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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रयास आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं में और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा की तिथियों में संशोधन किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए परीक्षा 14 जुलाई को सुबह 10.30 से 1.00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा संशोधित तिथि के अनुसार 16 जुलाई को प्रातः 10.30 से 12.30 बजे तक आयोजित होगी। 
    राज्य शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के सहायक आयुक्तों को प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि प्रयास आवसीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए पूर्व में चयन परीक्षा 24 जून को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 26 जून को होनी थी। इन परीक्षाओं की तिथियों में संशोधन किया गया है। अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 14 जुलाई को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।  

   रायपुर / शौर्यपथ /  खाद्य एवं संस्कृति मंत्री  अमरजीत भगत ने आज सीतापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत धरमपुर में वन विभाग के उच्च तकनीक रोपणी का शिलान्यास किया। वन विभाग द्वारा धरमपुर में करीब 5 हेक्टेयर क्षेत्र में कैम्पा योजना के तहत उन्नत तकनीक रोपणी विकसित किया जाएगा। पौधों की रोपणी उन्नत तकनीक से होगी जिससे पौधे स्वस्थ एवं उन्नत होंगे। इस मौक पर मंत्री भगत ने कहा कि जीवन के लिए पेड़ और जंगलों का होना बहुत जरुरी है। पेड़ से हमें जीवन दायनी ऑक्सीजन मिलती है। ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए अब शहरों में ऑक्सीजोन बनाकर पेड़ों को सहेजने का काम किया जा रहा है। गांव में अभी ऐसी स्थिति नही आई है। लेकिन जंगलों को नही बचाएंगे तो यहां भी स्थित बिगड़ सकती है इसलिये जंगलों को बचाएं और अधिक से अधिक पेड़ लगाएं।
    मंत्री ने मैनपाट जनपद पंचायत परिसर में वृक्षारोपण किया। उन्होंने 5 नवीन ग्राम पंचायतों में नवीन भवन का शिलान्यास एवं 64 लोगों को स्वेच्छानुदान राशि का चेक वितरित किया। इसी प्रकार बतौली विकासखंड में 2 नवीन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण के लिए भूमिपूजन किया तथा 67 हितग्राहियों को स्वेच्छानुदान राशि का चेक वितरित किया। साथ ही सीतापुर जनपद के 132 लोगों को स्वेच्छानुदान का चेक प्रदान किया। इस मौके पर मैनपाट जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला खेस, मुख्य वन संरक्षक श्री एबी मिंज, डी एफओ,एस डीएम सहित अन्य अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित थे।
 

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन गंभीर रूप से कुपोषित नौनिहालों की सेहत में तेजी से सुधार का जरिया बन रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्रों में डॉक्टरों की बेहतर देखभाल और पोषक आहार से वे न केवल सुपोषित हो रहे हैं, बल्कि उनका शारीरिक-मानसिक विकास भी अच्छे से हो रहा है। दुर्ग जिले के विकासखंड मुख्यालय पाटन स्थित एन.आर.सी. ने भी एक माता-पिता के अरमानों को पंख दे दिए हैं।

गुढ़ियारी गांव के ईश्वर और ममता अपने आठ माह के बेटे गौरीशंकर की सेहत को लेकर काफी चिंतित थे। कुपोषण ने उन्हें अपने बेटे को बैठते, क्रॉल करते और चलते हुए देखने से वंचित कर रखा था। गौरीशंकर आठ महीने के बच्चे की तरह न तो बैठ पाता था और न ही क्रॉल कर पाता था। जैसे-जैसे वह बड़ा हो रहा था मां-बाप की चिंता भी बढ़ रही थी क्योंकि वह काफी सुस्त रहने लगा था। ऐसे में मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन ने उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई। गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नजर गौरीशंकर पर पड़ी तो वह उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गई। डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि उसका वजन काफी कम है और वह गंभीर रूप से कुपोषित है। डॉक्टरों ने तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्र पाटन में भर्ती करने की सलाह दी।

पाटन के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा बताते हैं कि गौरीशंकर 4 जून को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती हुआ। उसे बेहतर पोषण की ज़रूरत तो थी, पर साथ ही एक और गंभीर समस्या थी। वह बैठ नहीं पाता था, पलट भी नहीं पाता था। इसलिए उसके लिए एक विशेष दिनचर्या तैयार की गई जिसमें पोषण आहार के साथ फिजियोथेरेपी और व्यायाम भी शामिल था। एन.आर.सी. की पूरी टीम ने इसे एक मिशन के रूप में लिया। फिजियोथेरिपिस्ट डॉ. लीना चुरेन्द्र की फिजियोथेरिपी और व्यायाम से गौरीशंकर को काफी मदद मिली। केंद्र के स्टॉफ ने उसके पोषण और मेडिकेशन का पूरा ख्याल रखा।

