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April 05, 2026
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आस्था / शौर्यपथ /* मंगलवार : इसकी प्रकृति उग्र है। मंगलवार का दिन हनुमानजी है। हर कार्य में मंगलकारी परिणाम प्राप्त करने के लिए मंगलवार का उपवास रखना चाहिए।
ये कार्य करें :
* इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में मिश्रित सिन्दूर लगाएं।
* मंगलवार ब्रह्मचर्य का दिन है। यह दिन शक्ति एकत्रित करने का दिन है।
* दक्षिण, पूर्व, आ‍ग्नेय दिशा में यात्रा कर सकते हैं।
*शस्त्र अभ्यास, शौर्य के कार्य, विवाह कार्य या मुकदमे का आरंभ करने के लिए यह उचित दिन है।
* बिजली, अग्नि या धातुओं से संबंधित वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर सकते हैं।
* मंगलवार को ऋण चुकता करने का अच्छा दिन माना गया है। इस दिन ऋण चुकता करने से फिर कभी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ये कार्य न करें :
* मंगलवार सेक्स के लिए खराब है। इस दिन सेक्स करने से बचना चाहिए।
* मंगलवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है।
* पश्‍चिम, वायव्य और उत्तर दिशा में इस दिन यात्रा वर्जित।
* मंगलवार को मांस खाना सबसे खराब होता है, इससे अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
* मंगलवार को किसी को ऋण नहीं देना चाहिए वर्ना दिया गया ऋण आसानी से मिलने वाला नहीं है।

दुर्ग / शौर्यपथ / सेल चेयरमेन श्रीमति सोमा मण्डल ने अपने भिलाई प्रवास के दूसरे दिन सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र का विस्तृत भ्रमण किया और संयंत्र के निष्पादन की समीक्षा की। आज दिनांक 12 जून, 2021 को सेल चेयरमेन श्रीमति सोमा मण्डल ने अपने भ्रमण का प्रारंभ सर्वप्रथम बीएसपी के जम्बो कोविड केयर सेंटर में वृक्षारोपण कर किया।
इस अवसर पर सेल के डायरेक्टर (टेक्नीकल, प्रोजेक्टस् व राॅ-मटेरियल) हरिनंद राय तथा संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता विषेष रूप से उपस्थित रहे। श्रीमति मण्डल ने बीएसपी के जम्बो कोविड केयर सेंटर की सुविधाओं का अवलोकन किया और भिलाई बिरादरी की भूरी-भूरी प्रषंसा की।
अपने भ्रमण की अगले पड़ाव में श्रीमती मण्डल मेन गेट स्थित सेफ्टी एक्सीलेंस सेंटर में आवष्यक सुरक्षा निर्देषों के साथ संयंत्र का भ्रमण प्रारम्भ किया। इस भ्रमण के दौरान वे सर्वप्रथम संयंत्र के ओर हैंडलिंग प्लांट का अवलोकन किया। साथ ही उन्होंने नई सुविधा के रूप में लगने वाले बेस मिक्स प्लांट के साइट को भी देखा। उल्लेखनीय है कि बेस मिक्स प्लांट के माध्यम से विभिन्न राॅ मटेरियलस् को विषेषकर लौह अयस्क और फ्लक्स आदि को मिलाकर समरूप मिश्रण तैयार किया जाता है। इस अर्ध निर्मित कच्चे माल का उपयोग सिंटर प्लांट में बेहतर सिंटर के निर्माण में किया जाता है। इस प्रकार निर्मित सिंटर से सिंटर प्लांट की उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि होती है।
इस अवसर पर श्रीमति सोमा मण्डल ने उपस्थित कार्मिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भिलाई से सेल को अनेक उम्मीदें हैं। अब तक हमने बेहतर किया है अब हमें और बेहतर करना है। इसके लिए हम सभी को थोड़ा-सा अतिरिक्त योगदान देना होगा।
तत्पष्चात् श्रीमति सोमा मण्डल ने सिंटर प्लांट-3 का अवलोकन करने के साथ ही एसपी-3 में बरगद वृक्ष का पुनः रोपण कार्यक्रम को सम्पन्न किया। इसी क्रम में उन्होंने सिंटर प्लांट-2 का भी भ्रमण किया।
