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June 02, 2026
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शौर्यपथ

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राजनांदगांव / शौर्यपथ / संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री नीरज बंसोड़ ने आज राजनांदगांव शहर के अति कोरोना संक्रमित क्षेत्र लखोली और गंज चौक का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। श्री बंसोड़ ने लखोली के कंटेनमेंट जोन में कोरोना के बचाव के लिए प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करने को कहा। उन्होंने इस क्षेत्र के पॉजिटिव मरीजों के प्राथमिक संपर्क में आने वाले लोगों को शासकीय क्वारेंटाईन सेंटर में रखने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए है। श्री बंसोड़ ने आस-पास के सभी लोगों का सेंपल लेकर जांच करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण वाले सभी मरीजों का प्राथमिकता से सेंपल लेकर जांच कराएं। क्षेत्र में साफ-सफाई रखने के विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए।
संचालक श्री बंसोड़ ने कहा कि लखोली के लोगों को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि कोई भी इस क्षेत्र से बाहर न जाएं। सार्वजनिक पेयजल के स्त्रोत में भीड़ न हो इसके लिए क्षेत्रवार अलग-अलग समय निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि पॉजिटिव मरीज वाले कंटेंनमेंट जोन में रोज सुबह और शाम पूरे क्षेत्र को सेनेटाईज कराएं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की सभी मेडिकल दुकानों में रजिस्टर तैयार कराएं, इसमें दवाई लेने वालों और डॉक्टरों की एन्ट्री करें। इससे सर्दी, खांसी, बुखार की दवाईयां लेने वालो को चिन्हांकित किया जा सकेगा। उन्होंने इस क्षेत्र के एटीएम को नियमित सेनेटाईज करने को भी कहा है। उन्होंने कहा कि जिन घरों से पॉजिटिव मरीज आए हैं उनके परिवार के सदस्य घर से बाहर न निकलें, इसकी कड़ी निगरानी रखी जाए। श्री बंसोड़ ने कहा कि जिन जगहों पर पॉजिटिव मरीज मिले हैं उन क्षेत्रों में आने-जाने के लिए एक ही रास्ता रखकर रजिस्टर संधारित करें। जिसमें आने-जाने वाले लोगों के नाम, नंबर, किस कार्य से जा रहे हंै इसकी एन्ट्री की जाए, ताकि ऐसे लोगों के पॉजिटिव आ जाने पर उनकी ट्रेव्हल हिस्ट्री निकाली जा सके। श्री बंसोड़ ने लखोली निवासियों से कहा कि कोरोना से घबराएं नहीं सभी अपने घर पर ही रहें। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बनाए प्रोटोकाल का पालन करंे।
कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि शहर में अधिक संख्या में पॉजिटिव केस आने पर निगम क्षेत्र को कंटेंनमेंट जोन घोषित किया है। केवल आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को ही सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि सभी कोरोना पॉजिटिव का इलाज शासकीय मेडिकल कॉलेज पेण्ड्री में किया जा रहा है। मौके पर पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र शुक्ला, नगर निगम आयुक्त श्री चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम राजनांदगांव श्री मुकेश रावटे सहित स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग की टीम के सदस्य उपस्थित थे।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जमकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमले बोले हैं. सोनिया गांधी ने पार्टी की इस वर्चुअल बैठक में कहा कि देश में अभी जो हालात हैं, वो सब मोदी सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव का कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां रही हैं. केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए सोनिया ने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा सही सलाह सुनने से इनकार करती रही है.
पढ़िए उनके भाषण की प्रमुख बातें-

- सोनिया ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि 'यह कहा जाता है "दुखद घटनाएँ कभी अकेले नहीं आती". भारत एक भयावह आर्थिक संकट, एक भयंकर महामारी और अब चीन के साथ सीमाओं पर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. बीजेपी की अगुवाई वाली NDA सरकार का कुप्रबंधन और गलत नीतियां इन संकटों का मुख्य वजह हैं.

