July 30, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम, कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा

    रायपुर, / कृषि विभाग द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। सरगुजा जिले के विकासखंड सीतापुर के ग्राम पेटला की कृषक श्रीमती एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती अपनाकर खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    कृषि विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के बाद एरिन भगत ने अपने खेतों में जीवामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट का नियमित उपयोग शुरू किया। विभाग द्वारा उन्हें जीवामृत तैयार करने के लिए विशेष ड्रम उपलब्ध कराया गया, जिसकी सहायता से वे गाय के मूत्र से जीवामृत तैयार करती हैं। वहीं, गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर खेतों में उपयोग कर रही हैं।

    एरिन भगत वर्तमान में पूरी तरह जैविक खेती कर रही हैं। साथ ही वे वर्मी कल्चर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद का उत्पादन भी कर रही हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता काफी कम हुई है, जिसके परिणामस्वरूप खेती की लागत में कमी आई है और उत्पादन प्रणाली अधिक टिकाऊ बनी है।

    उन्होंने बताया कि पहले रासायनिक उर्वरकों पर अधिक खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद के उपयोग से आर्थिक बचत हो रही है। इसके साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी हुई है, जिससे भविष्य में बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ी है। उनका मानना है कि जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती, जीवामृत निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा प्राकृतिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। विभाग के वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से जिले के किसान कम लागत, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की
    जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान
    मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।
    कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

    उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

    कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

    ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

    जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

    कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

    ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

    स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

    मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

    मुख्यमंत्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

    युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

    इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।

    दुर्ग में कार्यशाला संपन्न, वाराणसी से पवित्र माटी व जल लाकर प्रदेशभर के मंदिरों तक पहुंचाने की बनी रणनीति

    दुर्ग। संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों तथा 10 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की तैयारियों को लेकर भाजपा की महत्वपूर्ण कार्यशाला जिला भाजपा कार्यालय में संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय मुख्य अतिथि एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक अध्यक्षता में शामिल हुए। इस दौरान संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और कार्यक्रमों को बूथ स्तर तक सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।

    कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, विधायक ललित चंद्राकर, ईश्वर साहू, प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, महापौर अलका बाघमार, जिला महामंत्री दिलीप साहू और विनोद अरोरा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और बंधुत्व का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वाराणसी में संत रविदास का भव्य स्मारक बन रहा है। 27 जुलाई को भाजपा की विशेष टीम स्मारक स्थल से कलश में पवित्र माटी और जल लेकर छत्तीसगढ़ आएगी, जिसे प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और देवस्थलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक समरसता यात्राएं, विचार गोष्ठियां, स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, निबंध, चित्रकला एवं विचार-विमर्श प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि 10 से 15 अगस्त तक प्रदेशभर में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी तथा हर बूथ और हर घर पर तिरंगा फहराने का अभियान चलाया जाएगा।

    प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि यह अभियान केवल आयोजन नहीं, बल्कि संत रविदास के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने बताया कि 25 से 27 जुलाई तक सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक बन सके।

    जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने कहा कि संत रविदास की 650वीं जयंती भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है। उन्होंने बताया कि जिला से मंडल और बूथ स्तर तक कार्यक्रमों के संचालन के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है और सभी कार्यकर्ताओं से समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।

    कार्यशाला में भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

      भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र में जमीन खरीदी-बिक्री के हिसाब-किताब को लेकर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त कार, मोटरसाइकिल और धारदार हथियार भी जब्त कर लिए हैं। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

    पुलिस के अनुसार 25 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे प्रार्थी विनय कुमार सिंह अपने जीजा नरेंद्र सिंह और साथी रूपेश यादव के साथ देवभूमि लेआउट स्थित कार्यालय में जमीन के लेन-देन का हिसाब करने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद विजय मेनन और उसके साथियों से विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए धारदार हथियार और हाथ-मुक्कों से हमला कर दिया। हमले में नरेंद्र सिंह सहित अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि नरेंद्र सिंह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना की शिकायत पर थाना मोहन नगर में मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त कार क्रमांक CG 07 CP 6008, एक मोटरसाइकिल और धारदार हथियार बरामद किए गए।

    विवेचना के दौरान पुलिस को घटना के पूर्व नियोजित षड्यंत्र और सामूहिक अपराध से जुड़े साक्ष्य भी मिले। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 109, 115(2), 296, 351(3), 61(2) एवं 111 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के अनुसार फरार दो आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि भूमि, वित्तीय अथवा व्यक्तिगत विवादों का समाधान कानून के दायरे में रहकर करें। कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना या डायल-112 पर दें।

    गिरफ्तार आरोपी
    विक्की सिंह (41 वर्ष), निवासी सुपेला, भिलाई
    रंजीत कुमार सिंह (43 वर्ष), निवासी हुडको, भिलाई
    रोशन लाल साहू (44 वर्ष), निवासी गौरा चौक, मोहन नगर, दुर्ग
    पप्पू कुमार सिंह (39 वर्ष), निवासी सेक्टर-7, भिलाई
    तिलग मेलल रम (40 वर्ष), निवासी हाउसिंग बोर्ड, भिलाई

