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April 05, 2026
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टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / गर्मियों के मौसम आ गया है! और जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, जिनसे हमें निपटना पड़ता है। इस प्रकार शरीर प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल करना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए, प्याज उन लाभकारी सब्जियों में से एक है, जिसे इस मौसम में हर दिन खाना चाहिए।
क्‍यों खास है प्‍याज
प्याज एक जड़ वाली सब्जी है, जो मिट्टी से बड़ी मात्रा में पोषक तत्वों को अवशोषित करती है। सल्फर यौगिकों का उच्च स्तर इस सब्जी को तीखा स्वाद और गंध देता है। एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, B, C और आयरन की उच्च सांद्रता के साथ पैक, यह हमारे शरीर की प्रणाली को साफ रखने में मदद करती है।
सल्फर के अलावा, प्याज में क्वेरसेटिन भी होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है और हानिकारक मुक्त कणों से लड़ता है।
यहां हैं गर्मियों में प्याज खाने के फायदे
1. हाई टेंपरेचर
प्याज आपको गर्मी के मौसम में ठंडा रख सकती है, क्योंकि इसमें ठंडक देने के गुण होते हैं। इसमें वोलेटाइल ऑयल होता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद करता है। गर्मियों में प्याज को सलाद के रूप में कच्चा खाया जा सकता है। गर्मियों में कच्ची प्याज का सेवन करने से शरीर में विटामिन C की मात्रा भी बढ़ जाती है।
2. अपच और कब्‍ज
प्याज में फाइबर और प्रीबायोटिक्स की अच्छी मात्रा इसे गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद बनाती है। इसलिए, प्याज की मदद से अपने पाचन को आप दुरुस्‍त रख सकती हैं। प्याज कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर हृदय स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकती है।
3. हीट स्ट्रोक
लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे में कच्चा प्याज खाने से शरीर को अंदर से ठंडक मिलती है। हीट स्ट्रोक के इलाज के लिए प्याज का पेस्ट बहुत प्रभावी होता है, क्योंकि इसमें उत्कृष्ट अवशोषक गुण होते हैं। इस पेस्ट को माथे, कान के पिछले हिस्से और छाती पर लगाने से हीट स्ट्रोक का इलाज होता है।
4. असंतुलित रक्‍त शर्करा
मधुमेह रोगियों को भी अपने आहार में प्याज को शामिल करना चाहिए। प्याज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 10 होता है, जो इसे मधुमेह रोगियों के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें बहुत कम कार्ब्स और उच्च मात्रा में फाइबर भी होते हैं। ये गुण मिलकर प्याज को मधुमेह रोगियों के लिए एक आदर्श बनाते हैं।
5. हाई ब्लड प्रेशर
प्याज आपके रक्तचाप के लिए भी अच्छा है। इसमें पोटेशियम होता है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। उच्च रक्तचाप वाले लोगों को प्याज का सेवन सलाद के रूप में करना चाहिए।
6. सनबर्न
प्याज गर्मियों में न सिर्फ आपके शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह आपकी त्वचा के लिए भी मददगार साबित हो सकती है। प्याज के रस को बाहरी रूप से धूप से झुलसी त्वचा पर एक बेहतरीन इलाज के रूप में लगाया जा सकता है। साथ ही, यह बालों के लिए भी फायदेमंद है।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / एक आम कहावत है कि प्यार के मामले में समझदार लोग भी कभी-कभी मूर्ख बन जाते हैं। यानी प्यार में आप दिमाग से ज्यादा दिल से फैसले लेते हैं लेकिन यह फैसले आपके दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करते हैं। कई लोगों के जीवन में एक ऐसा फेज आता है, जब उन्हें अपने पार्टनर से धोखा मिलता है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि पार्टनर को दूसरा मौका देना चाहिए या नहीं। मनोचिकित्सकों के अनुसार प्यार को हल्के में न लें क्योंकि यह न सिर्फ इमोशनल हेल्थ बल्कि फिजिकल हेल्थ पर भी असर डालता है। ऐसे में जब आप सेकंड चांस देने के बारे में सोचें, तो खुद से यह भी सवाल करें कि क्या ऐसा करना आपकी इमोशनल और फिजिकल हेल्थ के लिए अच्छा होगा?
खुद से सवाल करें कि क्यों देना चाहिए सेकंड चांस
चाहे गर्लफ्रेंड हो या फिर बॉयफ्रेंड, सेकंड चांस देने की बात आए, तो सबसे पहले खुद से यह सवाल करें कि आप उन्हें यह मौका क्यों देना चाहते हैं। अगर यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि आप उनके बिना अकेलापन महसूस करते हैं या फिर उनके बारे में सोचते ही आप इमोशनल हो जाते हैं, तो शायद आपको खुद को रोकना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ अकेलापन दूर करने के लिए किसी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेना हमेशा ही बड़ी गलती होती है।
खुद को टाइम दें और दिमाग में थोड़ा सा रीवाइन्ड प्ले करें। उन सभी मुद्दों के बारे में सोचें जिसके कारण ब्रेकअप की नौबत आई। हर पॉइंट को दोनों पक्षों की ओर से कंसीडर करें और यह तय करें कि क्या आपने पहली बार ब्रेकअप कर ओवररिऐक्ट किया या फिर सच में यह आपकी पीसफुल लाइफ के लिए जरूरी हो गया था। इसे लेकर जल्दबाजी न करें और पर्याप्त टाइम लें क्योंकि सेकंड चांस का मीनिंग है आप फिर से दूसरे व्यक्ति को अपनी लाइफ में एंट्री देते हुए अपने इमोशन्स सौंप रहे हैं।