डॉ. शर्मा आगे बताते हैं कि 4 जून को जब गौरीशंकर को लाया गया तब उसका वजन 4.65 किलोग्राम था। लगातार देखभाल से उसका वजन बढ़ने लगा और 21 जून को जब उसका वज़न किया गया तो वह 5.800 किलोग्राम का हो गया था। जो बच्चा बैठ नहीं पाता था वह आज बैठने लगा और सहारा देने पर खड़ा भी होने लगा। कुपोषण का स्तर भी कम हुआ है। अब वह गंभीर कुपोषित से मध्यम कुपोषित में आ गया है। हम उसे सामान्य की श्रेणी में लाने की कोशिश कर रहे हैं। डिस्चार्ज होने के बाद भी उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।

बेटे को स्वस्थ होता देख माँ को भी मिली राहत

गौरीशंकर की माँ ममता बताती है कि आज अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर बहुत खुशी होती है। जब वो बैठ नहीं पाता था तो उसके पिता और मैं दिन-रात उसकी ही चिंता में लगे रहते थे। हमारी आर्थिक स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं थी कि इलाज करा पाते। लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्र में सारा इंतज़ाम निःशुल्क हो गया। ममता ने बताया कि यहाँ पूरी टीम ने उसके बच्चे की अच्छी तरह देखभाल की। यहां माँ और बच्चे दोनों के रहने की व्यवस्था है। केंद्र में तीन बार के भोजन और स्वस्थ दिनचर्या के बारे में बताया जाता है। डिस्चार्ज होने के बाद घर में क्या सावधानी रखनी है, खान-पान कैसा होना चाहिए यह भी बताया जाता है। ममता पोषण पुनर्वास केंद्र के डॉक्टरों और स्टॉफ का आभार व्यक्त करते हुए कहती है कि मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन से उनके बेटे को नया जीवन मिला है।

दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा पशुपालकों (डेयरी संचालको) को गोकुल धाम पुलगांव स्थान्तरित किये जाने का प्रयास चल रहा है . डेयरी संचालको के मन में शंशय है कि अगर वो स्थानांतरित हो गए तो गोकुल नगर की समस्याओ से दोचार होना पड़ेगा और बरसाती मौसम्मे ये लगभग असंभव सा दिख रहा है कई संचालक जान तो चाहते है किन्तु पशुपालकों द्वारा गंभीर समस्या यह कि गोकुल धाम में व्यवस्था कुछ भी नही ,निगम के द्वारा बोला जाता है जानवरो के लिए पूरी व्यवस्था है, लेकिन जमीनी स्तर में कुछ भी व्यवस्था नही की गई गोकुल धाम में .
गोकुल धाम में न तो सडक है और न ही नाली ऊपर से डेयरी संचालको से शपथ पत्र भरवाया जा रहा है की साफ सफाई व जानवरो को खुला न छोड़े, गोकुलधाम में रायपुर राजनादगांव के तर्ज मे न टीनसेड तैयार करके दिया जा रहा है और ना ही पक्का मार्ग व्यवस्था के नाम पर सिर्फ पानी की व्यवस्था किये जाने से जानवरो की सेवा नही किया जा सकता , अगर डेयरी व्यथापन करते है बारिश काल के समय व्यवस्था जरूरी है .
दुर्ग शहर में लगभग 300 के आस पास डेयरी है गोकुलधाम सिर्फ 80 डेयरी की जगह है
गोकुलधाम में कुल 80 डेयरी संचालको के लिए जगह है किन्तु शहर में लगभग 300 डेयरी है ऐसे में अगर सभी 80 संचालक चले भी गए तो जानवरो के तालाब की व्यवस्था की गई है लेकिन छोटा है
जानवरो के लिए चारागाह नही है गोकुलधाम से लगे जगहों में सब्जी फल की बाडी है , गोकुलधाम डेयरी के लिए बनाया गया लेकिन वहाँ कुछ बिल्डिंग ठेकेदार रह रहे है और अपने बिल्डिंग में काम आने वाले वाहन खड़े किये है वही जानवरो को रखने के लिए किसी भी प्रकार से जमीन समतल नही है वहाँ गड्ढे कीचर की भरमार है,साथ ही गोबर फेकने के लिए भी जगह नही है .डेयरी व्यथापन करे तो साथ मे परिवार को रखना पड़ेगा जिसके लिए किसी भी प्रकार व्यवस्था है और न ही जानवरो के सुरक्षा है .
ऐसे अनेक कारण है अभी कुछ महीनों कॅरोना वायरस से व्यवसाय में बहुत हानि उठाना पड़ा है एकाएक व्यथापन और वहां पहुचकर व्यवस्थित कर पाना मुश्किल है पूर्व में कुछ डेयरी वहां व्यथापन की गई है लेकिन व्यवस्था से परेसान है, पूर्व में पशुपालक का जानवर गलती से बाडी में चरने घुस गई उसे बाडी संचालक के द्वारा पशु के पीछे लड़की घुसा दिया गया था, पूर्व में शहर के कुत्तों को वहां छोड़ दिया गया था कुछ जानवरो को नुकसान भी पहुचा ऐसे हालात में डेयरी व्यथापन कैसे करे साथ मे परिवार को पालना मुश्किल होगा बहुत से डेयरी को 10 दिन में व्यथापन किये जाने की नोटिस निगम द्वारा भेजा गया है साथ ही साफ सफाई के लिए 10000/- की चालान काटा गया है , डेयरी संचालन के मुश्किल बढ़ती जा रही है . क्या प्रशासन कोई सार्थक कदम उठाएगा जिससे शहर भी साफ़ सुथरा रहे और गोकुल नगर में डेयरी सञ्चालन भी सुचारू रूप से चले

