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April 05, 2026
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शौर्यपथ

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छत्तीसगढ़िया वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ द्वारा आयोजित ‘‘हमर व्यापारी हमर संगवारी’’ के अधिवेशन में शामिल हुए उद्योग मंत्री
    रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन आज रविवार को छत्तीसगढ़िया वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ द्वारा ‘‘हमर व्यापारी हमर संगवारी’’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में राजस्व आपदा और खेल मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक रायपुर ग्रामीण श्री मोती लाल साहू, अभनपुर विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, राजिम विधायक श्री रोहित साहू सहित उद्योग महासंघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
    कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए व्यापारियों को संबोधित करते हुए मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि लोगों को व्यापार के प्रति जागरूक करने एवं उनके व्यापार को नया आयाम देने का प्रयास महासंघ द्वारा किया जा रहा है और इस प्रयास में आपके साथ विष्णुदेव साय की सरकार आप सभी का पूरा साथ देगी। मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 की लांचिंग किया गया है, इससे नए उद्योग शुरू करने वाले व्यापारियों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर 2024 से प्रदेश की नई उद्योग नीति भी लागू हो जाएगी। नई नीति उद्यमियों के सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा है। आप सभी के साथ सरकार मिलकर प्रदेश में उद्योगों के लिए और बेहतर माहौल बनाने का प्रयास करने जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मुद्रा ऋण को आरंभ किया, इससे लोगों को व्यवसाय करने में आसानी हो रही है। उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकारी खरीदी में जेम पोर्टल सिस्टम लागू किया गया है। इससे भ्रष्टाचार में अंकुश लगेगा।  मंत्री श्री देवांगन ने छत्तीसगढ़िया वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से व्यापारियों में उत्साह और आत्मबल और बढ़ता है।
    राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि ‘‘हमर व्यापारी हमर संगवारी’’ आज के एक दिवसीय कार्यशाला के जरिए व्यापारी बंधु अपने अनुभव साझा करेंगे, इनसे उनको व्यापार, व्यवसाय आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। आयोजन की सफलता के लिए उद्योग महासंघ के सभी पदाधिकारी को अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। ज्ञातव्य हो कि वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़िया वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ की स्थापना की गई थी।
    विधायक रायपुर ग्रामीण श्री साहू ने कहा कि मुझे यहां आकर गौरव की अनुभूति हो रही हैं। हम सबको एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़ा होने की जरूरत है, तभी यह संगठन मजबूत बन सकेगा। छत्तीसगढ़िया वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के अध्यक्ष श्री शेखर वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर संघ के पदाधिकारी सर्व श्री मनीष टिकरिहा, ललित साहू, राजेश देवांगन, पुनारद निषाद, कुबेर चंद्राकर, आशीष साहू, करण भारद्वाज, दीपक कुमार साहू सहित अनेक प्रतिनिध उपस्थित थे।

अब प्रतिमाह चावल, नमक, शक्कर मिलेगी और जरूरी सुविधाएं
    रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए पीएम जनमन शिविर का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है। इसी कड़ी में गरियाबंद जिले में शिविर के माध्यम से पीवीटीजी कमार सदस्यों को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए मूलभूत सुविधाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। इसी कड़ी में गत दिवस जनपद पंचायत गरियाबंद अंतर्गत ग्राम पंचायत मरोदा के आश्रित ग्राम बम्हनी में पीएम जनमन शिविर आयोजित किया गया।
