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ज्योतिष/शौर्यपथ / ज्योतिष अनुसार ग्रहों की शुभता के लिए रत्नों की अंगूठी पहनी जाती है, और वास्तु अनुसार कछुए को समृद्धिकारक माना जाता है। वर्तमान में कछुए वाली अंगूठी पहनने का प्रचलन भी बढ़ गया है, जिसे ज्योतिष वास्तु के मिश्रण के रूप में देखा जा सकता है। जानते हैं कछुए वाली अंगूठी को लेकर क्या हैं धारणाएं और किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
-1 ऐसा माना जाता है कि कछुआ लक्ष्मी का प्रतीक है और यह समुद्र मंथन में प्राप्त हुआ था। इसे साथ रखने या पहनने से धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
2 कछुए की अंगूठी पहनते समय इसकी दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जब भी इस अंगूठी को पहनें, तो कछुए के सिर वाला हिस्सा आपकी ओर हो और पीछे का हिस्सा बाहर की ओर।
3 चूंकि इसे लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है, अत: इस अंगूठी को धारण करने के लिए शुक्रवार का दिन शुभ होता है, जो स्वयं लक्ष्मी का दिन माना जाता है।
4 शुक्र का संबंध चांदी से है, अत: इसे चांदी की धातु में बनवाना चाहिए और फिर विधि पूर्वक धारण करना चाहिए।
5 इसे आप किस अंगुली में पहन रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि इस अंगूठी को तर्जनी अंगुली में धारण करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / वर्ष 2021 में रविवार, 20 जून को गायत्री प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। शास्त्रों में गायत्री की महिमा के पवित्र वर्णन मिलते हैं। गायत्री मंत्र तीनों देव, बृह्मा, विष्णु और महेश का सार है। समस्त ऋषि-मुनि मुक्त कंठ से गायत्री का गुण-गान करते हैं। समस्त धर्म ग्रंथों में गायत्री की महिमा एक स्वर से कही गई। हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह एक ऐसा मंत्र है जो न सिर्फ हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों की जुबान रहता है बल्कि अन्य धर्म के लोग भी इस मंत्र के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। कई शोधों में इस बात को माना गया है कि गायत्री मंत्र के जाप से कई फायदे मिलते हैं।
आइए जानतें हैं गायत्री मंत्र की 11 खास बातें-
चमत्कारी गायत्री मंत्र : - ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।
1. वेदों की कुल संख्या चार है और चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है। इस मंत्र के ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सवितृ हैं।
2. इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां, भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाएं नहीं फटकती।
3. गायत्री मंत्र के जप से कई तरह का लाभ मिलता है। यह मंत्र कहता है 'उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।'
4. इस मंत्र के जप से बौद्धिक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण की क्षमता बढ़ती है। इससे व्यक्ति का तेज बढ़ता है साथ ही दुःखों से छूटने का रास्ता मिलता है।
5. गायत्री मंत्र का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक किया जा सकता है।
6. मौन मानसिक जप कभी भी कर सकते हैं लेकिन रात्रि में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहिए।
7. रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है। उल्टे इसका मिल सकता है कोई गलत परिणाम..... इसलिए यह गलती भूलकर भी न करें। रात्रि काल में गायत्री मंत्र बिलकुल न जपें।
8. गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर होते हैं। यह चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं। यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला मंत्र बताया है।
9. आर्थिक मामलों में परेशानी आने पर गायत्री मंत्र के साथ श्रीं का संपुट लगाकर जप करने से आर्थिक बाधा दूर होती है।
10. छात्रों के लिए यह मंत्र बहुत ही फायदेमंद है। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि गायत्री सद्बुद्धि का मंत्र है, इसलिए उसे मंत्रो का मुकुटमणि कहा गया है।
11. नियमित रूप से 108 बार गायत्री मंत्र का जप करने से बुद्धि प्रखर और किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है। यह मंत्र व्यक्ति की बुद्धि और विवेक को निखारने का भी काम करता है।
गायत्री मंत्र के हैं तीन अर्थ, जानिए इसकी शक्ति का राज
सभी हिन्दू शास्त्रों में लिखा है कि मंत्रों का मंत्र महामंत्र है गायत्री मंत्र। यह प्रथम इसलिए कि विश्व की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद की शुरुआत ही इस मंत्र से होती है। कहते हैं कि ब्रह्मा ने चार वेदों की रचना के पूर्व 24 अक्षरों के गायत्री मंत्र की रचना की थी। आओ जानते हैं इस मंत्र के तीन अर्थ।
यह मंत्र इस प्रकार है:- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
पहला अर्थ :- पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे।
दूसरा अर्थ :- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
तीसरा अर्थ :- ॐ : सर्वरक्षक परमात्मा, भू : प्राणों से प्यारा, भुव : दुख विनाशक, स्व : सुखस्वरूप है, तत् : उस, सवितु : उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य : वरने योग्य, भर्गो : शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य : देव के, धीमहि : हम ध्यान करें, धियो : बुद्धि को, यो : जो, न : हमारी, प्रचोदयात् : शुभ कार्यों में प्रेरित करें।
