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April 05, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग / शौर्यपथ / भर्ष्टाचार भर्ष्टाचार भर्ष्टाचार स्वास्थ्य विभाग में निकल रही भर्ष्टाचार की गंध आये दिन नए नए मामले उजागर होने के बाद भी निगम के सत्ता प्रमुख और…

Gen Bipin Rawat Helicopter Crash: आज जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी डॉ. मधुलिका रावत का पार्थिव शरीर दिल्ली लाया जाना है और शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा.

नई दिल्ली /शौर्यपथ/

   तमिलनाडु  के नीलगिरि में हुई हेलीकॉप्‍टर दुर्घटना  में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत  उनकी पत्नी डॉ. मधुलिका रावत सहित 13 लोगों का निधन हो गया है. ये हेलीकॉप्‍टर हादसा कल हुआ था. वहीं आज जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी डॉ. मधुलिका रावत का शव दिल्ली लाया जाना है. जानकारी के अनुसार जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का पार्थिव शरीर दिल्ली छावनी लाया जाएगा और शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा. इनके पार्थिव शरीर को आज एक सैन्य विमान से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचाया जाएगा.


शुक्रवार को 11 बजे जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत का पार्थिव शरीर उनके सरकारी आवास 3 कामराज मार्ग में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. दोपहर दो बजे इनके पार्थिव शरीर को सेना के तीनों अंगों के मिलिट्री बैंड के साथ धौलाकुआं के बरार स्कावयर ले जाया जाएगा. करीब 4 बजे धौलाकुआं के बरार स्कावयर में अंतिम संस्कार किया जाएगा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  आज दोनों सदनों में तमिलनाडु के नीलगिरि में हुई इस हेलीकॉप्‍टर दुर्घटना के बारे में विस्तार जानकारी देंगे. सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह आज सुबह 11:15 बजे लोकसभा में और फिर दोपहर में राज्य सभा में बयान देंगे.

गौरतलब है कि जनरल बिपिन रावत का हेलीकॉप्‍टर दुर्घटना में निधन हो गया है. इस हेलीकॉप्टर में जनरल रावत, उनकी पत्‍नी सहित 14 लोग सवार थे. भारतीय वायुसेना (IAF) के जिस हेलीकॉप्‍टर में सवार थे, वो तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में दुर्घटनाग्रस्‍त हुआ है. Mi सीरीज के हेलीकॉप्‍टर ने सुलुर (Sulur) आर्मी बेस से उड़ान भरी थी, इसके कुछ ही देर बाद ये नीलगिरि में हादसे का शिकार हो गया था.

 

तमिलनाडु में कुन्नूर के पास बुधवार को जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 11 अन्य लोगों की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई. वायुसेना ने यह जानकारी दी. नई…

दुर्ग । शौर्यपथ । आज नगर पालिक निगम रिसाली के चुनाव अभियान वार्ड नंबर 6से प्रत्याशी श्रीमतीप्रीति चंद्राकर जी के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत श्याम 7:00 बजे रूआबांधा सेक्टर शिव हनुमान मंदिर से भगवान श्री गणेश जी की पूजा अर्चना कर व गायत्री मंदिर के पुरोहित जितेंद्र साहू द्वारा शंखनाद कर की गई इस अवसर पर उपस्थित मंदिर के पंडित आचार्य जी ने प्रत्याशी श्रीमती प्रीति चंद्राकर को विजय भव-का आशीर्वाद देकर वार्ड में जनसंपर्क प्रचार अभियान के लिए रवाना किया इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता रामकृपाल साहू मनोज ठाकरे शशिकांत दुबे, मोहन देवांगन अवध शाह कमल चंद्राकर गजेंद्र चंद्राकर जीवन चंद्राकर व्हाई व्हाई वी शर्मा जी पवन चंद्राकर राधे लाल कश्यप एवं महिला कार्यकर्ता श्रीमती उषा चंद्राकर श्रीमती सरिता श्रीमती कामिनी श्रीमती ममता सिन्हा श्रीमती पदमा वर्मा श्रीमती संगीता कुमारी पूजा श्रीमती मीनू जैन बलदाऊ प्रसाद एवं वार्ड के समस्त सम्मानीय नागरिक महिला पुरुष उपस्थित थे आज के जनसंपर्क अभियान में भारतीय जनता पार्टी के प्रति जनमानस में उत्साह देखा गया