    शिविर में 07 कमार जनजाति के हितग्राहियों को मौके पर ही नए राशन कार्ड का वितरण किया गया, जिसमें चमरू कमार, कमला बाई कमार, सावित्री कमार, बृज बाई, आसबती कमार, श्याम बाई एवं फुलेश्वरी कमार को राशन कार्ड दिया गया। नए राशन कार्ड बन जाने से अब उनके परिवार को प्रतिमाह रियायत दर पर चांवल, शक्कर एवं नमक सहित खाद्यान्न मिलेगी। साथ ही अब पास के शासकीय उचित मूल्य की दुकान से आसानी से यह खाद्य सामग्री प्राप्त कर सकेंगे। राशन कार्ड बन जाने से सभी सदस्यों ने खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शासन का आभार जताया।
       इसी प्रकार शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 45 कमार परिवारों का बीपी, शुगर हेल्थ चेकअप भी किया गया और आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाइयों का भी वितरण किया गया। शिविर में जनाबाई कमार को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया।  कृषि विभाग द्वारा कमलेश कमार को रागी वितरण किया गया।  भुवनेश्वर कमार का आधार कार्ड एवं महेंद्र का किसान क्रेडिट कार्ड स्थल पर बनाकर प्रदान किया गया। इसके अलावा अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कमार बस्ती में जाकर केन्द्र व राज्य सरकार  की विभिन्न योजनाओं के लाभ के बारे में ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान शिविर में श्री अमजद जाफ़री, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गरियाबन्द श्री राकेश साहू, विकास विस्तार अधिकारी, श्री दुर्गेश प्रसाद साहू क्षेत्रीय समन्वयक, सरपंच और पंच एवं ग्रामवासी मौजूद रहे।

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /डायबिटीज  लाइफस्टाइल से जुड़ी ऐसी बीमारी है जिसमें हर वक्त ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का डर बना रहता है. डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना होता है, लेकिन इसके बाद भी कई बार शुगर लेवल हाई होने का रिस्क बना रहता है. ऐसे में चाय  के शौकीन लोग अपने इस शौक को मजबूरी में मार देते हैं. लेकिन अब डायबिटीज के रोगियों को चाय के शौक को मारने की जरूरत नहीं है. एक खास तरह की हर्बल टी रोज भी पिएंगे तो शुगर लेवल नहीं बढ़ेगा. आज आपको इस चाय के बारे में बताते हैं.
दालचीनी की चाय से कंट्रोल में रहेगा शुगर लेवल :
शुगर लेवल बढ़ने के डर से मधुमेह रोगी कई चीजों का त्याग कर देते हैं. इसमें दूध वाली चाय भी शामिल है. लेकिन दालचीनी की चाय से आप चाय की तलब पूरी कर सकते हैं. दालचीनी ऐसा आयुर्वेदिक मसाला है जिसकी चाय शुगर रोगियों के लिए बहुत ही अच्छी मानी जाती है. यूं तो दालचीनी सब्जी और दूसरे व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए कारगर है, लेकिन इसकी चाय बनाकर पीने से शुगर कंट्रोल करने में काफी फायदा होता है. ये चाय डायबिटीज रोगियों के लिए किसी दवा की तरह काम करती है. दालचीनी की चाय में कई तरह के गुण पाए जाते हैं. इसमें एंटी-वायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी होती है. इसके साथ-साथ ढेर सारे एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनोइड्स भी मौजूद होते हैं. दालचीनी की चाय पीने से ब्लड में शुगर का लेवल कंट्रोल में रहता है. इसके साथ दालचीनी की चाय शरीर में कोलेस्ट्रॉल को भी कम करती है. यानी दालचीनी की चाय पीने से बढ़ा हुआ वजन भी कंट्रोल में आने लगता है. इसके साथ साथ दालचीनी की चाय दिल के लिए भी अच्छी कही जाती है.
कैसे बनाएं दालचीनी की चाय :
दालचीनी की चाय बनाना बहुत ही आसान है और ये चंद मिनटों में बन जाती है. एक पैन में पानी गर्म कीजिए. इसमें आधा टुकड़ा दालचीनी का और थोड़ा सा दालचीनी का पाउडर डालें. पानी उबलने के बाद गैस बंद कर दें. गैस बंद होने के बाद इस पानी में एक ग्रीन टी का सैशे डालें और अच्छे से मिक्स कर लें. अब चाय को छान कर कप में डालें और गर्मागर्म चाय का आनंद लें.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /ग्रीन टी आजकल ज्यादातर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है. इसके अनोखे फायदे हैं, जिसे देखते हुए दूध वाली चाय की जगह लोग इसे ही पीना पसंद कर रहे हैं . भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने के लिए ग्रीन टी के बेनिफिट्स जबरदस्त हैं लेकिन ग्रीन टी पीने के सही समय की जानकारी न होने से इसके साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं ग्रीन टी पीने का सही टाइम क्या है...
