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शौर्यपथ। आस्था एक ऐसा एहसास है जो किसी व्यक्ति विशेष दल विशेष संगठन विशेष का नहीं हो सकता ईश्वर में आस्था सभी की रहती है आस्था के रूप अलग-अलग हो सकते हैं किंतु विधाता एक ही है । वर्तमान समय में प्रभु श्री राम के नाम पर जिस पार्टी ने अपने अस्तित्व को आज इस मुकाम तक पहुंचाया कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जानी जाती है जी हां बात अगर करें तो भारतीय जनता पार्टी ने जय श्रीराम के नारों के उद्घोष के साथ अपनी राजनीतिक पराकाष्ठा को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया कोई भी दल अगर धर्म को महत्व देता है तो यह उस दल की अपनी सोच रहती है इस पर कोई आक्षेप नहीं लगा सकता और यह कोई गलत भी नहीं किंतु ऐसा भी नहीं की किसी अन्य दल के लोग आस्था पर अपना हक ना जमा सके हैं आस्था किसी दल के सदस्यों की सीमा में नहीं बंधी होती है व्यक्ति चाहे किसी भी दल की मानसिकता का हो किंतु अपने आराध्य को पूरे भाव पूर्ण तरीके से मानता है और अपनाता है वर्तमान में जिस तरह से कर्नाटक चुनाव में बजरंग दल के प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक चर्चा जोरों पर है और बजरंग दल के प्रतिबंध को जहां एक और भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बजरंगबली को ताला लगाने का आरोप कांग्रेस पर लगा रहे हैं जिसके कारण राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है समाचार पत्रों में,न्यूज़ चैनलों में कांग्रेस को लगातार बजरंगबली का विरोधी करार दिया जा रहा है जिसकी आंच जब छत्तीसगढ़ में पहुंची तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उल्टे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही पलटवार कर दिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब फेंकने में माहिर हो गए हैं पूर्व में भी उन्होंने कई संतों को जिनके कार्यकाल की अवधि अलग-अलग सदी की थी 1 साल बैठाकर परिचर्चा की बात कर दी भारत की जनसंख्या को कई गुना बढ़ा दिया अब ऐसे ही बजरंगबली को ताला लगाने की बात कह रहे हैं जबकि कर्नाटक के मेनिफेस्टो में बजरंग दल पर बैन लगाने पर विचार करने की बात कही गई है ना कि बजरंगबली पर ताला.चुनावी मौसम है राजनीतिक चर्चा परिचर्चा तो चलती ही रहेगी आरोप-प्रत्यारोप तो लगते ही रहेंगे किंतु इन सब बातों में एक बात और सामने आई जोकि सोचने भी है और चिंतनीय भी छत्तीसगढ़ में साल 2003 से 2018 तक प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में थी ऐसे में श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में पहचान बना चुकी भारतीय जनता पार्टी आखिर कौशल्या माता को क्यों याद नहीं किया। विश्व के एकमात्र कौशल्या माता मंदिर जो कि रायपुर के चंदखुरी में स्थित है कौशल्या माता प्रभु श्री राम की माता है प्रभु श्री राम जो माता के चरणों में स्वर्ग देखते थे आखिर 15 साल भारतीय जनता पार्टी नीत रमन सरकार ने कौशल्या माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए क्या किया ।
कहने का तात्पर्य यह नहीं की माता कौशल्या को भूलकर भारतीय जनता पार्टी ने कोई अपराध कर दिया हो किंतु यह भी सत्य है कि कौशल्या माता मंदिर का जीर्णोद्धार और महोत्सव वर्तमान की भूपेश सरकार ने बड़े धूमधाम से किया वही वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम जिन मार्गों पर अपनी यात्रा किए उन मार्गों को राम वन गमन पथ के नाम से सौंदर्यीकरण करने का कार्य भी भूपेश सरकार ने किया ।
सरकारी कोई भी हो किंतु धर्म का महत्व और स्थान अपने आप में अलग है धर्म ना तो किसी दल की सीमा में है और ना ही किसी की निजी संपत्ति, धर्म और आस्था हर उस व्यक्ति का है जो अपने आराध्य को मन भाव से मानता है और अपनाता है आज राजनीति में विकास की बात रोजगार की बात स्वास्थ्य की बात शिक्षा की बात उद्योग की बात ना होकर अगर धर्म के सहारे राजनीति हो तो उस आम जनता का क्या होगा जो अपना धर्म अपने कर्म को मानता है जो सुबह उठकर यह सोचता है कि शाम तक कोई काम मिल जाए ताकि परिवार का पोषण कर सके उस गरीब और निचले तबकों के लिए सबसे बड़ा धर्म यही है कि उसे कोई ऐसा काम मिले जिससे वह अपने परिवार को दो वक्त की रोटी और सादगी पूर्ण जीवन बिताने के लिए मददगार साबित हो आज भी देश और प्रदेश के की बड़ी आबादी अपने कर्म को ही धर्म मानती है क्योंकि उसे यह मालूम है कि अगर कर्म नहीं करेंगे तो परिवार का पोषण नहीं कर पाएंगे. शास्त्रों में भी कर्म को ही पूजा जाता है अगर कर्म अच्छे रहें तो धर्म सर्वोच्च हो ही जाएगा काश वह दिन कब आएगा जब भारत की राजनीति में धर्म के जगह कर्म स्थान लेगा, बेरोजगारी का मुद्दा स्थान लेगा, स्वास्थ्य का मुद्दा स्थान लेगा, महंगाई का मुद्दा स्थान लेगा,उद्योग का मुद्दा स्थान लेगा,शिक्षा का मुद्दा स्थान लेगा,तरक्की और खुशहाली का मुद्दा स्थान लेगा, विकास का मुद्दा स्थान लेगा......
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में कोई ऐसा मुद्दा नहीं मिल रहा जिसके सहारे आने वाले विधान सभा में भाजपा सत्ता के द्वार तक पहुँच सके . देश का शायद छत्तीसगढ़ ही पहला ऐसा प्रदेश होगा जिसने अपने चुनावी घोषणा पत्र के एक बड़े हिस्से को पूरा कर दिया हो और साथ में ऐसी कई योजनाओं को क्रियान्वित किया है जो घोषणा पत्र में भी नहीं था .