- देश के आर्थिक हालात को लेकर सोनिया ने कहा कि देश में आर्थिक संकट और भी गहरा गया है. मोदी सरकार हर सही सलाह को सुनने से इंकार करती है. वक़्त की मांग है कि बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से मदद, गरीबों के हाथों में सीधे पैसा पहंचाना, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों की रक्षा करना और उनका पोषण करना और व मांग को बढ़ाना व प्रोत्साहित करना चाहिए. इसके बजाय, सरकार ने एक खोखले वित्तीय पैकेज की घोषणा की, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद का 1 प्रतिशत से कम ही राजकोषीय प्रोत्साहन था.

- सोनिया ने लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा, 'वैश्विक बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हों, ऐसे समय में सरकार ने लगातार 17 दिनों तक निर्दयता से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि करके देश के लोगों पर पहले से लगी चोट और उसके दर्द को गहरा किया है. नतीजा यह है कि भारत की गिरती अर्थव्यवस्था 42 वर्षों में पहली बार तेजी से मंदी की ओर फिसल रही है.'

- सोनिया ने कहा कि 'मुझे डर है की बेरोजगारी और बढ़ेगी, देशवासियों की आय कम होगी, मजदूरी गिरेगी व निवेश और कम होगा. रिकवरी में लंबा समय लग सकता है, और वह भी तब, जब सरकार अपनी व्यवस्था को ठीक करे और ठोस आर्थिक नीतियों को अपनाए.'

- सोनिया ने कोविड-19 को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकार को अपना पूरा समर्थन देते हुए लॉकडाउन 1.0 का समर्थन किया लेकिन शुरूआती हफ्तों के भीतर, यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार लॉकडाउन से होने वाली समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए बिलकुल तैयार नहीं थी. जिसके चलते करोड़ों प्रवासी मजदूरों और रोज कमाने-खाने वालों का रोजगार छिन गया. उन्होंने दावा किया कि देश में इस दौरान 13 करोड़ नौकरियों के ख़त्म हो जाने का अनुमान लगाया गया है.

- सोनिया ने केंद्र पर राज्य सरकारों के ऊपर पल्ला झाड़ने लेकिन उन्हें कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के सभी आश्वासनों के उलट महामारी लगातार बढ़ रही है. स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं. वास्तव में, लोगों को यथासंभव अपनी स्वयं की रक्षा करने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. उन्होंने कहा कि महामारी के कुप्रबंधन को मोदी सरकार की सबसे विनाशकारी विफलताओं में से एक के रूप में दर्ज किया जाएगा.

- चीन के साथ तनाव को लेकर सोनिया ने कहा कि सरकार सच्चाई से मुंह मोड़ रही है. उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति को संभालने में गंभीर रूप से असफल हुई है. भविष्य का निर्णय आगे आने वाला समय करेगा लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि हमारी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सरकार परिपक्व कूटनीति व मजबूत नेतृत्व की भावना से कदम उठाएगी. सोनिया ने कहा कि 'हम सरकार से आग्रह करते हैं कि अमन, शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहले जैसी यथास्थिति की बहाली में हमारा राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए.'

 

दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली के गीता कॉलोनी में मंगलवार की सुबह पुलिस और एक बदमाश के बीच भिड़ंत हो गई. मौके पर क्रॉस फायरिंग हुई, जिसके बाद पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने सीबू नाम के बदमाश को गिरफ्तार कर लिया. इस घटना में पुलिस के दो जवान घायल होने से बचे. सीबू ने पुलिस पर चार राउंड फायरिंग की थी. अब वो पुलिस के शिकंजे में है. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सीबू घायल हुआ है.
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह दिल्ली के गीता कॉलोनी इलाके में पुलिस की सीबू के साथ क्रॉस फायरिंग शुरू हुई थी. दरअसल, शाहदरा जिले के स्पेशल स्टाफ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सीबू नाम का बदमाश इलाके में आने वाला है जिसके बाद उसे पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया गया. जब सीबू को पुलिस टीम ने रुकने के लिए कहा गया तो उसने स्पेशल स्टाफ पर 4 राउंड फायरिंग कर दी.