दुर्ग / शौर्यपथ / लंगूरवीर मंदिर समिति के सदस्य मानव सोनकर ने रविवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि मंदिर के जीर्णोंद्वार के बाद लंगूरवीर मंदिर का स्वरूप बदला है। 23 जून को भव्य गुंबदों में शिखर कलश चढ़ेगा। कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करवाने मंदिर परिसर व प्रांगण में गोले बनाए जाएंगे। गौरतलब है कि शहर के शनिचरी बाजार स्थित प्रसिद्ध लंगूरवीर मंदिर अब जीर्णोंद्वार के बाद अपने नए स्वरूप में आ गया है। मंदिर के भव्य गुंंबद में शिखर कलश चढ़ावा का कार्य ही शेष रह गया है। लंगूरवीर मंदिर समिति द्वारा दो दिवसीय शिखर कलश चढ़ावा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसकी शुरूआत 22 जून को पूजा अर्चना के साथ शुरू हो गई।

नजरिया /शौर्यपथ /भारत सात बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का अस्थाई सदस्य रह चुका है। अब उसके सामने अपने आठवें कार्यकाल को खास बनाने की चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के रूप में 2012 में अपना सातवां कार्यकाल पूरा करने के तत्काल बाद भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए अपना अभियान शुरू कर दिया था। इस दिशा में सार्वजनिक रूप से साल 2013 में पहला ठोस कदम उठाया गया था, जब अफगानिस्तान ने भारत के पक्ष में सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्यता के लिए अपना दावा करने की योजना से कदम पीछे खींच लिए थे। तब संयुक्त राष्ट्र में एशिया प्रशांत समूह के अन्य 54 सदस्य देशों में से कोई देश भारत को चुनौती देने के लिए आगे नहीं आया था। वह पाकिस्तान भी नहीं, जिसने सुरक्षा परिषद में भारत के चुनाव का स्वागत करने से इनकार कर दिया था।
इस बार 2019 में भी एशिया-प्रशांत देशों के समूह ने सर्वसम्मति से भारत को अपने उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले सप्ताह भारत को 192 वोटों में से 184 के साथ जोरदार जीत हासिल हुई। अस्थाई सदस्यता की राह में किसी देश ने भारत का विरोध नहीं किया। यह एक ऐसी मुश्किल जीत है, जो कई सुखद संयोगों से मिली है। 1 जनवरी, 2021 से शुरू होने वाला भारत का दो साल का कार्यकाल अपने अंतिम वर्ष में देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ और पहली बार दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के साथ सामने आएगा। अब सवाल उठता है, सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए प्रचार के साथ इस पूरे कार्य या पैकेज को कैसे अंजाम दिया जाए? क्या भारत इस बार फिर स्थाई सदस्यता के लिए जोर लगाने को ठीक से तैयार है?
बेशक, भारत ने 2011 से शुरू हुए अपने सातवें कार्यकाल का उपयोग न केवल स्थाई सदस्यता के अपने दावे को चमकाने के लिए, बल्कि इसे मुमकिन बनाने के लिए भी किया था। कुछ भारतीय विशेषज्ञों ने इसे स्थाई सदस्यता के लिए पूर्वाभ्यास भी कहा था। तब भारत ने कोशिश की, हालांकि उसकी कोशिशों का कोई तात्कालिक नतीजा नहीं निकला था, पर भारत इस मामले या मांग को आगे बढ़ाने में जरूर कामयाब हुआ था। सरकारों के बीच वार्ता, जिसे इंटर गवर्नमेंट निगोशिएशन (आईजीएन) भी कहते हैं, आगे बढ़ी थी और साल 2015 में पाठ (या लिखत-पढ़त) आधारित वार्ताओं तक पहुंच गई थी।
