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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा - जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं
नई दिल्ली / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ श्री चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्री शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कोलकाता/नई दिल्ली, ।
केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच कोलकाता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि केंद्र की प्रमुख विज्ञान एवं नवाचार योजनाओं को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।
बैठक में विज्ञान शिक्षा, शोध, स्टार्टअप प्रोत्साहन, जैव प्रौद्योगिकी, नैदानिक अनुसंधान और महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख योजनाएं —
को पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल का वैज्ञानिक और शैक्षणिक ढांचा देश के सबसे मजबूत इकोसिस्टम में से एक है, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान योजनाओं से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
बैठक में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सामने आए आर्सेनिक विषाक्तता के मामलों को गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती मानते हुए CSIR संस्थानों के माध्यम से तत्काल वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
इस अध्ययन का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य प्रभावों की जांच करना और वैज्ञानिक समाधान विकसित करना होगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य के वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों, कैंसर अस्पतालों और AIIMS नेटवर्क को जोड़कर:
पर सहयोगात्मक शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।
यह नेटवर्क चिकित्सा अनुसंधान और नई दवाओं के परीक्षण में पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों, मेडिकल नेटवर्क और शिक्षा जगत के समन्वय से पूर्वी भारत में विज्ञान आधारित विकास का नया मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे पश्चिम बंगाल का योगदान भारत की ज्ञान आधारित और नवाचार केंद्रित अर्थव्यवस्था में और मजबूत होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और केंद्र सरकार के वैज्ञानिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के साथ उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय समीक्षा बैठक होगी, जिसमें योजनाओं की प्रगति और नए सहयोग क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी।
यह पहल केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप और तकनीक आधारित जनकल्याण को राज्य के विकास के केंद्र में रखा जाएगा।
नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान दुर्घटना के कारण हुई दुखद मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
भारतीय लोगों की तरफ से प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि शोक संतप्त परिवारों को इस दुखद घड़ी को सहने की शक्ति मिले, साथ ही उन्होंने शेष सभी लापता लोगों के शीघ्र और सुरक्षित बाहर निकलने की भी कामना की।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
"चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान हादसे में लोगों की मौत से दुखी हूँ। भारत के लोगों की तरफ से, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। इस दुखद घड़ी में शोक संतप्त परिवारों को शक्ति मिले। सभी लापता लोगों की शीघ्र और सुरक्षित बरामदगी के लिए प्रार्थना करता हूं।"
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके की मौजूदगी में रायपुर में 257 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र
नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के 47 स्थानों पर आयोजित 19वें रोजगार मेले में 51 हजार से अधिक युवाओं को विभिन्न केंद्रीय विभागों में नियुक्ति पत्र वितरित किए। इसी क्रम में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल द्वारा आयोजित रोजगार मेले में 257 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। रायपुर में यह कार्यक्रम पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इनमें भारतीय रेलवे के 200, डाक विभाग के 34, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 7, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के 5 तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के 11 अभ्यर्थी शामिल रहे। कुल 803 चयनित अभ्यर्थियों में से 257 अभ्यर्थी कार्यक्रम में उपस्थित होकर नियुक्ति पत्र प्राप्त किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण का सशक्त भागीदार बन रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रोजगार मेला अभियान युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
रायपुर के कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने चयनित युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और यही ऊर्जा अमृतकाल में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को शासकीय सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराते हुए आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक दयानंद, अपर मंडल रेल प्रबंधक बजरंग अग्रवाल, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी राहुल गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली / शौर्यपथ /
देश में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को लेकर अब केंद्र सरकार और प्रशासनिक एजेंसियों की सख्त कार्रवाई राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है। सोशल मीडिया आधारित इस आंदोलन पर की गई हालिया कार्रवाइयों ने एक बार फिर लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69(A) के तहत ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आधिकारिक X हैंडल @CJP2029 को भारत में प्रतिबंधित (Withheld) कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई “राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता और युवाओं पर संभावित नकारात्मक प्रभाव” जैसे कारणों को ध्यान में रखते हुए की गई।