आज प्रदेश में शिक्षा की बात करे तो स्वामी आत्मानंद स्कूल , स्वास्थ्य में डॉ. खूबचंद बघेल योजना , गोधन न्याय योजना , गौठान योजना , नालो को संरक्षित कर कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी , वनोपज का समर्थन मूल , भूमिहीन मजदूरो के लिए योजना ऐसी कई योजनाये है जिसे लागू भी किया गया और जमीनी स्तर पर क्रियान्वित भी किया गया . ऐसे में प्रदेश भाजपा अब मुद्दों की तलाश में है वही छोटी छोटी बात में कई बातो को जोड़कर बड़ी बात बनाने का प्रयास भी निरंतर ज़ारी है . उसी तारतम्य में अगर बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात को ही ले ले तो साफ़ नजर आ रहा है कि बात कुछ और ही कही गयी किन्तु प्रचार किसी और तथ्यों का किया जा रहा है .
बता दे के कर्णाटक विधान सभा चुनाव के अपने संकल्प पत्र में कांग्रेस ने पीएफआई और बजरंग दल पर बेन का उल्लेख किया किन्तु कही पर भी हिन्दुओ के आराध्य बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात नहीं कही गयी किन्तु कर्णाटक के एक चुनावी सभा में देश के पीएम मोदी जी ने बजरंग बलि को ताले में बंद करने का आरोप कांग्रेस पर लगा दिया बस फिर क्या इसकी आंच छत्तीसगढ़ में पहुंचनी थी जो पहुंच गयी और जैसा कि सभी को मालुम है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भारत के ऐसे राजनेता /मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री नहीं है जो प्रेस की बातो का सवालों का जवाब ना दे . मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कर्नाटक चुनाव में संकल्प पत्र में पीएफआई और बजरंग दल पर बेन लगाने पर वहा की सरकार बनने के बाद विचार किया जाएगा वही छत्तीसगढ़ में बजरंगदल के कार्यो पर नजर रखी जा रही है यहाँ सब ठीक है . कांग्रेस ने बजरंग दल ,पीएफआई पर बेन लगाने के विचार का उल्लेख किया ना कि हिन्दुओ के आराध्य देव बजरंगबली जी पर .
किन्तु प्रदेश भाजपा के द्वारा और उनके कई राजनेताओ के द्वारा बजरंगबली को ताले में बंद ? की बात का पुरजोर प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री को हिन्दू विरोधी होने का अभियान छेड़ दिया गया . सोशल मिडिया के माध्यम से ऐसा प्रचार अभियान शुरू हो गया कि सच धुंधला होते जा रहा और झूठ तेज रौशनी में नहा गया बिलकुल ठीक उसी तरह जिस तरह आलू से सोना बनाने की बात कही किसी और ने थी और प्रचार किसी और का हो गया क्योकि यहाँ की राजनीति में नेता सिर्फ अपने मन की बात कहता है आम जनता की सुनता ही नहीं हाँ ये जरुर है कि हर 5 साल में हाथ जोड़ का वोट मांगने ज़रूर दरवाजे पर आ जाता है .
आश्चर्य है कि प्रदेश में स्वयमेव ही मुख्यमंत्री की खुर्सी की दौड़ में अपने आप को रखने वाले राजनेता भी बजरंग बलि जी को ताले में बंद करने की बात का आरोप लगाने में मुखिया बनने कि जुगत लगा रहे है क्यों देश के पीएम ने यह बात जो कह दी अब उनकी बात का प्रचार करना तो ज़रूरी क्योकि ये भारत है यहाँ बड़े बड़े जादू होते है देश की जनसँख्या 600करोड़ पहुँच जाती है , तीन अलग अलग सदी के महापुरुष / संत एक मंच पर बैठ कर मंत्रणा करते है , डिजिटल कमरे का अविष्कार के पहले ही फोटो शूट हो जाता है जैसे बातो पर भी आँख बंद कर विश्वास कर लेते है क्योकि चाटुकारिता परमोधर्म माना जाता है राजनीति में .
अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ में जिस तरह से भाजपा के बड़े बड़े नेता बजरंग बलि को ताले में बंद करने वाले आरोप लगा रहे उसे क्या सिद्ध कर पायेंगे या आराध्य देव बजरंगबली के नाम के सहारे सत्ता के द्वारा तक पहुँचने में कामयाब होंगे क्योकि विकास की बात , महंगाई की बात तो कही नजर नहीं आ रही अब तक ...( लेखक के निजी विचार )
sharad pansari
chief editore (SHOURYAPATH NEWS )
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई न्याय योजनाओं से समाज के शोषित वंचित और गरीब तबकों का न केवल मान बढ़ा है बल्कि इन योजनाओं की बयार से बड़ी राहत मिल रही हैं। सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल से बढ़ाकर 20 क्विंटल कर दी है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों की श्रृंखला और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी नवाचारी पहल से लोगों को आसानी से शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रहीं हैं। बेरोजगारों को प्रतिमाह भत्ता मिलना प्रारंभ हो चुका है। इसी तरह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों की भी चिंता करते हुए उनके मानदेय में वृद्धि कर उनका मान बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मजदूर दिवस पर श्रमिकों का मान बढ़ाने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। कार्यस्थल पर दुर्घटना मृत्यु में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि एक लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में इन्हें देय राशि 50 हजार से बढ़ाकर ढाई लाख रुपए करने की घोषणा की। साथ ही अपंजीकृत श्रमिकों को भी कार्यस्थल पर दुर्घटना से मृत्यु होने पर एक लाख रुपए की सहायता प्रदान की जाएगी।
इसी प्रकार श्रमिकों के लिए मासिक सीजन टिकट एमएसटी जारी किया जाएगा, इससे घर से रेल अथवा बस से कार्यस्थल तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। यह कार्ड 50 किमी तक की यात्रा के लिए मान्य होगा। पंजीकृत निर्माणी श्रमिकों को नवीन आवास निर्माण अथवा क्रय के लिए 50 हजार रुपए का अनुदान और हार्ट सर्जरी, लीवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, न्यूरो सर्जरी, रीढ़ की हड्डी की सर्जरी, पैर के घुटने की सर्जरी, कैंसर, लकवा जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के अतिरिक्त भी 20 हजार रुपए का अनुदान निर्माणी श्रमिकों को मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में शिक्षित बेरोजगारों को 2500 रूपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में 250 करोड़ रूपये का नवीन मद में प्रावधान किया है। बेरोजगारी भत्ता योजना के पात्र पाए गए 66 हजार 256 युवाओं के खाते में 16 करोड़ रूपए की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की गई है। राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का विस्तार करते हुए इसे नगर पंचायतों में भी लागू किया है। इस योजना में 4 लाख 99 हजार से अधिक लोगों के बैंक खाते में अब तक 476.62 करोड़ की राशि अंतरित की गई है।
सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की भी चिंता करते हुए उनके मानदेय में वृद्धि करने की घोषणा की है। आंगनबाड़ी सहायिका का मानदेय वर्ष 2018 तक 2,500 रूपए प्रतिमाह था, जिसे बढ़ाकर 3,250 रूपए किया गया। वर्ष 2022-2023 में इसे बढ़ाकर 5,000 रूपए कर दिया गया। मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का मानदेय वर्ष 2018 तक 3,250 रूपए प्रतिमाह था, जिसे बढ़ाकर 4,500 रूपए किया गया। वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 7,500 रूपए किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का मानदेय वर्ष 2018 तक 5,000 रूपए प्रतिमाह था, जिसे 6,500 रूपए किया गया। वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 10 हजार रूपए किया गया।
मध्यान्ह भोजन रसोईयों का मानदेय 1,500 से बढ़ाकर 1,800 रूपए की गई है। स्कूल स्वच्छताकर्मियों का मानदेय 2,500 रूपए से बढ़ाकर 2,800 रूपए कर दिया गया है। मितानिनों को राज्य मद से 2,200 रूपए प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार वृद्ध पेंशन, विधवा, निराश्रित पेंशन की राशि को 350 रूपए से बढ़ाकर 500 रूपए कर दिया गया है। स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्ष को 750 रूपये और सदस्यों को 500 रूपये मानदेय प्रतिमाह मिलेगा।
ग्राम कोटवारों को सेवा भूमि के आकार के अनुसार अलग-अलग दरों पर मानदेय दिया जाता है। सरकार ने ग्राम कोटवारों को दिए जाने वाले मानदेय की दरों में भी वृद्धि की है, जिसके अनुसार 2,250 के स्थान पर 3,000 रूपए, 3,375 के स्थान पर 4,500 रूपए, 4,050 के स्थान पर 5,500 रूपए और 4,500 के स्थान पर 6,000 रूपए किया गया है। होमगार्ड के जवानों का मानदेय न्यूनतम 6300 से अधिकतम 6420 रूपये प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की गई है। ग्राम पटेलो का मानदेय 2000 रूपए से बढ़ाकर 3000 रूपए प्रतिमाह किया गया है।
साभार : जी.एस. केशरवानी, उप संचालक
शौर्यपथ / प्रदीप भोले के पैर में कीड़े के काटने से एक छोटा सा घाव हो गया था। जिसकी वजह से उन्हें चलने फिरने में तकलीफ़ होती थी।ऐसी स्थिति में वे कुर्सी पर बैठ स्टूल पर पांव रखकर अखबार पढ़ रहे थे। तभी एक मक्खी उनके घाव पर आ बैठी। भोले जी ने उसे कई बार भगाया पर वो ढीठ मक्खी घुम फिर कर घाव पर ही आ बैठती थी।
इससे हैरान परेशान भोले जी मक्खी से पूछ पड़े - तुम लोग हमेशा घाव पर ही क्यों बैठती हो?किसी का शरीर सुंदर-गठीला हो और उसके शरीर में कहीं छोटा-मोटा घाव हो जावे तो बाकी सुंदर जगह को छोड़कर तुम लोग वहीं जा बैठती हो ।
भोले के सवाल पर मक्खी हंसकर बोली- हम तुम्हारे घाव पर बैठते हैं यह तो हमारा प्राकृतिक गुण है।यही मक्खी धर्म-और मक्खी कर्म है।इसे तुम बुरा नहीं कह सकते,पर ईश्वर प्रदत्त सुंदर मानव शरीर को तुम लोगों ने गंदे आचार विचारों का घर क्यों बना डाला है?
मक्खी के इस सवाल से भोले जी हतप्रभ रह गए। उनके मस्तिष्क पर तत्काल यह विचार कौंध गया कि मक्खी से कहीं ज्यादा गंदगी पंसद तो अब इंसान बन गया है।वे बुदबुदाए- छी छी छी छी। फिर मक्खी से नजरें चुराते घाव पर मरहम मलने लगे।
साभार : *विजय मिश्रा 'अमित '*
पूर्व अति महाप्रबंधक (जन) एम 8 सेक्टर 2 अग्रोहा सोसाइटी, पोआ- सुंदर नगर रायपुर (छग)492013
मोबा 98931 23310
सिरसाखुर्द गांव को अब मूर्ति कला गांव के नाम से जानने लगे लोग
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में बसा एक छोटा सा गांव सिरसाखुर्द, जहां महिलाएं गोबर से मूर्तियां तैयार कर रही हैं। ये महिलाएं न सिर्फ ये खास मूर्तियां तैयार करती हैं बल्कि मांग के अनुसार बाजारों में भी उपलब्ध करा रही है। सिरसाखुर्द गांव की ये महिलाएं जय बजरंग स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। महिला समूह द्वारा गौतम बुद्ध, छत्तीसगढ़ का लोगो, राधा कृष्ण, गणपति और आदिवासी कलाकृति को गोबर के माध्यम से आकार दे रही हैं। बारह महिलाओं का यह समूह इन मूर्तियों की वजह से काफी चर्चा में है। दुर्ग जिले के सिरसाखुर्द गांव को अब लोग मूर्ति कला गांव के नाम से जानने लगे हैं। गांव की महिलाएं साथ मिलकर इन मूर्तियों को तैयार करती हैं। महिला स्व सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं गोबर से मूर्तियां बनाने के साथ-साथ त्यौहार के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीयेे, शुभ-लाभ जैसी कई सामग्रियां बना रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि ये मूर्तियां कैसे बनती है, तो इस पर जय बजरंग स्व-सहायता समूह की हेमलता सावें बताती है कि पहले गोबर से कंडे बनाते हैं, फिर उन्हें सुखाकर कूटते हैं। उसके बाद चक्की में पीसते हैं। पीस कर इसमें चिकना मुलतानी मिट्टी का मिश्रण डालकर पानी से गुंदा जाता है और अंत में सांचे में डाल कर मूर्तियां तैयार की जाती है। गोबर से मूर्ति बनाने में 15 दिन का समय लगता है। उन्होंने बताया कि 12 सदस्यों वाला जय बजरंग स्व-सहायता समूह ने नागपुर में मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत समूह की महिलाओं द्वारा मूर्तियां तैयार कर उसे स्थानीय बाजार में विक्रय कर आय अर्जित कर रही हैं जो उनके जीविका का साधन है।
