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April 05, 2026
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खाना खजाना / शौर्यपथ / आपके घरे में अगर मुरमुरे बचे हुए हैं, तो आप एक नई रेसिपी ट्राई कर सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं मुरमुरे के लड्डू बनाने की रेसिपी-
सामग्री :
500 ग्राम लाई/मुरमुरे
200 ग्राम गुड़
1 कप पानी,
3-4 टीस्पून घी
विधि : एक कड़ाही में घी डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। अब इसमें मुरमुरे हल्का भून लें। ध्या4न रहे कि आंच ज्याेदा तेज न करें वरना मुरमुरे जल जाएंगे। गुड़ को तोड़कर अलग बर्तन में रख दें। अब दूसरी कड़ाही में थोड़ा सा घी गर्म करके उसमें गुड़ और पानी डालकर उबाल लें। बीच-बीच में इसे चलाते रहें। जब गुड़ की एक तार की चाशनी बन जाए तो उसमें मुरमुरे डालकर अच्छीच तरह मिला लें और गैस बंद कर दें। मिश्रण को छूकर देखें। अगर यह हाथ में सहने लायक हो जाए तो उसके लड्डू बना लें। जब लड्डुओं का गुड़ सूख जाए तो इन्हें डिब्बेे में भरकर रख लें और जब मन करें खाएं।

 

रायपुर / शौर्यपथ / वरिष्ठ कांग्रेस नेता अब्दुल हमीद हयात के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि ईश्वर इस दुख की घड़ी में परिवारजनों को सहनशक्ति एवं मृत आत्मा को शांति प्रदान करे।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अब्दुल हमीद हयात के निधन पर प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी, महामंत्री प्रशासन रवि घोष, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला, राजेंद्र तिवारी सदस्य, रमेश वर्ल्यानी सदस्य, आर.पी. सिंह सदस्य, सुरेंद्र शर्मा सदस्य, सुशील आनंद शुक्ला सदस्य, विकास दुबे सदस्य, संदीप साहू सदस्य, नितिन भंसाली सदस्य, अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव सदस्य ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अब्दुल हमीद हयात के निधन पर प्रदेश प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी, धनंजय ठाकुर, विकास तिवारी, मोहम्मद असलम, एडवोकेट सुरेंद्र वर्मा, एम.ए. इकबाल, वंदना राजपूत, आलोक दुबे जगदलपुर, अभय नारायण राय बिलासपुर, जनार्दन त्रिपाठी सरगुजा, कमलजीत पिंटू राजनांदगांव, कृष्णकुमार मरकाम धमतरी, प्रकाशमणि वैष्णव, अशुंल मिश्रा ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

दुर्ग / शौर्यपथ / 02 जून, 2021 को प्रातः 11.45 बजे सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन बैटरी-10 में अस्थाई हीटिंग प्रारम्भ किया गया। विदित हो कि इस बैटरी की चिमनी हीटिंग 16 मई, 2021 को शुरू की गयी थी। इन मरम्मतों के दौरान बैटरी एंकरेज, गैस और सर्विस पाइपलाइनों, कंाक्रीट संरचनाओं और संपूर्ण रिफ्रेक्टरी को बदलने का कार्य सम्पन्न किया गया। आज कार्यपालक निदेशक (वक्र्स) श्री अंजनी कुमार ने कोक ओवन बैटरी के ओवन में स्थित स्टोव को प्रजवल्लित कर इसका शुभारम्भ किया गया।
इस अवसर पर एस एन आबिदी, सीजीएम इंचार्ज (सर्विसेज), श्री अरविंद कुमार, सीजीएम इंचार्ज (एम एंड यू), वी के श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक (ईएमडी), जी पी सिंह, महाप्रबंधक प्रभारी (एसईडी एंड एफएस), जी ए राव, सीजीएम (सीओ एंड सीसीडी) और सीओ एंड सीसीडी के अन्य अधिकारी सहित सचिव, स्टील वकर्स यूनियन संजय साहू भी उपस्थित थे। समारोह में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
विदित हो कि अस्थायी हीटिंग के दौरान, ओवन के तापमान को लगभग 800 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर लाने के लिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 100 दिन लगते हैं और साथ ही इस दौरान बैटरी को चालू करने के लिए अन्य कार्य भी किए जाते हैं।
इस कोल्ड रिपेयर गतिविधियों का समन्वय राजीव श्रीवास्तव, जीएम इंचार्ज (सीआरजी एंड पीएलजी) के टीम द्वारा किया गया और हीटिंग प्रक्रिया का समन्वय श्री एल जे बेंजामिन, जीएम इंचार्ज (कोयला, बैटरी और एच एंड आर) के टीम के सदस्यों द्वारा सम्पन्न किया गया।

