
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के दिनों में जूस का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. लेकिन किस चीज से बने जूस का सेवन करना है इस बात का खास ख्याल रखें. क्योंकि कई चीजें ऐसी भी हैं जिनका सेवन आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. आज हम आपको एक ऐसे ही जूस के बारे में बता रहे हैं जिसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. कीवी एक स्वादिष्ट फल है ये स्वाद में हल्का खट्टा और मीठा होता है. गर्मियों के मौसम में कीवी के जूस के सेवन से शरीर को कई समस्याओं से बचाया जा सकता है. लेकिन इसे पीने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है. आप सुबह कीवी जूस का सेवन कर सकते हैं. कीवी को पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. भूरे रंग के छिलके वाला कीवी भीतर से मुलायम, हरे रंग का होता है. इसके भीतर काले रंग के छोटे-छोटे बीज मौजूद होते हैं. असल में कीवी दूसरे फलों की तुलना में थोड़ा महंगा होता है. कीवी में मौजूद विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन ई, फोलेट, पोटैशियम शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मददगार हैं.
कीवी जूस पीने के फायदे-
1. पाचन-
अगर आपको पेट से जुड़ी समस्याएं है तो आप कीवी के जूस का सेवन करें. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कब्ज की समस्या में राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं.
2. वजन घटाने-
कीवी के जूस में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-हाइपरटेंसिव के गुण पाए जाते हैं. जो मोटापे को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं.
3. ब्लड प्रेशर-
कीवी के जूस में मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है. ये ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है.
4. आंखों-
गर्मी के मौसम में आंखों से जुड़ी समस्याएं काफी देखी जाती है. क्योंकि धूल-धूप के कारण आंखों में खुजली व कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं. आंखों को हेल्दी रखने के लिए कीवी के जूस का सेवन कर सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना यानी वैशाख के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस साल वैशाख माह 24 अप्रैल से लेकर 23 मई तक रहने वाला है. वैशाख का महीना भगवान विष्णु का प्रिया महीना कहा जाता है. भक्त इस माह में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. कहा जाता है कि वैशाख के महीने में रोजाना कुछ छोटे-छोटे उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. तो चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना वो कौन से उपाय हैं जिन्हें करके आप भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
वैशाख में करें ये उपाय
'ॐ माधवय नमः', यह वो मंत्र है जो ज्योतिषाचार्य वैशाख के महीने में हर रोज 11 बार जपने की सलाह देते हैं. कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं.
जो लोग पितृदोष से परेशान है उनके लिए वैशाख का महीना बहुत ही खास माना गया है. कहा जाता है कि इस माह तेल, अनाज, फल और जल का दान करना चाहिए. इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
वैशाख के महीने में गर्मी की तपिश बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, इसलिए इस माह प्यासे पशु पक्षियों के लिए जल का प्रबंध करने से पुण्य मिलता है.
प्यासे लोगों को पानी पिलाना अपने आप में पुण्य का काम है. वैशाख के महीने में भीषण गर्मी पड़ती है. कहते हैं इस माह की एकादशी पर प्यासे लोगों को पानी पिलाने से पुण्य मिलता है. प्यासे को पानी पिलाना हजारों राजसूय यज्ञ के समान पुण्य मिलता है.
वैशाख के महीने में अन्न का दान करने या फिर पंखों का दान करना शुभ माना जाता है. आप इस माह में जूते चप्पलों का भी दान कर सकते हैं. ऐसा करने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं और फल की प्राप्ति होती है.
वैशाख माह की अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है. इस दिन सोने चांदी के आभूषण या नई चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म ग्रंथों और पुराणों में भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. श्री हरि यानि विष्णु भगवान त्रिदेवों में एक माने जाते हैं और उनकी विधिवत पूरा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु के पूजन के लिए एकादशी की तिथि को श्रेष्ठ माना गया है. वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है. इस एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. कई लोग इस तिथि को वैशाख एकादशी भी कहते हैं. वैशाख एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान से विष्णु देव की पूजा करने और उपवास करने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मकता का नाश होता है, ऐसी मान्यता है. इस वर्ष यह एकादशी 4 मई को पड़ रही है. आइए जानते हैं कि वरुथिनी एकादशी का महत्व और इस दिन किस प्रकार से श्री हरि की पूजा करनी चाहिए. साथ ही यह भी जानते हैं कि विष्णुदेव को इस दिन किस प्रकार का भोग-प्रसाद अर्पण करना चाहिए, ताकि उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो सके.