जवाबी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की टीम की तरफ से भी 5 राउंड फायर किए गए जिसमें से एक गोली सीबू के पैर में लगी. गोली लगने के बाद पुलिस ने सीबू को गिरफ्तार कर लिया. सीबू के ऊपर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस के मुताबिक सीबू ने पुलिस पर चार राउंड फायरिंग की, जिसमें से 2 गोली पुलिस के दो जवानों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, लेकिन बुलेट प्रूफ जैकेट की वजह से कोई भी जवान घायल नहीं हुआ है.

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोना वायरस की महामारी के चलते फिल्‍म निर्माण से जुड़ा काम इस समय लगभग ठप पड़ा हुआ है. इस कारण फिल्‍मी सितारे फुर्सत में हैं और घर में ही समय बिता रहे हैं. संजीदा एक्टिंग के कारण अलग पहचान बनाने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी इस समय अपने गृहनगर यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के बुढाना में हैं.लॉकडाउन के दौरान अपने घर आये फ़िल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी खूब पसीना बहा रहे हैं. नवाजुद्दीन इस समय अपने खेत में जमकर मेहनत मशक्‍कत कर रहे हैं. उन्‍होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर खेत में काम करते हुए एक वीडियो शेयर किया है जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. इस वीडियो में नवाजुद्दीन के बगल में फावड़ा नजर आ रहे हैं. खेती का काम करने के बाद वे ट्यूबवेल की नाली में हाथ-पांव धोते भी नजर आ रहे हैं. वीडियो के आखिर में उन्‍हें फावड़ा कंधे पर रखकर जाते हुए देखा जा सकता है. गौरतलब है कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी लॉकडाउन के दौरान मुम्बई से अपने घर बुढाना पहुंचे थे. वे मुजफ्फरनगर जनपद के बुढाना कस्‍बे के निवासी हैं.नवाज़ के इस वीडियो को लेकर उनके परिचितों और प्रशंसकों ने शानदार रिएक्‍शन दिया है.
गौरतलब है कि देश में भारत में कोरोनावायरस के केसों की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है. 23 जून यानी मंगलवार की सुबह तक देश में 24 घंटों के भीतर कोविड-19 के 14,933 नए मामले सामने आए हैं और इसी के साथ संक्रमितों की तादाद 4,40,000 के पार पहुंच गई है. देश में अब तक कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 4,40,215 हो गई है. अब तक 2,48,190 लोग इस वायरस से उबर चुके हैं. वहीं, देश में अब तक 14,011 लोगों की मौत हो गई है. अगर बस पिछले 24 घंटों की बात करें तो देश में 14,933 नए मामले सामने आए हैं, वहीं इन 24 घंटों में 312 लोगों की मौत हुई है. फिलहाल देश में कोरोना का रिकवरी रेट 56.37% चल रहा है.

 

नज़रबंदी के दौरान 23 जून 1953 को कश्मीर में रहस्यमयी परिस्थितियों में हो गई थी उनकी मृत्यु

 शौर्यपथ लेख / आज जिस कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर दिया गया है, जहां सत्ता को त्याग कर राज्यपाल शासन लगाया गया है, एवं वर्तमान में मोदी सरकार उस कश्मीर के अस्तित्व व देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए जिस लड़ाई को आगे बढ़ा रही है, दरअसल इस लड़ाई की शुरुआत भारत के महान सपूत डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान से ही शुरू हो गई थी, जिसने एक देश में दो विधान दो निशान नही चलेगा के संकल्प के साथ कश्मीर में अपने अभियान की शुरुआत तो की पर उनकी गिरफ्तारी के बाद नज़रबंदी के दौरान 23 जून 1953 को कश्मीर में रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।

6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के अत्यन्त प्रतिष्ठित परिवार में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का जन्म हुआ। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे एवं शिक्षाविद् के रूप में विख्यात थे। डॉ. मुखर्जी ने 1917 में मैट्रिक पास किया तथा 1921 में बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। 1923 में लॉ की उपाधि अर्जित करने के पश्चात् वे विदेश चले गये और 1926 में इंग्लैण्ड से बैरिस्टर बनकर स्वदेश लौटे। अपने पिता का अनुसरण करते हुए उन्होंने भी अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ अर्जित कर ली थी। 33 वर्ष की अल्पायु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने। इस पद पर नियुक्ति पाने वाले वे सबसे कम आयु के कुलपति थे। एक विचारक तथा प्रखर शिक्षाविद् के रूप में उनकी उपलब्धि तथा ख्याति निरन्तर आगे बढ़ती गयी।