शक्ति का राज : इस मंत्र को निरंतर जपने से मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है। मानसिक शक्तियां बढ़ जाती हैं और सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां जपकर्ता से दूर हो जाती है। इस मंत्र के बल पर ही ऋषि विश्वामित्र ने एक नई सृष्टि की रचना कर दी थी। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि यह मंत्र कितना शक्तिशाली है। इस मंत्र में 24 अक्षर है।
प्रत्येक अक्षर के उच्चारण से एक देवता का आह्वान हो जाता है। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं। उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां हैं। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर 24 शक्ति बीज हैं। गायत्री मंत्र की उपासना करने से उन मंत्र शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं।
सप्त कोटि महामंत्रा, गायत्री नायिका स्मृता।आदि देवा ह्मुपासन्ते गायत्री वेद मातरम्।। -कूर्म पुराण
अर्थ : गायत्री सर्वोपरि सेनानायक के समान है। देवता इसी की उपासना करते हैं। यही चारों वेदों की माता है।
कामान्दुग्धे विप्रकर्षत्वलक्ष्मी, पुण्यं सुते दुष्कृतं च हिनस्ति।शुद्धां शान्तां मातरं मंगलाना, धेनुं धीरां गायत्रीमंत्रमाहु:।। -वशिष्ठ
अर्थ : गायत्री कामधेनु के समान मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, दुर्भाग्य, दरिद्रता आदि कष्टों को दूर करती है, पुण्य को बढ़ाती है, पाप का नाश करती है। ऐसी परम शुद्ध शांतिदायिनी, कल्याणकारिणी महाशक्ति को ऋषि लोग गायत्री कहते हैं।
प्राचीनकाल में महर्षियों ने बड़ी-बड़ी तपस्याएं और योग-साधनाएं करके अणिमा-महिमा आदि ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त की थीं। इनकी चमत्कारी शक्तियों के वर्णन से इतिहास-पुराण भरे पड़े हैं। वह तपस्या थी इसलिए महर्षियों ने प्रत्येक भारतीय के लिए गायत्री की नित्य उपासना करने का निर्देश दिया था।
खाना खजाना /शौर्यपथ /अक्सर सुबह के नाश्ते के लिए घर की महिलाएं ऐसे नाश्ते का चुनाव करती हैं जो उनके परिवार के लिए हेल्दी होने के साथ-साथ झटपट बनने वाला भी हो। ऐसे ही एक नाश्ते का नाम है सूजी उत्तपम। सूजी उत्तपम खाने में जितना टेस्टी होता है बनने में उतना आसान भी है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाया जाता है सिर्फ 10 मिनट में यह हेल्दी नाश्ता सूजी उत्तपम।
सूजी उत्तपम बनाने के लिए सामग्री-
-एक कप सूजी
-एक कप दही
-एक टमाटर बारीक कटा हुआ
-एक प्याज बारीक कटी हुई
-दो हरी मिर्च बारीक कटी हुई
-दो बड़ा चम्मच धनिया
-नमक स्वादनुसार
-तेल तलने के लिए
सूजी उत्तपम बनाने की विधि-
-सूजी उत्तपम बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में सूजी, दही और नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। बैटर गाढ़ा होने की वजह से थोड़ा-सा पानी भी मिलाएं और इसे इडली और डोसे के बैटर जैसा तैयार कर लें।
-बैटर में प्याज, टमाटर, गाजर, शिमला मिर्च, अदरक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया पत्ती सभी थोड़ा-थोड़ा डालकर मिक्स कर लें और बाकी का बचाकर अलग रख लें। -मीडियम आंच में एक पैन में तेल गर्म करने के लिए रखें।
-तेल के गर्म होते ही पैन में बैटर डालें। एक मिनट बाद बाकी बची सब्जियां भी ऊपर से डाल दें और दो मिनट तक परांठे की तरह सेंक लें।
-आप इसे चटनी या कैचअप के साथ सर्व कर सकते हैं।
सेहत /शौर्यपथ / पेट में फंसी हुई गैस आपको कितना परेशान कर सकती है, इसका अनुभव वही कर सकता है, जिसने इसका सामना किया होता है। कभी-कभी आप सोचती होंगी कि क्यों आखिर ये बार-बार हो जाती है। लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम के इन दिनों में तो और भी ज्यादा। हम खानपान संबंधी उन सात आदतों की ओर आपका ध्यान दिलवाने जा रहे हैं, जो पेट फूलने या ब्लोटिंग के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।
पेट फूलने या ब्लोटिंग के लिए जिम्मेदार 7 कारण
1 लंबे समय तक भूखे रहना
लंबे समय तक भूखे रहना भी ब्लोटिंग या पेट फूलने का कारण बन सकता है। काफी समय से भोजन न लेने के कारण पेट में बना अम्ल बहुत सक्रिय हो जाता है। जो हमारे पेट की दीवारों को क्षति पहुंचाता है और हमारा पेट फूलने लगता है। इसलिए जरूरी है कि हर तीन घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें।
2 शारीरिक निष्क्रियता
खाना खाने के साथ जरूरी होता है उसका पचना। अगर आप भोजन को पचाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं तो ये आपके पाचन तंत्र और अन्य अंगों के लिए अच्छा नहीं है। शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहने या एक ही जगह बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म घटता है। जिससे आपका वजन भी बढ़ता है और पाचन संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। इसलिए खाने के बाद वॉक करें।
3 गरिष्ठ और तेज मसाले का भोजन
अधिक तैलीय और मसाले युक्त भोजन आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह के भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स अधिक मात्रा में होती है, जिस कारण आपको गैस और पेट फूलने जैसी समस्या होती है। ऐसा आहार लेने से आपको लंबे समय तक तनाव और डिप्रेशन हो सकता है।
भोजन का सेवन करने पर आपके आमाशय यानी पेट में एक अम्ल बनता है, जो आपके भोजन को पचाने का काम करता है। ये अम्ल भोजन को छोटे-छोटे टुकड़े में तोड़ता है, जिससे हमारे पेट में गैस बनती है। इसके अलावा चना, चने की दाल, बीन्स, बेसन से बने फूड्स, मैदा, राजमा, छोले आदि के सेवन से भी पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो जाती है। इसलिए ज्यादा तैलीय और मसाले युक्त भोजन का सेवन न करें।
