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May 23, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

 रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा के पुरखौती सम्मान यात्रा और जनसंपर्क अभियान को चुनावी अभियान बताते हुये प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा की आदिवासी पुरखौती सम्मान यात्रा और जनसंपर्क अभियान चुनावी अभियान है ये कभी भी छत्तीसगढ़ के पुरखो का सम्मान नही कर सकते। 15 साल के रमन सरकार के दौरान भाजपा को बस दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी याद आते थे। उनके नाम से योजनाएं बनती थी, बिल्डिंग सड़के बनती थी लेकिन छत्तीसगढ़ के पुरखों की याद इनको नही आती थी। आज भाजपा को जब पता चला की प्रदेश का बहुसंख्यक आदिवासी वर्ग भाजपा से बेहद खफा और आक्रोशित है तब विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में आदिवासियों की नाराजगी से होने वाली नुकसान को देखते हुये भाजपा को छत्तीसगढ़ के पुरखों की सम्मान की याद आई है।
   प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा को प्रदेश के आदिवासी समाज को बताना चाहिए कि उन्होंने 15 साल में छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र आदिवासी रत्न छत्तीसगढ़ के गौरव भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गुंडाधुर, शहीद गेंद सिंह सहित अनेक महान बलिदानियों को सम्मान क्यों नहीं दिया? उनके लिए 15 साल में क्या किया?
   प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा को छत्तीसगढ़ के पुरखों की चिंता होती तो रमन सरकार में छत्तीसगढ़ के पुरखों के बताए मार्ग पर चलती उनके सपनों को पूरा करती और उस दौरान किसानों के ऊपर अत्याचार नहीं होते। बस्तर के 700 गांव के आदिवासी अपने घर को छोड़ने मजबूर नहीं होते। सैकड़ों आदिवासियों को जेल में बंद नहीं किया जाता। उनके जमीन नहीं छीनी जाती। 35 हजार से अधिक आदिवासी बेटियां गायब नहीं हुई होती। रमन सरकार आदिवासियों के जमीन पर कब्जा करने के लिए भू संशोधन विधेयक नहीं लाते। आदिवासियों को उनका कानूनी अधिकार देते।
   प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में आदिवासियों का मान सम्मान बढ़ा है, कानूनी अधिकार मिला है। विश्वआदिवासी दिवस के दिन आदिवासी महोत्सव का आयोजन हो रहा है। आदिवासियों के आस्था स्थल देवगुड़ी एवं युवा सांस्कृतिक केंद्र घोटुल का विकास हो रहा है। आदिवास परब सम्मान निधि दिया जा रहा है। आदिवासियों की संस्कृति, कला परंपरा तीज त्यौहार को विश्व में अलग पहचान मिला। पेसा के नियम बनाकर आदिवासी वर्ग को उनका कानूनी अधिकार दी गई है उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए बेहतर काम हो रहे है। तेंदूपत्ता का मानक दर 2500 रु से बढ़ाकर 4000 रु प्रति मानक बोरा दे रही है। 65 वनोपज के समर्थन मूल्य में खरीदी कर रही है। स्थानीय स्तर पर भर्ती कर रही है। जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई हुई। रमन सरकार के दौरान आदिवासियों से छीनी गई जमीन लौटाई है तब भाजपा को छत्तीसगढ़ के पुरखों की याद आई है।

- डॉक्टर, आरएचओ एवं नर्स को प्रतिबद्धतापूर्वक सेवाभावना के साथ कार्य करने के लिए कहा
- टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, एएनसी रजिस्ट्रेशन से संबंधित पंजी का किया अवलोकन
- कलेक्टर ने एएनएम श्रीमती सुकला बाई चंद्रवंशी द्वारा संस्थागत प्रसव कराने पर की तारीफ