दन्तेवाड़ा /शौर्यपथ/

कलेक्टर  दीपक सोनी के द्वारा जारी आदेशानुसार 15 जनवरी 2021 को महिलाओं का कार्यस्थल पर लैगिंग उत्पीडन (निवारण प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 की धारा 4(1) के अनुसार कार्यालय कलेक्टर, जिला-दक्षिण बस्तर, दन्तेवाड़ा (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) में 10 सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया गया था। 

उपरोक्त आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर दन्तेवाडा  आस्था राजपुत का अन्य जिले में स्थानान्तरण होने के कारण उनके स्थान पर तहसीलदार दन्तेवाड़ा  यशोदा केतारप का नाम पुनर्स्थापित किया गया है ।यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

 

रायपुर /शौर्यपथ/

छत्तीसगढ़ फिल्म पॉलिसी-2021 सिनेमा को समाज का दर्पण माना जाता है। समाज में जो कुछ अच्छी-बुरी घटनाएं घटती हैं, इसकी झलक फिल्मों में देखी जा सकती है, वहीं किसी देश और प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पंरपरा की झलक को फिल्मों और साहित्यों से जोड़कर देखा जाता है। छत्तीसगढ़ की प्राचीन कला, संस्कृति एवं परंपरा तथा ऐतिहासिक कहानियों व महापुरूषों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित फिल्म निर्माण के संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन को एक पहचान दिलाने के उद्देश्य  से मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने नयी छत्तीसगढ़ फिल्म पॉलिसी-2021 लागू किया है। 

इस नई फिल्म पॉलिसी के तहत राज्य सरकार फी़चर फिल्म, वेब सीरिज, टीवी सीरियल्स, रियलिटी शो, ओटीटी के साथ-साथ शार्ट फिल्मों का निर्माण, फिल्मांकन के लिए सुविधा-प्रोत्साहन एवं फिल्म क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भिन्न-भिन्न श्रेणियों में अलग-अलग अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा फिल्म नीति में सिनेमा हॉल, सिंगल स्क्रीन और मल्टी स्क्रीन खोलने पर भी आर्थिक मदद का उल्लेख है। इससे निश्चित ही हाशिए पर चल रहे छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को नया जीवनदान मिलेगा, वहीं छत्तीसगढ़ में नई फिल्म पॉलिसी लागू होने से यहां छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। फिल्म पॉलिसी लागू होने से फिल्म उद्योग से जुड़े निर्माता-निर्देशको, कलाकारों, लेखकों, तकनीशियनों के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहा हैं। वहीं छत्तीसगढ़ी उद्योग से जुड़े लोगों को एक उच्च स्तरीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को संवारने का सुनहरा अवसर मिलेगा। 

राज्य सरकार प्रदेश की पारंपरिक कला-संस्कृति, बोली-भाखा, कला साहित्य को नया आयाम देते हुए संस्कृति विभाग के सभी प्रभागों को एक अम्ब्रेला के नीचे लाने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद् का गठन किया गया है। संस्कृति एवं परंपरा के संवर्धन एवं निरंतर विकास को गति देने के लिए संस्कृति मंत्री को परिषद् का उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अकादमियों और शोध पीठों के प्रमुखों को संस्कृति परिषद् के सदस्य बनाए गए है। निश्चित इन प्रतिभाओं के प्रयास को नयी उड़ान मिलेगी।  