उनका राजनैतिक जीवन

डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। डॉ.मुखर्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री भी बने। इसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।

मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण दूषित हो रहा था। वहाँ साम्प्रदायिक विभाजन की नौबत आ रही थी। साम्प्रदायिक लोगों को ब्रिटिश सरकार प्रोत्साहित कर रही थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में उन्होंने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया कि बंगाल के हिन्दुओं की उपेक्षा न हो। अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। 1942 में ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न राजनैतिक दलों के छोटे-बड़े सभी नेताओं को जेलों में डाल दिया।

डॉ.मुखर्जी इस धारणा के प्रबल समर्थक थे कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक हैं। इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन के कट्टर विरोधी थे। वे मानते थे कि विभाजन सम्बन्धी उत्पन्न हुई परिस्थिति ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से थी। वे मानते थे कि आधारभूत सत्य यह है कि हम सब एक हैं। हममें कोई अन्तर नहीं है। हम सब एक ही रक्त के हैं। एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है। परन्तु उनके इन विचारों को अन्य राजनैतिक दल के तत्कालीन नेताओं ने गलत तरीके से प्रचारित-प्रसारित किया। बावजूद इसके लोगों के दिलों में उनके प्रति अथाह प्यार और समर्थन बढ़ता गया। अगस्त, 1946 में मुस्लिम लीग ने जंग की राह पकड़ ली और कलकत्ता में भयंकर बर्बरतापूर्वक अमानवीय मारकाट हुई। उस समय कांग्रेस का नेतृत्व सामूहिक रूप से आतंकित था।

भारतीय जनसंघ की स्थापना

ब्रिटिश सरकार की भारत विभाजन की गुप्त योजना और षड्यन्त्र को कांग्रेस के नेताओं ने अखण्ड भारत के अपने वादों को ताक पर रखकर स्वीकार कर लिया। उस समय डॉ.मुखर्जी ने बंगाल और पंजाब के विभाजन की माँग उठाकर प्रस्तावित पाकिस्तान का विभाजन कराया और आधा बंगाल और आधा पंजाब खण्डित भारत के लिए बचा लिया। गान्धी जी और सरदार पटेल के अनुरोध पर वे भारत के पहले मंत्रिमंडल में शामिल हुए। उन्हें उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी। संविधान सभा और प्रान्तीय संसद के सदस्य और केन्द्रीय मंत्री के नाते उन्होंने शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान बना लिया। किन्तु उनके राष्ट्रवादी चिन्तन के चलते अन्य नेताओं से मतभेद बराबर बने रहे। फलत: राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानने के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने एक नई पार्टी बनायी जो उस समय विरोधी पक्ष के रूप में सबसे बड़ा दल था, और ऐसे 21 अक्टूबर 1951 में भारतीय जनसंघ का उद्भव हुआ, तथा अगले ही वर्ष 1952 में हुए लोकसभा चुनावों में भारतीय जनसंघ को तीन संसदीय क्षेत्र में जीत मिली, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी शामिल थे।

