September 29, 2026
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    बस्तर

    बस्तर (1134)

    परिवहन संघ के पदाधिकारियों को दी यातायात नियमों की समझाइश, अव्यवस्थित पार्किंग से बचने की अपील

    नरेश देवांगन
    जगदलपुर, शौर्यपथ। आगामी त्योहारों के दौरान शहर में बढ़ने वाली भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए बस्तर पुलिस ने सुरक्षित एवं सुगम यातायात व्यवस्था के लिए जागरूकता और शपथ कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ कुमार सिन्हा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बस्तर परिवहन संघ के पदाधिकारियों, वाहन मालिकों और चालकों को यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक किया गया।
    कार्यक्रम में बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक, उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह नयन, रोशन यादव, सचिव सुखदेव सिंह जोशी, ज्वाइंट सेक्रेटरी संतोष यादव, रामबाबू सिंह ठाकुर तथा कोषाध्यक्ष जगन लाल उर्फ राजू झंवर सहित करीब 180 वाहन मालिक एवं चालक शामिल हुए।

    अव्यवस्थित पार्किंग से बचने की दी समझाइश
    त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए वाहन चालकों को यातायात सुचारु बनाए रखने में सहयोग करने की समझाइश दी गई। पुलिस ने वाहनों को निर्धारित एवं व्यवस्थित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करने तथा मुख्य मार्गों एवं सड़क किनारे असुरक्षित ढंग से वाहन पार्क नहीं करने पर विशेष जोर दिया।
    इस अवसर पर उपस्थित परिवहन संघ के पदाधिकारियों, वाहन मालिकों और चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए संकल्प पत्र की शपथ भी दिलाई गई।
    कार्यक्रम में यातायात उप पुलिस अधीक्षक जयराम चेरमाको, यातायात प्रभारी मधुसूदन सिंह नाग, निरीक्षक कमलेश देवांगन सहित यातायात विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
    त्योहारों से पहले पुलिस द्वारा केवल नियमों की सख्ती के बजाय जागरूकता, संवाद और सहभागिता पर जोर देने की पहल से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में परिवहन संघ और वाहन चालकों के सहयोग की उम्मीद बढ़ी है। पुलिस की इस पहल का उद्देश्य त्योहारों के दौरान आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है।

    टीचर्स एसोसिएशन ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, 10 दिन अर्जित और 7 दिन आकस्मिक अवकाश देने की मांग

    कोण्डागांव / शौर्यपथ / अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों एवं कर्मचारियों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप अतिरिक्त अवकाश का लाभ दिलाने की मांग तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जिला कोण्डागांव ने जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान को ज्ञापन सौंपकर पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों को 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश एवं 7 दिवस का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की मांग की।

    1981-84 के प्रावधानों का हवाला, नियमित लाभ नहीं मिलने की शिकायत

    संगठन ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ सभी विभागों एवं सभी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए शासन स्तर पर अतिरिक्त अवकाश का प्रावधान किया गया है। म.प्र. शासन वित्त विभाग के 11 जनवरी 1984 के ज्ञापन के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों को वर्ष में 10 दिन का अतिरिक्त अर्जित अवकाश दिए जाने का प्रावधान है।

    इसी तरह सामान्य प्रशासन विभाग के 25 जुलाई 1981 तथा 11 जनवरी 1984 के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ सभी श्रेणी के कर्मचारियों को सामान्य आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश दिए जाने का प्रावधान है। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों के बावजूद कर्मचारियों को इसका नियमित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई जिलों में जारी हो चुके हैं आदेश

    टीचर्स एसोसिएशन ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्र के बस्तर, उत्तर बस्तर कांकेर, बीजापुर, सुकमा, जशपुर, सरगुजा और बालोद जिलों के शिक्षा अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त अवकाश के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। संगठन ने कोण्डागांव जिले में भी पात्र शिक्षकों एवं कर्मचारियों को इसका लाभ दिलाने के लिए शीघ्र आदेश जारी करने की मांग की।

    जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान ने संगठन के प्रतिनिधिमंडल को शीघ्र आवश्यक आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है।

