August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

    नई दिल्ली ।
    भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। वर्तमान में ये अधिकारी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों, नैतिकता और जनसेवा के मूल्यों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ अब उनसे अपेक्षाएं भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

    “करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन जरूरी”

    राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन्हें करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—

    “भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें। नियमों का पालन करें, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को कभी न भूलें।”

    उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की निष्पक्षता उसकी न्यायप्रियता को दर्शाती है, जबकि उसकी संवेदनशीलता समाज के हर वर्ग के प्रति उसकी समावेशी सोच का प्रमाण होती है।

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रशासनिक निर्णयों में देरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान मानी जाती है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब भी लोगों के वैध अधिकारों को प्रभावित करता है।

    उन्होंने कहा—

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है। जनहित और व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही सच्ची नैतिकता है।”

    युवा अधिकारियों को सीखने और नेतृत्व की सलाह

    राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध परिस्थितियों और क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा, जहां उन्हें विशेषज्ञ टीमों का नेतृत्व भी करना होगा। ऐसे में उनकी सीखने की क्षमता तेज और अनुकूलन क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

    उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और निरंतर कार्य निष्पादन को प्रशासनिक जीवन का आधार बनाने की सलाह दी।

    “जनता और वंचित वर्ग रहें केंद्र में”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने लोकतंत्र की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाएं उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आती हैं, इसलिए अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “विकसित भारत” का सपना आसान परिस्थितियों में नहीं, बल्कि चुनौतियों के बीच संघर्ष करते हुए पूरा होगा।

    अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को अपने विचार और कार्यों के केंद्र में रखने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि वे विकसित एवं समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

     जगदलपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर से मंगलवार को देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास को लेकर बड़ा राजनीतिक एवं प्रशासनिक संदेश सामने आया। Amit Shah की अध्यक्षता में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद (Central Zonal Council) की 26वीं बैठक में नक्सलवाद, आदिवासी विकास, साइबर सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और राज्यों के बीच समन्वय जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

    बैठक में Vishnu Deo Sai सहित Mohan Yadav, Pushkar Singh Dhami और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक केवल प्रशासनिक समन्वय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे “नए भारत की आंतरिक सुरक्षा और विकास मॉडल” के रूप में भी देखा जा रहा है।

    अमित शाह का बड़ा ऐलान — “भारत तय समय से पहले नक्सल मुक्त”

    बैठक का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रहा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, रणनीतिक अभियान और जवानों के बलिदान के कारण भारत तय समय सीमा से पहले ही “नक्सल मुक्त” हो चुका है।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्षों तक हिंसा और भय का प्रतीक रहे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास, शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। शाह ने सुरक्षा बलों के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश उनके बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।

    विकास और सुशासन पर विशेष फोकस

    बैठक में केवल सुरक्षा नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों पर भी विशेष जोर दिया गया। परिषद में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई उनमें शामिल रहे:

    कुपोषण समाप्त करने के लिए संयुक्त रणनीति

    स्कूल ड्रॉपआउट कम करने के उपाय

    महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों में शत-प्रतिशत सजा सुनिश्चित करने की कार्ययोजना

    राज्यों में आधुनिक साइबर हेल्पलाइन स्थापित करने की पहल

    केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर प्रशासनिक समन्वय

    बैठक में यह भी माना गया कि केवल सुरक्षा अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विकास और विश्वास निर्माण ही स्थायी समाधान का आधार बनेंगे।

    आदिवासी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

    बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा हुई। आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें गाय और भैंस उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार ही उग्रवाद के खिलाफ सबसे प्रभावी सामाजिक हथियार साबित हो सकते हैं।

    अमर वाटिका पहुंचकर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

    बैठक शुरू होने से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सुरक्षा बलों के जवानों के प्रति सम्मान और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी दिया गया।

    बस्तर से राष्ट्रीय संदेश

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बस्तर में इस उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन अपने आप में एक प्रतीकात्मक संदेश है। कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में अब राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और निवेश को लेकर बड़ी बैठकों का आयोजन यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार बस्तर को “संघर्ष क्षेत्र” नहीं बल्कि “संभावनाओं के क्षेत्र” के रूप में स्थापित करना चाहती है।