सेहत /शौर्यपथ / इन दिनों थाइरॉइड एक आम बीमारी बनती जा रही है, भारत देश में कई लोग इस समस्या का शिकार हैं। लोगों को थाइरॉइड के लक्षण समझने में समय लग जाता है और यही वजह है कि समस्या बढ़ती जाती है। वहीं अगर इस बीमारी में लोग लापरवाही करते हैं, तो यह रोग व्यक्ति के लिए खतरनाक हो सकता है। थायरॉयड के मरीज के लिए ये जानना भी जरूरी है कि उनके शरीर के लिए किन चिजों का सेवन हानिकारक हो सकता है। आइए जानते हैं थायरॉयड के लक्षण और बीमारी किन चीजों को न खाएं...
कितने प्रकार का होता है थायरॉइड
थायरॉइड दो प्रकार का होता है हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइडिज्म। दोनों ही प्रकार के अलग-अलग लक्षण है। हाइरथायराइडिज्म में थायरॉइज हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगते है, ऐसे में टी3 और टी4 का स्तर बढ़ने और टीएसएच का स्तर घटने लगता है। वहीं बात करें हाइपोथायराइडिज्म कि, तो इसमें थायरॉइज हार्मोन कम बनने लगते है, ऐसे में टी3 और टी4 का लेवल घटने और टीएसएच का स्तर बढ़ने लगता है।

लक्षण हाइपरथायराइडिज्म
कम नींद आना
वजन कम होना
घबराना
प्यास ज्यादा लगना
सांस फूलना
लक्षण हाइपोथायराइडिज्म
वजन बढ़ना
मानसिक तनाव
बालों का झड़ना
अवसाद
थकान
स्किन का रूखा और पतला होना
बीमारी में इन चीजों का करें परहेज
सोयाबीन
अगर आपको थायरॉइड है तो सोयबीन का सेवन आपको किसी भी प्रकार से नहीं करना चाहिए क्योंकि सोयाबीन युक्त चीजों में फयटोएस्ट्रोजन होता है। थायरॉइड के मरीजों के लिए सोयाबीन नुकसानदायक माना जाता है।
कैफीन या एल्कोहल
थाइरॉइड के मरीजों के लिए कैफीन और एल्कोहल को छोड़ना जरूरी है, ऐसा करने के बाद ही आप अपनी बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं। जब आप इन चीजों का सेवन करते हैं तो थायरॉइड की ग्रंथी प्रभावित होती है। साथ ही थायरॉइड के स्तर पर भी फर्क पड़ता है। बता दें कि अगर आप रोजाना दवाई खा रहे हैं लेकिन कैफीन और एल्कोहल का सेवन भी कर रहे हैं, तो दवाओं के असर पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
प्रोसेस्ड फूड
कोई भी चीज जो लंबे समय से रखी है उसका सेवन आप बिल्कुल न करें। पैकेट फूड में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो कि थायरॉइड के मरीजों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
चीनी
ज्यादा चीनी का सेवन किसी के लिए भी अच्छा नहीं है, लेकिन थायरॉइज में जिन मरीजों का वजन अचानक बढ़ा है उनको चीनी के सेवन पर नियंत्रण रखना चाहिए। यदी आप फिर भी चीनी का सेवन करते हैं, तो आपका वजन और बढ़ सकता है। साथ ही थाइरॉयड के स्तर पर भी इसका असर पड़ सकता है।