     

    राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर किया इस्तीफा, छात्रों के नाम संदेश में बोले धर्मेंद्र प्रधान—'युवाओं की आकांक्षाओं का हमेशा रहेगा सम्मान'

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्रालय NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में छात्रों के आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे समय में सरकार ने मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंपते हुए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।

    इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान

    अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।

    प्रधान ने कहा कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर पूरा विश्वास है और देश के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का उन्होंने हमेशा सम्मान किया है। उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

    NEET विवाद से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन

    देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालिया आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होते ही पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।

    इसी बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।

    अब सबकी नजर शिक्षा मंत्रालय की नई दिशा पर

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालना होगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में नई प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    पोषण वाटिका, न्योता भोजन और पौधारोपण से बच्चों को मिली व्यवहारिक शिक्षा, मध्यान्ह भोजन में शामिल होंगी ताजी सब्जियां

    रायपुर / छत्तीसगढ़ में विद्यालयों को शिक्षा के साथ पोषण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का केंद्र बनाने की दिशा में सूरजपुर जिले ने बैगलेस डे पर उल्लेखनीय पहल की। 

    जिले के लगभग 500 प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ पोषण वाटिका निर्माण, न्योता भोजन, अतिरिक्त पूरक पोषण आहार वितरण तथा "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का आयोजन किया गया। इस अभिनव पहल में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

    कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत विद्यालय परिसरों में सेमी, लौकी, बरबट्टी, खीरा, तरोई सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का रोपण किया गया। इन पोषण वाटिकाओं में तैयार होने वाली ताजी सब्जियों का उपयोग प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत मध्यान्ह भोजन में किया जाएगा। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने के साथ प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और पोषण के प्रति व्यवहारिक समझ भी विकसित होगी।

    बैगलेस डे के अवसर पर अनेक विद्यालयों में "न्योता भोजन" का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने बच्चों के लिए फल, मिठाई एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया। वहीं "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया और पौधों की देखभाल का संकल्प लिया गया।

    जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती लता बेक ने कहा कि बैगलेस डे केवल पुस्तकों से अलग एक दिन नहीं, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी कौशल, सामुदायिक सहयोग, श्रम का सम्मान और प्रकृति से जुड़ाव सिखाने का प्रभावी माध्यम है। सूरजपुर का यह नवाचार शिक्षा, पोषण और जनसहभागिता के समन्वित मॉडल के रूप में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

    रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को हुनर के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। इसी योजना का लाभ लेकर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम मोहला की निवासी श्रीमती नीलिमा देवांगन ने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। आज वे घर से ही सफल सिलाई व्यवसाय संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की आय में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

    जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज, मोहला में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत नीलिमा ने टेलरिंग ट्रेड का निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि सहेलियों से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण में प्रवेश लिया और पूरी मेहनत से सिलाई-कढ़ाई, आधुनिक मशीन संचालन, परिधानों की कटिंग एवं सिलाई सहित व्यवसाय से जुड़े व्यावहारिक और तकनीकी कौशल सीखे। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनके हुनर को निखारने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

    प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नीलिमा ने नौकरी का इंतजार करने के बजाय स्वयं का स्वरोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से सिलाई का कार्य प्रारंभ किया और आज महिलाओं एवं बच्चों के विभिन्न प्रकार के परिधानों की सिलाई कर रही हैं। स्वरोजगार के पहले ही महीने से उन्हें ₹5,000 से ₹6,000 प्रतिमाह की नियमित आय होने लगी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया।

    नीलिमा देवांगन का कहना है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने उन्हें केवल एक रोजगारपरक कौशल ही नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। अब उनका लक्ष्य अपने सिलाई व्यवसाय का विस्तार कर अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ना है।

    अपनी सफलता का श्रेय नीलिमा ने कौशल विकास विभाग, जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज मोहला और जिला प्रशासन को देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रही है तथा हजारों लोगों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।

    महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार; 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' योजनाओं पर दिया जोर

    रायपुर / शौर्यपथ / कोण्डागांव जिले के मर्दापाल में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने शनिवार को नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन एवं महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन तथा 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन को उन्होंने ग्रामीणों को समर्पित करते हुए इसे गांव के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    महतारी सदन बनेगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र

    लोकार्पण के बाद मंत्री श्री कश्यप ने बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों और आय में आए बदलाव की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

    इस अवसर पर श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    फलदार पौधों और पशुपालन को अपनाने की अपील

    वन मंत्री ने महिलाओं से फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और मेहनत के साथ इन गतिविधियों को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रीमती कौशल्या कोर्राम, श्रीमती जयमती कश्यप, श्री रामूराम कोर्राम, श्री रामचन्द्र कश्यप, श्री रामकुमार कोर्राम, श्री रमेश सेठिया, श्री आसमन कोर्राम, श्री लक्ष्मीकांत बेलसरिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री विनय सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    शौर्यपथ की नजर

    ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन और महतारी सदन जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल भवन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। यदि इन केंद्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए तो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता भी सशक्त होगी।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील नेतृत्व एवं वन एवं प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस अभियान के तहत करीब 1,200 बच्चों को पुनः विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।