कश्मीर के लिए उनका बलिदान

डॉ॰ मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री (वजीरे-आज़म) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी धारा-370 को समाप्त करने के लिए मजबूती से इस बात को रखते थे, कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नही चलेगा।
अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। उन्होंने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। आज भी उनकी मृत्यु के रहस्य से पर्दा नही उठा है, किन्तु आज डॉ. मुखर्जी से वैचारिक समानता रखने वाले भारत में करोड़ों लोग हैं, जिनका मानना है कि कश्मीर इस राष्ट्र का मुकुट है, तथा एक देश में दो विधान दो निशान कल्पना भी नही की जा सकती है। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नए भारत के निर्माताओं में से एक महत्त्वपूर्ण स्तम्भ हैं। जिस प्रकार हैदराबाद को भारत में विलय करने का श्रेय सरदार पटेल को जाता है, ठीक उसी प्रकार बंगाल, पंजाब और कश्मीर के अधिकांश भागों को भारत का अभिन्न अंग बनाये रखने में डॉ. मुखर्जी के योगदान को नकारा नही जा सकता। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी ही नहीं, वह एक महान शिक्षाविद्, देशभक्त, राजनेता, सांसद, अदम्य साहस के धनी और सहृदय मानवतावादी थे। बावन वर्षों से भी कम के जीवनकाल में और उसमें से भी राजनीति में सिर्फ चौदह साल में वे स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुँचे, जिसे उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में हुए अल्पसंख्यक हिंदुओं के नरसंहार के मुद्दे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से गंभीर मतभेद होने पर ठुकरा दिया। इससे पहले वे जिन्ना के पाकिस्तान से छीनकर बनाए गए पश्चिम बंगाल और पूर्वी पंजाब के अस्तित्व में आने के पीछे सक्रिय रहे। कैबिनेट मंत्री के पद को ठुकराने के बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, और आज जनसंघ के बाद बनी भारतीय जनता पार्टी विश्व के सबसे बड़े राजनैतिक दल के रूप में स्थापित हो चुकी है, तथा लगातार दो बार भारतीय जनता पार्टी केंद्र में पूर्ण बहुमत से सरकार भी बना चुकी है, भाजपा के नेता, कार्यकर्ता जिस नारे को बुलंद करते हैं कि “जहां बलिदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है” और वर्तमान में देश ने नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत प्रधानमंत्री दिया है, जिनमें डॉ. मुखर्जी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मजबूत इच्छा शक्ति नज़र भी आती है, एवं वहां के मूल निवासियों को कश्मीर में पुनर्स्थापित करने, कश्मीर की वादियों में शान्ति बहाली के प्रयासों के साथ ही कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर मोदी सरकार ने डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। (  -  विजय जयसिंघानी , रायपुर )

नई दिल्ली / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक थाना, चिकित्सालय, राजस्व न्यायालय एवं तहसील, विकास खण्ड तथा जेल में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना करने के मंगलवार को निर्देश दिये. योगी ने कहा कि हेल्प डेस्क पर कोविड-19 से बचाव सम्बन्धी सावधानियों के पोस्टर लगाए जाएं. कोविड हेल्प डेस्क पर पल्स ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड थर्मामीटर तथा सैनेटाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. चिकित्सीय उपकरणों के संचालन के सम्बन्ध में कोविड हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए. इन कर्मियों को मास्क तथा दस्ताने उपलब्ध कराए जाएं.
मुख्यमंत्री यहां लोक भवन में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में लॉकडाउन हटाने की व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोविड हेल्प डेस्क पर हमेशा एक से दो कर्मी अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें. कोविड हेल्प डेस्क का प्रतिदिन सुबह से शाम तक संचालन किया जाए.

निजी अस्पतालों को भी कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना के लिए प्रेरित किया जाए. उन्होंने स्थापित किए गए कोविड हेल्प डेस्क की सूची उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए. उन्होंने विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को जनपदों में रहकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर करने में सम्बन्धित मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए.

साथ ही कहा कि कोविड-19 आपदा काल में इन अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों का विशेष रूप से मूल्यांकन किया जाएगा. योगी ने कहा कि जांच में लगातार वृद्धि की जाए। निगरानी व्यवस्था को और बेहतर करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए जनपदों में विशेष सचिव स्तर के अधिकारी भेजे जा रहे हैं. सर्विलांस कार्य को सुदृढ़ करने से जांच बढ़ाने में मदद

उन्होंने स्क्रीनिंग कार्य के लिए अविलंब एक लाख से अधिक टीम गठित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि टीम के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की हर सप्ताह नियमित तौर पर जांच की जाए. टीम के सदस्यों को मास्क, दस्ताने एवं सैनेटाइजर उपलब्ध कराया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड चिकित्सालयों में बेड की संख्या बढ़ाने के लिए निरन्तर प्रयास किए जाएं. कोविड तथा गैर कोविड अस्पतालों में प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन करते हुए उपचार किया जाए.