4 ओवरईटिंग
ओवरईटिंग से बचें क्योंकि ज्यादा आहार लेने के कारण आपका पेट ज्यादा भोजन पचा नहीं पाता है। जिससे आपको पेट फूलने या ब्लोटिंग जैसी समस्या होती है। इसलिए खाने के लिए एक छोटी प्लेट चुनें। इसके अलावा, खाते समय धीमे-धीमे खाएं इससे शरीर को भोजन पचाने में आसानी होती है।
5 डिब्बाबंद खाने से
पैकेज्ड फूड एक सुविधाजनक स्नैक है, जिसे आप आसानी से कभी भी खा सकती हैं। पर क्या आप जानती हैं कि ये आपके शरीर के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। डिब्बाबंद भोजन में सोडियम उच्च मात्रा में होता है। जो कुछ लोगों में पेट की सूजन पैदा करने लगता है। जिससे पेट फूलने जैसी समस्या बनी रहती है, जहां तक संभव हो घर का बना ताजा खाना खाएं।
6 सोडा या कार्बोनेटेड ड्रिंक
कार्बोनेटेड पेय, जैसे सोडा या स्पार्कलिंग पानी, सूजन का एक सामान्य कारण हो सकता है। सोडा आपके पेट में गैस बनाता है, जिससे सूजन, डकार और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। कोशिश करें कि कम से कम सोडा लें। आप इसकी जगह खीरा या नींबू पानी पी सकती हैं।
7 देर रात खाना
आयुर्वेद के मुताबिक सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक रात का भोजन कर लेना चाहिए। मगर मौजूदा लाइफस्टाइल में हमारे डिनर का टाइम बिल्कुल बदल गया है। जबकि देर रात खाना खाना पाचन तंत्र पर असर डालता है। जिससे पेट में गैस और भारीपन की समस्या होती है। दरअसल जब भी आप रात में देर से खाना खाते हैं और उसके बाद सो जाते हैं तो वो खाना पचता नहीं है। ये बिना पचा हुआ खाना गैस, पेट दर्द और कब्ज का कारण बनता है। इसलिए कोशिश करें खाना सूर्यास्त के बाद ही खा लें।
पेट संबंधी अन्य समस्याओं को भी जन्म देता है बार-बार पेट फूलना
इससे पेट में पानी भर सकता है और पेट में ट्यूमर भी हो सकता है।
सीलिएक रोग ये ग्लूटेन युक्त खाद्य के सेवन से पैदा होने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी समस्या, जिसमें छोटी आंत में सूजन या क्षति पैदा होती है।
डंपिंग सिंड्रोम ये पेट से जुड़ी सर्जरी के कारण पैदा होने वाली समस्या है, जिसमें भोजन पेट के पहले भाग से तेजी से गुजरने लगता है। इसके कारण ओवेरियन (अंडाशय) कैंसर हो सकता है।
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफलक्स डिजीज इसमें पाचन संबंधी विकार जिसमें पेट में मौजूद एसिडिक जूस गले में आ जाता है।
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम ये आंतों से संबंधित विकार है जिसमें पेट में दर्द, ऐठन, गैस के साथ-साथ दस्त और कब्ज की समस्या भी देखी जा सकती है।
लैक्टोज इंटॉलरेंस यानी दूध और अन्य सामग्रियों को पचाने में परेशानी होती है।
छोटी आंत के बैक्टीरिया का अधिक बढ़ना, बहुत अधिक खाना और अधिक वजन बढ़ना।
लेडीज, सही पोषण युक्त आहार जहां आपको लंबे समय तक स्वस्थ रखता है, वहीं खानपान की ये गलत आदतें आपको पेट के गंभीर रोग भी दे सकती हैं। इसलिए इनसे बचें और हेल्दी रहें।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / मानसून का सीजन तो सभी को अच्छा लगता है। बारिश के मौसम में गरमा-गरम पकौड़ें और चाय का मजा ही अलग होता है। लेकिन त्वचा की सूरत बिगड़ जाती है। गर्मी और ठंड के साथ ही मानसून में भी त्वचा की केयर करना बेहद जरूरी होता है। किसी की स्किन बहुत ऑयली होती है तो किसी की त्वचा ड्राई। लेकिन बारिश के मौसम में चिपचिपाहट अधिक होती है।
इस मौसम में भी त्वचा का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि केयर नहीं करने पर एक्ने, फुंसियां होने लग जाती है। तो इस मौसम में अपनी त्वचा का ख्याल कैसे रखें ताकि उसका ग्लो भी बरकरार रहे। वेबदुनिया ने ब्यूटी एक्सपर्ट रवीश दीक्षित से चर्चा की आइए जानते हैं क्या कहा?
- समय-समय पर क्लींजर से अपने चेहरे को साफ करते रहें। ताकि रोमछिद्र (पोर्स) बंद नहीं हो।
- बारिश के मौसम में नमी से इंफेक्शन का खतरा रहता है। इसलिए एंटी बैक्टीरियल टोनर का इस्तेमाल करें। साथ ही जो उमस से चेहरे पर फुंसी या एक्ने होने लगते हैं वह भी नहीं होंगे। टोनर का एक और फायदा यह भी है कि स्किन का पीएच लेवल मेंटेन रहेगा।
- किसी-किसी की स्किन बहुत अधिक ड्राई भी होती है लेकिन बारिश के मौसम ऐसा नहीं होता है। बल्कि चिपचिपाहट बनी रहती है। ड्राई स्किन के लिए कोई अच्छा मॉइस्चराइजर क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्किन को हाइड्रेट करने के लिए भी प्रोडक्ट्स आते हैं तो उनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है ताकि स्किन की सॉफ्टनेस बरकरार रहे। आप ऑयल बेस्ड प्रोडक्ट्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- किसी की स्किन बहुत ऑयली होती है ऐसे में भूलकर भी मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल नहीं करें। इससे और अधिक ऑयल चेहरे पर आएगा। अपनी स्किन को मेंटेन करने के लिए जेल बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। ताकि स्किन ऑयल को बैलेंस करें।
- कई बार बारिश के बाद जो धूप निकलती है वह बहुत हार्ष होती है। इस समय में आप जब भी घर से बाहर निकले सनस्क्रीन लगाकर निकालें। इससे टैनिंग नहीं होगी।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / नियमित रूप से योगासन, प्राणायाम, ध्यान और योग क्रियाएं करते रहने से आपके जीवन पर 10 तरह के प्रभाव पड़ते हैं। आओ जानते हैं कौनसे हैं वे प्रभाव...