    कलेक्टर श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से पहचान की गई। इसके बाद उन्हें आवासीय पोर्टा केबिन विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की नई शुरुआत कराई गई है।

    खेल-खेल में लौट रहा स्कूल का भरोसा

    वर्षों से स्कूल से दूर रहे बच्चों को सीधे पढ़ाई में शामिल करने के बजाय पहले उन्हें विद्यालय के माहौल से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टेलीविजन आधारित गतिविधियां और शैक्षणिक भ्रमण जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और रुचि विकसित हो सके।

    90 दिन का विशेष ब्रिज कोर्स

    बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को मजबूत करने के लिए 90 दिवसीय विशेष ब्रिज कोर्स संचालित किया जा रहा है। इस दौरान भाषा, लेखन, पठन और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बच्चे नियमित पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें।

    मूल्यांकन के बाद तय होगी कक्षा

    ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के परिणाम के आधार पर उनकी सीखने की क्षमता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्षों बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा विद्यालय लौट रहे हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित देखभाल और बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

    अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश

    जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों—डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों—की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहजता से विद्यालयी वातावरण में ढल सकें।

    शौर्यपथ की नजर

    बीजापुर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 1200 बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी शाला त्यागी बच्चों को वापस विद्यालय तक लाने के लिए यह एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

    स्वच्छ अस्पताल के दावों की खुली पोल, नगरी सिविल अस्पताल में गंदगी और लापरवाही का बोलबाला
    गुटखे से सने शौचालय, गंदे पेयजल केंद्र और खुले बिजली बोर्ड... क्या ऐसे मिलेगा बेहतर इलाज?

    शौर्यपथ विशेष
    धमतरी -जिले के वनांचल क्षेत्र का सबसे प्रमुख शासकीय स्वास्थ्य केंद्र नगरी सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। यह अस्पताल सिहावा, नगरी सहित दर्जनों दूरस्थ आदिवासी गांवों के हजारों लोगों के लिए उपचार का एकमात्र बड़ा केंद्र है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल की बदहाल स्वच्छता और लापरवाही मरीजों को स्वस्थ करने के बजाय संक्रमण और दुर्घटना के खतरे के बीच रहने को मजबूर कर रही है।

    अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत सामने आ जाती है। मरीजों और उनके परिजनों के उपयोग के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना भी मुश्किल हो गया है। टॉयलेट सीट और मूत्रालय गुटखे की पीक से पूरी तरह सने हुए हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैली रहती है। वहीं खिड़कियों पर गुटखे के दाग और जली हुई सिगरेट के टुकड़े पड़े हुए दिखाई देते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में तंबाकू और धूम्रपान के ऐसे निशान यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर अस्पताल परिसर में निगरानी की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है।

    मरीजों के लिए लगाए गए शुद्ध पेयजल वाटर फ्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। जिस स्थान से मरीजों को स्वच्छ पानी मिलना चाहिए, वहां गंदगी का आलम है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए बर्तन धोने के उद्देश्य से लगाया गया अलग नल लंबे समय से बंद पड़ा है। मजबूरी में लोग पीने के पानी वाले स्थान पर ही टिफिन और बर्तन धो रहे हैं तथा वहीं जूठा भोजन भी फेंक रहे हैं। इससे न केवल पेयजल स्थल की स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में ही स्वच्छता के मूलभूत मानकों का पालन नहीं होगा तो मरीज आखिर स्वस्थ कैसे होंगे?

    अस्पताल की एक और गंभीर लापरवाही कुपोषण आहार कक्ष में देखने को मिली। यहां छोटे बच्चों के उपचार और पोषण की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इसी कमरे में लगे कई इलेक्ट्रिकल बोर्ड और स्विच खुले हुए तथा बाहर निकले हुए दिखाई दे रहे हैं। यहां भर्ती छोटे-छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। यदि खेलते-खेलते किसी बच्चे का हाथ खुले बिजली के स्विच या बोर्ड तक पहुंच जाए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इतनी गंभीर सुरक्षा खामी के बावजूद जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं जाना चिंता का विषय है।

    सरकार एक ओर स्वच्छ अस्पताल, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर नगरी सिविल अस्पताल की तस्वीरें इन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही हैं। जिस अस्पताल में मरीज बीमारी से राहत पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां गंदगी, अव्यवस्था और असुरक्षित माहौल उनका स्वागत कर रहा है। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो किसी दिन संक्रमण फैलने या बिजली से जुड़ी दुर्घटना जैसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

    क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, शौचालयों की तत्काल सफाई कराई जाए, बंद पड़े नलों को चालू किया जाए, पेयजल स्थल को पूरी तरह स्वच्छ रखा जाए, अस्पताल परिसर में गुटखा और धूम्रपान पर सख्ती से रोक लगाई जाए तथा कुपोषण कक्ष में खुले पड़े बिजली के बोर्ड और स्विच की तत्काल मरम्मत कर मरीजों और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक कार्रवाई करते हैं या फिर वनांचल के मरीज इसी बदहाल व्यवस्था में इलाज कराने को मजबूर रहेंगे।

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