अस्पतालों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। चिकित्सालय में भर्ती मरीजों की नियमित देखरेख की जाए. उन्होंने चिकित्सा कर्मियों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षण दिए जाने पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि रेडियो तथा टेलीविजन के माध्यम से कोविड-19 से बचाव के सम्बन्ध में जागरुकता फैलाने का निरन्तर प्रचार-प्रसार किया जाए.

सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग करते हुए लोगों को मास्क लगाने, शारीरिक दूरी बनाए रखने तथा संक्रमण के लक्षणों आदि के बारे में जागरुक किया जाए। योगी ने निर्देश दिए कि निःशुल्क राशन वितरण का कार्य सुचारु ढंग से कराया जाए.

कोविड-19 से बचाव की समुचित सावधानी बरतते हुए खाद्यान्न वितरित किया जाए. उन्होंने गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि बरसात के मौसम में पशु रोगों के दृष्टिगत गोवंश के स्वास्थ्य के प्रति भी आवश्यक सावधानियां बरती जाएं.

 

मुंबई / शौर्यपथ / चीन के साथ सीमा विवाद पर शिवसेना ने कहा कि पड़ोसी देश को जवाब देने के लिए भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर रहने के बजाय 'आत्मनिर्भर' होना पड़ेगा. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में यह भी कहा गया है कि चीन के साथ कारोबार 20 बहादुर सैनिकों की कुर्बानी का अपमान होगा जो पिछले सप्ताह गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए.
मराठी भाषा के मुखपत्र में कहा गया, 'अगर हम चीन के साथ लड़ना चाहते हैं तो राजनीति कम होनी चाहिए और राष्ट्रीय हित ज्यादा होना चाहिए. इसके लिए हमें राष्ट्रपति ट्रंप की जरूरत नहीं है. हमें 'आत्मनिर्भर' होना पड़ेगा.' सामना में कहा गया, 'चीन के साथ कारोबार करना 20 बहादुर सैनिकों की शहादत का अपमान है.'

शिवसेना ने कहा है कि अगर भारत चीन की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है तो उसे विनिर्माण क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देना होगा. सामना में कहा गया है, 'हमें औद्योगीकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए बड़े कार्यक्रमों की घोषणा करनी होगी. इसके लिए हमें पूंजी के साथ साथ बिजली की जरूरत है. औद्योगीकरण की नींव कृषि विकास है जिसे हमें मजबूत करने की जरूरत है.'

शिवसेना ने कहा कि देश में चीनी निवेश को लेकर क्या किया जाए, इसपर नरेंद्र मोदी सरकार को एक नीति की घोषणा करनी होगी. उद्वव ठाकरे नीत पार्टी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने चीन की तीन कंपनियों के साथ 5,000 करोड़ रुपये मूल्य के एमओयू (समझौता ज्ञापन) अभी रोक दिए हैं. पार्टी ने कहा, 'उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में भी चीनी निवेश हैं. वे उसके साथ क्या करेंगे?'

सामना में कहा गया है कि भारत फार्मास्यूटिकल, रसायन, ऑटोमोबाइल के लिए कच्चे माल और इलेक्ट्रोनिक्स के लिए चीन पर निर्भर है. गलवान घाटी में झड़प के बाद बीएसएनएल और रेलवे ने चीनी कंपनियों के साथ संविदा खत्म कर दिया और महाराष्ट्र ने भी ऑटोमोबाइल क्षेत्र की तीन संविदाओं पर अभी रोक लगा दी है.