1. शरीर होता है स्वस्थ : यदि आप आहार संयम का पालन करते हुए योगाभ्यास और प्राणायाम करते रहते हैं तो आप हमेशा सेहतमंद बने रहेंगे। किसी भी प्रकार का गंभीर रोग नहीं होगा।
2. मन रहता है हमेशा प्रसन्न : योग करते रहने से मन हमेशा प्रसन्नचित्त रहता है। आप जीवन में किसी भी विपरीत परिस्थिति से हताश या निराश नहीं होंगे।
3. विचार हो जाते हैं परिष्कृत : योग करते रहने से मस्तिष्क में किसी भी प्रकार का द्वंद्व और विकार नहीं रहता है। सोच बहुत ही विस्तृत होकर परिष्कृत हो जाती है अर्थात साफ-सुथरी व स्पष्ट। ऐसे में व्यक्ति की बुद्धि बहुत तीक्ष्ण हो जाती है।
4. मिट जाते हैं मानसिक रोग : यदि किसी भी प्रकार का मानसिक रोग है तो वह मिट जाएगा, जैसे चिंता, घबराहट, बेचैनी, अवसाद, शोक, शंकालु प्रवृत्ति, नकारात्मकता, द्वंद्व या भ्रम आदि। एक स्वस्थ मस्तिष्क ही खुशहाल जीवन और उज्ज्वल भविष्य की रचना कर सकता है।
5. बढ़ती है कार्यशीलता : लगातार योग करते रहने से व्यक्ति में कार्यशीलता बढ़ जाती है और वह अपने जीवन के लक्ष्य जल्द से जल्द पूर्ण करने की ओर फोकस कर देता है।
6. बदल जाता है व्यक्तित्व : 2 तरह के लोग होते हैं- अंतर्मुखी और बहिर्मुखी। लेकिन योग करते रहने से व्यक्ति दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना सीख जाता है। योगी व्यक्तित्व अलग ही होता है। भीड़ में उसकी अलग ही पहचान बनती है। वह सबसे अलग ही नजर आता है।
7. आती है अच्छी नींद : प्राणायाम द्वारा प्राणवायु शरीर के अणु-अणु तक पहुंच जाती है, जिससे अनावश्यक एवं हानिप्रद द्रव्य नष्ट होते हैं, विषांश निर्वासित होते हैं, जिससे सुखद नींद अपने समय पर अपने आप आने लगती है।
8. आदत से मिलती है मुक्ति : लगातार योग करते रहने से आपके जीवन में हर तरह की बुरी आदतों से आपको मुक्ति मिल जाती है।
9. बढ़ती है आयु : लगातार योगासन, प्राणायाम और ध्यान करते रहने से व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है।
10. इंद्रिया होती हैं शक्तिशाली : वक्त के साथ हमारी पांचों इंद्रियां कमजोर हो जाती हैं। जैसे आंखों की ज्योति कमजोर पड़ जाती है। सुनने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है। वक्त के साथ कई तरह की कमजोरी आ जाती है, परंतु योग से मन और इंद्रियां मजबूत होकर कंट्रोल में रहती हैं।
आस्था /शौर्यपथ /देवी पार्वती के अत्यंत उग्र रूप को धूमावती के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल अष्टमी को देवी के अवतरण दिवस पर मां धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 18 जून को है। धूमावती देवी की कृपा से साधक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त कर लेता है।
देवी साधक के पास बड़ी से बड़ी बाधाओं से लड़ने और उनको जीत लेने की क्षमता आ जाती है। महाविद्या धूमावती के मंत्रों से बड़े से बड़े दुखों का नाश होता है। धूमावती जयंती पर रुद्राक्ष की माला से 21, 51 या 108 बार इन मंत्रों का जाप करें। आइए जानें-
धूमावती गायत्री मंत्र- ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात।
देवी मां का महामंत्र है- धूं धूं धूमावती ठ: ठ:
इस मंत्र से काम्य प्रयोग भी संपन्न किए जाते हैं।
देवी को पुष्प अत्यंत प्रिय हैं इसलिए केवल पुष्पों के होम से ही देवी कृपा कर देती है, आप भी मनोकामना के लिए यज्ञ कर सकते हैं, जैसे-
1. राई में सेंधा नमक मिला कर होम करने से बड़े से बड़ा शत्रु भी समूल रूप से नष्ट हो जाता है।
2. नीम की पत्तियों सहित घी का होम करने से लम्बे समय से चला आ रहा ऋण नष्ट होता है।
3. जटामांसी और काली मिर्च से होम करने पर काल सर्प दोष नष्ट होते हैं व क्रूर ग्रह के दोष भी नष्ट होते हैं।
4. रक्तचंदन घिस कर शहद में मिला लें व जौ से मिश्रित कर होम करें तो दुर्भाग्यशाली मनुष्य का भाग्य भी चमक उठता है।
5. गुड़ व गन्ने से होम करने पर गरीबी सदा के लिए दूर होती है।
6. केवल काली मिर्च से होम करने पर कारागार में फंसा व्यक्ति मुक्त हो जाता है।
7. मीठी रोटी व घी से होम करने पर बड़े से बड़ा संकट व बड़े से बड़ा रोग अति शीघ्र नष्ट होता है।
आस्था / शौर्यपथ / धरती देवी के लिए संस्कृत नाम पृथ्वी है और उन्हें भूदेवी कहा जाता है। साथ ही साथ हिन्दू धर्म में उन्हें भूमी देवी भी कहा जाता है और वह भगवान विष्णु की पत्नी थीं। उन्हें बौद्ध ग्रंथों में भी वर्णित किया गया है। ऋग्वेद और कई प्राचीन पवित्र ग्रंथों में उनका उल्लेख मिलता है।
वह पृथ्वी देवी है और अपनी सर्वोच्च शक्ति के माध्यम से हमारी रक्षा करती है। एक बार सत्ययुग के दौरान, उन्हें असुर राजा हिरण्याक्ष ने समुद्र में फेंक दिया था, तब भगवान विष्णु ने 'वराह अवतार' लेकिन उन्हें समु्द्र से निकाला था।
पृथ्वी पर अक्सर होने वाली समस्याओं का सामना करने के लिए धैर्य और क्षमता के लिए उन्हें कई ऋषियों और देवताओं द्वारा सराहना मिली है। उन्होंने त्रेता युग में माता सीता का अवतार लिया और भगवान राम की सेवा की। उन्होंने द्वापर में माता सत्यभामा का अवतार लिया और भगवान कृष्ण की उचित तरीके से सेवा की। इस कलियुग में, उन्होंने अंदल अवतार लिया और भगवान विष्णु की सेवा की और उनमें विलीन हो गईं।