सेहत /शौर्यपथ /परिसोधना टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने हाइब्रिड मल्टीप्लाई मास्क बनाया है, जो महीन कणों और बैक्टीरिया को रोकने में सक्षम होगा। इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह जानकारी जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने गुरुवार को दी।
डीबीटी ने बताया कि इस मास्क को सांस लेने में आसानी, कान पर बांधने में सहूलियत और उष्ण कटिबंधीय मौसमी हालात को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसे पूरी तरह से हाथ से बुने सूती धागों वाली सामग्री से बनाया गया है।
यह मेड इन इंडिया मास्क सूक्ष्म कणों (90 प्रतिशत तक) और बैक्टीरिया (करीब 99 प्रतिशत) से रक्षा करेगा। कणों और जीवाणुओं को अलग रखने के लिए इसमें एक विशेष परत लगाई गई है। एक मास्क की कीमत करीब 50 से 75 रुपये के बीच होगी। जनता के लिए कंपनी इसे किफायती कीमत पर बना रही है।

आस्था /शौर्यपथ / गंगा दशहरा का पर्व दान का पर्व है। इस दिन गर्मी से जुड़ी चीजें जैसे शर्बत, पानी और मौसमी फल आदि का दान किया जाता है। इस साल यह पर्व 20 जून को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गंगा में स्नान करें और स्नान के बाद देवी गंगा की आरती और विशेष पूजा की जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन रामेश्वरम में भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी।

ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन गंगा स्नान से कई यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होते हैं, लेकिन कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन शर्बत, पानी, मटका, पंखा, खरबूजा, आम. चीनी आदि चीजें दान की जाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि व्यक्ति इस दिन जिस भी चीज का दान करते हैं वो संंख्या में 10 होनी चाहिए।

गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त
दशमी तिथि आरंभ- 19 जून 2021 को शाम 06 बजकर 50 मिनट पर
दशमी तिथि समापन – 20 जून 2021 को शाम 04 बजकर 25 मिनट पर रहेगा

गंगा दशहरा पूजा- विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इस बार कोरोना वायरस की वजह से गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं, इसलिए घर में रहकर ही नहाने के पानी में गंगा जल डालकर मां गंगा का ध्यान कर स्नान करें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
इस दिन मां गंगा का अधिक से अधिक ध्यान करें।
इस दिन दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
घर में रहकर ही मां गंगा की आरती करें।
मां गंगा आरती

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता...

चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता...

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता...
एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।
ॐ जय गंगे माता...
आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता...
ॐ जय गंगे माता...।।

गंगा दशहरा का महत्व

इस पावन दिन मां गंगा की पूजा- अर्चना करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है।
मां गंगा की पूजा अर्चना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