उन्होंने बताया कि पुरई में भेंट–मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को स्व सहायता समूह की तरफ से गोबर से बनी मूर्ति भेंट की थी। गोबर से बने होने के कारण यह इकोफ्रेन्डली है। मूर्ति के नष्ट हो जाने पर इसे गमले या बगीचे में डाला जा सकता है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नही होगा और खाद का भी काम करेगा। इन महिलाओं के हुनर की सराहना कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुुमार मीणा ने भी की।
*विशेष लेख*
*मोमोस और पिज्जा से ज्यादा स्वादिष्ट और सेहदमंद है चावल का बोरे बासी*
*मजदूर दिवस के दिन छत्तीसगढ़ में मनाया जाएगा बोरे बासी तिहार*
बोरे बासी का नाम जुबां पर आते ही छत्तीसगढ़ के लोगों के जेहन में बोरे बासी के साथ आम की चटनी अर्थात अथान की चटनी, भाजी, दही और बड़ी-बिजौड़ी की सौंधी-सौंधी खुशबू से मन आनंदित हो जाता है। मुंह में पानी और चेहरे में बोरे बासी खाने की लालसा और ललक स्पष्ट दिखाई देती हैं। एक मई श्रमिक दिवस को पूरा छत्तीसगढ़ बोरे बासी तिहार के रूप में मनाया जाएगा। बोरे बासी तिहार का यह दूसरा वर्ष है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार वर्ष 2022 में एक मई मजदूर दिवस को बोरे बासी तिहार के रूप में मनाया गया। पहले वर्ष ही बोरे बासी तिहार को राज्य के हर वर्ग ने अपने मन से मनाया है। इस वर्ष भी पूरा राज्य बोरे बासी तिहार का इंतजार कर रहा है। युवाओं में लोकप्रिय व्यंजन मोमोस और पिज्जा से ज्यादा स्वादिष्ट और सेहदमंद है। बोरे-बासी तिहार से नई पीढ़ी के लोगों को भी छत्तीसगढ़ की परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहचान पूरे देश में वैसे तो राज्य के जनकल्याणकारी और राज्य की कला-संस्कृति, को बढ़ावा देने के लिए अभिनव पहल के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री के द्वारा लोककल्याण और राज्य की मूल संस्कृति और रीति-रिवाजों को संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से शुरू की गई। सभी योजनाओं और कार्यक्रमों को राज्य के सभी वर्ग के लोगों से पूरा समर्थन भी मिलते आया है। बोरे-बासी भी मुख्यमंत्री श्री बघेल के अभिनव पहल में एक है, जिसें लोगों का पूरा-पूरा सहयोग मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ में बोरे बासी प्रमुख व्यंजनों में से एक है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में वैसे तो बोरे बासी भी अलग-अलग बनाई जाती है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में चावल के गरम पका भोजन को रात के समय ठंडा होने के बाद पानी में डूबा कर बनाया जाता है, जिसे सुबह नास्ता और भरपेट भोजन के रूप में खाया जाता है। इसी प्रकार बोरे-बासी लघुधान्य फसल जैसे कोदो, कुटगी, रागी और कुल्थी की भी बनाई जाती है। बोरे-बासी के इन सभी प्रकारों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फ्राइबर, एनर्जी और विटामिन्स, मुख्य रूप से विटामिन बी-12, खनिज लवण जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। बोरे बासी, पिज्जा और मोमोस जैसे खाद्य पदार्थों से ज्यादा पौष्टिक,स्वादिष्ट और सेहदमंद है। लघु धान्य रागी 100 ग्राम में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाया जाता है, जिसे इस तरह समझा जा सकता है। प्रोटिन सौ ग्राम में 7.3 ग्राम, फैट 1.3 ग्राम, एनर्जी 328 ग्राम, फ्राईबर 3.6 ग्राम, मिनिरल्स 2.7 ग्राम, कैल्सियम 344 ग्राम, आयरन 3.9 ग्राम मिलता है।
राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों के आय में वृद्धि करने के उदे्श्य से लधु धान्य कोदो, कुटकी, रागी का समर्थन मूल्य भी तय किया है। सरकारी तौर पर इन फसलों की खरीदी की शुरूआत होने से किसानों को उचित दाम मिल रहा है, जिससे कृषकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
साभार:
गुलाब डडसेना, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
लेख । शौर्यपथ । 14 अप्रैल को भारतीय संविधान के रचयिता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का जन्मदिन है दुनिया के सबसे बड़े संविधान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन काल में कई विपरीत परिस्थितियों का सामना किया और हर परेशानियों का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहे किंतु उनके बारे में एक सच्चाई यह भी है कि वे कभी भी स्वतंत्र भारत के आम चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए ।
डॉ. भीम राव अंबेडकर आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव में अनुसूचित जाति संघ के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1952 में हुए पहली लोकसभा चुनाव में अम्बेडकर उत्तरी बंबई से एससीएफ पार्टी से उम्मीदवार थे और उनको एक समय उन्हीं के सहयोगी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नारायण काजोलोलर ने हरा दिया था।
1954 में भंडारा में हुए लोकसभा उप चुनाव एक बार फिर अम्बेडकर लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन इस बार भी अम्बेडकर की बुरी तरह हार हुई। अम्बेडकर उपचुनाव में तीसरे नम्बर पर रहे। दूसरे लोकसभा चुनाव से पहले ही अम्बेडकर की मौत हो चुकी थी। अम्बेडकर की मौत 65 साल की उम्र में 6 दिसम्बर को 1956 में हो गयी।