       मोहला / शौर्यपथ / कलेक्टर एस जयवर्धन ने मानपुर विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में जाकर लोगों को मिल रहे स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भर्रीटोला, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर घोटिया और ईरागांव का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने जिले में शत-प्रतिशत लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयुष्मान कार्ड पंजीयन के लिए सोमवार 12 जून को एक दिवसीय महाअभियान में भाग लेने कहा। इसके लिए अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भर्रीटोला पहुंचकर लेबर कक्ष, डॉक्टर ड्यूटी कक्ष, नेत्र परीक्षण कक्ष, कोल्ड चेन कक्ष, ओपीडी कक्ष, पुरूष वार्ड, महिला वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने उपस्थिति पंजी, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, एएनसी रजिस्ट्रेशन से संबंधित पंजी का अवलोकन किया। स्वास्थ्य केन्द्र में होने वाले संस्थागत प्रसव की जानकारी ली। उन्होंने मरीजों के रजिस्ट्रेशन के समय ही पंजी अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने डॉक्टर, आरएचओ एवं नर्स को प्रतिबद्धतापूर्वक सेवाभावना के साथ कार्य करने के लिए कहा। स्वास्थ्य केन्द्र में आने वाले मरीजों से संवेदनशीलता पूर्वक व्यवहार कर स्वास्थ्य सेवाएं देने कहा।
    कलेक्टर जयवर्धन भर्रीटोला में आरएचओ, सुपरवाईजर और एएनएम की साप्ताहिक सेक्टर बैठक में अचानक पहुंचे। उन्होंने साप्ताहिक बैठक के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बैठक में गर्भवती पंजी, जन्म-मृत्यु पंजी, प्रसव एवं बाल सुरक्षा के संबंध में चर्चा की जाती है। एएनएम श्रीमती सुकला बाई चंद्रवंशी द्वारा माह में 2 से 3 संस्थागत प्रसव करने पर तारीफ की। उन्होंने संस्थागत प्रसव को बढावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने कहा। उन्होंने मितानीन एवं आंगनबाड़ी कार्यकताओं के माध्यम से लोगों में संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूता लाने निर्देशित किया।
   कलेक्टर जयवर्धन ने हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर घोटिया में आरएचओ द्वारा संस्थागत प्रसव रजिस्टर सही तरीके से संधारित नहीं करने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं का नियमित चेकअप करने के निर्देश दिए। उन्होंने ओपीडी मरीजों, एएनसी जांच एवं संस्थागत प्रसव की जानकारी ली। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसआर मंडावी, डीपीएम विकास राठौर, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी मानपुर डॉ. खोब्रागढ़े, बीपीएम संतोष चंदेल उपस्थित थे।

विस् अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को दी बधाई शुभकामनाएं...
    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को दी बधाई। डॉ. महंत ने कहा, पर्यावरण में हो रहे बदलाव और उसको पहुंचने वाले नुकसान की वजह से हर साल तापमान और प्रदूषण बढ़ रहा है। तेजी से बढ़ता तापमान और प्रदूषण इंसानों के साथ-साथ पृथ्वी पर रह रहे सभी जीवों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इसी वजह से कई जीव-जन्तु विलुप्त हो रहे हैं। साथ ही इंसानों को भी सांस और हृदय से जुड़ी बीमारियां हो रही हैं। धीरे-धीरे हमारी जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। इसलिए पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी हो गया है। शहर-गांव को हरा-भरा करके, पेड़ लगाकर, जगह-जगह बगीचे बनाकर और नदियों और समुद्र की सफाई करके पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली की जा सकती है। प्रकृति को बचाना हर इंसान का कर्तव्य है और प्रकृति को बचाने के लिए सिर्फ एक अकेला व्यक्ति काफी नहीं है, इसलिए हम सभी को साथ आकर समय रहते एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण के लिए काम करना चाहिए।

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने 4 जून, संत कबीर की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। अपने बधाई संदेश में श्री बघेल ने कहा कि संत कबीर का जीवन दर्शन सदैव प्रासंगिक है। संत कबीर ने दोहों के माध्यम से प्रेम, सद्भावना और सामाजिक समानता का संदेश दिया। उन्होंने समाज में फैले आडंबर और जात-पात का सख्त विरोध किया। दोहों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर भी कठोर प्रहार किया और लोगों को सत्य, अहिंसा, दया, करूणा और परोपकार जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। छत्तीसगढ़ में भी संत कबीर के जीवनदर्शन का जनजीवन पर गहरा प्रभाव है। श्री बघेल ने कहा है संत कबीर के उपदेश हमें सत्य का रास्ता दिखाते रहेंगे।