उनकी सौम्यता और दयालुता बरसाने के लिए धरती पर लोग उनकी सराहना करते हैं। उन्हें लक्ष्मी के अवतार के रूप में भी पूजा जाता है। उसके नाम पर कई मंदिरों का निर्माण किया गया और लोगों द्वारा पूजा की जाती है। उसमें से श्री भूवराहनाथ स्वामी मंदिर कर्नाटक में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है।
ऐसा माना जाता है, कि वर्तमान कलियुग में, धर्म की कमी और लोगों के बुरे कामों के कारण, वह लोगों के बुरे कामों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। उनकी कृपा है कि वह लोगों की स्थिति के बारे में चिंता करती है और उन्हें ठीक करने की कोशिश करती है।
अधिकांश विष्णु मंदिरों में, भूदेवी भगवान विष्णु और श्रीदेवी के साथ दिखाई देती हैं। उन्हें भगवान विष्णु की दूसरी पत्नी माना जाता है और उनके विभिन्न नामों का जप करके हमेशा उनकी पूजा करते हैं। श्रीविल्लिपुथुर अंदाल मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है। बहुत से भक्त इस मंदिर में जाते हैं और विभिन्न पूजा एवं होम करते हैं। वराह मंदिर में, वह वराहस्वामी की गोद में बैठी है। वराह भगवान विष्णु का एक अवतार है। दोनों हमें आशीर्वाद देते हैं।
हमें माता भूदेवी के समान धैर्य बनाए रखना सीखना होगा जो पृथ्वी में लोगों के नकारात्मक कृत्यों को सहन कर रही है और अभी भी हमें आशीर्वाद दे रही है और सभी प्रकार की कठिन परिस्थितियों से हमारी रक्षा और सुरक्षा कर रही है।
अगर हम ईमानदारी से अपने मन में उसकी पूजा करते हैं तो भूदेवी हमें हमारे पापों से छुटकारा दिलाती है। वह ग्रहों के बुरे प्रभावों की दूर करती और लोगों के विभिन्न दोषों को भी दूर करती हैं। वह हमें लंबी बीमारी से भी उबारती और हमारे जीवन में एक अच्छा स्वास्थ्य और शांति देती है।
वह हमारे जीवन में सभी प्रकार का लाभ और बेहतर स्थिति देती है। अगर हम लगातार उसकी पूजा करते हैं, तो वह हमें मोक्ष पाने में भी मदद करती है। वह हमें हमारे जीवन में धैर्य, ज्ञान, बुद्धि, धन, साहस और साहस प्रदान करेगी। आइए हम पवित्र माता की पूजा करें और धन्य हो।
ॐ श्री भूदेवीय नम:।
आस्था /शौर्यपथ / मंगलवार को हनुमान जी का वार माना जाता है। यही मंगल तब और अधिक विशेष हो जाता है जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है। 15 जून यानी आज ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल है। इस दिन श्री बजरंगबली की साधना करने से विशेष फल मिलता है।
हनुमान जी के भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। खास कर लखनऊ (उत्तरप्रदेश की राजधानी) में इन खास दिनों को एक महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इस संबंध में मान्यता है कि श्री हनुमान जी प्रभु श्रीराम जी से पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार वाले दिन ही मिले थे। यही कारण है कि इसे बड़ा मंगल कहा जाता है।
ज्येष्ठ मास का पहला बड़ा मंगल जहां 1 जून 2021 को मनाया गया, वही दूसरा बड़ा मंगल 8 जून को था। 15 जून को ज्येष्ठ का तीसरा बड़ा मंगल पंचमी तिथि में पड़ रहा है। आज यह दिन रवि और सावरथ सिद्धि योग में मनाया जाएगा। जो कि सुबह 05.07 मिनट से 09.42 मिनट तक रहेगा। और चौथा बड़ा मंगल 22 जून को, भूमि प्रदोष और त्रयोदशी तिथि को त्रिपुष्कर योग में मनाया जाएगा। आज के दिन कुछ खास उपाय किए जाते हैं। आइए जानें-
आज करें ये 5 खास उपाय-
1. आर्थिक कष्टों से मुक्ति के लिए आज हनुमान जी को पूजा के दौरान सिन्दूर अर्पित करना शुभ माना जाता है।
2. आज के दिन हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए पान का बीड़ा चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से रोजगार और नौकरी में तरक्की के योग बनने की संभावनाएं बढ़ जाती है, ऐसी मान्यता है।
3. आर्थिक लाभ के लिए आज हनुमान जी के मंदिर में उनकी प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पढ़ना चाहिए।
4. रामभक्त हनुमान जी को गुलाब के पुष्प एवं केवड़े का इत्र आज के दिन अर्पित करने से जीवन में शुभता आती है। इसके साथ ही राम-राम नाम का जाप करने से जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है, ऐसा माना जाता है।
5. आज के दिन सच्चे मन से हनुमान चालीसा और बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए।
करें अन्य उपाय भी-
1. आज के दिन हनुमान मंदिर में रसीला पान चढ़ाएं। हो सके तो चना, गुड़, मीठी पूड़ी आदि का प्रसाद भी चढ़ाएं।
2. छोटे बच्चों को लाल परिधान दें, स्वयं भी खरीदें और धारण करें।
3. लाल अनाज, लाल वस्त्र में दक्षिणा के साथ लपेटकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करें।
4. संभव हो तो लाल शर्बत बंटवाएं।
5. इस दिन अन्न दान और जल दान का विशेष महत्व माना गया है। आज के दिन बच्चों में लाल रंग के फल भी बांटें।
आज के दिन उपरोक्त उपाय करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
जयपुर/ शौर्यपथ / राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में गायों की तस्करी के आरोप में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. जबकि दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है. पीड़ित मध्य प्रदेश के अचलपुर का रहने वाला है. यह वाकया रविवार की देर रात का है.