पूरी दुनिया में सिनेमा आज मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन बन गया है। सिनेमा उद्योग निरंतर फल-फूल रहा है। भारत देश में परतंत्र काल से शुरू हुई सिनेमा आज विश्व सिनेमा से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। आने वाले समय में इसकी विकास की ढेरों संभावनाएं हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ की नई फिल्म पॉलिसी से न केवल प्रदेश के लिए बल्कि देश में फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के लिए लाभकारी होगी। प्रदेश में बॉलीवुड, मराठी, भोजपुरी, दक्षिण भारतीय सहित अन्य क्षेत्रों की फिल्म बनने लगेगी तो यहां इस विधा से जुड़े लोगों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध होगा। प्रदेश में युवा, फिल्मों से जुड़ने प्रेरित होंगे। छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग निखरेगा, उद्योग एनीमेशन के साथ-साथ नवीन टेक्नालॉजी से अपडेट होंगे। इससे युवाओं के समक्ष रोजगार का बेहतर विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।  

छत्तीसगढ़ की नई फिल्म पॉलिसी बनते ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के निर्माता-निदेशक और लेखक मनोज वर्मा कृत छत्तीसगढ़ी फिल्म भूलन द मेज को 21वीं राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अलंकरण समारोह में एक करोड़ रूपए व प्रशस्ति पत्र के पुरस्कार से नवाजा जाना भी भूपेश सरकार की नई फिल्म पॉलिसी के कारण ही संभव हो पाया है। यह तो केवल शुरूआत मात्र है। इससे प्रेरित होकर प्रदेश के अनेक फिल्मकारों द्वारा नवाचार के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी बोली, भाखा, कला, संस्कृति-परंपरा और ऐतिहासिक व महापुरूषों से जुड़ी कहानियों, विचारों पर फिल्म बनने लगी। इससे दक्षिण भारतीय, मराठी, बाग्ंला और भोजपुरी आदि फिल्मों की तरह छत्तीसगढ़ी फिल्मों के नाम से छत्तीसगढ़ को देश-दुनिया मंे नई पहचान मिलेगी।  

इसके साथ ही सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए बड़े प्रोत्साहन देने का प्रावधान नई फिल्म पॉलिसी के अंतर्गत किया है। ऑस्कर जैसे अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्म, निदेशक, अभिनेता-अभिनेत्री को पांच करोड़ रूपए तक की राशि प्रोत्ससाहन स्वरूप दिए जाने का प्रावधान निश्चित रूप से फिल्मकारों द्वारा गुणवत्तापूर्ण फिल्म बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।  

नई फिल्म पॉलिसी में पहली, दूसरी और तीसरी फिल्मो के निर्माण में अलग -अलग अनुदान का प्रावधान है। हिन्दी-अंग्रेजी फिल्मों के साथ-साथ स्थानीय भाषा व स्थानीय लोकेशनों पर सम्पूर्ण शूटिंग दिवस का 50 से 75 प्रतिशत शूटिंग दिवस फिल्म शूट करने की स्थिति में एक से पौने दो करोड़ रूपए अथवा कुल लागत का 25 प्रतिशत तक की अनुदान का प्रावधान फिल्मकारों को छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाने के लिए आकर्षित एवं प्रोत्साहित करेगा। वहीं 20 प्रतिशत सहायक कलाकार, टेक्निकल एवं ग्राउंड स्टॉफ की अनिवार्यता से यहां इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध होगा। इस तरह निर्धारित शर्तों के साथ 

हिन्दी, अंग्रेजी तथा स्थानीय व अन्य भाषाओं में पहली, दूसरी और तीसरी फिल्मों के निर्माण पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 60 से 90 फिल्मों के लिए अनुदान का प्रावधान है। फिल्मों को अनुदान व प्रोत्साहन मिलने से यहां अधिक से अधिक फिल्में बनेंगी। इससे इस विधा से जुड़े राज्य के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। फिल्म नीति में स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर के फिल्मों मेें अवसर देने वाले फिल्मकारों के लिए अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किए जाने से यहां के कलाकारों को बॉलीवुड सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर के फिल्मों में जगह मिलेगी। यह प्रदेश के लिए गौरव की बात होगी। 