भारत ने 1 जनवरी से अपना आठवां कार्यकाल शुरू करने की योजना बनाई है। इसी इरादे से एक नए व्यापक विचार के तहत बहुपक्षीय तंत्र बनाने को प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। यह अपनी स्थाई सदस्यता के लिए पूरे पैकेज के तहत फिर कोशिश करने का एक और तरीका है। साथ ही, अन्य प्राथमिकताएं भी हैं, जैसे आतंकवाद के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमोदन व्यवस्था का गैर-राजनीतिकरण करना, लेकिन कुल मिलाकर, भारत के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उचित ही शीर्ष पर है। ठीक इसी समय भारत अपनी अस्थाई सदस्यता का उपयोग इस तरह करे, ताकि पता चले कि इसकी क्या सार्थकता है और क्या नहीं है। सुरक्षा परिषद में किसी फैसले पर ‘हां’ या ‘नहीं’ वोट करना एक अनुपस्थित वोट के आत्म-औचित्य की तुलना में कहीं अधिक दम और चरित्र रखता है।
सुरक्षा परिषद के किसी भी स्थाई सदस्य के साथ गुट न बनाना एक खूबी हो सकती है। स्थाई सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के साथ गुट नहीं बनाते हुए दशकों तक गुटनिरपेक्षता से बंधे रहना उस वक्त भारत के लिए ठीक रहा था। अब भारत सहज आधार पर अपना एक स्टैंड ले और इसके साथ ही किसी स्थाई सदस्य देश के साथ मुखर-पक्षधरता को आजमाए, तो इसके बड़े रणनीतिक फायदे मुमकिन हैं।
235 ई, 43वीं स्ट्रीट, न्यूयॉर्क सिटी, इसी इमारत में साल 1993 से भारत का स्थाई आयोग मौजूद है। मैनहट्टन के पड़ोस में यह इमारत सिर्फ इसलिए नहीं खड़ी है, क्योंकि यह सबसे ऊंची है, बल्कि यह दिवंगत आर्किटेक्ट चाल्र्स कोरिया की साहसिक और मुखर वास्तु-कला के अपने चरित्र के कारण भी शोभायमान है। यह समय है, जब हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैसे ही भाव-स्वभाव के साथ पेश आएं। यशवंत राज, अमेरिका में हिन्दुस्तान टाइम्स संवाददाता

 

दुर्ग / शौर्यपथ / नवदृष्टि फाउंडेशन के आव्हान पर दुर्ग जिला चिकित्सालय ब्लड बैंक में 31 लोगों स्वैच्छिक रक्तदान कर फादर्स डे को यादगार बनाया गया। 51 वर्षीय शत्रुंजय तिवारी मास्टर डोनर रहे, जीवन ताम्रकार, रवि लक्खा, अमित कुमार पण्डे, सुधीर पंडित, खोमेश्वर साहू, गजपाल साहू, डी राज सहित अन्य लोगों ने इस अवसर पर रक्तदान किया।
नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया इस दौरान ब्लड बैंक में मौजूद रहे। उन्होंने रक्तदान करने वालों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण होने के कारण बहुत से लोग रक्तदान करने नहीं पहुंचे लेकिन 31 लोगों ने रक्तदान कर उदाहरण पेश किया है, जो प्रशंसनीय है। दुर्ग ब्लड बैंक के को ऑर्डिनेटर त्रिपेश शर्मा ब्लड बैंक की ओर से जिज्ञासा, आशा साहू, नेमा चंद्राकर, महेंद्र चंद्राकर, मधुसूदन, कीर्तन ने रक्तदान प्रक्रिया में सहयोग किया।