अम्बेडकर ने 1942 में ही अनुसूचित जाति संघ (एससीएफ) नाम से एक राजनीतिक दल का निर्माण किया था। एससीएफ की स्थापना अम्बेडकर ने दलित समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए की थी, लेकिन इस दल का 1946 में हुए भारत की संविधान सभा के लिए के चुनावों में खराब प्रदर्शन किया था।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के बहुत लंबे समय तक NSUI के दमदार अध्यक्ष रहे छात्रः राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले अरुण वोरा के सबसे करीबी रहे कुणाल तिवारी ने स्व वासुदेव चंद्राकार जी के पुण्यतिथि के अवसर उनकी एक यादे को शौर्यपथ समाचार के साथ सांझा की . कुणाल तिवारी ने बताया यह उस समय की बात है। जब वह NSUI अध्यक्ष थे। तब स्व. वासुदेव चंद्राकार जी का विशेष स्नेह वा आशीर्वाद प्राप्त रहता था। स्व दाऊ जी ( स्व. वासुदेव चंद्राकर जी कोसभी प्यार से दाऊ जी संबोधित करते थे ) के अंतिम समय के कुछ दिन पूर्व कुणाल तिवारी वा विजय चंद्राकार जो कि वर्तमान मे युवा कुर्मी समाज के जिला अध्यक्ष के रूप मे कार्य कर रहे है स्व. दाऊ जी का आशीर्वाद लेने दाऊ जी के निवास पहुचे थे। ठंड का समय था दाऊ जी गोरसी मे आग सेंक रहे थे। दोनों युवा नेताओ ने स्व. दाऊ जी के चरण छू कर आशीर्वाद लिया। दाऊ जी ने अपने अंदाज मे कहा केसे आए हों रे युवा नेता मन। तब कुनाल ने कहा दाऊ जी आपका आशीर्वाद लेने व राजनीति का गुण सीखने आये है । तब दाऊ जी ने अपने अंदाज मे कहा कि आज तो मोर तबीयत खराब है। फिर भी तुमन आए हों तो एक बात बोलू एला तुमन गाँठ बाँध लो आग ला आग जइसन रहना चाहिए और पानी ला पानी जइसन रहना चाहिए जो अपन अस्तित्व मे परिवर्तन लाईस समझो वो समाप्त हो गए.उसके बात बोले अब तुमन जाओ मे ह आराम करूँह । वह मुलाकात हम लोगों की आखिरी मुलाकात थी। पर वो दिन और दाऊ जी की बात और उनका अंदाज भी आज भी हमारे स्मरण मे जिवित है।
शौर्यपथ लेख। दुर्ग जिले में वीरा सेठ को कौन नहीं जानता वीरा सेठ मतलब ट्रांसपोर्ट जगत के राजा जितने बड़े व्यक्ति थे उतना ही बड़ा उनका दिल गरीबों का ख्याल रखना मदद उनका मकसद रहा अपने जीवन काल में उन्होंने पैसा तो बहुत कमाया किंतु पैसे के साथ जो इज्जत शोहरत कमाई वो उनके जाने के बाद भी आज जीवित है आज भी वीरा सेठ का नाम दुर्ग जिले बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है ।
आज वीरा सेठ को जीवित रखने में उनकी यादों को आम जनता के दिलो में कायम रखने में उनके पुत्र इंदर सिंह ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है । आज जहा दुनिया में पैसे के खातिर बेटा बाप का दुश्मन बन जाता है वही इंदर सिंह अपने पिता के द्वारा किए हुए कार्यों को ना सिर्फ अनवरत जारी रख रहे है बल्कि आगे भी बढ़ा रहे।आज जिस तरह से इस जमाने में जहा दूसरे लोग स्वास्थ के क्षेत्र में लूट खसोट कर रहे है वही उच्चतम स्तर की स्वास्थ्य सेवा एस बी एस हॉस्पिटल के माध्यम निम्मतम मूल्य पर उपलब्ध करा रहे है । अपने सैकड़ों स्टाफ के साथ हर उस व्यक्ति की मदद के लिए तैयार रहते है जो जरूरत मंद है सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले इंदर सिंह उर्फ छोटू भैया आज भिलाई ही नही दुर्ग जिले की पहचान बन गए है । जो कार्य सरकार आम जनता के हित के लिए करती है वही कार्य छोटू भैया उर्फ इंदर सिंह कर रहे है । अपने पिता की पुण्यतिथि में 3 अक्टूबर को इंदर सिंह ने जिस तरह ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के बेटियो के विवाह में 25 हजार की सहायता राशि देने का पुनीत कार्य का आगाज किया वह उनके पिता की आत्मा को सुकून ही देगा और आज इस ब्रम्हांड में जहा भी वीरा सेठ होंगे वह गर्व महसूस कर रहे होंगे और सीना चौड़ा कर कह रहे होंगे की वो देखो मेरा बेटा इंदर सिंह है मेरा बेटा है समाज को अपना समझने वाले वीरा सिंह बेटे के लिए बस मेरा बेटा है कहकर खुश हो रहे होंगे । सच में नमन है वीरा सेठ को जिन्होंने एक ऐसा बेटा समाज को दिया जो निरंतर सेवा भाव से समाज की सेवा कर रहा ऐसा बेटा की चाह आज हर व्यक्ति को होगा मेरी नजर में वीरा सेठ से ज्यादा आदर सम्मान आज इंदर सिंह के लिए है जिन्होंने अपने पिता के सपने को जीवित ही नहीं रखा बल्कि उसे निरंतर बढ़ा रहे है । सही मायने में देखा तो आज इन्दर सिंह से मुझे प्रेरणा मिलती है आज मेरे जीवन का लक्ष्य भी बस यही है कि मेरे शौर्य का ना इस दुनिया में हमेशा जीवित रहे और यही मेरे जीवन का मकसद है कहा तक सफल हो पाऊंगा ये तो नहीं पता पर कोशिश निरंतर ज़ारी रहेगी शोर्य तेरा पापा तेरे लिए कुछ नहीं कर पाया किन्तु तेरे नाम को जीवित रखना ही जिन्दगी का मकसद बन गया है .
लेख वीरा सेठ को समर्पित ??
शरद पंसारी ( संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार )
शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम के सभी कर्मचारियों ने जिस तादाद में कांग्रेस ज्वाइन की है उसे देखकर लगता है कि अब दुर्ग नगर निगम के कर्मचारी खुलकर कांग्रेस के समर्थन में सामने आ गए हैं जिससे भाजपा की मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ सकती है इस बात में कितनी सच्चाई है कि दुर्ग नगर निगम के कर्मचारी कांग्रेस प्रवेश कर लिए हैं या फिर उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर फोटो खिंचवा कर कोई बड़ी राजनीतिक प्रक्रिया चल रही है .
जो भी हो किंतु जिस तरह से शासकीय कर्मचारी खुलकर राजनीतिक पार्टी का गमछा पहनकर मैदान में उतर गए हैं यह एक अलग ही राजनीतिक परिदृश्य को इंगित करता है वही प्रशासनिक व्यवस्था का राजनीतिकरण करने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया यह वही कर्मचारी है जो 2 दिन पहले तक भूपेश सरकार के खिलाफ आंदोलनरत थे और भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं लोक सभा सांसद के समर्थन से खुश थे क्या आप प्रशासनिक विभाग भी राजनीतिक करण की चपेट में आ गया है या सिर्फ फोटो खिंचवा कर प्रसिद्धि पाने का जरिया बन गया है . कुछ ऐसी ही चर्चा इन दिनों दुर्ग की राजनीती में चल रही है . वही कुछ लोगो का कहना है कि यह गमछा तो लाडले भैया ने पहना दिया और फोटो खिचवा दिया हम तो सिर्फ आरती में गए थे . आखिर ऐसी क्या बात हुई कि इस तरह फोटो खिचवाना सोशल मिडिया में पोस्ट करना फिर कुछ समय बाद डिलीट कर देना , सब कुछ काली दाल के जैसे प्रतीत हो रहा है और चर्चा का विषय बन रहा है . वैसे ही इन दिनों विधायक जी और एक अन्य व्यक्ति का ऑडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ ...