किस समय है पूजा का मूहुर्त
जिस भक्त पर नारायण की कृपा हो उसे संसार की अन्य वस्तु की आवश्यता ही नहीं होती, ऐसा माना जाता है. नारायण को प्रसन्न करने के लिए वरुथिनी एकदशी का दिन श्रेष्ठ है. वरुविथी का अर्थ सुरक्षा होता है यानी इस दिन जो उचित रूप से नारायण का पूजन करेगा उसे स्वयं नारायण की कृपा और सुरक्षा प्राप्त होती है. एकादशी की तिथि तो 3 मई को रात्रि 11.24 से आरंभ हो जाएगी. जबकि अगले दिन यानि 4 मई को रात को 8.38 को इस तिथि का समापन होगा. ऐसे में व्रत-उपवास रखने के लिए 4 मई श्रेष्ठ रहेगी. उपवास रखकर नारायण का पूजन करने वाले भक्तों के लिए पूजा का मुहूर्त सुबह 7.18 से 8 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इस दौरान पूजा करने से अच्छे पुण्य-लाभ की प्राप्ति होगी.
कैसे हो पूजन और किसका लगाएं भोग
इस व्रत को रखने वाले सभी श्रद्धालु सुबह स्नान आदि से निवृत होकर पूजन के मुहूर्त पर सच्चे श्रद्धाभाव से श्रीहरि का पूजन करें. ध्यान रहे कि भगवान विष्णु को तुलसी पत्र काफी प्रिय होता है. ऐसे में अपने आराध्य देव को तुलसी पत्र अवश्य अर्पण करें. तुलसी के पत्ते के अभाव में यह पूजा अधूरी ही मानी जाती है. इसके अलावा पंचामृत का भोग भी नारायण को अतिप्रिय होता है. इसका भोग लगाने से भी श्री हरि प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता है. पूजन के दौरान विष्णु जी की आरती और श्री हरि के मंत्रों का जप करें. पूजा के बाद सभी परिजनों और इष्ट मित्रों को प्रसाद का बातें. व्रत का पारण अगले दिन यानी 5 मई को करें. पारण के लिए सुबह 5.37 से 8.17 के बीच का समय श्रेष्ठ रहेगा.
व्रत टिप्स /शौर्यपथ / गंगा दशहरा पर भारत की पवित्र नदी और माता की उपमा धारण करने वाली गंगा माता की पूजा-अर्चना की जाती है. हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है. गंगा दशहरा के दिन भक्त ब्रह्म बेला में गंगा स्नान के बाद विधि-विधान से मां गंगा की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इसी दिन माता गंगा का धरती लोक पर अवतरण हुआ था और देव लोक से धरती पर आई इस पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य जाति के सभी पाप धुल जाते हैं. आइए जानते हैं इस वर्ष कब मनाया जाएगा गंगा दशहरा और क्या है इसका महत्व.
गंगा दशहरा की तिथि |
इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 16 जून को देर रात 2 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 17 जून को ब्रह्म बेला 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगी. गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा.