दुर्ग / शौर्यपथ / गरीब कल्याण रोजगार अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य से एक भी जिले को शामिल न करने पर केंद्र सरकार पर कांग्रेस शासित राज्यों की जनता के साथ अन्याय कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट से निबटने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेकर कुशल प्रबंधन से सर्वहारा वर्ग के लिए काम किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता और सरकार के जनहितैषी काम केंद्र को रास नहीं आ रहे हैं। इसी कारण राज्य की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उक्त बातें दुर्ग शहर विधायक अरूण वोरा ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के निम्न आय वर्ग के लोगों के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुकी है। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य को किसी तरह का आर्थिक पैकेज नहीं दिया।
जीएसटी से राज्य का हिस्सा समय पर जारी हो रहा है। बीपीएल परिवार पक्के मकानों की आस में अपना मकान तोड़ बैठे हैं। प्रधानमंत्री आवास की राशि भी केंद्र सरकार ने रोक दी है। छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संकट के दौरान 5 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई है,जिनके सामने रोजगार का संकट है। राज्य सरकार अपने स्तर पर मनरेगा व खेती के लिए उत्साह का माहौल पैदा करते हुए लोगों को इस कठिन समय में भी रोजगार उपलब्ध करा रही है।
अरुण वोरा ने कहा कि रोज कमाने रोज खाने वालों के लिए पर्याप्त मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराना तात्कालिक आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के भाजपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि यह समय दलीय राजनीति करने का समय नहीं है। पूरे प्रदेश के भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री से राज्य के सभी जिलों को गरीब कल्याण योजना में शामिल करने व राज्य को आर्थिक पैकेज देने की मांग करना चाहिए।

दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई, क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पशुपालकों से रोका-छेका संकल्प अभियान के तहत 513 पशु मालिकों से संकल्प पत्र भराया गया। शासन के निर्देश के परिपालन में निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने निगम के अधिकारी/कर्मचारियों की नियुक्ति इस कार्य के लिए की है, इसके लिए नोडल अधिकारी सहित टीम का गठन किया जा चुका है। रोका-छेका संकल्प अभियान के तहत पशु मालिकों को अपने मवेशी की सुरक्षा स्वंय करने, पालतू मवेशियों को अपने स्थान पर रखकर चारा, पानी की समुचित व्यवस्था करने, शहर की सड़कों में आवारा घूमने के लिए नहीं छोडऩे, आसपास के खेतों में फसलों तथा उद्यानों में पालतू मवेशियों का प्रवेश रोकने स्वयं व्यवस्था करने, सामूहिक व्यवस्था में सहभागिता निभाने, पशुपालन से उत्सर्जित होने वाले अपशिष्ट के लिए कंपोस्टिंग के लिए स्वयं व्यवस्था करने के लिए भिलाई निगम क्षेत्र में संकल्प पत्र भराया जा रहा है।
सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की हो रही है धरपकड़ निगम क्षेत्र में सड़क किनारे घुमने वाले आवारा पशुओं की धरपकड़ विगत दो-तीन दिनों से की जा रही है निगम का अमला सड़क पर घुमने वालें 32 पशुओं को अब तक पकड़ चुके हैं। जोन 02 के एआरओ संजय वर्मा व जोन 04 के एआरओ बालकृष्ण नायडू ने बताया कि निगम क्षेत्र में आवारा घुमने वाले पशुओं को खुर्सीपार, तेलहा नाला, नेहरू नगर, मॉडल टाउन चैक क्षेत्र में घुमते हुए पाए जाने पर पकड़ा गया है।
भिलाई की सड़कों पर पालतू मवेशियों के घूमते हुए पाए जाने पर पशु पालकों पर होगी कार्यवाही उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने बताया कि सड़कों पर यूं ही घूमने वाले आवारा मवेशी पाए जाने पर पशु मालिकों पर भी नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा गौधन को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशु जो यातायात में बाधक बन कर दुर्घटना का कारण बनते हैं जिससे होने वाली दुर्घटना में पशुधन एवं जनधन की हानि होती है। निगम की अपील है कि इससे बचने के लिए पशुपालक अपने पालतू मवेशियों को सड़कों पर आवारा घूमने न दें।
513 पशु मालिकों से भराया जा चुका है संकल्प पत्र निगम के सभी जोन कार्यालयों की टीम 19 जून से शासन के आदेश के पालन में रोका छेका अभियान के तहत पशु पालकों से संकल्प पत्र भरवा रहे है। संकल्प पत्र अभियान में जोन कं. 01 में 113 पशु मालिक, जोन 02 में 122 पशु मालिक, जोन 03 में 79 पशु मालिक, जोन 04 में 176 पशु मालिक, जोन 05 में 23 पशु मालिक से संकल्प पत्र भरवाया जा चुका है।