शनिवार, 23 मई 2026 को सुबह लगभग 9 बजे संगठन की आधिकारिक वेबसाइट को भी टेकडाउन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस वेबसाइट से लगभग 10 लाख लोग जुड़े हुए थे।
यह वेबसाइट उस समय विशेष रूप से चर्चा में आई थी, जब यहां NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ऑनलाइन अभियान चलाया गया था, जिस पर 6 लाख से अधिक डिजिटल हस्ताक्षर किए गए थे।
संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई के बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज, व्यक्तिगत अकाउंट और बैकअप अकाउंट का एक्सेस भी प्रभावित हुआ। उन्होंने इसे संभावित हैकिंग या प्लेटफॉर्म आधारित कार्रवाई बताया। हालांकि बाद में इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच पुनः बहाल होने की जानकारी सामने आई।
केवल डिजिटल स्तर पर ही नहीं, बल्कि जमीनी गतिविधियों पर भी प्रशासनिक सख्ती देखने को मिली। बेंगलुरु पुलिस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा प्रस्तावित “ह्यूमन चेन” विरोध प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं, बल्कि युवाओं द्वारा संचालित एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन माना जा रहा है। इसकी शुरुआत कथित रूप से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के विरोध के बाद हुई थी।
यह आंदोलन बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, परीक्षा पेपर लीक और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। विशेष रूप से इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इसके करोड़ों फॉलोअर्स जुड़ने के दावे किए गए, जिससे यह मुख्यधारा की कई राजनीतिक इकाइयों से अधिक डिजिटल प्रभाव रखने लगा।
सरकार की इस कार्रवाई को लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और डिजिटल अधिकार समूहों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार बताते हुए “असहमति को दबाने” की कार्रवाई कहा है।
वहीं सत्ता पक्ष और कुछ संगठनों का कहना है कि सोशल मीडिया आधारित ऐसे अभियानों के पीछे विदेशी फंडिंग, संगठित टूलकिट और समाज में अस्थिरता फैलाने की संभावनाओं की जांच आवश्यक है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों का प्रभाव अब केवल ऑनलाइन सीमित नहीं रह गया है। यह मामला आने वाले समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल नियमन, साइबर कानून और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
**नई दिल्ली / शौर्यपथ / **
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के महत्वपूर्ण विदेशी दौरे से स्वदेश लौटते ही केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और शीर्ष अधिकारियों के साथ लगभग चार घंटे तक चली एक उच्च स्तरीय मैराथन समीक्षा बैठक की, जिसमें ‘विकसित भारत 2047’, ऊर्जा सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार और पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनावों के भारत पर संभावित प्रभावों पर गहन चर्चा हुई।
बैठक को केंद्र सरकार की आने वाली रणनीतिक दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “विकसित भारत 2047 केवल एक विजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता है।”
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का सीधा लाभ आम नागरिकों तक तेज़ी और पारदर्शिता के साथ पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल गवर्नेंस और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कार्यप्रणाली में गति और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और उसके कारण संभावित वैश्विक ऊर्जा संकट पर भी गंभीर चर्चा हुई। तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और आम जनता पर न्यूनतम पड़े।
सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने को लेकर विभिन्न मंत्रालयों को समन्वित रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में नीति आयोग सहित कई मंत्रालयों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट और आगामी योजनाओं का प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। तेज़ गति से कार्य पूर्ण करने वाले मंत्रालयों की प्रधानमंत्री द्वारा सराहना भी की गई।
बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया पांच देशों के दौरे की उपलब्धियों और वहां हुए रणनीतिक समझौतों की जानकारी मंत्रिमंडल को दी। इन दौरों को भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करने वाला बताया गया।
प्रधानमंत्री की इस मैराथन बैठक को सरकार के “मिशन मोड” में काम करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां देश को विकसित राष्ट्र बनाने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भी सरकार पूरी सतर्कता और रणनीतिक तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है।
नई दिल्ली:भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव (Biennial Elections) कराने के कार्यक्रम का शंखनाद कर दिया है। इन सीटों पर आगामी 18 जून 2026 को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह चुनाव उन माननीय सदस्यों का कार्यकाल जून और जुलाई 2026 में समाप्त होने के कारण कराया जा रहा है, जो सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं।
इसके साथ ही आयोग ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 1-1 सीट पर राज्यसभा उपचुनाव कराने का भी फैसला किया है। ये दोनों सीटें मौजूदा सांसदों के विधानसभा चुनाव में चुने जाने के बाद खाली हुई थीं।
? चुनाव का पूरा शेड्यूल (कार्यक्रम)
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया जून के पहले सप्ताह से शुरू होकर 18 जून को नतीजों के साथ ही संपन्न हो जाएगी। आयोग द्वारा जारी विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:
1 जून 2026:चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी होगी।