दुर्ग / शौर्यपथ / आज दुर्ग हृस्ढ्ढ के तत्वाधान में दूर्ग जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू के निर्दशानुसार दुर्ग शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा के नेतृत्व में हेमचंद यादव विश्व विद्यालय दुर्ग कुलपति महोदया से मिलकर परीक्षार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए परीक्षा शुल्क में कटौती कर राशि वापस दिलाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
जिस तरह आज पूरा विश्व कोरोना संकट से जूझ रहा इस समय परीक्षार्थियों को भी आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जो कि को कोरोना संकट के चलते हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में आयोजित की गई परीक्षा माध्यम ऑनलाइन होने की वजह से उत्तर पुस्तिका खरीदने राशि का वाहन स्वयं परीक्षार्थियों द्वारा किया जा रहा है इसके अतिरिक्त बहुत सारे परीक्षार्थियों को डाक के माध्यम से उत्तर पुस्तिका जमा करने से भी राशि का वाहन करना पड़ रहा है इन सभी परेशानियों को देखते हुए माननीय कुलपति महोदय से आग्रह किया गया है इस शैक्षणिक वर्ष में उत्तर पुस्तिका की उपलब्धता विश्वविद्यालय के माध्यम से नहीं की जा रही है। दुर्ग हृस्ढ्ढ छात्र हित को ध्यान में रखते हुए उत्तर पुस्तिका की राशि एवं डाक शुल्क की संभावित राशि परीक्षार्थियों को वापस दिलाने की मांग विश्विद्यालय मह से किया गया है। एवं कुलपति महोदया ने हमे अस्वस्थ किया है की छात्र हित को ध्यान मे रखते हुये हम परीक्षार्थियों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने वाले मे दुर्ग जिला संयोजक गोल्डी कोसरे , हरीश , सूर्यकांत, विकाश राजपूत, राहुल यादव, विकाश साहू ,राज देवांगन ,सोनू यादव , प्रवीण साहू , शुभम ,अभय ,जगदीश ,अमित सेन एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

-तीसरी लहर की आशंका से बच्चों को सुरक्षित रखने प्रयास तेज, टास्क फोर्स की पहली बैठक में लिया गया निर्णय, इलाज के लिए मेडिकल तैयारियों के साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए चलाया जाएगा गहन अभियान
-कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि टास्क फोर्स के अधिकारियों के ऊपर अहम जिम्मेदारी, जितना बेहतर तरीके से कार्य होगा बच्चे होंगे उतने ही सुरक्षित

दुर्ग / शौर्यपथ / तीसरी लहर की दशा में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका की स्थिति में इससे निपटने के उपाय के लिए जिले में टास्क फोर्स का गठन किया गया है। आज इसकी पहली अहम बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि कोरोना संक्रमण को लेकर बेहद सजग रहने की आवश्यकता है यदि तीसरी लहर की स्थिति बनती है तो उसकी रोकथाम के लिए पूरे उपाय इस मौके पर करना बेहद आवश्यक है। इसमें भी अहम है कि तीसरी लहर यदि बच्चों को भी गंभीर रूप से संक्रमित करे तो इसका क्या उपाय होगा। इसके लिए मेडिकल तैयारियाँ पूरी तरह से की जा रही है लेकिन प्रशासन का उद्देश्य यह है कि इसकी जरूरत ही न पड़े। यह हो पाएगा, कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर से। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक, सीएमएचओ डा. गंभीर सिंह ठाकुर एवं कोविड कंट्रोल की नोडल अधिकारी सुश्री प्रियंका वर्मा भी उपस्थित थी। कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर किस तरह से होगा इसके लिए कलेक्टर ने बैठक में टास्क फोर्स में निर्देश दिये। अधिकारियों ने भी इसमें फीडबैक दिये जो इस प्रकार हैं।
आनलाइन पढ़ाई में कोविड बचाव के उपाय शामिल किए जाएंगे- कलेक्टर ने कहा कि पढ़ई तुंहर द्वार में कोविड से बचाव के बारे में बच्चों को जानकारी दी जाएगी। किस तरह से मास्क पहनना उन्हें संक्रमण से बचाता है। किस तरह से हाथ धोने से शरीर में हाथों के माध्यम से आने वाले बैक्टीरिया और वायरस नष्ट होते हैं उनके बारे में बताना। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को इसे रोचक एनीमेशन माध्यमों से भी बताएं ताकि मनोरंजन के माध्यम से इसका संदेश भी बच्चों तक पहुँचे। इसके लिए आनलाइन विशेष सत्र भी चलाने के निर्देश कलेक्टर ने दिये।
खतरे के चिन्हों के बारे में जागरूक करेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। वे अपने केंद्रों में स्थिति पर विशेष नजर रखेंगी और कोविड के जैसे लक्षणों के चिन्हांकित होते ही इसकी जानकारी अधिकारियों को देंगी। साथ ही गृह भेंट के दौरान काउंसिलिंग में कुपोषण को हटाने के साथ ही कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग टास्क फोर्स से जुड़े विभागों के जमीनी कार्यकर्ताओं का करेगा प्रशिक्षण ताकि खतरे के चिन्हों को पहचानने में आसानी हो- स्वास्थ्य विभाग द्वारा आने वाले दिनों में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम किया जाएगा। यहाँ विशेषज्ञ चिकित्सक कोविड की बारीकियों के बारे में जमीनी कार्यकर्ताओं को बताएंगे। बेहतर प्रशिक्षण से शुरूआती दौर में ही संक्रमण को रोक पाने में मदद मिलेगी।