   रायगढ़ / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायगढ़ स्थित बाबा धाम पहुंचकर बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

रायगढ़ / शौर्यपथ / राष्ट्रिय रामायण महोत्सव कई मायनों में छत्तीसगढ़ के लिए ख़ास रहा इस महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ की जनता को प्रभु राम के दंडकारण्य में बिताये…

  अपने-अपने राम की थीम पर मुख्यमंत्री और अतिथियों ने उठाया कथा का आनंद

  रायगढ़ / शौर्यपथ / रायगढ़ में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के समापन पर सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने ‘अपने-अपने राम’ की थीम पर मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि राजा वही जो गरीब से इंसाफ करे, शबरी के बेर खाकर जमाने को मोड़ दे। छत्तीसगढ़वासी भाग्यशाली है जो उन्हें यहां कौशल्य जैसी मां मिली है। डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि अभिज्ञान शकुंतलम का दुष्यंत हिरण के पीछे भाग रहा है, उसे ऋषि कुमार रोक देते है, यह भारत का लोकतंत्र है। उन्होंने प्रदेश में केलो नदी के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार द्वारा किये गए कार्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम की प्रस्तुति आरंभ करने से पहले उन्होंने ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।
   कवि डॉ. विश्वास ने कहा कि मैं यहां पिछले 30 वर्षों से आ रहा हूं लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे राम का यहां इतना गहरा प्रभाव है। लोग कहते है कि आपके प्रदेश में क्या मिलेगा, तो अब मैं पूरे विश्व को बताऊंगा कि यहां शबरी और कौशल्या के राम मिलेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें भगवान श्रीराम के लिए इतना सुंदर कार्य करने का अवसर मिला है, यह सौभाग्य की बात है।

कवि डॉ. विश्वास ने कहा कि मेघदूतम में भी लिखा गया है कि यहां के लोग सौभाग्यशाली है। महात्मा गांधी, भगवान श्रीराम से प्रभावित नहीं होते तो वे अंग्रेजों से इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ पाते।
   गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा कि शंकर जी पार्वती मैया को कहते हैं कि रामकथा संशय नष्ट करती है। मैं राम पर इसलिए कह रहा हूं कि ये कथा सबसे पहले वाल्मीकि ने सुनाई, फिर तुलसीदास जी ने, तमिल रामायण के रचियता कम्बन ने भी सुनाई। ये हमारी परंपरा है और मैं इसका निर्वाह कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि एक सांसद शम्सी मीनाई लोहिया के शिष्य थे। उनकी कविता कुमार विश्वास ने सुनाई- मैं राम पर लिखूं मेरी हिम्मत नहीं है कुछ। तुलसी और वाल्मीकि ने छोड़ा नहीं है कुछ। लेकिन वतन की खाक से बाहर नहीं हूं मैं। वो राम जिसका नाम है जादू लिये हुए। और इस प्रकार राम का चरित्र है।
   राम और भरत का कोमल प्रसंग सुनकर आम जनता के साथ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल भी भावुक हो गए।

      रायगढ़ / शौर्यपथ / राष्ट्रिय रामायण महोत्सव के संपन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पहली बार किसी सरकार द्वारा ऐसा आयोजन हुआ। इसमें कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने हिस्सा लिया। हम सब सुंदर कांड सुनते हैं। बाल कांड सुनते हैं।अरण्य कांड प्रकृति को लेकर है। हम नदियों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। आज केलो में आरती कार्यक्रम हुआ। हम नरवा कार्यक्रम चला रहे हैं। अब नदियों को लेकर यह कार्य करेंगे ताकि यह बारहमासी हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने हमें सिखाया है कि कोई कार्य कठिन नहीं है। हम प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करते रहेंगे। इस महोत्सव के बारे में जूरी के सदस्यों ने इस सोच की प्रशंसा की।