गंगा दशहरा को योग
इस वर्ष गंगा दशहरा को कुछ खास योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन संध्या 9 बजकर 3 मिनट तक वरीयान योग है. इसके बाद परिध योग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग , अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है. इन योगों में गंगा स्नान और दान-पुण्य से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
गंगा दशहरा का महत्व
मान्यतानुसार राजा भगीरथ के कठोर तपस्या करने से गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई हैं. शास्त्रों में वर्णन है कि गंगा स्नान करने से पाप, रोग, दोष और विपत्तियों से मुक्ति मिल जाती है. गंगा दशहरा के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने का महत्व और बढ़ जाता है. माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से उन दस मुख्य पापों से मुक्ति मिल जाती है जो पुण्य प्राप्ति में बाधक होते हैं. इनमें दैहिक पाप, वाणी पाप और मानसिक पाप शामिल हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत का बहुत महत्व होता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शिव भगवान की आराधना जो भी भक्त सच्चे भक्ति भाव से करते हैं उनके सभी पापों का नाश होता है. पंचांग के अनुसार, हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. कहते हैं कि इस व्रत को जो भी भक्त रखते हैं उनके घर में कभी भी किसी चीज की कमी नहीं रहती. जानिए प्रदोष व्रत का क्या महत्व है और क्या है इसकी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट.
रवि प्रदोष व्रत 2024 का शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 मई 2024 दिन रविवार को शाम 5:41 मिनट से शुरू होगी. रवि प्रदोष व्रत का मुहूर्त अगले दिन 6 में 2024 सोमवार को दोपहर 2:40 तक रहेगा. उदयातिथि को देखते हुए इस बार प्रदोष व्रत 5 मई 2024 के दिन रखा जाएगा.
प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री लिस्ट
अक्षत
कलावा
फूल फल
सफेद मिठाई
लाल या पीला गुलाल
सफेद चंदन
धतूरा
भांग
धागा
बेलपत्र
कपूर
धूपबत्ती
नया वस्त्र
हवन सामग्री
पंचमेवा
शिव जी का पूजन मंत्र
श्री महेश्वराय नम:
।। ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।।
शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।
रवि प्रदोष व्रत पर करें यह उपाय
रवि प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल और पंचामृत से पूरे भक्ति भाव से अभिषेक करें. इसके साथ ही पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें. भोलेनाथ को पूजा में बेलपत्र जरूर अर्पित करें क्योंकि ये भगवान शिव को अतिप्रिय है और इसके बिना शंकर जी की पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस उपाय को प्रदोष व्रत वाले दिन करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी प्रकार की बाधाओं का नाश होता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / गर्मियां आते ही त्वचा की खास देखभाल की जरूरत पड़ने लगती है क्योंकि तेज धूप और पसीने से त्वचा और खासकर चेहरे का बुरा हाल हो जाता है. जो लोग धूप में लंबे समय तक रहते हैं, वो सन टैन का शिकार हो जाते हैं. टैनिंग की वजह से चेहरा सांवला पड़ जाता है और चेहरे की रौनक खो जाती है.चेहरे के साथ साथ धूप के संपर्क में आने वाले हाथ पैर, गर्दन आदि भी टैनिंग की वजह से काले दिखने लगते हैं. ऐसे में सनस्क्रीन लगाने के साथ साथ आपको कुछ घरेलू उपाय भी करने चाहिए ताकि आपकी पर टैनिंग का असर कम हो सके और आपका चेहरा गर्मी में भी खिला खिला रहे. इसके लिए आज हम आपको ऐसा नुस्खा बता रहे हैं जो बिलकुल नेचुरल है और टैनिंग का असर कम करके ये आपको चेहरे की रौनक लौटा देगा.
आलू के रस से दूर होगी टैनिंग
आलू त्वचा के लिए काफी फायदेमंद कहा जाता है. खासकर इसके रस में कई सारे गुण होते हैं जो त्वचा को फायदा पहुंचाते हैं. टैनिंग दूर करने के लिए आलू का रस काफी इफेक्टिव कहा जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट के साथ साथ कई सारे विटामिन और मिनिरल्स भी होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ बनाने के साथ साथ उसकी खोई हुई रौनक वापस ले आते हैं. आलू में एंटी एजिंग गुण होते हैं और इसके साथ साथ इसके रस को चेहरे पर लगाने से दाग धब्बे और पिगमेंटेशन भी दूर होती है.