संयंत्र भ्रमण के इस कार्यक्रम के दौरान सेल चेयरमेन श्रीमति सोमा मण्डल ने भिलाई इस्पात संयंत्र के माॅडेक्स इकाईयों के उत्पादन गतिविधियों से रूबरू हुई। इसके तहत ब्लास्ट फर्नेस-8, स्टील मेल्टिंग शाॅप-3, बार एंड राॅड मिल (बीआरएम) तथा यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) का भ्रमण कर कार्मिकों व अधिकारियों की हौसला अफज़ाई की।
संयंत्र भ्रमण के पष्चात् सेल चेयरमेन श्रीमति सोमा मण्डल ने भिलाई इस्पात संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज के सभागार में बीएसपी के युनियन प्रतिनिधियों से मुलाकात कर वेज रिवीजन से लेकर श्रम कल्याण के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। विदित हो कि सेल चेयरमेन ने अपने प्रथम दिवस प्रवास के दौरान एमएसएमई एसोसिएषन, आॅफिसर्स एसोसिएषन तथा एससी/एसटी एसोसिएषन के पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की।
सेल के डायरेक्टर (टेक्नीकल, प्रोजेक्टस् व राॅ-मटेरियल) हरिनंद राय ने जूम के माध्यम से भिलाई इस्पात संयंत्र के निष्पादन, योजना तथा रणनीति पर विस्तृत चर्चा कर संयंत्र प्रबंधन को मार्गदर्षन प्रदान किया। इस बैठक में सेल के संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता सहित काॅर्पोरेट आॅफिस के ईडी (आॅपरेषन) देवदास एवं बीएसपी के संयंत्र के कार्यपालक निदेषक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डाॅ एस के इस्सर, कार्यपालक निदेषक (सामग्री प्रबंधन) राकेष, कार्यपालक निदेषक (परियोजनाएँ) ए के भट्टा, कार्यपालक निदेषक (कार्मिक एवं प्रषासन) एस के दुबे, कार्यपालक निदेषक (वक्र्स) अंजनी कुमार तथा मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (वित्त एवं लेखा) एस रंगानी विषेष रूप से जुड़े हुए थे। इसके अतिरिक्त सभी विभागों के मुख्य महाप्रबंधकों ने भी इस समीक्षा बैठक में डिजिटली अपनी भागीदारी प्रदान की।

खाना खजाना /शौर्यपथ /ढाबे की सब्जी की सबसे खास बात होती है कि इस की ग्रेवी बहुत ही टेस्टी लगती है। घर में हम कितनी भी कोशिश कर लेकिन ढाबे वाली सब्जी का टेस्ट नहीं मिल पाता। ऐसे में हम आपके लिए लाए हैं ऐसी रेसिपी, जिससे आप ढाबे जैसी सब्जी बना सकते हैं। आइए, जानते हैं रेसिपी-
सामग्री-
2 टेबलस्पून तेल
3 प्याज कटे हुए
2 टमाटर कटे हुए
50 ग्राम सूखे नारियल टुकड़ों में कटे हुए
3 सूखी लाल मिर्च
2 तेज पत्ता
दालचीनी के 2 छोटे टुकड़े
5 लौंग
1 बड़ी इलायची
3 छोटी इलयची
लहसुन की 10 कलियां
2 टेबलस्पून अदरक कटे हुए
10 से 12 काजू
नमक स्वादानुसार
विधि : - सबसे पहले मीडियम आंच पर एक कड़ाही में तेल गरम करें।
- इसके बाद इसमें सूखे नारयल डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें।
- नारयल सुनहरा होने पर सूखी लाल मिर्च, तेज पत्ता, दालचीनी के टुकड़े, लौंग, बड़ी इलायची और छोटी इलायची डालकर चलाते हुए सुनहरा होने तक भून लें।
- अब प्याज, अदरक और लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें।
- इसके बाद काजू डालें और 3 से 5 मिनट तक चलाते हुए सुनहरा होने तक भून लें।
- प्याज भुनने के बाद टमाटर और नमक डालकर 2 मिनट तक चलाते हुए भून लें।
- अब इसमें 2 कप पानी डालें और 10 मिनट तक मीडियम आंच पर ढककर पकाएं।
- तय समय के बाद आंच बंद करें और ठंडा होने दें।
- ठंडा हो जाए तो जार में डालकर पेस्ट बना लें।
- इसके बाद फिर उसी कड़ाही में मीडियम आंच पर 2 टेबलस्पून तेल डालकर धीमी आंच पर गर्म करें।