    बैठक ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में केंद्र सरकार सुरक्षा और विकास—दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम करेगी।

     

    नई दिल्ली/ ।
    दुनियाभर में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बीच यौन उत्पीड़न, डीपफेक और ब्लैकमेल से जुड़े मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका के वित्तीय केंद्र वॉल स्ट्रीट से लेकर भारत के विभिन्न राज्यों तक हाल के महीनों में सामने आए सेक्स स्कैंडलों ने समाज, कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वॉल स्ट्रीट में JPMorgan से जुड़ा बड़ा विवाद

    अमेरिका की दिग्गज वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन (JPMorgan) में एक बड़े यौन उत्पीड़न विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने अपनी महिला बॉस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला तब और अधिक चर्चा में आया जब इससे जुड़े कथित AI-निर्मित डीपफेक चित्र और सोशल मीडिया मीम्स इंटरनेट पर वायरल होने लगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते दुरुपयोग ने निजी छवि, प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की नकली तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करना अब वैश्विक साइबर अपराध का बड़ा रूप लेता जा रहा है।

    भारत में भी सामने आए बड़े सेक्स स्कैंडल

    भारत में भी हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामले सामने आए हैं।
    मई 2024 में कर्नाटक का चर्चित प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल देश के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल रहा। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक बहस को जन्म दिया था।

    इसके अलावा, अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र के अमरावती में सामने आए एक बड़े सेक्स स्कैंडल ने लोगों को झकझोर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 19-20 वर्ष के कुछ युवकों ने कई युवतियों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और वसूली का कथित रैकेट चला रखा था।

    डिजिटल अपराध बन रहे नई चुनौती

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एआई टूल्स और डिजिटल तकनीकों का गलत इस्तेमाल अब साइबर अपराधों को और अधिक खतरनाक बना रहा है। निजी डेटा की चोरी, मॉर्फ्ड फोटो, डीपफेक वीडियो और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।

    कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त साइबर कानून, तेज जांच और डिजिटल साक्ष्यों की निगरानी बेहद जरूरी हो गई है। साथ ही लोगों को सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    समाज और तकनीक के बीच संतुलन की चुनौती

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक जहां सुविधा और विकास का माध्यम बन रही है, वहीं उसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर मजबूत नीतियों और जागरूकता की आवश्यकता है।

    सेंटीग्रेड पैमाने के आविष्कार से लेकर जमशेदजी टाटा और नीलम संजीव रेड्डी तक, इतिहास में दर्ज हैं कई महत्वपूर्ण पड़ाव

    नई दिल्ली, ।
    19 मई का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों और ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण विशेष महत्व रखता है। विज्ञान, उद्योग, राजनीति और सामाजिक इतिहास से जुड़े कई ऐसे प्रसंग आज के दिन दर्ज हैं जिन्होंने दुनिया और भारत की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

    ?️ सेंटीग्रेड पैमाने का विकास

    वर्ष 1743 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन (Jean-Pierre Christin) ने तापमान मापने के लिए सेंटीग्रेड (सेल्सियस) पैमाना विकसित किया था। यह वैज्ञानिक उपलब्धि आज पूरी दुनिया में तापमान मापन की मानक प्रणाली के रूप में उपयोग की जाती है। मौसम विज्ञान, चिकित्सा, प्रयोगशालाओं और दैनिक जीवन में इसका व्यापक महत्व है।

    ? भारत के औद्योगिक युग के शिल्पकार: जमशेदजी टाटा

    भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शामिल टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा का निधन 19 मई 1904 को हुआ था। उन्होंने भारतीय उद्योग, शिक्षा और आधुनिक आर्थिक सोच की मजबूत नींव रखी। स्टील, ऊर्जा, होटल और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी भारत के औद्योगिक विकास की आधारशिला माना जाता है।

    ?? भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म

    भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को हुआ था। वे भारतीय राजनीति के सरल, संतुलित और गरिमामय व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे देश के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्हें निर्विरोध चुना गया था। उनका राजनीतिक जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    ⚫ नाथूराम गोडसे का जन्म

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का जन्म भी 19 मई 1910 को हुआ था। भारतीय इतिहास में यह नाम एक विवादास्पद और संवेदनशील अध्याय से जुड़ा रहा है। 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के बाद देशभर में गहरा आक्रोश फैल गया था और यह घटना भारतीय लोकतंत्र एवं सामाजिक समरसता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है।