    ये पदाधिकारी रहे मौजूद

    ज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह, प्रदेश सहसचिव चंद्रकांत ठाकुर, प्रदेश संगठन मंत्री नीलम श्रीवास्तव, जिला संयोजक महिला प्रकोष्ठ श्रीमती दंतेश्वरी राव, जिला सचिव संजय राठौर, ब्लॉक अध्यक्ष कोण्डागांव मन्नाराम नेताम, आईटी सेल से अवध किशोर मिश्रा, मनोज फिलीप, राजेन्द्र पाण्डेय, लखीराम बघेल, दीपमाला वैष्णव, भानुप्रताप राव सहित जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    संगठन ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों-कर्मचारियों को शासन के निर्धारित प्रावधानों का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई तक मांग जारी रहेगी।

    गरियाबंद दूसरे, बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर; साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस का व्यापक जनजागरूकता अभियान

    रायपुर / शौर्यपथ / साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान में कोंडागांव जिले ने एक बार फिर प्रदेश में सर्वाधिक जागरूकता गतिविधियों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। अभियान के तहत लोगों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी और डिजिटल अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

    अभियान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कोंडागांव में 55,157 जागरूकता गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिसके साथ जिला प्रदेश में शीर्ष पर है। गरियाबंद 46,930 गतिविधियों के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर हैं।

    कोंडागांव पुलिस द्वारा लगातार स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच आम नागरिकों को साइबर अपराध के तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना है।

    एक छोटी चूक, बड़ा नुकसान—पुलिस दे रही सतर्क रहने का संदेश

    जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, एटीएम/बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा संदिग्ध कॉल और मैसेज से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

    कोंडागांव का लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहना जिले में चल रही साइबर जागरूकता गतिविधियों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। पुलिस का प्रयास है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला प्रत्येक नागरिक साइबर अपराधों के संभावित खतरे को समझे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सतर्क कदम उठाए।

    जूनियर बालिका वर्ग में शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का बढ़ाया गौरव

        बस्तर / शौर्यपथ / लेह-लद्दाख के एन.डी.एस. इंडोर स्टेडियम में 19 से 21 सितंबर 2026 तक आयोजित 10वीं पेंचक सिलाट फेडरेशन कप 2026-27 में बस्तर की प्रतिभावान खिलाड़ी कुमारी कोमल ठाकुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूनियर बालिका वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के खेल जगत में हर्ष का माहौल है।

    राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कोमल ठाकुर ने प्रतियोगिता के दौरान अपने अनुशासन, तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    कोमल की इस उल्लेखनीय सफलता पर बस्तर डिस्ट्रिक्ट पेंचक सिलाट एसोसिएशन सहित खेलप्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उनकी उपलब्धि ने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।

    इस अवसर पर इंडियन पेंचक सिलाट फेडरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री मोहम्मद इकबाल, अध्यक्ष श्री किशोर यावले एवं सचिव श्री तारीख जरगर ने कुमारी कोमल ठाकुर को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

    भक्ति और उल्लास के बीच दी भगवान गणेश को भावभीनी विदाई

      कोंडागांव / शौर्यपथ / गणेश उत्सव के समापन अवसर पर जिले में विभिन्न गणेश समितियों द्वारा आयोजित विसर्जन कार्यक्रमों में कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी शामिल हुईं। उन्होंने भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
    विधायक लता उसेंडी ने गणेश समितियों के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं से आत्मीय मुलाकात की और उनके उत्साह व भक्तिभाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने तथा क्षेत्र में सौहार्द की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    विसर्जन कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, गणेश समितियों के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं उत्साह के साथ भगवान श्री गणेश को भावभीनी विदाई दी और अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की कामना की।
    विसर्जन के दौरान पूरा क्षेत्र “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष से गूंज उठा।

    निर्दलीय प्रत्याशियों का आरोप—एनओसी जमा होने के बावजूद नामांकन रद्द किया गया, निष्पक्ष जांच की मांग
    सदस्यों का सवाल—पिछले कार्यकाल का लेखा-जोखा पूरा हुए बिना नए चुनाव की घोषणा क्यों?

    बचेली/किरंदुल, दंतेवाड़ा। बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन (बीटीओए) के वार्षिक चुनाव 2026-27 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित प्रत्याशियों का आरोप है कि नामांकन के साथ जमा किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को कथित रूप से नजरअंदाज अथवा छिपाकर उनके नामांकन निरस्त किए गए।
    मामला केवल नामांकन निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीटीओए कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे बंद होने तथा निगरानी फुटेज या संबंधित दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अनुविभागीय अधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा तहसीलदार और फम्र्स एंड सोसायटीज विभाग से भी जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    सिर्फ दो नामांकन पर सवाल
    सदस्यों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि नामांकन नियमों के तहत निरस्त किए गए हैं तो इसकी पूरी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन ही क्यों निरस्त किए गए?