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष ) के बाद देश में चीन को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. जगह-जगह चीन के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं और लोगों से चीनी सामान के बहिष्‍कार की अपील की जा रही है. लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल पर चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख के विरोध में नई दिल्‍ली स्थित चीनी दूतावास पर हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओ ने चीन के विरोध में नारेबाजी की और 'हिंदी-चीनी बाय-बाय' का पोस्‍टर चस्‍पा किया.
गौरतलब है कि एलएसी पर चीन के आक्रामक रुख को लेकर पूरे देश के लोगों में रोष है. व्यापारियों के अखिल भारतीय संगठन, कॉन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने चीनी सामान के बायकॉट का आह्वान किया है. संगठन ने अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, महेंद्र सिंह धोनी, और सचिन तेंदुलकर सहित मशहूर हस्तियों से अपील की है कि वे 'भारतीय सामान-हमारा अभिमान' अभियान के तहत चीनी उत्पादों को एंडोर्समेंट बंद करें. सात करोड़ व्यापारियों और 40,000 व्यापार संघों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले CAIT ने वस्तुओं की एक सूची जारी की है जिसके बारे में कहा गया है कि इसका बहिष्कार किया जा सकता है. इस अभियान के एक हिस्से के रूप में यह संगठन न सिर्फ व्यापारियों को चीनी सामान नहीं बेचने के लिए प्रेरित करेगा बल्कि उपभोक्ताओं से स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह करेगा. भारत के प्रति चीन के दुश्मनी का लगातार रवैये और कटुता को लेकर CAIT ने मशहूर हस्तियों को 'ओपन लेटर' लिखा है.

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. झड़प में चीनी पक्ष के करीब 45 सैनिकों के मारे जाने या बुरी तरह से घायल होने की खबर सामने आई थी. जानकारी के अनुसार, लद्दाख में हिंसक झड़प उस समय शुरू हुई थी जब भारतीय सैनिक सीमा के भारत की तरफ चीनी सैनिकों द्वारा लगाए गए टेंट को हटाने गए थे. चीन ने 6 जून को दोनों पक्षों के लेफ्टिनेंट जनरल-रैंक के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद इस टेंट को हटाने पर सहमति जताई थी.

 

दूध से बनने वाला दही हर तरह से गुणकारी है, क्योंकि इसमें ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाव करते हैं। दही खाने में जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्य और सौंदर्य की दृष्टि से लाभकारी भी है। अधिकतर मरीजों को डाइटीशियन भी दही खाने की सलाह देते हैं, ताकि वो जल्दी से ठीक हो जाएं। यह अजीब है कि दूध से बनने वाला दही दूध से भी ज्यादा गुणकारी है। इसका कारण है कि दूध में अधिक मात्रा में फैट होता है, जिसकी अधिकता शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत दही में फैट बहुत कम होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद है।


सेहत /शौर्यपथ / दही मे पाए जाने वाले पोषक तत्व

दही में सबसे ज्यादा मात्रा में कैलोरी पाई जाती है, इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन-डी, कैल्शियम होता है और फास्फोरस, लेक्टोज और आयरन तत्व भी शामिल होते हैं। दही खाने से कई तरह की शारीरिक परेशानियां ठीक हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि दही से कैसे शारीरिक समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है -

पाचन शक्ति मजबूत करने के लिए

दही खाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है और पेट से संबंधित समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडीटी आदि ठीक होती हैं। लिवर, किडनी और अल्सर की समस्या से ग्रसित लोगों को रोज ताजा दही खाना चाहिए, इससे उन्हें फायदा होगा।

दिल की बीमारियां ठीक करने के लिए

आजकल लोग जंक फूड खाने के आदि हो गए हैं और खानपान भी अनियमित हो गया है। अधिक वसायुक्त भोजन खाने से लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल में असंतुलन जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। दिल के मरीजों के लिए दही काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें फैट कम होता है और यह कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर के लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है।

हड्डियों की परेशानियों को दूर करने के लिए

दही में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों के लिए भी काफी लाभकारी है। दांत के लिए भी कैल्शियम जरूरी होता है। ऐसे में दही का सेवन शरीर का ढांचागत मजबूती देता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

दही में लेक्टबेसिलस बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो शरीर के कीटाणुओं से लड़ने में सहायक होते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसलिए दही का सेवन रोज करना चाहिए।

