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April 05, 2026
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शौर्यपथ

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छत्तीसगढ़ सरकार की अपील: "देखो अपना देश" अभियान में हिस्सा लें और राज्य के पर्यटन गंतव्यों को बनाएं देश का गौरव

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नागरिकों से अपील की है कि वे भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे "देखो अपना देश" अभियान में सक्रिय भागीदारी करें। इस अभियान के तहत देशभर के नागरिकों को अपने राज्य के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों के लिए वोट करने का मौका मिल रहा है, और छत्तीसगढ़ के अद्वितीय और खूबसूरत गंतव्यों को इस राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का यह एक सुनहरा अवसर है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, "छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक स्थलों को पूरे देश में पहचान दिलाने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि वे अपने राज्य के गंतव्यों के लिए वोट करें और इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।"

वोट कैसे करें
वोटिंग के लिए नागरिकों को वेबसाइट
https://forms.gle/ANvrFcQqxg55EkSw7
का उपयोग करना होगा। इस फॉर्म के माध्यम से लोग छत्तीसगढ़ के उन स्थलों के लिए वोट कर सकते हैं, जिन्हें वे राज्य और देश का गौरव मानते हैं। राज्य सरकार ने भी सभी से आग्रह किया है कि वे इस लिंक को अपने सोशल मीडिया पर साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान में भाग ले सकें।

अंतिम तिथि
इस अभियान में वोट करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2024 है। इसके बाद, चुने गए गंतव्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाएगा, जिससे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे। छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, और यह अवसर हमें अपनी धरोहर, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को देशभर में फैलाने का मौका देता है। श्री साय ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और छत्तीसगढ़ को भारत का गौरव बनाने में मदद करें।

शेष जिलों के विद्यार्थियों को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलेगा ऋण
कमजोर आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों को मिलेंगे तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर अवसर
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना: 2 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थी होंगे पात्र
डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल
ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा 4 लाख रूपए
कलेक्टरों को अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्रों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश
   

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर दिलाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इन जिलों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ’मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना’ के तहत लाभान्वित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए विशेष अभियान चलाने कहा है।
मुख्यमंत्री साय ने राज्य के अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को भी तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत के ब्याज दर पर दी जा रही ऋण सुविधा का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के संचालन के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस योजना के अंतर्गत डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। योजना में ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख निर्धारित है।
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के तहत तकनीकी शिक्षा एवं अन्य व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेशित ऐसे छात्रों को, जिनके परिवारों की वार्षिक आय 2 लाख से कम है, उनको मोेरेटोरियम अवधि के पश्चात ऋण किश्तों के नियमित भुगतान की स्थिति में केवल एक प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा। शेष ब्याज की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा सीधे संबंधित बैंक को किया जायेगा।
राज्य के माओवादी आतंक प्रभावित जिले बस्तर, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, जशपुर, उत्तर बस्तर कांकेर, कोरिया, नारायणपुर, राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद, सुकमा, कोण्डागांव एवं बलरामपुर जिले के छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा।
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित शर्ताें में छात्र को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित तथा सक्षम प्राधिकारी (यथा एआईसीटीई, यूजीसी) मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम प्रवेशित हो। अधिकतम पारिवारिक आय रूपये 2 लाख होनी चाहिए, जो कि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
योजना के अंतर्गत ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख है। ब्याज अनुदान का लाभ लेने के लिए नियमित रूप से ऋण किश्तों का भुगतान अनिवार्य है। ड्राप ऑउट एवं निष्कासित छात्र इस योजना के लाभार्थी नहीं बने रहेंगे किन्तु चिकित्सीय कारणों से एक वर्ष की अधिकतम सीमा तक अध्ययन में रूकावट होने की दशा में पात्रता बनी रहेगी।
इन पाठ्यक्रमों में मिलेगा लाभ
योजना के अंतर्गत बीई/बीटेक, एमई, एम टेक, डी आर्क, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, एमसीए, एम.बी.ए, डीई, बी.पी.एड, एमपीएड, पी.जी.डी.सी.ए., बी.एच.एम.एस., बी.ए.एम.एस, बी.एन.वाई.एस, बी.एन.एस., बी.यू.एम.एस, वी.एफ.एस.सी., बी.टेक डेयरी, बी.एग्री, बी.डी.एस, एमडीएस, एमबीबीएस, बीव्हीएससी, बीएससी नर्सिंग बेसिक तथा पोस्ट बेसिक, बी. फार्मा, एम फार्मा, डी फार्मा, डिप्लोमा इन मॉर्डन आफिस मेनेजमेंट, डिप्लोमा इन इंटीरियर डेकोरेशन एण्ड डिजाइन, डिप्लोमा इस कास्टयूम डिजाईन एण्ड ड्रेस मेकिंग, बीएड, डीएड, एमएड, के पाठ्यक्रमों में अध्ययन के लिए योजना का लाभ लिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 0771-2331331 सम्पर्क तथा वेबसाइट cgdteraipur.cgstate.gov.in पर अवलोकन किया जा सकता है।