ग्रीन टी पीने के बेनिफिट्स
1. पेट पर जमा चर्बी कम करता है.
2. त्वचा को चमक देने का काम करता है.
3. पाचन में सुधार.
4. वजन घटाने में मददगार
5. डायबिटीज में फायदेमंद
6. मेटाबॉलिज्म बढ़ाए
7. इम्यूनिटी मजबूत करने में
क्या सुबह खाली पेट पी सकते हैं ग्रीन टी
डाइटिशियिन के अनुसार, सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीने से पेट में दर्द की समस्या हो सकती है. इसमें पाया जाने वाले पॉलीफेनोल्स टैनिन से पेट में एसिड बढ़ने लगता है. इससे पेट दर्द, जलन या कब्ज जैसी समस्या हो सकती है. ग्रीन टी ब्रेकफास्ट के बाद पीनी चाहिए. खाने के बाद, नाश्ते और खाने के बीच में ग्रीन टी पीना सबसे अच्छा माना जाता है. ज्यादा ग्रीन टी पीने से बचना चाहिए, क्योंकि ग्रीन टी में कैफीन पाया जाता है, जो गैस्ट्रिक जूस को डाइल्यूट कर उल्टी, गैस और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है.
ग्रीन टी क्या रात में पी सकते हैं
रात में सोते समय ग्रीन टी नहीं पीना चाहिए. इससे लिवर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. रात में ग्रीन टी नहीं पीने से नींद की समस्या हो सकती है. दिन के वक्त में ग्रीन टी पीना फायदेमंद हो सकता है.
ग्रीन टी पीने का सबसे सही तरीका क्या है
ब्रेकफास्ट से कुछ समय पहले ग्रीन टी पी सकते हैं. सुबह-शाम को ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है. इससे वेट लॉस में मदद मिल सकती है. दिन में तीन से चार कप से ज्यादा ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए. ग्रीन टी को दूध-चीनी में मिलाकर पीने से बचना चाहिए. ग्रीन टी के बाद कुछ खाना नहीं चाहिए.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में पूरे साल बहुत सारे तीज-त्योहार आते हैं  जिसे पूरी श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है. अगस्त की तरह सितंबर में भी कई पर्व त्योहार पड़ने वाले हैं. जिसमें से एक अनंत चतुर्दशी भी है. इसमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है. व्रत रखकर लोग भगवान विष्णु और धन की देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं. हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में अनंत चतुर्दशी मनाया जाता है. तो चलिए जानते हैं इस साल किस तिथि और शुभ मुहूर्त में अनंत चतुर्दशी की पूजा करनी चाहिए और किस चीज का लगाएं भोग.
अनंत चतुर्दशी तिथि-
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हर साल अनंत चतुर्दशी मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार, इस साल 16 सितंबर को 3 बजकर 10 मिनट पर चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी और अगले दिन 17 सितंबर को 11 बजकर 44 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा. उदया तिथि के मुताबिक, 17 सितंबर को अनंत चतुर्दशी की पूजा की जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के अलावा मां यमुना और शेष नाग की भी पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा भाव के साथ पूजा करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है.
अनंत चतुर्दशी प्रसाद-
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की जाती है. अनंत भगवान को सात्विक थाली का भोग लगाया जाता है. सात्विक थाली के लिए आप आलू-टमाटर की सब्जी, कट्टू की पूरी और खीर बना सकते हैं. इसके अलावा फल और लड्डू का भी भोग लगाया जा सकता है.
अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त
     अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा के बाद अनंत सूत्र बांधा जाता है जिसमें कुल 14 गांठ होती है. इन 14 गांठों को 14 लोकों के साथ जोड़ कर देखा जाता है और इस पूजा को अनंत फल देने वाला माना जाता है. शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना करना विशेष रूप से फलदायी होता है. 17 सितंबर को सुबह 6 बजकर 7 मिनट से लेकर 11 बजकर 44 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है.