आलू और मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक
आलू को कद्दूकस करके इसका रस निकाल लीजिए. कटोरी में इस रस के साथ थोड़ा सा मुल्तानी मिट्टी का पाउडर मिलाएं. इसे अच्छी तरह मिक्स करके पैक बना लें और चेहरा धोकर इसे लगा लीजिए.पंद्रह बीस मिनट तक सूखने दें और उसके बाद चेहरा धो लें. सप्ताह में दो से तीन बार इस पैक को लगाने पर आपके चेहरे की टैनिंग दूर हो जाएगी और चेहरा खिल उठेगा.
आलू का रस और दूध भी करेगा फायदा
आलू के रस में दूध मिलाकर लगाने से भी आपकी स्किन की टैनिंग दूर हो जाएगी. इससे ना केवल टैनिंग दूर होगी बल्कि चेहरे पर लगे दाग धब्बे, पिगमेंटेशन के निशान भी दूर हो जाएंगे. इससे आपकी त्वचा का रंग साफ होगा और स्किन स्मूद हो जाएगी. आलू के रस में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाएं और चेहरे पर रुई की मदद से लगा लें. कुछ देर त्वचा पर लगा रहने दे और फिर फेस को धो लें. इससे आपका फेस चमक उठेगा और चेहरे पर जमा हर तरह की गंदगी भी दूर हो जाएगी.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / अंडे का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन कई लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि क्या गर्मी के मौसम में अंडे का सेवन सेफ है या नहीं. दरअसल अंडे की तासीर गर्म होती है. अंडा आपके शरीर को विटामिन और खनिज प्रदान करता है, जिससे हमारा शरीर ज्यादा ऊर्जावान रहता है. गर्मियों में अंडा खाना चाहिए या नहीं, गर्मी के मौसम में एक दिन में कितने अंडे खा सकते हैं. गर्मी में अंडे खाने के क्या फायदे होते हैं. अगर आप भी इन्हीं सवालों के जवाब जानना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं.
आपको बता दें कि कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि आप दिन में 2 से 3 अंडे खा सकते हैं. वहीं अगर आप वर्कआउट करते हैं, तो कोशिश करें अंडे का सिर्फ सफेद हिस्सा ही खाएं. योक वाला पीला हिस्सा ज्यादा गर्म होता है उसे खाने से बचें. अगर आप 3 अंडे से ज्यादा खाते हैं तो गर्मियों में अपच, बेचैनी और आंतों की समस्या हो सकती है. इसलिए इस मौसम में सोच समझ कर ही अंडे का सेवन करें.
अंडा खाने के फायदे-
अंडे में मौजूद विटामिन ए और डी हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार है. अंडा विटामिन बी 2 का बड़ा सोर्स है, इनमें वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती हैं. अंडे के सफेद हिस्से में सेलेनियम, विटामिन डी, बी 6, बी 12 और जिंक, आयरन जैसे खनिज होते हैं जो शरीर की ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद करते है. थकान और कमजोरी दूर होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार आता है. अंडे की जर्दी यानी पीले हिस्से में भरपूर मात्रा में कैलोरी और वसा होता है. जो कोलेस्ट्रॉल और वसा में घुलनशील विटामिन ए, डी, ई के स्रोत हैं. अंडा आपके मसल्स को बिल्ड करने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / कटहल का नाम बहुत लोगों की फेवरेट डिश में शामिल होता है. स्वाद से भरपूर कटहल को फाइटोन्यूट्रिएंट्स, कार्बोहाइड्रेट, इलेक्ट्रोलाइट्स, फाइबर, विटामिन और मिनिरल्स सहित तमाम तरह के पोषक का खजाना माना जाता है. जिसके सेवन से कई तरह की बीमारियों को मात दी जा सकती है. लेकिन कई बार कुछ मामलों में कटहल खाने से सेहत को कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. तो आइये जानते हैं कटहल कब और किन लोगों के लिए खाना नुकसानदायक हो सकता है.