सेहत /शौर्यपथ /ककड़ी को पानी का पर्यायवाची कह सकते हैं। बाॅडी में पानी की कमी होने पर आप ककड़ी का भरपूर सेवन करें। ककड़ी में करीब 90 फीसदी पानी होता है। बाॅडी में पानी की कमी होने पर सलाद के रूप में ककड़ी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से शरीर में पानी की मात्रा में तो पूर्ति होती है साथ ही स्किन पर भी ग्लो आता है। सलाद के रूप में सबसे ज्यादा खीरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की लिए सबसे अहम होते हैं।
आइए जानते हैं गर्मी में खीरे से होने वाले फायदे के बारे में -
1.खीरे में पोषक तत्व के तौर पर विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम और कॉपर प्रमुख रूप से मौजूद होते हैं।
2.इसके सेवन से शरीर में ठंडक पहुंचती है। साथ ही पानी की मात्रा बढ़ती है। इतना ही नहीं यूरिन में होने वाली जलन में भी आराम मिलता है।
3.खीरे में मौजूद फाइबर से पाचन की समस्या में राहत मिलती है। गैस नहीं होती है, कब्ज में राहत मिलती है। पेट से संबंधित परेशानियों में आराम मिलता है।
4.खीरा खाने से मोटापे में राहत भी मिलती है। इसमें मौजूद कैलोरी के सेवन से वजन घटता है। खीरा खाने से मोटापा कम होता है।
5.त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है। जी हां, इसमें मौजूद तत्व से स्किन पर ग्लो आता है। रूख स्किन वालों के लिए बेहद फायदेमंद है।

