August 16, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

    केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन, राज्यों की सहमति से तैयार होगा वैज्ञानिक कृषि मॉडल


    नई दिल्ली, ।
    देश में कृषि को अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से Shivraj Singh Chouhan की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया गया, जिसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन के निर्देश भी दिए गए।

    केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यों के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार करना देश की कृषि व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक गंभीर और दूरदर्शी पहल है, जिससे किसानों को स्थानीय संसाधनों के अनुरूप खेती की स्पष्ट दिशा मिलेगी।


    ? राज्यों की सहमति से तैयार होगा कृषि रोडमैप

    कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह रोडमैप राज्यों की सहमति और उनकी आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा तथा इसे किसी भी राज्य पर थोपा नहीं जाएगा। प्रारंभिक स्तर पर Rajasthan, Andhra Pradesh और Uttar Pradesh ने इस पहल के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।

    इस कार्य में Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) और कृषि मंत्रालय मिलकर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।


    ? उत्पादन बढ़ाने के साथ फसल विविधीकरण पर विशेष जोर

    नए कृषि रोडमैप के तहत देश के 12 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए उपयुक्त फसल प्रणाली तय की जाएगी।

    इस योजना में मुख्य रूप से:

    • उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
    • धान और गेहूं पर निर्भरता कम करने की रणनीति
    • फसल विविधीकरण को बढ़ावा
    • सोयाबीन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने की योजना
    • क्लस्टर आधारित खेती, प्रोसेसिंग और मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था विकसित करना

    ? ‘पर्पल रेवोल्यूशन’ की तर्ज पर नई कृषि क्रांतियां

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Purple Revolution (लैवेंडर खेती) की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेष कृषि क्रांतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

    नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


    ? किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

    कृषि मंत्री ने कहा कि यह रोडमैप किसानों के लिए एक वैज्ञानिक दस्तावेज की तरह काम करेगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा:

    • कौन-सी फसलें स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हैं
    • किस क्षेत्र में कौन-सी कृषि प्रणाली सबसे लाभकारी होगी
    • किन तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है

    रोडमैप तैयार होने के बाद राज्यों की आर्थिक, तकनीकी और संरचनात्मक जरूरतों का विश्लेषण कर चरणबद्ध तरीके से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


    ⭐ निष्कर्ष (समाचार का प्रभावी समापन)

    देश की कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रत्येक राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनने से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती का स्पष्ट मार्ग मिलेगा, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

    नई दिल्ली/गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।

    क्या है पूरा विवाद?

    5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।

    विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।

    हाईकोर्ट का रुख सख्त

    24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।

    अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।

    आगे क्या?

    अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।

    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की 133वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी को विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने देश की हालिया उपलब्धियों और जन-आंदोलनों को रेखांकित करते हुए नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।


    ? परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक उपलब्धि

    प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल करने को भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा का बड़ा मील का पत्थर बताया।

    • पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित
    • ऊर्जा उत्पादन के साथ नया ईंधन तैयार करने की क्षमता
    • औद्योगिक, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा लाभ

    ?️ पवन ऊर्जा में भारत की छलांग

    पीएम मोदी ने बताया कि भारत की विंड एनर्जी क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और देश दुनिया में चौथे स्थान पर है।

    • गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे राज्य अग्रणी
    • रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर
    • स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने का आह्वान

    ?️ बुद्ध पूर्णिमा और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव

    प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि

    • शांति और करुणा आज के वैश्विक तनाव में और अधिक प्रासंगिक
    • चिली और कर्नाटक में बौद्ध परंपरा से जुड़े प्रेरक प्रयासों का उल्लेख

    ? ‘बीटिंग रिट्रीट’ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर

    • पहली बार WAVES OTT पर उपलब्ध
    • भारतीय संगीत परंपरा और सशस्त्र बलों की झलक
    • नागरिकों से इसे सुनने और जुड़ने की अपील

    ? पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानियां

    प्रधानमंत्री ने देशभर से उदाहरण साझा किए:

    • कच्छ में Flamingo City
    • यूपी में ‘गज मित्र’ पहल
    • छत्तीसगढ़ में ब्लैकबक की वापसी
    • गोडावण संरक्षण के प्रयास

    ? नॉर्थ-ईस्ट का ‘बांस क्रांति’

    • 2017 में कानून बदलाव के बाद बांस उद्योग में उछाल
    • महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को लाभ
    • नागरिकों से नॉर्थ-ईस्ट उत्पाद खरीदने की अपील

    ? डिजिटल इंडिया: 20 करोड़ ऐतिहासिक दस्तावेज ऑनलाइन

    • National Archives द्वारा डिजिटाइजेशन
    • 7वीं-8वीं सदी की पांडुलिपियां, 1857 के दस्तावेज
    • पोर्टल: abhilekh-patal.in

    ? बेटियों की वैश्विक उपलब्धि

    European Girls Mathematical Olympiad में:

    • भारत 6वें स्थान पर
    • गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज पदक
    • बेटियों और उनके अभिभावकों की सराहना

    ? जनगणना 2027: पूरी तरह डिजिटल

    • मोबाइल ऐप और self-enumeration की सुविधा
    • अब तक 1.2 करोड़ घरों का सूचीकरण
    • नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील

    ? ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रहा भारतीय चीज

    • अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय ब्रांड सम्मानित
    • कलारी, छुरपी, सुरती चीज जैसे पारंपरिक उत्पाद
    • डेयरी सेक्टर में वैल्यू एडिशन और वैश्विक पहचान

    ?? समापन संदेश

    प्रधानमंत्री ने रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को नमन किया और युवाओं से छुट्टियों में कुछ नया सीखने का आग्रह किया।

    “विकसित भारत का सपना जनभागीदारी से ही साकार होगा।”

    इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, प्रकृति संरक्षण और राष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने का आह्वान किया।

    नई दिल्ली/विशाखापत्तनम ।
    भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन 27-28 अप्रैल, 2026 को आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगे।

    इस दौरान वे 27 अप्रैल को विशाखापत्तनम पहुंचकर प्रतिष्ठित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे।

    आंध्र विश्वविद्यालय, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है, अपने 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।

    यह दौरा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत उपलब्धियों को सम्मानित करने और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    गंगटोक ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27-28 अप्रैल को सिक्किम के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य स्थापना के 50वें वर्ष (स्वर्ण जयंती) के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ करेंगे।

    स्वर्ण जयंती समारोह में भागीदारी

    28 अप्रैल को सुबह प्रधानमंत्री पालजोर स्टेडियम, गंगटोक में आयोजित समापन समारोह में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले वे गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा कर राज्य की समृद्ध पारिस्थितिक और पुष्प विरासत का अवलोकन करेंगे।

    हर क्षेत्र में विकास की बड़ी पहल

    प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाएं कई अहम क्षेत्रों को कवर करती हैं:

    • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी
    • स्वास्थ्य और शिक्षा
    • बिजली और शहरी विकास
    • पर्यावरण संरक्षण
    • पर्यटन और कृषि

    इनका उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूती

    • यांगंग में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल (शिलान्यास)
    • एनआईटी देवराली में सोवा रिग्पा अस्पताल (उद्घाटन)
    • सिक्किम विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर
    • हेलेन लेपचा मेडिकल कॉलेज, डेंटम व्यावसायिक कॉलेज
    • 160 स्कूलों में आईटी-सक्षम शिक्षा परियोजना

    कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

    • तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील आर्च ब्रिज
    • बिरधांग-नामची सड़क का उन्नयन
    • गंगटोक में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

    शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण

    • मिनी सचिवालय और सिविल सेवा संस्थान
    • शहरी गरीब आवास और पुलिस आवास परियोजनाएं
    • सिंगतम में सीवरेज सिस्टम और नदी प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं

    पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना को बढ़ावा

    • रिज प्रीसिंक्ट का पुनर्विकास
    • कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सुविधाएं
    • इको-टूरिज्म और तीर्थ स्थलों का विकास
    • कृष्णा प्रणामी मंगलधाम में यात्री निवास

    कृषि और युवाओं के लिए पहल

    • IFFCO प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन
    • रंगपो में इंडोर क्रिकेट सुविधाएं

    पूर्वोत्तर विकास का संकेत

    प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर सिक्किम के सतत और तेज विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।

    स्वर्ण जयंती वर्ष में यह पहल सिक्किम को बुनियादी ढांचे, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    श्रीनगर, ।
    भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन अवसर पर जारी इस दस्तावेज़ ने खिलाड़ी-केंद्रित, समन्वित और सहयोगात्मक खेल व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकजुट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

    खिलाड़ी केंद्र में, सरकार सहयोग में

    ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का मूल फोकस एक ऐसे खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर है, जहां

    • खिलाड़ी विकास प्राथमिकता हो
    • केंद्र और राज्य मिलकर संसाधनों का समन्वय करें
    • खेल निकायों में पारदर्शिता और पेशेवर ढांचा विकसित हो

    डॉ. मांडविया ने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और युवा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खेल संस्कृति से आर्थिक विकास तक

    संकल्प में खेलों को बहुआयामी विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

    • खेल अवसंरचना का विस्तार
    • प्रतिभा पहचान और पोषण
    • क्षेत्रीय खेल क्लस्टर का विकास
    • खेल पर्यटन और रोजगार सृजन
    • भारत को वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करना

    यह दृष्टिकोण खेलों को स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे जोड़ता है।

    विविधता ही ताकत: राज्यों को मिली भूमिका

    संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ताकत मानते हुए राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार खेल मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
    इससे स्थानीय प्रतिभाओं को उभरने का अवसर मिलेगा और ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी।

    प्रशासनिक सुधार और ‘माय भारत’ से युवा सहभागिता

    चिंतन शिविर के अंतिम दिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई:

    • खेल प्रशासन में सुधार: पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर ढांचा
    • खेल सामग्री निर्माण: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा
    • युवा सहभागिता: ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाना

    फिट इंडिया का संदेश

    समापन दिवस की शुरुआत “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉ. मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भाग लेकर फिटनेस और जनभागीदारी का संदेश दिया।

    निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास, वैश्विक लक्ष्य

    ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खेल भविष्य खंडित प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रणनीति से तय होगा।

    यह पहल केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

    चंडीगढ़, ।
    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर चंडीगढ़ में एक स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ—अब सामाजिक न्याय केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध, मापनीय और जमीनी परिणामों के रूप में दिखाई देगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” थीम पर केंद्रित इस शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक और कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर सहमति दी।

    नीतियों से आगे, व्यावहारिक समाधान पर फोकस

    केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिविर “इरादों से क्रियान्वयन” की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
    उन्होंने कहा कि चर्चा केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि

    • छात्रवृत्ति वितरण
    • नशामुक्ति
    • वरिष्ठ नागरिक कल्याण
    • दिव्यांगजनों के प्रमाणन
    • ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास

    जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान तलाशे गए।

    पांच थीमेटिक समूहों में बना ठोस एक्शन प्लान

    शिविर के दौरान पांच समूहों ने अलग-अलग आयामों पर गहन मंथन किया:

    • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: SC समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और पीएम-अजय के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
    • समावेश, पहचान और एकीकरण: डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए SEED योजना और सटीक पहचान प्रणाली
    • आर्थिक सशक्तिकरण: SC, OBC और वंचित वर्गों के लिए ऋण और उद्यमिता तक आसान पहुंच
    • सुगमता (Accessibility): 2027-28 तक बाधा-मुक्त मानकों और सार्वजनिक ढांचे में सार्वभौमिक डिजाइन लागू करने की योजना
    • दिव्यांगजनों का प्रमाणन: तकनीक आधारित, तेज और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली

    2027 जनगणना और ट्रांसजेंडर कल्याण पर विशेष ध्यान

    शिविर में कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर सहमति बनी:

    • जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों का समुचित समावेश
    • SEED योजना को और मजबूत करना
    • SC/OBC वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना
    • SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास, गरिमा गृह और संरक्षण तंत्र को विस्तार

    “जागरूकता से सुलभता” और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर

    राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह स्वीकार किया कि योजनाओं की सफलता का मूल आधार है:

    • जागरूकता बढ़ाना
    • प्रक्रियाओं को सरल बनाना
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग
    • स्पष्ट समयसीमा तय करना

    इस दिशा में छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास और अन्य लाभों को बिना देरी और बाधाओं के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

    टेक्नोलॉजी और समन्वय बनेगा गेमचेंजर

    केंद्रीय मंत्री ने टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन, बेहतर मॉनिटरिंग और केंद्र-राज्य समन्वय को सामाजिक न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन की कुंजी बताया।

    निष्कर्ष: इरादों से परिणाम की ओर

    तीन दिवसीय यह चिंतन शिविर एक स्पष्ट दिशा देकर समाप्त हुआ—

    सामाजिक न्याय को अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक, मापनीय बदलाव लाने पर फोकस किया जाएगा।

    इस साझा संकल्प के साथ देश ने 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगत विकसित भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।

    नई दिल्ली / 

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें कला का एक ऐसा पर्याय बताया है जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। श्री मोदी ने कहा कि श्री रघु राय का कार्य गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता से परिपूर्ण था, जिसने भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को संजोया और उन्हें लोगों के करीब लाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया में उनका योगदान अद्वितीय है और उनका निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

    प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

    “श्री रघु राय जी को कला के एक ऐसे पर्याय के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। उनकी फोटोग्राफी में गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता थी। इसने लोगों को भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं के और अधिक करीब लाया। उनका निधन फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और फोटोग्राफी जगत के साथ हैं। ओम शांति।”

    नई दिल्ली | 

    भारतीय राजनीति के गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 ने बागी रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का नेतृत्व पार्टी के कद्दावर नेता राघव चड्ढा कर रहे हैं।

    दो-तिहाई का जादू: दलबदल कानून से बचाव

    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ सांसदों का जाना नहीं, बल्कि विधिवत 'विलय' है।

    संवैधानिक ढाल: चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या (10) की दो-तिहाई (70%) है, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर खतरा कम रहने की संभावना है।

    शक्ति प्रदर्शन: इस कदम से राज्यसभा में AAP की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों तक रह गई है।

    भाजपा का दामन थामने वाले दिग्गज चेहरे

    भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों की सूची ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है:

    राघव चड्ढा (नेतृत्वकर्ता)

    संदीप पाठक (संगठन के रणनीतिकार)

    अशोक मित्तल

    स्वाति मालीवाल

    हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)

    विक्रमजीत सिंह साहनी

    राजेंद्र गुप्ता

    बगावत की पटकथा: आखिर क्यों टूटी पार्टी?

    सूत्रों की मानें तो इस बड़े विद्रोह की नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त करना इस पूरे घटनाक्रम का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पद और प्रतिष्ठा को लेकर पनपा यह असंतोष आज एक बड़े विभाजन के रूप में सामने आया।

    AAP का पलटवार: 'पंजाब के साथ गद्दारी'

    इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है:

    "यह पंजाब की जनता के पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जो लोग छोड़कर गए हैं, वे पंजाब के हितों के लिए 'गद्दार' साबित हुए हैं।" > — संजय सिंह, सांसद (AAP)

    भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है।

    अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ "धक्का" (अन्याय) किया है।

    निष्कर्ष

    2026 का यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है या कानूनी पेचीदगियां नया मोड़ लेकर आएंगी।

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