इन लोगों को नहीं करना चाहिए कटहल का सेवन
एलर्जी की दिक्कत होने पर
एलर्जी की दिक्कत होने पर आपको कटहल का सेवन करने से बचना चाहिए. खासकर बिर्च पोलन एलर्जी होने पर कटहल से एकदम दूरी बनाकर रखनी चाहिए. बता दें कि बिर्च पोलन एलर्जी ऐसी एलर्जी है जो बसंत के मौसम में हवा के जरिए फैलती है.
डायबिटीज होने पर
डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कटहल का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर रहता है. दरअसल कटहल खाने से बॉडी में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने का खतरा बना रहता है. जो शुगर पेशेंट के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
प्रेगनेंसी के दौरान
प्रेगनेंसी के दौरान कटहल का सेवन करने से भी महिलाओं को बचना चाहिए. माना जाता है कि प्रेगनेंसी में कटहल खाने से गर्भपात का रिस्क बना रहता है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण अभी सामने नहीं आया है.
सर्जरी के समय
कटहल का सेवन उन लोगों को भी नहीं करना चाहिए जिनकी कोई सर्जरी हुई है या फिर होने वाली है. जिन लोगों की सर्जरी होने वाली है, उन लोगों के लिए तकरीबन दो सप्ताह पहले से कटहल का सेवन बंद कर देना बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
दवाओं का सेवन करने पर
अगर आप रोजाना किसी तरह की दवा का सेवन करते हैं, तो भी आपको डॉक्टर की सलाह के बाद ही कटहल का सेवन करना चाहिए. क्योंकि इससे आपको नींद की समस्या हो सकती है. इसके साथ ही ऐसे लोगों को भी कटहल से दूरी बनाकर रखना चाहिए जो खून सम्बन्धी किसी भी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /आज के समय में गलत खानपान, प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल के चलते सफेद बालों की समस्या खूब देखने को मिलती है. एक दौर था जब सफेद बाल की समस्या सिर्फ बुजुर्गों में देखी जाती थी. लेकिन आज के समय में ये समस्या युवा वर्ग में काफी देखी जा रही है. सफेद बालों को काला करने के लिए हममें से ज्यादातर लोग डाई, मेहंदी और हेयर डाई का प्रयोग करते हैं. लेकिन ये चीजें कुछ ही समय तक काम करती हैं. कई बार केमिकल्स का ज्यादा इस्तेमाल हमारे बालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. अगर आप बिना किसी नुकसान के बालों को काला करना चाहते हैं, तो नेचुरल चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. आज हम आपको किचन में मौजूद एक ऐसी चीज के बारे में बता रहे हैं जो आपके सफेद बालों को जड़ से काला कर सकती है. तो चलिए जानते हैं क्या है वो चीज.
सफेद बालों को काला करने के लिए चायपत्ती का ऐसे करें इस्तेमाल-
चाय पत्ती एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में हर दिन किया जाता है. हममें से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरूआत चाय या कॉफी के साथ करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि चाय पत्ती में अजवाइन का इस्तेमाल कर सफेद बालों को काला करने में मदद मिल सकती है. तो चलिए जानते हैं कैसे करें बालों पर इस्तेमाल.
कैसे करें अजवाइन और चायपत्ती का इस्तेमाल-
सफेद बालों को काला करने के लिए चाय और अजवाइन का इस्तेमाल कर सकते हैं. सबसे पहले आपको एक पैन में 1 गिलास पानी गर्म करना है. फिर इसमें चाय पत्ती और अजवाइन डालकर अच्छे से उबाल लें. फिर इसमें आंवला पाउडर डाल कर अच्छे से मिला लें. अब इसे बालों पर अच्छे से अप्लाई करें. फिर कुछ देर बाल बालों को पानी से धो लें. ऐसा आप हफ्ते में 2 बार कर सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना यानी वैशाख के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस साल वैशाख माह 24 अप्रैल से लेकर 23 मई तक रहने वाला है. वैशाख का महीना भगवान विष्णु का प्रिया महीना कहा जाता है. भक्त इस माह में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. कहा जाता है कि वैशाख के महीने में रोजाना कुछ छोटे-छोटे उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. तो चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना वो कौन से उपाय हैं जिन्हें करके आप भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
वैशाख में करें ये उपाय
'ॐ माधवय नमः', यह वो मंत्र है जो ज्योतिषाचार्य वैशाख के महीने में हर रोज 11 बार जपने की सलाह देते हैं. कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं.