सुबह 10 से अपराह्न 4 बजे तक लोग आकर बता सकते हैं अपनी समस्याएं
   जशपुरनगर /शौर्यपथ  / मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया लोगों के लिए आस का केंद्र बना हुआ है।
न केवल जशपुर बल्कि अन्य जिलों के लोग भी अपने आवेदन देकर समस्याओं का समाधान पा रहे हैं। सीएम कैंप कार्यालय बगिया में अब हफ्ते में 3 दिन ही जनदर्शन कार्यक्रम आयोजित की जाएगी। जनदर्शन कार्यक्रम सप्ताह के सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को सुबह 10 बजे से अपराह्न 4 बजे तक लगेगी। लोग सीएम कैंप कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं रख सकते हैं। जहॉ उनकी  परेशानियों का उचित निराकरण किया जाएगा।
           उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास को प्रदेश सरकार ने सीएम कैम्प का दर्जा दिया है। जनदर्शन में प्राप्त आवेदन को संबंधित विभाग को निराकरण करने के निर्देश दिए जाते हैं। जिससे आम जनता को परेशानी न हो। बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जशपुर जिले के साथ दूसरे जिले से भी लोग अपनी समस्या और मांगों लेकर, यहां पहुंचते हैं। प्रवास में रहने के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वयं जनदर्शन में शामिल हो कर, लोगों की समस्या व मांगों को सुन कर उनका निराकरण करते हैं।
इस नंबर में कॉल कर ले सकते हैं जानकारी
आवेदन के निराकरण के संबंध में जानकारी हेतु मुख्यमंत्री कैम्प ऑफिस बगिया के दूरभाष नंबर 07764-250061 एवं 07764-250062 में संपर्क किया जा सकता है।