    रायगढ़ / शौर्यपथ / राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के समापन अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री मैथिली ठाकुर ने ‘जय जोहर‘ सम्बोधन के साथ शुरूआत करते हुए कहा कि भगवान राम के ननिहाल में भगवान राम के ससुराल से आयी हूं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में उनके द्वारा प्रस्तुत मिथला के लोक गीतों का ऐसा जादू चला कि मुख्यमंत्री और उनके साथ अन्य अतिथि अपनी जगह से उठकर झूमने लगे। भजन गायिका मैथिली ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल छत्तीसगढ़ के गीतों में गहरी रूचि रखते है, तो मिथला के लोक गीतों का उतना ही आदर करते है।
   सुश्री मैथिली ठाकुर द्वारा कार्यक्रम में अद्भुत प्रस्तुति दी गई। उनके द्वारा मैथिली लोक गीतों से श्रीराम के मिथला प्रवास का सुन्दर वर्णन किया गया। मिथला में लोक गीतों में मासूम शरारत होती है। यही जनकपुर में आने पर मिथला के अतिथियों के साथ होता है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में विश्वामित्र और राजा दशरथ से भी प्रश्न कर लिया, कि लोग अपने राजाओं से कितने करीब होते थे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और अतिथियों ने मंच पर पहुंचकर सुश्री मैथिली ठाकुर को पुष्पगुच्छ एवं रामचरित मानस की प्रति भेंटकर सम्मानित किया।

भजन गायिका सुश्री मैथिली ठाकुर

  रायपुर / छत्तीसगढ़ की स्थापना के 18 साल बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वो कार्य किया जो इतिहास के पन्नो पर सदा के लिए दर्ज हो गया . आने वाले समय में सत्ता चाहे किसी की भी हो किन्तु श्रीराम की कर्मस्थली को पुनः सजीव करने का जो दायित्व श्रीराम ने मुख्यमंत्री बघेल को दिया उसे उन्होंने बखूबी निभाया . हालाँकि भारत में भारतीय जनता पार्टी राम नाम को आधार बना कर आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनितिक दल होने की बात करती है किन्तु राम नाम के सहारे सत्ता में पहुँचाने वाली भाजपा सरकार अपने 15 साल के कार्यकाल में कभी भी छत्तीसगढ़ से प्रभु राम के सम्बन्धो की गहराई को सहजने और सवारने का कार्य नहीं किया . ये कहने में कोई संकोज नहीं कि 15 साल के शासन काल में भाजपा सरकार ने कभी भी छत्तीसगढ़िया अस्मिता को राष्ट्रिय मंच पर लाने का प्रयास की हो छत्तीसगढ़िया सभ्यता को बड़ा मंच दिया हो . हो सकता है इसका सबसे बड़ा कारण सरकार के फैसले लेने वाले वो मंत्री हो जो छत्तीसगढ़ में तो निवास करते है किन्तु आज भी अपने पूर्वजो के याद को अन्य प्रदेशो में देखते है . गैर छत्तीसगढ़ी होने के कारण छत्तीसगढ़ की परंपरा को कभी महत्तव ही नहीं दिया . यहाँ तक छत्तीसगढ़ी बोली भी अंधेरो में कही खो रही थी . राम जी की माता का एकमात्र मंदिर होने के बाद भी भाजपा सरकार की इस दिशा में कभी कोई पहल नहीं रही . इसे अगर दुसरे शब्दों में कहे तो प्रभु श्रीराम ने ये अवसर उन्हें कभी दिया ही नहीं कि उनकी यादो को उनके कर्म भूमि को वो सहेजे . इस मामले में कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि प्रभु राम ने इस नेक कार्य के लिए भूपेश बघेल को चुना . प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने अपने चुनावी वादों में राम वनगमन पथ , कौशल्या मंदिर संधारण की बात नहीं की इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि इसमें कांग्रेस पार्टी का भी योगदान है . यह सभी सोंच सीएम बघेल की थी जिसे उन्होंने सार्थक किया और जमीनी स्तर पर लाये .
   ये कहने में भी कोई अतिश्योक्ति नहीं कि प्रदेश के एक बड़े वर्ग को यह भी नहीं मालुम था कि प्रभु श्री राम का काफी वक्त इसी पवन भूमि में गुजरा जो आज छत्तीसगढ़ की भूमि है जिसकी भूमि को श्रीराम ने अपने चरणों से पावन कर दिया है . प्रभु श्री राम जब महल से निकल कर दंडकारण्य (वर्तमान में छत्तीसगढ़ ) आये थे तब श्री राम थे किन्तु जब वापस महल गए तब मर्यादा पुरषोत्तम राम हुए . इसी दंडकारण्य में प्रभु राम ने अपने जीवन के महत्तवपूर पल गुजारे , इसी दंडकारण्य में प्रभु राम ने वंचितों को साथ लिया और समाज को एकसार का सन्देश दिया , इसी दंडकारण्य में प्रभु श्री राम ने शबरी माता के स्नेह को प्राप्त किया , इसी दंडकारण्य में प्रभु श्री राम ने वनवास के कई साल बिताये  , इसी दंडकारण्य में प्रभु श्रीराम ने अपने चरणों से इस भूमि को तीर्थ बनाया आज इसी दंडकारण्य को सहेजने का कार्य की सोंच को रामवन गमन पथ के जरिये सार्थक सीएम बघेल कर रहे है , आज विश्व के एकमात्र माता कौशिल्या मंदिर की रौनक को वापस लौटाने का कार्य सीएम बघेल ने किया और कौशिल्या माता महोत्सव के जरिये प्रदेश की जनता को श्री राम के करीब लाने का सफल प्रयास किया , राष्ट्रिय रामय प्रतियोगिता के जरिये प्रभु राम के दंडकारण्य में बिताये जीवन को मंचन द्वारा जीवंत करने के सफल प्रयास के जनक के रूप में सीएम बघेल को प्रदेश की जनता हमेशा याद रखेगी . सीएम बघेल ने कभी राम के नाम की राजनीती नहीं की किन्तु मर्यादा पुरषोत्तम राम को प्रदेश की जनता के बहुत करीब लाने का श्रेय सीएम बघेल को ही जाता है .


