्य जनहानि के लक्ष्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने पेड़ों के गिरने, दीवारों के ढहने तथा यातायात के दौरान लोगों के असावधानीवश जोखिम में पड़ने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने कहा। उन्होंने प्रभावी चेतावनी प्रणाली, आवश्यकता के अनुसार समय पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राज्य शासन और जिला प्रशासन के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में रोमांचक मुकाबला ड्रॉ, संस्कारधानी को मिला पहला अंक
    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में संस्कारधानी स्ट्राइकर्स और बैलाडीला बुल्स के बीच खेला गया रोमांचक मुकाबला 5-5 से ड्रॉ रहा। बैलाडीला बुल्स के जसकरण सिंह ने अकेले पांच गोल दागे, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। अंतिम दो मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल कर संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने बराबरी हासिल की और टूर्नामेंट में अपना पहला अंक अर्जित किया।
    मुकाबले के पहले हाफ में आर्यन खेस और आशीष तानी पूर्ति के गोल से संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने मजबूत शुरुआत की। दूसरे हाफ में जसकरण सिंह ने शानदार वापसी करते हुए दो पेनल्टी कॉर्नर और एक पेनल्टी स्ट्रोक सहित गोल दागे। उन्होंने टॉमहॉक शॉट से अपना पांचवां गोल कर मैच समाप्ति से पांच मिनट पहले बैलाडीला बुल्स को 5-4 की बढ़त दिला दी।
    हालांकि, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने अंतिम क्षणों तक संघर्ष जारी रखा। मैच खत्म होने से दो मिनट पहले मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम ने स्कोर 5-5 कर दिया। इसके बाद कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ।
    पांच गोल करने वाले जसकरण सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। ड्रॉ के बाद बैलाडीला बुल्स दो अंकों के साथ अंक तालिका में चौथे और संस्कारधानी स्ट्राइकर्स एक अंक के साथ पांचवें स्थान पर है। दोनों टीमों को अब भी पहली जीत का इंतजार है। मुकाबला देखने विधायक धरमलाल कौशिक, सारडा के हेड ऑफ ऑपरेशंस मनोज शाह और छत्तीसगढ़ जूडो संघ के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी भी मौजूद रहे।

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