गमछा और फोटो विधायक एवं महापौर के साथ इसका एक दूसरा पहेली भी पर्दे के पीछे रचा गया पूरी कूटनीतिक रचना के लिए देखिए शौर्यपथ का धमाकेदार खबर...
शौर्यपथ । सत्ता चाहे कांग्रेस की हो चाहे भाजपा की हो या किसी अन्य दलों की जिसके हाथ सत्ता रहती है पुलिस प्रशासन उनके आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होती है यही लोकतंत्र का नियम है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर सत्ताधारी पुलिस को अपने आदेशों को पालन करने के लिए निर्देशित करता है पुलिस प्रशासन चेहरा देखकर निर्देशों का पालन कभी नहीं करती वह चुने हुए सरकार के आदेशों के अधीन कार्य करती है और आंदोलन का कार्य विपक्ष के द्वारा किया जाता है .रायपुर में 24 तारीख को भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा हल्ला बोल आंदोलन किया गया था साथ ही सीएम के आवास घेराव का ऐलान किया गया था जिसकी सुरक्षा में पुलिस प्रशासन सुबह से ही मुस्तैद रही पुलिस प्रशासन समाज में शांति व्यवस्था लागू करने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु आज जिस हिसाब से आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर हाथ उठाया क्या वह सही है ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि नेता अपने भाषण में यह कहते हुए पाए जाते हैं कि पुलिस प्रशासन आज तुम अपने मंत्रियों की सुनो किंतु कल जब हमारी सत्ता आएगी तो देख लेना इस प्रकार के वक्तव्य आम सुनने को और सोशल मीडिया के माध्यम से देखने को मिल ही जाते हैं .
आज जिस हिसाब से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के ऊपर हाथ उठाया वह क्या सही है सत्ता चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की पुलिस प्रशासन हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी निभाती है चाहे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार हो चाहे मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार हो चाहे केंद्र में भाजपा की सरकार चाहे ,बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है हर प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन प्रदेश सरकार की पुलिस प्रशासन करती है एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर किसी भी दल द्वारा हाथ उठाना कहां तक सही है सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें अन्य प्रदेशों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के समय पुलिस प्रशासन को भला बुरा कहा हो धक्का-मुक्की की हो हाथ उठाया हो तब उस वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल कर यह दर्शाया जाता है कि उक्त कांग्रेसी नेता पुलिस अधिकारियों का सम्मान नहीं करते किंतु आज वही स्थिति रायपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा देखने को मिली जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस के अधिकारियों कर्मचारियों पर जवानों पर हाथ उठाया कुछ समय पहले ऐसे ही एक आंदोलन में 15 साल तक सत्ता में रहे पूर्व मंत्री ने भी पुलिस प्रशासन को गंदी गंदी गालियां दी थी जो कि सोशल मीडिया में काफी वायरल हुई थी चाहे वह भाजपा कार्यकर्ता हो चाहे वह कांग्रेस कार्यकर्ता हो चाहे किसी भी दल का कार्यकर्ता हो पुलिस प्रशासन पर हाथ उठाना कहां तक सही है पुलिस प्रशासन तो सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रही है कल दूसरे की सरकार आ जाएगी उनकी ड्यूटी करेगी क्या ड्यूटी करने की आवाज में अपमानित करना सही है
शौर्यपथ विश्लेषण / छत्तीसगढ़ में भाजपा की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी हमेशा अपने बयानों के लिए विवाद में रहती हैं तीसरी बार जिस तरह डी पुरंदेश्वरी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए बयान जारी किया जिसमें सच ना बोलने पर तंज कसा वही सच कहने पर सिर के हजार टुकडे हो जाने का श्राप देने जैसा वक्तव्य जारी किया क्या यह भारतीय संस्कृति को अपना मानने वाली भारतीय जनता पार्टी कि एक नेता की ऐसी सोच है आज के इस युग में कौन सा नेता है जो हर बात सच बोल रहा है जब तक सत्ता में है सभी बेदाग हैं सत्ता हटते ही कई तरह के घोटाले उनके सामने आने लगते हैं .15 सालों से छत्तीसगढ़ में भाजपा का राज रहा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एक बेदाग छवि के मुख्यमंत्री के रूप में आम जनता के सामने आते रहे किंतु सत्ता जाते ही घोटालों की बौछार लग गई यही राजनीति है किंतु इस तरह की राजनीति में श्राप देने जैसा कार्य क्या डी पुरंदेश्वरी को शोभा देता है .