जो लोग पितृदोष से परेशान है उनके लिए वैशाख का महीना बहुत ही खास माना गया है. कहा जाता है कि इस माह तेल, अनाज, फल और जल का दान करना चाहिए. इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
वैशाख के महीने में गर्मी की तपिश बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, इसलिए इस माह प्यासे पशु पक्षियों के लिए जल का प्रबंध करने से पुण्य मिलता है.
प्यासे लोगों को पानी पिलाना अपने आप में पुण्य का काम है. वैशाख के महीने में भीषण गर्मी पड़ती है. कहते हैं इस माह की एकादशी पर प्यासे लोगों को पानी पिलाने से पुण्य मिलता है. प्यासे को पानी पिलाना हजारों राजसूय यज्ञ के समान पुण्य मिलता है.
वैशाख के महीने में अन्न का दान करने या फिर पंखों का दान करना शुभ माना जाता है. आप इस माह में जूते चप्पलों का भी दान कर सकते हैं. ऐसा करने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं और फल की प्राप्ति होती है.
वैशाख माह की अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है. इस दिन सोने चांदी के आभूषण या नई चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
आस्था /शौर्यपथ / कुछ ही दिन में मई का माह शुरू होने वाला है. मई के माह में अक्षय तृतीया मनाया जाता है. अक्षय तृतीया को बहुत शुभ दिन माना जाता है और इस दिन शुभ कार्यों से लेकर शुभ धातुओं की खरीदारी का बहुत महत्व है. मई माह में अक्षय तृतीया के साथ और भी कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं. आइए जानते हैं मई में माह में कब और सा व्रत और त्योहार मनाया जाएगा। देख लें मई माह में आने वाले पूरे व्रत और त्योहार की लिस्ट ….
मई माह में आने वाले पूरे व्रत और त्योहार की लिस्ट
1 मई
मई माह के पहले दिन 1 मई को मासिक कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और मजदूर दिवस है
4 मई
4 मई को भगवान विष्णु को समर्पित बरुथिनी एकादशी है. इसी दिन वल्लभाचार्य जयंती भी मनाई जाएगी.
5 मई
5 मई को भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
6 मई
6 मई को मासिक शिवरात्रि और रबींद्रनाथ टैगोर जयंती है.
8 मई
08 मई को वैशाख अमावस्या है. इस दिन मासिक कार्तिगाई मनाई जाएगी. यह दिन भगवान शिव के ज्योत रूप की पूजा की जाती है।
10 मई
10 मई को परशुराम जयंती ममनाई जाएगी. परशुराम जयंती के दिन भगवान विष्णु के परशुराम अवतार की पूजा होती है. इसी दिन अक्षय तृतीया और मातंगी जयंती और रोहिणी व्रत रख्ख जाएगा.
11 मई
11 मई को विनायक चतुर्थी है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है.
12 मई
12 मई को शंकराचार्य जयंती, सूरदास जयंती, रामानुजन जयंती और मातृ दिवस है.
13 मई
13 मई को स्कन्द षष्ठी है
14 मई
14 मई को गंगा सप्तमी और वृषभ संक्रांति मनई जाएगी.
15 मई
15 मई को मासिक दुर्गाष्टमी और बगलामुखी जयंती है. इस दिन मां बगलामुखी की पूजा होती है.
16 मई
16 मई को सीता नवमी है. सीता नवमी को माता जानकी की पूजा आराधना होती है.
18 मई
18 मई को महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस है.
19 मई
19 मई को मोहिनी एकादशी और परशुराम द्वादशी मनाई जाएगी. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होता है.
20 मई
20 मई को प्रदोष व्रत है. इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है.
21 मई
21 मई को नरसिंह और छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाएगी.
