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रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को हुनर के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। इसी योजना का लाभ लेकर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम मोहला की निवासी श्रीमती नीलिमा देवांगन ने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। आज वे घर से ही सफल सिलाई व्यवसाय संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की आय में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज, मोहला में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत नीलिमा ने टेलरिंग ट्रेड का निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि सहेलियों से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण में प्रवेश लिया और पूरी मेहनत से सिलाई-कढ़ाई, आधुनिक मशीन संचालन, परिधानों की कटिंग एवं सिलाई सहित व्यवसाय से जुड़े व्यावहारिक और तकनीकी कौशल सीखे। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनके हुनर को निखारने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाया।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नीलिमा ने नौकरी का इंतजार करने के बजाय स्वयं का स्वरोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से सिलाई का कार्य प्रारंभ किया और आज महिलाओं एवं बच्चों के विभिन्न प्रकार के परिधानों की सिलाई कर रही हैं। स्वरोजगार के पहले ही महीने से उन्हें ₹5,000 से ₹6,000 प्रतिमाह की नियमित आय होने लगी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया।
नीलिमा देवांगन का कहना है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने उन्हें केवल एक रोजगारपरक कौशल ही नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। अब उनका लक्ष्य अपने सिलाई व्यवसाय का विस्तार कर अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ना है।
अपनी सफलता का श्रेय नीलिमा ने कौशल विकास विभाग, जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज मोहला और जिला प्रशासन को देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रही है तथा हजारों लोगों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।
महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार; 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' योजनाओं पर दिया जोर
रायपुर / शौर्यपथ / कोण्डागांव जिले के मर्दापाल में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने शनिवार को नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन एवं महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन तथा 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन को उन्होंने ग्रामीणों को समर्पित करते हुए इसे गांव के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महतारी सदन बनेगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र
लोकार्पण के बाद मंत्री श्री कश्यप ने बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों और आय में आए बदलाव की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
इस अवसर पर श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
फलदार पौधों और पशुपालन को अपनाने की अपील
वन मंत्री ने महिलाओं से फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और मेहनत के साथ इन गतिविधियों को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रीमती कौशल्या कोर्राम, श्रीमती जयमती कश्यप, श्री रामूराम कोर्राम, श्री रामचन्द्र कश्यप, श्री रामकुमार कोर्राम, श्री रमेश सेठिया, श्री आसमन कोर्राम, श्री लक्ष्मीकांत बेलसरिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री विनय सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शौर्यपथ की नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन और महतारी सदन जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल भवन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। यदि इन केंद्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए तो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता भी सशक्त होगी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील नेतृत्व एवं वन एवं प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस अभियान के तहत करीब 1,200 बच्चों को पुनः विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
कलेक्टर श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से पहचान की गई। इसके बाद उन्हें आवासीय पोर्टा केबिन विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की नई शुरुआत कराई गई है।
खेल-खेल में लौट रहा स्कूल का भरोसा
वर्षों से स्कूल से दूर रहे बच्चों को सीधे पढ़ाई में शामिल करने के बजाय पहले उन्हें विद्यालय के माहौल से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टेलीविजन आधारित गतिविधियां और शैक्षणिक भ्रमण जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और रुचि विकसित हो सके।
90 दिन का विशेष ब्रिज कोर्स
बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को मजबूत करने के लिए 90 दिवसीय विशेष ब्रिज कोर्स संचालित किया जा रहा है। इस दौरान भाषा, लेखन, पठन और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बच्चे नियमित पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें।
मूल्यांकन के बाद तय होगी कक्षा
ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के परिणाम के आधार पर उनकी सीखने की क्षमता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्षों बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा विद्यालय लौट रहे हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित देखभाल और बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों—डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों—की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहजता से विद्यालयी वातावरण में ढल सकें।
शौर्यपथ की नजर
बीजापुर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 1200 बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी शाला त्यागी बच्चों को वापस विद्यालय तक लाने के लिए यह एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
स्वच्छ अस्पताल के दावों की खुली पोल, नगरी सिविल अस्पताल में गंदगी और लापरवाही का बोलबाला
गुटखे से सने शौचालय, गंदे पेयजल केंद्र और खुले बिजली बोर्ड... क्या ऐसे मिलेगा बेहतर इलाज?