   जिस तरह छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की परंपरा , छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थलों को एक बार फिर विश्व मंच पर लाया वो पहल अनुकरणीय है . हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगो का विश्वास है कि जो भी काम होता है वो प्रभु की मर्जी से होता है प्रभु की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता . धन्य है भूपेश बघेल जिन्हें प्रभु श्री राम ने ये जिम्मेदारी दी कि छत्तीसगढ़ में राम जी के महत्तव को आम जानो तक पहुंचाए और इस कार्य में भूपेश बघेल ने सभी राजनितिक बाधाओ टिप्पणियों को अनसुना करते हुए आज छत्तीसगढ़ को राममय कर दिया . राम का नाम सब लेते है किन्तु राम में समाने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता जिस पर प्रभु राम की कृपा होती है वही राम का प्रिय होता है . छत्तीसगढ़ के भांचा राम अब एक बार फिर छत्तीसगढ़ की गलियों में हर घरो में नजर आ रहे है . अभी तक छत्तीसगढ़ सिर्फ एक प्रदेश था किन्तु अब छत्तीसगढ़ वो तपोभूमि के नाम से पुरे विश्व में पहचाना जाने लगा जहाँ श्री राम ने वनवास के एक बड़े काल को जिया था छत्तीसगढ़ में अब प्रभु राम नहीं छत्तीसगढ़ के भांचा राम हो गए  जय श्री राम ...

 भगवान श्रीराम को लेकर छत्तीसगढ़ में ऐसी मान्यता है कि उन्होंने 14 वर्ष के वनवास काल में से 10 वर्ष दण्डकारण्य में व्यतीत किया था . रामायण कथा के कई प्रसंगों में भगवान श्रीराम के छत्तीसगढ़ में प्रवास के वृतांत हैं. दण्डकारण्य में भगवान श्रीराम के वनगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है.
शरद पंसारी
संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार 

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