- गर्म होने के बाद 1 टीस्पून जीरा पाउडर, 2 टीस्पून धनिया पाउडर और 1/2 टीस्पून हल्दी पाउडर डलकर धीमी आंच पर चलाते हुए भून लें।
- इसे भूनने के बाद बनाया हुआ पेस्ट डालकर आंच को मीडियम कर लें और चलाते हुए 3 से 4 मिनट तक भून लें।
- तैयार है ढाबा स्टाइल ग्रेवी

राजनांदगाॅव / शौर्यपथ / अत्यन्त दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि स्थानीय गुलाब सिंह मार्ग, कलेक्ट्रेट परिसर के पीछे, स्थित राजपूत डेरा निवासी श्रीमती सरस्वती देवी का 82 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के उपरान्त, आज प्रातः 6ः30 बजे निज निवास में दुःखद निधन हो गया है। आप  रामनारायण सिंह की धर्मपत्नी एवं शिक्षा विभाग राजनांदगाॅव में पदस्थ वरिष्ठ पीटीआई रणविजय प्रताप सिंह एवं भानुप्रताप सिंह की माताश्री थी। दिवंगत पुण्यात्मा अपने पीछे अपने पति, दो पुत्रों एवं दो पुत्रवधु, एक पुत्री एवं दामाद सहित नाती पोतो से भरापूरा परिवार छोड़ गई है। श्रीमती सरस्वती देवी की अंतिम यात्रा आज दिनांक 13 जून 2021 रविवार को सुबह 11 बजे उनके निज निवास से स्थानीय मोतीपुर मुक्तिधाम के लिये रवाना होगी।

खाना खजाना / शौर्यपथ / आज कल बिज़ी लाइफ में हम में से कई लोगों के पास कुकिंग करने का ज्यादा वक्त नहीं होता। आपके मन में भी ये ख्याल आता होगा कि क्यों न रसोई में कुछ ऐसा पकाया जाए, जो हेल्दी होने के साथ कम वक्त में बनकर तैयार हो जाए। तो लेडीज आप अपनी ये सिरदर्दी भूल जाइए, क्योंकि हम आपके लिए लाए हैं ये 5 हेल्दी स्नैक्स रेसिपी जो बनाने में बिल्कुल आसान है।
1 ब्राउन ब्रेड हेल्दी सैंडविच
ब्राउन ब्रेड से वजन कम होता है, क्योंकि इसे खाने से हमारे शरीर को ओमेगा-3, फैटी एसिड, फोलेट और पोटेशियम मिलता है।
ब्राउन ब्रेड हेल्दी सैंडविच बनाने के लिए आपको चाहिए
8 ब्राउन ब्रेड
3 कटी प्याज
3 टमाटर कटे हुए
4 हरी मिर्च, नमक
2 स्पून देसी घी,
सॉस या चटनी।
ब्राउन ब्रेड हेल्दी सैंडविच बनाने की रेसिपी
दो ब्राउन ब्रेड लें दोनों ब्रेड के चारों तरफ देसी घी लगाएं
अब प्याज, टमाटर, हरी मिर्च काटकर उसमें नमक और लाल मिर्च को मिलाएं
इस प्याज टमाटर और सूखे मसाले के पेस्ट को दोनों ब्राउन ब्रेड के बीच में रखकर सेकें।
5 मिनट में तैयार सैंडविच को किसी भी सॉस व चटनी से खाएं।
2 दही का चटपटा परांठा
दही का पराठा आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में आपको तनाव मुक्त रखेगा। साथ ही आपके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढा देगा। दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा काफी हद तक कम होता है और आप दिल से जुड़ी बीमारियों से भी दूर रहते हो। दही एनर्जी बूस्टर है और ये हमारे शरीर में एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है साथ ही शरीर को हाइड्रेट भी करता है।
दही का परांठा बनाने के लिए आपको चाहिए
2 कप गेहूं का आटा, एक कप दही
¼ टी स्पून हल्दी
½ टी स्पून कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर
¼ टी स्पून जीरा पाउडर
½ टी स्पून गरम मसाला
¼ टी स्पून अजवायन
1 टी स्पून कसूरी मेथी, 1 टी स्पून अदरक का पेस्ट
2 टेबल स्पून धनिया, कटा हुआ
2 टेबल स्पून पुदीना, कटा हुआ
आधा टी स्पून नमक, 2 टेबल स्पून तेल
चलिए तैयार करते हैं
दही का चटपटा परांठाआटे में धनिया पत्ता बारीक काट कर मिलाएं
फिर प्याज, हरी मिर्च, हल्दी और नमक, काली मिर्च मिक्स करें।
आटे को पानी की जगह दही के साथ मिलाकर तैयार करें।