शौर्यपथ विशेष
धमतरी -जिले के वनांचल क्षेत्र का सबसे प्रमुख शासकीय स्वास्थ्य केंद्र नगरी सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। यह अस्पताल सिहावा, नगरी सहित दर्जनों दूरस्थ आदिवासी गांवों के हजारों लोगों के लिए उपचार का एकमात्र बड़ा केंद्र है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल की बदहाल स्वच्छता और लापरवाही मरीजों को स्वस्थ करने के बजाय संक्रमण और दुर्घटना के खतरे के बीच रहने को मजबूर कर रही है।
अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत सामने आ जाती है। मरीजों और उनके परिजनों के उपयोग के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना भी मुश्किल हो गया है। टॉयलेट सीट और मूत्रालय गुटखे की पीक से पूरी तरह सने हुए हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैली रहती है। वहीं खिड़कियों पर गुटखे के दाग और जली हुई सिगरेट के टुकड़े पड़े हुए दिखाई देते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में तंबाकू और धूम्रपान के ऐसे निशान यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर अस्पताल परिसर में निगरानी की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है।
मरीजों के लिए लगाए गए शुद्ध पेयजल वाटर फ्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। जिस स्थान से मरीजों को स्वच्छ पानी मिलना चाहिए, वहां गंदगी का आलम है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए बर्तन धोने के उद्देश्य से लगाया गया अलग नल लंबे समय से बंद पड़ा है। मजबूरी में लोग पीने के पानी वाले स्थान पर ही टिफिन और बर्तन धो रहे हैं तथा वहीं जूठा भोजन भी फेंक रहे हैं। इससे न केवल पेयजल स्थल की स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में ही स्वच्छता के मूलभूत मानकों का पालन नहीं होगा तो मरीज आखिर स्वस्थ कैसे होंगे?
अस्पताल की एक और गंभीर लापरवाही कुपोषण आहार कक्ष में देखने को मिली। यहां छोटे बच्चों के उपचार और पोषण की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इसी कमरे में लगे कई इलेक्ट्रिकल बोर्ड और स्विच खुले हुए तथा बाहर निकले हुए दिखाई दे रहे हैं। यहां भर्ती छोटे-छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। यदि खेलते-खेलते किसी बच्चे का हाथ खुले बिजली के स्विच या बोर्ड तक पहुंच जाए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इतनी गंभीर सुरक्षा खामी के बावजूद जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं जाना चिंता का विषय है।
सरकार एक ओर स्वच्छ अस्पताल, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर नगरी सिविल अस्पताल की तस्वीरें इन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही हैं। जिस अस्पताल में मरीज बीमारी से राहत पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां गंदगी, अव्यवस्था और असुरक्षित माहौल उनका स्वागत कर रहा है। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो किसी दिन संक्रमण फैलने या बिजली से जुड़ी दुर्घटना जैसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, शौचालयों की तत्काल सफाई कराई जाए, बंद पड़े नलों को चालू किया जाए, पेयजल स्थल को पूरी तरह स्वच्छ रखा जाए, अस्पताल परिसर में गुटखा और धूम्रपान पर सख्ती से रोक लगाई जाए तथा कुपोषण कक्ष में खुले पड़े बिजली के बोर्ड और स्विच की तत्काल मरम्मत कर मरीजों और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक कार्रवाई करते हैं या फिर वनांचल के मरीज इसी बदहाल व्यवस्था में इलाज कराने को मजबूर रहेंगे।
बालोद, छत्तीसगढ़ / शौर्यपथ संवाददाता। जिले में अवैध जुआ, सट्टा, शराब एवं गांजा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कोतवाली बालोद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम सिवनी में संचालित सट्टे के अड्डे का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने एक खाईवाल को रंगे हाथ गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सट्टा-पट्टी, डॉट पेन और ₹2,800 नगद जब्त किया है।
पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बोनीफॉस एक्का के पर्यवेक्षण तथा थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा के नेतृत्व में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष टीम गठित की गई है।
इसी अभियान के तहत पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, सिवनी के पास एक व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर खुलेआम सट्टा-पट्टी लिखकर लोगों से दांव लगवा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अनिल कुमार नेताम (38 वर्ष), पिता विष्णुराम नेताम, निवासी ग्राम सिवनी, थाना एवं जिला बालोद बताया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक सट्टा-पट्टी, एक डॉट पेन तथा ₹2,800 नगद बरामद किया गया।
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत वैधानिक कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया है।
कार्रवाई में इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, प्रधान आरक्षक दुर्योधन यादव, आरक्षक संजय सोनी, नागेश साहू, बनवाली साहू, महिला आरक्षक लक्ष्मी पटेल एवं पीएसआई आश्मा कुर्रे की विशेष भूमिका रही।