गायों को ले जा रहे वाहन में दो लोग सवार थे. जब वो गाड़ी लेकर बेगू नामक जगह पर पहुंचे तो भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गौ तस्करी के आरोप में उन दोनों की पिटाई शुरू कर दी. भीड़ की पिटाई से बाबूलाल भील की अस्पताल ले जाते हुए मौत हो गई जबकि दूसरे को घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां उसकी भी हालत नाजुक बनी हुई है.
राजस्थान पुलिस ने इस सिलसिले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि 13-14 जून की मध्य रात्रि चित्तौड़गढ़ जिले के बिलखंडा चौराहे से दो व्यक्ति गोवंश लेकर मध्य प्रदेश जा रहे थे. उन्होंने बताया कि उन दो व्यक्तियों पर भीड़ ने हमला कर दिया. इनमें से एक बाबू भील (25) ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. दूसरे घायल की पहचान पिंटू भील के रूप में की गई है.
उन्होंने कहा कि इस संबंध में चित्तौड़गढ़ पुलिस ने सात-आठ लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ की जा रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में अभियुक्तों को चिन्हित कर जल्द से जल्द कार्रवाई करेगी और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जाएगा. उदयपुर के पुलिस महानिरीक्षक व अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं. चित्तौड़गढ़ पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया है.
खाना खजाना /शौर्यपथ / गर्मियों में खीरा-बूंदी का रायता स्वाद बढ़ाने के साथ भूख भी बढ़ाने का काम करता है। लेकिन इस गर्मी नॉर्मल रायते की जगह ट्राई करें लीची रायता। यह रायता बनने में जितना आसान है खाने में भी उसका ही स्वादिष्ट है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाया जाता है लीची रायता।
लीची रायता बनाने के लिए सामग्री-
-लीची-1 कप गूदा
-दही- 1 कप
-चीनी-1 चम्मच
-नमक-स्वादानुसार
-जीरा पाउडर-1/2 चम्मच
-काली मिर्च पाउडर-1/2 चम्मच
-धनिया पत्ता-1 चम्मच
चाट मसाला-1/2 चम्मच
लीची रायता बनाने की विधि-
लीची रायता बनाने के लिए सबसे पहले आप एक ब्लेंडर में दही और चीनी डालकर मिक्स कर लें। इसके बाद इसी ब्लेंडर में आधी लीची भी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को किसी बर्तन में निकालकर ऊपर से बची हुई लीची डालें। लीची डालने के बाद नमक, जीरा पाउडर, काली मिर्च आदि सामग्री को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। इसके बाद ऊपर से धनिया पत्ता डालकर खाने के लिए सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / उम्र बढ़ने के साथ-साथ या फिर कैल्शियम की कमी से हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होना आम बात है। इन्हीं में से एक समस्या है गठिया की, जिससे कई लोग परेशान होते हैं। इसमें जोड़ों में दर्द, यूरिक एसिड के क्रिकेट का जोड़ों में जमा होना जैसी समस्याएं आती है। इससे बचने के लिए या फिर इलाज के लिए आप काफी कुछ आजमा चुके हैं और फिर भी कोई असर नहीं होता, तो इसका एक बेहतरीन घरेलू उपाय है हमारे पास।
ये उपाय है कच्चे पपीते की चाय। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी कि पपीते की चाय का सेवन आपकी गठिया की समस्या समाप्त कर सकती है। मेडिकल साइंस की दुनिया में भी इस चाय का काफी महत्व है। पपीता शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को घटाता है और इसमें सूजन को दूर करने वाले गुण होते हैं।
जानिए पपीते की इस चाय को बनाने की विधि -
इस चाय को बनाने के लिए आपको चाहिए - पानी, कच्चा हरा पपीता, ग्रीन टी बैग या ग्रीन टी की पत्तियां। अब चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में पानी लेकर उसमें कच्चे पपीते के टुकड़े डाल दें और इसे आंच पर रख दें। जब यह उबलने लगे, तो आंच बंद करके इसे थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें। इस इसे छान लें और इसमें ग्रीन टी डालकर लगभग 3 मिनट के लिए छोड़ दें। अब यह चाय पीने के लिए तैयार है, इसे गर्मागर्म या गुनगुनी ही पिएं।
जानिए पपीते की इस चाय के फायदे -
1 गठिया की समस्या में फायदेमंद।
2 शारीरिक सूजन कम करने में मददगार।
3 ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में मददगार।
4 शरीर के अवांछित तत्वों को बाहर कर आंतरिक सफाई में मददगार।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कोल्ड ड्रिंक या सोडा पीने के बजाय नेचुरल चीजों से बने ड्रिंक्स पीने की सलाह डॉक्टर्स भी देते हैं। इसमें डाले जाने वाले अलग-अलग मसालों से न सिर्फ टेस्ट बढ़ता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। हम बता रहे हैं ऐसे ही 11 देसी ड्रिंक्स के बारे में...