8 जून 2026:नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि।
9 जून 2026:नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) की जाएगी।
11 जून 2026:उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।
18 जून 2026 (सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे): सीटों के लिए मतदान (Voting) होगा।
18 जून 2026 (शाम 5:00 बजे):मतदान खत्म होने के ठीक एक घंटे बाद वोटों की गिनती शुरू होगी और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।
?️ राज्यों के अनुसार खाली हो रही सीटों का गणित
यह द्विवार्षिक चुनाव देश के कुल 10 राज्यों में फैली 24 सीटों पर होने जा रहा है। किस राज्य से कितनी सीटें खाली हो रही हैं, इसका पूरा विवरण नीचे तालिका में देखा जा सकता है:
| खाली हो रही सीटें | राज्यों के नाम |
4-4 सीटें- आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक |
3-3 सीटें** मध्य प्रदेश और राजस्थान |
2 सीटें** झारखंड |
1-1 सीट** अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम |
(विशेष नोट: इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 1-1 सीट पर उपचुनाव भी इसी दौरान कराया जाएगा।)
? इन प्रमुख दिग्गजों का कार्यकाल हो रहा है समाप्त
जून और जुलाई के इस चुनावी चक्र में देश की राजनीति के कई बड़े और कद्दावर चेहरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन खाली हो रही सीटों पर देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी। रिटायर होने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं:
> * **मल्लिकार्जुन खड़गे** (कांग्रेस अध्यक्ष)
> * **एच डी देवगौड़ा** (पूर्व प्रधानमंत्री)
> * **दिग्विजय सिंह** (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)
> * **जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू** (केंद्रीय मंत्री)
>
इन दिग्गजों के रिटायर होने से खाली हो रही सीटों के कारण संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) का समीकरण बेहद दिलचस्प होने वाला है। सभी राजनीतिक दलों ने अब अपनी-अपनी गोटियां बिछानी और गुणा-भाग करना शुरू कर दिया है।
नई दिल्ली। रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की कथित फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर सामने आया विवाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम रचनात्मक स्वतंत्रता की बहस का विषय बनता जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) ने इस मामले को गंभीर कानूनी और संवैधानिक दायरे में ला दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान दीपक कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि फिल्म में भारतीय खुफिया एजेंसियों और सैन्य अभियानों से जुड़ी ऐसी जानकारियां दिखाई गई हैं, जो अत्यधिक संवेदनशील हो सकती हैं।
याचिका में मुख्य रूप से यह कहा गया है कि फिल्म में:
अंडरकवर ऑपरेशन की कार्यप्रणाली,
रणनीतिक सैन्य प्रोटोकॉल,
संवेदनशील लोकेशन,
इंटेलिजेंस नेटवर्क की तकनीकी जानकारी
को अत्यधिक वास्तविक और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
सुरक्षा को लेकर क्या चिंता?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक रूप से दिखाई जाती है, तो:
भारत के गुप्त एजेंटों की पहचान और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है,
दुश्मन देश या आतंकी संगठन भारतीय ऑपरेशनल सिस्टम को समझ सकते हैं,
यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह मामला Official Secrets Act और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रावधानों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिए हैं कि वे:
फिल्म की सामग्री की जांच करें,
राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करें,
और आवश्यक होने पर उचित कार्रवाई करें।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भले ही किसी फिल्म को “काल्पनिक” बताया जाए, लेकिन यदि उसमें वास्तविक सैन्य या खुफिया संरचना से मेल खाते तत्व हों, तो सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बड़ा सवाल: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
यह विवाद एक बार फिर उस संवेदनशील बहस को सामने लाता है, जहां:
एक ओर फिल्मकार रचनात्मक स्वतंत्रता का अधिकार रखते हैं,
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय सूचनाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है।
भारत में पहले भी कई फिल्मों और वेब सीरीज पर सेना, RAW, IB और सुरक्षा अभियानों के चित्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अदालत द्वारा सीधे मंत्रालय और CBFC को जांच के निर्देश देना इस मामले को विशेष रूप से गंभीर बनाता है।
फिलहाल फिल्म निर्माताओं या रणवीर सिंह की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। सरकार ने ओबीसी कैटेगरी-ए और कैटेगरी-बी की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नई नीति लागू करने का निर्णय लिया है।
अब तक राज्य में ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत तथा ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था। नई व्यवस्था के अनुसार केवल 7 प्रतिशत आरक्षण ही प्रभावी रहेगा। सरकार का कहना है कि यह आरक्षण केवल “वास्तविक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हिंदू समुदायों” को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में शामिल नहीं हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुस्लिम समुदायों को दिए जा रहे ओबीसी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएंगे। हालांकि संशोधित सूची में कुछ मुस्लिम समुदायों के बने रहने को लेकर भी चर्चा जारी है।
राज्य सरकार ने अपने फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप बताया है। वहीं विपक्ष ने इस निर्णय को लेकर सरकार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि इस फैसले से हजारों पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
राज्य की राजनीति में इस फैसले के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