मंत्री श्री केदार कश्यप सम्मेलन में शामिल हुए और राज्य की आगामी 5 वर्षों की योजनाओं से अवगत कराया
राज्य में पर्यटन के विकास के लिए केंद्र से संसाधन एवं समर्थन की मांग की
   रायपुर/शौर्यपथ   / केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में पश्चिमी और मध्यवर्ती राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के पर्यटन मंत्रियों का सम्मेलन गोवा के पणजी में आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर  कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के पर्यटन विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करना था। इस मौके पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने पर्यटन क्षेत्र में सुधार और नए आयाम जोड़ने के लिए विभिन्न राज्यों से सहयोग और समर्थन का आह्वान किया।
   पर्यटन की समग्र प्रगति और विकास हेतु सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा गोवा में पश्चिमी तथा मध्यवर्ती राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र के पर्यटन मंत्रियों के सम्मेलन का आयोजन किया गया। ताकि पर्यटन क्षेत्र के लिए संकल्पना निर्माण तथा विचार-विमर्श किया जा सके और एक साझा विजन तैयार किया जा सके।
    इस बैठक में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्रों के विकास, वैकल्पिक गंतव्यों के विकास, मार्केटिंग और संवर्धन, पर्यटन क्षेत्र में कनेक्टिविटी, स्वच्छता, व्यवसाय करने की सुविधा और सुगमता में सुधार के साथ-साथ पर्यटन में निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने संबंधी उत्कृष्ट कार्य पद्धतियों को साझा करने पर फोकस किया गया। सम्मेलन में राज्यों के प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्र, वैकल्पिक गंतव्य, मार्केटिंग और संवर्धन, व्यवसाय करने की सुगमता और निजी निवेश तथा स्वच्छता तथा पर्यटक सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया।
   छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन स्थलों की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की, साथ ही विकास की राह में आने वाली चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया। मंत्री श्री कश्यप ने केंद्र से समर्थन और संसाधनों की मांग की ताकि छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सके।
   मंत्री श्री कश्यप ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, प्राचीन स्मारकों, दुर्लभ वन्यप्राणियों, नक्काशीदार मंदिरों, बौद्ध स्थलों, राजमहलों, जलप्रपातों, गुफाओं और प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों से परिपूर्ण राज्य है। हमारा राज्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के साथ गौरवशाली प्राचीन लोक संस्कृति का भी अद्वितीय उदाहरण है।
   उन्होंने कहा कि भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय से भी पूरा सहयोग प्राप्त होता रहा है। हमने अनेक परियोजनाएँ केंद्रीय सहायता से विकसित की हैं। स्वदेश दर्शन में ’ट्रायबल टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया है। प्रशाद योजना में डोंगरगढ़ का कार्य अंतिम चरणों में है। इसके पूर्व जगदलपुर, चित्रकोट, भोरमदेव, सिरपुर, रतनपुर, मैनपाट, राजिम, मल्हार आदि स्थलों को केंद्रीय सहायता से विकसित किया है। इसमें राज्य बजट से भी कार्य कराया गया है।
   इन विकास कार्यों से और पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार से अब यहाँ पर्यटक आने लगे हैं और लगातार पर्यटकों की संख्या बढती जा रही है। आने वाले समय में राज्य में शक्तिपीठ स्थलों का विकास किया जायेगा। हम रोपवे एवं क्रूज पर्यटन के विकास के लिये भी कार्यवाही कर रहे हैं। नयी पर्यटन नीति पर कार्य चल रहा है एवं पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने हेतु भी कार्यवाही चल रही है। हमने केंद्र की होमस्टे गाइडलाइन्स के आधार पर राज्य में ’होमस्टे एंड बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ गाइडलाइन्स तैयार कर जारी की है। इको टूरिज्म पॉलिसी, एडवेंचर गतिविधियों की गाइडलाइन्स, वाटर एक्टीविटी लाइसेंस हेतु गाइडलाइन्स बनाने की भी तैयारी चल रही है।
    राज्य में पर्यटन को और गति देने के लिये हमें पर्यटन मंत्रालय से नयी योजनाओं की स्वीकृति की अपेक्षाएँ हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 में चयनित डेस्टीनेशंस बिलासपुर एवं जगदलपुर के लिये भारत सरकार के स्तर से कंसल्टेंट नियुक्त किया जाना है। प्रशाद योजना में सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ का कांसेप्ट प्लान जमा किया जा चुका है जिसकी स्वीकृति अपेक्षित है। अगले प्रस्तुतिकरण के अनुसार आगे भी नयी योजनाएँ तैयार हो रही हैं जिनके प्रस्ताव जल्द ही पर्यटन मंत्रालय को भेजे जायेंगे।
   मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि निजी सहभागिता एवं निवेश तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के द्वारा निर्मित किये गए हाइवे मोटलों को संचालन एवं प्रबंधन हेतु लीज पर निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की कार्यवाही की जा रही है। जिससे पर्यटकों को पर्यटन स्थलों के भ्रमण के दौरान राजमार्गों पर स्तरीय सुविधा उपलब्ध हो सके।
  स्थानीय सहभागिता, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के द्वारा चित्रकोट में वन विभाग के सहयोग से नेचर ट्रेल का विकास किया गया है। इसका संचालन स्थानीय महिला स्वसहायता समुह की महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है तथा पर्यटन से उनके लिये अतिरिक्त आय के स्रोत बढ़ाने एवं पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, रहन सहन व खानपान का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से होमस्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट की सुविधा भी प्रदान की जा रही है तथा हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने एवं युवाओं को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में इंस्टीट्युट ऑफ होटल मैनेजमेंट, केटरिंग टेक्नॉलाजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन संस्थान का संचालन किया जा रहा है।
 मंत्री श्री कश्यप ने राज्य की आगामी 5 वर्षों की योजनाओं से कराया अवगत
   श्री कश्यप ने आगामी 5 वर्षों की राज्य की योजनाएं से अवगत कराया जिसके तहत राज्य के पाँच शक्तिपीठों को जोड़ते हुए सर्किट विकसित करना, स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत बिलासपुर एवं जगदलपुर डेस्टीनेशंस के पर्यटन स्थलों का विकास। प्रशाद योजना के तहत सूरजपुर जिले के माँ कुदरगढ़ी देवी स्थल का विकास कार्य एवं रोपवे की स्थापना शामिल है। इसी तरह नवनिर्मित राजमार्गों एवं बायपास पर पर्यटकों के लिये वेसाइड अमेनिटी विकसित करना। पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की सहभागिता को बढ़ावा देना। ईको टूरिज्म, एग्री टूरिज्म, रूरल टूरिज्म एवं माइस (MICE) टूरिज्म को बढ़ावा देना। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की आवासीय इकाईयों को लीज पर निजी क्षेत्र को संचालन हेतु दिया जाना जैसी योजनाएं भी शामिल है।
  इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी, गोवा के पर्यटन मंत्री श्री रोहन खाउंते, मध्यप्रदेश से मंत्री श्री धर्मेंद्र लोधी, राज्यों से आए पर्यटन मंत्रीगण एवं वरिष्ठ अधिकारीगण शामिल थे।