आम का पना
कच्चे आम का पना गर्मी में लू से बचने का बेस्ट ऑप्शन है। इसमें विटामिन सी की मात्रा ज्यादा होती है जिससे आपको तुरंत एनर्जी मिलती है।
कैसे बनाएं
कच्चे आम (कैरी) को छिलकर उबाल लें। इसमें काला नमक, पुदीना, शक्कर डालकर ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें। इसे गिलास में निकालें और बर्फ के टुकड़े डालकर सर्व करें।
शिकंजी
गर्मी में शिकंजी पीने से आपको तुरंत एनर्जी मिलती है। शिकंजी इस मौसम में होने वाली डलनेस को दूर करेगी। इसे बनाकर कुछ दिन तक फ्रिज में रखा जा सकता है।
कैसे बनाएं
एक जग में पानी लें। उसमें नींबू का रस, जीरा पाउडर, काला नमक और शक्कर मिला लें। अब शिकंजी को छलनी से छालकर गिलास में डालें और बर्फ के टुकड़े मिलाकर सर्व करें।
मैंगो मिंट लस्सी
आम और पुदीने से बनी लस्सी गर्मी में आपको फ्रेश रखेगी। इस एनर्जेटिक ड्रिंक को बनाकर तुरंत सर्व करें।
कैसे बनाएं
आम, शक्कर, पुदीना, इलायची पाउडर, नींबू का रस और दही को मिलाकर ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें। आम के स्मूद हो जाने पर इसे गिलास में निकालें और बर्फ डालकर सर्व करें।
पुदीने का शर्बत
पुदीने का शर्बत गर्मी में डिहाइड्रेशन और लू से बचाता है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक रखता है।
कैसे बनाएं
ब्लेंडर में पुदीना, शक्कर या गुड़, शहद, काला नमक, कालीमिर्च और जीरा पाउडर मिलाकर पीस लें। इस पेस्ट की कम मात्रा को पानी के साथ मिलाकर गिलास में डालें और बर्फ मिलाकर सर्व करें।
छाछ
इसे पीने से पेट की जलन और एसिडिटी दूर होती है। छाछ पीने से वेट लॉस होता है और डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक रहता है।
कैसे बनाएं
दही में नमक, काला नमक, जीरा पाउडर और हींग मिलाकर ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें। इसमें बर्फ मिलाकर गिलास में डालें और सर्व करें।
गुलाब का शर्बत
इस शर्बत को पीने से पेट की जलन दूर होती है। यह बॉडी को कूल रखता है।
कैसे बनाएं
एक पैन में पानी और शक्कर मिलाकर चाशनी बना लें। इसमें गुलाब जल, इलायची पाउडर और ताजी गुलाब की पत्तियों का पेस्ट डालें। इसे छानकर फ्रिज में रख दें। सर्व करते समय इस शर्बत को पानी के साथ मिलाकर बर्फ डालें और सर्व करें।
जलजीरा
इसे पीने से एसिडिटी और डिहाइड्रेशन दूर होता है। जलजीरा गर्मी से राहत पाने का बेहतर ऑप्शन है।
कैसे बनाएं
पानी में जीरा पाउडर, काला नमक, अमचूर पाउडर, नींबू का रस, थोड़ी सी शक्कर और पुदीने की पत्तियों का पेस्ट मिला लें। इसे बर्फ के टुकड़े मिलाकर सर्व करें।
ऐलोवेरा जूस
यह जूस गर्मी से होने वाली स्किन टैनिंग को दूर करने में मददगार है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम को इंप्रूव करता है। इसे पीने से तुरंत एनर्जी मिलती है और गर्मी में भी स्किन का ग्लो बरकरार रहता है।
कैसे बनाएं
एलोवेरा के कांटेदार किनारे हटा दें। इसकी पत्तियों के बीच जमा गूदा निकालें। इसे मिक्सी में डालकर लेमन या ऑरेंज जूस और नमक मिलाकर पीस लें और बर्फ के टुकड़े डालकर सर्व करें।
बेल का शर्बत
गर्मी में इसे अमृत के समान माना गया है। यह डायरिया को दूर करने में मददगार है। डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक रखता है और लू से बचाता है।
कैसे बनाएं
बेल के फल का गूदा निकालकर अच्छी तरह मैश कर दें। इसमें शक्कर, काला नमक, जीरा पाउडर और चाट मसाला मिलाकर ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें। इसे बर्फ मिलाकर सर्व करें।
इमली का अमलाना
गर्मी से बचने के लिए इमली से बने इस राजस्थानी ड्रिंक को पीजिए। लू से राहत पाने का यह इफेक्टिव तरीका है।
कैसे बनाएं
इमली और पानी मिलाकर दो घंटे के लिए रख दें। मिश्रण को छानकर इसमें शक्कर, कालीमिर्च पाउडर, इलायची पाउडर, काला नमक, सादा नमक, बर्फ और पानी डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसे गिलास में डालें और सर्व करें...