आज डी पुरंदेश्वरी एक बड़े पद पर आसीन हैं बावजूद इसके इस तरह का ब्यान देकर छत्तीसगढ़ की जनता को क्या बताना चाहती है अपने पिछले डोरे में भी डी पुरंदेश्वरी ने ऐसा ही विवादित बयान जारी किया था जिसमें यह कहा गया था कि अगर भाजपा कार्यकर्ता मिलकर थूक ही दे तो पूरी कांग्रेस सरकार उस में बह जाएगी क्या डी पुरंदेश्वरी थूकने और श्राप देने से उठकर जनता के हितों की कभी बात करेंगे आज रोजगार की बात है तो यह चुनावी वादा हर पार्टी करती है केंद्र की भाजपा सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही थी किंतु क्या रोजगार मिला अपितु इसके जवाब में पकौड़ा बेचना भी रोजगार में शामिल है जैसी बात सामने आ गई कांग्रेस ने भी रोजगार की बात कही किंतु वह भी रोजगार देने में फेल हो गई बावजूद इसके अगर बेरोजगारी की बात करें तो केंद्रीय एजेंसी ने भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या काफी कम होने की बात कहीं आज जैसा भी हो छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या अन्य प्रदेशों के हिसाब से काफी कम है और छत्तीसगढ़ प्रथम स्थान पर है बावजूद इसके बेरोजगारी पर और वादा निभाने पर तंज कसना एवं स्तर हीन शब्दों का इस्तेमाल कर आज डी पुरंदेश्वरी छत्तीसगढ़ के आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है राजनीति में हार और जीत लगा ही रहता है किंतु आरोपों की भी एक सीमा होती है किंतु थूकने श्राप देने सिर के हजार टुकडे होने जैसी बात कहकर डी पुरंदेश्वरी ने सिर्फ और सिर्फ छत्तीसगढ़ भाजपा का ही नुकसान किया है और कांग्रेस को आक्रमण करने का मौका दे दिया है इस तरह के बयान से भले ही भाजपा कार्यकर्ता खुश हो जाएं किंतु आम जनता इस तरह की अशोभनीय बयान बाजी को गंभीरता से लेते हैं .छत्तीसगढ़ी ही नहीं भारत की आम जनता सभी बातों को समझती है भले ही कह नहीं पाती किंतु अपना विचार मतदान के मत पेटी में देकर व्यक्त करती है आज छत्तीसगढ़ में जब छत्तीसगढ़िया की बात होती है तब एक दूसरे प्रदेश की नेता द्वारा थूकने , श्राप देना ,सिर के हजार टुकडे होना जैसे बातों को कर सिर्फ और सिर्फ अपने विचारों को व्यक्त करती है जो कि उनके निजी विचार हो सकते हैं किंतु विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वालों के मुंह से संस्कार की बात करना और इस तरह का बयान देना कहीं से शोभा नहीं देता आज भाजपा का चेहरा और सोच संसकारी पार्टी , हिंदुत्व ,देश भक्ति सुविचार के रूप में परिलक्षित है किंतु ऐसे बयान सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही नुकसान पहुंचा सकते हैं और ऐसे ब्यान बाजी से व्यक्ति की मानसिकता का भी आभास होता है जो आज प्रदेश में सत्ता में नहीं है फिर भी इस तरह की बात कह रही है अगर सत्ता में आ जाये तो फिर ना जाने इससे और क्या बड़ी बड़ी बाते कह सकती है ये तो भगवन ही जाने ...
शौर्यपथ लेख / कभी कभी इंसान की जिन्दगी में कुछ ऐसे पल आ जाते है जो सदैव के लिए यादो में अंकित हो जाति है ऐसी अमिट यादो को कभी भुलाया नहीं जा सकता . वो पल अच्छे भी हो सकते और बुरे भी . किन्तु आज हम जिन पालो की बात कर रहे है वो पल ऐसे है जिसे और सब तो भूल भी जाए कोई कुछ दिनों में कोई कुछ सालो में किन्तु उन पालो को सिर्फ एक ही व्यक्ति है जो कभी नहीं भूल सकता . मनीष पारख दुर्ग शहर के एक सामजिक और व्यावसायिक व्यक्ति है जिन्होंने जमीन से उठ कर आज आसमान की बुलंदियों तक पहुँचने में जो कार्य किया है वो दुर्ग शहर में किसी से छुपा नहीं है सफलता की सीढी चढ़ते हुए सामजिक कार्यो में भी सदा योगदान करना उनकी जिन्दगी में शामिल है . हर क्षेत्र के बारे में बारीकी पकड ही उनकी खासियत है . . इतने सालो की मेहनत के बाद उनके जन्मदिन को यादगार बनाने में जिस जिस ने भी अपनी सहभागिता निभाई वो तो अविस्मरनीय है किन्तु उससे भी बड़ी बात यह है कि उन सभी को ऐसा करने पर अपरोक्ष रूप से अपने कार्यो और सहभागिता के द्वारा प्रेरित करने का श्रेय मनीष पारख को ही जाता है . मनीष पारख जी को शौर्यपथ समाचार पत्र की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये . उनके यादगार जन्मदिन के पल को उन्होंने फेसबुक के माध्यम से जिन शब्दों में पिरोया वो आप सभी सम्मानित पाठको के सामने है
25 साल पहले जब मैंने अपना काम चालू किया था कब सोचा नहीं था कि इतना बड़ा काम कर पाऊंगा और इतने लोग मेरे साथ जुड़ जाएंगे बस मेरी एक ही इच्छा थी कि जो भी काम करो इमानदारी से करो और कुछ ऐसा कर सकूं की लोगों के लिए एक एग्जांपल खड़ा कर सकूं जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे बहुत डाउन भी देखा आज से 20 साल पहले जब मैंने एक मोबाइल लिया था तब मेरा एक सपना था की मेरे पास इतने लोग हैं कि मैं फोन करूं और मेरा काम हो जाए और आज मुझे लगता है कि मैं वह कर पाया
कल जब सुबह में नाश्ता करके उठा और अचानक से लाइफ केयर के पूरे स्टाफ आ गए मैं बहुत आश्चर्यचकित था और बहुत खुशी भी हुई बस रो नहीं पाया मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं क्या लिखूं और क्या बोलूं। वह आंटी लोगों का ख़ुशी से झूमना और पूनम और ग्रुप का डांस करना वह निखत हैंड ग्रुप का गाना गाना ?रियली हार्ट टचिंग था । वह सभी स्टाफ का जो डायरेक्टली इनडायरेक्टली इस पूरे प्रोग्राम का हिस्सा थे सब ने बहुत मेहनत की।मैं अपनी खुशी बयान नहीं कर सकता कि कितना अच्छा लगा मुझे और मुझे सबसे ज्यादा इस बात की खुशी थी कि सब लोग मुझे इतना प्यार करते हैं।
अविश एजुकॉम में भी अनएक्सपेक्टेड था बहुत ही अच्छा सेलिब्रेशन किया सब ने मिलकर।