खाना खजाना / शौर्यपथ /मिर्च के अचार के शौकीनों को अलग-अलग अचार का फ्लेवर पसंद होता है। आज हम आपको बता रहे हैं इंस्टेंट मिर्च का अचार बनाने की रेसिपी, जो पांच मिनट में तैयार हो जाएगा।
सामग्री :
250 ग्राम हरी मिर्च
2 टीस्पून मेथी
2 टेबलस्पून राई
2 टेबलस्पून सौंफ
8-10 काली मिर्च
2 टीस्पून जीरा
चुटकीभर अजवाइन
1/2 टीस्पून हल्दी पाउडर
2 टेबलस्पून आमचूर पाउडर
1/2 कप सरसों का तेल
काला नमक स्वादानुसार
विधि :सबसे पहले हरी मिर्च को धोकर साफ कर लें। फिर इसमें बीच से चीरा लगा दें। मीडियम आंच में एक पैन में राई, काली मिर्च, सौंफ, मेथी, जीरा डालकर 1-2 मिनट तक ड्राई रोस्ट कर लें। अब इन्हें ग्राइंडर जार में दरदरा पीस लें। दूसरी तरफ मीडियम आंच पर पैन में तेल डालकर गरम करने के लिए रख दें। एक बर्थन में सभी हरी मिर्च डाल दें। इसमें पिसा हुआ मसाला, अजवाइन, हल्दी पाउडर, काला नमक, सादा नमक और आमचूर पाउडर डालकर मिक्स करें। गरम किए हुए तेल को पूरी तरह से ठंडा कर हरी मिर्च में डालकर मिक्स कर लें। तैयार है हरी मिर्च का इंस्टैंट अचार। इसे कंटेनर में भरकर स्टोर करके भी रख सकते हैं।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / एक्सरसाइज करने से न सिर्फ आपका शरीर फिट रहता है बल्कि इससे आपकी स्किन भी ग्लोइंग बनती है। आप एक्ससाइज करते हुए डाइट का ख्याल भी रखते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्सरसाइज करते हुए कपड़े भी काफी मैटर करते हैं। जैसे, टाइट कपड़े पहनने से आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचता है। वहीं, लड़कियों को एक्सरसाइज करते वक्त स्पोर्ट्स ब्रा पहननी चाहिए। आइए, जानते हैं कि ऐसा क्यों है-
-वर्कआउट के समय ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिए ताकि आपकी बॉडी कम्फर्टेबल महसूस करे। एक्सरसाइज के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा पहनने की सलाह इसलिए दी जाती है कि इससे आपके ब्रेस्ट की वाल को सपोर्ट मिले क्योंकि अगर आप बहुत हैवी एक्सरसाइज करते हैं, तो आपके ब्रेस्ट के चारों तरफ के लिगामेंट में खिंचाव पैदा होने के कारण स्ट्रेच मार्क्स हो सकते हैं। इससे आगे जाकर आपके ब्रेस्ट काफी सैगी (लटकते हुए से) हो सकते हैं।
-एक अच्छी क्वालिटी की स्पोर्ट्स ब्रा आपके ब्रेस्ट को एक्सरसाइज के दौरान पूरी तरह से बेहतर सपोर्ट देती है। इससे आपके ब्रेस्ट अपने शेप में रहते हैं और सैगी होने से बचते हैं। इसे पहनने से ब्रेस्ट का ज्यादा मूवमेंट नहीं होता जिस वजह से ये खिंचाव से बचे रहते हैं।
-जब आप एक्सरसाइज करती हैं तो उसका पूरा असर आपकी बॉडी पर भी पड़ता है। ऐसे में ब्रेस्ट इससे कैसे अछूते रह सकते हैं। कई बार ज्यादा कसरत करने की वजह से पूरी बॉडी में ही नहीं बल्कि ब्रेस्ट में भी दर्द होता है। इस दर्द से बचने के लिए भी आपको स्पोर्ट्स ब्रा कैरी करनी चाहिए।