तैयार आटे को 10 मिनट तेल लगाकर छोड़ने के बाद आप दही का परांठा बना सकती हैं।
मनपसंद चटनी और अचार के साथ इसे सर्व करें।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / कोरोना काल में अधिकतर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। हालांकि इस दौरान काम के वक्त ऑफिस जैसा माहौल होना बहुत जरूरी है। अक्सर घर से काम करने के वक्त कई बार भूख भी लगने लग जाती है तो बार-बार किचन में जाकर कुछ भी खाने लगते हैं। लेकिन आपकी सेहत पर यह भारी पड़ सकता है। अनहेल्दी आदतें स्वास्थ्य के लिहाज से हमेशा बुरी होती है। तो आइए जानते हैं घर से काम कर रहे हैं तो अपने खान-पान का ध्यान कैसे रखें-

1.कैफिन की मात्रा को कम करें- जी हां, घर से काम करने के दौरान कभी-कभी आलस भी आने लगता है तो हम चाय या कॉफी पर टूट पड़ते हैं। लेकिन एक नियम से और सीमित मात्रा में चाय या कॉफी पिएं। कैफीन का अधिक सेवन नुकसानदेह होता हैं। और कई बार अनिद्रा की समस्या भी हो जाती है।
2.फिक्स रहे खाने का टाइम- ऑफिस के दौरान आपके खाने-पीने का टाइम फिक्स होता है उसी तरह घर पर भी अपने खाने का टाइम फिक्स रखें। अपने मन को स्थिर रखकर काम करें। आप अपने मन को स्थिर रखेंगे तो आपको ज्यादा भूख नहीं लगेगी।
3.ब्रेकफास्ट करें- अक्सर काम के चक्कर में हम ब्रेकफास्ट छोड़ देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करें। काम शुरू करने से पहले ब्रेकफास्ट जरूर करें। इससे आपको काम शुरू करने के दौरान अधिक भूख नहीं लगेगी। और आपका समय भी कहा निकल जाएगा, पता भी नहीं चलेगा।

4.फ्रूट्स खाएं- वर्क फ्रॉर्म होम के दौरान एक बैलेंस्ड डाइट फॉलो करें। अपने दिनभर के मील्स में कम से कम न्यूट्रिशन, कैलोरी का प्राथमिकता से ध्यान रखें। डाइट में प्रोटीन, फाइबर की मात्रा भी जरूर रखें।
5.एक्सरसाइज करते रहें- जी हां, अच्छे खान-पान के साथ एक्सरसाइज को भी अपनी लाइफस्टाइल में जोड़ें। खानपान के साथ एक्सरसाइज भी बेहद जरूरी है। क्योंकि दिनभर काम के दौरान हम सिर्फ बैठे रहते हैं। आप चाहे तो बैठे-बैठे भी एक्सरसाइज कर सकते हैं।

सेहत /शौर्यपथ / गर्मी का मौसम कई लोगों को बेहद पसंद होता है। इस मौसम आपको ठंडा-ठंडा खाने को मिलता है। एसी या कूलर की ठंडी हवा में एकदम ताजगी महसूस होती है। लेकिन क्या आप जानते यह गर्मी का मौसम जितना मजा देता है उतनी ही बीमारियों का अंबार साथ लेकर आता है।
जी हां, गर्मी के मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही आपकी जान भी ले सकती है। तो आइए जानते हैं इस मौसम में किस तरह की बीमारियां हो सकती है-
1. गर्मी के मौसम में आपको हीट स्ट्रोक यानि लू लगने की समस्या हो सकती है। दिनभर धूप में अधिक घूमने से भी लू लग सकती है। इसमें आपको कमजोरी, सिरदर्द, बुखार, पाचनतंत्र बिगड़ जाना जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है।
2. कई लोग अक्सर ये सोच कर पानी नहीं पीते हैं कि उन्हें प्यास नहीं लग रही है। लेकिन ऐसी गलती बिल्कुल भी नहीं करें। जी हां, शरीर में डीहाईड्रेशन की कमी से आपको कुछ भी हो सकता है। स्थिति बिगड़ने पर ग्लूकोज की बॉटल चढ़ाना पड़ सकती है। इसलिए ध्यान रहे प्यास नहीं लगने पर भी पानी पीते रहें। दिन में एक बार ग्लूकोज का पानी भी पी लें।
3. फूड प्वॉजनिंग की समस्या गर्मी में सबसे अधिक और सबसे जल्दी होती है। इसलिए कभी देर रात में खाना नहीं खाएं। कभी भी रात का भोजन सुबह नहीं करें, बाहर का खाने से परहेज करें। अस्वस्थ्य लगने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