शौर्यपथ की नजर
सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम सट्टा संचालन कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। बालोद पुलिस की लगातार कार्रवाई यह संकेत देती है कि जिले में अवैध कारोबार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। पुलिस की सक्रियता से ऐसे अवैध धंधों पर अंकुश लगाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
बालोद / शौर्यपथ संवाददाता। जिले में अवैध शराब, जुआ और सट्टा कारोबार के खिलाफ बालोद पुलिस का विशेष अभियान लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन एवं जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारियों के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अभियान के तहत 24 जुलाई 2026 को पुलिस ने एक ही दिन में पांच प्रकरण दर्ज करते हुए अवैध कारोबार में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की।
मिशन नवचेतना के तहत शराब तस्कर गिरफ्तार
थाना बालोद पुलिस ने "मिशन नवचेतना" अभियान के तहत ग्राम सांकरा (ज.) भाठा स्थित बरगद पेड़ के पास दबिश देकर गोकरण ठाकुर (34 वर्ष), निवासी जगन्नाथपुर को अवैध शराब बिक्री करते हुए गिरफ्तार किया।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 22 अद्धी एवं 10 पौवा (कुल 6.300 लीटर) देशी प्लेन शराब, जिसकी कीमत ₹2,720 है, बरामद की। साथ ही घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल क्रमांक CG-07-LS-0613 भी जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹15,000 बताई गई है। आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने वालों पर भी कार्रवाई
अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थान पर शराब सेवन करते पाए जाने पर पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 36(च)(1) के तहत तीन व्यक्तियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की—
छगन लाल निषाद, निवासी चिचलगोंदी, थाना अर्जुन्दा
अमर सिंह (51 वर्ष), निवासी कसही, थाना लोहारा
लोमन कुमार कुंजाम (25 वर्ष), निवासी हितापठार, थाना मंगचुवा
सट्टा खिलाते आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार
थाना बालोद पुलिस ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सिवनी के पास सार्वजनिक स्थान पर सट्टा संचालित करते हुए अनिल कुमार नेताम (38 वर्ष), निवासी सिवनी को गिरफ्तार किया।
आरोपी के कब्जे से सट्टा-पट्टी, डॉट पेन तथा ₹2,800 नगद जब्त किया गया। उसके विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।
अवैध गतिविधियों पर जारी रहेगा अभियान
बालोद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब, जुआ, सट्टा एवं अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के विरुद्ध विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।
शौर्यपथ की नजर
बालोद पुलिस की लगातार कार्रवाई यह दर्शाती है कि जिले में अवैध कारोबार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। शराब तस्करी से लेकर सट्टा संचालन तक, पुलिस हर स्तर पर सक्रियता दिखा रही है। यदि यह अभियान इसी गति से जारी रहा तो अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद और मजबूत होगी।
धमतरी / शौर्यपथ / शीतला देवी शासकीय हाई स्कूल, घटुला में शनिवार को नवनिर्वाचित शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (एसएमडीसी) के शपथ ग्रहण समारोह एवं छत्तीसगढ़ शासन की सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत साइकिल वितरण कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, विद्यालय परिवार एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में नवगठित समिति के पदाधिकारियों ने विद्यालय के विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण हित में कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान समिति के अध्यक्ष डॉ. मकसूदन साहू एवं उपाध्यक्ष भाव प्रकाश देव सहित अन्य पदाधिकारियों ने विधिवत शपथ ग्रहण कर अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने नवगठित समिति को बधाई देते हुए विद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का आह्वान किया।
शपथ ग्रहण के बाद सरस्वती साइकिल वितरण योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं। अतिथियों ने कहा कि शासन की यह योजना बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिलेगी, उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ेगी तथा शिक्षा के प्रति उनका उत्साह और आत्मविश्वास भी मजबूत होगा। साइकिल पाकर छात्राओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल महामंत्री मोनू साहू, बीरेंद्र मिश्रा, धर्मेंद्र कोषरे, बिंदिया साहू, टिकेश्वरी नाग, विद्यालय के प्राचार्य राजेश कश्यप, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यालय स्टाफ, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए सभी के सहयोग से शीतला देवी शासकीय हाई स्कूल, घटुला को शिक्षा, संस्कार और उत्कृष्ट परिणामों का आदर्श केंद्र बनाने का संकल्प दोहराया।
ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, स्कूल बाउंड्री वॉल व सीसी रोड निर्माण का भी मिला आश्वासन