शिक्षा /शौर्यपथ / आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़े कई पहलुओं का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य को हर विषय की गहनता से जानकारी थी। इन्हें विष्णु गुप्त या कौटिल्य कहा जाता है। आचार्य चाणक्य की नीतियां व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने और अच्छे कर्मों को करने के लिए प्रेरित करती हैं। नीति शास्त्र की कुछ बातें बेहद कड़वी और कठि लगती हैं। लेकिन ये जीवन की सच्चाई से रूबरू कराती हैं। कहा जाता है कि आचार्य चाणक्य की नीतियां जो व्यक्ति समझकर अपने जीवन में उतार लेता है, उसे सामाजिक व निजी सुखों में कमी नहीं रहती है। एक श्लोक के जरिए आचार्य चाणक्य ने बताया है किन लोगों के लिए धरती ही स्वर्ग समान हो जाती है।
1. जिसका पुत्र संस्कारी व आज्ञाकारी हो- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिनका पुत्र संस्कारी और आज्ञाकारी होता है और हमेशा अपने माता-पिता का सम्मान करता है। ऐसे व्यक्ति के लिए धरती पर ही स्वर्ग होता है।
2. अच्छे आचरण की पत्नी- चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति की पत्नी धर्म का अनुसरण करने वाली हो उसके लिए धरती पर ही स्वर्ग के समान सुख होते हैं। अच्छे आचरण वाली पत्नी पूरे परिवार को जुड़े रखती है। हर परिस्थिति में पति का साथ निभाती है। धर्म का पालन करने वाली पत्नी स्वयं मान-सम्मान पाने के साथ ही परिवार का भी मान बढ़ाती है। ऐसे स्त्री के पति के लिए धरती पर स्वर्ग समान सुख होता है।
3. आत्मिक रूप से संतुष्ट- कहा जाता है कि मन की शांति से बड़ा कोई धन या सुख नहीं होता है। जिनका मन किसी भी काम में संतुष्ट नहीं होता वह हमेशा दुखी रहते हैं। जिस व्यक्ति के पास आत्म संतुष्टि होती है, उनके लिए धरती पर ही स्वर्ग समान सुख है।

आस्था /शौर्यपथ /शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि ढैय्या शुरू हो जाती है। शनि की साढ़े साती महादशा की तरह ही शनि ढैय्या भी जातक को कष्ट देती है। शनि ढैय्या के दौरान जातक को शारीरिक, आर्थिक व मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में मिथुन व तुला राशि वालों पर शनि ढैय्या चल रही है। इस समय शनि अपनी स्वराशि मकर में हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने में ढाई साल का वक्त लेते हैं। शनि की सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल होती है। शनि 29 अप्रैल 2022 को राशि करते हुए मकर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। जिससे कर्क व वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या शुरू होगी। जानिए आने वाले 10 सालों में किन राशियों पर होगा शनि ढैय्या का असर-
साल 2023 में शनि का राशि परिवर्तन नहीं होगा। इसलिए कर्क व वृश्चिक राशि वालों पर ही शनि ढैय्या का असर रहेगा।
साल 2024 में भी शनि का राशि परिवर्तन नहीं होगा।
साल 2027 में 3 जून शनि मेष राशि में गोचर करेंगे। जिससे सिंह और धनु राशि वालों को शनि ढैय्या से मुक्ति मिलेगी और कन्या व कन्या राशि वालों पर इसका प्रभाव शुरू होगा। इस दौरान मीन, मेष और वृषभ राशि वालों शनि की साढ़े साती चलेगी।
साल 2028 में शनि का राशि परिवर्तन नहीं होगा।
साल 2029 में 8 अगस्त को शनि वृषभ राशि में गोचर करेंगे। जिससे कुंभ और तुला राशि वालों पर शनि ढैय्या शुरू हो जाएगी। वहीं, मेष, वृषभ और मिथुन राशि वालों पर शनि की साढ़े साती चलेगी।
साल 2030 में शनि का राशि परिवर्तन नहीं होगा।
साल 2031 में शनि का राशि परिवर्तन नहीं होगा।
शनि ढैय्या के उपाय-
शनि ढैय्या के दौरान व्यक्ति को धैर्य से काम लेना चाहिए। इस दौरान दोस्ती करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। हर दिन चिड़ियों को पानी और दाना खिलाना चाहिए। इसके अलावा चीटियों को मीठा खिलाने से भी लाभ होता है। काली उड़द, काले वस्त्र, तिल आदि का दान करना चाहिए। शनि ढैय्या के दौरान मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। हनुमान जी की पूजा के साथ भगवान शिव की पूजा से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं। शनि मंत्रों का जाप करना चाहिए। पीपल के वृक्ष के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