राज्य सरकार नई फिल्म नीति में फिल्म उद्योग को गति देने के लिए फिल्म विकास निगम, फिल्म साधिकार समिति, फिल्म सिटी का विकास, फिल्म फेसीलिटेशन सेल, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, फिल्म मेंकिंग के उपकरण क्रय मे प्रोत्साहन, फिल्म स्टूडियो व लैब, फिल्म ट्रैनिंग इंस्टीट्यूट और विवाद समाधान जैसे अनेक आयम जोड़कर छत्तीसढ़ी फिल्म उद्योग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। यह राज्य के फिल्म उद्योग को एक नई दिशा प्रदान करेगी, वहीं फिल्मों के माध्यम से यहां की बोली, भषा, कला, खान-पान, वेष-भूषा, कला-संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार की सार्थक कदम है।

 

 

रायपुर /शौर्यपथ/

छत्तीसगढ पर्यटन की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पर्यटन स्थलों पर बड़े निजी होटलों सहित शासकीय मोटल्स में काम के लिए प्रशिक्षित युवाओं की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में होटल मैनेजमेंट के पाठ्यक्रमों से युवाओं के लिए रोजगार के अच्छे अवसर सृजित हो सकते हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने गरीब और खनन प्रभावित क्षेत्रों के बारहवीं कक्षा पास विद्यार्थियों को राज्य होटल प्रबंधन संस्थान (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में प्रवेश दिलाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की पहल की है। 

राज्य सरकार की मदद से पर्यटन की संभावनाओं से भरे कोरबा जिले के दस युवा अब शासकीय मदद पर होटल मैनेजमेंट के गुर सीखेंगे। युवाओं के शिक्षण शुल्क, हॉस्टल शुल्क और मेस आदि का खर्चा जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज न्यास मद से वहन किया जाएगा। होटल मैनेजमेंट के तीन पाठ्यक्रमों के लिए दस विद्यार्थियों के लिए पूरे कोर्स के दौरान डीएमएफ मद से 29 लाख 64 हजार 200 रूपए खर्च किए जाएंगे।  

कलेक्टर  रानू साहू ने बताया कि चार विद्यार्थी का दाखिला होटल एडमिनिस्ट्रेशन के डिग्री कोर्स में और तीन-तीन विद्यार्थी का दाखिला फूड प्रोडक्शन और फूड एवं वेबरेज सर्विसेज पाठ्यक्रमों में कराया गया है। त्रिवर्षीय डिग्री कोर्स में एक विद्यार्थी पर पांच लाख 24 हजार 900 रूपए का खर्चा होगा। इसमें से तीन लाख 28 हजार 700 रूपए इंस्टीट्यूट की फीस आदि और शेष रूपए आवास तथा मेस पर व्यय होगा। इसी प्रकार डेढ़ साल के फूड प्रोडक्शन डिप्लोमा कोर्स के लिए प्रति छात्र एक लाख 50 हजार 350 रूपए इंस्टीट्यूट और फूड और वेबरेज सर्विसेज के डेढ़ साल के डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी पर एक लाख 37 हजार 850 रूपए व्यय किया जाएगा। इस राशि में शिक्षण शुल्क और आवास, खान-पान आदि का व्यय शामिल है।
उल्लेखनीय है कि होटल मैनेजमेंट के डिग्री और डिप्लोमा कोर्सों में शासकीय मदद से प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी से लाईवलीहुड कॉलेज कोरबा में आवेदन मंगाए गए थे। इनमें से जिला स्तरीय समिति द्वारा मेरिट के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों का श्रेणीवार चयन किया गया। चयनित विद्यार्थियों में सात छात्राएं एवं तीन छात्र हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से एक, अनुसूचित जनजाति वर्ग से दो, अन्य पिछड़ा वर्ग से छह एवं अनारक्षित वर्ग से एक विद्यार्थी का चयन किया गया है। विद्यार्थियों को त्रिवर्षीय बीएससी हॉस्पिटेलिटी एण्ड होटल एडमिनिस्ट्रेशन और 18-18 महीनों के डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन तथा डिप्लोमा इन फूड एवं वेबरेज सर्विसेस डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाया गया है।
विद्यार्थियों की सूची - 

बीएससी होटल एडमिनिस्ट्रेशन - योगिता कंवर, देव कुमार साहू, अवंतिका सिंह,आरती साहू।
डिप्लोमा इन फूड एंड वेबरेज सर्विसेज - दिव्यांग कंवर, खुशबु वैष्णव, मानसी बैरागी।
डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन - रामेश्वर डिक्सेना, महेन्द्र कुमार पात्रे, हिमांशी कश्यप।