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि-
अनंत चतुर्दशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए. भगवान विष्णु का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें. शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति चौकी पर स्थापित करें. इसके बाद हल्दी, केसर, कुमकुम, फूल, अक्षत और फल अर्पित करें. इसके बाद एक कच्ची डोरी में 14 गांठ लगा कर अनंत सूत्र तैयार करें और ऊँ अनंताय नम: मंत्र के साथ श्री हरि को अर्पित करें. इसके बाद अनंत सूत्र को अपनी कलाई पर बांध लें. कथा का पाठ करने के बाद दीपक जला कर आरती करें और भोग लगाएं.

    रायपुर /शौर्यपथ / चक्रधर समारोह फिर से अपने पुराने वैभव और गरिमा के साथ आयोजित होने जा रहा है। 10 दिवसीय कला महोत्सव की रूप रेखा तैयार की जा चुकी है। नामचीन कलाकार अपने हुनर के प्रदर्शन के लिए रायगढ़ पहुंचने वाले हैं। चक्रधर समारोह का मंच कला जगह में अपनी विशिष्ट ख्याति रखता है। पिछले कुछ वर्षाे के दौरान कोविड महामारी के चलते समारोह वृहत स्तर पर आयोजित नहीं किया जा सका था। इस बार के आयोजन में एक खास बात और शामिल है। इस वर्ष भारत सरकार के चौथे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित 7 विभूतियां रायगढ़ चक्रधर समारोह के मंच को सुशोभित करेंगी।
    पद्मश्री हेमा मालिनी- जो भारतीय सिनेमा की एक प्रमुख और बहु-प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं, अपने भरतनाट्यम नृत्य के लिए भी जानी जाती हैं। उन्हें भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। भरतनाट्यम, जो एक प्राचीन और शास्त्रीय नृत्य शैली है, में हेमा मालिनी की निपुणता और दक्षता अद्वितीय है। उनके नृत्य की विशेषताएँ उनकी उत्कृष्ट तकनीक, भाव-प्रकटीकरण और मंच पर उनकी उपस्थिति में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। उन्होंने न केवल अपनी कला को फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुत किया, बल्कि शास्त्रीय नृत्य की कला को भी पूरे देश और विदेश में लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियाँ की हैं, जिनमें भारतीय पौराणिक कथाओं और धार्मिक कथाओं का सुंदर चित्रण होता है। उनके प्रदर्शन में नृत्य की विभिन्न मुद्राओं और भावनाओं का अभिव्यक्ति, दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। उनकी नृत्य साधना और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें न केवल सिनेमा की दुनिया में, बल्कि शास्त्रीय नृत्य की दुनिया में भी एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। उन्हें वर्ष 2000 में चौथे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
    पद्मश्री रामलाल बरेठ- इन्होंने रायगढ़ कत्थक शैली को विकसित करने और कत्थक को घराने के रूप में स्थापित करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। रायगढ़ कत्थक शैली को लोकप्रिय बनाने में पंडित रामलाल बरेठ का बहुत बड़ा योगदान है। उनके अथक प्रयास से रायगढ़ कत्थक शैली को रायगढ़ घराना के नाम से जाना जाता है। रायगढ़ घराना पूरी दुनिया में चौथे कत्थक घराने के रूप में प्रसिद्ध है।
    पंडित रामलाल को 1996 में भारत के माननीय राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने भारत के राष्ट्रीय सम्मान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्हें वर्ष 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
    पद्मश्री कुमारी देवयानी- अनिक शेमोटी, जिन्हें मंच नाम कुमारी देवयानी के रूप में जाना जाता है, एक भारतीय नृत्यांगना हैं, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली भरतनाट्यम में प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने भारत के साथ-साथ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, ग्रीस, पुर्तगाल, स्कैंडिनेवियाई देशों, एस्टोनिया और दक्षिण कोरिया के त्योहारों और संगीत हॉल में प्रदर्शन किया है। देवयानी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की सूचीबद्ध कलाकार हैं। 2009 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
    पद्मश्री डॉ.भारती बंधु- एक भारतीय संगीतकार और गायक हैं, जिनके कबीर भजन बहुत प्रसिद्ध हैं। वे छत्तीसगढ़ के रायपुर में पैदा हुए थे। भारती बंधु ने देश दुनिया भर में हजारों प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया था। उन्हें राजा चक्रधर सम्मान से भी सम्मानित किया गया है। वे भारत में सूफी और कबीर संगीत के प्रतीक हैं। उन्हें वर्ष 2013 में पद्मश्री से नवाजा गया है।