    ? इतिहास के पन्नों में दर्ज विशेष दिन

    19 मई केवल तिथियों का संयोग नहीं, बल्कि विज्ञान, राष्ट्रनिर्माण, लोकतंत्र और सामाजिक चेतना से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्यायों का प्रतीक है। यह दिन हमें उन व्यक्तित्वों और घटनाओं को याद करने का अवसर देता है जिन्होंने किसी न किसी रूप में भारत और विश्व के इतिहास को प्रभावित किया।

     

    नई दिल्ली, ।
    देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के साथ महत्वपूर्ण सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल “विकसित भारत @2047” के विजन के अनुरूप ग्रामीण जल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

    नई दिल्ली में आयोजित बैठकों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के.के. मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

    ग्राम पंचायतों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

    नए समझौते के तहत जल प्रबंधन प्रणाली को ग्राम पंचायत आधारित और समुदाय-केंद्रित बनाया जाएगा। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को गांव स्तर पर जल अवसंरचना के संचालन, रखरखाव और जल शुल्क संग्रह की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण जल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

    “जल जीवन मिशन बना जनआंदोलन” — सी.आर. पाटिल

    केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में गरिमा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण का जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि मिशन की मूल समयसीमा मई 2024 थी, जिसे अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है ताकि देश के हर ग्रामीण घर तक शत-प्रतिशत नल जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    अंडमान-निकोबार बना उदाहरण

    अंडमान और निकोबार प्रशासन ने वर्ष 2021 में ही सभी ग्रामीण घरों तक 100 प्रतिशत नल जल पहुंचाने की उपलब्धि हासिल कर ली थी। उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी ने बताया कि अब मिशन 2.0 के तहत समुदाय आधारित जल प्रबंधन और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणाली को लागू किया जा रहा है।

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि द्वीप समूह में स्थायी नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी के कारण यहां जल आपूर्ति मुख्य रूप से वर्षा जल संग्रहण पर निर्भर है, इसलिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।

    पश्चिम बंगाल में जल परियोजनाओं को मिलेगी गति

    पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार “हर घर जल” के लक्ष्य को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और पुरुलिया जैसे पिछड़े क्षेत्रों में जल परियोजनाओं को तेज करने का भरोसा दिया।

    केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने और जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

    जल प्रबंधन में तकनीक और पारदर्शिता पर जोर

    बैठक में जल योजनाओं के वित्तीय मिलान, नियमित पेयजल आपूर्ति, स्थानीय भागीदारी और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी और भरोसेमंद जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करना है।

     

    नई दिल्ली ।
    देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।

    बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।

    “वन हेल्थ” मॉडल से एकीकृत स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

    बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।

    एक वर्ष में कई बड़ी उपलब्धियां

    राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—

    • राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मॉडल शासन ढांचे का विकास,
    • जीनोमिक्स और मेटाजीनोमिक्स आधारित निगरानी नेटवर्क की शुरुआत,
    • चिड़ियाघरों, पक्षी अभयारण्यों और बूचड़खानों में निगरानी प्रणाली,
    • जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान शामिल हैं।

    बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।

    AI आधारित निगरानी और डेटा साझाकरण पर फोकस

    विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    मॉक ड्रिल और तैयारी तंत्र को मजबूत करने पर जोर

    समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।

    उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।

    केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान में अत्याधुनिक भूमिगत खनन और स्मेल्टिंग परियोजनाओं का किया निरीक्षण

    नई दिल्ली/राजस्थान, ।
    केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा-दरीबा परिसर का दौरा करते हुए कहा कि कंपनी का आधुनिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित परिचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण है।

    दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक और तकनीकी रूप से उन्नत भूमिगत खानों में शामिल सिंदेसर खुर्द खदान तथा अत्याधुनिक दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, सुरक्षित, जिम्मेदार और तकनीक-संचालित विकास इंजन में बदल रहा है।

    “खनिज सुरक्षा से मजबूत होगा विकसित भारत”

    श्री रेड्डी ने कहा कि जस्ता, सीसा और चांदी जैसे खनिज भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक जैसे बड़े और तकनीक आधारित उद्योग आयात निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार खनन भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