भारत सरकार के संयुक्त सचिव खाद्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं संचालक से की मुलाकात

धान खरीदी के लिए केन्द्र से अब तक छत्तीसगढ़ राज्य को मिले मात्र 1.11 लाख गठान बारदाने

रायपुर  /शौर्यपथ/

छत्तीसगढ़ राज्य को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए भारत सरकार से बारदाने की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से आज 8 दिसम्बर को नई दिल्ली में केन्द्रीय संयुक्त सचिव, खाद्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली व उपभोक्ता मामले  सुबोध सिंह एवं संचालक सार्वजनिक वितरण प्रणाली  राजेश मीणा से छत्तीसगढ़ मनरेगा आयुक्त मोहम्मद कैसर अब्दुल हक तथा विपणन संघ के प्रबंधक  शशांक पाण्डेय ने मुलाकात की।  मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने संयुक्त सचिव भारत सरकार को छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन और बारदाने की उपलब्धता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जूट कमिश्नर भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को बारदाने न केवल बहुत कम मात्रा में दिए जा रहे हैं, अपितु इसकी स्वीकृत मात्रा की समय पर आपूर्ति भी नहीं की जा रही है। 

मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने संयुक्त सचिव, भारत सरकार को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन एक दिसम्बर को शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ को माह नवंबर में 1.38 लाख गठान एवं माह दिसंबर 2021 तक कुल 2.14 लाख गठान नये जूट बारदाने जूट कमिश्नर के माध्यम से प्राप्त होने थे, किन्तु माह नवंबर 2021 में राज्य को मात्र एक लाख गठान एवं माह दिसंबर, 2021 में अब तक कुल 1.11 लाख गठान जूट बारदाने ही प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार छत्तीसगढ़ को आवश्यकता की तुलना में न केवल जूट बारदानों की कम आपूर्ति की जा रही है, अपितु स्वीकृत मात्रा की समयबद्ध आपूर्ति भी नहीं की जा रही है, जबकि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार नये जूट बारदाने की समयबद्ध आपूर्ति अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने छत्तीसगढ़ राज्य हेतु नये जूट बारदाने की आपूर्ति संख्या में वृद्धि करने एवं इसकी समयबद्ध आपूर्ति हेतु संबंधितों को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध संयुक्त सचिव, भारत सरकार से किया। भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा राज्य को बारदाने आपूर्ति के संबंध में यथा संभव आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
गौरतलब है कि खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य को पर्याप्त बारदानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा आयुक्त  मोहम्मद अब्दुल कैसर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी नियुक्त किया गया है। विपणन संघ के प्रबंधक  शशांक पाण्डेय को बारदाना नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

सैलानियों को आकर्षित करेगा कुदरत का नजारा

रायपुर /शौर्यपथ/ 

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने के लिए उत्तर बस्तर कांकेर में दुधावा डेम पर निर्मित इको लर्निंग सेंटर और महासमुंद जिले में कोडार जलाशय पर निर्मित इको पर्यटन स्थल का वर्चुअल लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर संबंधित क्षेत्र की वन प्रबंधन समिति को वन क्षेत्र में जलाशय के पास खुबसूरत पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगो को रोजगार भी उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इन स्थलों पर पर्यटक आकर्षित और कुदरत का नजारा देख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दोनों पर्यटन स्थल जन सामान्य में वन्यजीव और जैव विविधता की जानकारी देने के साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने में अवश्य सफल होगा। 