धमतरी / शौर्यपथ / जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत देवपुर में शनिवार को आयोजित समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने गांव को पहला पानी टैंकर समर्पित किया। लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा की जा रही मांग पूरी होने पर पूरे गांव में खुशी का माहौल रहा। ग्रामीणों ने इसे जल संकट से राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि वे जनता के सेवक हैं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना ही उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा इस पानी टैंकर के माध्यम से गांव में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों को समय पर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे ग्रामीणों की पानी की समस्या काफी हद तक दूर होगी।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता हर गांव और हर घर तक विकास पहुंचाना है। जनहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से पानी टैंकर की मांग की जा रही थी। अब गांव को अपना पहला पानी टैंकर मिलने से सार्वजनिक आयोजनों के लिए बाहर से किराये पर टैंकर मंगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
इस दौरान ग्रामीणों ने गांव के स्कूल में बाउंड्री वॉल निर्माण एवं सीसी रोड निर्माण की मांग भी जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष रखी। इस पर सार्वा ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पंचायतों को विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रस्ताव एवं प्रावधान के अनुसार देवपुर में भी विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम सरपंच आत्माराम नेताम ने की। इस अवसर पर उपसरपंच अनिल राय, भाजपा मंडल महामंत्री रूपेंद्र साहू, मीडिया प्रभारी रामगोपाल साहू, पूर्व सरपंच आरती ध्रुव, पूर्व उपसरपंच नीलम साहू, पंचायत सचिव संतोष ध्रुव, ग्रामीण अध्यक्ष खेमेंद्र साहू, भाजपा कार्यकर्ता हनी कश्यप, रवि भट्ट, वार्ड पंच श्रीमती रेशमी भरत, सुरेश कुमार, चंद्रिका साहू, अंजू निर्मलकर, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष चित्रांश नागवंशी, ग्राम पंचायत भीतररास के उपसरपंच सुनील यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
सभापति राजकुमार साहू ने सौरभ सिंह का मनाया जन्म दिवस
जांजगीर-चाम्पा / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष एवं अकलतरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सौरभ सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर जिला पंचायत जांजगीर-चाम्पा के सभापति राजकुमार साहू द्वारा सेवा एवं संवेदना का प्रेरणादायक कार्य किया गया। इस अवसर पर उन्होंने खोखरा स्थित वृद्धाश्रम एवं चाम्पा के कात्रेनगर स्थित कुष्ठ आश्रम में पहुँचकर फल वितरण किया तथा आश्रम में निवासरत बुजुर्गों एवं जरूरतमंदों से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस सेवा कार्य के माध्यम से समाज के प्रति संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों एवं जनसेवा का उत्कृष्ट संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए सौरभ सिंह को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। फल वितरण के दौरान नवल सिंह, युवराज, आचार्य अमित मिश्रा, लक्ष्मण साहू, रामाधीन राठौर, बृजेश सिंह, शैलेश यादव, लखन कुम्हार, रामरतन, मयंक, छल्ले देवांगन मौजूद थे।
पुल बनने से पहले ही टूटने लगा, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
धमतरी / शौर्यपथ / जिले के नगरी विकासखंड में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा गणेश घाट से देऊरपारा मार्ग पर गोवर्धन भाटा के समीप लगभग 1 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से बन रहे पुल के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माणाधीन पुल का बेस पहली ही हल्की जलधारा के दबाव में जगह-जगह से टूटकर टुकड़ों में बिखर गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार पुल निर्माण के तहत नदी में सरिया बिछाकर बेस तैयार किया गया था। अभी निर्माण कार्य जारी ही था कि नदी में पानी की हल्की धार आने पर बेस का हिस्सा कई स्थानों से उखड़कर टूट गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान ही पुल का आधार इतनी आसानी से क्षतिग्रस्त हो रहा है, तो भविष्य में भारी बारिश और बाढ़ के दौरान इसकी मजबूती पर गंभीर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले पुल में यदि शुरुआत में ही ऐसी स्थिति बन रही है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
क्षेत्रवासियों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय करते हुए पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते निर्माण में खामियों को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में यह पुल आम लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
अब देखना होगा कि लोक निर्माण विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल पहली ही बारिश में पुल के बेस के टूटने की घटना ने विभाग और ठेकेदार दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