    पद्मश्री अनुज शर्मा- छत्तीसगढ़ी सिनेमा और कला क्षेत्र में ख्यात्तिलब्ध व्यक्तित्व श्री अनुज शर्मा को उनके निर्देशनए अभिनय और गायन में उनकी प्रतिभा के लिए जाना जाता है। कला के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा 2014 में चौथे सर्वाेच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
    पद्मश्री डॉ.सुरेंद्र दुबे- डॉ.सुरेंद्र दुबे अपनी हास्य कविताओं के लिए पूरे देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं। वे वह पेशे से एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी हैं। प्रदेश की बोली और संस्कृति को उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों से बढ़ावा दिया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2010 में देश के चौथे उच्चतम भारतीय नागरिक पुरस्कार  पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
    पद्मश्री रंजना गौहर- प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर तथा फिल्म निर्मात्री हैं। उन्हे पद्मश्री व संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। वह ओडिसी नृत्य के संदर्भ में एक किताब (ओडिसी द डांस डिवाइन) भी लिख चुकी हैं। श्रीमती रंजना गौहर को 2003 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित पद्मश्री और 2007 में राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित  किया गया है।

 व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर वर्ष भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. इस दिन को भगवान गणेश की जन्म तिथि माना गया है और इसलिए गणोश चतुर्थी से लेकर अगले दस दिन तक धूमधाम से गणेश जन्मोत्सव के रूप में गणेश उत्सव मनाया जाता है. भक्त घर-घर में बप्पा की मूर्ति की स्थापना करते हैं और दस दिन तक विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना करते हैं. यह त्योहार महाराष्ट्र में काफी जोर शोर से मनाया जाता है. हालांकि अब पूरे देश में गणेश उत्सव मनाया जाने लगा है. आइए जानते हैं इस वर्ष कब है गणेश चतुर्थी और इस अवसर पर बनने वाले योग
कब है गणेश चतुर्थी
   इस वर्ष भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर को 3 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 37 मिनट तक है. सूर्य के उगने के अनुसार 7 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी और इस दिन भक्त अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करेंगे. 7 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 3 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक है. गणेश जी की स्थापना के बाद उनके पूजन के लिए 2 घंटे 31 मिनट का समय काफी शुभ है.
गणेश चतुर्थी के योग
   इस बार गणेश चतुर्थी पर चार शुभ योग बन रहे हैं. सुबह शुरू हो रहा ब्रह्म योग रात के 11 बजकर 17 मिनट तक है. उसके बाद इंद्र योग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन सुबह 6 बजकर 2 मिनट से रवि योग बन रहा है और यह योग दोपहर को 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग 12 बजकर 34 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 3 मिनट तक है.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन त्योहार मनाया जाता है, कहते हैं कि माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को वर स्वरूप प्राप्त करने के लिए इस व्रत को किया था, तब जाकर उन्हें भोलेनाथ वर स्वरूप प्राप्त हुए थे. ऐसे में कहा जाता है कि अगर अविवाहित कन्याएं ये व्रत करती हैं, तो उन्हें भोलेनाथ की तरह वर की प्राप्ति होती हैं, वहीं सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए ये व्रत रखती हैं. ऐसे में अगर आप भी हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहती हैं, तो उससे पहले इस व्रत के ये 10 नियम जरूर जान लें.
इस दिन किया जाएगा हरतालिका तीज 2024 का व्रत
हरतालिका तीज 2024 का व्रत 6 सितंबर 2024, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा, लेकिन इसकी तिथि की शुरुआत 5 सितंबर 2024 को दोपहर 12:21 पर हो जाएगी. वहीं, इसका समापन 6 सितंबर को दोपहर 3:01 पर होगा, ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 6 सितंबर को ही निर्जला व्रत किया जाएगा. वहीं, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 6:01 से लेकर 8:32 तक रहेगा.
