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नई दिल्ली | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में खेड़ा की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में फिलहाल हिरासत में पूछताछ की कोई ठोस आवश्यकता नहीं दिखती।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है। आरोप था कि पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक मंच से अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई। इसी आधार पर असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की प्रकृति पर गौर करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा:
"प्रथम दृष्टया यह मामला 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता' से प्रेरित प्रतीत होता है। कानून की प्रक्रियाओं का उपयोग राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के भागने या जांच से बचने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए जेल भेजना न्यायोचित नहीं होगा।
इन शर्तों पर मिली 'आजादी'
अदालत ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिनका उल्लंघन होने पर राहत रद्द की जा सकती है:
जांच में सहयोग: खेड़ा को असम पुलिस की जांच में पूरी तरह से शामिल होना होगा।
थाने में हाजिरी: पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें अनिवार्य रूप से पेश होना होगा।
विदेश यात्रा पर रोक: बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
सबूतों की सुरक्षा: वे गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेंगे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया है, जबकि असम सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। जानकारों का मानना है कि 2026 के राजनीतिक माहौल में यह फैसला विपक्षी नेताओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह दे
खा जा रहा है।
जबलपुर | संस्कारधानी जबलपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी बांध आज चीख-पुकार और मातम का केंद्र बन गया। गुरुवार शाम करीब 5:00 बजे आए एक भीषण चक्रवाती तूफान ने पर्यटकों से भरे क्रूज को जलसमाधि दे दी। तट से महज 300 मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे में अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि प्रशासन की मुस्तैदी से 16 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।
कुदरत का तांडव: 74 किमी/घंटा की रफ्तार और डूबता क्रूज
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते 74 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने लगी। लहरें इतनी ऊंची उठीं कि क्रूज अनियंत्रित होकर एक तरफ झुक गया और पलट गया। क्रूज पर सवार पर्यटक संभल पाते, उससे पहले ही सब कुछ पानी में समा गया।
भावुक कर देने वाली दास्तां: आखिरी सांस तक बेटे को बचाती रही मां
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। एक मां ने अपने 4 साल के मासूम बेटे को डूबने से बचाने के लिए आखिरी वक्त तक अपने हाथों में ऊपर उठाए रखा, लेकिन कुदरत के आगे ममता हार गई। दोनों के शव एक साथ बरामद हुए हैं। मृतकों में दिल्ली से घूमने आया एक परिवार भी शामिल है, जिनकी छुट्टियां मातम में बदल गईं।
लापरवाही की 'लहरें': उत्तरजीवियों के गंभीर आरोप
हादसे में सुरक्षित बचे पर्यटकों ने क्रूज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल पर्यटक ने बताया:
"जब मौसम खराब हो रहा था, हमने पायलट से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने चेतावनी को नजरअंदाज किया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि हमारे पास लाइफ जैकेट तक नहीं थे। अगर जैकेट समय पर मिल जाते, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं।"
प्रशासनिक एक्शन और मुआवजे का एलान
हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
उच्च स्तरीय जांच: घटना के कारणों और सुरक्षा खामियों की जांच के लिए कमेटी गठित।
आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की राहत राशि।
कठोर कार्रवाई: क्रूज के पायलट और जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।
पर्यटन पर उठते सवाल
यह हादसा एमपी टूरिज्म और निजी ऑपरेटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आखिर क्यों खराब मौसम के अलर्ट के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया? क्या लाइफ जैकेट की उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित है?