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / चीन के साथ सीमा पर विगत 45 वर्षों से जिस उदारता को भारत निभाता चला आ रहा था, उसमें अब बदलाव जितना स्वाभाविक है, उतना ही स्वागतयोग्य भी। सीमा पर जरूरत पड़ने पर हथियार प्रयोग को जो मंजूरी मिली है, वह चीन की ही साजिशों का नतीजा है। आम तौर पर वह परोक्ष रूप से हमें घेरता आ रहा था, लेकिन अब जब उसने प्रत्यक्ष रूप से भारतीय उदारता की भारी कीमत वसूल ली है, तब भारत के रक्षा मंत्री के नेतृत्व में जरूरत पड़ने पर सेना को हथियार प्रयोग की छूट कतई गलत नहीं है। अब जब सीमा पर जरूरत पड़ी, तो बंदूकों का इस्तेमाल करने के लिए सेना को दिल्ली से पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सेना के कमांडर ही तत्काल फैसला ले सकेंगे। सबसे बड़ी बात कि यह फैसला तीनों सेनाओं के प्रमुखों की भागीदारी में हुआ है। सेना में ही नहीं, बल्कि देश में भी यह भावना रही है कि सेना के हाथ न बांधे जाएं, क्योंकि इससे दुश्मनों का मनोबल बढ़ता है।
हम अपने पड़ोसियों को ऐसे आश्वस्त क्यों करते रहे हैं कि हम उनका अहित नहीं करेंगे? यह नीति अच्छे दिनों के लिए तो ठीक है, जब सीमा विस्तार का इरादा किसी के मन में नहीं हो, लेकिन जब चीन खुलेआम भारतीय जमीन पर दावे करता है, तब ऐसे किसी समझौते या उदार व्यवहार को ताक पर रख देना ही बेहतर है। भारत ने चीन की किसी भूमि पर दावा नहीं किया है। चीन के सीमा विस्तार के खिलाफ भारत में उठने वाली आवाजों को खामोश ही रखा गया है। हम पड़ोसी धर्म निभाते रहे हैं, लेकिन चीन क्या कर रहा है, यह दुनिया को भी पता चलना चाहिए। हमारी सरकार को भी अपनी माटी की रक्षा के लिए साहस का परिचय देना चाहिए। भारत ने अपनी सैन्य-नीति में जो ताजा बदलाव किए हैं, वह कायम रहने चाहिए। जब चीन हमें निश्चिंत नहीं देखना चाहता, तब हम उसे क्यों बैठे-बिठाए आश्वस्त रखें?
घाटी-दर-घाटी लाठी-डंडों से धकियाते हुए सीमा में बदलाव का मौका उसे अब नहीं देना चाहिए। भारत के पास जो अपना प्रामाणिक कागजी नक्शा है, उसे जमीनी नक्शे से पुख्ता तौर पर मिला लेना चाहिए और देश को भी बताना चाहिए कि हमारी माटी कहां तक है। कम से कम यह तो बताया ही जा सकता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा कहां है? वास्तविक नियंत्रण रेखा का आदर करने के लिए चीन को विवश करना चाहिए और साथ ही, हमेशा के लिए सीमा विवाद को सुलझाने की पहल शुरू हो जानी चाहिए। ध्यान रहे, रूस ने जब कड़ाई का परिचय दिया, तभी चीन ने उसके साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाया। चीन-रूस के बीच 4,209 किलोमीटर लंबी सीमा का जब समाधान निकल सकता है, तो चीन-भारत की 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा का निपटारा कैसे नहीं हो सकता? सीमा विवाद का निपटारा हमेशा के लिए इसलिए भी जरूरी है, ताकि छोटे-छोटे घाव या विवाद की गुंजाइश न रहे। चीन अगर भारत के साथ तार्किक सीमा समाधान नहीं चाहता है, तो यह भी भारत-चीन के लोगों के साथ ही दुनिया को भी पता होना चाहिए। किसी की मंशा बुरी है, तो उसे उजागर करने में ही भारत की भलाई है। और एक बार जब मंशा स्पष्ट हो जाए, तो भारत को चीन के प्रति अपनी सामरिक नीति ही नहीं, बल्कि अपनी समग्र नीति का निर्धारण करना चाहिए।

 

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