हरतालिका तीज व्रत के 10 नियम  |
1. अगर आप एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखना शुरू कर दें, तो इसे जिंदगी भर रखना होता है. चाहे आप बीमार हो या माहवारी से हो, लेकिन ये व्रत कभी भी छोड़ते नहीं है.
2. हरतालिका तीज का व्रत निर्जला व्रत होता है, यानी कि इस व्रत में आप अन्न, जल का सेवन नहीं कर सकते हैं. अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद ही खीरा या ककड़ी खाकर व्रत का पारण किया जाता है.
3. हरतालिका तीज की पूजा में मां पार्वती को खीरा भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है या फिर सूजी का हलवा भोग लगाया जाता है.
4. हरतालिका तीज की पहली पूजा प्रदोष काल यानी कि शाम के समय की जाती है ये वो समय होता है जब सूरज डूबता है और रात होने से पहले का समय होता है.
5. हरतालिका तीज व्रत करने के दौरान महिलाओं को रात भर जागरण करना चाहिए, इस दौरान भजन कीर्तन और नृत्य आदि किया जा सकता है.
6. हरतालिका तीज व्रत करने के दौरान हरतालिका तीज व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए, नहीं तो इस व्रत को अधूरा माना जाता है.
7. हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाओं को 16 श्रृंगार जरूर करना चाहिए, कहते हैं कि 16 श्रृंगार करने से मां पार्वती अति प्रसन्न होती हैं.
8. हरतालिका तीज पूजा के दौरान मां पार्वती, शिवजी और भगवान गणेश की मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजा करनी चाहिए और अगले दिन सुबह उसका विसर्जन करना चाहिए.
9. हरतालिका तीज पर मां पार्वती को सुहाग अर्पित करने का भी विशेष महत्व होता है, आप सुहाग की पिटारी में 16 श्रृंगार की चीजें रखकर मां पार्वती को अर्पित करें और शिव जी को धोती और अंगोछा भी चढ़ाएं.
10. हरतालिका तीज व्रत के दौरान अगले दिन सूर्योदय पर स्नान करने के बाद मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है, हरतालिका तीज व्रत के बाद किसी ब्राह्मण या गरीब महिला को सुहाग का सामान दान करना चाहिए.

’छत्तीसगढ के विकास और अर्थव्यवस्था में इंजन की तरह है यहां के उद्योगः मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
’बिलासपुर उद्योग संघ के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री’
’मुख्यमंत्री ने उद्योग से संबंधित समस्याओं को दूर करने का दिया आश्वासन
   रायपुर/शौर्यपथ /जिला उद्योग संघ बिलासपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर पहुचे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के उद्योग यहां के विकास और अर्थव्यवस्था के इंजन है। यहां के उद्योगों का छत्तीसगढ़ के विकास में बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया गया है ताकि उद्योग को बढ़ावा देने बेहतर माहाल स्थापित करने के साथ आप सभी की समस्याओं को दूर किया जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विगत 10 वर्षों के कार्यकाल में देश को विकास की राह में आगे बढ़ाने का कार्य किया। वे देश को विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
    समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक आप सभी के सहयोग से देश को विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया गया है। छत्तीसगढ़ को भी विकसित छत्तीसगढ़ बनाने तैयार किया जा रहा है और इसमें आप सभी का सहयोग और सलाह जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक नवम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य का विजन डाक्यूमेंट लांच किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम नई उद्योग नीति भी ला रहे हैं, इसे भी एक नवम्बर को लांच किया जाएगा।
         मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बिजली, पानी, कोयला, लौह, हीरा, टीन, लीथियम सहित अन्य खनिज भंडार है। वन संसाधन के साथ वनोपज भी है। हमारे जशपुर क्षेत्र में टमाटर और बस्तर में इमली का वृहद उत्पादन है। इससे आदिवासी क्षेत्रों के विकास में गति आएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के लिए बहुत स्कोप है और छतीसगढ़ की सरकार उद्योगों को जो सुविधाएं दें सकती है, उपलब्ध करायेगी तथा समस्याओं को दूर करेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने उद्योग संघ के पदाधिकारियों से कहा कि आपके हाथों में हुनर और ताकत है। आप सभी छत्तीसगढ़ के विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अपना योगदान जरूर दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने बिजली की समस्या को दूर करने और बेहतर औद्योगिक माहौल के लिए अधिकारियों तथा उद्योगपतियों के साथ सद्भावना पूर्ण व्यवहार स्थापित करने की दिशा में पहल करने की बात कही।