23 मई
23 मई को वैशाख और बुद्ध पूर्णिमा है. इस दिन कूर्म जयंती मनाई जाएगी.
26 मई
26 मई को एकदन्त संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी और भगवान गणेश की पूजा होगी.
30मई
30 मई को कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. इस दिन काल भैरव देव की पूजा की जाएगी.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / हम सभी बाहर जाते हैं और पब्लिक टॉयलेट्स का इस्तेमाल करते हैं. चाहे ऑफिस जाना हो या फिर किसी कैफे में खाने या होटल में रहने जाएं, उन टॉयलेट्स का इस्तेमाल करना ही पड़ता है जिन्हें हमसे पहले कई लोग यूज कर चुके हैं. ऐसे में अक्सर ही कई तरह के सवाल मन में कौंधने लगते हैं, जैसे टॉयलेट सीट अगर ऊपर है तो उसे नीचे करने के लिए हाथ लगाएं या नहीं और फ्लश, फोसेट को छूना चाहिए या नहीं वगैरह वगैरह. ऐसे में यहां जानिए पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करने से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जो ना सिर्फ आपको इंफेक्शंस से बचाएंगी बल्कि किसी बड़ी बीमारी के खतरे को भी दूर रखेंगी.
पब्लिक टॉयलेट्स ऐसे करें इस्तेमाल
कई स्टडीज के मुताबिक, बैक्टीरिया पब्लिक टॉयलेट्स में कई-कई महीनों तक सर्वाइव कर सकते हैं. वहीं, पब्लिक टॉयलेट्स में तकरीबन 45 फीसदी ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो टॉयलेट में ही पनपते हैं और ना सिर्फ टॉयलेट सीट पर बल्कि सोप डिस्पेंसर तक से चिपके होते हैं. ऐसे में इंफेक्शंस से बचे रहने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है.
आप टॉयलेट सीट पर बैठने से ना घबराएं लेकिन उसे छूने से जरूर बचें. टॉयलेट सीट को अगर हाथ लगाना पड़ रहा है तो नंगे हाथों से सीट छूने के बजाए टीशू पेपर से सीट पकड़ें और हाथों को इसके बाद अच्छी तरह से धो लें. आप चाहे तो टॉयलेट सीट पर सैनिटाइजर छिड़क सकते हैं.
फ्लश करते समय भी आप टीशू पेपर का इस्तेमाल करें. इससे बैक्टीरिया त्वचा के संपर्क में नहीं आता है. वहीं, फोसेट का इस्तेमाल करने के बाद अपने हाथों को कम से कम 20 से 30 सैकंड के लिए अच्छे से धोएं. हाथों को धोने के बाद उन्हें सुखाकर ही बाहर निकलें. बैक्टीरिया गीले हाथों में तेजी से फैलता है.
कोशिश करें कि पब्लिक वॉशरूम में आप अपना सामान जमीन पर रखने के बजाय दरवाजे के हैंगर से टांग दें. इससे कीटाणु आपके सामान में नहीं चिपकेंगे. अगर कोई साथ में हो तो अपना सामान बाहर ही रखकर फिर टॉयलेट जाएं.
अगर आप रोजाना ही पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं तो अपने साथ सैनिटाइजर या हैंड डिसइंफेक्टैंट रख सकते हैं. इससे आप खुद अपने हाथों सो कीटाणु हटा लेंगे और इंफेक्शंस का खतरा भी कम होगा.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /वजन जब बढ़ता है तो पता नहीं लगता है लेकिन इसको कम करना बेहद मुश्किल होता है. डाइट से आप वजन को तो कम कर सकते हैं. लेकिन शरीर का एक पार्ट जिसे स्लिम फिट करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है वो होती है पेट के पास जमा चर्बी. पेट के पास जमा फैट को कम करना बेहद मुश्किल होता है. थुलथुला पेट न सिर्फ दिखने में अजीब लगता है बल्कि इसकी वजह से कई बार आप अपने पसंदीदा कपड़ों को भी नहीं पहन पाते हैं. ऐसे में आपको उन चीजों के बारे में पता होना चाहिए जो तेजी से वजन कम करने और पेट के पास जमा चर्बी को कम करने में मदद कर सके. आज हम आपको एक ऐसा देसी नुस्खा बताएंगे जो वजन कम करने में आपकी मदद कर सकता है.