महावीर स्कूल के सभी टीचर से बहुत ही अच्छा सेलिब्रेशन किया जो मेरे लिए अनएक्सपेक्टेड था।
मेरी 25 साल की मेहनत में मुझे अब लगने लगा कि मैं जो प्यार और अपनापन अपने सब साथ ही लोगों से चाहता था वह मुझे मिल रहा है और मैं इसे कभी नहीं भूल सकता इतना प्यार और इतना अपनापन यह प्यार और अपनापन ऐसे ही बनाए रखना लिखना बहुत कुछ चाहता हूं पर शब्द ही नहीं मिल रहे हैं कि मैं कैसे एक्सप्रेस करूं अपनी फीलिंग को।
आज मैं जो कुछ भी कर पा रहा हूं वह लाइफ केयर में हो अविश एडु कॉम में हो या मेरी पर्सनल लाइफ में हो यह सब मेरे साथी मेरे स्टाफ इनकी वजह से ही है क्योंकि सब लोगों का साथ हमेशा रहा है हर वक्त हर पल मुझे आज भी याद है जब पहली बार कंप्यूटर सेंटर मैंने चालू किया था मेरे पास सैलरी देने के पैसे नहीं थे तो स्टाफ ने तीन महीना सैलरी नहीं ली थी और मुझे पूरा सपोर्ट किया था आज जो सेलिब्रेशन आप लोगों ने किया है उसके वीडियोस देख कर बहुत से लोगों के कमेंट से आए और बहुतों ने बोला कि तू बहुत खुशकिस्मत है फिर तुझे ऐसे स्टाफ मिले और वाकई में मैं बहुत खुशकिस्मत हूं की मुझे इतने अच्छे और इतने प्यार करने वाले लोग मिले जिनके लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है।
और पूरे स्टाफ को बांधे रखने के पीछे एक लीडर का बहुत बड़ा हाथ होता है और लीडर ही होता है कि जो पूरे स्टाफ को बांध के रखता है लाइफ केयर में आयशा प्रियंका और अविश एडु कॉम मैं नेहा नेहा प्रियो सभी अपना काम बहुत इमानदारी से कर रहे हैं।
टीम लीडर सभी अच्छे हैं और सभी अपना काम बहुत इमानदारी से कर रहे हैं मैं इतनी बड़ी टीम है कि सबका नाम नहीं लिख पा रहा हूं और आज जब मैं लोगों को बताता हूं कि मेरी इतनी बड़ी टीम है और इतने अलग-अलग फील्ड में काम कर रहे हैं तो लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि कैसे इतने अलग-अलग फील्ड को आप मैनेज कर लेते हो मुझे बहुत खुशी होती है की इतने लोगों का परिवार हमारे इस ऑर्गेनाइजेशन की वजह से चल रहा है। एक समय की बात है एक बार मैं बहुत परेशान होकर सोचा कि यार सब काम बंद करते हैं और आराम से घर में बैठेंगे तो नीलेश के एक दोस्त ने एक शब्द बोला कि आप यह मत सोचो कि आप काम करके आराम से बैठोगे आप यह सोचो कि आप के वजह से 300 लोगों का परिवार चल रहा है और आप उनके लिए काम करो वह दिन है और आज का दिन है मैं कभी रुका नहीं मैंने हमेशा सोचा कि मैं अगर कर सकता हूं तो आगे काम करूंगा।
स्पेशल थैंक्स टू आयशा प्रियंका नेहा नेहा , प्रभा मैडम पारस मैडम प्रज्ञा और बाकी सब भी है किस किस का नाम लूं।
अंत मैं यही कहना चाहूंगा की सब लोग पूरी इमानदारी से इसी तरह काम करते रहे और इसी तरह आगे बढ़े मैं हमेशा हर वक्त सबके साथ खड़ा हूं। आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि आप लोगों ने इतना समय मेरे लिए निकाला और मेरे बर्थडे को इतना अच्छा बनाया जो मैं कभी भूल नहीं सकता और इतना प्यार बहुत ही किस्मत वालों को नसीब होता है उनमें से मैं एक हूं।
साभार -मनीष पारख के फेसबुक वाल से ...
शौर्यपथ ( व्यंग लेख )। आज के जमाने में हैसियत के एक अलग ही मायने है । किसी की भी हैसियत के हिसाब से ही समाज में उसकी पूछ परख होती है । किंतु आज भी कुछ ऐसे कुंठा जीवी लोग समाज में बहुतेरे पाए जाते हैं जिनकी औकात चवन्नी की भी नही होती किंतु बाते आसमान से भी ऊंची ऐसे कुंठा जीवी को ये भी नही मालूम कि उनकी स्वयं की औकात कितनी धरातल की गहराई में है । ऐसा ही एक वाक्या हाल में ही देखने को मिला । जैसा कि आज कल समाज में बहुतेरे ऐसे व्यक्ति मिल जायेंगे जो पत्रकारिता से जुड़े है कुछ कार्य कर रहे तो बहुतेरे वसूली । पिछले दिनों हमारे मित्र का सामना ऐसे ही पत्रकार से हुआ । मित्र भी पत्रकार और मित्र को औकात दिखाने की बात करने वाला भी पत्रकार । जोश जोश में औकात की बात करने वाले पत्रकार ने एक सभा में मित्र के उपर ये व्यंग कस दिया कि कुछ पेपर की प्रति छापने वाले की क्या औकात बात बड़ी कह दी हमने मित्र की तरफ देखा सोंचा कि मित्र को सबके सामने नीचा दिखाया जा रहा मित्र कितना दुखी हो गया होगा किंतु मित्र के चेहरे में औकात बताने वाले पत्रकार की बात सुनकर गुस्सा या ग्लानि के बजाए मुस्कुराहट देखा तो मन संशय हुआ कि सभी के सामने हसने का प्रयास किया जा रहा है शायद हम भी कुछ सोच कर चुप रहे ।
जब एकांत में समय मिला तो हमने मित्र से संशय भरे शब्दों में पूछा कि एक व्यक्ति ने इतनी कड़वी बात कही फिर भी तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट ही रही आखिर बात क्या है कौन है वो फलाना पत्रकार जो ऐसे आरोप लगा रहा था और तुम हंस रहे थे ।
तब मित्र ने जो बात कही उसे सुनकर हमे भी हंसी आ गई । मित्र ने बताया कि वो तथाकथित पत्रकार से क्या बहस करे सारा शहर जानता है कि जिस थाली में खाता उसी में छेद करता कई बार तो व्यापारियों ने इसकी पुलिस में शिकायत की वहा भी बेशर्म माफी मांग कर आ गया । तीन _चार अखबार का पंजीयन करा चुका पर एक दो अंक छापने के बाद टे बोल गया । फर्जी दस्तावेज के सहारे बड़ा पत्रकार बना फिरता है समाज में अकेला घूमता है शेर कहता है अपने आप को पर है तो शेर भी जानवर ही जिसे समाज रूपी शहर में सर्कस में मनोरंजन के लिए ही उपयोग किया जाता है । जिसकी खुद की औकात एक समाचार को सुचारू रूप से चलाने की नही उसकी औकात वाली बात का जवाब देना भी मूर्खता ही है । और इस तरह मैं और मेरा मित्र हंसते हुए घर को निकल गए ।
लेख - शरद पंसारी , प्रधान संपादक शौर्यपथ समाचार पत्र
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