वर्तमान में बरगी बांध पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति लापता न हो। पूरा जबलपुर आज उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहा है जिन्होंने अपनों को खोया है।
नई दिल्ली /
राजधानी दिल्ली में 1 मई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम दरों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹993 की सीधी बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब इसकी कीमत बढ़कर ₹3,071.50 प्रति सिलेंडर हो गई है।
यह वृद्धि खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे व्यवसायियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि कमर्शियल गैस का सीधा असर खाद्य पदार्थों की लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह महंगाई की नई लहर को जन्म दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और परिवहन लागत में वृद्धि को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
? निष्कर्ष:
कमर्शियल LPG की इस बड़ी बढ़ोतरी ने व्यापारिक वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
नई दिल्ली/गुवाहाटी, । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।
पुणे–सतारा मार्ग पर आधुनिक 6-लेन सुरंग परियोजना से घटेगा यात्रा समय, बढ़ेगी सुरक्षा और पर्यटन-व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ
नई दिल्ली/महाराष्ट्र, ।
दशकों से चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले Khambatki Ghat में अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। National Highways Authority of India द्वारा NH-48 (पूर्व में NH-4) पर विकसित की जा रही ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना इस क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित राजमार्ग अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।
परियोजना का एक हिस्सा परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के तहत आम जनता के लिए खोला गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और इसका उद्घाटन 2026 की पहली छमाही में होने की संभावना है।
पहले जहां खंबटकी घाट का सफर संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण तनावपूर्ण रहता था, वहीं नई सुरंग के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो गया है।
यात्रियों के अनुसार:
नई सुरंग में आधुनिक रिफ्लेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन बिंदु और चौड़ी लेन जैसी सुविधाएं यात्रियों को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान कर रही हैं।
Khambatki Ghat मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को जोड़ती है, जैसे—
साथ ही यह मार्ग लोकप्रिय पर्यटन स्थलों—
नई छह-लेन ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना से कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है:
✔️ यात्रा समय में बड़ी कमी
✔️ दुर्घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट
✔️ ईंधन की बचत और वाहन रखरखाव लागत कम
✔️ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
✔️ दैनिक यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
पहले जहां एक दिशा में केवल 0.85 किमी की दो-लेन सुरंग और दूसरी दिशा में लगभग 8 किमी घाट सड़क थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक से लैस नई सुरंग इन सभी समस्याओं का समाधान बनकर उभरी है।
नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का प्रतीक बनती जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि जब अवसंरचना को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, तो यह न केवल दूरी कम करती है, बल्कि समय बचाती है, जानें सुरक्षित करती है और यात्रा को भरोसेमंद बनाती है। ??
1.64 लाख डाकघरों के विशाल नेटवर्क से जुड़ेगी निजी लॉजिस्टिक्स ताकत, दूरदराज क्षेत्रों तक तेज और भरोसेमंद सेवाओं का रास्ता होगा आसान
नई दिल्ली, ।
संचार मंत्रालय के अधीन Department of Posts और देश की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी DTDC Express Limited ने देशभर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
नई दिल्ली स्थित Dak Bhavan में आयोजित कार्यक्रम में डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस समझौते का आदान-प्रदान किया।
यह साझेदारी वर्ष 2025 से जारी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए देश में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को अधिक तेज, प्रभावी और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान मिलकर लॉजिस्टिक्स सेवाओं को आधुनिक और सशक्त बनाने पर काम करेंगे। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
इस समझौते के तहत DTDC Express Limited को Department of Posts के देशभर में फैले 1.64 लाख डाकघरों के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
इससे कंपनी को—
में मदद मिलेगी।
यह सहयोग डाक विभाग के पार्सल कारोबार को नई गति देगा। डीटीडीसी के अनुभव और तकनीकी सहयोग से—
Department of Posts विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क संचालित करता है, जो देशभर में संचार, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वहीं DTDC Express Limited देश की प्रमुख एक्सप्रेस पार्सल डिलीवरी कंपनियों में शामिल है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराती है।
डाक विभाग और डीटीडीसी के बीच यह साझेदारी देश में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे न केवल पार्सल डिलीवरी सेवाएं तेज और सुलभ होंगी, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल व्यापार की पहुंच बढ़ेगी और भारत के वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा को भी नई मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली, ।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बनने की दिशा में अग्रसर है।
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की, जो इस परियोजना की सफलता का अहम पड़ाव माना जा रहा है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा विकसित और भाविनी (BHAVINI) द्वारा निर्मित यह रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन पर आधारित यह तकनीक भारत को भविष्य में अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता देती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भारत, रूस के बाद वाणिज्यिक स्तर पर FBR संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। वर्तमान में रूस ही एकमात्र देश है जो इस तकनीक का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने इसे प्रयोगात्मक स्तर तक ही सीमित रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद अहम है। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फास्ट ब्रीडर तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण के लिए स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा इस जरूरत को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, “परमाणु मिशन” के तहत वर्ष 2033 तक 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 5 लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने की योजना है। यह रिएक्टर उद्योगों, दूरदराज क्षेत्रों और सीमित ग्रिड कनेक्टिविटी वाले इलाकों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोगी साबित होंगे।
सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों का संतुलित मिश्रण ही वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का आधार बनेगा।
नई दिल्ली ।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की व्यापक समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई, जिससे जमीनी स्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कदमों पर जोर दिया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा के साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा विभिन्न निर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कर्नाटक के 7,926 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और केरल की 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर मार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि राजमार्ग निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन, कड़े गुणवत्ता मानकों के पालन और आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि टिकाऊ और सुरक्षित सड़क ढांचा ही देश की आर्थिक गति को मजबूती देता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए तथा आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाकर यात्रा अनुभव को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, प्रमुख राजमार्ग गलियारों में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी फोकस करने को कहा गया।
आगामी मानसून को देखते हुए गडकरी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात का सुचारू प्रवाह बना रहे। इसके लिए व्यापक जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
केंद्र सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अब गुणवत्ता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर यातायात अनुभव मिल सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