4. गर्मी में सनबर्न की समस्या से आपकी स्किन जल जाती है। लाल रेशेज पड़ने लगते हैं। इसलिए आप सन स्क्रिन क्रीम लगाकर निकलें या हाथ और मुंह कंवर करके निकलें। जिससे आपको कोई परेशानी नहीं होगी।

शौर्यपथ / हर साल 14 जून को विश्व रक्त दान दिवस मनाया जाता है। कई लोग स्वस्थ होते हुए भी रक्त दान करने से डरते हैं, क्योंकि उनके मन में इससे जुड़ीं कई भ्रांतियां होती हैं। खून के अभाव में कई लोगों को जान चली जाती है। ऐसा किसी के भी साथ न हो, इसीलिए 14 जून को रक्‍त दान दिवस मनाया जाता है।
इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्त दान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। रक्‍त दान को महादान भी कहा जाता है। अत: हमें इस दिन रक्‍त दान करके लोगों की जिंदगी बचाने का संकल्प लेना चाहिए।
आइए हम आपको बता रहे हैं रक्त दान यानी ब्लड डोनेशन से जुड़े 13 रोचक तथ्य-
1. रक्त दान करते हुए डोनर के शरीर से केवल 1 यूनिट रक्त ही लिया जाता है।
2. एक औसत व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिट यानी (5-6 लीटर) रक्त होता है।
3. कई बार केवल एक कार एक्सीडेंट (दुर्घटना) में ही, चोटील व्यक्ति को 100 यूनिट तक के रक्त की जरूरत पड़ जाती है।
4. एक बार रक्त दान से आप 3 लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।
5. भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप 'O नेगेटिव' है।
6. 'O नेगेटिव' ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर कहलाता है, इसे किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को दिया जा सकता है।
7. इमरजेंसी के समय जैसे जब किसी नवजात बालक या अन्य को खून की आवश्यकता हो और उसका ब्लड ग्रुप ना पता हो, तब उसे 'O नेगेटिव' ब्लड दिया जा सकता है।
8. ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया काफी सरल होती है और रक्त दाता को आमतौर पर इसमें कोई तकलीफ नहीं होती हैं।
9. कोई व्यक्ति 18 से 60 वर्ष की आयु तक रक्त दान कर सकता हैं।
10. रक्त दाता का वजन, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर, बॉडी टेम्परेचर आदि चीजों के सामान्य पाए जाने पर ही डॉक्टर्स या ब्लड डोनेशन टीम के सदस्य आपका ब्लड लेते हैं।
11. अगर कभी रक्त दान के बाद आपको चक्कर आना, पसीना आना, वजन कम होना या किसी भी अन्य प्रकार की समस्या लंबे समय तक बनी हुई हो तो आप रक्त दान ना करें।
12. पुरुष 3 महीने और महिलाएं 4 महीने के अंतराल में नियमित रक्त दान कर सकती हैं।
13. हर कोई रक्त दान नहीं कर सकता। यदि आप स्वस्थ हैं, आपको किसी प्रकार का बुखार या बीमारी नहीं हैं, तो ही आप रक्त दान कर सकते हैं।

धर्म संसार / शौर्यपथ / माता कालिका के अनेक रूप हैं जिनमें से प्रमुख है- 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली। इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी है। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां हैं। आओ जानते हैं गुह्य काली कौन है और क्या है उनका मंत्र।
1. मां सिद्धिकाली को ही गुह्य काली के नाम से भी जाना जाता है।
2. कहते हैं कि इंद्र, वरुण, कुबेर, यम,, चंद्र, रावण, यम, राजा बलि, बालि, वासव, विवस्वान आदि कई देवी और देवता्ओं ने इनकी उपासना कर सिद्धि और शक्तियां अर्जित की हैं।
3. जो लोग सिद्धि प्राप्त करना चाहिए हैं उन्हें इन माता की पूजा और साधना करना चाहिए।