महतारी वंदन योजना से सशक्त हो रही हैं महिलाएं
        रायपुर /शौर्यपथ  / महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में आर्थिक रूप से स्वालंबी बनाने के लिए यह योजना एक कारगर कदम सिद्ध हो रही है। प्रदेश के महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा इस योजना की शुरूवात की गयी है, इस योजना के आने से महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया है, इसके अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रूपए की राशि प्रदान की जाती है। जिसे महिलाएं अपने आवश्यकतानुसार दैनिक जीवन में होने वाले खर्च में उपयोग कर रही है एवं उनके जीवन निर्वाह में यह योजना अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो रही है।
       जांजगीर चांपा जिला के ग्राम पंचायत पंतोरा की निवासी श्रीमती रामीन मरकाम की है जो अपने पति एवं चार बच्चों के साथ बड़ी ही मुश्किल से आर्थिक परेशानी के साथ जीवन-यापन कर रही थी। उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में बहुत परेशानी आ रही थी, साथ ही उनके आजीविका का एक मात्र साधन कृषि है जिसे करने में भी कठिनाई हो रही थी। इसी बीच सरकार की महत्वकांक्षी योजना महतारी वंदन की शुरूवात हुई। श्रीमती रामीन मरकाम ने बताया कि योजना से प्राप्त होने वाली सहायता राशि का उपयोग उनके द्वारा अपने दैनिक जीवन मे होने वाले खर्च, खेती के कार्य खाद, बीज, कीटनाशक इत्यादी खरीदने में किया। जिससे उनका कृषि से होने वाली आय बढ़ गई है, इससे उनके बच्चों के पढ़ाई-लिखाई की राह भी आसान हो गई है।
    श्रीमती रामीन मरकाम के चेहरे पर चिन्ता की लकीरों की जगह आशा की मुस्कान है। सरकार द्वार उठाया गया यह कदम निश्चित ही महिलाओं के लिए सफलता की राह प्रशस्त करेंगा। श्रीमती रामीन मरकाम ने महतारी वंदन योजना प्रारंभ करने के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की अपील: "देखो अपना देश" अभियान में हिस्सा लें और राज्य के पर्यटन गंतव्यों को बनाएं देश का गौरव
रायपुर /शौर्यपथ /  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नागरिकों से अपील की है कि वे भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे "देखो अपना देश" अभियान में सक्रिय भागीदारी करें। इस अभियान के तहत देशभर के नागरिकों को अपने राज्य के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों के लिए वोट करने का मौका मिल रहा है, और छत्तीसगढ़ के अद्वितीय और खूबसूरत गंतव्यों को इस राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का यह एक सुनहरा अवसर है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, "छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक स्थलों को पूरे देश में पहचान दिलाने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि वे अपने राज्य के गंतव्यों के लिए वोट करें और इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।"
वोट कैसे करें
वोटिंग के लिए नागरिकों को वेबसाइट https://forms.gle/ANvrFcQqxg55EkSw7 का उपयोग करना होगा। इस फॉर्म के माध्यम से लोग छत्तीसगढ़ के उन स्थलों के लिए वोट कर सकते हैं, जिन्हें वे राज्य और देश का गौरव मानते हैं। राज्य सरकार ने भी सभी से आग्रह किया है कि वे इस लिंक को अपने सोशल मीडिया पर साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान में भाग ले सकें।
अंतिम तिथि
इस अभियान में वोट करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2024 है। इसके बाद, चुने गए गंतव्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाएगा, जिससे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे। छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, और यह अवसर हमें अपनी धरोहर, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को देशभर में फैलाने का मौका देता है। श्री साय ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और छत्तीसगढ़ को भारत का गौरव बनाने में मदद करें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर मिली स्वीकृति राज्य सरकार ने जारी किया निविदा
   रायपुर /शौर्यपथ  / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर जशपुर जिला के कुनकुरी में प्रस्तावित 220 बिस्तर की क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल के भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार ने निविदा जारी कर दिया है। इस अस्पताल के लिए राज्य सरकार ने 32 करोड़ 9 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की है। उल्लेखनीय है राज्य में विष्णुदेव साय सरकार ने अपने बजट में कुनकुरी में 220 बिस्तर की क्षमता वाली अत्याधुनिक अस्पताल निर्माण की घोषणा की थी। इस बजट में अस्ताल भवन निर्माण के लिए आवश्यक राशि की स्वीकृति मुख्यमंत्री श्री साय ने दी है।
आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले के लिए इस अस्पताल को मील का पत्थर माना जा रहा है। सरकार की मंशा आगे चल कर, इसे मेडिकल कालेज के रूप में विकसित करने की है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते वर्ष दिसंबर माह में राज्य की बागडोर सम्हालने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जशपुर सहित पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा के विस्तार और इसमें गुणात्मक सुधार के लिए लगातार कार्य कर रहें हैं। उन्होनें शपथ ग्रहण करने के तत्काल बाद प्रदेश में एंबुलेंस सेवा में सुधार के लिए जिम्मेदार अधिकारियोें को सख्त निर्देश दिये थे। इस परिपालन में जरूरतमंद मरीजों या परिजनों से काल प्राप्त होने के आधा घंटे के अंदर मरीज को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया था। केबिनेट की पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों के लिए सस्ती जेनरीक दवाओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिये थे। बीते 8 माह के कार्यकाल के दौरान जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवा के विस्तार के लिए तेजी से काम हो रहा है।
कुनकुरी में 220 बिस्तर के अस्पताल के साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए 25 अतिरिक्त एंबुलेंस और 1 शव वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 7 उप स्वास्थ्य केन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा देते हुए, आवश्यक मानव संसाधन को स्वीकृति दी जा चुकी है। जिले में 19 एमबीबीएस चिकित्सक और 7 विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना कर, चिकित्सकों की कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अस्पतालों में मशीनों की कमी को दूर करने के लिए 2 करोड़ 32 लाख की स्वीकृति राज्य सरकार ने दी है। इस राशि से कुनकुरी में डायलिसिस केन्द्र शुरू करने के साथ ही जशपुर, मनोरा, लोदाम, बगीचा के अस्पतालो में आवश्यक उपकरणों की खरीदी में किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा जशपुर जिले को स्वास्थ्य सेवा कर क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाना है, ताकि मरीज और उनके स्वजनों को उपचार के लिए भटकना ना पड़े।

पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के स्वयं के सुंदर आशियाने का सपना हो रहा पूरा
सरगुजा जिले में पीवीटीजी परिवारों के लिए 2084 आवास हुए स्वीकृत
   रायपुर /शौर्यपथ  / प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इस योजना ने पीवीटीजी (विशेष पिछड़ी जनजाति) परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक उत्थान का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, नलजल, शिक्षा, बिजली, कृषि, सड़क, और आधार पंजीयन जैसी योजनाओं के माध्यम से न केवल समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक हैं, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
  सरगुजा जिले के जनपद पंचायत सीतापुर के ग्राम पंचायत पेटला की श्रीमती बिखनी बाई प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित होने वालों में से एक हैं। हाल ही में उन्होंने पूरे परिवार के साथ हरेली त्योहार के दिन अपने नए सपनों के सुंदर आशियाने पक्के घर में विधिवत पूजा-अर्चना कर गृहप्रवेश किया। बिखनी बाई ने बताया कि पहले हमारा कच्चा घर था, जिसमें बारिश के दिनों में पानी टपकता था और कीड़े-मकोड़े की समस्याएं भी थीं। हम ऐसे सुंदर-स्वच्छ घर का सिर्फ सपना ही देख सकते थे। लेकिन प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत हमें प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति मिली और अब हमारा यह सुंदर और स्वच्छ घर बनकर तैयार हो गया है। बिखनी बाई ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णदेव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से उनका परिवार अब पक्के घर में रहने के लिए उत्साहित है और उनका जीवन पहले से बेहतर हो गया है।
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरगुजा जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए 2084 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 1469 हितग्राहियों को प्रथम किस्त, 804 को द्वितीय किस्त, 387 को तृतीय किस्त, और 17 को चतुर्थ किस्त की राशि प्रदान की जा चुकी है। वहीं जिले में 30 परिवारों के आवास पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुके हैं।

राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 20 अक्टूबर तक रायपुर में होगा
   रायपुर /शौर्यपथ / 27वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय चयन प्रतियोगिता का शुभारंभ आज श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ द्वारा स्थानीय कोटा स्टेडियम में किया गया। पूरे प्रदेश के 6 वन वृत्तों से आये लगभग 500 खिलाड़ियों को वन बल प्रमुख द्वारा शपथ दिलायी गयी। वन वृत्त बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, कांकेर, सरगुजा, रायपुर से आये खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समस्त खिलाड़ियों द्वारा मार्च पास्ट का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 20 अक्टूबर 2024 को रायपुर में होना सुनिश्चित है जो छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उक्त राष्ट्रीय प्रतियोगिता में विविध खेलों हेतु राज्य स्तरीय टीम का चयन दिनांक 29 से 31 अगस्त 2024 के मध्य प्रतियोगिताएं आयोजित कर किया जा रहा है।
श्री श्रीनिवास राव ने अपने संबोधन में बताया कि यह आयोजन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 की मेजबानी का अवसर दिए जाने पर वन मंत्रालय भारत सरकार का आभार व्यक्त किया एवं छत्तीसगढ़ राज्य के वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशन में 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 को सफल बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे कठिन परिश्रम कर अपने  खेल कौशल को निखारें और 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट  में राज्य का नाम रोशन करें।
  चयन टूर्नामेंट के दौरान अगले दो दिनों में विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला होगा, जिसमें सफल खिलाड़ी 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।
   उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम गत वर्ष पंचकूला, हरियाणा में आयोजित राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता की चौम्पियन टीम रही है। राज्य स्तरीय चयन प्रतियोगिता में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरूण पाण्डेय, सुनील मिश्रा, संजीता गुप्ता, ओ.पी. यादव, नोडल अधिकारी शालिनी रैना, राजू अगासीमनी मुख्य वन संरक्षक रायपुर, विश्वेश कुमार, मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी अन्य वन वृत्तों एवं अरण्य भवन से आये वरिष्ठ अधिकारी, प्रदेश के समस्त वन वृत्तों से आये वन विभाग के उत्कृष्ट खिलाड़ी, रेफरी एवं कोच उपस्थित रहें।