शौर्यपथ / फादर्स डे क्या है और कब है, यह तो आप जानते ही होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि फादर्स डे क्यों मनाया जाता है? फादर्स डे मनाने की वजह क्या है? फादर्स डे की शुरुआत कैसे और कब हुई? फादर्स डे की कहानी या फादर्स डे का इतिहास क्या है?
फादर्स डे एक ऐसा अवसर है जो आपके पिताजी को विशेष महसूस कराने और पूरे परिवार के लिए उनके योगदान का एहसान मानने और उन्हें सम्मानित करने का अवसर लेकर आता है और हमें हमारे जीवन में पिता का महत्व समझाता है।
लेकिन हम फादर्स डे क्यों मनाते हैं? फादर्स डे की शुरुआत कैसे हुई? सबसे पहले फादर्स डे कब और कहां मनाया गया या फादर डे का महत्व क्या है?
वैसे तो फादर्स डे विश्व भर में अलग-अलग तारीखों को मनाया जाता है, लेकिन ज्यादातर देश इस दिन को जून के तीसरे रविवार को मनाते हैं। अमेरिका, इंडिया और कनाडा में यह दिन जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। इस साल फादर डे भारत में 20 जून को मनाया जाएगा।
फादर्स डे का इतिहास
फादर्स डे मनाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित है, जिनमें से यहां पर दो मुख्य कहानियां हम आपके साथ साझा कर रहे हैं जो फादर्स डे से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें फादर्स डे मनाने की वजह माना जाता है।
फादर्स डे की कहानी
पहली बार फादर्स डे 19 जून 1910 को अमेरिका में Ms. Sonora Smart Dodd के पिता को सम्मानित करने के लिए मनाया गया था। Sonora के पिता William's Smart ग्रह युद्ध अनुभवी थे। उनकी पत्नी की मृत्यु उनके छठे बच्चे को जन्म देने के समय हुई थी।
उन्होंने अपनी पत्नी के गुजर जाने के बाद अकेले ही अपने 6 बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा किया। विलियम्स स्मार्ट के गुजर जाने के बाद उनकी बेटी Sonora चाहती थी की, जिस दिन उसके पिता विलियम्स की मृत्यु (5 जून) हुई थी उस दिन फादर्स डे मनाया जाए।
लेकिन कुछ कारणों की वजह से यह दिन जून के तीसरे रविवार को कर दिया गया था। तभी से, लोग विश्व भर में जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाते हैं।
दूसरी "फादर्स डे की कहानी" के अनुसार, फादर डे अमेरिका में पहली बार Fairmont शहर, वर्जीनिया राज्य में 5 जुलाई 1908 को मनाया गया था।
अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में पहली बार 5 जुलाई 1908 को उन 361 पुरुषों की याद में father's day मनाया गया था जिनकी मृत्यु एक कोयला खदान विस्फोट में दिसंबर 1907 में हुई थी।
इनके अलावा और भी कई सारी कहानियां छिपी हुयी हैं जिनको फादर्स डे मनाने की वजह माना जाता है लेकिन यह 2 कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है।
बाद में, 1972 में राष्ट्रपति निक्सन के शासन काल के दौरान Father's day को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता दी गई।
पिछले कुछ वर्षों में, फादर्स डे फेस्टिवल ने अद्भुत लोकप्रियता हासिल की है। आज इसे एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार माना जाता है और न केवल अमेरिका में बल्कि अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राज़ील, फ्रांस, नॉर्व, जर्मनी, न्यूजीलैंड, जापान और भारत सहित दुनियाभर में बड़ी संख्या में मनाया जाने लगा हैं।
फादर्स डे क्यों मनाया जाता है?
दुनिया भर में लोग fathers डे को पिता को धन्यवाद देने, सम्मानित करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के अवसर के रूप में इस दिन को मनाते हैं। इस दिन बच्चे अपने डैड को उनका सबसे लोकप्रिय तोहफा देते हैं और उन्हें खास महसूस कराने की कोशिश करते हैं। फादर्स डे सबसे पहले पश्चिम वर्जीनिया के फेयरमोंट में 5 जुलाई 1908 को मनाया गया था।

आस्था / शौर्यपथ / मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को। आओ जानते हैं इस घंटी के 10 राज और पूजाघर में रखने के 5 फायदे।
10 राज :1. हिंदू धर्म अनुसार सृष्टि की रचना में ध्वनि का महत्वपूर्ण योगदान मानता है। ध्वनि से प्रकाश की उत्पत्ति और बिंदु रूप प्रकाश से ध्वनि की उत्पत्ति का सिद्धांत हिंदू धर्म का ही है। इसीलिए घंटी रूप में ध्वनि को मंदिर या पूजाघर में रखा जाता है।
2. जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद था, घंटी की ध्वनि को उसी नाद का प्रतीक माना जाता है।
3. घटी के रूप में सृष्टि में निरंतर विद्यमा नाद ओंकार या ॐ की तरह है जो हमें यह मूल तत्व की याद दिलाता है।
4. घंटियां 4 प्रकार की होती हैं:- 1.गरूड़ घंटी, 2.द्वार घंटी, 3.हाथ घंटी और 4.घंटा।
5. गरूड़ घंटी छोटी-सी होती है जिसे एक हाथ से बजाया जा सकता है।
6. द्वार घंटी द्वार पर लटकी होती है। यह बड़ी और छोटी दोनों ही आकार की होती है।
7. हाथ घंटी पीतल की ठोस एक गोल प्लेट की तरह होती है जिसको लकड़ी के एक गद्दे से ठोककर बजाते हैं।
8. घंटा बहुत बड़ा होता है। कम से कम 5 फुट लंबा और चौड़ा। इसको बजाने के बाद आवाज कई किलोमीटर तक चली जाती है।
9. भगवान गुरुढ़ के नाम पर है गुरुढ़ घंटी जिस का मुख गुरुण के समान ही होता है। भगवान गरुड़ को विष्णु का वाहन और द्वारपाल माना जाता है। अधिकतर मंदिरों में मंदिर के बाहर आपको द्वार पर गरुड़ भगवान की मूर्ति मिलेगी। दक्षिण भारत के मंदिरों में अक्सर इसे देखा जा सकता है।
10. घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जब प्रलय काल आएगा तब भी इसी प्रकार का नाद यानि आवाज प्रकट होगी
5 फायदे :1. घंटी विशेष प्रकार का नाद होता है जो आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है। इससे वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। ऐसा कहते हैं कि घंटी बजाने से वातावरण में एक कंपन पैदा होता है। इस कंपन के वायुमंडल में फैलने से जीवाणु, विषाणु इस तरह के सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं और वातावरण शुद्ध हो जाता है।
2. घर के पूजाघर या मंदिर में प्रात: और संध्या को ही आरती करते वक्त घंटी बजाने का नियम है। वह भी लयपूर्ण। इससे हमारा मन शांत होकर तनाव हट जाता है।
3. जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है वहां से नकारात्मक शक्तियां हटती है। नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वारा खुलते हैं। इससे सभी तरह के वास्तुदोष भी दूर हो जाते हैं।
4. स्कंद पुराण के अनुसार घंटी बजाने से मानव के सौ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
5. यह भी कहा जाता है कि घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है।