हम बात कर रहे हैं फिटकरी की. जो आपके किचन में आसानी से मिल जाती है. यह स्किन से लेकर सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है अगर आप इसका इस्तेमाल सही तरीके से करते हैं. बता दें कि वेट लॉस में भी ये मदद कर सकती है. साइंस अलर्ट मे पब्लिश एक आर्टिकल में बताया गया है कि फिटकरी कैसे वजन कम करने के साथ आपके लिए फायदेमंद हो सकीत है.
पेट की चर्बी कम करने के लिए फिटकरी का इस्तेमाल कैसे करें
वजन कम करने के लिए आप फिटकरी के पाउडर को शहद और पानी के साथ ले सकते हैं. यह भूख को कम करने में मदद कर सकता है. जब भूख शांत रहती है तो इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है जो वेट लॉस में मदद कर सकता है. इसके अलावा गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन भी वेट लॉस में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /दस्त लगना यानी मल का जरूरत से ज्यादा पतला आना और बार-बार आना ऐसी दिक्कत है जिससे कभी भी और कोई भी प्रभावित हो सकता है. कभी कुछ सड़ा-गला खा लेने पर तो कुछ बहुत ज्यादा मसालेदार और तला भुना खाने से भी दस्त लग सकते हैं. किसी को एकसाथ बहुत ज्यादा खाने पर दस्त की दिक्कत हो जाती है तो कोई बैक्टीरियल इंफेक्शंस, वायरल इंफेक्शन और किसी तरह की दवाइयों के असर से भी दस्त से परेशान हो जाता है. अगर असमय ही कभी दस्त की दिक्कत हो गई है तो यहां जानिए किस तरह इससे छुटकारा पाया जा सकता है. घर की ही कुछ चीजें दस्त से राहत दिलाने में असर दिखाती हैं.
दस्त के घरेलू उपाय |
नींबू का रस - दस्त लगने पर नींबू के रस के सेवन से दिक्कत कम हो सकती है. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नींबू के रस से शरीर को हाइड्रेशन, सूदिंग इफेक्ट्स और दर्द से राहत मिलती है. नींबू के रस को पानी में डालकर उसमें हल्का नमक, धनिया पाउडर और पुदीना डालकर पी लें.
दही - प्रोबायोटिक्स से भरपूर दही को लूज मोशंस में खाया जा सकता है. इससे गुड गट हेल्थ प्रोमोट होती है और दस्त में आराम मिल जाता है. दस्त लगने पर अक्सर ही कुछ हल्का खाने के लिए कहा जाता है. ऐसे में आप खिचड़ी में दही डालकर भी खा सकते हैं.
केले - पौटेशियम और पेक्टिन से भरपूर केले दस्त से छुटकारा दिलाते हैं. केले में सोल्यूबल फाइबर होता है जो बाउल मूवमेंट को ठीक करता है. इससे शरीर को फायदेमंद इल्केट्रोलाइट्स भी मिलते हैं.
मेथी के दाने - दस्त के रामबाण नुस्खों में मेथी के दानों को गिना जाता है. मेथी के दानों के एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण दस्त की दिक्कत दूर करने में तेजी से असर दिखाते हैं. एक से 2 चम्मच मेथी के दाने लेकर पीस लें. इस पाउडर को एक गिलास पानी में डालकर पीने पर दस्त में आराम मिल सकता है. मेथी के दाने उबालकर भी इनका पानी पिया जा सकता है.
अदरक - पेट की कई दिक्कतों को अदरक का छोटा सा टुकड़ा दूर कर सकता है. दस्त, एसिडिटी, ब्लोटिंग और पेट दर्द से राहत पाने के लिए अदरक को छोटे टुकड़ों में काटकर एक कप पानी में डालने और उबालकर पीने पर आराम मिलता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