वजन कम करने के लिए

दही खाने से वजन भी कम किया जा सकता है क्योंकि दही खाने से पेट में खाने की पूर्ति हो जाती है और अधिक समय तक भूख भी नहीं लगती है। दही शरीर की वसा को कम करने में सहायक होता है और इससे प्रोटीन विटामिन्स भी मिल जाते हैं। व्यायाम करने के साथ ही रोज दही खाने से वजन कम किया जा सकता है।

त्वचा में निखार लाने के लिए

दही खाने से त्वचा में भी निखार आता है और धूप से जली हुई त्वचा भी ठीक होती है। दही का इस्तेमाल न सिर्फ खाने के लिए किया जाता है, बल्कि इसका उपयोग त्वचा को निखारने के लिए फैसपैक के रूप में भी किया जाता है। इससे मुंहासे और चेहरे के दाग धब्बे भी दूर होते हैं। दही में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा की कोशिकाओं को संगठित करने में मदद करता है और टॉक्सिन को दूर करने में मदद करता है।

 

सेहत / शौर्यपथ / सब्जी विक्रेताओं से शहर के करीब एक दर्जन से अधिक लोग कोविड-19 संक्रमित हो चुके हैं लोगों को चिंता सताने लगी है कि कहीं सब्जी के माध्यम से कोरोना वायरस घरों में नहीं घुस रहा है। इसे लेकर लोग कई तरह की सावधानियां भी बरत रहें हैं

वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डरने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। सब्जी मंडी में कोविड-19 का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सेक्टर-16 और डबुआ सब्जी मंडी को शनिवार से चार दिनों के लिए बंद करने का नर्णिय लिया है। यहां से करीब 8 से 10 सब्जी विक्रेता और आढ़ती इसकी चपेट में आ चुके हैं।

ऐसे में बाजार से सब्जी खरीदने को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि आखिर सब्जियों को खरीदें कैसे? कोविड-19 संक्रमण के दौरान सब्जियों को खरीदने का सही तरीका क्या है? खुद को कोरोना से कैसे बचाए। वहीं, आहार रोग विशेषज्ञ शिल्पा ठाकुर कई गुर बता रही हैं।

सब्जी विक्रेताओं से कोविड-19 संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान डबुआ सब्जी मंडी, एनआईटी-एक, मुजेसर और सेक्टर 16 सब्जी मंडी से करीब 12 लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। अब सब्जी के माध्यम से घर में घुसने वाले कोराना वायरस का डर सताने लगा है। एनआईटी पांच स्थित सुषमा नागर का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के डर से घर से निकलना तो बंद हो गयाा। खाने पर कैसे अंकुश लगाया जा सकता है।

फल और सब्जियों को धोने के खास तरीके

सब्जियों और फलों को 10 मिनटपानी में भिगो कर छोड़ दे, उसके बाद धो लें
फूलगोभी, पालक, बंदगोभी को दो प्रतिशत नमक वाले गर्म पानी से धोएं
सब्जियों को पानी से धोने के बाद सिरका या नींबू वाले पानी से धोएं तो बेहतर
छिलका सहित खाने वाले फलों को एक घंटे तक पानी में भिगोएं
अगर सब्जियां अच्छी हैं तो उन्हें कुछ देर धूप में भी रख सकते हैं
सब्जी को एक दिन बाद बनाने का प्रयास करें
सब्जी धोने से पहले और सब्जी धोने के बाद हाथों को साबुन से धोएं
क्या खाएं, क्या नहीं खाएं?

पौष्टिक आहार की मात्रा अधिक लें
मसालेदार खाना,तेल कम प्रयोग करें
खाने में सलाद का सेवन करें
फलों के नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
ड्राईफ्रूट्स का इस्तेमाल करें और खाने में दालों का उपयोग करें
''कोरोना वायरस से घबराने की नहीं, सावधानियां बरतने की जरूरत है। सब्जियों से वायरस नहीं आता, भीड़ में मौजूद संक्रमित व्यक्ति से ही कोरोना वायरस का संक्रमण आपके घर में आता है। सब्जियों को कपड़े के थैले में लाएंष सब्जी को बाहर निकालकर उसे अच्छी तरह धो लें। वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए आपको संतुलित आहार की जरूरत है।''

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