इको पर्यटकों स्थल वन चेतना केन्द्र कोडार में 39 लाख 14 हजार रूपए का कार्य किया जा चुका है और 40 लाख रूपए का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में पहंुच मार्ग उन्नयन, वाटर सप्लाई सिस्टम, मचान, ट्री हाउस, नेचर ट्रेल, बर्ड वाचिंग और मोटर बोट की सुविधा के विकास कार्य प्रगति पर हैं। पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां वन परिवेश में रहने और साहसिक शिविर आयोजित करने की सुविधा उपलब्ध है। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल द्वारा पुरातत्व निर्मित सिरपुर में मार्च 2021 में रामवनगमन पथ के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए की गई घोषणा के अंतर्गत वन चेतना केन्द्र कोडार का विकास इको पर्यटन स्थल के रूप में किया गया है। वन चेतना केन्द्र कोडार राजधानी रायपुर के 65 किलोमीटर, महासमुंद मुख्यालय से 17 किलोमीटर और सिरपुर नगरी से 20 मीटर की दूरी पर नेशनल हाईवे क्रमांक 53 पर स्थित है। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए एडवेंचर, मनोरंजन, स्वास्थ्य लाभ, संस्कृति पर्यावरण संचेतना और स्थानीय रोजगार के विकास का अद्भूत समागम प्रस्तुत किया गया है। यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए नाईट कैम्पिंग, कैम्प फॉयर एवं स्टार गेजिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मनोरंजन के लिए बॉलीवाल, नेट क्रिकेट, बैडमिंटन, कैरम, शतरंज, निशानेबाजी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही नौका विहार, बैम्बू रॉफ्टिंग और पर्यटकों के स्वाल्पाहार के लिए स्थानीय छत्तीसगढ़ी व्यंजन और सुपाच्य भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच से घिरे जलाशय स्थल पर सन्सेट देखने का सुकून भरा अनुभव, सेल्फी जोन एवं फिशिंग का आनंद पर्यटकों द्वारा लिया जा सकेगा। इस केन्द्र में जिले के स्व सहायता समूहों द्वारा बनाए उत्पादों और संजीवनी के उत्पादों के विक्रय की सुविधा का विकास भी किया जा रहा है। स्थल के समीप खल्लारी माता का मंदिर स्थित है, जहां पर्यटकों द्वारा दर्शन भी किया जा सकता है। 

जिला खनिज न्यास संस्थान मद, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, विधायक निधि और वन विभाग के पर्यावरण वानिकी मद के अभिसरण से पोषित, प्रकृति की गोद में स्थिति इको पर्यटन केन्द्र के इस केन्द्र में न्यूनतम निर्माण कार्य किए गए हैं। वनों की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखते हुए जन सामान्य में वन चेतना का संचार करने का प्रयास किया जा रहा है। 

कांकेर जिले के दुधावा जलाशय में स्थित इको लर्निंग सेंटर का संचालन वन प्रबंधन समिति द्वारा किया जाएगा। यह पर्यटन स्थल मुख्यमंत्री की प्रेरणा के गढ़बो नवा कांकेर के रूप में विकसित किया गया है, जहां पर्यटकों के ठहरने, खान-पान के लिए रेस्टोरेंट , एडवेंचर के लिए दो मोटर बोट से शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां पर ट्रेकिंग की व्यवस्था भी की गई है। इस केन्द्र में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस स्थल को इको पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री को केन्द्र के उद्घाटन के अवसर पर वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री देवचंद भास्कर ने बताया कि यहां की सुंदरता को देखकर पर्यटक आकर्षित होंगे। इससे हमें आशा है कि सेंटर खोलने से लोगों को रोजगार मिलेगा। ग्राम पंचायत दुधावा की सरपंच श्रीमती श्याम नेताम ने कहा कि इस क्षेत्र को इतने सुंदर ढ़ंग से विकसित किया है कि ऐसा लगता है कि हम मिनी गोवा आ गए हैं। मुख्यमंत्री को ग्राम पंचायत सुन्ना के  राजेन्द्र यादव ने बताया कि उन्होंने एक लाख 57 हजार रूपए का गोबर बेचकर 85 हजार रूपए की स्कूटी खरीदी है। बचत राशि से वे अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका एक बच्चा कॉलेज में और दूसरा बच्चा कक्षा 9वीं में पढ़ाई कर रहा है। 