    तकनीक और सुरक्षा का आधुनिक मॉडल

    केंद्रीय मंत्री ने भूमिगत खदान में जाकर टेली-रिमोट संचालन, पेस्ट फिलिंग, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपायों का अवलोकन किया। उन्होंने भारत की पहली महिला खदान बचाव दल के लाइव प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि यह खनन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    हिंदुस्तान जिंक में वर्तमान में लगभग 26.3 प्रतिशत महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसे मंत्री ने समावेशी कार्य संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    कर्मचारियों और महिला इंजीनियरों से संवाद

    दौरे के दौरान श्री रेड्डी ने खदान की कैंटीन में संविदा कर्मचारियों, महिला खनन इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के साथ भोजन कर संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों की मेहनत, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के खनन विकास में उनके योगदान की सराहना की।

    सतत विकास और हरित भविष्य पर जोर

    केंद्रीय मंत्री को कंपनी द्वारा जल संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, कम कार्बन उत्सर्जन, संसाधन दक्षता और सतत खनन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में भारत की खनिज सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भारतीय खनन कंपनियों की भूमिका पर विशेष फोकस रहा।

    इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ श्री अरुण मिश्रा, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विवेक बाजपेई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    शिवराज सिंह चौहान का ऐलान — लाइसेंस, उर्वरक पंजीकरण और आयात प्रक्रियाएं होंगी आसान, किसानों को मिलेगा तकनीक का बड़ा सहारा

    नई दिल्ली, 18 मई 2026।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रही “रिफॉर्म एक्सप्रेस” को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कई बड़े सुधारों का ऐलान किया है। नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्रालय ने लाइसेंसिंग, उर्वरक पंजीकरण, आयात-निर्यात प्रक्रिया और AI आधारित कृषि सेवाओं को सरल एवं डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसलों की समीक्षा की।

    बैठक में मंत्रालय के सचिव श्री अतीश चंद्रा ने बताया कि घरेलू उपयोग के कीटनाशकों की बिक्री एवं भंडारण हेतु लाइसेंस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है। अब आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर केवल एक पृष्ठ का कर दिया गया है। साथ ही पारंपरिक फिजिकल लीफलेट की जगह अब उत्पादों पर सीधे QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से देशभर के 40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा।

    नए उर्वरकों की मंजूरी प्रक्रिया होगी तेज

    सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। पहले जहां दो अलग-अलग समितियों की मंजूरी आवश्यक थी, अब केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अधिकृत किया गया है। इससे नई तकनीक वाले उर्वरकों को बाजार तक पहुंचाने में तेजी आएगी। सरकार भविष्य में गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले अकार्बनिक उर्वरकों को अनिवार्य फील्ड ट्रायल से छूट देने पर भी विचार कर रही है।

    649 कस्टम पोर्ट्स का डिजिटल एकीकरण

    कृषि जिंसों के आयात को आसान बनाने के लिए देश के सभी 649 कस्टम पोर्ट्स को डिजिटल रूप से इंटीग्रेट कर दिया गया है। अब PQMS और ICEGATE के बीच एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी स्थापित हो चुकी है। इससे आयातकों को केवल एक बार आवेदन करना होगा और Import Release Order सीधे उनके लॉगिन पर उपलब्ध हो जाएगा।

    बीज आयात-निर्यात में भी बड़ी राहत

    सरकार ने बीज एवं रोपण सामग्री के आयात-निर्यात से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करते हुए EXIM Committee को समाप्त कर दिया है। साथ ही “Prior Recommendation” की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे व्यापार प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।

    किसानों के लिए AI आधारित ‘भारत-विस्तार’ प्लेटफॉर्म

    बैठक में “भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) – AI in Agriculture” प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई। यह AI आधारित डिजिटल मंच किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा रहा है। 17 फरवरी 2026 को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 44 लाख से अधिक प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं।

    पहले किसानों को जानकारी के लिए अलग-अलग 15 प्लेटफॉर्म्स पर जाना पड़ता था, लेकिन अब वे एक ही स्थान पर 24x7 सभी जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सुशासन को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों, व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।

     

    नई दिल्ली, ।
    भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

    कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

    समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

    कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।

    समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

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