 

सेहत /शौर्यपथ /उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर फैलने लगता है और चेहरे पर झुर्रियां भी दिखाई देने लगती है। माथे पर की ​त्वचा पर भी लाइंस दिखाई देने लगती हैं, जिसे त्वचा पर दिखाई देने वाली सिलवटें भी कहा जाता है। माथे की सलवटें को देखकर ऐसा लगता है कि हम अधेड़ता या बुढापे की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में जानिए कि माथे कि सलवटें कैसे दूर करें योग से।
1. चेहरे और माथे को रिलेक्स रखें : कई लोग बात करते वक्त, क्रोध तरते वक्त, चिंता करते वक्त या भावुकता के क्षणों में माथे पर सलवटें बना लेते हैं। इसके अलावा दूर तक देखते वक्त या किताब पढ़ते वक्त भी माथे पर सलवटें बना लेते हैं। कई बार यह अनावश्यक होती है। बार-बार ऐसा करने से यह सलवटें स्थायी रूप से बन जाती है। ऐसे में यह ध्यान देते रहे कि यदि मैं किसी भी प्रकार की कोई क्रिया कर रहा हूं तो क्या मेरे चेहरे पर तनाव बन रहा है। यह ऐसा लगे तो तुरंत ही रिलेक्स हो जाएं।
2. प्राणायम : इसके लिए सबसे पहले आपको अनुलोम विलोम में अभ्यस्त होना पड़ेगा फिर इसके बाद भ्रस्तिका और कपालभाति प्राणायाम करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है जो हमारे शरीर को तरोताजा और रिफ्‍रेश करके के लिए जरूरी है।

3. ब्रह्म मुद्रा करें : ब्रह्म मुद्रा से गर्दन, चेहरा और आंखों की एक्सरसाइज होती है जिसके चलते चेहरे की झुरियां भी मिट जाती हैं। ब्रह्म मुद्रा से गर्दन में लचीलापन आएगा और गर्दन के आसपास की जमा चर्बी भी हटेगी। अब गर्दन स्थिर रखते हुए आंखों को दाएं-बाएं, उपर-नीचे घुमाएं, फिर गोलाकार दाएं से बाएं, फिर बाएं से दाएं घुमाएं। इससे आंखें स्वस्थ्‍य और सुंदर बनी रहेगी।
4. काली मुद्रा करें : अपनी जीभ को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। आपने मां कालीका का फोटो देखा होगा, बस उसी तरह की मुद्रा में 30 सेकंड तक रहें। इससे आपकी आंखों में जमा पानी और विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाता है या अंदर पेट में पहुंच जाता है। इससे आंखें स्वस्थ होकर अच्छा महसूस करती है। साथ ही यह माथे की सलवटें मिटाने के साथ ही आंखों के नीचे बनी झुर्रियां भी मिटाता है।

3. चेहरा बनाएं मछलीनुमा : गालों को अंदर भींचकर चेहरे को मछलीनुमा बनाएं। इसे आप स्माइल फिश फेस योगा कह सकते हैं। फिर हाथों की मुठ्टियां बांधकर ऊपर चेहरे तक उठाएं और दोनों आंखों को जोर से बंदरकर अंदर मींच लें। इससे मस्तिष्क पर पड़ी सलवटें मिटती है।
4. शेर मुद्रा : शेर जैसा चेहरा बनाने से चेहरे की सभी मांसपेशियां संचालित होकर स्वस्थ बनती है। पहले जीभ को पुरी ताकत के साथ बाहर निकाले और फिर आंखों को तान दें। बिल्कुल शेर की तरह। अब मुंह का फुग्गा फुलाएं अर्थात मुंह में हवा भरें और उसे दाएं-बाएं घुमाएं।