दुधावा में आयोजित कार्यक्रम को संसदीय सचिव  शिशुपाल सिंह सोरी और कोडार में संसदीय सचिव  विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, संबंधित क्षेत्र वन प्रबंधन समिति के सदस्य उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री निवास में वर्चुअल आयोजित इस कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  मोहम्मद अकबर, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. रेणु जी. पिल्ले, अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, वन विभाग के प्रमुख सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव  गौरव द्विवेदी, ग्रामोद्योग विभाग की प्रमुख सचिव  मनिन्दर कौर, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  डी.डी. सिंह, वित्त विभाग की सचिव  अलरमेलमंगई डी., कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी)  पी. व्ही. नरसिंह राव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा  व्ही. श्रीनिवास राव सहित अधिकारीगण उपस्थित थे।

 

 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैम्पा के शासी निकाय की द्वितीय बैठक सम्पन्न
दूरस्थ वनांचल के लिए परियोजनाएं तैयार करने ‘‘लिडार’’ तकनीक के उपयोग के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने दी सहमति
जंगली हाथियों द्वारा की गई क्षति पर शीघ्र मुआवजा वितरण के निर्देश
रायपुर /शौर्यपथ/

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने कहा है कि गैर वन क्षेत्रों के साथ-साथ वन क्षेत्रों में भी राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘‘नरवा विकास’’ के अंतर्गत भू-जल संरक्षण के कार्यों का प्राथमिकता से क्रियान्वयन हो। इसके तहत कैम्पा मद से वन क्षेत्रों में किये जाने वाले कार्यों से वनवासियों, आदिवासियों तथा वन क्षेत्रों के आस-पास के ग्रामीणों को रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होता है। 

मुख्यमंत्री  बघेल की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के शासी निकाय की द्वितीय बैठक में उक्त आशय के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  मोहम्मद अकबर, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. रेणु जी. पिल्ले, अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, वन विभाग के प्रमुख सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव  गौरव द्विवेदी, ग्रामोद्योग विभाग की प्रमुख सचिव  मनिन्दर कौर, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  डी.डी. सिंह, वित्त विभाग की सचिव  अलरमेलमंगई डी., कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी)  पी. व्ही. नरसिंह राव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा  व्ही. श्रीनिवास राव सहित अधिकारीगण उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री  बघेल ने बैठक में राज्य में कैम्पा मद की राशि का बेहतर उपयोग कर स्वीकृत सभी कार्यों को तेजी के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। इसके तहत वनों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यप्राणी सुरक्षा और लघु वनोपजों के विकास तथा इनके संरक्षण व संवर्धन के कार्यों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे वनांचल में स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध होगा और उनकी आमदनी में भी वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री  बघेल ने राज्य में जंगली हाथियों द्वारा की गई जनहानि, फसल हानि एवं संपत्ति हानि में तत्परता से कार्यवाही कर मुआवजा का वितरण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। 

बैठक में चर्चा करते हुए राज्य में दूरस्थ वनांचल के लिए परियोजनाएं तैयार करने ‘‘लिडार’’ तकनीक के उपयोग के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने सहमति देते हुए यह प्रस्ताव केन्द्र को भेजने के निर्देश दिए। सामान्यतः वाटर शेड क्षेत्रों के विकास हेतु क्षेत्रीय स्तरों में परम्परागत मैनुअल पद्धति से मानचित्रण कर परियोजनाएं तैयार की जाती हैं जिसमें बहुत सीमित पद्धति से कार्य किया जा सकता है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के जंगलों के सर्वे के लिए अत्याधुनिक रिर्मोट सेंसिंग लिडार तकनीकी का उपयोग बेहतर होगा। इससे वैज्ञानिक पद्धति से मैपिंग का उपयोग कर दूरस्थ तथा सुदूर अंचलों के लिए भी परियोजनाएं तैयार की जा सकती है। लिडार तकनीक से वन क्षेत्रों में वृद्धि, वृक्षों की ऊंचाई और उनका वॉल्यूम, मिट्टी में नमी के संरक्षण की स्थिति, वाटर शेड एनालिसिस, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, खनन गतिविधियों, वन क्षेत्र में अग्नि नियंत्रण, वन्य जीवों की संख्या और उनके मूवमेंट का सटीक आंकलन किया जा सकता है। इससे वन क्षेत्रों के विकास की योजना बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।

 

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