    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके द्वारा एनओसी सहित आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे, तो उनकी जांच किस आधार पर की गई और नामांकन निरस्त करने का स्पष्ट कारण क्या था, इसे सामने लाया जाना चाहिए।

    लेखा-जोखा पूरा हुए बिना चुनाव की घोषणा?
    वहीं, संस्था के कुछ सदस्यों ने 2025-26 के कार्यकाल से जुड़े लेखा-जोखा और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कार्यकाल का हिसाब-किताब और संस्था से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए बिना 2026-27 के चुनाव की घोषणा कैसे कर दी गई?
    सदस्यों का तर्क है कि नए चुनाव से पहले पिछले कार्यकाल की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि संस्था के सदस्यों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।

    सीसीटीवी जांच की मांग
    सीसीटीवी को लेकर सामने आए आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैमरे बंद किए गए या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। इसके लिए सीसीटीवी रिकॉर्ड, डीवीआर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।

    पहले जांच या पहले मतदान?
    अब पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि पहले शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी या विवादों के बीच ही मतदान कराया जाएगा?
    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोपों और कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना चुनाव करा दिया गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे। वहीं, जल्दबाजी में चुनाव कराने से पिछले कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
    दो निर्दलीय प्रत्याशियों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच तथा निर्णय पर टिकी हैं। यदि जांच होती है तो नामांकन निरस्तीकरण, एनओसी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    जिला पंचायत कोंडागांव में मनीष पटेल की नियुक्ति पर गंभीर सवाल, बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति का उल्लेख
    जांच प्रतिवेदन में संविदा भर्ती नियम 2012 के पालन न होने की बात, जिम्मेदारों पर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई अब भी लंबित

      कोंडागांव / शौर्यपथ / जिला पंचायत कोंडागांव में पदस्थ मनीष कुमार पटेल की नियुक्ति को लेकर सामने आए जांच प्रतिवेदन ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में निर्धारित संविदा भर्ती नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने का उल्लेख होने के बावजूद अब तक एफआईआर अथवा ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार, जिला पंचायत कोंडागांव ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के एक रिक्त पद के लिए विज्ञापन क्रमांक 1057, दिनांक 4 फरवरी 2014 जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के बाद तैयार चयन सूची में सरित साहू का चयन हुआ, जबकि प्रतीक्षा सूची में मनीष कुमार पटेल प्रथम स्थान पर थे। चयन एवं प्रतीक्षा सूची के अनुमोदन की तारीख 23 अगस्त 2014 बताई गई है।

    इसके बाद डीआरडीए योजना के अंतर्गत डाटा एंट्री ऑपरेटर का एक पद रिक्त हुआ। जांच में उल्लेख है कि वर्ष 2012 के विज्ञापन के आधार पर इस पद पर ममता देवांगन की नियुक्ति हुई थी। उन्होंने 30 अगस्त 2014 को पटवारी प्रशिक्षण के लिए त्यागपत्र दिया, जिसके बाद पद रिक्त हो गया।

    बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति

    जांच में सामने आया महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि डीआरडीए योजना के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए न तो नया विज्ञापन जारी किया गया और न ही विभागीय अनुमति ली गई, बल्कि इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के आधार पर मनीष कुमार पटेल को नियुक्त कर दिया गया।

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार, उनकी नियुक्ति कार्यालयीन आदेश क्रमांक 8972/जि.पं. (डीआरडीए)/अधी./स्था./2014, दिनांक 16 सितंबर 2014 के माध्यम से की गई। अभिलेखों के परीक्षण के बाद जांच में यह भी उल्लेखित किया गया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में संविदा भर्ती नियम 2012 के निर्धारित नियमों एवं निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

    जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

    जांच प्रतिवेदन में भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई? यदि जांच में नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय करने की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी?

    मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना नए विज्ञापन और विभागीय अनुमति के एक अलग योजना के रिक्त पद पर दूसरी योजना की प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति किए जाने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और इस संबंध में अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    प्रशासन के अगले कदम पर निगाह

    जांच प्रतिवेदन उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए आगे क्या कदम उठाता है।

    मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता तथा आवश्यक विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई पर प्रशासन का निर्णय अब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एक ही परिवार से जुड़े सदस्यों को समूह में शामिल करने और बिना निविदा प्रक्रिया के आवंटन के आरोप, अनुमति व एनओसी को लेकर भी सवाल

    कोंडागांव। जिला मुख्यालय में विहान समूह के अंतर्गत संचालित किए जा रहे ‘मोर स्वाद वीआईपी रेस्टोरेंट’ को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि रेस्टोरेंट का संचालन जिस लक्ष्मी स्व सहायता समूह, पलारी को दिया गया है, उसमें एक ही परिवार से जुड़े कई सदस्य शामिल हैं। वहीं, समूह के पीछे प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट को विहान समूह के अंतर्गत लक्ष्मी स्व सहायता समूह को आवंटित किया गया है। आरोप है कि समूह में जिला पंचायत में विहान के अंतर्गत पदस्थ लेखापाल लोचन देवांगन की पत्नी, उनके बड़े भाइयों की पत्नियां तथा परिवार से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं। संबंधित सदस्यों के पतियों के शासकीय संस्थानों में पदस्थ होने की बात भी सामने आ रही है।

    इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या पात्रता और पारदर्शिता के सभी मापदंडों का पालन करते हुए समूह का चयन किया गया? शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, ग्राम पंचायत के नाम समूह बनाकर सीधे शहरी छेत्र मे अलबेडा पारा वार्ड के समूह को छोड़ककर अमीर लोगो के परिवार को गरीब बता कर समूह बना कर खोला गया है, जो नियम के विरुद्ध मिलीभगत से खोला गया है।

     

    शहरी क्षेत्र में संचालन, अनुमति को लेकर भी सवाल 

    मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रेस्टोरेंट के स्थान और संचालन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि उक्त रेस्टोरेंट शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहा है। और खाने पीने का सामानों में अत्यधिक राशि लिया जा रहा है ऐसे में स्थानीय निकाय की अनुमति, आवश्यक एनओसी और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रेस्टोरेंट शुरू करने से पहले संबंधित वार्ड पार्षद की अनुमति तथा नगरपालिका से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र लिया गया था या नहीं। इस संबंध में प्रशासन और नगरपालिका स्तर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    महिला सशक्तिकरण योजना पर भी उठ रहे सवाल

    सरकार द्वारा महिला स्व सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यदि किसी एक समूह को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के लाभ पहुंचाया गया है, तो यह योजना के मूल उद्देश्य और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि समूह के सदस्यों के पारिवारिक संबंध, उनके पतियों की सरकारी सेवा में पदस्थापना और समूह को मिले कार्य की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि लक्ष्मी स्व सहायता समूह का चयन किन नियमों के तहत किया गया, चयन प्रक्रिया में कितने समूह शामिल हुए, क्या निविदा या अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई तथा रेस्टोरेंट संचालन के लिए नगरपालिका सहित संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई या नहीं।

    इस सम्बन्ध मे संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे के द्वारा जिला पंचायत बिहान को सुचना का अधिकार के तहत समूह के सदस्यों के नाम पति/ पिता का नाम पता और निविदा के जानकारी चाही गई थी किंतु जानकारी प्रदाय नहीं किया गया, पुनः प्रथम अपील जिला पंचायत कोंडागांव के अपिलीय अधिकारी को किया गया। जिसपर सुनवाई 20/07/2026 को किया गया अपिलीय अधिकारी अविनाश भोई केजानकारी प्रदाय नहीं किये जाने के कारण जिला मिशन मैनेजर विनय सिंह को तत्काल निर्देशित कर समूह कि सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जिमसे विनय सिंह द्वारा सूची मै स्वयं निकाल दिया था देने के लिए पर स्टॉफ क्यों नहीं दिए मै तत्काल समूह कि सूची दे रहा हु बोला गया। किंतु दो माह होने जा रहा है आज दिनांक तक समूह कि जानकारी नहीं दिया गया। जो पारदर्शिता मे एनिमयता दिखाई दे रही है जो जाँच का विषय है 

    अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर चयन प्रक्रिया, समूह की पात्रता, हितों के टकराव और आवश्यक अनुमतियों की जांच करे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। अगर उलंघन हुआ है तो दोषियों पर करवाई कब किया जायेगा।