4. गुह्यकाली के कुछ मंत्र :
1. क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा। गुह्य काली की सिद्धि त्रैलोक्य में अत्यंत दुर्लभ है। यह मंत्र सर्वफलदायक, धर्मार्थकाममोक्षदायक, महापातकनाशक, सर्वसिद्धिदायक, सनातनी एवं भोग तथा मोक्ष देने वाला है। माना जाता है कि इस मंत्र का सवा लाख जप करने से यह सिद्ध होता है।
2.नवाक्षर मंत्र : क्रीं गुह्ये कालिका क्रीं स्वाहा।
3. चतुर्दशाक्षर मंत्र : क्रौं हूं ह्रीं गुह्ये कालिके हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
4. पंचदशाक्षर मंत्र : हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
5. अन्य मंत्र : ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
ध्यान
द्यायेन्नीलोत्पल श्यामामिन्द्र नील समुद्युतिम्। धनाधनतनु द्योतां स्निग्ध दूर्वादलद्युतिम्।।
ज्ञानरश्मिच्छटा- टोप ज्योति मंडल मध्यगाम्। दशवक्त्रां गुह्य कालीं सप्त विंशति लोचनाम्।।
5. गुजयेश्वरी मंदिर, काठमांडू, नेपाल : यहां पर माता सती के शरीर के दोनों घुटने गिरे थे। इस कारण से यह इक्यावन शक्तिपीठ में गिना जाता है। यहां की शक्ति हैं महाशिरा एवं भैरव हैं कपाली। कुछ लोगों का मानना है, कि इसका नाम गुह्येश्वरी मंदिर है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। यहां पर ज्योतिर्लिंग के साथ दो शक्तिपीठ हरसिद्धि और गढ़कालिका है और 84 महादेव के साथ ही यहां पर देश का एक मात्र अष्ट चिरंजीवियों का मंदिर है। यह मंगलदेव की उत्पत्ति का स्थान भी है और यहां पर नौ नारायण और सात सागर है। यहां के शमशान को तीर्थ माना जाता है जिसे चक्र तीर्थ कहते हैं। यहां पर माता पार्वती द्वारा लगाया गया सिद्धवट है। श्रीराम और हनुमान ने उज्जैन की यात्रा की थी। यहां के कुंभ पर्व को सिंहस्थ कहते हैं। राजा विक्रमादित्य ने ही यहीं से विक्रमादित्य के कैलेंडर का प्रारंभ किया था और उन्होंने ही इस देश को सर्वप्रथम बार सोने की चिढ़िया कहकर यहां से सोने के सिक्के का प्रचलन किया था। महाभारत की एक कथानुसार उज्जैन स्वर्ग है।
1. यहां पर साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। इनकी पूजा का विशेष विधान है।
2. यहीं से विश्‍व का काल निर्धारण होता है अर्थात मानक समय का केंद्र भी यही है। उज्जैन से ही ग्रह नक्षत्रों की गणना होती है और यहीं से कर्क रेखा गुजरती है।
3. प्राचीनकाल में उज्जैन से ही संपूर्ण धरती का मानक समय नियुक्त होता था। यह सूर्य और कर्क रेखा के ठीक नीचे है।
4. भारतीय भारतीय मान्यता के अनुसा जब उत्तर ध्रुव की स्थिति 21 मार्च से प्राय: 6 मास का दिन होने लगता है तब 6 मास के तीन माह व्यतीत होने पर सूर्य दक्षिण क्षितिज से बहुत दूर हो जाता है। उस दिन सूर्य ठीक उज्जैन के उपर होता है। उज्जैन का अक्षांश और सूर्य की परम कांति दोनों ही 240 अक्षांस पर मानी गई हैं। यह स्थिति पूरी धरती पर और कहीं निर्मित नहीं होती है।
5. उज्जैन 23.9 अंश उत्तर अक्षांश एवं 770 देशांतर पर समुद्र की सतरह से 1658 फुट की ऊंचाई पर बसी हुई है।
6. वराह पुराण में उज्जैन को नाभि देश और महाकालेश्वर को अधिष्ठाता कहा गया है।
7. देशांतर रेखा और कर्क रेखा यहीं एक -दूसरे को काटती हैं। जहां यह काटती हैं संभवत: वहीं महाकालेश्वर मंदिर स्थित है।
8. यहां पर ऐतिहासिक नवग्रह मंदिर और वेधशाला की स्थापना से कालगणना का मध्य बिंदु होने के सबूत मिलते हैं।

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