आस्था / शौर्यपथ / चार धाम की यात्रा करते समय हो सकता है कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम हो कि ये चारों धाम कहां हैं और इनकी यात्रा का महत्व क्या है।
उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को ही चार धाम की यात्रा माना जा रहा है जबकि इन चारों की यात्रा करना तो एक धाम की यात्रा ही कहलाती है। इन्हें छोटा चार धाम कहा जाता है।
छोटा चार धाम : बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या और इसके उत्तर भारत में होने के कारण यहां के वासी इसी की यात्रा को ज्यादा महत्व देते हैं इसीलिए इसे छोटा चार धाम भी कहा जाता है। इस छोटे चार धाम में बद्रीनाथ के अलावा केदारनाथ (शिव ज्योतिर्लिंग), यमुनोत्री (यमुना का उद्गम स्थल) एवं गंगोत्री (गंगा का उद्गम स्थल) शामिल हैं।
क्यों महत्व रखता है छोटा चार धाम : उक्त चारों ही स्थान पर दिव्य आत्माओं का निवास माना गया है। यह बहुत ही पवित्र स्थान माने जाते हैं। केदारनाथ को जहां भगवान शंकर का आराम करने का स्थान माना गया है वहीं बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां वैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। यहां बदरीनाथ की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई, चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है।
केदार घाटी में दो पहाड़ हैं- नर और नारायण पर्वत। विष्णु के 24 अवतारों में से एक नर और नारायण ऋषि की यह तपोभूमि है। उनके तप से प्रसन्न होकर केदारनाथ में शिव प्रकट हुए थे। दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम है जहां भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। कहते हैं कि सतयुग में बद्रीनाथ धाम की स्थापना नारायण ने की थी। भगवान केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद बद्री क्षेत्र में भगवान नर-नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है। इसी आशय को शिवपुराण के कोटि रुद्र संहिता में भी व्यक्त किया गया है।
नीचे है प्रमुख चार धामों की जानकारी
1. बद्रीनाथ धाम : हिमालय के शिखर पर स्थित बद्रीनाथ मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। यह चार धामों में से एक है। बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड राज्य में अलकनंदा नदी के किनारे बसा है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप में बद्रीनाथ को समर्पित है। बद्रीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित और सतयुग का पावन धाम माना जाता है। इसकी स्थापना मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने की थी। बद्रीनाथ के दर्शन से पूर्व केदारनाथ के दर्शन करने का महात्म्य माना जाता है।
चार धाम में से एक बद्रीनाथ के बारे में एक कहावत प्रचलित है कि 'जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी'। अर्थात जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे पुन: उदर यानी गर्भ में नहीं आना पड़ता है। मतलब दूसरी बार जन्म नहीं लेना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को जीवन में कम से कम दो बार बद्रीनाथ की यात्रा जरूर करना चाहिए।
मंदिर के कपाट खुलने का समय : दीपावली महापर्व के दूसरे दिन (पड़वा) के दिन शीत ऋतु में मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। 6 माह तक दीपक जलता रहता है। पुरोहित ससम्मान पट बंद कर भगवान के विग्रह एवं दंडी को 6 माह तक पहाड़ के नीचे ऊखीमठ में ले जाते हैं। 6 माह बाद अप्रैल और मई माह के बीच केदारनाथ के कपाट खुलते हैं तब उत्तराखंड की यात्रा आरंभ होती है।
6 माह मंदिर और उसके आसपास कोई नहीं रहता है, लेकिन आश्चर्य की 6 माह तक दीपक भी जलता रहता और निरंतर पूजा भी होती रहती है। कपाट खुलने के बाद यह भी आश्चर्य का विषय है कि वैसी ही साफ-सफाई मिलती है जैसे छोड़कर गए थे।
2. जगन्नाथ पुरी : भारत के ओडिशा राज्य में समुद्र के तट पर बसे चार धामों में से एक जगन्नाथपुरी की छटा अद्भुत है। इसे सात पवित्र पुरियों में भी शामिल किया गया है। 'जगन्नाथ' शब्द का अर्थ जगत का स्वामी होता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है।
इस मंदिर का वार्षिक रथयात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। इसमें मंदिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं।
3. रामेश्वरम : भारत के तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे स्थित है हिंदुओं का तीसरा धाम रामेश्वरम्। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है। रामेश्वरम् में स्थापित शिवलिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर में केदारनाथ और काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। मान्यता अनुसार भगवान राम ने रामेश्वरम् शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व एक पत्थरों के सेतु का निर्माण भी करवाया था, जिस पर चढ़कर वानर सेना लंका पहुंची। बाद में राम ने विभीषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर यह सेतु तोड़ दिया था।
4. द्वारका : गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित चार धामों में से एक धाम और सात पवित्र पुरियों में से एक पुरी है- द्वारका। मान्यता है कि द्वारका को श्रीकृष्ण ने बसाया था और मथुरा से यदुवंशियों को लाकर इस संपन्न नगर को उनकी राजधानी बनाया था।
कहते हैं कि असली द्वारका तो समुद्र में समा गई थी लेकिन उसके अवशेष के रूप में आज बेट द्वारका और गोमती द्वारका नाम से दो स्थान हैं। द्वारका के दक्षिण में एक लंबा ताल है, इसे गोमती तालाब कहते हैं। इसके नाम पर ही द्वारका को गोमती द्वारका कहते हैं। गोमती तालाब के ऊपर नौ घाट हैं। इनमें सरकारी घाट के पास एक कुंड है जिसका नाम निष्पाप कुंड है। इसमें गोमती का पानी भरा रहता है।
उक्त चारों धाम के मार्ग में देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थल पड़ते हैं जिससे उन सभी के दर्शन भी हो ही जाते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