कृषि अभियंताओं के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी का शुभारंभ
कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अभियंता सम्मानित
   रायपुर /शौर्यपथ  / कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि कुछ दशक पूर्व किसान खेती में परंपरागत कृषि उपकरणों का उपयोग करते थे। लेकिन प्रौद्योगिकी के विकास के कारण आज खेतों में ट्रैक्टर चलित कल्टिवेटर, रोटावेटर, कम्बाइन जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों एवं मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही अब कृषि में ड्रोन तथा ए.आई. तकनीक का उपयोग भी होने लगा है। कृषि मशीनरी के तकनीकी विकास के कारण कृषि के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है, इसके लिए देश के कृषि अभियंता तथा कृषि वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं।
 कृषि मंत्री श्री नेताम राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित कृषि अभियंताओं के दो दिवसीय 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजिनियर्स (इंडिया) छत्तीसगढ़ स्टेट सेन्टर, रायपुर एवं स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कृषि अभियांत्रिकी संकाय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से आए कृषि अभियंता शामिल हुए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि ‘‘सतत विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु कृषि अभियंताओं का योगदान’’ विषय पर आयोजित इस सगोष्ठी का विषय काफी ज्वलंत, प्रासंगिक एवं सारगर्भित है। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आज अनेकों चुनौतियां विद्यमान है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसान फसल उत्पादन संबंधी अनेक चुनौतियां से जूझ रहे हैं। ऐसे में कृषि अनुसंधान प्रौद्योगिकी विकास तथा कृषि यंत्रीकरण के द्वारा ही इस चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। श्री नेताम ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विभिन्न फसलों की 65 नई जलवायु लचीली फसल प्रजातियों का लोकार्पण किया है जो मौसम की प्रतिकूलताओं में भी अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कृषि अभियंताओं के इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे। श्री नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा किये गये नवीन अनुसंधानों एवं प्रौद्योगिकी विकास की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि भारत में कृषि के क्षेत्र में जो तीन मुख्य कमियां चिन्हित की गई हैं इनमें से कृषि के क्षेत्र में यंत्रों का उपयोग प्रमुख है। पिछले दशकों में कृषि मशीनरी के विकास तथा उपयोग को बढ़ावा मिलने के बावजूद आज भी हमारे देश में कृषि के क्षेत्र में मशीनरी का उपयोग अन्य विकसित देशों की अपेक्षा काफी कम है। उन्होंने कहा कि देश भर में कृषि मशीनरी के डिजाइन तथा तकनीक के विकास का कार्य किया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं और किसान अब कृषि यंत्रों का ज्यादा उपयोग करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा कृषि मशीनरी के प्रौद्योगिकी विकास की दिशा में काफी काम किया गया है और स्थानीय परिस्थितियों एवं किसानों की आवश्यकताओं को देखते हुए अनेक नवीन कृषि यंत्र विकसित किये गये हैं जिनका उपयोग छत्तीसगढ़ के किसान कर रहे हैं। समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय भू-जल बोर्ड, भारत सरकार के अध्यक्ष डॉ. सुनील के. अम्बस्ट ने कहा कि कृषि मशीनरी के विकास के साथ ही भू-जल संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में भी अधिक कार्य किये जाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कृषि अभियंताओं के राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रकाशित पुस्तिका तथा 9 सितम्बर 2024 को आयोजित होने वाले बलराम जयंती समारोह के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कृषि अभियंताओं का सम्मान भी किया गया जिनमें डॉ. इन्द्रमणी मिश्रा, कुलपति वसंत राव नाईक, मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ परभणी, डॉ. टी.बी.एस. राजपूत, वरिष्ठ वैज्ञानिक, जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, डॉ. टी. विद्या लक्ष्मी, वरिष्ठ वैज्ञानिक केन्द्रीय पोस्ट हार्वेस्टिंग इंजिनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.सी.ए.आर. लुधियाना), डॉ. मधुरेश द्विवेदी सहायक प्राध्यापक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला तथा इं. राजकुमार श्रीवास संचालक शुभी एग्रोटेक प्राईवेट लिमिटेड रायपुर शामिल हैं। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विनय पाण्डेय को लाईफटाइम अचीवमेन्ट अवार्ड से सम्मनित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठा प्रशासनिक आधिकारी, वैज्ञानिक एवं अभियंता उपस्थित थे।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी में वर्तमान समय में कृषि के विकास हेतु बहु प्रासंगिक विषयों जैसे - इंजीनियरिंग इनपुट का संरक्षण और प्रबंधन, फार्म मशीनरी, कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत, मिट्टी और जल संरक्षण और प्रबंधन’’ आदि पर विस्तृत चर्चा होगी एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें मुख्यतः कृषि में जुताई-बुआई से लेकर कटाई-मड़ाई एवं प्रसंस्करण की क्रियाओं का मशीनीकरण, ड्रोन का उपयोग, रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग, कृषि बागवानी में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोटिक्स एवं आई.ओ.टी. का प्रयोग आदि विषयों पर सार्थक संवाद, प्रदर्शन, प्रस्तुतिकरण एवं विचारों का आदान-प्रदान होगा। जलवायु परिवर्तन एवं कृषि कार्यों के समय पर संपादन में कृषि श्रमिकों की घटती उपलब्धता के परिपेक्ष्य में कृषि अभियंताओं के बढ़ते महत्व एवं कस्टम हायरिंग जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता विकास की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा। इस कार्यक्रम में अभियंता, उद्यमी, वैज्ञानिक, उद्योगपति, शोधकर्ता, प्रगतिशील कृषक एवं देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्वत्तजन शामिल हुए जो किसानों की आय बढ़ाने के लिए यथोचित रणनीति को अंतिम रूप देंगे।

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