आस्था / शौर्यपथ / भारत में कई समाज या जाति के कुलदेवी और देवता होते हैं। भारतीय लोग हजारों वर्षों से अपने कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं। हालांकि आजकल अधिकतर परिवार ने अपाने कुलदेवी और कुल देवताओं को पूजना या उनको याद करना छोड़ दिया है। संभवत: इसी के कारण वे घोर संकट में घिरे हुए हैं। यदि ऐसा है तो 4 उपाय करें और संकटों से मुक्ति पाएं।
1. जन्म, विवाह आदि मांगलिक कार्यों में कुलदेवी या देवताओं के स्थान पर जाकर उनकी पूजा की जाती है या उनके नाम से स्तुति की जाती है। कुलदेवी की कृपा का अर्थ होता है सौ सुनार की एक लोहार की। बिना कुलदेवी कृपा के किसी के कुल का वंश ही क्या कोई नाम, यश आगे बढ़ नहीं सकता। अत: कुल देवी और देवता के लिए प्रतिदिन सुबह और शाम को भोग निकालें और उनके नाम का उच्चारण करें।
नाम नहीं याद हो तो स्थान का उच्चारण करें। जैसे, डुंगलाई वाली कुलदेवी की जय।
स्थान का नाम भी नहीं मालूम होतो तो हे माता कुलदेवी और कुलदेवता आपकी सदा विजयी हो। दुर्गा माता की जय, भैरू महाराज की जय।
2. एक ऐसा भी दिन होता है जबकि संबंधित कुल के लोग अपने देवी और देवता के स्थान पर इकट्ठा होते हैं। जिन लोगों को अपने कुलदेवी और देवता के बारे में नहीं मालूम है या जो भूल गए हैं, वे अपने कुल की शाखा और जड़ों से कट गए हैं। कुलदेवी या कुल देवता के स्थान से आपके पूर्वजों का पता लगता है। जिसे यह नहीं याद है वे भैरू महाराज और दुर्गा माता के मंदिर में जाकर उनके नाम का भोज चढ़ाएं और पूजा करें।
3. कुल देवी या देवता के स्थान पर जाकर एक साबूत नींबू लें और उसको अपने उपर से 21 बार वार कर उसे दो भागों में काटकर एक भाग को दूसरे भाग की दिशा में और दूसरे भाग को पहले भाग की दिशा में फेंक दें। इसके बाद कुलदेवी या देवता से क्षमा मांग कर वहां अच्छे से पूजा पाठ करें या करवाएं और सभी को दान-दक्षिणा दें।
4. कुलदेवता की पूजा करते समय शुद्ध देसी घी का दीया, धूप, अगरबत्ती, चंदन और कपूर जलाना चाहिए साथ ही प्रसाद स्वरूप भोग भी लगाना चाहिए। कुलदेवता को चंदन और चावल का टीका अर्पण करते समय ध्यान रखें की टूटे हुए या खंडित चावल ना हो। कुलदेवता को हल्दी में लिपटे पीले चावल पानी में भिगोकर अर्पण करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय पान के पत्ते का बहुत महत्व है जिसके साथ सुपारी, लौंग, इलायची और गुलकंद भी अर्पण करना चाहिए। कुलदेवी या देवता को पुष्प चढ़ाते हुए आपको इन्हें पानी में अच्छी तरह से धोना चाहिए। सभी देवी-देवताओं की पूजा जिस तरह सुबह-शाम की जाती है, उसी तरह कुलदेवी और देवता की पूजा भी दीपक जलाकर करनी चाहिए।

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