5. किस की आकृति : किस (चूमना) लेने जैसी आकृति बनाएं और इसी तरीके को बार-बार दोहराएं। फिर गर्दन ऊंची करके बत्तीसी मिलाकर हंसे।
6.बुद्धा फेस : अंत में आंखें बंद कर विश्राम की मुद्रा में बैठ जाएं और दोनों भोओं के बीच ध्यान को लगाएं। कुछ देर तक इसी तरह शांत बैठें रहें।

7. आहार : पानी का उचित सेवन करें, ताजा फलों के जूस, दही की छाछ, आम का पना, इमली का खट्टा-मीठा जलजीरा, बेल का शर्बत आदि तरल पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, बेल तथा पुदीने का भरपूर सेवन कारते हुए मसालेदार या तैलीय भोज्य पदार्थ से बचें।
8. मालिश : इसके बाद कभी भी जेतुन या सरसों के तेल की मालिश करें। इससे मांस-पेशियां पुष्ट होती हैं। दृष्टि तेज होती है। सुख की नींद आती है। मालिश से रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है।

सेहत /शौर्यपथ /एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम को सर्वोच्च औषधि के रूप में जाना जाता है। यह स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं। वैसे तो नीम के पास आपकी हर समस्या का इलाज है, लेकिन आइए अभी जान लेते हैं, नीम के 10 औषधीय गुण -
1 बिच्छू ततैया जैसे विषैले कीटों द्वारा काट लेने पर, नीम के पत्तों को महीन पीस कर काटे गए स्थान पर उसका लेप करने से राहत मिलती है, और जहर भी नहीं फैलता।
2 किसी प्रकार का घाव हो जाने पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से काफी लाभ मिलता है। इसके अलावा जैतून के तेल के साथ नीम की पत्त‍ियों का पेस्ट बनाकर लगाने से नासूर भी ठीक हो जाता है।
3 दाद या खुजली की समस्याएं होने पर, नीम की पत्त‍ियों को दही के साथ पीसकर लगाने पर काफी जल्दी लाभ होता है। और दाद की समस्या समाप्त हो जाती है।
4 गुर्दे में पथरी होने की स्थिति में नीम के पत्तों की राख को 2 ग्राम मात्रा में लेकर, प्रतिदिन पानी के साथ लेने पर पथरी गलने लगती है, और मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाती है।
5 मलेरिया बुखार होने की स्थिति में नीम की छाल को पानी में उबालकर, उसका काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े को दिन में तीन बार, दो बड़े चम्मच भरकर पीने से बुखार ठीक होता है और कमजोरी भी ठीक होती है।
6 त्वचा रोग होने पर, नीम के तेल का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नीम के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर शरीर पर मालिश करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।
7 नीम के डंठल में, खांसी, बवासीर, प्रमेह और पेट में होने वाले कीड़ों को खत्म करने के गुण होते हैं। इसे प्रतिदिन चबाने या फिर उबालकर पीने से लाभ होता है।
8 सिरदर्द, दांत दर्द, हाथ-पैर दर्द और सीने में दर्द की समस्या होने पर नीम के तेल की मालिश से काफी लाभ मिलता है। इसके फल का उपयोग कफ और कृमि‍नाशक के रूप में किया जाता है।
9 नीम के दातुन से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया की बीमारी भी समाप्त होती है। नीम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करने पर दांत व मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं, और मुंह से दुर्गंध भी नहीं आती।
10 चेहरे पर कील मुहांसे होने पर नीम की छाल को पानी में घिसकर लगाने से फायदा होता है। इसके अलावा नीम की पत्त‍ियों का लेप करने से भी त्वचा रोग के कीटाणु नष्ट होते हैं। नीम के तेल में कपूर मिलाकर त्वचा लगाने से भी फायदा होता है।

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