    कोंडागांव, शौर्यपथ। कल पूरे देश में शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया और बनाया भी जाना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही इस देश का मूल आधार है शिक्षा के बिना जग अंधेरा है पर क्या आप किसी ने सोचा की हमारी शिक्षा व्यवस्था में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिनको उस कुर्सी में बैठने के लिए और बच्चों की जीवन को बचाने व सुरक्षित करने के लिए सरकार उनके ऊपर 100000 ₹150000 का खर्चा कर रही है पर वो सोचते हैं पर जब बच्चों की को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें न्याय दिलाने की बात आती है तब ये अपना दरवाज़ा बंद कर लेते है। कभी बहाना करते हैं कि सीट फुल हो गया, तो कभी बहाना करते हैं कि आपका यह कागज नहीं है। वो ऐसा ही मामला ग्राम कोरोबेड़ा का है। यहां के बच्चो के सिर्फ माँ बाप नहीं होने का सजा इन्हें मिल रहा है और ये सजा, ये अपनी किस्मत से नहीं भोग रहे है हमारे शिक्षकों की वजह से भोग रहे हैं, कभी उन बच्चों को आधार कार्ड के कारण स्कूल से निकाल दिया गया जब आधार कार्ड बन गया तो जिला कलेक्टर के आदेश को नजरअंदाज करते हुए उन बच्चों को फिर से गाँव भेज दिया गया। गाँव के हॉस्टल में जब जाकर वह बोले कि इन्हें यहां रख के ही पढ़ाना है तो वहां के टीचर बोले कि हमारे पास सीट फूल हो गया है। आप अपने घर से पैदल आ जाओ, जो कि उनका घर 4 km दूर है टीचर को यह शब्द बोलने से पहले ये सोचना चाहिए कि यह सिर्फ दूर नहीं बीच में जंगल है, नदी है, नाले हैं। और बच्चों की उम्र मात्र 5 -6 साल है, यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर आवाज़ उठाती है। ये घटना यह भी बताती है कि बिना माँ बाप के बच्चों का जीना इस समाज में इस देश में कितना मुश्किल है जहां इन्हें हर कदम पर यह एहसास दिलाया जाता है कि तुम्हारे लिए कोई नहीं है तुम अकेले हो यही दुनिया का सबसे बड़ा हकीकत है कि जहां पूरे समाज को पूरे प्रशासन को इनका परिवार बनके इनके लिए काम करना था वह इन्हें गली गली भटकने पर मजबूर कर दिया गया।

    जिला कलक्टर ने कोशिश भी किया। आदेश भी किया पर जो जवाबदार अधिकारी है, उन्हें कोई मतलब नहीं सिर्फ उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ लें, डॉ इंजीनियर कमिश्नर बन जाए।हमें गरीबों के बच्चों से क्या लेना है?इन्हें मानसिकता के साथ आज पुरा सिस्टम कार्य कर रहा है, यह मात्र सिर्फ दो बच्चों की कहानी नहीं है।यह उन तमाम जरूरतमंद, यह तमाम अनाथ तमाम गरीब और गरीबी से जूझ रहे उन बच्चों की कहानी है जो पढ़ना तो चाहते हैं, पर उन्हें मजबूर किया जाता है कि तुम्हारे लिए शिक्षा नहीं बनी है।और यही बच्चे जब शिक्षा से वंचित रह जाते हैं कोई गलत काम करते हैं नशा करते हैं या किसी और घटना को अंजाम दे देते हैं। तो यही प्रशासन अपने लाखों और करोड़ों की बिल्डिंग में बैठकर तक चर्चा करते हैं। ये हमारे क्षेत्र का हमारे जिले का लॉयन ऑर्डर कैसे बिगड़ रहा है कौन है यह है ये गुंडा कौन है यह नशेड़ी है, और उठाकर उसे जेल भेज दिया जाता है पर क्या उसकी आपबीती जानने का या उसे पहचानने का या किस कारण से आज उसका यह हालत हुई है इसके ऊपर कभी किसी ने सोचा है किसी ने चर्चा किया है इसका कारण भी यही समाज है यही प्रशासन है जब वो न समझ था तो स्कूल स्कूल घूम रहा था कि मुझे कोई पढ़ा लो उस समय कोई पढ़ाने वाला नही था और ना ही कोई सहारा देने वाला था हमें उन चीजों में भी विचार करना और सोचने की उतनी ही जरूरी है की हम प्रशासन के सबसे बड़े पद और प्रतिष्ठा में बैठकर। हमने उन नौजवान, वो अनाथ, उन गरीब जरूरतमंद बच्चों के लिए क्या किया है। कि आज वो बर्बादी के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गये। वो नहीं पहुंचे, उन्हें हमारे सिस्टम ने हमारे समाज भी उतना ही जिम्मेदार है जितना उस बच्चे की मजबूरी जिम्मेदार थी ये हम सभी के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह है।क्या हमने अपने समाज के लिए अपने बच्चों के लिए क्या किया है?

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