       समारोह में अति विशिष्ट अतिथि श्री तोखन साहू आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री भारत सरकार एवं सांसद बिलासपुर ने कहा कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था कृषि और उद्योग पर निर्भर है। उद्योग से रोजगार भी उत्पन्न होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रोजगारोन्मुखी उद्योग को बढ़ावा देने की पहल की है। मुद्रा लोन को बढ़ाया है।
   समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास में उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उद्योगों से सिर्फ किसी सामान का निर्माण नहीं होता और यह पैसा कमाने का साधन नहीं है। रोजगार सृजन में भी उद्योग की भूमिका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लगातार उद्योग को बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री द्वारा भी लघु उद्योग सहित अन्य उद्योग को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने स्वर्ण जयंती पर बिलासपुर जिला उद्योग संघ को बधाई दी।
    जिला उद्योग संघ बिलासपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय, अति विशिष्ट अतिथि श्री तोखन साहू आवास एवं शहरी राज्य मंत्री भारत सरकार एवं सांसद बिलासपुर, विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, विधायकगण श्री अमर अग्रवाल, श्री धरम लाल कौशिक, श्री धरमजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, श्री अटल श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष हाउसिंग बोर्ड श्री भूपेंद्र सवन्नी का शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर अभिनन्दन किया।
        इस अवसर पर बिलासपुर उद्योग संघ के संस्थापक सदस्य श्री हरीश केडिया, अध्यक्ष जिला उद्योग संघ श्री अनिल सलूजा, महासचिव श्री शरद सक्सेना सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। समारोह में बिलासपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष ने नई उद्योग नीति, सिंगल विंडो सिस्टम के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

39वां चक्रधर समारोह 07 से 16 सितंबर तक
ख्याति प्राप्त कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
पद्मश्री हेमामालिनी की नृत्य नाटिका के साथ होगा समारोह का आगाज़
स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां भी होंगी समारोह का आकर्षण
  रायपुर /शौर्यपथ   / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज यहां राजधानी रायपुर स्थित निवास में कलेक्टर रायगढ़ श्री कार्तिकेया गोयल और पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल ने सौजन्य मुलाकात कर 39वें चक्रधर समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण स्वीकार कर समारोह के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।
         मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की पहचान है। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों ने समारोह में प्रस्तुति देकर इसके गौरव को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ से मैं सांसद रहा और इस आयोजन को करीब से देखा है। श्री साय ने कहा कि समारोह से मेरा भावनात्मक लगाव भी है। महाराजा चक्रधर ने रायगढ़ को अमूल्य सांस्कृतिक विरासत सौंपी है, जो लगातार समृद्ध हो रहा है। समारोह की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि कलाकारों और कलाप्रेमियों को वर्ष भर इस समारोह का इंतजार रहता हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्थानीय लोक कलाकारों को भी समारोह में प्रमुखता के साथ शामिल करने को कहा।
        कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल ने मुख्यमंत्री से आयोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। उन्होंने बताया कि 10 दिन तक चलने वाले समारोह में  इस वर्ष भी बड़े कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही समरोह में स्थानीय लोक कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
          गौरतलब है कि 39वां चक्रधर समारोह 07 से 16 सितम्बर 2024 तक रायगढ़ जिला मुख्यालय स्थित रामलीला मैदान में आयोजित किया जाएगा। शुभारंभ समारोह में पद्मश्री हेमा मालिनी नृत्य नाटिका 'राधा रासबिहारी' की प्रस्तुति देंगी और समापन समारोह में डॉ.कुमार विश्वास कविता पाठ करेंगे। समारोह के दौरान प्रतिदिन सायं 6 बजे से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नामी कलाकारों द्वारा विभिन्न विधाओं में प्रस्तुतियां दी जाएगी।

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